Wednesday, 24 May 2023

जिला रोहतक गाम हसनगढ़ घणी


जिला रोहतक गाम हसनगढ़ घणी

तबाही होगी रै।।

पुलिस बदमाशां की यारी बीज बिघण के बोगी रै।।

1

बचावण लागरया जुल्मी नै राजतंत्र  जमा उघाड़ा होग्या

मज़दूरां की बेटियां गेल्यां भाइयो कसूत पवाडा होग्या

चौड़े के म्हं लाठातंत्र का देखो हिम्माती  राज लुंगाड़ा होग्या

मानवता खड़ी पुकारै हमनै कहै किसा यो कबाड़ा होग्या

ठाडा मारै रोवण दे नहीं क्यों पड़कै नै जनता सोगी रै।।

2

बीरां गेल्याँ हसनगढ़ मैं हुया दिन धौली बलात्कार सै

मंत्री उनका हिम्माती होग्या आंधा यो राज दरबार सै

लोगां नै बी आंख मीच ली ना सुणती उनकी हाहाकार सै

म्हारी माँ बेटी नहीं बचै आड़ै पहोंचग्या अत्याचार सै

दड़ मारें पड़े भाई क्यों गलत सही की ताकत खोगी रै।।

3

एक द्रोपदी चीर हरण पै महाभारत की जंग हुई आड़ै

हजारां द्रोपदी लूटी जावैं या पुलिस भी बेरंग हुई आड़ै

हसनगढ़ गाम की आज महिला जमाने मैं तंग हुई आड़ै

अमीराँ की करतूत देखकै या जनता हुई ढंग आड़ै

गलत सही की लड़ाई नै या जात पात जमा ल्हकोगी रै।।

4

म्हारे घर भी उजडै़ंगे हम देखैं फेर लाचार खड़े रै

कोये ना छुडावण आवै जै लूँगाड़े घरां आण बड़े रै

ना हसनगढ़ माफ करैगा हम नहीं जै आज लड़े रै

क्यों आत्मा म्हारी मरली हम घर मैं दुबके पड़े रै

पढ़ पढ़ अखबारां मैं आत्मा रणबीर की भी रोगी रै।।

KISSA FAUJI MEHAR SINGH - GAYAK PALE RAM किस्सा कवी फौजी मेहर सिंह : गाय...

नर्सिज पर एक रागनी

 

पांच छह नर्सें मिलकर एक समूह गान गाती हैं।


तर्ज– झूठी शरम की चादर फैंको


टेक– बिना संगठन इब नहीं गुजारा हो जाओं तैयार सखी।।


शोषण क्यों होता है म्हारा करना सही विचार सखी।।


मरीजों का आज नहीं होता सही सही इलाज यहाँ


मरीज चिल्लाते रहते हैं ना सुणता कोए आवाज यहाँ


उदारीकरण के  मन्दिर में इब बलि चढ़ा परिवार सखी।।


स्वास्थय की गलत नीति सैं समझणा बहुत जरूरी हे


बजट घट्या क्यूं आज हमारा के  उनकी मजबूरी हे


बिकती सेहत दिखावैं सबको आज बीच बाजार सखी।।


महिलाओं का हरियाणे में क्यूं होता सही सम्मान नहीं


नर्सों की गिरती हालत पै किसे का भी ध्यान नहीं


सुन्दर समाज का लेवैफ सपना सम्भालों पतवार सखी।।


तेहरा शोषण खतम करै जो इसा समाज बणाणा हे


सही जगां मिलै मानवता को इसा संघर्ष चलाणा हे


हो सै शोषण खतम करण का संगठन ही हथियार सखी।।

आज हम देखें औरत की सही तस्वीर सखी


आज हम देखें औरत की जो सही तस्वीर सखी।। 

दिया समाज ने जो हमें उसको कहती तकदीर सखी।। 

घर में खटना पड़ता मर्दों की नजर में मोल नहीं औरत भी समझे इसे किस्मत लगा सकी तोल नहीं 

करती हम मखौल नहीं हमारी हालत है गंभीर सखी।।

घर खेत में काम करें जुताई और बुवाई करती बहना 

चारा पानी झोटा बुग्गी दिन और रात मरती बहना 

बैठी आहें भरती बहना समझें किस्मत की लकीर सखी।।

कैसा सलूक करते हमसे मालिक बंधवा का व्यवहार यहां 

खाना दोयम कपड़ा दोयम मिले सारा दोयम संसार यहां 

करोड़ों महिला बीमार यहां इलाज की नहीं तदबीर सखी।।

अहम फैंसले बिना हमारे मरद बैठ कर क्यों करते देखो 

जुल्म ढाते भारी हम पर नहीं किसी से डरते देखो 

हम नहीं विचार करते देखो तोडे़ं कैसे यह जंजीर सखी ।।

खुद चुपचाप सहती जाती मानें कुदरत का खेल इसको 

सदियों से सहती आई समझें राम का मेल इसको 

क्यों रही हो झेल ईसको मसला बहोत गम्भीर सखी।।

सदियों से होता ही आया पर किया मुकाबला है हमने 

सिर धड़की बाजी लगा नया रास्ता अब चुना है हमने 

जो सपना बुना है हमने होगा पूरा लिखे रणबीर सखी।।

Wednesday, 26 April 2023

जंतर मंतर के ऊपर धरणे 

 

जंतर मंतर के ऊपर धरणे पर बैठे देखो खिलाड़ी

प्रैस के स्याहमी उणनै सांसद की करतूत उघाड़ी

1

सांसद बृज भूषण नै करी काली करतूत बताई 

एफ आई आर दर्ज हो मिलकै नै आवाज उठाई

सरकार नहीं करी सुनाई इनै बंद करली किवाड़ी

2

सहज सहज कुश्ती अखाड़ा मजबूत होता आवै 

जनता का साथ उनका सरकार कै सांस चढ़ावै

विनेश रो रो कै बतावै यो सांसद पाया सै कबाड़ी

3

ढाल ढाल तैं शोषण करया सांसद अत्याचारी नै

बहोत घणी दुखी करी ये इस माणस बदकारी नै

इसके ढांचे सरकारी नै हालात और घणी बिगाड़ी

4

बहोत नेता और संगठन हिम्मात मैं इनकी आये 

हम पहलवानों की साथ कैहकै नै हौंसले बढ़ाये

रणबीर भी कलम घिसाये सुनकै इनकी चिंघाड़ी

धमकी कितनी ए देल्यो

 

धमकी कितनी ए देल्यो थारी कोण्या पार बसावै

म्हारी एकता तोड़ण की चाल सफल ना हो पावै

1

महिला पुरुष खिलाड़ी ये म्हारे देश की शान देखो

अपने उत्पीड़न करकै हुए बहोत ये परेशान देखो

ओलंपिक विजेता म्हारा मान सांसद क्यों सतावै

2

इणनै झेलनी पड़ती देखो मुश्किल बहोत तमाम 

दुनिया मैं जीत मैडल किया ऊंचा देश का नाम

चैन नहीं कभी सुबोशाम तंगी में भी कदम बढ़ावै

3

महिला खिलाड़ी की राही और मुश्किल बताई है

यौन शोषण की तलवार मचाती बहुत तबाही है

नहीं होती फेर सुनाई है किसको दुखड़ा ये बतावै

4

कितै संदीप सिंह मंत्री कितै बृज भूषण हर सतारे

कितै सुनाई कोण्या होरी जंतर मंतर पै धरना लारे

फुटपाथ पै रात बितारे रणबीर सिंह साथ निभावै

Saturday, 15 April 2023

दास्ताँ मजदूर की 


दास्ताँ मजदूर की 

राजी खुसी की मत बूझै ,बंद कर दे जिक्र चलाना हे |

दिन तै पहल्यां रोट बांध कै ,पडै चौंक मैं जाणा  हे |

देखूं बाट बटेऊ ज्यूं , कोए इसा आदमी आज्या 

मनै काम पै ले चालै , ज्या बाज चून का बाजा 

नस नस म्हं खुशी  होवै , जे काम रोज का ठ्याज्या

इसे हाल म्हं मनै बता दे , कौनसा राजी पाज्या  

नहीं दवाई नहीं पढ़ाई , नहीं मिलै टेम पै खाना हे |

देखे ज्याँ सूँ मैं बाट काम की , सदा नहीं मिलता  हे 

एक महीने म्हं कई बार तो ,ना मेरा चूल्हा जलता हे  

बच्चयाँ कानी देख देख कै , मेरा कालजा हिलता हे 

रहै आधा भूखा पेट सदा , न्यूं ना चेहरा खिलता हे 

तीस बरस की बूढ़ी दिखूँ मैं , पड़ग्या फीका बाना हे |

कदे कदे तो हालत बेबे , इस तै भी बदतर होज्या 

दूध बिना मेरे बालक , काली चा पी कै सोज्याँ  

नहीं आवती नींद रात भर , चैन मेरा कति खोज्या

यो सिस्टम का जुल्म मेरी , ज्याँ के झगडे झौज्या

रिश्तेदार घरां आज्यं तो,पद्ज्य सै शरमाना हे |

खाली डिब्बे पड़े घरां , ना एक जून का सामाँ  हे 

निठल्ले लोग लूट लूट कै , कठ्ठा कर रे नामां हे 

वाहे रोज पहर कै जावै , पाट्या पूत  पजामां हे 

"रामफल सिंह" चक्कर खावै, मुश्किल गात थामाँ  हे 

म नै हकीकत पेश करी यो , मत ना समझो गाना हे |

ना टोहया पावै भ्रष्टाचारी

 

पहले कोई चीज  विचार के स्तर पर सामने आती है फिर मूर्त रूप लेती है |

सारा   पुराना   भी  सही  नही  होता  और  सारा  नया  भी  गलत   नहीं  होता  .

 मग़र  दिशा  क्या  है  विकास  की -- जन   विरोधी  या  जनोनमुखी   यह  

जानना  बहुत  जरूरी  है  आज  के   विकास  के  बारे  में | 

टेक.......ये मर्द बड़े बेदर्द बड़े

ना टोह्या पा वै भ्रष्टाचारी औ दिन कद आवैगा 

ना दुखी करै बेरोजगारी औ दिन कद आवैगा 

रोटी कपडा किताब कापी नहीं घाट दिखाई देंगे 

चेहरे की त्योरी मिटज्याँ सब ठाठ दिखाई देंगे 

काम करने के घंटे पूरे फेर ये आठ दिखाई देंगे  

म्हारे बालक बी बणे हुए मुल्की लाट दिखाई देंगे 

कूकै कोयल बागों मैं प्यारी औ दिन कद आवैगा ||

दूध दही का खाना हो बालकां नै मौज रहैगी 

छोरी माँ बापां नै फेर कति नहीं बोझ रहैगी 

तांगा तुलसी नहीं रहै दिवाली सी रोज रहैगी 

बढ़िया ब्योहर हो ज्यागा ना सिर पै फ़ौज रहैगी 

ना होवै औरत नै लाचारी औ दिन कद आवैगा|| 

सुल्फा चरस फ़ीम का ना कोए अमली पावै 

माणस डांगर नहीं रहै नहीं कोए जंगली पावै 

पीस्सा ईमान नहीं रहै ना कोए नकली पावै 

दान दहेज़ करकै नै दुःख ना कोए बबली पावै 

होवैं बराबर नर और नारी औ दिन कद आवैगा ||

माणस के गल नै माणस नहीं कदे बी काटैगा 

गाम बरोना रणबीर का असली सुर नै छाँटैगा 

लिख कै बात सबकी सबके दुःख नै बांटैगा 

वोह पापी होगा जो आज इसा बनने तैं नाटैगा 

राड़  खत्म हो म्हारी थारी औ दिन कद आवैगा ||

एक फौजी की फौजण 

 

एक फौजी की फौजण 

महिलाओं की व्यथा किस तरह से बयां करती है भला:

