Sunday, 28 December 2025

नया साल

1****
नया साल मुबारक एक रागनी के माध्यम से 
फासीवाद का शिकंजा सत्ता नए साल मैं बढावैगी।।
इसके विरोध मैं या जनता सडकां के ऊपर आवैगी।।
1
यो बेरोजगारी का मुद्दा इसका कितै बी जिकर कोन्या
फांसी खा खाकै किसान मरैं इसका कोय फिकर कोन्या 
आठ जनवरी नै देश मैं किसानी गांव बंध करावैगी।।
2
शिक्षा म्हंगी इलाज महंगा गरीब जमा निचौड़ दिया
असंगठित मजदूर मारया सारा कानून मरौड़ दिया
मजदूर कर्मचारी यूनियन दिल्ली मैं विरोध जतावैगी।।
3
पुलवामा कदे सीएए ल्यावैं जात धर्म पै बांट रहे
आर्थिक संकट के हल तैं शाह मोदी जी नाट रहे
नये साल मैं बैर आपस का सत्ता और घणा बधावैगी।।
4
जात धर्म पै लडां नहीं हम असली मांग उठावांगे
हो एकजुट नए साल मैं हम धर्मान्धता नै हरावांगे
देश की जनता मिलकै रणबीर बहुविविधता बचावैगी।।
2*****
साल 26
नया साल चौखे ब्योन्त आल्यां का
नए  साल मैं चौखे ब्यौंत आला खूबै काच्चे काटैगा भाई रै ॥ 
ऑन लाइन पर काम करावैगा बढ़िया स्कीम चलाई रै ॥ 
1
मॉल घने गजब के सब कुछ मिलै एक छत नीचै 
बाहर खड़या गरीब तो अपने खाली पेट नै भींचै 
ब्यौंत आला घरां बैठ करै बुकिंग जहाज हवाई रै ॥ 
2
अपोलो बरगे फाइव स्टार अस्पताल गजब खोले 
इलाज घना मंहगा करया सुनकै म्हारा हिया डोले 
गरीब मरो सड़कै नै कहवण की ये मुफ्त दवाई रै ॥ 
3
एयर कंडीशन्ड जीवन का न्यारा यो संसार बनाया 
स्कूल घर कार अस्पताल सारै इसका जाल बिछाया 
नये साल की आज रात नै जावैगी धूम मचाई रै ॥ 
मुबारक क्यांकि अर किसनै थोड़ा सै गम्भीर सवाल 
इंकलाब जिंदाबाद ला नारा किया सै गजब कमाल 
जनता नै बेचैनी अपनी पूरी दुनिया ताहिं बताई रै ॥ 
सब रंगां का समावेश भारत देश हमारा देश होवै 
जात पात और मजहब का आड़ै ना यो क्लेश होवै 
रणबीर सोच समझ कै करता अपनी  कविताई रै ॥
3******
नया साल 2026
हम नए साल में कदम मंजिल की तरफ बढ़ाएंगे ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥ 
1
गुणवत्ता वाली पढ़ाई वास्ते  जनता लाम बन्द करेंगे 
सबको सस्ता इलाज मिले ऐसा मिलके प्रबंध करेंगे
निर्माण के उदाहरण हम करके सबको दिखाएंगे ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥ 
2
अन्ध विश्वास के खिलाफ लंबा चलाएं एक अभियान 
सबका मिलके होगा प्रयास बने संवेदनशील इंसान 
प्रति गामी विचार को  वैज्ञानिक आधार से  हराएंगे ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥ 
3
मिल करके करेंगे विरोध  सभी दलित अत्याचार का 
महिला समता समाज में हो मुद्दा बनायेंगे प्रचार का 
रोजगार मिले सबको ये हम सब अभियान चलाएंगे ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥ 
4
सद्भावना बढे समाज में नफरत का विरोध करेंगे 
पूरे समाज का विकास हो इस पे पूरा शोध करेंगे 
नया साल मुबारक हो रणबीर आगे बढ़ते ही जायेंगे ॥
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥
4*****
 2026 का साल 
आज नया साल शुरू होग्या इसमैं नया हिंदुस्तान के चाहवै सै।।
किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
1
आंदोलन कारी किसानों को म्हारा सै क्रांतिकारी सलाम भाई  
जो किसान म्हारे शहीद होगे इतिहास मैं होग्या नाम भाई 
आज किसानी संघर्ष हटकै अपनी मांग जोर लगा उठावै सै।।
 किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
2
देश मैं इंसानियत हटकै उभरै हम इस साल मैं हाँगा लावांगे
म्हारा प्रजातंत्र फेर हुँकार भरै मिलकै संविधान नै बचावांगे
इस लड़ाई का राह हमनै यो किसानी संघर्ष सही दिखावै सै।।
किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
3
कदर जनता की आवाज की हटकै आवै म्हारे हिंदुस्तान मैं 
इज्जत होवै गरीब कमेंरे की होज्या शांति पूरे ही जहान मैं
हो गजब का भारत म्हारा जनता इंकलाब का नारा लावै सै।।
किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
इस साल मैं ईसा माहौल बनै इंसान नै पूरा सम्मान मिलै
कहै रणबीर नहीं लुटैं कमेरे उन सबका हट कै चेहरा खिलै 
संयुक्त किसान मोर्चे की जीत नए समाज की राह बतावै सै। 
किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
5******
 *2026 का नया साल* 
*आज नया साल शुरू होग्या हर हिंदुस्तानी इसमैं के चाहवै रै ।।*
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।*
1
आंदोलन कारी किसानों को म्हारा सै क्रांतिकारी सलाम भाई  
जो किसान म्हारे शहीद होगे इतिहास मैं होग्या नाम भाई 
*बाइस मैं भी संघर्ष जीत्या था सरकार  वायदे नहीं पुगावै रै।।*
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।*
2
देश मैं इंसानियत हटकै उभरै हम इस साल मैं हाँगा लावांगे
म्हारा प्रजातंत्र फेर हुँकार भरै मिलकै संविधान नै बचावांगे
*इस लड़ाई का राह हमनै यो किसानी संघर्ष सही दिखावै रै।।*
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।*
3
कदर जनता की आवाज की हटकै आवै म्हारे हिंदुस्तान मैं 
इज्जत होवै गरीब कमेंरे की होज्या शांति पूरे ही जहान मैं
*हो गजब का हिंदुस्तान म्हारा जनता ये नारे आज गूंजावै रै।।*
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।*
इस साल मैं ईसा माहौल बनै इंसान नै पूरा सम्मान मिलै
कहै रणबीर नहीं लुटैं कमेरे उन सबका हट कै चेहरा खिलै 
*इसकी खातर करां संघर्ष शहीद भगत सिंह  राह दिखावै रै।* 
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।* 


