[1
तीज मनाया करते
पींघ घालकै खूब झूलते हम नयों तीज मनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
1
पहरकै सूट रंग बिरंगे सब झूलन जाया करती हे
मिलकै साम्मन के गीत हम बहोतै गाया करती हे
देवर जयेठ भी इधर उधर डोलते नजर आया करते।।
छोरी बहू सब कठठी होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
2
दो दो पटड़ी पै खडी होकै खूब ए पींघ बधान्ती बेबे
उप्पर जा सिर घूम जांता जिब तले नै लखान्ती बेबे
देवर जयेठ देख नज़ारे बहोतै मजाक उड़ाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
3
दो च्यार घंटे सुख की साँस थोड़ी देर लिया करती
एक दूजी के साहमी दिल अपना खोल दिया करती
मस्त साम्मन का मौसम खीर हलवा बनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
4
बेरा ना कित गयी वे तीज कर याद दिल भर आवै
बाजार की भेंट चढ़े त्यौहार म्हारी ना पर बासावै
रणबीर सिंह मेहर सिंह बरगे न्यारे छंद बनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
[2
हिरोशिमा नागाशाकी
लिटिल बॉय और फैटमेंन परमाणु बम्ब गिराये रै।।
हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं धकाये रै।।
1
हिरोशिमा मैं पांच अगस्त को अमरीका नै बम्ब गिराया
नौ अगस्त नै नागाशाकी पै दूजा फैटमैन बम्ब भड़काया
जापान देख कै हैरान रैहग्या अमरीका नै रोब जमाया
हालात देख कै आस पास के जापान का सिर चकराया
जमा उजाड़ दिए शहर दोनूं लाशां के ढेर लगाये रै।।
हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं धकाये रै।।
2
लाखों निर्दोष लोगों की इसमैं हुई थी मौत बताई देखो
दूसरे विश्व युद्ध मैं अमरीका नै घनी फतूर मचाई देखो
आत्म समर्पण जापान का फेर भी हेकड़ी दिखाई देखो
बिना बात बम्ब गिरा दिया अमरीका घना कसाई देखो
दो बम्ब गेर दादा गिरी का सारे कै सन्देश पहोंचाये रै।।
हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं धकाये रै।।
3
औरत मर्द बच्चे इसके हजारों लाखों शिकार हुये
सालों साल बालकों कै ये जामनू कई विकार हुये
दौड़ रूकी ना हथियारों की सौला हजार तैं पार हुये
एक हजार तैं फालतू अड्डे अमरीका के तैयार हुये
जीव मरैं निर्जीव बचैं इसे बम्ब आज बनाये रै।।
हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं धकाये रै।।
4
हिरोशिमा नागाशाकी तैं कोये सबक लिया कोण्या
हथियारों की होड़ बधाई शांति सन्देश दिया कोण्या
हथियार मुक्त दुनिया का आधार तैयार किया कोण्या
ईनके डर पै अमरीका नै खून किसका पीया कोण्या
रणबीर नागाशाकी दिवस पै ये चार छन्द बनाये रै।।
हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं धकाये रै।।
[3
गलत राही
हम जिस राही पर चाळे, इसनै घर कसूते घाल्ले
गरीबी नै देखो डेरे डाल्ले, ना टिकाऊ विकास की राही।।
मुठ्ठी भर की मौज हुई देखो बड़ा हिस्सा दुःख पारया रै
रोजगार दुनिया मैं क्यों आज सिकुड़ता जारया रै
रोजगार मिल्या ना टूटे गोड्डे, प्रदेशां मैं जाकै दुःख भोगे,
अपने बालक पाच्छे छोड्डे,मजदूर की तो मर आई।।
गरीबी मैं घूमें ये लड़के, पटेल गुजरात मैं भड़के
जाट हरियाणे मैं रड़के, बढ़ी अमीर गरीब की खाई।।
रोजगार खत्म किया देश मैं ,जात पात पै लड़वाओ
जात पात फूट तैं ना काम चलै, धर्म पै दंगे करवाओ
बदेशी पूंजी लयाकै देश मैं, करैंगे विकास भारत का
सदियाँ तैं लेगे लूट कै, इस राही विनास भारत का
विकास थोड़ा लूट घणी सै, लुटेरे कमेरे बीच तणी सै
बेरोजगारी पै खूब ठणी सै, गोमाता की पूंछ पकड़ाई।।
आज जनता के दुःखां का राजपाट नै फिकर नहीं रै
शिक्षा महंगी कर दी म्हारी सेहत का जिकर नहीं रै
नफरत का जहर फैलाकै, जात धर्म पै लड़वाकै
देश भक्ति का शोर मचाकै,जनता जमा लूट कै खाई।।
[4
विवेक तैं सोचां
किसानो थारे बरगा विज्ञानी मनै कोए भी नहीं पाया।।
थारे अनुभव तैं थामनै खेती मैं खूब नाम कमाया।।
भैंस खरीदी जब थामनै धार काढ कै देखी बताई
बुलध खरीदया थामनै सार काढ़ कै देखी बताई
अगवा पिछवा हवा हिसाब हमेशा ही थामनै लगाया।।
पर मण्डी मैं जाकै बेबस विज्ञान काम नहीं आया रै
भा नै देकै मारे धरती कै जी थारा घणा दुःख पाया रै
कदे समझलयो लूट की जड़ जात्यां मैं किसान बंटाया ।।
पंजाब का किसान बोल्या आतंकवादी कैहकै पीटया
हीर गुजर जाट मैं बाँट हरियाणे का किसान भींच्या
किसान की तोड़ एकता जात्यां पै आपस मैं भिड़ाया ।।
अम्बानी अडानी की लूट रणबीर जारी रहैगी देखो
जात्यां मैं बंटी किसानी कितनी पिटाई सहैगी देखो
जात पात का पहरा चश्मा विवेक चश्मा थारा बगाया ।।
(5
कहानी घर घर की
मरे गरीबी के बोझ तलै , तेरी बी ना कोए पार चलै
अमीरी हमनै रोज छलै , शरीर को कसूत सताऊँ मैं
दो घरों में जाकै मैं करूँ यो पूरा काम सफाई का
एक घर डाक्टर का सै दूजा घर वकील अन्यायी का
दोनों घरों का के जिकरा सै , मेरे पै ना कोए फिकरा सै
ख़राब सबका जिगरा सै , पेट पकड़ बैठे दिखाऊँ मैं
वकील साहब की वकालत बस इसी ए सी बतावें
ओला बोला पीसा उन धौरे धंधा कई ढाल का चालावें
घर मैं पीटता घरआली नै , बाहर देखो शान निराली नै
बेटा ठाएँ हाँडै दुनाली नै , के के सारी खोल सुनाऊँ मैं ||
डाक्टरनी दुखी कई बर बैठी रोंवती वा पाई बेबे
शौतन का दुःख झेल रही कई बै चुप कराई बेबे
बड्डी कोठ्ठी पर दिल छोट्टे, बाहर शरीफ भित्तर खोट्टे
कुछ तो अकल के बी मोट्टे , कई बै अंदाज लगाऊं मैं ||
घूर घूर कै देखै मने ना डाक्टर का एतबार बेबे
उसकी आँख्यां मैं दीखे यो शैतान हरबार बेबे
डाक्टर का घर छोड़ दिया , तीजे घर मैं बिठा जोड़ लिया
काढ मने यो निचोड़ लिया रणबीर यो बख्त पुगाऊँ मैं ||
--
[6
छोरा छोरी जब प्यार करैं पंचायतीयां कै मरौडी लागै
आत्मा उनकी सोयी रहवै इस्पै एकदम कैसे जागै
ये समाज के पंचायती बणकै उल्टे फैंसले करते
अपने घरां मैं महिला पै परम्परा का आरा धरते
घणा कुबधी जीवन कई का दूजे खेताँ के मैं चरते
उंच नीच के बणे हिमायती ये कानूनों तैं नहीं डरते
दारू बंदी लिंग अनुपात पंचायती दूर घणी भागै ।
कहवैं हमनै कोए ना मारे उनके मां बाप मारते
माहौल बणा मारण का पंचायती आग मैं घी डारते
मां बाप पै दबाव बणा कै ये हत्या भावना उभारते
मां बाप नहीं मानें कदे तो फेर राक्षशी रूप धारते
बिना फ़तवे के प्रेमियों की फेर पंचायती ज्यान मांगै ।
दूध के धुले ना कई पंचायती इसका बेरा सबनै रै
ना चाहते हुए हो स्वीकारना इनका घेरा सबनै रै
बात माननी पडे ना तो धमकावै इनका डेरा सबनै रै
आप रूढ़ी वादी कसूते दिया चाहते अँधेरा सबनै रै
इनकी बात ना मानै कुनबा तो पंचायती खूंटी पै टाँगै ।
गाम की इज्जत के नाम तरहां तरहां के खेल रचैं
इसा घेरा देवैं परम्परावों का प्रेमी इसतैं कैसे बचैं
समों बदल गए पुराने क्यों नए पै रोले घणे मचैं
पुराणी ओछी जूती पहराते पंचायती ना कति जंचैं
कहै रणबीर सिंह पंचायती कद रूढियाँ नै त्यागै ।
[7
1983 और 1986 के दौर में लिखी एक रागनी
तर्ज:चौकलिया
बिना बात के रासे मैं इब बख्त गंवाणा ठीक नहीं।।
अपने संकट काटण नै यो जात का बाणा ठीक नहीं ।।
1
महंगाई गरीबी बेरूजगारी हर दिन बढ़ती जावै सै
जो भी मेहनत करने आला तंग दूना होता आवै सै
जब हक मांगै अपना तो वो ताण बन्दूक दिखावै सै
कितै भाई कितै छोरा उसके बहकावे मैं आवै सै
खुद का स्वार्थ, देश कै बट्टा यूं तो लाणा ठीक नहीं ।।
अपने संकट काटण नै जात का बाणा ठीक नहीं ।।
2
म्हारी एकता तोड़ण खातिर बीज फूट का बोवैं सैं
मैं पंजाबी तूँ बंगाली यो जहर कसूता ढोवैं सैं
मैं हरिजन तूँ जाट सै न्यारा नश्तर खूब चुभोवैं सैं
आपस कै महं करा लड़ाई नींद चैन की सौवैं सैं
इनके बहकावे मैं आकै खुद भिड़ जाणा ठीक नहीं।।
अपने संकट काटण नै जात का बाणा ठीक नहीं ।।
3
म्हारी समझ नै भाइयो दुश्मन ओछी राखणा चाहवै
म्हारे सारे दुखां का दोषी यो हमनै ए आज ठहरावै
खलकत घणी बाधू होगी कहै इसनै इब कौन खवावै
झूठी बातां का ले सहारा उल्टा हमनै ए वो धमकावै
इन सबके बहकावे के मैं मजदूर का आणा ठीक नहीं।।
अपने संकट काटण नै यो जात का बाणा ठीक नहीं ।।
4
दे हमनै दूर रहण की शिक्षा दे राजनीत तैं राज करै
वर्ग संघर्ष की राही बिन यो म्हारा कोण्या काज सरै
कट्ठे होकै देदयाँ घेरा यो दुश्मन भाजम भाज मरै
झूठे वायदां की गेल्याँ म्हारा क्यूकर पेटा आज भरै
रणबीर मरैं सब यारे प्यारे इसा तीर चलाणा ठीक नहीं।।
अपने संकट काटण नै जात का बाणा ठीक नहीं।।
[8
अपना हरियाणा ,सबका हरियाणा
मशीन नै तरीके बदले खेत क्यार की कमाई के ।।
बैल गाड्डी जागां बाईक बदलाव दीखैं पढ़ाई के ।।
बाईक ऊपर चढ़ कै छोरा खेत मैं जावै देखो
ज्वार काट खेत म्हं तैं भरौटा बना धर ल्यावै देखो
भरौटे गेल्याँ और बिठावै काम ये घणी चतराई के।।
जिसकै ट्रेक्टर कोन्या उड़ै झोटा बुग्गी आगी रै
घर का काम अर या बुग्गी बीरबानी नै खागी रै
घणखरे काम करै औरत मर्द के काम ताश खिलाई के।।
प्रवासी मजदूर पै कई का टिक्या खेत क्यार का काम
म्हणत तैं घिण होगी चाहवै चौबीस घण्टे आराम
दारू घर घर मैं आगी बीमारी नै करे हालात तबाही के।।
नया अपना हरियाणा जात पात छोड़ बणावांगे
मानवता का झंडा हरेक गाम शहर पहोंचावांगे
कहै रणबीर बरौने आला छंद लिखे ना अंघाई के ।।
(9
मान सम्मान नहीं मिलता,दिल का फूल नहीं खिलता
मेरा विश्वास रोज हिलता, यह सब कैसे समझाऊँ मैं ||
भाई का भाई दुश्मन लड़की महफूज नहीं घर बार में
पैसा छा गया चारों और खुद गरज बेगैरत संसार में
गरीब मरें बिना दवाई क्यों , बच्चे रहें बिना पढ़ाई क्यों
अम्बानी लूटें हैं कमाई क्यों , यह सब कैसे समझाऊँ मैं ||
हमारी इज्ज़त पर डाका रोजाना सफेदपोश डाल रहे
दबाते हैं हर तरह से मग़र उठ फिर भी सवाल रहे
अमीर गरीब की खाई है , देती बढ़ी हुई दिखाई है
काले धन धूम मचाई है , यह सब कैसे समझाऊँ मैं ||
खुदगर्जी धोखे बजी का बाजार बहुत गरम हुआ है
हुए सरमायेदार लालची जमाना बहुर बेशर्म हुआ है
सच पिटता बीच बाजार , फैला है कितना भ्रस्टाचार
क्यों लूट के खाते ठेकेदार ,यह सब कैसे समझाऊँ मैं ||
नंबर वन की चीज मिलनी बिल्कुल भी आसान नहीं है
नंबर दो में जो चाहो लो कुछ कहता भगवान नहीं है
आत्म सम्मान हम पाएंगे ,तराने आजादी के गायेंगे
हम नया भारत बनायेंगे ,यह सब कैसे समझाऊँ मैं ||
(10
*अन्धविश्वास और धर्मान्धता की आंधी देश मैं चाल रही।।*
*अज्ञानता अविवेकशीलता की खाई इसमैं जनता नै डाल रही।।*
1
अखबार पढ़ना सही कोन्या टीवी देखना आंख फोड़ दैवै
रेडियो सुनना कसूता गुनाह मुख माणस का यो मोड़ देवै
*ज्ञान विज्ञान विवेक संस्कृति सबनै सरकार कर बेहाल रही।।*
2
आज चारों कान्हीं काल्पनिक देवी देवताओं की बात सुनाई जाँ
मीडिया अखबारों मैं छापकै घणी नीचे तक फैलाई जाँ
*अफसोस की बात या सै ज्ञान विज्ञान की खबर मीडिया टाल रही।।*
3
रोटी कपडा मकान शिक्षा स्वास्थ्य की कितै ना बात चलै
रोजगार महंगाई गरीबी बारे सारे देश मैं आज बात टलै
*पूर्वजन्म का फल भोग रहे सरकार बना इसे ख्याल रही।।*
4
धर्मान्धता पाखंड अन्धविश्वास जन की नियति बताते रै
अंधविश्वास की घुंटी आज सब तरियां जनता नै पिल्लाते रै
*रणबीर ज्ञान विज्ञान पाखंड पै सुलझा जनता के सवाल रही।।*
[11
फांसी खाने से नहीं बात बनै
फांसी खा खा कै ना बात बनै लड़ने का माहौल बनावां रै।।
मजबूत किसान आंदोलन कर मजबूत राज कै सांस चढ़ावां रै।।
1
धर्म किसानी जात किसानी किसानां का साँझा मंच बण्या रै
धुर की लड़ाई लड़नी होगी राज की गेल्याँ खूब तण्या रै
लालच मैं आकै जो एकता तोडैं उन कान्ही ना कति लखावां रै।।