दिन काटे चाहूं सूं मैं सुख तैं कोन्या कटण देवैं।।

कुछ भी ना कहती मैं फेर भी कोन्या टिकण देवैं।।

1

झाड़ झाड़ बैरी होगे आज हम बरगी बीरां के

मोह माया तैं दूर पड़ी फेर दिल डिगे फकीरां के

बदमाश इनकी लकीरां के शासक ना पिटण देवैं।।

अच्छाई के बोए बीज ये कति कोन्या पकण देवैं ।।

कइ बै जी करै फांसी खाल्यूं इनकै अकल लागै

सहेली बोली बात मान मेरी मतना प्राण त्यागै 

कसक कति ना जागै ये पोल कोन्या पटण देवैं।।

हम कितनी ए रोलयां ये दुख कोण्या हटण देवैं।।

3

बताओ पिया के करूं मैं इनपै गीत बनादे नै

द्रोपदी चीर हरण गाओ म्हारे हरण पै गादे नै

बना रागनी सुणा दे नै हम तेज कोन्या घटण देवैं।।

म्हारी जिंदगी के इनको दबान कोन्या बटण देवैं।।

गाम कै गोरे खड़े पावैं भैंस के म्हा कै तान्ने मारैं

इंसानियत जमा भूलगे भोंं किसे की इज्जत तारैं

बिना बात के ये खंगारैं सांस कोन्या लेवण देवैं।।

रणबीर बरगे म्हारी ये इज्जत कोन्या लुटण देवैं।।

बेरोजगार पना 

 

आज के दौर को कम्पीटीसन का दौर बताया जा रहा है और इसके लिए कोई भी कीमत जायज है। हम दौड़ रहे हैं और दौड़े जा रहे हैं पैसे के पीछे और पैसा हमें एक अंधी गली में धकेल रहा है जिसका बाहर निकलने का रास्ता बन्द है। क्या बताया भला-


बेरोजगार पना सारै छाग्या रै,दुनिया मैं पीस्सा कहर ढाग्या रै

युवा इसकी बहका मैं आग्या रै, झूठ होतै लिखकै लगाम दियो।।

इस पीस्से की ताकत नै कई सरकार पढ़ण बिठाई

देषां के कानून रोंद कै नै अपनी मन ानी चलवाई

पीस्सा अपना रुतबा बणाग्या रै,यो दिन धौली मैं लूट मचाग्या रै

इनसानियत जमा ए भुलाग्या रै, झूठ होतै लिखकै लगाम दियो।।

हर चीज की बोली लादी नहीं छोडया कितै ईमान देखो

औरत एक चीज बणाई करया चौड़े मैं अपमान देखो

काले धन नै काला रास्ता भाग्या रै,पीस्सा बड़े बड़यां नै घुमाग्या रै

अमीर और अमीर बणाग्या रै, झूठ होतै लिखकै लगाम दियो।।

घोटाले पै घोटाले होण लगे कारपोरेट की लूट मची

दोनूं हाथां लूटो कमेरे नै नीतियों की इसी छूट रची

तकनीक मैं उधम मचाग्या रै,दुनिया नै आज खिंडाग्या रै

मानवता नै भाईयो बिठाग्या रै, झूठ होतै लिखकै लगाम दियो।।

थेगली लायें बात बणै ना पीस्से कै लगाम लगानी होगी

मनवता के कब्जे मैं देखो तकनीक हटकै ल्याणी होगी

रणबीर बी कलम घिसाग्या रै, आज सारी खोलकै नै बताग्या रै

पीस्से की लूटके भेद गिणाग्या रे, झूठ होतै लिखकै लगाम दियो।।

मुंह मेरे पै एसिड फैंक्या

 

मुंह मेरे पै एसिड फैंक्या सुनियो आप बीती सुणाउं मैं।।

चेहरा कति विकृत होग्या खोल कै किसनै दिखाउं मैं।।

यो हादसा हुया साथ मेरी दो हजार पांच में देखो

गरीब घर की बेटी सूं मैं तपी संकट की आंच मैं देखो

खूब घूमी उन दिनां मैं कचहरी की तरफ लखाउं मैं।।

इसे बीच मैं मेरे पिता जी म्हारे तैं नाता तोड़ गये

मां रोवै बैठ अकेली बंद कमरे मैं कैसे समझाउं मैं।।

भाई कै टी बी होरी देखो मां उसका इलाज करावै कैसै

आमदनी का कोए साधन ना घर का खर्च चलावै कैसै

आंटी म्हारा खर्च औटरी  उसका कैसे कर्ज चुकाउं मैं।

सात आपरेषन हो लिए मनै हार कति मानी कोन्या

हमदरदों नै मदद करी आंटी का कोए सानी कोन्या

अपने पाहयां खड़ी होकै मिषाल नई दुनिया मैं रचाउं मैं।।

उम्र कैद होनी चाहिये सै दस साल की सजा ना काफी सै

दस साल की काट सजा वो तो आकै उल्टा रचावै षादी सै

चेहरे की बदहाली होरी मेरी यो कैसे घरबार बसाउं मैं।।

तेजाब की खुली बिक्री रोकै या अरदास मेरी समाज तैं

म्हारे बरगी महिलावां की या फरमास मेरी समाज तैं

इसी पीड़ितां नै मिलै नौकरी रणबीर यो कानून चाहूं मैं।।

किस्सा सफदर हाशमी

 किस्सा सफदर हाशमी

*****1

निचोड़ हो लिया

सफ़दर जी की हत्या से निचोड़  हो लिया।।

हुया  हड्खाया राजवर्ग यो तोड़ हो लिया।।

1

एक जनवरी साल नवासी मोटा चाला होग्या

हुया हमला सफ़दर ऊपर घायल कुढाला होग्या

हमलावर खुद राज करनीये खुल्ला पाला होग्या 

सफ़दर के नाटक का ढंग योतै  निराला होग्या  

यो राजनीती और हत्या का गठजोड़ हो लिया ।।

2

चारों कूट मैं शोक फैलग्या कूकी दुनिया सारी 

गाँव गाँव और शहर शहर मैं  दुखी हुए नर नारी    

पैरिस लन्दन रोम के अन्दर सदमा था बड़ा भरी

कलाकार था जग मैं नामी थी संस्कृति प्यारी 

यो सरकारी चिलत्तर का भन्दा फोड़ हो लिया ।।

3

सफ़दर हाश्मी डस लिया सर्प राज का काला है

अभिव्यक्ति की आजादी का इब तक यो टाला है

राजवर्ग की भाषा बोलो वर्ना मुंह पर  ताला है

साच पर से जो पर्दा ठावै उसी ज्यान का गाला है

राजवर्ग सारी जगह का दीखे एक औड हो लिया ।।

4

जल्दी संभलो रचना कारो कला पर यो हमला है

जन पक्ष की कला हमारी ना बिल्कुल ये अबला है  

रोंदना चाहते हो तुम  जैसे करता हाथी पगला है

हबीब भारती विचार करों  क्या कदम हमारा अगला है

वर्ग लुटेरा हत्यारा यो एक ठयोड़  हो लिया ।। 


******2

भारी दिल से साथी सारे हो नतमस्तक करैं प्रणाम।।

सभी श्रद्धा के फूल चढ़ावैं सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।।

1)

सारे मिलकर कसम उठाएं जन जन तक ले जाएं पैगाम 

जो काम ये रहा अधूरा हम इसे पूरा देंगे सर अंजाम 

कभी ना देखें सुबह शाम सफदर हाशमी तुम्हें सलाम। 

2)

चलें उस पर जो राह तेरी ना करना बिल्कुल आराम 

सच्चाई का बिगुल बजावें कांप उठेंगे ये चारों धाम 

हो बदमाशों की नींद हराम सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।

3

भरोसा है हम सबको सहादत जावे ना ये नाकाम 

सारी जनता पुकार उठी  है गुंडागर्दी को कसो लगाम

इंसानियत ना करो बदनाम सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।

4

जाकर सभी अलख जगायें ठीक गलत का यह संग्राम 

जनता जब सुर में बोलेगी नहीं रहें फिर दूर मुकाम 

गूंजता रहेगा तुम्हारा नाम सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।

5

सॉरी जनता अब जागेगी अभिव्यक्ति ना रहे गुलाम 

बोवे पेड़ बबूल का तो कहां से उगेंगे खेत में आम 

मुनाफाखोर ये बड़ा छद्दाम सफदर हाशमी तुझे सलाम।

6

हल्ला बोल को हम ले जाएंगे हर शहर और हर गाम रणबीर सिंह कैसे भूले शब्द तेरी कला तेरा कलाम 

साथी मरा नहीं गुमनाम सफदर हाशमी तमे तुम्हें सलाम।

******3

मौत सफदर की दिन धौली घंटी कानों के म्हां बजा गई।

बात कहण का हक सै म्हारा निशान सवालिया लगा गई।

1

तीन मुँही नागिन काली सी या गुंडागर्दी फण ठावै सै 

एक फण पै गुंडा बैठकै चाकू छुरी पिस्तौल चलावै सै 

दूजे फण पै पुलिस बैठकै गुंडयां का साथ निभावै सै 

तीजे फण पै शासक बैठकै पूरा ए प्रपंच यो रचावै सै 

मेरा रोम-रोम कर्णावै सै चोट छाती के भीतर समा गई ।

2

अपनी ज्यान की परवाह की ना दूज्यां की जान बचाई सै 

हिर फ़िर दीखै सफदर उसनै ज्यान की बाजी लाई सै

दरवाजे पै अड़या अंगद बणकै सीने मैं लाठी खाई सै

कलाकार था पक्का सुणले कला मैं ज्यान खपाई सै

चिता जली जब थारी हाशमी आग मन के म्हां लगा गई।

3

माला हाशमी नै मशाल उठाई साहिबाबाद फेर पहुंच गई 

वाहे जागां नाटक वोहे लेकै दरबारे जनता मैं पहुंच गई

शेरनी बरगा जिगरा लेरी दीखै फर्ज निभावण पहुंच गई 

बोल जमूरे हल्ला बोल बस्ती मैं दिखावण पहोंच गई

माला तेरी फोटो अखबारां मैं हुक दिल के म्हां उठा गई।

4

शरीर तेरे नै बेशक हमतैं अपना नाता तोड़ लिया सै 

कला तेरी तेरे कलाम तैं हमनै नाता जोड़ लिया गुंडागर्दी की राजनीति तैं मनै तो मूंह मोड़ लिया सै

समझण आले नै रणबीर काफी बता यो निचोड़ दिया सै

गुंडा गर्दी के खिलाफ मौत फिजां भारत के म्हां बणा गई 

5.1.1989

****4

जनतंत्र का असली चेहरा आंख्यां के स्याहमी आग्या।

इस की बुराई करनिया नै यो जमा जान तै खाग्या।

1

मेरा मन होया उदास सफदर हाशमी साथी खास 

कोण्या देखी जावै लाश रंज गात मैं छाग्या।

2

मनै पाट्या कोण्या तोल कौन करै इतनी रोल दिन धोली गुंडा टोल उड़ै क्युकर गोली चलाग्या।

3

गुंडे पुलिज़ यार हुए, मजदूरों पर वार हुए  ऊपर मालिक असली सवार हुए सफदर असली बात बताग्या।

लूटैं डाकू चोर लुटेरे दिखावै नुक्कड़ असली चेहरे, म्हारे घालै बैरी घेरे सफदर घेरा तोड़ बगाग्या। 


*****5

तेरी कला के मोल का गुंडागर्दी के ढोल का आज तोड़ खुलासा होग्या रै।।

1

तेरी मौत की खबर सुनी मेरै बाकी रही कोण्या जनतंत्र का चेहरा साहमी मनै दिखाई देरया आज मोटा रास्सा होग्या रै।।

2

तेरी मौत हुए पाछे बेरा लाग्या कद और काठी का

पीठ तनै कति दिखाई कोण्या सीने मैं घा लाठी का 

मौत तैं बढ़कै असूल रहे सबके होठां पै झूल रहे उनका उलटा पाशा होग्या रै।

3

मेरी नजरां के म्हां मोल बढ़ग्या तेरे ईमान का एक दिन विचार तेरा चेहरा बदळै हिंदुस्तान का बैरी दुखी खासा होग्या रै।