6*****
2026 का साल 
आज नया साल शुरू होग्या इसमैं नया हिंदुस्तान के चाहवै सै।।
किसानी संघर्ष टीकरी बॉर्डर का इसका जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
1
आंदोलन कारी किसानों को म्हारा सै क्रांतिकारी सलाम भाई  
जो किसान म्हारे शहीद होगे इतिहास मैं होग्या नाम भाई 
आज देश किसानी संघर्ष का उभार फेर यो दिखावै सै।।
 
2
देश मैं इंसानियत हटकै उभरै हम इस साल मैं हाँगा लावांगे
म्हारा प्रजातंत्र फेर हुँकार भरै 
मिलकै संविधान बचावांगे
इस लड़ाई का राह हमनै यो किसान मजदूर संघर्ष दिखावै सै।।

3
कदर जनता की आवाज की हटकै आवै म्हारे हिंदुस्तान मैं 
इज्जत होवै गरीब कमेंरे की होज्या शांति पूरे ही जहान मैं
हो गजब का भारत म्हारा जनता इंकलाब का नारा लावै सै।।
इस साल मैं ईसा माहौल बनै इंसान नै पूरा सम्मान मिलै
कहै रणबीर नहीं लुटैं कमेरे उन सबका हट कै चेहरा खिलै 
इंकलाब जिंदाबाद का नारा नए समाज की राह बतावै सै।।
7******
 नए साल का सपना 
नया साल 2026
पूरा साल चल्या गया यो दो हजार पच्चीस साहूकारां का।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का।।
1
सर्व समावेशी शिक्षा हो स्कूल होवैं एक समान 
हरेक जात का सम्मान हो भाईचारा हो बलवान 
मरीज डॉक्टर का मेल हो इलाज पावै हर इंसान 
फसल कीमत मिल पावै फलें फुलें म्हारे किसान 
पर्दाफाश होज्या धर्म के आज के इन ठेकेदारां का।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का
2
मिलावट म्हारे समाज मैं नहीं टोही पावै चाहवां
नफरत का जहर समाज नै आज ना खावै चाहवां
बेरोजगारी कम होवै इसा माहौल आवै चाहवां 
कोये मानस प्रदेश में ना भूखा सो ज्यावै चाहवां 
होवै महिला महफूज ना जिकरा बचै बलात्कारां का।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का
3
म्हारा यो सबका हरियाणा गूँज उठै यो नारा भाई
छुआछूत खत्म हो सुधरै यो वातावरण म्हारा भाई
सरकार करै ख्याल बणै गरीबां का साहरा भाई
पोर्न फिल्म पै रोक लागै नशे तैं मिलै छुटकारा भाई
या जनता राह बाँधेगी देश भर मैं इन बदकारां का ।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का।।
4
युवा नै रोजगार मिलै कति ना फिरै आवारा भाई
सुख का सांस लेवै सरतो सुखी हो करतारा भाई
विकास चालै सही राही सही होवै बंटवारा भाई
संविधान के अनुसार चलै हिंदुस्तान यो म्हारा भाई
रणबीर सिंह छब्बीस साल हो मेहनत के अदाकाराँ का ।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का।।

पीसे का जुगाड

धौला गाम सोहने का स्मार्ट गाम  बनावैंगे देखो।।
मीडिया मैं करा प्रचार वाह वाही पावैंगे देखो।।
1
पांच गाम छांटे कहते इननै स्मार्ट बनावैंगे रै
बाकी साढे़ सात हजार बाट मैं जीवन बितावैंगे रै
पांच का भी ना बेरा कितने स्मार्ट हो ज्यावैंगे देखो।।
2
दिल्ली मैं राष्ट्रपति नै उद्घाटन का बटन दबाया
गाम आल्यां नै बजा ताली उनका सम्मान जताया
दुनिया मैं खबर गई गाम नै चांद पै पहुँचावैंगे देखो।।
3
स्मार्ट सिटी स्मार्ट गाम बुलेटिन का नारा देखो
काला धन बैंक खात्यां मैं पंद्रा लाख आरया देखो
साथ सबका विकास सबका ये शगूफे सुनावैंगे देखो।।
4
गरीब की पढ़ाई सेहत सब पढ़न बिठाई भाई
अंबानी धोरै पहोंचा दी टैक्स लगा म्हारी कमाई भाई
सबक पांच नै ये पिचानवै जरूर 
सिखावैंगे देखो।।

महिलाओं बारे रागनी

महिलाओं बारे रागनियां 
1)
 जागी महिला अब हरियाणे की 
जुल्मो सितम नहीं सहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
1
खेतों में खलिहानों में दिन रात कमाई करती हैं
फिर भी दोयम दरजा हम बिना दवाई मरती हैं
बैठी बैठी नहीं सहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
2
देवी का दरजा देकर इस देवी को किसने लूटा
सदियों से हम गई दबाई समता का दावा झूठा
दहेज़ की बलि नहीं चढ़ेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
3
इंसान बन गए हैवान आज होते हैं अत्याचार 
यहाँ देखो नैया डूब रही अब हम थामेंगी पतवार
अबला बनकर नहीं मरेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
4
आगे बढे ये कदम हमारे पीछे ना हटने पायेंगे
जो मन धार लिया हमने अब करके वही दिखाएंगे
रणबीर सारी बात लहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।

2)