मजबूत किसान आंदोलन कर मजबूत राज कै सांस चढ़ावां रै।।
2
तीन काले कानूनं वापिस ल्यो मांग पत्र पै हम लडांगे
नहीं मान्या राज पाट तो हम मिलकै सारे जेल भरांगे
आत्म हत्या का यो छोड़ रास्ता संघर्ष का बिगुल बजावां रै।।
मजबूत किसान आंदोलन कर मजबूत राज कै सांस चढ़ावां रै।।
3
इसमें शक नहीं सै कोए यो म्हारा अष्टा संघर्ष बताया
दुश्मन नै बचण की खातर जात पात का किला बनाया
म्हारे बेटे फ़ौजी जितने उनने सारी बात समझावां रै।।
मजबूत किसान आंदोलन कर मजबूत राज कै सांस चढ़ावां रै।।
4
लेकै मजदूर नै गेल्याँ अपनी जीतण की करां त्यारी
इसे सिस्टम का खरना बदलां जीनै ज्यान काढ़ ली म्हारी
आज की लड़ाई लड़ां मिलकै राज नै जरूर झुकावां रै।।
मजबूत किसान आंदोलन कर मजबूत राज कै सांस चढ़ावां रै।।
5
सारे काले मजदूर किसान कानून खत्म करवाकै मानांगे रै
आत्म हत्या नहीं करां निशाना अम्बानी हर पै तानांगे रै
कहै रणबीर लेल्यां सम्भाला लड़कै ही तो बच पावां रै ||
मजबूत किसान आंदोलन कर मजबूत राज कै सांस चढ़ावां रै।।
[12
हिन्द की नीति
हुई तरक्की बहोत मारगी या गड़बड़ बंटवारे की ।
सदा कमेरा वर्ग दबाया इसी नीति हिन्द म्हारे की।
1
सबको मिलै पढ़ाई छह अरब डॉलर का खर्च बताया
अमरीका में श्रंगार ताहिं आठ अरब डॉलर जावै खिंडाया
पाणी और सफाई का खर्चा नौ अरब डॉलर आज दिखाया
ग्यारा अरब डॉलर यूरोप मैं आईस क्रीम पर ख़र्चा आया
चार सौ अरब डॉलर का नशा करावैं होज्या शक्ल छुहारे की।
हुई तरक्की बहोत मारगी या गड़बड़ बंटवारे की ।
2
सबकी सेहत की खात्तर तेरा अरब डॉलर कुल चाहवै सै
अमीर रुक्के मारै पीस्से कोण्या म्हारा सेहत बजट घटावै सै
अमरीका यूरोप के कुत्ते बिल्ली स्तरां अरब डॉलर खावै सै
जापान में देखो मनोरंजन पै पैंतीस अरब डॉलर बहावै सै
झुट्ठी कोण्या साच्ची सै तस्बीर इस विकास प्यारे की।
हुई तरक्की बहोत मारगी या गड़बड़ बंटवारे की ।
3
झुट्ठी कोण्या सारा आंकड़ा मानव विकास रिपोर्ट मैं बताया
तीसरी दुनिया चूस बगादी ईबी जी सेवन दुनिया मैं छाया
विश्व बैंक और डब्ल्यू टी नै अमीरों का साथ निभाया
मुद्रा कोष नै डांडी मारकै म्हारे नाश का बीड़ा ठाया
नौकरी खत्म करण लागरे कविता और मुख्तयारे की।
हुई तरक्की बहोत मारगी या गड़बड़ बंटवारे की ।
4
नशे की दवाई और दारू बेचैं दूसरा धन्धा हथियारों का
तीसरा धंधा इत्र फुलेल का इन अमरीकी साहूकारों का
विकास नहीं विनाश पै टिकया जीवन इन थानेदारों का
बंटवारा ठीक हो दुनिया मैं ना करता मन ठेकेदारों का
अमीर गरीब की खाई मैं जी घुटया रणबीर बिचारे की।
हुई तरक्की बहोत मारगी या गड़बड़ बंटवारे की ।
(13
15 अगस्त 47 और 2026 पर एक रागनी
पन्दरा अगस्त सैंतालीस यो लाखां ज्यान खपाकै आया।।
घणे हुये कुर्बान देश पै जिब आजादी का राह पाया।।
1
सैंतालीस की आजादी यो दो हजार छब्बीस आ लिया
बस भाड़ा याद करो आज यो कड़ै सी जा लिया
सीमेंट का कट्टा कितने का आज कुणसे भा लिया
एक गिहूँ बोरी देकै सीमेंट हमनै कितना पा लिया
चिंता नै घेर लिए जब उस दिन अर आज का हिसाब लाया।।
पन्दरा अगस्त सैंतालीस यो लाखां ज्यान खपाकै आया।।
2
आबादी बढ़ी दोगुणी पर नाज चौगुणा पैदा करया
पचास मैं थी जो हालत उसमें बताओ के जोड़ धरया
बिना पढ़ाई दवाई खजाना यो सरकारी रोज भरया
ईमानदारी की करी कमाई फेर बी हमनै कड़ै सरया
भ्रष्टाचार बेईमानी नै क्यों यो सतरंगा जाल बिछाया।।
पन्दरा अगस्त सैंतालीस यो लाखां ज्यान खपाकै आया।।
3
यो दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी खाई थी
यो दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फौज लड़ाई थी
यो दिन देखण नै के गांधी बापू नै गोली खाई थी
यो दिन देखण नै के अम्बेडकर नै संविधान बनाई थी
नए नए घोटाले सुनकै नै जनता का सिर चकराया।।
पन्दरा अगस्त सैंतालीस यो लाखां ज्यान खपाकै आया।।
4
आजादी दिवस पै कसम खावां नया हरियाणा बनावैंगे
भगतसिंह का सपना अधूरा उसनै पूरा करकै दिखावैंगे
ना रहै लूट खसोट देश मैं घर घर जाकै अलख जगावैंगे
या दुनिया घणी सुंदर होज्या सारे मिलकै हाँगा लावैंगे
रणबीर सिंह मिलकै सोचें गया बखत किसकै थ्याया।।
पन्दरा अगस्त सैंतालीस यो लाखां ज्यान खपा कै आया।।
[14
आत्म निर्भर देश का सपना
आत्म निर्भर देश मिलकै हम भारत देश नै बनावांगे।।
पब्लिक सेक्टर के कारखाने हम पूरे देश मैं
चलावांगे।।
1
सहज सहज कई क्षेत्रों मैं पब्लिक सेक्टर ले आये
बढ़िया क्वालिटी के रेट भी ठीक से ही गए लगाये
फेर सरकार पै दबाव आया प्राइवेट नै भी हम
बढ़ावांगे।।
2
उन्नीस सौ नब्बे मैं प्राइवेट नै दरवाजे खट खटा
दिये
सहज सहज पब्लिक सैक्टर के दरवाजे बंद करा दिये
दूसरे देशों से भी ये बनी बनाई चीज हम घणी
ल्यावांगे ।।
3
आत्म निर्भर देश का सपना सहज सहज गया टूटता रै
अपने देश से निर्यात करने का जज्बा गया यो
छुटता रै
प्राइवेट कंपनी कट्ठी हो बोली बढ़िया व्यापार चलावांगेे ।।
4
छह लाख अठानवै हजार छह सौ नब्बे का आयात कराया
मई दो हजार छब्बीस का यो आयात आंकड़ा
गिनवाया
कुल निर्यात रहया थोड़ा रणबीर सिंह कैसे घाटा
पुगावांगे।।
[15
एक बाप का दुःख
कुनबा सारा मूँधा पड़या नहीं होती छोरी की सगाई।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
1
पढ़ लिख कै बेटी आई एफ एस अफसर बणगी
दहेज़ एक करोड़ पै पहोंच्या सिर की नस तणगी
मेहनत करी दिन रात मुड़कै पाछै नहीं लखाई।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
2
बिन ब्याही बेटी का घर मैं बोझ घणा कसूता होज्या रै
मेरे बरगा सिद्धान्ति माणस भी सबर अपना खोज्या रै
घर मैं दीखै सूनापन जब ना पावै कोये राही।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
3
जात के भीतर आई ऐ एस कोये भी मिलता कोण्या
एक मिल्या तो गोत उसका म्हारे गाम मैं चलता कोण्या
इन गोतां के चक्कर नै म्हारी तो पींग सी बधाई।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
4
माथा पाकड़ कै बैठ गया तीन साल जूती तुड़वाली
या उम्र तीस साल की ओवर ऐज खाते मैं जाली
दोतीन और अफसर थे उनकी मांग बेढंगी पाई।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
5
बेटी नै तो कर लिया फैंसला ब्याह नहीं कावाने का
मां बोली हमनै के ठेका बेटी जात बीच ब्याहने का
कौम के ठेकेदारां नै नरमी नहीं बरती चाही।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
6
जात छोड़ ब्याह करने का मेरा तो जी करता कोण्या
बिन ब्याही रह्वैगी बेटी न्यों सोच दिल भरता कोण्या
जात मनै लागै थी प्यारी इसनै मेरी करी पिटाई।।
7
न्योंये कित धक्का दे दयूं आज मेरी समझ नहीं आता
एक करोड़ कड़े तैं ल्याऊं आज मेरा तो यो खाली खाता
दो च्यार लाख मैं नहीं करते कौमी बेटे मेरी सुनाई।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
8
भितरै भितर सोचूँ कितै बेटी प्रेम विवाह करले
नीरस जिंदगी जो उसकी उसनै खुशियों तैं भरले
वा बागी होकै करले शादी होज्यगी मेरी मनचाही।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
9
तिरूं डूबूँ जी होरया इसनै रोज समझाऊँ क्यूकर
जात भितर की सीमा दिल खोल दिखाऊं
क्यूकर
म्हारे बरगे माणसां की होरी सारे कै जग हंसाई।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
10
नौकरी के कारण बेटी नै कई देशां मैं जाना पड़ता
भांत भांत के लोगां तैं उसनै उड़ै हाथ मिलाना पड़ता
रणबीर खुलापन आया यो आज साहमी दे दिखाई ।।
मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।
[16
बिना पीसे गुजारा कोन्या ना रही कदर ईमानदारी की।।
दूजी कदर इस देश मैं बाबा पाखण्डी और पुजारी की।।
1
जो पिस्से देकै रैली करते वोहे वोट खरीदलें म्हारी रै
संविधान धरया कूण मैं या संसद जमा मूंधी मारी रै
देश मैं सरकार चालरी या देशी बदेशी पूँजी भारी की।।
दूजी कदर इस देश मैं बाबा पाखण्डी और पुजारी की।।
2
भ्रष्टाचार मैं नवम्बर वन यो होग्या हिंदुस्तान म्हारा देखो
कुछकै पीस्सा मैगनेट होग्या घण्यां का नहीं गुजारा देखो
पीस्सा यो ईमान खरीदले यो लूटै इज्जत करतारी की ।।
दूजी कदर इस देश मैं बाबा पाखण्डी और पुजारी की।।
3
आज के सिस्टम मैं पीस्सा देखो ईमान हुया साहूकार का
लूट रहया दुनिया सारी यो खून पस्सीना करतार का
ईमानदारी की मेहनत की लागै बोली बीच बाजारी की।।
दूजी कदर इस देश मैं बाबा पाखण्डी और पुजारी की।।
4
बिना पिस्से आल्यां के छोरा छोरी ये फिरते मारे मारे भाई
ये पीस्से आले इणनैं बरतैं म्हारे अनुभव सैं खारे भाई
कलम साच लिखै हांगा लाकै आज रणबीर लिखारी की।।
दूजी कदर इस देश मैं बाबा पाखण्डी और पुजारी की।।
[17
16 जून का आंदोलन --एक रागनी
बासठ किसान मजदूर संगठन ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।
खेती व मजदूर विरोधी नीति या भाजपा नै अपनाई रै।।
1
किसान की तरफ ध्यान नहीं या स्वामीनाथन नै नाट गई
फांसी खा खा किसान मरैं भाजपा ले राज के ठाठ गई
न्यारे न्यारे बांट कै जातयाँ मैं किसानां की करी सै पिटाई रै।।
बासठ किसान मजदूर संगठन ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।
2
मजदूरों पै हमला बोल्या मनरेगा के बजट घटाया रै
ठेकेदारी प्रथा नै म्हारे देश मैं घणा कोहराम मचाया रै
महंगाई दिन दूनी बढ़ती जावै होन्ती ना कितै सुनाई रै।।
बासठ किसान मजदूर संगठन ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।
3
सोलां जून का दिन भारत का ईब नया इतिहास रचैगा
किसान मजदूर मोर्चे आगै नहीं जुल्मी बेईमान बचैगा
सरमायेदारों के कर्जे माफ करे ना म्हारी कितै सुनाई रै।
बासठ किसान मजदूर संगठन ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।
4
लुटेरे और कमेरे बीच मैं आज घलता आवै पाला भाई
रणबीर सिंह बरोने आला कहै लेल्यो ईब सम्भाला भाई
किसान कमेरे की यारी खोलैगी मानवता की नई राही रै।।
बासठ किसान मजदूर संगठन ये लवैंगे अंगड़ाई रै।।
[18
महाकाव्यों को जब इतिहास बनाया जाने लगे तो वैज्ञानिकों के सामने एक चुनौती आ खड़ी होती है। क्या बताया भला---
विकास का नाम लेकै नै ये समाज बाँटना चाहवैं सैं।।
महाकाव्य म्हारे देश के उणनै इतिहास बतावैं सैं ।।
1
अंधविश्वसां की जड़ गहरी उनपै आज खेल रहे
मुट्ठी भर ऐस करते बाकि सारे संकट झेल रहे
सवाल मतना ठावो कति आज हमनै धमकावैं सैं।।
महाकाव्य म्हारे देश के उणनै इतिहास बतावैं सैं ।।
2
बेरोजगारी नै चारों कान्ही कहर कसूता मचाया रै
म्हारे युवक और युवती के जीवन पै संकट छाया रै
पक्की नौकरी बन्द करकै ठेकेदारी प्रथा बढ़ावैं सैं ।।
महाकाव्य म्हारे देश के उणनै इतिहास बतावैं सैं ।।
3
ये रोजगार देते कोण्या जात पात धर्म पै बाँट रहे
कितै सिख पटेल कितै किसान की मांग नाट रहे
चाल आजादी पाछै इनकी हम उलझते ए जावैं सैं।।
महाकाव्य म्हारे देश के उणनै इतिहास बतावैं सैं ।।
4
झूठ बोल बोल कै रोजाना जनता खूब भकाई जावै
गऊ गीता गंगा के पाछै असली संकट छिपाई जावै
रणबीर सिंह के छन्द ये सच का साथ निभावैं सैं।।
महाकाव्य म्हारे देश के उणनै इतिहास बतावैं सैं ।।
[19
दुखती रग
ठीक थोडा गलत घना जगत मैं पीस्सा सर चढ़ कै बोलै ॥
सांझै दारू पी कै रमलू सारी रात बहार भीतर वो डोलै ॥
1
कोए घर बार नहीं आज बच्या मानस चाहे बच्या हो घर मैं
घणी कुसंस्कृति बढावै सै दारू या दारू पीवनिया नर मैं
बाहर भीतर वो तां कै झाँ कै कलह जहर घणा घोलै ॥
2
बिना नौकरी बिन ब्याहे गाम गाम मैं घूम रहे दिखाऊँ
नशे पते के शिकार हुए किस किस के नाम गिनाऊँ
या हालत हरियाणे के गामां की मेरा कालजा छोलै ॥