4

ब्रेख्त के लवै पहुंच गया दुनिया रुक्के मारै 

बैरी संग महलां के म्हां रणबीर आज बिचारै 

नुक्कड़ तेरा प्यासा होग्या रै । 


********6

इबारत पढ़ली माला नै चेहरे के ऊपर लिखी हुई। 

तसवीर बैरी की देखी आंख्यां कै म्हां खींची 

हुई। 

1

पूरा साथ निभावण की कसम वो अपनी तोड़ चल्या 

माला पूरा करिए वो काम जो मैं अधूरा छोड़ चल्या 

कैहगी मुंह मैं मोड़ चल्या बिपता के म्हं फंसी 

हुई। 

2

हाशमी की आंख्यां मैं पूरा भरत देश दिया दिखाई

पंजाब का भंगड़ा लँगड़ा क्यों भाई का दुश्मन भाई

कितै लुटै भरतो भरपाई मुट्ठी हाशमी की भिंची हुई।

3

माला की हद छाती सै जो इतना सदमा ओट 

गई

आंसू पीगी वा हटकै जीगी छिपा अपनी चोट 

गई

साहिबाबाद उल्टी लौट गई हलचल उड़ै मची 

हुई।

4

बिना सफदर माला नै नाटक वोहे फेर खेल दिया था

उड़ै आतंक गुंडागर्दी का रणबीर कर फेल दिया था

इतना बता गेल दिया था याद दिल के म्हां बसी हुई।

7

सारे भारत मैं जाग हुई थारी मौत बनगी चिंगारी।। 

कला सड़कों पै आ उतरी करी लड़ने की तैयारी।।

1

भारत पाकिस्तान साथ मैं घणे देश तैयार हुए

कवि सम्मेलन साथ मैं नाटक कई हजार हुए

दुखी राजदरबार हुए माला हाशमी अलख जगारी।।

2

मोटे राम खेल्या नाटक दिल्ली मैं मशहूर हुया

थारी कला का प्रेमी यो दिल्ली का मजदूर हुया

क्यों हत्यारा मगरूर हुया ना कोये बात बिचारी।।

3

नाटक टीवी लिखना पढ़ना सब क्याहें मैं आगै था

नुक्कड़ नाटक इसा दिखावै जो देखै वोहे जागै था

दुश्मन नैं डर लागै था क्यों थारी कलम पुकारी।।

4

म्हारा काफिला बढ़ता जागा दुश्मन हत्यारे दंग होंगे

पैदा होवैं हज़ारों सफदर आड़े आर पार के जंग होंगे

रणबीर सिंह न्यारे ढंग होंगे या दिल्ली आज बतारी।।

8*****

दो जनवरी सफदर हाशमी याद तनै संसार करै।।

आंसू गेरै शबाना आजमी नाटक माला त्यार करै।।

1

थारी कुर्बानी रंग ल्याई नुक्कड़ मंडली त्यार हुई

कला जो थांमनै सिखाई थी दुश्मन से दो चार हुई

माला हाशमी पतवार हुई या समुंद्र गैहरा पार करै।।

2

सहमत नै मंगोल पुरी मैं जनोत्सव साछी मनाया रै

जो सपना देख्या  सफदर नै साकार वही बनाया रै

आम आदमी सिखाया रै नुक्कड़ सही हथियार जरै।।

3

फिरकापरस्ती नै देश पै अपना घेरा डाल दिया देखो

माणस का बैरी माणस धर्म का फेरा घाल दिया देखो

गाना बना फिलहाल दिया देखो कलम या होशियार करै।।

4

हिन्दू मुस्लिम लड़ा दिए अपना मतलब काढण नै

सफदर नै खेल दिखाया फिरते सिर नै चांडण नै

रणबीर सिंह नै डांटण नै दुखी म्हारी सरकार फिरै।।



******9

वार्ता:

14.12.90 को सफदर हाशमी को याद करते हुए एक रागनी लिखी---

समाज की खातर कुर्बान हुए वे आज तलक तो मरे नहीं ।।

कुर्बान देश पर होने वाले कदे कभी किसी से डरे नहीं ।।

1

सफ़दर की हांसी हवा मैं आज भी न्योंये गूँज रही

चारों धाम था मच्या तहलका हो दुनिया मैं बूझ रही 

बैरी को नहीं सूझ रही पिछले गढ़े इब्बऐ भरे नहीं ।।

2

मीडिया मैं जगहां बनाई विडीयो बढ़िया त्यार करी थी

खिलती कलियाँ के महां बात सही हर बार करी थी 

जवानी उसकी हुनकर भरी थी गलत काम कदे करे नहीं ।।

3

जितने जीया सफ़दर साथी जीया जमा जी भर कै नै 

था लेखक बढ़िया अदाकार नुकड़ रच्या कोशिश कर कै नै 

निभाया वायदा मर कै नै जुल्मों से सफ़दर डरे नहीं ।।

4

एक सफ़दर नै राह दिखाई हजारों सफ़दर आगे आवैंगे 

माला हाश्मी बनी सै चिंगारी घर घर मैं अलख जगावैंगे 

हम फिरकापरस्ती तैं टकरावैंगे रणबीर के कलम जरे नहीं ।।

*****10

साथी सफदर हाशमी अब जनवादी आंदोलन का एक जबरदस्त प्रतीक बन गया है।

सलाम सफ़दर को सलाम । उनके बारे एक रागनी के माध्यम से कुछ कहने का प्रयास---

सफदर हाशमी गूँजै आज भी कानां मैं पैगाम थारा।।।

पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।

1

बाजार व्यवस्था माणस खाणी खत्म करी चाही थी

नाटक खेल्या साहिबाबाद मैं ज्यान की बाजी लाई थी

चश्मयां आला हंसता चेहरा मन मैं घूमै तमाम थारा।।

पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।

2

मफलर घाल गले मैं नुकड़ नाटक खेल्या थामनै था

कांग्रेस के गुंडयां का वार छाती पै झेल्या थामनै था 

मारकै बी कड़ै मार सके वे अमर होग्या नाम थारा।।

पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।

3

सारी बात लिखदयूं थारी नहीं ताकत कलम मेरी मैं

हम हरियाणे के कलाकार करां रोशनी रात अंधेरी मैं

मनुवाद हटकै करया चाहवै हिंदुस्तान गुलाम म्हारा।।

पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।

4

दिल की एक एक धड़कन मैं पूरा अहसास थारा यो

थारा मजमून याद पूरा दिल नहीं सै कति खारा यो

रणबीर सिंह इंकलाबी थामनै सफदर सलाम म्हारा।।

पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।


Tuesday, 21 March 2023

दुनिया की वित्त पूंजी नै कसूता अंधेर मचाया।।*

 *दुनिया की वित्त पूंजी नै कसूता अंधेर मचाया।।*

*सारे देशों मैं घुसगी मेहनतकश लूट कै खाया।।*

1

जोंक बनकै लहू चूसै आज कारपोरेट साहूकार

कदेतैं हुक्म बजाती आयी सै केंद्र की सरकार 

देश भक्त जो असली उनको बताते आज गद्दार

नकली देश भक्त आज बनगे देश के   पहरेदार

*राष्ट्रभक्ति के नाम पै तो अंध विश्वास फैलाया।।*

सारे देशों मैं घुसगी मेहनतकश लूट कै खाया।।

2

कोटे परमट आले भेड़िए आज बनें सैं हितकारी

मजदूर किसान लूट लिए सबकी अक्कल मारी

मीठी मीठी बात करें पर भीतर तैं पूरे अत्याचारी

बकरी भेड़ समझैं हमनै आज के ये न्याकारी

*कारपोरेट और वित्तपूंजी नै देश मैं धुम्मा ठाया।।*

सारे देशों मैं घुसगी मेहनतकश लूट कै खाया।।

3

रिश्वतखोर मगरमच्छ पूरे हिन्दुस्तान मैं छागे

मजदूर किसान की कमाई चूट चूट कै नै खागे

अरबों के बने मालिक औधे घणे चौखे पागे

किसानी संकट के चलते ये किसान फांसी लागे

*नये नये जुमले छोड़ कै यो हिन्दुस्तान भकाया।।*

सारे देशों मैं घुसगी मेहनतकश लूट कै खाया।।

4

तीन मुंही नाग जहरी एकफन पै बड़ा व्यापारी

दूजे फन पै बैठी मारै भ्रष्टाचार की या थानेदारी

तीजे फन पै पूंजीपति करता कसूती मारा मारी

तीनों मिलकै देखो ये लूट घणी मचारे अत्याचारी

*रणबीर सिंह नै यो टूटया फुटया छन्द बनाया।।*

सारे देशों मैं घुसगी मेहनतकश लूट कै खाया।।

Monday, 20 March 2023

जन स्वास्थ्य अभियान कहै एक अभियान चलावैं रै।

 जन स्वास्थ्य अभियान कहै एक अभियान चलावैं रै।

ताजा खाणा पीणा ताजी हवा तैं सेहत बणावैं रै।।

कुदरत साथ संघर्ष म्हारा बहोत पुराणा कहते रै

यो तनाव जब घणा होवै कहैं बीमार घणे रहते रै

बिना कुदरत नै समझैं माणस दुख हजारां सहते रै

इसतै मेल मिलाप होज्या तै सुख के झरने बहते रै

जिब दोहण करैं कुढ़ाला तो उड़ै रोगै पैर जमावैं रै।।

सिन्धु घाटी की जनता नै सेहत के नियम बनाये थे

चौड़ी गाल ढकी नाली ये घर हवादार चिनाये थे

पीवण खातर बणा बावड़ी न्यारे जोहड़ खुदवाये थे

जितनी समझ थी उनकी रल मिल पूरे जोर लगाये थे

जिब पैदावार के ढंग बदलैं बीमारी बी पल्टा खावैं रै।।

माणस मैं लालच बधग्या, कुदरत से खिलवाड़ किया

,बिना सोचें समझें कुदरत का सन्तुलन बिगाड़ दिया

लालची नै बिना काम करें बिठा ऐश का जुगाड़ लिया

माणस माणस मैं भेद होग्या रिवाज न्यारा लिकाड़ लिया

समाज के अमीर गरीब मैं क्यों न्यारी बीमारी पावै रै।।

साफ पाणी खाणा और हवा रोक सकैं अस्सी बीमारी

ना इनका सही बंटवारा सै मनै टोहली दुनिया सारी

जिस धोरै ये चीज थोड़ी सैं उड़ै होवै बीमारी भारी

होयां पाछै इलाज सै म्हंगा न्यू माणस की श्यामत आरी

रणबीर सिंह नै छन्द बनाया मिलकै सारे गावैं रै।।


-

Friday, 17 March 2023

ना असली बात पिछाणी रै।।

 पिट पिट कै सबक ना सीख्या ना असली बात पिछाणी रै।।

किसान जै नहीं जाग्या तो पड़ैगी घणी मुसीबत ठाणी रै।।

1)

हरियाणे मैं दो काम हुए हरित क्रांति जब तैं आई सै

साधन आला तै खूब चढ़ाया चेहरे पै खूबै लाली छाई सै

सारे कै सुनी जावै इसकी दुख सुख की आज कहाणी रै।।

2)

बिना साधन आला फेफड़ दिया या महंगाई नै रेल बनाई रै

बेकरी बधी सुल्फा दारु गाभरू चढ़ाए उल्टी राही रै

कुछ पुलिस अफसर अर मंत्री बदमशां का भरते पाणी रै।।

3)

मेहनतकस की माँगां तैं दखे इनका कोये सरोकार नहीं

लावै पूंछ पंजाबी लोकल की इसतैं भूंडी कोये कार नहीं

भूख सतावै चौबीस घंटे या जनता फिरै कति उभाणी रै।।

4)

मारे जां हरियाणे मैं रणबीर जो रहे हम खबरदार नहीं

सांझे संघर्ष बिना हार मानै लूट का बैरी दरबार नहीं

गरीब का कोये मददगार नहीं होंती आवै कुन्बा घाणी रै।।


Thursday, 9 March 2023

खून

 रमलू--थाम रोज चुकंदर खाया करो।

धमलो--क्यों?

रमलू--इसके खाने तैं खून शुद्ध, लाल अर गाढ़ा होज्या सै।

धमलो--अच्छा इब थाम खून भी हाई क्वालिटी का पीओगे?

भिखारी

 पहला भिखारी--एक आदमी मेरे तैं बूझै था अक मैं कितना अक कमा लयूं सूँ? पर मैं कुछ नहीं बोल्या बस चुप रहया।

दूसरा भिखारी-- इसा क्यों करया?

पहला भिखारी--मनै शक था अक कदे वो इन्कम टैक्स आला ना हो!