 जागी महिला हरियाणे की
करकै कमाल दिखाया सै, मिलकै नै कदम उठाया सै, खेतां मैं खूब कमाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
1. 
देश की आजादी खातर अपणी ज्यान खपाई बेबे
गामड़ी सांघी खिडवाली मैं न्यारी रीत चलाई बेबे
लिबासपुर रोहणात मैं बहादरी थी दिखलाई बेबे
अंग्रेजां तै जीन्द की रानी गजब करी लड़ाई बेबे
अंग्रेजां का भूत बनाया, यो सब कुछ दापै लाया,
देश आजाद कराणा चाहया जागी महिला हरियाणे की।।
2. 
देश आजाद होये पाछै हरित क्रांति ल्याई बेबे
खेत क्यार कमावण तै कदे नहीं घबराई बेबे
डांगर ढोर संभाले हमनै दिन रात कमाई बेबे 
घर परिवार आगै बढ़ाये स्कूलां करी पढ़ाई बेबे
हरियाणा आगै बढ़ाया सै ,सात आसमान चढ़ाया सै,
गुण्डयां का जुलूस कढ़ाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
3. 
हमनै गाम बराहणे मैं दारू बन्दी पै गोली खाई सै
खेलां के मैदानां मैं जगमति सांगवान खूबै छाई सै
सुशीला राठी बड्डी डॉक्टर हरियाणे की श्यान बढ़ाई सै
नकल रोकती बाहण सुशीला जमा नहीं घबराई सै
चावला नै नाम कमाया सै, महिला का मान बढ़ाया सै
यो रस्ता सही दिखाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
4. 
संतोष यादव बाहण म्हारी करकै कमाल दिखाया हे
सुमन मंजरी डीएसपी पुलिस मैं नाम कमाया हे
सांगवान मैडम नै बिमल जैन तै सबक सिखाया हे
नवराज जयवन्ती श्योकन्द जीवन सफल बनाया हे
ज्योति अरोड़ा सरोज सिवाच प्रशासन खूब चलाया हे
ये आगै बढ़ती जारी बेबे, करकै कमाल दिखारी बेबे
रणबीर मान बढ़ारी बेबे, जागी महिला हरियाणे की।।

3)

सावित्री बाई फुले के पुण्य दिवस के मौके पर

एक रागनी----
सावित्री बाई फुले आपको शत शत है प्रणाम म्हारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
1
तीन जनवरी ठारां सौ कतीस जन्मी दलित परिवार मैं
नौ साल की की शादी होगी ज्योतिराव फुले के घरबार मैं
उन बख्तों मैं समाज सुधार का था मुश्किल काम थारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
2
महिला शिक्षा की खातिर सबतैं पहला स्कूल खोल दिया
रूढ़िवादी विचारकों नै  डटकै हमला थारे पै बोल दिया
ना पाछै कदम हटाये महिला स्कूल खोले तमाम ठारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।

3
बाल विवाह के खिलाफ विधवा विवाह ताहिं छेड़ी जंग
सती प्रथा छुआछूत के किले विचार फैला करे थे तंग
ब्राह्मण विधवा गर्भवती का ज़िम्मै लिया इंतज़ाम सारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
4
ब्राह्मण ग्रंथ मत पढ़ो जात पात से बाहर आ जाओ
मेहनत से जाति बन्धन तोड़ो शिक्षा पूरी तम पा जाओ
लिखै रणबीर बरोने आला महिला शिक्षा का पैगाम थारा।।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।

4)

भटेरी गांव की भंवरी बाई, संघर्ष की जिनै राह दिखाई,सारे देश मैं छिड़ी सै लड़ाई, साथ मैं चालो सारी बहना।।
1
साथिन भंवरी नहीं अकेली हम कसम आज उठाते सारे
बाल विवाह की बची बुराई इसके खिलाफ जंग चलाते सारे
जालिमों की क्यों ज्यान बचाई, कचहरी क्यों मदद पै आई, सब छिपा रहे हैं सच्चाई,भंवरी साथिन पुकारी बहना।।
2
देकर झूठी दलीलें देखो बलात्कारियों को बचाते क्यों
परम्परा का ढोंग रचाकर असल सच्चाई को दबाते क्यों
भंवरी ने सही आवाज उठाई,जुल्मी चाहते उसे दबाई,समझ गई भरतो भरपाई, भंवरी नहीं बिचारी बहना।।
3
इस तरह से नहीं झुकेंगी जुल्मो सितम से टकरायेंगी
परम्परा की गली सड़ी जंजीरें आज हम तोड़ बगायेंगी
भटेरी ने नई लहर चलाई, समता की है पुकार लगाई, जयपुर में हूंकार उठाई, यह जंग रहेगी जारी बहना।।
4
फासीवाद का खूनी चेहरा इससे हरगिज ना घबरायेंगी
आगे बढ़े हैं कदम हमारे हम नया इतिहास बनायेंगी
रणबीर सिंह ने कलम चलाई, अपने डिक्ल की बात बताई,सच की हुई जीत दिखाई, ना सेखी है बघारी बहना।।

5)

 आज हम देखें औरत की जो सही तस्वीर सखी।। 
दिया समाज ने जो हमें उसको कहती तकदीर सखी।। 
घर में खटना पड़ता मर्दों की नजर में मोल नहीं औरत भी समझे इसे किस्मत लगा सकी तोल नहीं 
करती हम मखौल नहीं हमारी हालत है गंभीर सखी।।
घर खेत में काम करें जुताई और बुवाई करती बहना 
चारा पानी झोटा बुग्गी दिन और रात मरती बहना 
बैठी आहें भरती बहना समझें किस्मत की लकीर सखी।।
कैसा सलूक करते हमसे मालिक बंधवा का व्यवहार यहां 
खाना दोयम कपड़ा दोयम मिले सारा दोयम संसार यहां 
करोड़ों महिला बीमार यहां इलाज की नहीं तदबीर सखी।।
अहम फैंसले बिना हमारे मरद बैठ कर क्यों करते देखो 
जुल्म ढाते भारी हम पर नहीं किसी से डरते देखो 
हम नहीं विचार करते देखो तोडे़ं कैसे यह जंजीर सखी ।।
खुद चुपचाप सहती जाती मानें कुदरत का खेल इसको 
सदियों से सहती आई समझें राम का मेल इसको 
क्यों रही हो झेल ईसको मसला बहोत गम्भीर सखी।।
सदियों से होता ही आया पर किया मुकाबला है हमने 
सिर धड़की बाजी लगा नया रास्ता अब चुना है हमने 
जो सपना बुना है हमने होगा पूरा लिखे रणबीर सखी।।