3
नैतिकता जमा ख़तम हुई व्यभिचार घना बढ़ता जावै
प्यार मोहब्बत कै ताला लाया अवैध सम्बन्ध सारै पावै
साच बोलानिया धक्के खावै मौज करै जो जमा कम तोलै ॥
4
घोटाले पै घोटाले करते म्हारे अफसर नेता ये मिलकै
कोए दण्ड ना इनकी खातर ठेस कसूती लागै दिल कै
रणबीर सिंह बरोने आला आज दुखती रग नै पपोलै ॥
[20
इजरायल नै फिलिस्तीन का यो कसूता हाल बना राख्या
।।
कर हमले उसकी धरती पै घणा शमशान मचा राख्या ।।
1
वैस्ट बैंक अर गाजा पट्टी गोरयां नै फिलिस्तीन बनाया
इजरायल और यरुशलम भी गोरयां नै कहते सुझाया
अड़तालिस चवालिस और आठ प्रतिशत का बंटवारा करा राख्या ।।
2
इजरायल नै कर हमले फिलिस्तीन बारा प्रतिशत पै ल्या दिया
पैंतीस प्रतिशत फिलिस्तीन की धरती पै हक जमा लिया
फेर भी सबर कोन्या इसकै रोजाना उधम मचा राख्या ।।
3
आठ प्रतिशत पै यरुशलम सन अड़तालिस मैं बसाया
यूएनओ का सीधा कंट्रोल इसपै उस बख्त यो जताया
यरुशलम कै भी इजरायल नै सांस कसूता चढ़ा राख्या ।।
4
गाजा के हमास आल्या नै दुखी होकै यो हमला किया
इजरायल नै पलट वार करया आतंकवादी झूठा दर्जा दिया
ठाडा मारै ना रोवण देवै खाट खोस धरती पै सवा राख्या ।।
5
अमरीका थपकी देरया सै दिए इजरायल तैं हथियार
जुल्मी कान्ही खड़या सै पीड़ित का नहीं मददगार
भारत नै भी इजरायल क्यों यो आज सही बता राख्या ।।
6
हमनै पड़ै सोचना भाई बहनों के सै पूरा इतिहास
इजरायल सै कसूरवार बेबे होया सै इसका अहसास
फिलिस्तीन के हक मैं ज्याँ रणबीर नै कलम ठा राख्या ।।
[21 महिला की दास्ताँ
पेट मैं मारण की तैयारी, मैं सुनाऊं पूरे समाज नै।।
क्यों चालै मेरे पै कटारी , मैं सुनाऊं पूरे समाज नै।।
1
मातम मनाते मेरे होण पै छोरे पै बजती थाली क्यों
छठ छोरे की सारे मनाते गामां ताहिं के हाली क्यों
नामकरण करते छोरे का पढ़े लिखे और पाली क्यों
अग्नि देनी शमशान घाट मैं म्हारी करते टाली क्यों
पराया धन गई मैं पुकारी, मैं सुनाऊं पूरे समाज नै।।
2
धन धरती का हक म्हारा, किसनै खोस्या हमनै बताओ
रिवाज पुत्र वंश चलाने का किसनै थोंप्या हमनै बताओ
दोयम दर्जा म्हारे ताहिं , किसनै सोंपया हमनै बताओ
म्हारा मान सम्मान दखे किसनै खोस्या हमनै बताओ
म्हारी जगाह सिमटती जारी, मैं सुनाऊं पूरे समाज नै।।
3
स्वयंम्बर करकै पति चुनै या रही परंपरा म्हारी बताई
दमयंती नै नल के गल मैं माला खुद तैं डारी बताई
मातृ सत्ता म्हारे समाज मैं बहोत दिन रही जारी बताई
पितृ सत्ता की संस्कृति खुद बै खुद उभरती आरी बताई
आज या चारों कांहीं छाहरी, मैं सुनाऊं पूरे समाज नै।।
4
धापां सीमा संतोष काफी यो नाम धरया भतेरी क्यों
सारी उम्र इन नामां करकै महिला झेलैं अंधेरी क्यों
दोयम दर्जा म्हारा समाज मैं लाज जावै बखेरी क्यों
कोई रास्ता नहीं देवै दिखाई चारों तरफ तैं घेरी क्यों
बनाई सां हम अबला नारी, मैं सुनाऊं पूरे समाज नै।।
5
इसे माहौल मैं माता क्युकर बेटी पैदा करदे देखो
परिवार महिला की नाड़ पै तुरत कटारी धरदे देखो
माँ का कसूर कड़ै इसमैं चाहवै रंग जीवन मैं भरदे देखो
सन्तुलन जब बैठे जब हटैं समाज की आंख्यां तैं परदे देखो
या पूरे समाज की बीमारी, मैं सुनाऊं पूरे समाज नै।।
6
औरत मर्द जड़ै बराबर वोहे समाज ठीक जताया सै
इस संकट की जड़ों मैं हाथ पितृ सत्ता का पाया सै
पुत्र लालसा छोरी मारै परिवारों नै जुल्म कमाया सै
परिवार पूरे समाज का दर्पण यो गया सही बताया सै
रणबीर की कलम पुकारी , मैं सुनाऊं पूरे समाज नै।।
[22
उधम सिंह नाम बदल कर लन्दन जाने की तैयारी करता है उसकी आंखों के मने माइकल ऑ'डायर घूमता रहता था। क्या बताया भला -
ऊधम सिंह नै सोच समझ कै करी लन्दन की जाने की तैयारी।।
राम मुहम्मद नाम धरया और पास पोर्ट लिया सरकारी ।।
किस तरियां माइकल ऑ'डायर थ्यावै चिन्ता थी दिन रात यही, बिना बदला लिये ना उल्टा आऊं हरदम सोची बात यही,
उनै मौके की थी बाट सही मिलकै उंच नीच सब बिचारी।। 1
चौबीस घण्टे उसकै लाग्या पाछे यो मौका असली थ्याया ना, जितने दिन भी रहया टोह में उनै दाणा तक भी भाया ना,
लन्दन में भी भय खाया ना था ऊधम क्रान्तिकारी ।। 2।।
दिन रात सबेरी माइकल ऑ'डायर उनै खडा दिखाई दे था,
हाथ गौज में पिस्तोल पै हमेशा पड़या दिखाई दे था,
भगत सिंह भिड़या दिखाई दे था भर आंख्या के मां चिन्गारी ।। 3 ।।
होई कदे समाई कोन्या उसकै लगी बदन में आग भाई,
न्यों सोचें जाया करता हमनै हो खेलना खूनी फाग भाई,
रणबीर का सफल राग भाई जिब या जनता उठै सारी ।। 4
[23
सोने का रांग बनाया
सोने का रांग बनाया यो मोटा चाला होग्या।।
पतासे की खाँड बनाई गुड़ का राला होग्या।।
1
ये पीतल के उप्पर सोने का घोल चढावैं
साच का गल घोट कै झूठ का ढ़ोल बजावैं
ठग शरीफ बनकै नै रापट रोल मचावैं
गोरक्षा के नाम पै मौत का तांडव रचावैं
नफरत का माहौल मरण का ढाला होग्या।।
पतासे की खाँड बनाई गुड़ का राला होग्या।।
2
सच्चाई छोड़ कै क्यों झूठ तैं नाता जोड़ लिया
करकै खाणे आले का खून निचोड़ लिया
यो नशे का माफिया कमा कई करोड़ लिया
जो बोले इनकै साहमी उनका कर तोड़ दिया
माणस हैवान बणाया ढंग कुढाला होग्या।।
पतासे की खाँड बनाई गुड़ का राला होग्या।।
3
इस खातर के भगत नै फांसी परणाई
इस खातर के गोली गांधी बापू नै खाई
इस खातर के राणी झांसी नै लड़ी लड़ाई
इस खातर के सुभाष बोस नै फ़ौज बनाई
हिन्दू राष्ट्र का दिया नारा ज्याण का गाला होग्या।।
पतासे की खाँड बनाई गुड़ का राला होग्या।।
4
जातपात का जहर बाग़ बगीचे सूख गए
माणस का माणस बैरी कड़ै पुराने रसूख गए
जुम्लयां तैं भकाये हम सही बख्त चूक गए
रणबीर सिंह आज ये खुश म्हारे टूक गए
नाश करनीया देश का यो आज रुखाला होग्या ।।
पतासे की खाँड बनाई गुड़ का राला होग्या।।
[24
मॉल खजाने
मॉल खजाने धरे रहज्यांगे , तूँ रोटी खावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
1
टैक्स की चोरी खूब करी तनै छोड़ दिया साथ सच्चाई का
बैंक के लोन डकार गया ना रहया औड़ काली कमाई का
पीस्से कित धरूं की चिंता ना विश्वास रहया सगे भाई का
गुड़गामा मैं दो फ्लैट खरीदे नाम लिखाया भरतो ताई का
कई करोड़ का मालिक फेर और पीसा पावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
2
कंजूस माखी चूस होग्या तूँ घटिया तरीके अपनावै रै
आत्म सम्मान तोड़ै हिणे का गैल कद अपना घटावै रै
अपना बैरी खुद मैं होग्या बन्द गली मैं बड़ता जावै रै
खोखला पूरा जीवन होग्या साच तनै खावण आवै रै
घर अपने मैं तूँ पराया होग्या दखे बतलावन नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
3
भारया होग्या गैंडे बरगा नहीं नींद चैन की सोवै रै
मन का अँधेरा दुखी करै फेर दारू मैं आपा खोवै रै
एबी होग्या धुत नशे में तूँ बेउन्माना पीस्सा खोवै रै
सब किमैं तेरे धोरै फेर भी क्यों डले सुरग मैं ढोवै रै
बालू शाही धरी तेरे साहमी मूंह मैं आवण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
4
नहीं तनै कितै भी चैन पड़ै मन में घणी उचाटी छाज्या
नहीं दो पैग तैं काम बणै पूरी बोतल भीतर तैं खाज्या
काला धन दिमाग चढ़ा दे फेर क्यूकर मन शान्ति पाज्या
भूल भलैया बनी जिंदगी सारी उम्र न्यों ए खपाज्या
रणबीर बरोने आला तेरे पै गीत बणावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
[25
शरूपनखा के साथ ज्यादती/ सीता के साथ ज्यादती
शरूपनखा के बारे आज सारी बात खोल बताऊँ मैं ।।
वा आजाद ख्यालात की महिला जंगलों मैं दिखाऊँ मैं।।
रावण की भांण शरूपनखा चरित्रहीन बताई क्यों
बिंदास महिला शरूपनखा साच्ची बात छिपाई क्यों
लक्ष्मण तैं कुछ कैहदी बदले की आग जलाई क्यों
वा भी इंसान बराबर की राम कै समझ ना आई क्यों
किसे बी बात पै क्यों काटे कान नाक सवाल ठाउँ मैं ।।
म्हारी पौराणिक कथाओं मैं औराक़ को एक चीज दिखाया
बहन का बदला रावण नै लक्ष्मण तैँ क्यों ना चुकाया
उसनै भी सीता महिला पै यो अपना निशाना लगाया
नाक काटण का दोषी लक्ष्मण सीता को सबक सिखाया
लक्ष्मण रेखा क्यों लांघी सीता उसकै दोष लगाऊं मैं।।
राम नै लंका फ़ूंकवादी सीता उल्टी ल्या लाज बचाई
असल मैं तै उसनै सीता बिलकुल नहीं थी अपनाई
अग्निपरीक्षा की मांग उसकी या सीता नै ठुकराई
सीता नै बूझी या परीक्षा रामजी तनै क्यों लेनी चाही
सबके साहमी अपमान मेरा परीक्षा कैसे निभाऊं मैं।।
सीता की हिम्मत देखो एकली जंगलों मैं चली गई
किसे नै भी रोकी कोन्या सीता राम राज मैं छली गई
लव कुश पाले कुटिया मैं या जिंदगी सारी दली गई
पुरुषवाद बचाने खातर चढ़ाई सीता की बलि गई
रामायण की छिपी सच्चाई रणबीर साहमी ल्याऊं मैं।।
26.6.2015
[26
उलटे सीधे धंधे करते डर नहीं क्यों तुम्हें घळणे का।
सब कुछ छोड़ के जाना साथ कुछ ना चळणे का।
बाजार में आज सब कुछ बिकता पाया देखो
इसने पैसे का रिश्ता हर घर पहोंचाया देखो
मानवता को नचाया देखो फूल इंका ना खिळणे का ।
सब कुछ छोड़ के जाना साथ कुछ ना चळणे का
त्याग प्रेम की भावना आज ये जमा सुखा दई हैं
आपसी आव भगत भी आज पढ़ने बिठा दई है
ईमानदारी रुआ दई है यो संकट ना टळणे का ।
सब कुछ छोड़ के जाना साथ कुछ ना चळणे का।
पैसा चाहिए बेशक काला रास्ते करे काले देखो
पूरी दुनिया पे छाया अपने चमचे घने पाले देखो
बुरी राजनीत घर घाले है खेल रचाया है दलणे का।
सब कुछ छोड़ के जाना साथ कुछ ना चळणे का।
रिश्ते नाते बिगाड़ दिए ये व्यभिचार फैला दिया
चोरी जारी और डकैती पूरा समाज हिला दिया
फासिज्म याद दिला दिया रणबीर ये ना फ़लणे का ।
सब कुछ छोड़ के जाना साथ कुछ ना चळणे का।
[27
मीठी मीठी बात करैं ये पर भीतर तैं काले।।
देशद्रोही देश भक्त घणी झूठ फैंकण आले।।
1
बण जोंक खून चूसैं वे साहूकार बणे हाँडें सैं
हम भूखे फिरैं घूमते वे ताबेदार बणे हांडें सैं
लेरे सैं महल अटारी वे थानेदार बणे हांडें सैं
काल के जो दुराचारी वे दिलदार बणे हांडें सैं
अफवाह फैला देश मैं कर दिए मोटे चाले।।
देश द्रोही देश भक्त घणी झूठ फैंकण आले।।
2
बढा कै नै महंगाई खागे लोगां नै लूट लूट कै
भ्रष्टाचार भरया नशां मैं इनकी कूट कूट कै
बिन रिश्वत काम ना होवैं रोल्यो फुट फुट कै
अंधविश्वास खावैं देखो साइंस नै चूट चूट कै
वाजीरां के बनें अफसर भतीजे और साले।।
देश द्रोही देश भक्त घणी झूठ फैंकण आले ।।
3
जोंक भेड़िये जो पहले मगरमच्छ देवें दिखाई
ठोक ठोक भरैं तिजूरी कर अन्धधुन्ध कमाई
जनता की नहीं होती आज देश मैं कितै सुनाई
आठों पहर डर रहवै कदे आज्याँ पापी कसाई
कदे बीफ के शक पै कत्ल कर पाड़ दें चाले।।
देश द्रोही देश भक्त घणी झूठ फैंकण आले।।
4
काले नाग बने जहरी ये कारपोरेट के व्यापारी
चीनी गैस तेल नाज ये कठ्ठी कर लेते सारी
नागां का के भरोसे कद आज्याँ बाहर पिटारी
सारा देश डर मैं जीवै ना पै यो हमला जारी
रहिए संभल कै नै सुण रणबीर बरोने वाले।।
देश द्रोही देश भक्त घणी झूठ फैंकण आले।।
[28
आज के हालात
ओले हाथ नै सोले का भरोसा नहीं रहया बताया रै ॥
के होग्या म्हारे समाज कै यो अविस्वास सारै छाया रै ॥
1
महिला की इज्जत नै रोजाना यो कौन लूट रहया
गुण्डा लेकै रिवाल्वर पूरे गाम मैं खुल्ला छूट रहया
गाम पी खून का घूँट रहया दारू नै ऊधम मचाया रै ॥
ओले हाथ नै सोले का भरोसा नहीं रहया बताया रै ॥
2
शहरां तैं घणे गाम आज असुरक्षित होंते आवैं सैं
वंचित तबके गामां मैं मुश्किल तैं रात बितावैं सैं
ठाड़े छोरी ठा लेज्यावैं रिवाल्वर का खौफ बिठाया रै ॥
ओले हाथ नै सोले का भरोसा नहीं रहया बताया रै ॥
3
जो बोलैं उणनै पीटैं उनपै झूठे इल्जाम लवादें सैं