समझदार बीरबानी 

 रमलू-- मनै समझदार बीरबानी तैं ब्याह करना चाहिए था।

धमलो-समझदार औरत थारे तैं कदे बी ब्याह कोण्या करै।

रमलू--मनै बस योहे साबित करना था।

देश मैं एफ डी आई आगी इसकी लूट सारे कै छागी

 2012 की डायरी से 

देश मैं एफ डी आई आगी इसकी लूट सारे कै छागी

बकशै कोण्या या चूट कै खागी सुणल्यो सब नर नारी

किसान का घणा फायदा होगा जोर के रुके मार रहे

गरीब के हितैषी आले ये आज मुखौटे अपने तार रहे 

या तो घर कसूते घालैगी म्हारी एक बी नहीं चालैगी 

या आच्छी तरियां खंगालैगी सुणल्यो सब नर नारी।

कहते कोए नुक्सान नहीं ये फायदे कई बतावैं सैं

हों पैदा कई लाख नौकरी हमनै कहकै नै भकावैं सैं

हरित क्रांति पै भी बहकाये नुक्सान कदे ना बताये 

म्हारे इसनै छक्के छड़वाये सुणल्यो सब नर नारी ।

अमरीका आले सीधे नहीं रिमोट तैं राज करते रै

अपनी पुरानी तकनीक म्हारे पै धिंगतानै धरते रै

सिर बी म्हारा जूती म्हारी रिमोट तैं पिटाई सै जारी

लूट खसोट मचाई भारी सुणल्यो सब नर नारी।

नए दौर के रंग निराले गरीब जमा कुचल्या जावै

मध्यम वर्ग का बड़ा हिस्सा चौड़ै खड़या लखावै

कहै साच्ची बात रणबीर अमीर की दीखै तसबीर

गरीब की फोड़ेंगे तकदीर सुणल्यो सब नर नारी ।

, चटा जनता नै धूल रहे।

 बढ़ा महंगाई लूट मचावैं,  जात धर्म पर लड़वावैं

म्हारी धरती खोस्या चाहवैं , चटा जनता नै धूल रहे।

अम्बानी और अडाणी की मातहत है सरकार म्हारी

टैक्स लगा लगा कै इसनै जनता की खाल उतारी

साम्प्रदायिकता फैलारी, कहै आच्छे दिन बहकारी

बदेशी कम्पनी छाती जारी, तोड़ देश के असूल रहे।

भरष्टाचार बढ़ता जावै सै व्यापम घोटाला देखो रै

अध्यादेश भूमि अधिग्रहण ना करते टाला देखो रै

महिला की करैं थानेदारी, करते ये फरमान जारी

बणे रूढ़िवाद के प्रचारी , पकड़ मामले टूल रहे ।

विकास जनता का कहते तीजूरी भरैं अम्बानी की 

सब्सिडी खत्म गरीबों की, बढ़ा दई अडाणी की 

महिला खड़ी पुकार रही, दलित पर बढ़ मार रही 

बढ़ क्यों अत्याचार रही, राज नशे मैं टूहल रहे ।

अच्छे दिनां का सपना के बेरा  कित खोग्या रै

मजदूर किसान कर्मचारी घणा दुखी होग्या रै

बरोने आला रणबीर रै, लिखता सही तस्वीर रै

मामला घणा गंभीर रै, भाईचारा जमा भूल रहे ।

यो किसा घोटाला रै।

 मेरा चालै कोण्या जोर मनै लूटैं मोटे चोर

नहीं पाया कोये ठौर कटी पतंग की डोर 

मनै लावैं डांगर ढ़ोर यो किसा घोटाला रै।

मेरा बोलना जुल्म हुया 

उनका बोलना हुक्म हुया

सारे ये मुनाफा खोर ये थमा धर्म की डोर

बनावैं ये म्हारा मोर सुहानी इनकी भोर

ऐश करैं डाकू चोर मन इनका काला रै।

ये भारत के पालन हार 

क्यों चोरां के सैं ताबेदार 

म्हारे पै टैक्स लगावैं बोलां तो खावण आवैं

मिल्ट्री सैड़ दे बुलावैं चोरां की मौज करावैं

काले का सफेद बणावै भजैं राम की माला रै।

महंगाई की मार कसूती

सिर म्हारा म्हारी जूती

यो रोजगार मन्दा सै यो सिस्टम गन्दा सै

यो मालिक का रन्दा सै घालै दोगला फंदा सै

क्यूकर जीवै बन्दा सै हुया ढंग कुढाला रै।

पत्थर पुजवा बहकाये 

भक्षक रक्षक दिखाये

काले नाग डसगे क्यों ये शिकंजे कसगे क्यों

दो संसार बसगे क्यों गरीब जमा फ़ंसगे क्यों

रणबीर पै हंसगे क्यों कर दिया चाला रै।

विकास कहूँ या कहूँ तबाही 

 विकास कहूँ या कहूँ तबाही 

विकास कहूँ या कहूँ तबाही , बात मेरी समझ नहीं आई,

हुई क्यों गामां की इसी छिताई , दिल्ली के गाम चर्चा मैं आये ॥ 

दिल्ली का विस्तार हुआ तो अनेक गाम इसमें आये थे 

धरती अक्वायर करी इनकी घने सब्ज बाग़ दिखाए थे 

बहोत घर बर्बाद हुए , जमा थोड़े घर आबाद हुए 

पीकै दारू कई आजाद हुए , चपेट मैं युवा लड़के आये॥ 

दिल्ली तैं कोए सबक लिया ना ईब हरयाणा की बारी 

एन  सी आर  के नाम तैं इसकी बर्बादी की तैयारी 

विकास पर कोए चर्चा ना , आज पूरा पटता खर्चा ना 

इसपै लिख्या कोए पर्चा ना , बीस लाख एक किल्ले के लाये॥ 

नशे का डूंडा पाड़  दिया ये नौजवान चपेट मैं आये 

फ्री सैक्श के खोल दरवाजे युवक युवती भरमाये 

हाल करे कसूते लूटेरे नै , मचाई लूट इनै चौफेरे  नै 

बाँट जात पात पै कमेरे नै , नंबर वन के नारे लगाये ॥ 

ईको अर जेंडर फ्रेण्डली विकास समता साथ ल्यावै 

ना तो दिल्ली जैसे खाग्या न्यूए एनसीआर इसनै खावै 

बहस विकास ऊप्पर चलावां , नया  हरयाणा किसा  बणावां 

रणबीर नक्शा मिलकै खिंचावाँ ,कैसे यो हरयाणा बच पाये ॥

Wednesday, 1 March 2023

बहुमूल्य प्रतिभा हरियाणे की उनको पढ़ण बिठा रहे।।

 बहुमूल्य प्रतिभा हरियाणे की उनको पढ़ण बिठा रहे।।

अयोग्य बेकूफ आगै बढ़ाये विरोधी स्वर को दबा रहे।।
1
तकनीक और सूचना का युग पूरा संसार एक गाम बणाया
इसके दम पै  कारपोरेट नै गली मोहल्ले तक जाल बिछाया
स्थानीय काम धंधे पिटगे गरीब कै सांस चढ़ा रहे।।
2
बहोत घरों मैं मां बाप अगली पीढ़ी बारे चिंता ठारे
कोये रास्ता नहीं दीखता ज्यां करकै घना भय खारे
सुलटे काम बचे कोण्या उल्टे काम पीसा घणा दिवा रहे।।
3
किसान मजदूर सरपंच पिटरे मिलजुल कै मंच बनाना हो
नया नवजागरण जात पात के खिलाफ हर गांव चलाना हो
अडानी अम्बानी हर लूट रहे किसान आंदोलन ये सिखा रहे।।
4
शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार पै संकट ल्या दिया भारी भाई
जातपात धर्म मजहब पै बांटकै म्हारी अक्कल मारी भाई
रणबीर सिंह बरगे  लिखारी यो संघर्ष का राह दिखा रहे।।

माहौल चारों कान्हीं का देवै सै तनावपूर्ण दिखाई।।

 



माहौल चारों कान्हीं का देवै सै तनावपूर्ण दिखाई।।
अविश्वास हिंसा अपराध नै आज चौपड़ सार बिछाई ।।
1
यो नशे पते का व्यापार देखो पकड़ घणी तूल रहया
बेरोजगारी अर म्हंगाई का फंदा जनता पै झूल रहया
अविश्वास का आडंबर फूल रहया फिजूलखर्ची भी छाई।।
2
सोशल मीडिया पै भी अंधविश्वास खूब फैलाया जा
चमत्कार बताकै पढ़या लिख्या यो आज भकाया जा
मंदिर मस्जिद मैं खँदाया जा चर्च भी इनकै संग आई।।
3
संघर्ष का रास्ता छुड़वाकै पूजा पाठ का राह दिखाया
धार्मिक आस्था म्हारी थारी इनका सहारा लेकै भकाया
हर दो मील पै मंदिर खुलाया असली संकट जावै छिपाई।।
4
सरपंच दुखी कर राखे किसानी संकट भी घणा बढ़ाया
सरकारी ढांचा बेचकै नै प्राईवेट ताहिं आज यो थमाया
हरेक तबका सडकां पै आया रणबीर नै कलम
घिसाई।।

संसार मैं तूँ क्यूँ आया, तनै के खोया के पाया,

 संसार मैं तूँ क्यूँ आया, तनै के खोया के पाया,

हिसाब कदे ना लाया, या न्यूएँ उम्र गुजारी।।

1

ना आच्छी किताब पढ़ी अश्लील साहित्य भाग्या

टी वी नशा हिंसा का यो माहौल शरीर नै खाग्या

बात काबू कोण्या आई, पकड़ी क्यूँ उल्टी राही

करी घर की तबाही, या बात ना कदे बिचारी।।

2

ज्ञान सबतैं बड्डा धन दुनिया मैं बताया रै

ज्ञान जीवन मैं बता कितना तनै कमाया रै

मन होज्या तेरा गन्दा ,यो काले धन का धंधा

बणग्या गल का फंदा, इसनै अक्कल फेर दी सारी।।

3

तूँ बचन सुथरे बोलै फेर करता घटिया काम 

पिछाण कर्मा तैं होवै खाली बचनों के ना दाम

यो संयम तनै खोया , बीज ईर्ष्या का बोया,

बहोतै गन्द सै ढोया, करनी सीखी चोरी जारी।।

4

समय सार जिंदगी का  कैहगे बड़े बड़ेरे न्यों 

कर बर्बाद समय नै बेहाल हुए भतेरे न्यों 

दूजे की कमी निगाही , ना देखी दिल की खाई

आज साफ दे दिखाई, रणबीर बेशर्मी थारी।।

Monday, 27 February 2023

धुरतैं धोखा करते आये

गेर रै गेर पत्ता गेर
महिला को सदियों से दबा कर रखा गया है परम्परा के नाम पर और तथाकथित घर की इज्जत के नाम पर । उसके साथ गैरबराबरी का व्यवहार किया जाता रहा है । हमारी कथाओं में ,सांगों  में भी महिला को बराबरी का इंसान कभी नहीं दिखाया गया। पितृसत्ता की मानसिकता के चलते  परिवार में मर्द हमेशा औरत को दबा कर रखता आया है। एक रागनी के माध्यम से कोशिश है हमारी परम्पराओं को खंगालने की---
धुर तैं धोखा करते आये परम्परा उघाड़ कै देख लियो
गरज गरज के प्यारे दिखाऊँ यो बेरा पाड़ कै देख लियो 
द्रोपदी जुए कै म्हं हार दई युधिष्ठर नै पासे डारे देखो 
शादी रचाई भोला जी नै पार्वती कै धक्के मारे देखो
सत की सीता घर तैँ ताहदी राम चन्द्र हद तारे देखो
डायन बता पद्मावत भी हरिश्चंद्र बचण तैँ हारे देखो 
ब्याही का भी तरस करैं ना ये पोथी पत्रे फाड़ कै देख लियो ।
अंगूठी देकै शकुंतला तैँ दुष्यंत बख्त पै भूल गया रै
पवन कुमार भी अंजना मैं काढ़ दोष फिजूल गया रै
नल काट साड़ी दमयंती की गेर फर्ज पै धूल गया रै
इसी इसी बातां का मामला पकड़ हमेश तूल गया रै
मौका आवै तो आँख बदलैं कितना ए चिंघाड़ कै देख लियो ।
जोधनाथ नै रूपाणी भी बण कै बीच खन्दाई देखो
धक्के खा खाकै बण मैं जिंदगी सहम गंवाई देखो 
चाप सिंह नै सोमवती भी पतिव्रता जार दिखाई देखो 
मदन सेन नै भी सोयी होई दई काट नानदे बाई देखो 
बीर कदे कुछ नहीं बोलेंगी या बांधी किवाड़ कै देख लियो 
किट ताहिं गिनाऊं परम्परा महिला हमेश थी साफ़ देखो 
हमेशा महिला दयावान होसै मर्द करते डोलें पाप देखो
कार चोरी जारी ठगी की कदे क़दीमी इनकी माफ़ देखो 
बीर मर्द का झगड़ा कोन्या सै या पितृसत्ता की छाप देखो
बराबरी का विचार रणबीर आज लिकाड़ कै देख लियो ।
रणबीर 
1.3.2015