6)

 दिन काटे चाहूं
दिन काटे चाहूं मैं ये कोण्या सुख तैं कटण देवैं।।
चुपचाप जीणा चाहूं मैं फेर कोण्या टिकण देवैं।।
1
झाड़ झाड़ बैरी होगे आज हम बरगी बीरां के
मोह माया तैं दूर पड़े फेर दिल डिगें फकीरां के
नामी बदमाश पाल राखे बाबा ना पिटण देवैं।।
अच्छाई के बोये बीज ये जमा नहीं पकण देवैं।।
2
कई बै जी करै फांसी खालयूं इनकै अकल लागै
सहेली बोली मेरी बात मान मत प्राणां नै त्यागै
किसे कै कसक ना जागै हमनै नहीं बसण देवैं।।
आगै बढ़े कदम म्हारे उल्टे हम नहीं हटण देवैं।।
3
बताओ पिया के करूं मैं इणपै तूँ गीत बनादे नै
द्रोपदी चीर हरण गाओ म्हारे चीर हरण पै गादे नै
बणा रागनी सुनादे नै हम तेज नहीं घटण देवैं।।
हरयाणे मैं शोर माचज्या दबा इसा यो बटन देवैं।।
4
गाम के गोरै खड़े पावैं भैंस के म्हां कै ताने मारैं
इंसानियत जमा भूलगे भों किसे की इज्जत तारैं
बिना बात ये खँगारैं हमनै और घणी घुटण देवैं।।
रणबीर सिंह बरगे म्हारी इज्जत ना लुटण देवैं।।

7)

या बढ़गी बेरोजगरी, यो करजा चढ़ग्या भारी, हुई दुखी जनता सारी, महान हुया हरियाणा।
1
म्हारे बालक मरैं बिना दवाई, महंगी होंती जावै पढ़ाई
नाबराबरी साँस चढ़ारी , कारपोरेट अत्याचारी, मीडिया इसका प्रचारी, महान हुया हरियाणा।
2
जात पात मैं बाँटी जनता, विरोध किया तो काटी जनता
किसान की श्यामत आरी, महिला की इज्जत जा तारी, बढ़ती जावै चोरी जारी
महान हुया हरियाणा।
3
झूठे जुमले रोजाना देते,खबर म्हारी कदे ना लेते, 
होंती जा तबियत खारी, जनता हिम्मत नहीं  हारी, शासक हुया भ्रष्टाचारी, 
महान होया हरियाणा। 
4
महिला वंचित सुणल्यो सारे, बिना संघर्ष के नहीं गुजारे
लड़े हैं जीत हुयी म्हारी, जीतैंगे भरतू  भरतारी , यो रणबीर म्हारा लिखारी, 
महान हुया हरियाणा ।

8)

एक आह्वान रागनी 
हम कदम मिलजुल के मंजिल की तरफ बढ़ाएं बहना ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएं बहना ॥ 
गुणवत्ता वाली पढ़ाई वास्ते  जनता लाम बन्द करेंगी 
सबको सस्ता इलाज मिले ऐसा मिलके प्रबंध करेंगी 
निर्माण के उदाहरण हम करके सबको दिखाएं बहना ॥ 
अन्ध विश्वास के खिलाफ लंबा चलाएं एक अभियान 
सबका मिलके होगा प्रयास बने संवेदनशील इंसान 
प्रति गामी विचार को  वैज्ञानिक आधार से  हराएं बहना ॥ 
मिल करके करेंगे विरोध  सभी दलित अत्याचार का 
महिला समता समाज में हो 
मुद्दा बनायेंगे प्रचार का 
रोजगार मिले सबको ये हम सब अभियान चलाएं बहना ॥ 
सद्भावना बढे समाज में नफरत का विरोध करें सभी
पूरे समाज का विकास हो इस पे पूरा शोध करें सभी 
बढ़े हुए कदम हमारे रणबीर आगे बढ़ते ही जायें बहना ॥

9)

जाल बिछा हमनै लूट रही कारपोरेट की मकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
1
म्हारी मेहनत के दम पै और अमीर होंते जावैं देखो
खून पसीना म्हारा बहता ये बैठ एसी मौज उडावैं देखो
के के दुख गिनावैं देखो कड़ म्हारी जमा अकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
2
म्हारी लूट का तोड़ खुलासा कार्ल मार्क्स करग्या बताया
मेहनत म्हारी करै पैदा पूंजी कैपिटल किताब मैं समझाया 
सारे जग मैं सच पाया भारी पूंजीवाद की तकड़ी बेबे ।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
3
दुनिया के घणे देश ये पूंजीवाद की पूजा करते देखो
अपनी कूबध लहकोवण नै घनी ए झूठ घड़ते देखो
अपनी करी मैं घिरते देखो विकास राह गलत पकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
4
भारत मैं भी आज कारपोरेट साम्प्रदायिकता तैं हाथ मिलारया
कमेरयां की एकता तोड़ण नै यो धर्मांधता खूब फैलारया 
लिख रणबीर भी समझारया तोड़ो नफरत की लकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।

10)

सीढ़ी घड़ादे चन्दन रूख की सासड़ तीज ये मेरी आई री।।
चन्दन रूख ना म्हारै क्यों ना पीहर तैं घड़ा कै ल्याई री।।
1
अपनी तैं दे दी झूल पाटड़ी म्हारे तैं  दिया यो पीसणा
फोडूँ री सासड़ चाक्की के पाट क्यों चाहवै मनै घिसणा
आज तो दिन त्योहार का सै चाहिए ऊंच नीच भुलाई री।।
2
मनै खन्दा दे री मेरे बाप कै बीर आया यो माँ जाया
बहु इबकै यहीं तीज मना री तेरा पिया छुट्टी आया
गगन गरजै बिज्जल पाटै या मरती फसल तिसाई री।।
3
लरज लरज कै जावै बहू या जाम्मन की डाहली देख
पड़कै नाड़ ना तुड़ा लिए तेरी मां देगी मनै गाली देख
नन्द भी हचकोले मारैगी कहवैगी पहलम ना बताई री।।
4
मन मैं गुद गुद सी माच रही झूलण जाऊं बाग मैं हे
चढ़ पींघ पै जोर लगा कै मैं पींघ बधाऊँ बाग मैं हे
तीज रल मिलकै मनावां सारे रणबीर की या कविताई री।।