स्कूल जाण तैं छोरी घबरावैं पढ़ना ये छटवादें सैं
काबू ना आवै उनै मरवादें सैं किसा जमाना आया रै ॥
4
ओले हाथ नै सोले का भरोसा नहीं रहया बताया रै ॥
चुप्पी साधें ना पार पड़ै हम नै आवाज ठानी होगी
गुंडा गर्दी पै सबनै मिलकै लगाम लगानी होगी
कर हिम्मत रणबीर नै इनकै खिलाफ कलम ठाया रै ।।
[28
आज काल चौखे ब्योन्त आला खूबै काच्चे काटै भाई रै।।
ऑन लाइन पै काम काढ़ो या किसी स्कीम चलाई रै।।
1
मॉल घणे गजब के खोले मिलै सब किमैं एक छात नीचै
बाहर खड़या खड़या गरीब अपने खाली पेट नै भींचै
ब्यौन्त आला घरां बैठ्या करै बुकिंग जहाज हवाई रै।।
ऑन लाइन पै काम काढ़ो या किसी स्कीम चलाई रै।।
2
अपोलो बरगे फाइव स्टार अस्पताल गजब खोल दिये
इलाज का खर्चा महंगा सुन गरीब के हिये डोल दिये
गरीब मरो सड़कै बेशक कहवण की ये मुफ्त दवाई रै।।
ऑन लाइन पै काम काढ़ो या किसी स्कीम चलाई रै।।
3
एयर कंडीसन्ड जीवन का न्यारा बढ़िया संसार बनाया
स्कूल घर अस्पताल कार सिनेमा सारे कै जाल बिछाया
होटलों मैं चलैं दारू पार्टी उड़ै पिस्से नै धूम मचाई रै।।
ऑन लाइन पै काम काढ़ो या किसी स्कीम चलाई रै।।
4
किसी तरक्की म्हारे देश की थोड़ा सा गम्भीर सवाल यो
गरीब मरै बिन रोटी भूखा नहीं किसे नै इसका मलाल यो
गरीब नै आज अपनी बेचैनी या पूरी दुनिया तैं बताई रै।।
ऑन लाइन पै काम काढ़ो या किसी स्कीम चलाई रै।।
5
सब रंगां का समावेश यो भारत देश हमारा देश होवै
जात पात और मजहब का आड़ै यो नहीं क्लेश होवै
रणबीर आज सोच समझ कै करता कलम घिसाई रै।।
ऑन लाइन पै काम काढ़ो या किसी स्कीम चलाई रै।।
जनवरी 2004
[23/05, 2:49 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: करां एकता बेबे
देश एकता खतरे मैं बेबे हमनै रैहना तैयार पड़ैगा।।
जुल्मो सितम की टक्कर मैं हमनै अड़ना हरबार पड़ैगा।।
1
कई बाहण न्यों कहवैं सैं क्यों अपनी तरफ लखाती ना
देश की सोच्चण चाल पड़ी घर बार की सोची जाती ना
देश बिना कड़ै रोटी सैं बेबे म्हारी समझ मैं आती ना
म्हारी भूख क्यों बढ़ती जावै इसका हिसाब लगाती ना
घर का संकट न्यारा कोण्या हमनै करना विचार पड़ैगा।।
2
सारी बहनों को पड़ै जगाणा सै मुश्किल काम म्हारा
समता संगठन बनाये बिना ना दिखता कोये चारा
सारी बहनों नै कट्ठी करकै हम लावां मिलकै नारा
साम्प्रदायिकता जहरी नाग सै डस लिया चैन सारा
जात धर्म की छोड़ लड़ाई हमनै होणा इकसार पड़ैगा।।
3
अपना संगठन बणा करकै सब बहनों नै बतलावांगी
म्हारा सिंदूर कौन पूँछग्या सब बहनों नै
समझावांगी
समता और नारी शिक्षा का मतलब खोल दिखावांगी
सब भाइयां गेल्याँ रल मिल कै हम संविधान बचावांगी
सम्भालना होगा हम सभणै इब करणा यो प्रचार पड़ैगा।।
4
गलत दिशा दिखा हमनै बैरी अपना फायदा ठावैं हे
कदे औरत अपने हक मांगै न्यों उल्टी राह दिखावैं हे
धर्म का फतवा देकै एक दूजे के सिर कटवावैं हे
भ्रम फैलाकै जनता बीच हमनै आपस मैं लड़वावैं हे
कहै रणबीर रही एकली तो हमनै मरणा बारंबार पड़ैगा।।
[23/05, 3:32 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: सांझी बिरासत
कोणार्क और एजन्ता एलोरा म्हारी खूबै श्यान बढ़ावैं।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
दोनूं भारत की विरासत इसतै कौण आज नाट सकैं
साहमी पड़ी दीखै सबनै कौण इस बात नै काट सकैं
जो पापी तोल घाट सकैं म्हारी संस्कृति कै बट्टा लावैं।।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
कालिदास बाणभट्ट रवीन्द्र नाथ नै श्यान बढ़ाई सै
खुसरो गालिब फिराक हुये सैं जिनकी कला सवाई सै
न्यारे-न्यारे बांटै जो इननै भारत के गद्दार कुहावैं।।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
जयदेव कुमार गंधर्व भीम सेन जोशी जसराज दिये
बड़े गुलाम अली मियां बिस्मिल्ला खान नै कमाल किये
एक दूजे नै जो नीचा कहते वे घटियापन दिखावैं।।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
सहगल हेमन्त मन्ना और लता गायकी मैं छागे ये
रफी नूर जहां नौशाद साथ मैं सब जनता नै भागे ये
रणबीर बरोने आले कान्ही ये हिन्दु मुस्लिम लखावैं।।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
[23/05, 3:34 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आपा ...धापी
आपा धापी माच रही चारों कूट रोल्या पड़ग्या।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
ये घर बणे तबेले लोगो रही माणस की खोड़ नहीं
सोच तै परहेज करैं बात का टोहते औड़ नहीं
झूठ पै चालै पूरी दुनियां साच का जुलूस लिकड़ग्या।।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
मेहनत करी लोगां नै विज्ञान नै राह दिखाया
या दुनिया बदल दई घणा खून पसीना बाहया
लालची नै डाण्डी मारी गरीब कै साहमी अड़ग्या।।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
न्याय की बात भूलगे नहीं ठीक करया बंटवारा
पांच सितारा होटल दूजे कान्ही फूटया ढारा
गरीब की कमाई का मुनाफा अमीर कै बड़ग्या।।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
टीवी पै सपने हमनै आज बूख दिखाये जावैं
रणबीर तै लालच दे कै उल्टे प्रचार कराये जावैं
सच्चाई नै भूल गए भोग मैं माणस बड़ग्या।।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
[23/05, 3:36 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: मतना लाओ वार सुणो , हो जाओ तैयार सुणो।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
1. गांव, गली, शहर, कुचे मैं इज्जत म्हारी महफूज नहीं
अत्याचार होते रोजाना करता कोए महसूस नहीं
नहीं लड़ाई आसान सुणो चाहिए युद्ध घमासान सुणो
मारे जावैं शैतान सुणो ,बची नहीं समाई रै ।।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
2. रूढ़िवादी विचार क्यों देखो बनके ये दीवार खड़े
कहने को होते देखो ये यहां बढ़िया प्रचार बड़े
दुश्मन गेरता फूट सुणो , ऐसे मचाए लूट सुणो
अब तुम जाओ उठ सुणो , सही ना जा पिटाई रै।।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
3. ये अन्नदाता कहने वाले आज कहां पर चले गए
कर्म कर ना फल की चिंता,अरमान हमारे छले गए
नहीं सहें अपमान सुणो , पायें हम सम्मान सणो
चले ऐसा अभियान सुणो , डंके की चोट बताई रै।।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
4. जीना है तो लड़ना होगा, संघर्ष हमारा नारा किसानों
संगठन बना के कदम बढ़ाएं,दूर नहीं किनारा किसानों
अब तो उंचा बोल भाई, झिझक ले अपनी खोल भाई
जाए दुश्मन डोल भाई , रणबीर अलख जगाई रै।।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
[25/05, 8:25 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: साथ देउन्गी बालक का अपनी जान की बाजी लाकै
यो कुनबा पाछे लागरया कहवै जाँच करवाले जाकै
पहले गर्भ ऊपर या घनी कसूती नजर जमाई
कहते छोरा चाहिए चाहे करवानी पडे सफाई
घरक्याँ नै घनी धमकई लगा पाता जाँच कराकै
देवर जेठ मेरे नयों कहते हमनै बेटा चाहिए
जाँच कराले छोरी हो तै तुरत सफाई कराईये
सीधी तरा मान जाईये के काढेगी सर फुडवाकै
एक तरफ तो गर्भ पी यो परिवार प्यार दिखावै
दूजी तरफ जाँच कराके बस छोरा पाया चाहवै
हरेक मने समझावै बात मान ले सर झुकाकै
दोगले समाज का चेहरा आछी ढाला साहमी आया
जमा नहीं जाँच करवाऊं मने बी मन समझाया
रणबीर साथ मैं पाया जब देख्या नजर उठाकै
[25/05, 8:52 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: सुनियो मेरी भी
चारों तरफ तैं घेरया ,सांस मुश्किल तैं लेरया
कति निचोड़ कै गेरया,राम क्यूँ आंधा होग्या।।
भावां पर नजर टिकी,बधावन की आस किमै
बेरा ना ये कितना बढ़ेंगे ,आवैगी मनै सांस किमै
दीखै फन्दा फाँसी का ,बखत नहीं सै हांसी का
दौरा पड़ै सै खांसी का , राम क्यूँ आन्धा होग्या।।
पूरा हांगा ला हमनै दिन रात खेत क्यार कमाया रै
मंडी मैं जिब लाग्गी बोली बहोत घणा घबराया रै
ना मेरी समझ मैं आया, नहीं किसे नै समझाया
पग पग पै धोखा खाया ,राम क्यूँ आन्धा होग्या।।
धरती बैंक आल्याँ कै लाल स्याही मैं चढ़गी देखो बीस लाख मैं एक किल्ला कुड़की कीमत बढ़गी देखो
बीस लाख मैं के करूंगा, किस डगर पैर धरूंगा
दो चार साल मैं डूब मरूंगा,राम क्यूँ आंधा होग्या
मेरे बरगे भाई सल्फास की,गोली खा खा मरते देखो
जी मेरा बी करता खाल्यूं, आज गधे खेती चरते देखो
नहीं देखूँ मैं कुआं झेरॉ , रणबीर सिंह साथी मेरा संघर्ष चलवांगे चौफेरा , राम क्यूँ आंधा होग्या।।
[27/05, 8:26 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *के आज का जिक्र करूं यो बख्त कसूता आग्या।।*
*कार्पोरेट की लूट का साया पूरे देश के मैं छाग्या।।*
1
अडानी अंबानी नै तो देश मैं अपना जाल बिछाया सै
गामोली शहरी की लूट का तरीका गजब
अपनाया सै
*देश तोड़क ताकतों कै भी मौका चोखा थ्याग्या ।।*
2
बेरोजगारी म्हंगाई भूखमरी नै घणा उद्यम मचाया सै
शिक्षा स्वास्थ्य के मुद्दे तैं सरकार नै ध्यान हटाया सै
*इनतै ध्यान हटावण खातर टैग जात धर्म का पाग्या ।।*
3
धर्म की धार्मिकता छोड़ कै धर्मांधता का घेरा घाल्या
कांवड़ कित्तै मूर्ती पूजा का बहम म्हारे मन मैं डाल्या
*अंधविश्वास म्हारी एकता नै पूरे देश मैं यो खाग्या।।*
4
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई ये रहते आए भाई भाई
इनकी एकता कै धर्मांधता नै कसूती आग लगाई
*रणबीर नै कलम पिनाई कार्पोरेट भगाओ नारा भाग्या।।*
[28/05, 12:37 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: **साथी राजरानी की शहादत**
गेस्ट टीचर्स के संघर्ष को देखकर एक बात याद आ गयी । शीला बाई पास पर प्रदर्शन पर गोलियां चली । वहां राजरानी भी गोली का शिकार हुई। जीप ड्राइवर राजरानी को लेकर आया और मैं भी इमरजेंसी में पहुंचा। वहां क्या हुआ इस बारे उन्हीं दिनों एक रागनी लिखी थी पेश है :---
बिन आयी मौत साहमी तड़फै सड़क पै पड़ी हुई।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
1
धड़ाम दे पडी सड़क पै खून फव्वारा ना काबू आरया
साथी तो ठावैं पुलिस रोकै मन होग्या उसका खारया
धक्का स्टार्ट जीप मेरी उन सबनै फेर धक्का मारया
घाल जीप मैं चाल पड़े चेहरां पीला पड़ता जारया
पीली पड़गी राजरानी कितै कितै सांस अड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
2
ड्रिप लायी ईसीजी मशीन वा सीधी लाइन दिखावै
कई डॉक्टर कट्ठे होगे एक छाती बार बार दबावै
खत्म होली राजरानी कहता डॉक्टर भी घबरावै
चारों कान्ही हाहाकार मच्या गैल भीड़ चढ़ती आवै
देखैं पड़ी खून मैं लतपथ साथिन उड़ै खड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
3
पड़ी राजरानी बिस्तर पै जनों मेरी तरफ लखावै
इसा दिखाई देवै जनों यो हमनै सन्देश देना चाहवै
आत्म सम्मान बचाल्यो रलकै आज हकूमत दबावै
संघर्ष का रास्ता लेल्यो यो मंजिल तक पहोंचावै
मुठ्ठी भींचगी राजरानी की थी जाड़ी भी कड़ी हुई।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
4
गोली मारी सांथल के म्हां करया जुल्मी काम सुणो
राजरानी गेस्ट टीचर नै यो दिया आखरी पैगाम सुणो
नेता अफसर पुलिस की कसनी होगी लगाम सुणो
आख़री सांस मैं उसनै लिया साथिन का नाम सुणो
रणबीर रोवै उड़ै खड़या साच्ची बात ना घड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
[29/05, 4:24 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: कमला का सपना टूट गया
डॉक्टर बनूं पढ़ लिख कै यो मन का सपना मेरा।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
1.