Sunday, 26 February 2023

किसान तेरी धरती जागी इबतो लेले सम्भाला तूँ।

 किसानो जागो

किसान तेरी धरती जागी इबतो लेले सम्भाला तूँ।

नाश होवण लागरया किसान किसा रूखाला तूँ।

धरती खोसन का अध्यादेश भाजपा लेकै आई रै

पार्लियामेंट बाई पास इसी जुगत सै भिड़ाई रै

इब्बी सोवन लॉगरया कररया सै घणा चाला तूँ।

बिना सहमति धरती खोसैं इसा काला क़ानून चाहवैं

किसान हितेषी विकास हितेषी इसनै मोदी जी बतावैं

हजारां एकड़ एक फार्म की उसका कर दिया टाला क्यूँ 

विकास का बाहना लेकै अडानी की मेर कटाते

विपक्ष नै विकास विरोधी ये भजपा आले बताते 

समझ ले चाल इनकी क्यूँ करै सै गुड़ का राला तूँ

मतभेद भूल कै जातधर्म के सांझे मंच पर आओ रै

थारी ताकत बहोत घनी घेर कै दिल्ली दिखाओ रै

रणबीर खुद खड़या होकै खींच लड़ाई का पाला तूँ।

27.2.2015

Saturday, 25 February 2023

युद्ध नहीं शांति चाहिए 

 युद्ध नहीं शांति चाहिए 

युद्ध हुया तो मरेंगे हिंदुस्तान पाकिस्तान के सिपाही ।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

1

युद्ध उन्माद ठीक नहीं भावना मैं ये बहावैं सैं

दोनों कांहीं की सरकार भिड़ाये राखणा

चाहवैं सैं 

कश्मीरी जनता दो पाटों बीच सालों तैं पिसती आई।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

2

पुलवामा आतंकी हमले मैं कित चूक रही

सरकार की 

 क्यों चुप्पी उसपै जो  बात गवर्नर नै भी स्वीकार की 

हजार तैं फालतू संख्या किसके हुकम तैं गई बढ़ाई।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

3

कार उस हाई वे पै बीच में रोकी क्यूं ना बताओ रै

हवाई जहाज की फ़ाइल क्यों दाबी गई समझाओ रै

खुफिया एजेंसी की सूचना क्यो ना करी

कार्यवाही।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

4

इस आतंकी हमले पै सुरक्षा पै कई उठे सवाल ये

करकै नै पूरी इन्क्वारी बेरा पाड़ो कौन दलाल ये 

रणबीर कहै चौकस रहियो सोचो शांति की राही।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

जाइये मनै बताकै

 जाइये मनै बताकै


घसे कसूते दुःखी होरे सां देख मुरारी आकै।

अपणे हाथां क्यूं ना गेरता कुएं के मां ठाकै।।

1. देश दम म्हारे पै फल्या यो

  अमीर घर दीवा बल्या यो

  म्हारा सब किमै छल्या यो घिटी मैं गूंठा लाकै।।

2. तेरा चेला दुखड़ा

  मेहनत कर भूखा सोवै सै

  तनै सारे कै टोहवै सै सोग्या अमीरां कै जाकै।।

3. तनै गरीब क्यों नहीं भाता

  क्यों ना म्हारी तरफ लखाता

  तूं कद खोलै म्हारा खाता जाइये मनै बताकै।।

4. बचया छिदा इन्सान आड़ै

  सब देखै भगवान आडै़

  घर होगे शमशान आड़ै रणबीर कथा सुणाई गाकै।।

नशे की लत माड़ी

 नशे की लत माड़ी

एक बै आदत पड़ज्या तो छूटै ना कितने ऐ ताण तुड़ा ले ॥

मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा  चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

1        

तम्बाकू की लत होज्या तो कैंसर रोग की खुलज्या सै राही

दमा बधै और साँस रोग भी मचावै बुढ़ापे मैं घणी तबाही

खांसी बलगम तड़कै ऐ तड़क माणस नै खूबै ऐ रूआ ले ॥

 मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

2       

 दारू की लत  का काम बुरा पूरे हरियाणा मैं छागी देखो

माणस की इस लत के कारण महिला दुःख पागी देखो

गैंग रेप बढे हरियाणा मैं या गिरती साख कौन बचा ले ॥

  मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा  चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

3         

पर नारी की लत कसूती घर परिवार बर्बाद करै

महिला पुरुष के रिश्त्यां मैं या कसूता खटास भरै

नहीं छूटै या लत मनास की चाहे कोए कितना ऐ समझाले ॥

मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा  चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

4         

ताश खेलण की लत बढ़ी हरियाणे के गामां  गालों मैं

जुए की लत नै द्रोपदी का चीर हरण कराया दरबारों मैं

असर  होवैगा पूरा जै कोए रागनी पूरे सुर के मैं गा ले ॥

 मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

5         

कई लड़के और लड़की भी ये कई लत्तां के शिकार हुए

समाज सुधार की जरूरत ये रणबीर सिंह के विचार हुए

  कुछ पुलिस नेता अफसर हुए ये लत खोरों के रखवा ले  ॥

  मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा  चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ।।

किस्सा शहीद भगत सिंह 2

 15*******



भगत सिंह राज गुरु सुखदेव के सपने अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इसके कारणों में जाना और विचार करना जरूरी है। क्या बताया भला--

सपने चकनाचूर करे थारे देश की सरकारां नै।
जल जंगल जमीन कब्जाए देश के सहूकारां नै ।
1
शिक्षा हमें मिलै गुणकारी , भगत सिंह सपना थारा
मरै ना बिन इलाज बीमारी, भगत सिंह सपना थारा
भ्रष्टाचार कै मारांगे बुहारी, भगत सिंह सपना थारा
महिला आवै बरोबर म्हारी, भगत सिंह सपना थारा
बम्ब गेर आवाज सुनाई, बहरे गोरे दरबारां नै।
2
समाजवाद ल्यावां भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
कोए दुःख ना ठावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
दलित जागां पावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
अच्छाई सारै छावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
जनता चैन का सांस लेवै बिन ताले राखै घरबारां नै।
3
थारी क़ुरबानी के कारण ये आजादी के दिन आये
उबड़ खाबड़ खेत संवारे देश पूरे मैं खेत लहलाये
रात दिन अन्न उपजाया देश अपने पैरों पै ल्याये
चुनकै भेजे जो दिल्ली मैं उणनै हम खूब बहकाये
आये ना गोरयां कै काबू कर लिए अपने रिश्तेदारां नै।
4
समाजवाद की जगां अम्बानीवाद छाता आवै देखो
थारे सपने भुला कै धर्म पै हमनै लड़वावै देखो
मुजफ्फरनगर हटकै भगत सिंह थामनै बुलावै देखो
दोनों देशों मैं कट्टरवाद आज यो बढ़ता जावै देखो
रणबीर खोल कै दिखावै साच आज के नम्बरदारां नै।

16*********

भारत देश बहुत सालों तक गुलाम रहा। देश भक्तों ने संघर्ष किया तो 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। सबसे बड़ा गणतन्त्र है। क्या बताया भला--
यो गणतंत्र सबतै बड्डा भारत आवै कुहाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
दो सौ साल गोरया नै भारत गुलाम राख्या म्हारा था
गूंठे कटाये कारीगरां के मलमत दाब्या म्हारा था
सब रंगा का समोवश था फल मीठा चाख्या म्हारा था
भांत-भांत की खेती म्हारी नहीं ढंग फाब्या म्हारा था
फूट गेर कै राज जमाया कही जाती बात समाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
वीर सिपाही म्हारे देस के ज्यान की बाजी लाई फेर
लक्ष्मी सहगल आगै आई महिला विंग बनाई फेर
दुर्गा भाभी अंगरेजां तै जमकै आड़ै टकराई फेर
याणी छोरियां नै गोरयां पै थी पिस्तौल चलाई फेर
गोरे लागे राजे रजवाड़यां नै अपणे साथ मिलाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
3
आवाज ठाई जिननै उनके फांसी के फंदे डार दिये
घणे नर और नारी देस के काले पाणी तार दिये
मेजर जयपाल नै लाखां बागी फौजी त्यार किये
फौज आवै बगावत पै म्हारे बड्डे नेता इन्कार किये
नेवी रिवोल्ट हुया बम्बी मैं अंग्रेज लगे दबाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
4
आजादी का सपना था सबकी पढ़ाई और लिखाई का
आजादी का सपना था सबका प्रबन्ध हो दवाई का
आजादी का सपना था खात्मा होज्या सारी बुराई का
आजादी का सपना था आज्या बख्त फेर सचाई का
हिसाब लगावां आजादी का रणबीर सिंह के गाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।

17********

पन्दरा अगस्त आजादी का दिन --एक लेखा जोखा उन कुर्बानियों का जिनके दम पर देश आजाद हुआ---

कितने गये काला पानी कितने शहीद फांसी टूटे रै।।
पाड़  बगा दिए  गोरयां के गढ़रे थे जो देश मैं खूंटे रै ।।
1
पहली आजादी की जंग थारा सो सतावन  मैं लड़ी थी
बंगाल आर्मी करी बगावत जनता भी साथ भिड़ी थी
ठारा  सौ सतावन के मैं जन क्रांति के बम्ब फूटे रै ।।
2
भगत सिंह सुख देव राजगुरु फांसी का फंदा चूमे
उधम सिंह भेष बदल कै लन्दन की गालाँ  मैं घूमे
चंदर शेखर आजाद साहमी गोरयां के छक्के छूटे रै।।
3
सुभाष चन्द्र बोश नै आजाद हिंद फ़ौज बनाई थी
महिला विंग खडी करी लक्ष्मी सहगल संग आई थी
धुर तैं आजादी खातिर ये किसान मजदूर भी जुटे रै ।।
4
गाँधी की गेल्याँ जनता जुड़गी हर तरियां साथ दिया 
चाल खेलगे गोरे फेर बी देश मैं बन्दर बाँट किया
बन्दे मातरम अलाह हूँ अकबर ये हून्कारे उठे रै ।।
5
सोच घूमै इब्बी जिसने देख्या खूनी खेल बंटवारे का
लाखां घर बर्बाद हुए यो क़त्ल महमूद मुख्त्यारे का
दो तिहाई नै आज बी रोटी टुकड़े पानी संग घूंटे रै ।।
6
छियासठ साल मैं करी तरक्की नीचे तक गई नहीं
ऊपरै ऊपर गुल्पी आजादी नीचै जावन दई नहीं
रणबीर सिंह टोह कै ल्यावै खुये मक्की के भूट्टे  रै ।।

18****** **

भगत सिंह हर के सपने
जिन सपन्यां खातर फांसी टूटे हम मिलकै पूरा करांगे ।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
1
सबको मिलै शिक्षा पूरी यही तो थारा विचार बताया
समाज मैं इंसान बराबर तमनै यो प्रचार बढ़ाया
एक दूजे नै कोए ना लूटै थामनै समाज इसा चाहया
मेहनत की लूट नहीं होवै सारे देश मैं अलख जगाया
आजादी पाछै कसर रैहगी हम ये सारे गड्ढे भरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
2
फुट गेरो राज करो का गोरयां नै खेल रचाया था
छूआ छूत पुराणी समाज मैं लिख पर्चा समझाया था
समाजवाद का पूरा सार सारे नौजवानों को बताया था
शोषण रहित समाज होज्या इसा नक्शा चाहया था
थारे विचार आगै लेज्यावांगे हम नहीं किसे तैं डरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
3
नौजवानो को भगत सिंह याद आवै सै थारी क़ुरबानी
देश की खातर फांसी टूटे गोरयां की एक नहीं मानी
देश की आजादी खातर तकलीफ ठाई थी बेउन्मानी
गोरयां के हाथ पैर फूलगे जबर जुल्म करण की ठानी
क्रांतिकारी कसम खावैं देश की खातर डूबाँ तिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
4
बहरे गोरयां ताहिं हमनै बहुत ऊंची आवाज लगाई
जनता की ना होवै थी सुनायी ज्यां बम्ब की राह अपनाई
नकाब फाड़ना जरूरी था गोरे खेलें थे  घणी चतुराई
गोरयां की फ़ौज म्हारी माहरे उप्पर करै नकेल कसाई
रणबीर कसम खावां सां चाप्लूसां तैं नहीं घिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।