11

 हरियाणा के समाज मैं औरत कै घली जंजीर, क्यों हमनै दीखती नहीं।।
1
पहलम दुभान्त हुया करती
दुखी सुखी हम जिया करती
पीया करती इलाज मैं यो परम्परा का नीर, चिता तैं उठती नहीं।।
2
पेट मैं ए मारण की तैयारी
घनखरी दुनिया हुई हत्यारी
गांधारी आज भी लिहाज मैं
पीटती जावै वाहे लकीर,नई राही दीखती नहीं।।
3
बचावनिया और मारनिया के 
घले पाले खेल करनिया के
घेरनिया के मिजाज मैं यो 
मामला सै गम्भीर, क्यों हमनै सूझती नहीं।
4
समाज करना  चाहवै सफाया
सैक्स सेलेक्शन औजार बनाया
बताया सही अंदाज मैं, झूठ नहीं सै रणबीर, कलम चूकती नहीं।।

12)

आयी तीज 
मॉनसून नै इबकै बहोतै बाट या दिखाई बेबे ।।
बरस्या नहीं खुलकै बूंदा बांदी सी आयी बेबे ।।
साम्मण के मिहने मैं सारे कै हरयाली छाज्या 
सोचै प्रदेश गया पति भाज कै घर नै आज्या 
ना गर्मी ना सर्दी रूत या घणी ए सुहाई बेबे ।।
कोये हरया लाल कोये जम्फर पीला पहर रही 
बाँट गुलगुले सुहाली फैला खुशी की लहर रही 
कोये भीजै बूंदां मैं कोये सुधां लत्यां नहाई बेबे।।
 आयी तीज बोगी बीज आगली फसल बोई या 
झूला झूल कै पूड़े खाकै थाह मन की टोही या 
पुरानी तीज तो इसी थी आज जमा भुलाई बेबे ।। 
बाजार की संस्कृति नै म्हारी तीज जमा भुलाई 
इस मौके पर जाया करती प्रेम की पींघ बढ़ायी 
कहै रणबीर सिंह कैसे करूँ आज की कविताई बेबे।।

पौष्टिक आहार का गहराता संकट

पौष्टिक आहार का गहराता संकट

भारत में भोजन और पोषण का संकट दो ध्रुवों में बंटा दिखता है। ग्रामीण भारत में अब भी कुपोषण, रक्ताल्पता, कम वजन जैसे मामलों का उच्च स्तर पाया जाता है। यहां बच्चों और महिलाओं की पोषण स्थिति विशेष चिंता का विषय है। दूसरी ओर, शहरी क्षेत्र में भोजन की उपलब्धता तो है, पर उसकी गुणवत्ता की समस्या है।

दुनिया आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां आर्थिक तरक्की और तकनीक की चमक के बीच भोजन जैसी बुनियादी जरू जरूरत इंसान की पहुंच से दूर होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रपट बताती है कि दुनिया की बयालीस फीसद आबादी पौष्टिक भोजन पर खर्च नहीं कर पाती। यह केवल गरीबी का आंकड़ा नहीं, बल्कि वैश्विक नीतियों, बाजार व्यवस्थाओं और आर्थिक असमानताओं का ऐसा आईना है, जिसमें हमारी सामूहिक विफलता दिखती है। जब भोजन जैसे मानव अधिकार को भी बाजार के हवाले कर दिया जाए, तो समाज कमजोर होता है, चाहे वह कितना ही विकसित क्यों न दिखे। भारत का विकास ढांचा मजबूत दिख सकता है, पर उसकी बुनियाद में पोषण का अभाव साफ महसूस होता है।

वैश्विक स्तर पर देखें तो अफ्रीका, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देश पौष्टिक भोजन के संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सहारा के दक्षिण वाले अफ्रीकी क्षेत्र में तो हालात इतने खराब हैं कि 60 से 80 फीसद आबादी पौष्टिक भोजन का खर्च ही नहीं उठा सकती। वहीं यूरोप, आस्ट्रेलिया और उत्तर अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भोजन की पहुंच बेहतर है, पर वहां असंतुलित आहार, प्रसंस्कृत खाद्य और मोटापे जैसी समस्याएं स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। भारत में भोजन और पोषण का संकट दो ध्रुवों में बंटा दिखता है। ग्रामीण भारत में अब भी कुपोषण, रक्ताल्पता, कम वजन जैसे मामलों का उच्च स्तर पाया जाता है। बच्चों और महिलाओं की पोषण स्थिति विशेष चिंता का विषय है। दूसरी ओर, शहरी भारत में खाने की उपलब्धता तो है, पर उसकी गुणवत्ता की समस्या है। समय की कमी, काम का तनाव, और तेज बाजार-चालित संस्कृति ने डिब्बाबंद खाद्य, जंक फूड और मीठे पेयों को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बना दिया है। एक तरफ कुपोषण और दूसरी ओर अतिपोषण, दोनों मिलकर स्वास्थ्य संकट को और जटिल बनाते हैं।
खाद्य महंगाई ने भारतीय रसोई को जिस तरह प्रभावित किया है, वह चिंता का विषय है। दालें, खाद्य तेल, फल, सब्जियां और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने संतुलित भोजन की लागत बहुत बढ़ा दी है। एक औसत भारतीय परिवार की मासिक आमदनी का बड़ा हिस्सा केवल कैलोरी-आधारित भोजन पूरा करने में ही खर्च हो जाता है, जबकि पौष्टिक भोजन की थाली उनकी पहुंच से दूर चली जाती है। यह स्थिति बताती है कि भोजन केवल बाजार व्यवस्था का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे एक सामाजिक सुरक्षा अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत की कृषि अब भी मानसून पर अत्यधिक निर्भर है। मगर असामान्य बारिश, सूखा, बाढ़ और तापमान में बदलाव ने फसल उत्पादकता को प्रभावित किया है, जिससे बाजार में दाम बढ़ते हैं। समस्या नीतिगत प्राथमिकताओं की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली अभी भी मुख्य रूप से अनाज-आधारित है, गेहूं और चावल पर केंद्रित है। जबकि शरीर को विविध पोषक तत्त्वों की भी आवश्यकता होती है।