मां बाबू अनपढ़ म्हारे घणे लाड प्यार तैं पढ़ाई
खेती मैं नहीं पूरा पाटै उल्टी सीधी ना कोए कमाई
धरती गहणे धरकै पढ़े दो बाहण और एक भाई
मेहनत कर आगै बढ़िये मेरे तैं या सीख सिखाई
दो भैंस बांध दूध बेचैं करजे का बढ़ता आवै घेरा।।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
2.
भाई नै एम ए करकै बी नहीं कितै नौकरी थ्याई
गाम मैं किरयाणे की फेर उसकी दुकान खुलाई
बड्डी बाहण बीएड कर बैठी या घर मैं बिन ब्याही
मेरी पी एम टी टैस्ट मैं सत्तरहवीं पोजीसन आई
काउंसलिंग खातर गई उड़ै दिया दिखाई झेरा।।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
3.
ठारा हजार म्हिने की पहले साल की फीस बताई
पसीना आया गात मेरे मैं धरती घूमती नजर आई
मेरै आंख्यां मैं आंसूं आगे फेर मां की तरफ लखाई
हाल क्यूकर ब्यां करूं मैं ना कलम मैं ताकत पाई
अपने दलाल बिठारया दीखै यो उडै़ वर्ग लुटेरा।।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
4.
फीस देण की आसंग कोण्या मन मारकै आगी फेर
गाम मैं यकीन करैं ना बोले माच्या किसा अन्धेर
इस सरकार मैं बैठे जितने ना कटावैं गरीबां की मेर
बेरा ना या कद होवैगी हम गरीब लोगां की सबेर
रणबीर न्यों बूझै ये बालक क्यूकर पढ़ावै कमेरा।।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
[29/05, 4:25 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: हमारा समाज
सुणले करकै ख्याल दखे, ये गुजरे लाखां साल दखे
सिंधु घाटी कमाल दखे, यो गया कड़ै लोथाल दखे,
यो करकै पूरा ख्याल दखे, खोल कै भेद बतादे कोए।।
सुसुरता नै भारत कानाम करया,वागभट्ट नै बढ़िया काम करया
ब्रह्म गुप्त नै हिसाब पढ़ाया, आर्यभट्ट जीरो सिखाया
नालन्दा नै राह दिखाया, तक्षशिला गैल कदम बढ़ाया
तहलका चारों धाम मचाया, ये गये कडै़ समझादे कोए।।
मलमल म्हारी का जोड़ नहीं, ताज कारीगिरी का जोड़ नहीं
हमनै सबको सम्मान दिया, सह सबका अपमान लिया
ग्रीक रोमन को स्थान दिया, भगवान का गुणगान किया
इसनै म्हारा के हाल किया, या सही तसबीर दिखादे कोए।।
दो सौ साल राजा म्हारे देस के, बदेसी बोगे बीज क्लेश के
फिरंगी का न्यों राज हुया, चिड़ी का बैरी बाज हुया
सारा खत्म क्यों साज हुआ, क्यों उनके सिर ताज हुया
क्यों इसा कसूता काज हुया, थोड़ा हिसाब लगादे कोए।।
लाहौर मेरठ जमा पीछै नहीं रहे, म्हरे वीर बहादुर नहीं डरे
फिरंगी देस के चल्या गया, कारीगर फेर बी मल्या गया
धर्म जात पै छल्या गया, संविधान म्हारा दल्या गया
क्यों इसा जाल बुण्या गया, रणबीर पै लिखवादे कोए।।
[29/05, 4:27 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: महिला की पुकार
खत्म हुई सै श्यान मेरी , मुश्किल मैं सै ज्याण मेरी, छोरी मार कै भाण मेरी, छोरा चाहिए परिवार नै।।
1
पढ़ लिख कै कई साल मैं ,मनै नौकरी थ्याई बेबे
सैंट्रो कार दी ब्याह मैं ,बाकि सब कुछ ल्याई बेबे
घर का सारा काम करूं, ना थोड़ा भी आराम करूं, पूरे हुक्म तमाम करूं, ओटूं सासू की फटकार नै।।
ख़त्म हुई सै---
2
पहलम मेरा साथ देवै था ,यो मेरे घर आला बेबे
दो साल पाछै छोरी होगी, फेर करग्या टाला बेबे
चाहवैं थे जांच कराई, कुन्बा हुया घणा कसाई, मैं बहोत घणी सताई, हे पढ़े लिखे घरबार नै।।
ख़त्म हुई सै---
3
जाकै रोई पीहर के म्हं , पर वे करगे हाथ खड़े
दूजा बालक पेट मैं जांच कराने के दबाव पड़े
ना जांच कराया चाहूँ मैं, पति के थप्पड़ खाऊँ मैं, जी चाहवै मर जाऊं मैं, डाटी सूँ छोरी के प्यार नै।।
खत्म हुई सै---
4
दूजी छोरी होगी सारा परिवार तण कै खड़्या हुया
नाराजगी और गुस्सा दिखे सबके मूंह जड़या हुया
किसकै धोरै जाऊं मैं, अपनी बात बताऊं मैं, रणबीर पै लिखवाऊं मैं,बदळां बेढंगे संसार नै।।
खत्म हुई सै----
[30/05, 9:42 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: खिड़वाली गांव के लोगों की 1857 की आजादी की लड़ाई में दी गई कुर्बानियों को याद करते हुए एक रागनी। क्या बताया भला:-
ठारा सौ सत्तावन मैं आजादी की पहली जंग लड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
1
मानस खिड़वाली के भिड़गे अंग्रेजां के साहमी जाकै
दो फिरंगी तहसील मैं मारे मेम पड़ी तिवाला खाकै
भीतरला जमा भरया पड़या बाट देखैं थे एड्डी ठाकै
पाछले जुलमां का सारा हिसाब फेर धरा लिया आकै
फिरंगी से लड़ने की पूरी गुप्त योजना सही घड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
2
बही शेख और लालू बाल्मिकी जमकै लड़ी लड़ाई थी
तिरखा बाल्मिकी मोहमा शेख हिम्मत खूब दिखाई थी
जुलफी मोची सुनार रामबक्स आजादी पानी चाही थी
बेमा बाल्मिकी इदुर मोची नै ज्यान की बाजी लाई थी
मुफ़ी औला पठान लड़या साथ मैं जनता खूब भिड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
3
मोहर नीलगर खिड़वाली का ना मुड़कै कदे लखाया
सायर बाल्मिकी लड़ाकू नै फिरंगी तैं सबक सिखाया
सुनाकी बाल्मिकी साथ लड़या वो कदे नहीं घबराया
बीर मर्द जितने सबनै धुर ताहिं का साथ निभाया
फिरंगी राज के कफ़न मैं इस जंग नै कील जड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
4
खिड़वाली ना रहया एकला साथ गामड़ी आया था
एक बै कब्जा रोहतक पै सबनै मिलकै जमाया था
फिरंगी भाज लिया था नहीं कोय रास्ता पाया था
बहादुरशाह जफ़र को राजा सबनै ही अपनाया था
रणबीर बरोने आला बतावै जंग की ये बात बड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
[31/05, 2:15 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: बात पते की
क्यों दो आंख लेकै भी आंधे हमनै सड़ांध देवे दिखाई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
1
ईमानदारी का पाठ पढावें नेता अफसर संसार मैं
इनकम टैक्स की चोरी करना बालक सीखें परिवार मैं
इस काले धन की बहार मैं दीखे फेर कति सच्चाई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
2
ऊपर बैठे अफसर नेता लेरे बदेशी बैंकं मैं खाते ये
जड़ मैं भ्रष्टाचार पणपै तो क्यूकर हारे रहवैं पाते ये
इननै चाहियें चिमटे ताते ये इनकी कोए और दवाई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
3
साठ हजार करौड़ का कर्जा म्हारे देश के अमीरां पै
सरकार म्हारी चालती देखो इनकी काढी लकीरां पै
हम खंदाये संत और फकीरां पै साच समझ मैं आई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
4
दारू सुल्फा नशा खोरी हमतैं इनकी राही पकड़ा दी
बिना सोचें समझें हमनै भकड़ बाल कै नै दिखा दी
रणबीर सिंह नै छंद बना दी या साच जमा छिपाई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
[31/05, 2:16 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *5 जून सम्पूर्ण क्रांति दिवस*
*पांच जून नै काले कानून ऑर्डिनेंस पास करया रै।।*
*एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।*
1
उन्नीस सौ चुहत्तर के मैं पांच जून नै बीड़ा ठाया
जयप्रकाश नारायण नै सम्पूर्ण क्रांति नारा लाया
*जेपी नै इस तरियां शुरू नया इतिहास करया रै।।*
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
2
सम्पूर्ण क्रांति दिवस देश के ये किसान मनावैंगे
तीन कानूनाँ की प्रति किसान मजदूर जलावैंगे
*भाजपा नेतावां के दफ्तरां पै प्रोग्राम खास धरया रै।।*
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
3
जत्था दोआबा तैं चालकै सिंघु बार्डर पै पहोंच्या रै
बार्डरों पर डटे किसानां नै मिलकै यो दिन सोच्या रै
*बायकाट करो सरकार का फैंसला पास करया रै।।*
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
4
तीन कानून बिल बिजली रणबीर रद्द करवावैंगे
चारों लेबर कोड रद्द हों किसान मजदूर जोर लगावैंगे
*इनकी गलत नीतियों नै फसल का घास करया रै।।*
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
[31/05, 2:19 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: चालै कोण्या जोर
मेरा चालै कोण्या जोर मनै लूटैं मोटे चोर
नहीं पाया कोये ठौर कटी पतंग की डोर
मनै लावैं डांगर ढ़ोर यो किसा घोटाला रै।
मेरा बोलना जुल्म हुया
उनका बोलना हुक्म हुया
सारे ये मुनाफा खोर ये थमा धर्म की डोर
बनावैं ये म्हारा मोर सुहानी इनकी भोर
ऐश करैं डाकू चोर मन इनका काला रै।
ये भारत के पालन हार
क्यों चोरां के सैं ताबेदार
म्हारे पै टैक्स लगावैं बोलां तो खावण आवैं
मिल्ट्री सैड़ दे बुलावैं चोरां की मौज करावैं
काले का सफेद बणावै भजैं राम की माला रै।
महंगाई की मार कसूती
सिर म्हारा म्हारी जूती
यो रोजगार मन्दा सै यो सिस्टम गन्दा सै
यो मालिक का रन्दा सै घालै दोगला फंदा सै
क्यूकर जीवै बन्दा सै हुया ढंग कुढाला रै।
पत्थर पुजवा बहकाये
भक्षक रक्षक दिखाये
काले नाग डसगे क्यों ये शिकंजे कसगे क्यों
दो संसार बसगे क्यों गरीब जमा फ़ंसगे क्यों
रणबीर पै हंसगे क्यों कर दिया चाला रै।
ranbir dahiya
[31/05, 7:43 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: परथा
बाणै बैठे पाछै बेबे मनै हाथां पै महन्दी लाई हे।
चाचा ताऊ यारे प्यारयाँ कै जी भरकै हल्वा पूरी खाई हे।
1
रोज सांझ नै कट्ठी होकै ये गीत लुगाई गावैं थी तड़कै सांझ रगडै़ं बटना तेल भी मेरै चढ़ावैं थी कदे बंटैं पताशे कदे बाकली भी बाँटी जावैं थी मेरे साथ की छोरी मेरी गेल्या हंसी ठठे लावैं थी किसा होगा मेरा साँसरा इस चिन्ता नै मैं भरमाई हे।
2
ब्याह का दिन आया जिसकी देखें सारे बाट बेबे बीस तीस कति नहीं ये बराती एक सौ साठ बेबे
बढ़िया बिस्तर गए बिछाये कर दिये पूरे ठाठ बेबे
दारू का दौर शुरू हुया खुली बोतलों की डाट बेबे
नाचे छोर जोर लगाकै जब बारौठी की बारी आई हे।
3
बणड़ा उत्तरया घोड़ी तैं देहली म्हारी ऊपर आकै
घाल दई मनै उसकै माला बहोत घणी शरमा कै कोण्या दिख्या ऊंका मुखड़ा मनै घूंघट के म्हां कै धोरै खड़े बराती देखें थे मेरे कान्ही एडी ठा ठाकै दिन ढल लिया जब बरात फेरयाँ खातर बुलाई हे।।
4
खूब सजाया मंडप पंडत नै आलती पालती मारी अगड़ बगड़ की कट्ठी हुई बहू अर ये छोरी सारी
कई घन्टे लगा दिये मनै हुया बैठया रहना भारी
बणडे़ के फटके गेल्यां गांठ मेरी चादर की मारी
मन मन मैं पंडत ताहि मनै घनीए गाल सुनाई हे।।
5
फेरे खत्म हुये पाछै या बिद्या की फेर बात चली घुसर फुसर हुई उडै़ बाप मेरे कै या बात खली
ग्यारा सौ के वाणे हों उड़ती सी या बात मिली दिल मेरा बी हाल्या कानां जब या बात घली सारा घर लुट पिटवा कै बाबू नै मांग पुगाई हे।।
6
चलचल जी था मेरा कुछ समझ नहीं पाया