19********
**भगत सिंह के रास्ते को अपनाना  होगा**

एक दिन जनता जागैगी, भ्रष्ट राजनीति भागैगी, घोटाल्याँ पाबंदी लागैगी, इन सबकी सै आस मनै।।
1
असल मैं तो नौकरी आज बहोत घणी बची कोण्या
बिना सिफारिश पीसे मिलज्या या बात जँची कोण्या
यो हिसाब जनता माँगैगी,या कसूरवारां नै टाँगैगी,
ठेकेदारां नै पूरा छांगैगी, इसका सै अहसास मनै।।
2
जो भी परिवर्तन आया वा या जनता ल्याई देखो
शोषण का रूप बदल्या जब जनता ली अंगड़ाई देखो
लगाम अमीरों कै लागैगी,हथकड़ी उनकै फाबैगी,
जनता उस दिन नाचैगी,उलगी आवैगी सांस मनै।।
3
जनता की जनवादी क्रांति सुधार आवै पूरे समाज मैं
कोये भूखा नहीं सोवै अमन शांति छावै पूरे समाज मैं
छुआछूत ना टोही पावैगी ,भ्रष्टाचार ना भाजी थ्यावैगी, भूख ना फेर सतावैगी , बनता दीखै इतिहास मनै।।
4
यो हासिल करने खातर  भगत सिंह बनना होगा
जनतंत्र असली खातर संघर्ष मैं उतरना होगा
अर्थ नीति बदली जावैगी,फेर सांस मैं सांस आवैगी,दुनिया मैं शांति छावैगी, रणबीर देवै विश्वास मनै।।

20*******

लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही ।।
1
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा, करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं , लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे, संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी थारे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तमनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।

21********

राज गुरु सुख देव भगत सिंह तेईस मार्च नै फांसी पै लटकाये।।
हुसैनी वाला में अधजले तीनूं  सतलुज नदी के मैं गये बहाए।।
1
धार्मिक कट्टरवाद और अंधविश्वास समाज के बैरी बताये
विकास के पक्के रोड़े सैं इनपै लिख कै संदेश घर घर पहूंचाये
लिख मैं नास्तिक क्यों सूं एक पुस्तिका मैं अपने विचार बताये।।
2
इंसान के छूने से सवाल करया हम अपवित्र कैसे हो ज्यावैं
पशु नै रसोई मैं ले जाकै क्यों हम अपनी गोदी के मैं बिठावैं
कति शर्म नहीं आती हमनै क्यों इसे रिवाज समाज मैं चलाये।।
3
जो चीज आजाद विचारों नै बर्दाश्त नही कर पावै देखो रै
हों इसी चीज खत्म समाज तैं तीनूं नौजवान चाहवैं देखो रै
समाजवाद के पढ़े विचार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लाये।।
4
लोग नहीं लड़ें आपस के मैं जरूरत वर्ग चेतना की बताई
किसान मजदूर की असली बैरी पूंजीपति की वर्ग समझाई
सुखदेव राजगुरु भगत सिंह नै रणबीर ना पाछै कदम हटाये ।।

22********
किस्सा शहीद भगत सिंह
भगत सिंह जेल से अपने पिताजी के नाम एक पत्र लिखकर सरकार को उनके द्वारा भेजी अपील का सख्त विरोध करते हैं । क्या बताया इस रागनी में :-
अर्जी पिता किशनसिंह नै ट्रिब्यूनल ताहीं दी बताई थी।।
दलील दे बचाव खातर  कोर्ट जाणे की प्लान बनाई थी ।।
भगत सिंह और उसके साथी इसतैं सहमत नहीं बताये
अंग्रेजां की बदले की नीति बोले पिता समझ नहीं पाये
जिंदगी की भीख नहीं मांगां सन्देश बाबू धोरै भिजाई थी।1।
दलील दे बचाव खातर-------
हम तो हैरान पिताजी क्यों आपनै आवेदन भेज दिया
बिना मेरे तैं सलाह करें इसा गल्त क्यों काम किया
राजनितिक विचारों की दूरी कई बारियां समझाई थी।
2।
दलील दे बचाव खातर-------
थारी हाँ ना के ख्याल बिना मैं अपना काम करता आया सूँ
मुकद्दमा नहीं लड़ूंगा इसपै मैं धुर तैं खड़या पाया सूँ
अपने सिद्धान्त कुर्बान करकै नहीं बचना कसम खाई थी3।
दलील दे बचाव खातर---------
आप पिता मेरे ज्यां करकै मनै सख्त बात नहीं लिखी सै
थारी या बड़ी कमजोरी बात साफ़ मनै कहनी सिखी सै
रणबीर इस्सी उम्मीद कदे मनै आपतैं नहीं लगाई थी।।4
दलील दे बचाव खातर---------
16.9.16

23*********
जब जब जनता जागी  यो जुल्मी शोषक झुका दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
आजाद देश का सपना पहुंचा शहर और गांव मैं
भगत सिंह फांसी टूटा जोश था  देश तमाम मैं
दुर्गा भाभी गेल्याँ  जुटगी इस आजादी के काम मैं
लाखाँ नर और नारी देगे या कुर्बानी गुमनाम मैं
कुर्बानी बिना नहीं आजादी गांधी अलख जगा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
गोरे गये आगे काले गरीबी जमा मिटी नहीं सै
बुराई बढती आवै सै भिद्द इसकी पिटी नहीं सै
अच्छाई संघर्ष करण लागरी आस जमा घटी नहीं सै
जनता एक दिन जीतेगी या उम्मीद छुटी नहीं सै
म्हारी एकता तोडण़ खातिर जात पात घणा फैला दिया।।
भारत तैं जुल्मी गौरा मिलकै सबनै भगा दिया।।
जात पात हरियाणा की सै सबतैं बड्डी बैरी भाइयो
विकास पूरा होवण दे ना दुनिया याहे कैहरी भाइयो
वैज्ञानिक सोच काट सै इसकी जड़ घणी गहरी भाइयो
अमीराँ की जात अमीरी म्हारै गरीबी फैहरी भाइयो
समता वादी समाज होगा संघर्ष का डंका बजा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
दारू माफिया मुनाफा खोर इनकी पक्की यारी देखो
भ्रष्ट पलसिया औछा नेता करता चौड़े गद्दारी देखो
बिचोलिया घणे पैदा होगे म्हारी अक्ल मारी देखो
लंबे जन संघर्ष की हमनै कर ली तैयारी देखो
रणबीर भगत सिंह ने रास्ता सही दिखा दिया।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।

24*********
23 मार्च शहादत दिवस के मौके पर
देख हालत आज देश की थारी याद घणी आवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
1
सबको शिक्षा काम सबको का नारा थामने लाया था
इंकलाब जिंदाबाद देश में जोर लगा गुंजाया था
शोषण रहित समाज थारी डायरी लिखा पावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
2
अंग्रेजों के खिलाफ थाम नै जीवन दा पै लगा दिया

आजादी का संदेश यो घर घर के में पहुंचा दिया
तीनों साथी फांसी चढ़गे  देश शहादत मना वै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
3
सरफरोशी की तमन्ना बोले इब म्हारे दिल मैं सै
देखना सै जोर कितना बाजू ए कातिल थारे मैं सै
एक नौजवान तबका थाम नै उतना ए चाहवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
4
धर्म के नाम पर समाज बांटें आज देश भगत बनरे
हिंदू मुस्लिम के नाम पै बना कै पाले बन्दी तनरे
रणबीर थारी कुर्बानी हम सब मैं जोश लयावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।

25********
जनता की जनवादी क्रांति हम बदल जरूर ल्यावाँगे रै ॥ 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
1
जनतन्त्र का मुखौटा पहर कै राज करै सरमायेदारी या
जल जंगल जमीन धरोहर बाजार के मैं बेचै म्हारी या
हम लोगां का लोगां की खातर लोगां का राज चलावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
2
कौन लूटै जनता नै इब सहज सहज पहचान रहे
आज घोटाले पर घोटाले कर ये कारपोरेट बेईमान रहे
एक दिन मिलकै इन सबनै हम जेल मैं पहोंचावांगे रै  ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
3
जनता जाओ चाहे भाड़ मैं बिदेशी पूंजी तैं हाथ  मिलाया
दरवाजे खोल दिए उन ताहिं गरीबाँ का सै भूत बनाया
जमा बी हिम्मत नहीं हारां मिलकै नै सबक सिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
4
बढ़ा जनता मैं  बेरोजगारी ये नौजवान भटकाये देखो 
जात पात गोत नात मैं बांटे आपस मैं भिड़वाये देखो
किसान मजदूर के दम पै करकै संघर्ष दिखावांगे रै ॥

किस्सा शहीद भगत सिंह

 


किस्सा शहीद भगत सिंह
शहीद भगत सिंह की याद में क्या बताया भला---
***1
हट कै क्यूकर बुलाऊँ मैं , पुनर्जन्म नहीं गया बताया ।।
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
1
तेईस साल का था जिब तूं फांसी का फंदा चूम गया
इन्कलाब जिंदाबाद का नारा फिरंगी का सिर घूम गया
पगड़ी सम्भाल जट्टा का गाना इनपै भारतवासी झूम गया
बम्ब गेरया असम्बली के मैं तूं मचा देश मैं धूम गया
समतावादी समाज बानावां इसका विचार यो बढाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
2
मार्क्सवाद तैं ले कै प्रेरणा शोषण ख़त्म करना चाहया था
सबके हक़ बराबर होंगे इंकलाबी नारा यो लाया था
यानी सी उमर भगत सिंह तेरी गाँधी को समझाया था
गोरे जा कै काले आज्यांगे  सवाल तनै यो ठाया था
क्रांतिकारी नौजवानों का संगठन तमनै मजबूत बनाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
3
ढाल ढाल के भारत वासी सबकी भलाई चाही तनै
यो सपना पूरा होज्या म्हारा नौजवान सभा बनाई तनै
अंध विश्वासी भारत मैं लड़ी विचारों की लडाई तनै
वर्ग संघर्ष सही रास्ता जिसपै थी  शीश चढ़ाई तनै 
तेरा रास्ता भूल गये ना सबकै आजादी का फल थ्याया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
4
तेरे सपनों का भारत देश भगत सिंह हम बना वांगे
मशाल जो तनै जलाई वा घर घर मैं हम ले ज्यावांगे
थाम नै फांसी खाई थी हम ना पाछै कदम हटा वांगे
जात पात गोत नात पै ना झूठा झगडा हम ठा वांगे
रणबीर सिंह बरोने आले नै दिल तैं यो छंद बनाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।

2*******

भगत सिंह (जन्म: 28  सितम्बर 1907 , मृत्यु: 23 मार्च 1931) भारत के एक प्रमुख क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे। भगतसिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है। इन्होंने केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप इन्हें 23 मार्च 1931 को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी पर लटका दिया गया। सारे देश ने उनके बलिदान को बड़ी गम्भीरता से याद किया। पहले लाहौर में साण्डर्स-वध और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय असेम्बली में चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान की। भगत सिंह ने मार्क्सवादी विचारधारा का गहन मंथन किया और इसी को संघर्ष का आधार बनाया |
सोने की चिड़िया  भारत म्हारा इसका हाल देखले आकै  ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
1
मेहनत कश देशवासियों नै यो खून पसीना एक करया
खेत कारखाने खूब कमाए यो देश खजाना खूब भरया
टाटा अम्बानी लूट कै लेगे आज अपने प्लान बनवाकै ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
2
तीनों फांसी का फन्दा चुम्मे दुनिया मैं इतिहास बनाया
थारी क़ुरबानी नै भारत मैं  आजादी का अलख जगाया
दिखावा करैं थारे नाम का असल मैं धरे टांड पै बिठाकै ॥
3
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
भ्रष्टाचार ठाठे मारै देखो दिल्ली के राज दरबारों मैं
कुछ भृष्ट नेता भ्रष्ट अफसर मौज करैं सरकारों मैं
बाट आजादी के फ़लां की आज  हम देखां सां मुंह बाकै ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
4
प्रेरणा लेकै थारे तैं हम आज कसम उठावां सारे रै
ज्यान की बाजी लाकै नै सपने पूरे करां थारे रै
लिखै रणबीर साची सारी आज एक एक बात जमाके ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥

3*******

भगत सिंह राज गुरु सुखदेव के सपने अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इसके कारणों में जाना और विचार करना जरूरी है। क्या बताया भला--