भारत में फल, सब्जियां, दालें, अंडे और डेयरी जैसे घटक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली या सरकारी पोषण कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। इसी वजह से मध्याह्न भोजन की तरह अन्य योजनाएं भोजन तो देती हैं, पर पूर्ण पोषण सुनिश्चित नहीं कर पातीं। दुनिया के कई देशों ने भोजन को राष्ट्रीय विकास की धुरी बनाकर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ब्राजील का 'शून्य भुखमरी' अभियान इसका उदाहरण है, जिसने स्थानीय कृषि, सबसिडी और पोषण कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया। जापान ने 'शोकू इकु' नीति के तहत बच्चों को भोजन विज्ञान की शिक्षा दी। एक ऐसा ढांचा, जो स्पष्ट करता है कि भोजन केवल खाने की वस्तु नहीं, बल्कि संस्कृति, समझ और स्वास्थ्य का आधार है। दक्षिण कोरिया ने प्रसंस्कृत खाद्य पर सख्त नियंत्रण लागू किए, जिससे जीवनशैली संबंधी बीमारियों में गिरावट आई। भारत इनसे सीख लेकर अपने कार्यक्रमों को अधिक वैज्ञानिक और आधुनिक बना सकता है। दरअसल, ओषण की कमी का असर व्यक्तिगत स्तर से कहीं अधिक व्यापक है। यह कार्यक्षमता, शिक्षा और उत्पादकता को प्रभावित करता है। कमजोर और कुपोषित बच्चे स्कूल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। कुपोषित युवा समाज में सक्रिय योगदान दिने में पीछे रह जाते हैं।

यह समझना आवश्यक है कि भोजन कोई साधारण आर्थिक वस्तु नहीं है। यह सामाजिक न्याय, समानता और मानव अधिकार का मूल तत्त्व है। जब एक बड़ी आबादी पौष्टिक भोजन वहन नहीं कर पाती, तो समाज के लिए यह अनदेखा करने योग्य आंकड़ा नहीं रह जाता। यह श्वह बिंदु है, जहां नीतियों, बाजार, कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य-चारों को मिलकर समाधान तैयार करना होगा। भारत के पोषण संकट को समझने के लिए एक स्वस्थ थाली में वास्तव में क्या होना चाहिए, यह समझने की जरूरत है। बच्चों की थाली में प्रोटीन (दाल, अंडा, दूध), कैल्शियम, आयरन, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा अनिवार्य हैं। ये तत्त्व न केवल हड्डियों और दिमाग के विकास के लिए जरूरी हैं, बल्कि रक्ताल्पता, संक्रमणों की अधिकता, थकान, आंखों की कमजोरी और सीखने की क्षमता में कमी जैसी समस्याओं से भी बचाते हैं। यह अफसोसनाक है कि भारत के लाखों बच्चों की थाली आज भी इन आवश्यक तत्त्वों से खाली है और इसका असर उनके पूरे जीवन पर पड़ता है।

महिलाओं और वृद्धों के पोषण की जरूरतें इससे भी अधिक विशिष्ट हैं। महिलाओं को विशेष रूप से आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन की अधिक मात्रा चाहिए। वहीं वृद्धजन के लिए ओमेगा-3, फाइबर, विटामिन बी, कैल्शियम और मैग्नीशियम अत्यंत आवश्यक हैं, जो उन्हें हृदय रोग, मधुमेह, हड्डियों के क्षरण और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाते हैं। लेकिन पारिवारिक और सामाजिक संरचना के कारण अक्सर इन्हीं समूहों की थाली सबसे पहले कमजोर होती है, जिससे बीमारी एक स्थायी साथी बन जाती है। सरकारी नीतियां और जमीनी ढांचा पोषण सुधार का दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं। देश में आंगनबाड़ी और स्कूल का भोजन कक्ष बच्चों के पोषण का बड़ा आधार माने जाते हैं, पर इनकी स्थिति असमान और अक्सर संसाधन-विहीन नजर आती है। आज भारत के सामने प्रश्न यह नहीं कि भोजन कितनी मात्रा में उपलब्ध है, बल्कि यह है कि क्या गुणवत्ता पूरक भोजन सही कीमत और सही समय पर हर नागरिक तक पहुंच पा रहा है?

भारतीय कृषि में कीटनाशकों और रसायनों का उपयोग जिस तेजी से बढ़ा है, वह पोषण संकट का एक और अदृश्य कारण बन रहा है। खेतों में सब्जियां और फलों पर अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव न केवल फसलों की गुणवत्ता को कम करता है, बल्कि लंबे समय में लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव छोड़ता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि इन रसायनों का अंश खाद्य पदार्थों में बचा रह जाता है, जिससे बच्चों में तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं महिलाओं में हार्मोन असंतुलन और वयस्कों में कैंसर और गुर्दा रोगों का खतरा बढ़ जाता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस क्षेत्र में न तो निगरानी सख्त है, न ही किसानों को सुरक्षित विकल्पों की पर्याप्त जानकारी मिल पाती है। जैविक खेती और कम-रसायन जैसे विकल्पों की चर्चा तो होती है, पर जमीनी स्तर पर उनकी पहुंच नगण्य है। अगर राष्ट्र एक मजबूत, सक्षम और स्वस्थ भविष्य चाहता है, तो भोजन को बाजार का उत्पाद नहीं, बल्कि सार्वभौमिक अधिकार घोषित करना होगा। तभी वास्तविक विकास की नींव मजबूत होगी।

स्त्रोत:- 
मनीष जैसल
जनसत्ता, न्यूज़ पेपर
11 दिसम्बर 2025

मुनेश त्यागी

दुनिया के क्रांतिकारियों के महान नायक समाजवादी डॉक्टर अर्नेस्टो चे ग्वैरा
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           ,,,,,मुनेश त्यागी 