मां की आंख्या मैं आंसू मेरा जी बी भर आया बाबू का कमनू चेहरा मेरी आंख्या आगै छाया सांसरिया के देख नखरे डोल उठी मेरी काया रणबीर एक तरफ कुवां दिखै दूजीतरफ नै खाई हे ।।
[31/05, 8:30 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: कन्या भ्रूण हत्या समाज का बहुत घटिया काम बताऊं।।
महिला थोड़ी पुरुष घणे इसका असर आज गिनाऊं।।
1
महिला को दोयम दर्जा दे राख्या म्हारे समाज नै
हरेक जगां पाछै राखैं भूले बराबरी की आवाज नै
और भी कई मामले सैं खोल कै सारे पत्ते दिखाऊं।।
2
भाई बाहण कोन्या बराबर भाई की जगां ऊंची सै
कैहवण नै सैं बराबर पर असल मैं महिला नीची सै
मानैं दोनों नै बराबर समाज नै मैं क्यूकर समझाऊं।।
3
समान काम कम भुगतान महिला तैं किया जावै
अवैतनिक श्रम का भी फालतू बोझ दिया जावै
श्रम बाजार मैं महिला की कैसे हिस्सेदारी बराबर ल्याऊं।।
4
गर्भावस्था के बख्त रणबीर महिला मौत ज्यादा बताई
पुरुष महिला अनुपात मैं महिला की कमी सै आई
बस छोरे के जन्म ऊपर छठ ना छोरी की छठ मनाऊं।।
[01/06, 6:20 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: बढ़ती महंगाई नै आम जनता कै आज साँस चढ़ाई रै।।
नौकरी पेशा वर्ग किसान की मुशीबत और बढ़ाई रै ।।
1
छोटा व्यापारी भी इसके बोझ तलै आज दब लिया
रसोई गैस डीजल के बढ़े दाम नै समाज जकड़ दिया
घर के बजट कै फांसी इन बढ़े दामों नै आज लगाई रै ।।
2
घर चलाना मुश्किल होया तो रसोई खर्च बढ़ता जारया
पेट भराई नहीं हो पाती करजा जावै यो चढ़ता भारया
बालकों के कम खाने नै उनकी सेहत कसूती ढाई रै ।।
3
बढ़ती महंगाई नै मुश्किल करी बालकों की पढ़ाई
स्वास्थ्य की देखभाल भी महंगी कई नै ज्याण
गंवाई
संकट कई ढाल के बढ़गे मुश्किल सबकी या गिनाई रै ।।
4
किसान का खेती करना घने घाटे का सौदा यो होग्या
खेती की लागत बढ़गी एमएसपी किसान नै डबोग्या
रणबीर की कविता पै भी या महंगाई कसूती छाई रै ।।
[02/06, 1:54 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आजादी
खतरे मैं आजादी म्हारी जिंदगी बणा मखौल दी।
इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।
आजादी पावण की खातर असली उठया तूफ़ान था
लाठी गोली बरस रही थी जेलां मैं नहीं उस्सान था
एक तरफ बापू गांधी दूजी तरफ मजदूर किसान था
कल्पना दत्त भगत सिंह नै किया खुल्ला ऐलान था
इंक़लाब जिंदाबाद की उणनै या ऊंची बोल दी ।
सत्तावन की असल बगावत ग़दर का इसे नाम दिया
करया दमन फिरंगी नै उदमी राम रूख पै टांग दिया
सैंतीस दिन रहया जूझता कोये ना मिलने जाण दिया
हंस हंस देग्या कुर्बानी हरियाणे का रख सम्मान दिया
हिन्दू मुस्लिम एकता नै गौरी फ़ौज या खंगोल दी।
भारतवासी अपने दिलां मैं नए नए सपने लेरे थे
नहीं भूख बीमारी रहने की नेता हमें लारे देरे थे
इस उम्मीद पै हजारों भाई गए जेलों के घेरे थे
दवाई पढ़ाई का हक मिलै ये नेक इरादे भतेरे थे
गौरे गए आगे काले रणबीर की छाती छोल दी।
फुट गेरो और राज करो ये नीति वाहे चाल रहे रै
कितै जात कितै धर्म नै ये बना अपनी ढाल रहे रै
आपस मैं लोग लड़ाए लूट की कर रूखाल रहे रै
वैज्ञानिक नजर जिसकी जी नै कर बबाल रहे रै
इक्कीसवीं की बात करैं राही छटी की खोल दी।
2003.2004
[02/06, 1:56 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *हरियाणे के वीरो जागो*
*हरियाणे के वीरो जागो तजो जात के बाणे नै।*
*ढेरयां आला कुड़ता सै समझो इसके ताणे नै।*
1
गरीब माणस नै मरज्याणी गरीब भाई तैं दूर करै
अमीर होज्यां एक थाली मैं यो गरीब मजबूर फिरै
*अमीर इस्तेमाल भरपूर करै गरीबाँ नै बहकाणे नै।*
अमीरां का छोरा कोये बेरोजगार जमा ना पाणे का
पुलिस कचहरी सब उनके ख़ाली हुक्म ना जाणे का
*गरीब लूट कै खाणे का टोहया सै राह मरज्याने नै।*
मेहनत जात गरीबाँ की और कोये तो जात नहीं
जाट ब्राह्मण सिर फुड़वावें मिलै खान नै भात नहीं
*जात मिटा सकै दुभांत नहीं बात कही सै स्याणे नै।*
जात के ठेकेदारां की बांदी या करै इनकी ताबेदारी
आम आदमी जकड़ लिया अमीर करै पूरी पहरेदारी
*रणबीर करै नहीं चाटूकारी नहीं बेचै अपणे गाणे नै।*
[02/06, 2:00 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *नोएडा और गुड़गामा*
*आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।*
*युवा और युवतियों की या मजबूरी दिखाणी चाही।*
1
मियाँ बीबी ये दोनों मिलकै आज खूब कमावैं देखो
तीस लाख का पैकेज ये साल का दोनों पावैं देखो
तड़कै आठ बजे त्यार हो नौकरियां पर जावें देखो
रात के ग्यारह बजे ये वापिस घर नैं आवैं देखो
*इन कमेरयां की आज या पूरी कथा सुणानी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
2
अपने पारिवारिक रिश्ते बताओ कैसे चलावैं रै
ऐकले रैह रैह कै शहरां मैं ये कैरियर बनावैं रै
भीड़ मैं रैह कै भी अपने नै कतिअकेला पावैं रै
गांम गेल्याँ अपना रिश्ता बताओ कैसे निभावैं रै
*आज के दौर की या विरोधाभाष दिखाणी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
3
मोटे वेतन की नौकरी छोड नहीं पावैं देखो भाई
अपने बालकां नै घरां छोड़ कै नै जावैं देखो भाई
फुल टाइम की मेड एजेंसी तैं ये ल्यावैं देखो भाई
उसके धोरै बालक ये अपने पलवावैं देखो भाई
*मजबूरी या लाइफ आज इणनै अपनाणी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
4
मात पिता दूर रहवैं टाइम काढ़ नहीं पाते भाई
दादा दादी नाना नानी इनके बन्द हुए खाते भाई
घर मैं आवैं इस्तै पहले बालक तो सो जाते भाई
नॉएडा गुड़गामा का रणबीर यो हाल सुनाते भाई
*बदल गया जमाना हरयाणा ली अंगड़ाई चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
[02/06, 2:01 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आजादी
देश पै खतरा मंडरावै लडां आजादी बचाने की लड़ाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
1
पूरे देश मैं फैल रहया खतरा यो मनुवाद का बताया
चलता आवै खतरा देश मैं इबै सामंतवाद का बताया
बढ़ता जावै सै शिकंजा आज पूंजीवाद का बताया
इन सब तैं बड्डा खतरा गया साम्राज्यवाद का बताया
संविधान नै पूरा खतरा आजादी इन खतरों तैं चाही।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
2
एक खतरा और बताया सै यो हिंदुत्ववाद का सुनियो
दूजा खतरा और छाया सै तालिबानवाद का सुनियो
तीजा खतरा और दिखाया सै यो संघवाद का सुनियो
चौथा खतरा समझाया सै यो आतंकवाद का सुनियो
इन खतरयां तैं मिलकै या आजादी की आवाज लगाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
3
पितृ सत्ता बड़ी बीमारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
भ्रूण हत्या उधम मचारी इसतैं भी आजादी चाहिये सै
दहेज का उत्पीड़न भारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
बेरोजगारी बढ़ती जारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
आर्थिक संकट बढ़ता जावै इसकी बात गई छिपाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
4
हिदू राष्ट्र तैं आजादी हो यो सबका ही भाई चारा हो
इस्लामी राष्ट्र तैं आजादी हो पूरी दुनिया का नारा हो
जातपात से आजादी हो चाहवै अम्बेडकर म्हारा हो
अभिव्यक्ति की आजादी हो सबनै संविधान प्यारा हो
रणबीर बनती जावै सै नबै दस की पालेबन्दी भाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
[02/06, 3:40 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: अन्ध विश्वास का हमला सालो साल यो बढ़ता जावै ॥
कुम्म के मेले का खेल देखो हमने या बात सै समझावै ।।
1
एक सौ बयालीस साल पहले ठारा सौ बियासी मैं मनाया
बीस हजार का कुल खर्चा यो आठ लाख आने आल्याँ पै बताया
महा कुम्म दो हजार पच्चीस का खर्च साढ़े सात हजार करोड़ आवै।।
2
ठारा सौ ब्यासी मैं कुंभ मैं कुल आठ लाख लोग नहाये कहते
ठारा सौ चौरानवै मैं कुंभ मैं दस लाख लोग बताये कहते
दो हजार पच्चीस मैं कुंभ मैं या चालीस करोड जनता नहावै ।।
3
इन चालीस करोड़ लोगों का कितना खर्चा और आवैगा
किराया भाड़ा रोटी राटी का खर्चा कितना और वो ठावैगा
इतना बेजोड धन देश का जनता इस कुंभ के म्हां गँवावै ।।
4
इस सारी आवा जायी मैं जनता और भी कई दुख ठावै बताई
इस सार धन तैं पूरी होज्या कईयों की पढाई और दवाई
रणबीर सोच सोच कैभी ना बात पूरी इसपै लिख पावै।।
[02/06, 3:48 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: फातिमा शेख
संदेश सामाजिक सुधारों का फातिमा शेख नै जन जन तक पहुंचाया।।
पहली मुस्लिम महिला देश की जिसनै शिक्षा का अलख जगाया।।
1
नौ जनवरी ठारा सौ कतीस मैं महाराष्ट्र पुणे मैं जन्म लिया था
फातिमा के भाई उस्मान शेख नै ज्योतिबा फुले का साथ दिया था
फातिमा शेख नै सावित्री बाई फूले गेल्यां कदम तैं कदम मिलाया।।
2
दलित और पिछड़े वर्ग की बच्चियों की शुरू करी थी पढ़ाई
इसकी खातर ठारा सौ अड़तालिस मै पहले स्कूल की नीम धराई
गजब अथक प्रयास थे उनके गरीब वंचितों को पढ़ना लिखना सिखाया।।
3
उन्नीसवीं सदी का अंत और बीसवीं की शुरुआत का बख्त बताया
हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली मैं फातिमा हर नै कर यो कमाल दिखाया
समाज ठेकेदारों नै रोड़े अटकाये पर उननै नहीं पीछे कदम हटाया।।
4
विधवा विवाह और सती प्रथा इनके खिलाफ आवाज उठाई थी
बाल विवाह कै ऊपर भी जनता फातिमा हर नै बार बार समझाई थी
फातिमा हर को सलाम करने की खातर रणबीर नै कलम उठाया।।
[03/06, 8:50 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: अमीर गरीब की भारत मैं खाई बढ़ती जारी ।।
एक भूख का रोगी बताई दूजे ने कब्ज सतारी।।
1
पहला बीमार कहवै मेरा होता नहीं गुजारा
डेढ़ कमरे का मकान सै गाल मैं रहती गारा
कर्ज लेकै जिंदगी बीतै होरे बारा छह ठारा
बालकां की फीस पुगै ना मुश्किल डांगर नै चारा मैं आज फिरूं विपत का मारया सब तरियां लाचारी।।
2
खेत कमाऊं हांगा लाऊँ जमा ठाली फिरता कोन्या
मेरा एक किला बिक लिया कर्ज उतरता कोन्या या अन्न की बाँधी काया सै बिन खाए सरता कोन्या
छोरा हांडै पैर भिड़ान्ता कोये ब्याह करता कोन्या
कौन ईसा जो डरता कोन्या बेटी घरां कंवारी ।।
3
दूजा बीमार कहवै मेरै कब्ज रहवै सै बेमियादी उठया बैठया नहीं जावै जोर करै या बा बादी चलती हाणा पेट कै मनै या पड़ै बांधनी बाधी दमा होया कई साल तैं मेरी पूरी चूल हिलादी भोजन की होज्या बर्बादी खाणा पचना हो
भारी।।
4
एक कै रोग टोटे का दूजे कै धन की लागी
काई
एक नै तो खावण नै कोन्या दूजे की सै भूख गंवाई
अमीर गरीब की हम पाटाँ सोच समझ कै नै खाई