सपने चकनाचूर करे थारे देश की सरकारां नै।
जल जंगल जमीन कब्जाए देश के सहूकारां नै ।
1
शिक्षा हमें मिलै गुणकारी , भगत सिंह सपना थारा
मरै ना बिन इलाज बीमारी, भगत सिंह सपना थारा
भ्रष्टाचार कै मारांगे बुहारी, भगत सिंह सपना थारा
महिला आवै बरोबर म्हारी, भगत सिंह सपना थारा
बम्ब गेर आवाज सुनाई, बहरे गोरे दरबारां नै।
2
समाजवाद ल्यावां भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
कोए दुःख ना ठावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
दलित जागां पावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
अच्छाई सारै छावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
जनता चैन का सांस लेवै बिन ताले राखै घरबारां नै।
3
थारी क़ुरबानी के कारण ये आजादी के दिन आये
उबड़ खाबड़ खेत संवारे देश पूरे मैं खेत लहलाये
रात दिन अन्न उपजाया देश अपने पैरों पै ल्याये
चुनकै भेजे जो दिल्ली मैं उणनै हम खूब बहकाये
आये ना गोरयां कै काबू कर लिए अपने रिश्तेदारां नै।
4
समाजवाद की जगां अम्बानीवाद छाता आवै देखो
थारे सपने भुला कै धर्म पै हमनै लड़वावै देखो
मुजफ्फरनगर हटकै भगत सिंह थामनै बुलावै देखो
दोनों देशों मैं कट्टरवाद आज यो बढ़ता जावै देखो
रणबीर खोल कै दिखावै साच आज के नम्बरदारां नै।

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भारत देश बहुत सालों तक गुलाम रहा। देश भक्तों ने संघर्ष किया तो 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। सबसे बड़ा गणतन्त्र 74 साल का हो गया  है। क्या बताया भला--
यो गणतंत्र सबतै बड्डा भारत आवै कुहाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
दो सौ साल गोरया नै भारत गुलाम राख्या म्हारा था
गूंठे कटाये कारीगरां के मलमत दाब्या म्हारा था
सब रंगा का समोवश था फल मीठा चाख्या म्हारा था
भांत-भांत की खेती म्हारी नहीं ढंग फाब्या म्हारा था
फूट गेर कै राज जमाया कही जाती बात समाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
वीर सिपाही म्हारे देस के ज्यान की बाजी लाई फेर
लक्ष्मी सहगल आगै आई महिला विंग बनाई फेर
दुर्गा भाभी अंगरेजां तै जमकै आड़ै टकराई फेर
याणी छोरियां नै गोरयां पै थी पिस्तौल चलाई फेर
गोरे लागे राजे रजवाड़यां नै अपणे साथ मिलाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
3
आवाज ठाई जिननै उनके फांसी के फंदे डार दिये
घणे नर और नारी देस के काले पाणी तार दिये
मेजर जयपाल नै लाखां बागी फौजी त्यार किये
फौज आवै बगावत पै म्हारे बड्डे नेता इन्कार किये
नेवी रिवोल्ट हुया बम्बी मैं अंग्रेज लगे दबाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
4
आजादी का सपना था सबकी पढ़ाई और लिखाई का
आजादी का सपना था सबका प्रबन्ध हो दवाई का
आजादी का सपना था खात्मा होज्या सारी बुराई का
आजादी का सपना था आज्या बख्त फेर सचाई का
हिसाब लगावां आजादी का रणबीर सिंह के गाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।

5******

पन्दरा अगस्त आजादी का दिन --एक लेखा जोखा उन कुर्बानियों का जिनके दम पर देश आजाद हुआ---

कितने गये काला पानी कितने शहीद फांसी टूटे रै।।
पाड़  बगा दिए  गोरयां के गढ़रे थे जो देश मैं खूंटे रै ।।
1
पहली आजादी की जंग थारा सो सतावन  मैं लड़ी थी
बंगाल आर्मी करी बगावत जनता भी साथ भिड़ी थी
ठारा  सौ सतावन के मैं जन क्रांति के बम्ब फूटे रै ।।
2
भगत सिंह सुख देव राजगुरु फांसी का फंदा चूमे
उधम सिंह भेष बदल कै लन्दन की गालाँ  मैं घूमे
चंदर शेखर आजाद साहमी गोरयां के छक्के छूटे रै।।
3
सुभाष चन्द्र बोश नै आजाद हिंद फ़ौज बनाई थी
महिला विंग खडी करी लक्ष्मी सहगल संग आई थी
धुर तैं आजादी खातिर ये किसान मजदूर भी जुटे रै ।।
4
गाँधी की गेल्याँ जनता जुड़गी हर तरियां साथ दिया 
चाल खेलगे गोरे फेर बी देश मैं बन्दर बाँट किया
बन्दे मातरम अलाह हूँ अकबर ये हून्कारे उठे रै ।।
5
सोच घूमै इब्बी जिसने देख्या खूनी खेल बंटवारे का
लाखां घर बर्बाद हुए यो क़त्ल महमूद मुख्त्यारे का
दो तिहाई नै आज बी रोटी टुकड़े पानी संग घूंटे रै ।।
6
छियासठ साल मैं करी तरक्की नीचे तक गई नहीं
ऊपरै ऊपर गुल्पी आजादी नीचै जावन दई नहीं
रणबीर सिंह टोह कै ल्यावै खुये मक्की के भूट्टे  रै ।।

6******

भगत सिंह हर के सपने आज उन पर जबरदस्त हमला बोला जा रहा है। कैसा भारत चाहते थे राज गुरु, सुखदेव और भगत सिंह--
जिन सपन्यां खातर फांसी टूटे हम मिलकै पूरा करांगे ।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
1
सबको मिलै शिक्षा पूरी यही तो थारा विचार बताया
समाज मैं इंसान बराबर तमनै यो प्रचार बढ़ाया
एक दूजे नै कोए ना लूटै थामनै समाज इसा चाहया
मेहनत की लूट नहीं होवै सारे देश मैं अलख जगाया
आजादी पाछै कसर रैहगी हम ये सारे गड्ढे भरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
2
फुट गेरो राज करो का गोरयां नै खेल रचाया था
छूआ छूत पुराणी समाज मैं लिख पर्चा समझाया था
समाजवाद का पूरा सार सारे नौजवानों को बताया था
शोषण रहित समाज होज्या इसा नक्शा चाहया था
थारे विचार आगै लेज्यावांगे हम नहीं किसे तैं डरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
3
नौजवानो को भगत सिंह याद आवै सै थारी क़ुरबानी
देश की खातर फांसी टूटे गोरयां की एक नहीं मानी
देश की आजादी खातर तकलीफ ठाई थी बेउन्मानी
गोरयां के हाथ पैर फूलगे जबर जुल्म करण की ठानी
क्रांतिकारी कसम खावैं देश की खातर डूबाँ तिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
4
बहरे गोरयां ताहिं हमनै बहुत ऊंची आवाज लगाई
जनता की ना होवै थी सुनायी ज्यां बम्ब की राह अपनाई
नकाब फाड़ना जरूरी था गोरे खेलें थे  घणी चतुराई
गोरयां की फ़ौज म्हारी माहरे उप्पर करै नकेल कसाई
रणबीर कसम खावां सां चाप्लूसां तैं नहीं घिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।

7******
सुख देव , राजगुरु, भगत सिंह हर के रास्ते को अपनाना  होगा। आज देश के संविधान को खतरा है, उसे बचाना होगा। क्या बताया भला---

एक दिन जनता जागैगी, भ्रष्ट राजनीति भागैगी, घोटाल्याँ पाबंदी लागैगी, इन सबकी सै आस मनै।।
1
असल मैं तो नौकरी आज बहोत घणी बची कोण्या
बिना सिफारिश पीसे मिलज्या या बात जँची कोण्या
यो हिसाब जनता माँगैगी,या कसूरवारां नै टाँगैगी,
ठेकेदारां नै पूरा छांगैगी, इसका सै अहसास मनै।।
2
जो भी परिवर्तन आया वा या जनता ल्याई देखो
शोषण का रूप बदल्या जब जनता ली अंगड़ाई देखो
लगाम अमीरों कै लागैगी,हथकड़ी उनकै फाबैगी,
जनता उस दिन नाचैगी,उलगी आवैगी सांस मनै।।
3
जनता की जनवादी क्रांति सुधार आवै पूरे समाज मैं
कोये भूखा नहीं सोवै अमन शांति छावै पूरे समाज मैं
छुआछूत ना टोही पावैगी ,भ्रष्टाचार ना भाजी थ्यावैगी, भूख ना फेर सतावैगी , बनता दीखै इतिहास मनै।।
4
यो हासिल करने खातर  भगत सिंह बनना होगा
जनतंत्र असली खातर संघर्ष मैं उतरना होगा
अर्थ नीति बदली जावैगी,फेर सांस मैं सांस आवैगी,दुनिया मैं शांति छावैगी, रणबीर देवै विश्वास मनै।।

8*****

लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही ।।
1
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा, करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं , लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे, संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी थारे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तमनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।

9*****
अंग्रेजों ने जुल्म ढाये। जात धर्म पत्र लोगों को बांट कर रखा। क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया। क्या बताया भला---
राज गुरु सुख देव भगत सिंह तेईस मार्च नै फांसी पै लटकाये।।
हुसैनी वाला में अधजले तीनूं  सतलुज नदी के मैं गये बहाए।।
1
धार्मिक कट्टरवाद और अंधविश्वास समाज के बैरी बताये
विकास के पक्के रोड़े सैं इनपै लिख कै संदेश घर घर पहूंचाये
लिख मैं नास्तिक क्यों सूं एक पुस्तिका मैं अपने विचार बताये।।
2
इंसान के छूने से सवाल करया हम अपवित्र कैसे हो ज्यावैं
पशु नै रसोई मैं ले जाकै क्यों हम अपनी गोदी के मैं बिठावैं
कति शर्म नहीं आती हमनै क्यों इसे रिवाज समाज मैं चलाये।।
3
जो चीज आजाद विचारों नै बर्दाश्त नही कर पावै देखो रै
हों इसी चीज खत्म समाज तैं तीनूं नौजवान चाहवैं देखो रै
समाजवाद के पढ़े विचार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लाये।।
4
लोग नहीं लड़ें आपस के मैं जरूरत वर्ग चेतना की बताई
किसान मजदूर की असली बैरी पूंजीपति की वर्ग समझाई
सुखदेव राजगुरु भगत सिंह नै रणबीर ना पाछै कदम हटाये ।।

10******
शहीद भगत सिंह पर रचित एक रागनी::
भगतसिंह नै अपनी निभाई ईब हम अपनी निभावांगे ।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
इंसानियत भूलकै समाज हैवानियत कान्ही चाल पड़या
शोषण रहित समाज का सपना चौराहे पै बेहाल खड़या
थारा संगठन जिस खातर लड़या उस विचार का परचम फैहरावांगे।।
तेईस साल की कुल उम्र चरों कान्ही तैं इतना ज्ञान लिया
बराबर हों इंसान दुनिया के मिलकै तमनै ब्यान दिया
मांग महिला का सम्मान लिया थारी क्रांति का झंडा लैहरावांगे।।
हंसते हंसते फांसी चूमगे इंकलाब जिंदाबाद का नारा लाया
बम्ब गैर कै एसैम्बली मैं नारा अंग्रेजां कै था याद दिलवाया
मिलकै सबनै प्रण उठाया गोरयां नै हम बाहर भजावांगे।।
जेल मैं पढी किताब के थोड़ी नोट किया सब डायरी मैं
आतंकवादी का मतलब समझां फर्क समझां क्रांतिकारी मैं
कहै रणबीर बरोने आला घर घर थारा सन्देश लेज्यावांगे।।
11.9.2016