      अंतर्राष्ट्रीय क्रांतिकारी समाजवादी चे ग्वेरा ने कहा था कि पूरी दुनिया ही क्रांतिकारियों की कार्यशाला है। वे किसी देश, शहर या राज्य तक सीमित नहीं रह सकते। दुनिया में जहां कहीं भी शोषण, अन्याय, जुल्म और युद्ध हो रहे हैं, वे वहां जाकर उनके खात्में का संघर्ष छेड़ें। आज 9 अक्टूबर 1967 दुनिया के महान अंतर्राष्ट्रीयतावादी क्रांतिकारी कॉमरेड चे ग्वेरा का बलिदान दिवस है जो बोलीविया में क्रांति करते हुए वहां के जंगलों में सीआईए और बोलीविया की सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
      चे ग्वैरा एक अर्जेंटाइनी क्रांतिकारी डॉक्टर थे जिन्होंने पूरी दक्षिणी अमरीका का मोटरसाइकिल से दौरा किया था और क्रांति की तलाश करते करते मेक्सिको पहुंच गए थे और वहां उन्होंने गरीब बस्ती में जाकर कोढ़ी मरीजों का इलाज करना शुरू किया। वहीं पर उनकी मुलाकात क्यूबा के क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो से हुई और यहीं से चे ग्वैरा फिदेल कास्त्रो के दल के साथ, क्युबा में सशस्त्र क्रांति करने के लिए, उनके साथ आ गए और क्यूबा में तानाशाह बतिस्ता के शोषणकारी शासन का अंत करके, क्यूबा में सशस्त्र क्रांति की और किसानों मजदूरों का राज्य कायम किया। चे गुएवारा क्यूबा मिशन में एक डॉक्टर के रूप में भर्ती किए गए थे, मगर जब वहां लड़ाकू क्रांतिकारियों की कमी हुई तो उन्होंने दवाई का झोला छोड़कर, बंदूक हाथ में थाम ली और क्यूबा के फिदेल कास्त्रो और उनके साथियों के साथ मिलकर सशस्त्र क्रांति की, शस्त्र का विरोध शस्त्र से किया और किसान और मजदूरों का राज्य कायम किया और क्यूबा में समाजवादी समाज की स्थापना की।
      चे गुवेरा एक डॉक्टर थे। क्यूबा के लोगों ने उन्हें प्यार और सम्मान से "चे" की उपाधि से नवाजा। चे का अर्थ है,,, सम्मानीय, सर, महाशय। उसके बाद वे सारी दुनिया में "चे" के नाम से प्रसिद्ध हो गए और आज भी लोग उन्हें चे के नाम से ही जानते हैं। उनकी महानता इस बात से सिद्ध हुई थी कि वे दुनिया के सारे लड़ाकू क्रांतिकारियों को अपना भाई समझते थे और कहां करते थे कि दुनिया में जहां कहीं भी अन्याय और शोषण हो, वहां उनका मुकाबला और उनका खात्मा किया जाए।
     क्यूबा में चे ग्वैरा ने क्यूबन क्रांतिकारियों के साथ मिलकर सफल क्रांति की, किसानों मजदूरों का राज्य कायम किया, किसान मजदूरों की सत्ता और सरकार कायम की और वहां की सारी जनता को शिक्षा, काम, इलाज, मकान, रोजगार, सुरक्षा जैसी बुनियादी मोहिया करायी और तमाम तरह के शोषण, अन्याय, गैर बराबरी, भेदभाव का खात्मा किया और एक समाजवादी समाज का निर्माण किया ।
      अमर क्रांतिवीर चे ग्वैरा  का मानना था कि जिस आदमी के दिलो-दिमाग में अन्याय, शोषण, गुलामी, असमानता, भेदभाव और  जुल्मों सितम के खिलाफ गुस्सा नहीं आता, उनको देखकर वह परेशान नहीं होता, तो वह एक सच्चा क्रांतिकारी, एक सच्चा मार्क्सवादी लेनिनवादी नहीं हो सकता और जिसे इन्हें देख कर गुस्सा आता है, वह मेरा असली कॉमरेड है, असली क्रांतिकारी है।
     उनका कहना था कि क्रांति एक संगठित प्रयास है। यह मजदूरों और किसानों की एकता और एकजुट संघर्ष के बिना नहीं हो सकती। उनका कहना था कि "क्रांति एक ऐसा फल नहीं है जो खुद ब खुद जमीन पर आ गिरता हो, इस फल को जमीन पर गिराने के लिए मेहनत करनी पड़ती है।" उन्होंने आगे कहा कि "मैं कोई मुक्तिदाता नहीं हूं, मुक्तिदाता नहीं होते हैं, जनता स्वयं ही अपने को मुक्त करती है और जनता ही सबसे बड़ी मुक्तिदाता होती है।"
     जब बोलीविया के जंगलों में क्रांति के लिए लड़ते हुए चे गुएवारा को गिरफ्तार कर लिया गया तो साम्राज्यवादी एजेंटों द्वारा गोली मारे जाने से पहले कामरेड चे ग्वेरा ने कहा था कि "तुम मेरे शरीर को तो मार सकते हो लेकिन तुम मेरे विचारों को नहीं मार सकते।" आज यह बात शत प्रतिशत सही है कि कामरेड चे ग्वेरा हमारे बीच में नहीं है, उनके शरीर का अंत कर दिया गया है, मगर उनके विचार पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। पूरी दुनिया के लोग मजदूर, किसान, क्रांतिकारी नौजवान और छात्र उनको याद करते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलते हैं और क्रांति के अभियान में शामिल हैं और क्रांति की प्रक्रिया को, उसके मार्ग को, लगातार आगे बढ़ा रहे हैं और क्रांति की लौ को जलाये हुए हैं।