इसतैं न्यारी और नहीं इस जग में बताई कोए लड़ाई
रणबीर सिंह की कविताई न्यों जोखन घणी ठारी ।।
[03/06, 5:38 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: जिंदगी आंदोलन मैं लादी धन धन सै बसाऊ राम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
1
पन्दरा अगस्त तिहत्तर मैं बसाऊ दुनिया के मैं आया
दलित किसान परिवार मैं बसाऊ दुनिया के मैं आया
पन्दरा अगस्त तिहत्तर मैं कलौंदा का राह तनै पाया
क्यानवै मैं दस जमा दो का करया पास एग्जाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
2
तिराणवै मैं जींद मैं करी साक्षरता मैं थी भागीदारी
नरवाना खण्ड के जथ्यां मैं करी थी बड़ी हिस्सेदारी
कमला महिपाल सांग बनाया तोड़े बेड़े बन्द तमाम तनै ।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
3
मेहनत करकै करी हासिल रागनी लिखने गाणे मैं तनै
गाम गाम जा कै अलख जगाई जींद सिमाणे मैं तनै
सामूहिकता अपनाई सांग मैं खुली छोडी लगाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
4
किसान आंदोलन मैं टोल पै जमकै पाला थाम्या भाई
नई नई रागनी लिख टोल पै हांगा लाकै थामनै गाई
रणबीर करै तहे दिल तैं साथी बसाऊ सलाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
[03/06, 6:12 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: जिंदगी आंदोलन मैं लादी धन धन सै बसाऊ राम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
1
पन्दरा अगस्त तिहत्तर मैं बसाऊ दुनिया के मैं आया
दलित किसान परिवार मैं बसाऊ दुनिया के मैं आया
पन्दरा अगस्त तिहत्तर मैं कलौंदा का राह तनै पाया
क्यानवै मैं दस जमा दो का करया पास एग्जाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
2
तिराणवै मैं जींद मैं करी साक्षरता मैं थी भागीदारी
नरवाना खण्ड के जथ्यां मैं करी थी बड़ी हिस्सेदारी
कमला महिपाल सांग बनाया तोड़े बेड़े बन्द तमाम तनै ।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
3
मेहनत करकै करी हासिल रागनी लिखने गाणे मैं तनै
गाम गाम जा कै अलख जगाई जींद सिमाणे मैं तनै
सामूहिकता अपनाई सांग मैं खुली छोडी लगाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
4
किसान आंदोलन मैं टोल पै जमकै पाला थाम्या भाई
नई नई रागनी लिख टोल पै हांगा लाकै थामनै गाई
रणबीर सत्याइस मई इक्कीस आखिरी बसाऊ सलाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
[03/06, 7:39 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आपा धापी देश मैं
या घनी आपाधापी मचाई देश के इन ठेकेदाराँ ने ॥
सारे रिकार्ड तोड़ बगाये धन के लालची साहूकारां नै ।।
1
विकास राही माणस खाणी इनै रोजगार घटाया सै
महिला जमा बाहर राखी इसा महाघोर मचाया सै
बाबू बेटा ज्यानी दुश्मन बहु सास मैं जंग कराया सै
बुढ़यां की कदर कड़ै जिब जवानां का मोर नचाया सै
माणसे तैं हैवान बणा दिये सभ्यता के थानेदाराँ नै ।।
2
इसा विकास नाश करैगा म्हारा या बात क्यों
जरती ना
गरीब अमीर की या खाई आज दुनिया में भरती ना
चारों कान्ही माफिया बधगे या बुराई आज हरती ना
अच्छाई पै हमला इनका फेर बी कदे या मरती ना
बदेशी कम्पनी छागी छूट दे राखी राज दरबाराँ नै।।
3
अमेरीका दादा पाक गया सारे कै आतंक मचाया सै
सद्दाम हुसैन साहमी बोल्या इराक पढ़ण बिठाया सै
यूगोस्लाविया पै बम्ब गैरे यो कति ना शरमाया सै
तीसरी दुनिया चूस लई भारत में जाल बिछाया सै
बदेशी अर देशी डाकू सिए पै चढ़ाये सरकारां नै।।
4
उल्टी राही चला दई म्हघर देश की जनता किसनै रै
सोच समझ कै बेरा पाड़ां देश तै भजावां
उसनै रै
इस विकास राही नै बदलाँ मोर बणाया सै जिसनै रै
रणबीर इसा विकास हो जो मेटै सबकी ए तिसनै रै
दीन जहान तै खो देगी या जनता इसे बदकाराँ ने ॥
[05/06, 8:18 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: पायरिला बीमारी
सन छत्तीस का जिकर सुणो पायरिला बीमारी आगी रै ॥
ईंख की सारी की सारी फसल कसूती तरियां खागी रै ॥
1
गंडे तै गुड़ नहीं बन पाया कोडियां के दाम बिक्या राला
किसानों मैं हा हा कार माचगी होया कुन्बे की ज्यान का गाला
आगले साल गंडा बोया ना दिल मैं भय की छाया छागी रै॥
2
बरबादी मैं कसर रही ना इलाके मैं हाहा कार मच्या
अड़तीस उत्तालिस मैं अकाल नै ताण्डव आण
रच्या
स्कूल कालेज बी बन्द होगे थे चोट घणी कसूती लागी रै॥
3
खराब खेती अकाल कारण भूख मरे थे किसान सारे
बे जमीन्याँ की बुरी हालत फिरते दिन रात म
मारे मारे
पते पेड़ों के पशु ख़ाँवंते खूंटे तड़वा कै गादड़ी भागी रे ॥
4
देश स्तर पै आजादी की जंग अपना जोर पकड़ री थी
दूसरे महा युद्ध की आशंका दुनिया नै जकड़
री थी
लिखै रणबीर बरोनिमा इन बखतां की रागनी सागी रै।
[05/06, 3:00 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: सौ मैं तै पिचासी भारत वासी बांट दिये कई चाल चलाकै।।
जातपात का खेल रचया यो पटक दिये घरती
पै घुमाकै।।
1
जात मैं भी फेर गोत घुसाये सही जमीनी सच्चाई बताऊँ
दलित भी फेर आगै बाँट राखे एक दूजे के खिलाफ दिखाऊं
चाल गिणाऊँ से कितनी इनकी देखे थक जाउँ गिन्णवाकै ॥
2
इलाका वाद का जहर भरया आकै इन बदेशी गोरयां नै
मार्शल कौम यो खड़ा करया आकै इन बदेशी गोरयां नै
मनु स्मृति नै बांट राखे सां म्हौरै छोंक वर्णों के लगा कै ।।
3
छतीस सौ जात बतावैं पूरे म्हारे इस हिन्दुस्तान मैं रै
सात आठ धर्म बताये बसैं बात न्यारी पूरे जहान
मैं रै
कैसे बनैगी एकता इन सबकी धर देगी दुनिया नै हिला कै ॥
4
इतनी विविधता और कितै नहीं या टोही पावैगी तोड़क बी बनी पर कदे जोड़क बी बण जावैगी
रणबीर आसान काम नहीं हिम्मत कर कलम उठा कै ॥
[05/06, 3:29 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आर्य समाज नै छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई थी।।
चालती हवा आखिर सी मैं या हरियाणे मैं भी आई थी।।
1
पहला महायुद्ध खत्म हुया तो माहौल बण्या हरियाण मैं
चौधरी छोटूराम का यो नाम
सबनै सुण्या हरियाणे मैं
बलदेव सिंह नै गोरया के खिलाफ आवाज लगाई थी ।।॥
2
उन्नीस सौ आस पास कहैं सांघी मैं जनेऊ धार लिया था
ब्राह्मण बनिया कट्ठे होगे जनेऊ वो उल्टा तार लिया था
जाट शुद्ध मान्या जावै था जनेऊ धारण की मनाही थी ।।
3
समाज सुधार मैं आर्य समाज नै हुआछूत पै सवाल करया
कुछ नै सांझले कुओं का जतन करकै कमाल करया
छुआछूत बीमारी कै थोड़ी घणी खरोंच बतावैं आई थी ।।
4
पढ़ाई लिखाई में भी साफ
छुआछूत दिखाई देवै थी
दलित के बालक का रास्ता कहते कई बै रोक लेवै थी रणबीर आर्य समाज नै कुछ तो अलख जगाई थी ॥....
[05/06, 5:42 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: केन्द्र सरकाराँ नै म्हारे देश का कर दिया बंटा धार,देखियो के होगा।।
1
कमा कमा खेतों मैं मरगे लूट कै पैप्सी कोला लेग्या
पलंग निवारी देऊँगा कैहकै खोस यो खटोला लेग्या
बढ़ा म्हंगाई हम जमा मार दिये चारों कान्ही हाहाकार,देखियों के होगा।।
2
घुसपैठिये लिए बाड़ देश मैं ये गफलत मैं सोई वीर सैनिक लड़े जमकै मिशाल नहीं पावैगी टोही
यो अटल बिहारी सै नकल बिहारी डबोवै बीच मझदार,देखियो के होगा।।
3
स्वदेशी का ढोंग रचाकै इनै राख्या देश अंधेरे मैं कबरी कबरी भाषा बोलैं ना करते मेर कमेरे मैं आयात खोल कै मुद्रा कोष की बोलैं जय जयकार,देखियो के होगा।।
4
मजहब पै झगड़े करवाकै हिन्दू कार्ड कैस करवाग्या
पूंजीपति की टहल बजाई असली चेहरा सहमी आग्या
अयोध्या की भोली जनता पै या चली खूब कटार,देखियो के होगा।।
5
विष्णु भागवत चलता करके या धक्का पेल करी देखो
कानूनों का मखौल उड़ाकै नीलाम भेल करी देखो
राजनीति और धर्म की कट्ठी चलाई गई या तलवार,देखियो के होगा।।
6
कांग्रेस और भाजपा आर्थिक नीति पर साथ खड़ी सैं
बीमा क्षेत्र पब्लिक सैक्टर निजी करण की छाप जड़ी सैं
उदारीकरण की ये कररैं बड़ाई जनता नै दी ललकार ,देखियो के होगा।।
7
नकली लाल हरियाणे के पूँजी पति के दलाल सारे
असली लाल हरियाणे के कमजोर सैं फिलहाल
सारे
ईब साथ देकै लाल झण्डे का करल्यां भूल सुधार, देखिया के होगा।
[07/06, 7:17 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: विवेक
सूरज साहमी कोहरा टिकै ना अज्ञान विवेकमयी वाणी कै।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
1
ढोंग अर अन्ध विश्वास पै टिक्या चिन्तन फेर बचै कोण्या
यज्ञ हवन वेद शास्त्र फेर पत्थर पूजा प्रपंच रचै कोण्या
पुरोहित की मिथ्या बात का दुनिया मैं घमशान मचै कोण्या
मन्द बुद्धि लालची माणस कै विवेकमय दया पचै कोण्या
शिक्षित अनपढ़ धनी निर्धन बीच मैं आवैं फेर कहाणी कै।।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
2
आत्मा परमात्मा सब गौण होज्यां सामाजिक दृष्टि छाज्या फेर
समानता एक आधार बणै औरत सम्मान पूरा पाज्या फेर
मानवता पूरी निखर कै आवै दुनिया कै जीसा आज्या फेर
कार्य काररणता नै समझकै माणस कैसे गच्चा खाज्या फेर
माणस माणस का दुख समझै ना गुलाम बणै राजराणी कै।।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
3
संवेदनशील समाज होवै ईश्वर केंद्र मैं रहवै नहीं
मानव केन्द्रित संस्कृति हो पराधीनता कोए सहवै नहीं
स्वतंत्रता बढ़ै व्यक्ति की परजीवी कोण कहवै नहीं
खत्म हां युद्ध के हथियार माणस आपस मैं फहवै नहीं
विवेक न्याय करूणा समानता खरोंच मारैं सोच पुराणा कै।।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
4
अदृश्य सत्ता का बोझ आड़ै फेर कति ना टोहया पावै
सोच बिचार के तरीके बदलैं जन चेतना बढ़ती जावै
मनुष्य खुद का सृष्टा बणै कुदरत गैल मेल बिठावै
कर्म बिना बेकार आदमी जो परजीवी का जीवन बितावै
रणबीर बरोने आला नहीं लावै हाथ चीज बिराणी कै।।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
[07/06, 3:46 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: राज जनता का
जनता द्वारा जनता का जनता खातर राज बाणावांगे ।।
कल्याणकारी योजना आखरी माणस लुग पहोंचावांगे ॥
1
डेमोक्रेसी आज देश मैं बड़े बड़े इजारेदाराँ की देखो
दिखावा जनता की हिमाती ताबेदारी थानेदाराँ की देखो
मेर कटावै संकट के मां बड़े बड़े जमींदाराँ की देखो
कारपोरेट आगै लाइन लागी नेता ताबेदाराँ की देखो
म्हारा कोण सै असली बैरी घर घर मैं अलख जगावांगे ।।
2
म्हारे बेटा बेटी इसमैं चुणैं कहैं पुलिस फौज म्हारी रै
या मारूति मालिक की सुणैं
कहैं पुलिस फौज म्हारी रै
हम हड़ताल कराँ तो धुणैं कहैं पुलिस फौज म्हारी रै
यो कारपोरेट रणनीति बुणैं कहैं पुलिस फौज म्हारी रै