11******
किस्सा शहीद भगत सिंह
भगत सिंह जेल से अपने पिताजी के नाम एक पत्र लिखकर सरकार को उनके द्वारा भेजी अपील का सख्त विरोध करते हैं । क्या बताया इस रागनी में :-
अर्जी पिता किशनसिंह नै ट्रिब्यूनल ताहीं दी बताई थी।।
दलील दे बचाव खातर  कोर्ट जाणे की प्लान बनाई थी ।।
भगत सिंह और उसके साथी इसतैं सहमत नहीं बताये
अंग्रेजां की बदले की नीति बोले पिता समझ नहीं पाये
जिंदगी की भीख नहीं मांगां सन्देश बाबू धोरै भिजाई थी।1।
दलील दे बचाव खातर-------
हम तो हैरान पिताजी क्यों आपनै आवेदन भेज दिया
बिना मेरे तैं सलाह करें इसा गल्त क्यों काम किया
राजनितिक विचारों की दूरी कई बारियां समझाई थी।
2।
दलील दे बचाव खातर-------
थारी हाँ ना के ख्याल बिना मैं अपना काम करता आया सूँ
मुकद्दमा नहीं लड़ूंगा इसपै मैं धुर तैं खड़या पाया सूँ
अपने सिद्धान्त कुर्बान करकै नहीं बचना कसम खाई थी3।
दलील दे बचाव खातर---------
आप पिता मेरे ज्यां करकै मनै सख्त बात नहीं लिखी सै
थारी या बड़ी कमजोरी बात साफ़ मनै कहनी सिखी सै
रणबीर इस्सी उम्मीद कदे मनै आपतैं नहीं लगाई थी।।4
दलील दे बचाव खातर---------
16.9.16

12*******
आज भी जनता को जागने की जरूरत है जी , पहले गोरों के अत्याचार अब कालों के अत्याचार ! क्या बताया भला---
जब जब जनता जागी  यो जुल्मी शोषक झुका दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
1
आजाद देश का सपना पहुंचा शहर और गांव मैं
भगत सिंह फांसी टूटा जोश था  देश तमाम मैं
दुर्गा भाभी गेल्याँ  जुटगी इस आजादी के काम मैं
लाखाँ नर और नारी देगे या कुर्बानी गुमनाम मैं
कुर्बानी बिना नहीं आजादी गांधी अलख जगा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
2
गोरे गये आगे काले गरीबी जमा मिटी नहीं सै
बुराई बढती आवै सै भिद्द इसकी पिटी नहीं सै
अच्छाई संघर्ष करण लागरी आस जमा घटी नहीं सै
जनता एक दिन जीतेगी या उम्मीद छुटी नहीं सै
म्हारी एकता तोडण़ खातिर जात पात घणा फैला दिया।।
भारत तैं जुल्मी गौरा मिलकै सबनै भगा दिया।।
3
जात पात हरियाणा की सै सबतैं बड्डी बैरी भाइयो
विकास पूरा होवण दे ना दुनिया याहे कैहरी भाइयो
वैज्ञानिक सोच काट सै इसकी जड़ घणी गहरी भाइयो
अमीराँ की जात अमीरी म्हारै गरीबी फैहरी भाइयो
समता वादी समाज होगा संघर्ष का डंका बजा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
4
दारू माफिया मुनाफा खोर इनकी पक्की यारी देखो
भ्रष्ट पलसिया औछा नेता करता चौड़े गद्दारी देखो
बिचोलिया घणे पैदा होगे म्हारी अक्ल मारी देखो
लंबे जन संघर्ष की हमनै कर ली तैयारी देखो
रणबीर भगत सिंह ने रास्ता सही दिखा दिया।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।

13********
23 मार्च शहादत दिवस के मौके पर
देख हालत आज देश की थारी याद घणी आवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
1
सबको शिक्षा काम सबको का नारा थामने लाया था
इंकलाब जिंदाबाद देश में जोर लगा गुंजाया था
शोषण रहित समाज थारी डायरी लिखा पावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
2
अंग्रेजों के खिलाफ थाम नै जीवन दा पै लगा दिया

आजादी का संदेश यो घर घर के में पहुंचा दिया
तीनों साथी फांसी चढ़गे  देश शहादत मना वै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
3
सरफरोशी की तमन्ना बोले इब म्हारे दिल मैं सै
देखना सै जोर कितना बाजू ए कातिल थारे मैं सै
एक नौजवान तबका थाम नै उतना ए चाहवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
4
धर्म के नाम पर समाज बांटें आज देश भगत बनरे
हिंदू मुस्लिम के नाम पै बना कै पाले बन्दी तनरे
रणबीर थारी कुर्बानी हम सब मैं जोश लयावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।

14******
राजगुरु , सुखदेव भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने की बात । क्या बताया भला--
जनता की जनवादी क्रांति हम बदल जरूर ल्यावाँगे रै ॥ 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
1
जनतन्त्र का मुखौटा पहर कै राज करै सरमायेदारी या
जल जंगल जमीन धरोहर बाजार के मैं बेचै म्हारी या
हम लोगां का लोगां की खातर लोगां का राज चलावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
2
कौन लूटै जनता नै इब सहज सहज पहचान रहे
आज घोटाले पर घोटाले कर ये कारपोरेट बेईमान रहे
एक दिन मिलकै इन सबनै हम जेल मैं पहोंचावांगे रै  ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
3
जनता जाओ चाहे भाड़ मैं बिदेशी पूंजी तैं हाथ  मिलाया
दरवाजे खोल दिए उन ताहिं गरीबाँ का सै भूत बनाया
जमा बी हिम्मत नहीं हारां मिलकै नै सबक सिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
4
बढ़ा जनता मैं  बेरोजगारी ये नौजवान भटकाये देखो 
जात पात गोत नात मैं बांटे आपस मैं भिड़वाये देखो
किसान मजदूर के दम पै करकै संघर्ष दिखावांगे रै ॥
15*******



मौका सै फिलहाल

 मौका सै फिलहाल

हांगा लादयां पूरा भाइयो यो मौका सै फ़िलहाल, हाथ दिखारे म्हारे नौजवान लाल।।
1
अग्निपथ ये वापिस कराणे सैं, नहीं कति पाछै कदम हटाणे सैं, दो दो हाथ करकै दिखाणे सैं, दिखावां युवां की ताकत का कमाल।।
2
सरकार का सामना करणा सै, लाठी गोली तै नहीं डरणा सै, छब्बीस नै मार्च पै उतर णा सै, यो ऐलान करया सै तत्काल ।।
3
मोदी अपणे हठ नै छोड़ दिये, काळे कानून उल्टे मोड़ लिये, म्हारी बात का लगा तोड़ लिये, किसानी ताकत करदेगी बेहाल।।
4
खाग्या अम्बानी चूट चूट कै,म्हारे नारयां नै देश मैं पहूँच कै, भाई चारा भर दिया कूट कूट कै, रणबीर कहै मोदी करिये ख्याल
।।

Friday, 24 February 2023

रात ग्यारा बजे चालकै दिल्ली एयरपोर्ट आये रै।।

 रात ग्यारा बजे चालकै दिल्ली एयरपोर्ट आये रै।।

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

हवाई जहाज का सफर कई घण्टे का होग्या भाई

ब्रेकफास्ट किया फेर लंच फेर फ़िल्म एक चलाई

कुवैत पहोंच लंदन की मिलगी या जहाज हवाई 

लंदन की हवाई यात्रा घर आली नै खूब सराही 

लंदन पहोंचे सांझ ताहिं फेर सांस थोड़े ले पाये रै।।

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

2

विवेक भाई एयरपोर्ट पै देखै था वो बाट म्हारी 

सारा सामान लाद लिया फेर चली म्हारी सवारी

सत्तर मील की दूरी साउथ एन्ड रहवै

बेटी प्यारी 

दोहती अनन्या दोहता आदि सबकै खुशी छारी

कुलदीप शीतल नै आंख्यां पै सारे बिठाये रै।।  

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

3

रात का खाना खाकै या नींद गजब की आई 

सपने मैं घूमै रोहतक दे इंद्रप्रस्थ का पार्क दिखाई  

सबतें सम्पर्क टूट गया सिम कार्ड ना

मिल पाई 

जी मैं जी आग्या मेरै जिब चलगी वाई फाई

नमस्ते लंदन से के फूल सब धोरै पहोंचाये रै ।।

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

4

स्वीमिंग पूल अर पार्क अगले दिन घूम कै आये 

लंदन आई जाकै दूजे दिन पूरा लंदन देख पाये 

विंडसर कैस्टल तीजे दिन उड़ै मजे खूब उड़ाए 

चौथे दिन बीच पै घूमे बालक झूले खूब झुलाये

रणबीर दस तारीख नैं बेल्जियम के प्लान बनाये रै ।। 

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

चालै कोण्या जोर

 चालै कोण्या जोर

मेरा चालै कोण्या जोर मनै लूटैं मोटे चोर

नहीं पाया कोये ठौर कटी पतंग की डोर

मनै लावैं डांगर ढ़ोर यो किसा घोटाला रै।

मेरा बोलना जुल्म हुया,उनका बोलना हुक्म हुया

सारे ये मुनाफा खोर ये थमा धर्म की डोर

बनावैं ये म्हारा मोर सुहानी इनकी भोर

ऐश करैं डाकू चोर मन इनका काला रै।

ये भारत के पालन हार,क्यों चोरां के सैं ताबेदार

म्हारे पै टैक्स लगावैं बोलां तो खावण आवैं

मिल्ट्री सैड़ दे बुलावैं चोरां की मौज करावैं

काले का सफेद बणावै भजैं राम की माला रै।

महंगाई की मार कसूती,सिर म्हारा म्हारी जूती

यो रोजगार मन्दा सै यो सिस्टम गन्दा सै

यो मालिक का रन्दा सै घालै दोगला फंदा सै

क्यूकर जीवै बन्दा सै हुया ढंग कुढाला रै।

पत्थर पुजवा बहकाये,भक्षक रक्षक दिखाये

काले नाग डसगे क्यों ,ये शिकंजे कसगे क्यों

दो संसार बसगे क्यों गरीब जमा फ़ंसगे क्यों

रणबीर पै हंसगे क्यों कर दिया चाला रै।।

शिक्षा और स्वास्थ्य

 शिक्षा और स्वास्थ्य


प्रतिगामी ताकतां नै देखो किसा उधम मचाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।
1
शिक्षा स्वास्थ्य के सरकारी ढांचे पहले तो खराब करै
खराबी के दोष जान कै डॉक्टर टीचर पै ल्याण धरै
कितै ढांचे का टोटा होरया कितै कम स्टाफ दुख भरै
सच कहता हुया मानस यो सरकार तैं आज घणा डरै
बिठा दिया सरकारी ढांचा प्राइवेट का धर्राटा ठाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।
2
यो ढांचा पड़ेगा बचाना गरीब की जिब पार जावैगी
एक बात स्टाफ समझले जनता की मदद चाहवैगी
नहीं बचे स्कूल अस्पताल तो जनता खूबै धक्के खावैगी
महंगी शिक्षा और इलाज का बोझ किस तरियां ठावैगी
भक्षक बनकै रक्षक छागे अंधविश्वास खूब फैलाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।
3
पढ़ लिख कै बालक म्हारे कदे बेरा पाड़लें लुटेरयां का
उलझाल्यो जात धर्म पै जितना तबका सै कमेरयां का
कमेरे समझे कोण्या इब लग जाल घल्या बघेरयां का
कावड़ कदे कुम्भ का मेला ध्यान बांट दिया चितेरयां का
शिक्षा स्वास्थ्य के ढांचे का जानबूझ भट्ठा बिठाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।
4
रोडवेज का हाल देखल्यो जमा धरती कै मार रहे
प्राइवेट बस चलाकै नै ये जनता का पीसा डकार रहे
जनता सड़कों पै आ बैठी ये मुकदमे कर तयार रहे
जनता का कोये ख्याल नहीं कर्मचारी नै दुत्कार रहे
रणबीर सिंह सरकारी ढांचा सोचो कैसे जा बचाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।

मिलकै नै आवाज लगावां बुनियादी हक क्यों खोस लिए।।

 मिलकै नै आवाज लगावां बुनियादी हक क्यों खोस लिए।।

के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।
1
शिक्षा का अधिकार म्हारा आज पढन क्यों बिठाया
स्वास्थ्य का अधिकार म्हारा कर हवन क्यों भकाया
रोजगार खोस करोड़ों के उड़ा उनके होंस दिए।।
के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।
2
भ्रष्टाचार के पंख क्यों ये चारों कांहीं फैला दिए
बेरोजगारों के कॉन्ध्यां पै कावड़ क्यों टिका दिए
आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी वे शहीद बना ठोस दिए।।
के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।
3
जिणनै भी आवाज उठाई वे दमन का शिकार बनाये
मजदूर किसानों के ऊपर बहोत घणे कहर ढाये
दबे नहीं लाठी गोली तैं  जनता नै
बढ़ा रोष दिए।।
के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।
4
जात धर्म पै कलह कराकै एकता जनता की तोड़ी
बेरोजगारी भुखमरी तैं आज ध्यान
जनता की मोड़ी
रणबीर लांबे चौड़े वायदे जनता साहमी परोस दिए।।
के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।