     क्यूबा की सरकार में, वे कई पदों पर मंत्री रहे। उन्होंने सारी दुनिया का दौरा किया, हिंदुस्तान का भी दौरा किया और उसके बाद कांगो में चले गए जहां उन्होंने क्रांतिकारी लड़ाई में भाग लिया और वहां के लड़ाकूओं को गुरिल्ला वारफेयर की जानकारी दी। इसके बाद एक सोची-समझी रणनीति के तहत चे ग्वैरा क्रांति करने के लिए बोलिविया में चले गए, जहां उन्होंने एक गुरिल्ला सेना का निर्माण किया और इतिहासकार कहते हैं अगर कुछ किसान गद्दारी ना करते और उनके कुछ अपने ही साथी, उनका विरोध ना करते तो उन्होंने वहां पर भी क्रांति सफल कर दी थी।
      मगर अफसोस, चे ग्वैरा बोलीविया में क्रांति के लिए लड़ते लड़ते शहीद हो गए और कुछ अपने ही साथियों की मुखबिरी के करण, वहां पर क्रांति सफल होते-होते रह गई। आज उन्हीं अमर शहीद महान क्रांतिकारी कामरेड अर्नेस्टो चे ग्वेरा का बलिदान दिवस है। यह बहुत खुशी की बात है कि चे ग्वैरा के चले जाने के बाद वहां की जनता ने क्रांति के अभियान को बंद नहीं किया। वहां के क्रांतिकारी नेतृत्व ने धीरे-धीरे अपनी गलतियों से सीखा, उन्हें सुधारा और उसके बाद बोलीविया में क्रांति कर दी। आज वहां किसानों मजदूरों की क्रांतिकारी सरकार जनता के कल्याण के कार्य कर रही है।
     दोस्तों, आइए हम उनकी याद में क्रांति के कारवां को, समाजवादी समाज व्यवस्था के अभियान को, विचारों को, आगे बढ़ाएं और उनके चाहे समाज की स्थापना करें और  भारत में एक ऐसा समाज कायम करें जिसमें सबको आधुनिक, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले, सबको आधुनिक और मुफ्त इलाज मिले, सबको काम मिले, सबको घर मिले, सबको रोटी, कपड़ा और सुरक्षा मिले, जहां पर किसी का शोषण ना हो, किसी के साथ अन्याय ना हो, किसी के साथ जुल्म ना हो, किसी के भी साथ ज्यादती ना हो और पूरे समाज में समता, समानता और भाईचारे का साम्राज्य कायम हो।
    चे ग्वेरा एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे कि जहां धर्म, जाति, भाषा, वर्ण, क्षेत्र और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव ना हो, आदमी और औरत के साथ बराबरी का बर्ताव किया जाए, जहां औरतों को भोग्या और मनोरंजन की वस्तु न समझा जाए, सेक्स की वस्तु ना समझी जाए और उसके साथ बराबरी का व्यवहार किया जाए और उन सबको पढ़ने, लिखने, रोजगार और अपना संपूर्ण विकास करने का मौका दिया जाए।
     महान क्रांतिकारी कामरेड चे ग्वैरा एक ऐसे ही अंतर्राष्ट्रीयतावादी क्रांतिकारी थे। उनका मानना था कि दुनिया में जहां कहीं भी जुल्म ज्यादती, अत्याचार, शोषण और अन्याय हो रहा हो, उसका वहां विरोध किया जाए और वहां के लोगों के साथ मिलकर, उस जनविरोधी व्यवस्था का खात्मा करके, उसके स्थान पर एक समाजवादी व्यवस्था वाली समाज की स्थापना करनी चाहिए। उनके विचारों की मुहिम को आगे बढ़ाया जाए। उनके लिए यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
      कॉमरेड चे ग्वेरा आज भी दुनिया के हीरो बने हुए हैं। सबसे ज्यादा नौजवान उन्हीं की छपी हुई कैंप और टी शर्ट पहनते हैं। वे समाजवाद के अमर सेनानी है, क्रांति के अमिट वाहक हैं। जब तक यह दुनिया रहेगी, जब तक यह प्रकृति रहेगी, तब तक दुनिया के महान क्रांतिकारी डॉ चे ग्वैरा का नाम अमर रहेगा।
इंकलाब जिंदाबाद,
समाजवाद जिंदाबाद, 
क्रांतिकारी चे ग्वैरा जिंदाबाद, 
क्रांतिकारी अंतर्राष्ट्रीयतावाद जिंदाबाद।
      दक्षिणी अमेरिका में अपनी मोटरसाइकिल पर घूमते हुए उन्होंने वहां की जनता के साथ, वहां के पूंजीवादी शासकों द्वारा किए जा रहे शोषण, अन्याय, जुल्म और गैर बराबरी के दर्शन किए थे और उनको अपनी आंखों से देखा था और उन्होंने कई देशों में वहां की सरकारों के साथ मिलकर, इस लुटेरे और अमानवीय पूंजीवादी निजाम का खात्मा करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि "दुनिया में सबसे बड़ी बीमारी "पूंजीवाद" है। जब तक यह पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था खत्म करके, इसके स्थान पर समाजवादी व्यवस्था कायम नहीं कर दी जाती, तब तक जनता को उसके बुनियादी अधिकार नहीं मिलेंगे।"
       आज के परिवेश में हम देख रहे हैं कि आज भी दुनिया के लुटेरे पूंजीवादी साम्राजवादी देश, पूरी दुनिया में तबाही मचाये हुए हैं, पूरी दुनिया को लूटकर, पूरी दुनिया का शोषण करके, जुल्म करके, युद्ध करके, उसके साथ अन्याय करके, अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और पूरी दुनिया पर अपना कब्जा और प्रभुत्व कायम करना चाहते हैं। नैटो और अमेरिका आज इसी अभियान में लगे हुए हैं और पूरी दुनिया से समाजवादी व्यवस्था और सोच को खत्म करने पर तुले हुए हैं। सच में चे ग्वेरा ने कितने मार्के की बात कही थी कि "पूंजीवादी साम्राज्यवाद ही सारी दुनिया की बीमारियों की जड़ है और समाजवादी समाज और संस्कृति ही सारी दुनिया की बीमारियों की असली और सबसे कारगर दवा है।" महान क्रांतिकारी चे ग्वेरा की वह बात आज भी उतनी ही सही साबित हो रही है।