इस पुलिस फौज नै मिलकै जनता के हक मैं ल्यावांगे ॥
3
खेत मजदूरों के संगठन ये मजबूत बणाणे होंगे
जातपात गोत नात छोड़ जनता संघर्ष बढ़ाने होंगे
नब्बे होवें एक पाले मैं दस दूजे पाले मैं खंदाने होंगे
मिलकै मालिक मजदूर होंवैं खून चूश हटाणे होंगे
भारत चमकै दुनिया मैं मानवता का पाठ पढ़ावांगे ॥
4
भ्रष्ट नेता भ्रष्ट अफसर भ्रष्ट पुलिस मार भगावां
भ्रष्यचार ना टोहया पावै जनता पहरेदार बिठावां
झूठ पिटती हांडै भारत मैं हम सच का साथ निभावां
फेयर इलेक्शन होण लगै इसमैं पीसा नहीं बहावावां
रणबीर कैह बणाकै नै सुन्दर हिन्नुस्तान दिखावांगे ॥
[07/06, 4:09 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: उल्टे काम और नशे पते का माफिया गामां ताहिं जा लिया।।युवती युवक यो बेरोजगारी की चिन्ता नै आज खा लिया ।।
1
दारू बिना कोए घर बच्या ना माणस चाहे बचरया हो
दारु का आदि माणस घरां पवाड़े घणे रचरया हो
घर तबाह करे दारू नै यो कैंसर घराँ बुला लिया ।।
2
नौजवान युवक युवती फंसे उल्टे कामां के घेरे मैं
बख्त तैं पहलम बूढ़े दीखैं ना तेज बची चेहरे मैं
सकारात्मक एजेंडा खोस कै उल्टे कामों मैं फंसा लिया।।
3
रिश्वत देदे मिलैं नौकरी दलाल नोट कमावैं सैं
फस्ट डिविजन आच्छे नम्बर सीनियर खड़े लखावैं सैं
खूनी होज्यां बरी कोर्ट मैं ईमानदार आज ढा लिया ॥
4
नौजवान युवक युवती सैं
सम्राज्यवाद के निशाने पै अमरीका की बुरी नजर पड़ी म्हारे इस बेमोल खजाने पै
कहै रणबीर सिंह मनै थारे संग कलम ठा लिया ।।
[07/06, 4:47 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: किसनै दोष देवां बिगड़गे भारत के कुछ नर नारी ।।
गरीब ज्यान तैं मरते दीखैं करल्यो नै होशियारी।।
1
पैदल चलना छोड़ दिया चाहे हो दो किल्ले जाणा
तड़की सारा दूध बेच दे चाय गैल बिस्कुट खाणा
बणणे चाहेवैं छैल छबीले बड्डे चोर जवारी ॥
2
गाम लूटकै खागे भाइयो ये नेता भ्रष्टाचारी देखो
सुलफा आया गैल भांग कै बढ़ी दारू बीमारी देखो
घोटाले दर घोटाल्यां की आज होरी घणी मारा मारी ।।
3
किसान मेहनत करकै टोटे मैं जिन्दगी बितावै सै
हर चार मिन्ट मैं एक किसान फांसी फन्दा लावै सै
फसल बढ़िया कीमत थोड़ी इस ढालां देई बुहारी ।।
4
किसान मरया तो सुणल्यो ना हिन्दुस्तान बचैगा रै
जन क्रान्ति का तावला ए ओड्यो बिगुल बजैगा रै
कहे रणबीर सिंह सोचां या बात बिगड़ती जारी ॥
[07/06, 7:12 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *वैज्ञानिक नजर*
*वैज्ञानिक नजर के दम पै जिन्दगी नै समार लिये।।*
*जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।*
1
सादा रैहणा उचे विचार साथ मैं पौष्टिक खाणा यो
मानवता की धूम मैच चाहिये इसा संसार बसाणा यो
सुरग की आड़ै नरक की आड़ै ना कितै और ठिकाणा यो
पड़ौसी की सदा मदद करां दुख सुख मैं हाथ बंटाणा यो
*धरती सूरज चौगरदें घूमै ब्रूनो नै सही प्रचार किये।।*
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
2
साच बोलणा चाहिये पड़ै चाहे थोड़ा दुख बी ठाणा रै
नियम जाण कुदरत के इसतै चाहिये मेल बिठाणा रै
हाथ और दिमाग तै कामल्यां चाहिये दिल समझाणा रै
गुण दोष तै परखां सबनै अपणा हो चाहे बिराणा रै
*जांच परख की कसौटी पै चढ़ा सभी संस्कार लिये।।*
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
3
इन्सान मैं ताकत भारी सै नहीं चाहिये मोल घटाणा
सच्चाई का साथ निभावां पैड़े चाहे दुख बी ठाणा
लालची का ना साथ देवां सबनै चाहिये धमकाणा
मारकाट की जिन्दगी तै ईब चाहिये पिंड छटवाणा
*पदार्थ तै बनी दुनिया इसनै चीजां को आकार दिये।।*
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
4
दुनिया बहोतै बढ़िया इसनै चाहते सुन्दर और बणाणा
जंग नहीं होवै दुनिया मैं चाहिये इसा कदम उठाणा
ढाल-ढाल के फूल खिलैं चाहिये इनको आज बचाणा
न्यारे भेष और बोली दुनिया मैं न्यारा नाच और गाणा
*शक के घेरे मैं साइंस नै रणबीर सिंह सब डार दिये।।*
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
[08/06, 6:03 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *बीरो धर्मा*
*दारु नाश करै घर का दीमक की ढालां शरीर नै खावै।।*
*मां बाप घणे दुखी रहवैं घर आली ऊपर संकट छावै।।*
1
शुरु शुरू मैं तो ब्याह शादी मैं दो चार घूंट लगाई रै
सहज सहन आदत पड़गी चाह कै नहीं छुट पाई रै
*कदे इस कदे उस गाल मैं पी कै नै दारू पड़या पावै ॥*
2
तड़कै उठकै कान पकड़ ले ईब ना कदे पीऊंगा
छोड छाड या दारू बीरो मैं तेरी खातर जीऊंगा
*उसे सांझ नै बीरो उसनै ठाकै अपणे कांधे पै ल्यावै॥*
3
आगले दिन पां पाकड़ ले खड़दू करै परिवार मैं बीरो घी प्यावै रहै दाऊ छोडण की इन्तजार मैं
*रात नै कई कई घण्टे लुग बीरो धर्म नै रोज समझावै।।*
3
आठ दस साल बीतगे तीन बालक घर मैं रलगे
दारू नशे मैं रहवै रोजाना खावण के लाले पड़गे जेवर *गैहने बेच कै पीवै कै चोरी करकै नै जरूर चढ़ावै।।*
4
खेत क्यार तैं चोरी करले दारू हुई घणी जरूरी या
बीरो कहवै घराँ बैठ कै पीले समझै सै मजबूरी वा
*बीरो की तै हद छाती सै रणबीर धर्मे नै ईबी चाहवै ।।*
[10/06, 7:33 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: पढ़ाई लिखाई व्यापार बणादी देश के सरमायेदार नै।
या फीस कई गुणा बधा दी मारे म्हंगाई की रफ्रतार नै।।
1.
स्कूल बक्से ना बक्से कालेज इस बढ़ती फीस के जाल तैं
कश्मीर तै केरल तक बींधे यो मांस तार लिया सै खाल तै
चारों कान्ही हाहाकार माचग्या इस आण्डी बाण्डी चाल तैं
जमा धरती कै मार दिये के तम वाकफ ना म्हारे हाल तै
एक चौथाई साधण जुटाओ कहवैं लूटो जनता लाचार नै।।
2.
यूजीसी कटपुतली बणादी उल्टे नियम बणवाये जावैं
दो सी बीस फीस थी पहलम तेरां हजार भरवाये जावैं
दिल्ली यूनिवर्सिटी मैं सात हजार शुरू मैं धरवाये जावैं
बन्धुओ थारी बढ़ी फीस या लेगी खोस कै म्हारी बहार नै।।
3.
दो हजार आटोनोमस कालेज पूरे भारत में चलाये सैं
नये कोर्स कम्प्यूटर बरगे इनके अन्दर ये खुलवाये सैं
इन कोर्सों के रूपये लाखां इन कालजां नै भरवाये सैं
गरीब बालक माखी की ढालां काढ़ कै बाहर बगाये सैं
युद्ध कान्हीं ध्यान बंटा कै चाहो बढ़ाना इस भ्रष्टाचार नै।।
4.
विश्व बैंक के कहने पै बन्धुओ क्यों गोड्डे टेके तमनै
उनके फायदे खातर क्यों म्हारे फायदे नहीं देखे तमनै
सब्सिडी खत्म गरीबां की बर्बादी पै परोंठे सेके तमनै
जनता साथ जान बूझ कै ईब फंसा लिये पेचे तमनै
रणबीर सिंह की कलम बचावै देश की पतवार नै।।
[10/06, 7:38 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *भर्ती*
पीस्याँ का जुगाड़ बनाया या धरती गहणै धरकै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
1
दोनों जणे आगै पाछै चाले ज्यूँ घोड़ी कै पाछै बछेरा
कितना दुखी पाग्या मेरी खातर भाईयो बाप यू मेरा
कहया सिपाही बणकै बाबू मैं दुःख दूर करूंगा तेरा
दस के बनाऊँ बीस लाख जै कदे बस चालैगा मेरा
सपने मैं चढ़ घोड़ी पै चल्या धर्मबीर सिपाही बणकै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
2
बाबू के दिल मैं धड़का था कदे बिचौलिया पीसे खाज्या
धरती खोयी पीसे भी जाँ कदे ज्यान मरण मैं ना आज्या
कदे झूठ बहका कै बिचौलिया म्हारै थूक कसूता लाज्या
सोचै बिस्वास करना होगा न्यूएँ क्यूकर नौकरी थ्याज्या
बाबू घबराया नहीं देख्या था इसे रासे के मैं पड़कै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
3
टूटे से ऑटो मैं बैठकै नै दोनूं शहर बीच आगे कहते
एस पी दफ्तर मैं भीड़ देखी भोत घणे चकरागे कहते
माणस ऊपर माणस चढ़रया वे एकबै घबरागे कहते
बोली चढ़गी पंदरा पै कई बिचौलिए बतलागे कहते
सी एम की सिफारिस वे आले चालें घणे अकड़कै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
4
साठ सीट बतावैं थे सिफारिशों का भाईयो औड़ नहीं था
कई सीएम के कुछ पीएम के टेलीफोनों का तोड़ नहीं था
गाभरू छोरे छह फिट के उड़ै उनका कोय जोड़ नहीं था
पढ़ाई लियाकत अर गातकै कोय उड़ै बांधै मोड़ नहीं था
लाइन मैं धर्मबीर लाग्या लत्ते काढण एक एक करकै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
5
जिले जिले मैं पुलिस की भर्ती रूका रोला माच गया
असनाई रिश्तेदारी टोहवैं मामला दिखा साच गया
कई सिफारशी हुए भर्ती बाकि पै यो पीसा नाच गया
बिचौलियाँ के पौ बारा हरेक कर तीन दो पांच गया
बिचौलिया नै नोट गिनाये चाय का कप सुपड़ कै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
6
भर्ती होवण की खातर उड़ै हजारां छोरे आरे देखे
सुथरा छैल गात रै उनका चेहरे कति मुरझारे देखे
रिश्वत खोरी खुली होरी छोरयां कै पसीने आरे देखे
गेल्याँ हिम्मती भी ये रणबीर पाँ कै पाँ भिड़ारे देखे
लिस्ट मैं आग्या बिचौलिया लेग्या बाकि के गिण कै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
[23/05, 2:49 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: करां एकता बेबे
देश एकता खतरे मैं बेबे हमनै रैहना तैयार पड़ैगा।।
जुल्मो सितम की टक्कर मैं हमनै अड़ना हरबार पड़ैगा।।
1
कई बाहण न्यों कहवैं सैं क्यों अपनी तरफ लखाती ना
देश की सोच्चण चाल पड़ी घर बार की सोची जाती ना
देश बिना कड़ै रोटी सैं बेबे म्हारी समझ मैं आती ना
म्हारी भूख क्यों बढ़ती जावै इसका हिसाब लगाती ना
घर का संकट न्यारा कोण्या हमनै करना विचार पड़ैगा।।
2
सारी बहनों को पड़ै जगाणा सै मुश्किल काम म्हारा
समता संगठन बनाये बिना ना दिखता कोये चारा
सारी बहनों नै कट्ठी करकै हम लावां मिलकै नारा
साम्प्रदायिकता जहरी नाग सै डस लिया चैन सारा
जात धर्म की छोड़ लड़ाई हमनै होणा इकसार पड़ैगा।।
3
अपना संगठन बणा करकै सब बहनों नै बतलावांगी
म्हारा सिंदूर कौन पूँछग्या सब बहनों नै
समझावांगी
समता और नारी शिक्षा का मतलब खोल दिखावांगी
सब भाइयां गेल्याँ रल मिल कै हम संविधान बचावांगी
सम्भालना होगा हम सभणै इब करणा यो प्रचार पड़ैगा।।
4
गलत दिशा दिखा हमनै बैरी अपना फायदा ठावैं हे
कदे औरत अपने हक मांगै न्यों उल्टी राह दिखावैं हे
धर्म का फतवा देकै एक दूजे के सिर कटवावैं हे
भ्रम फैलाकै जनता बीच हमनै आपस मैं लड़वावैं हे
कहै रणबीर रही एकली तो हमनै मरणा बारंबार पड़ैगा।।
[23/05, 3:32 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: सांझी बिरासत
कोणार्क और एजन्ता एलोरा म्हारी खूबै श्यान बढ़ावैं।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
दोनूं भारत की विरासत इसतै कौण आज नाट सकैं
साहमी पड़ी दीखै सबनै कौण इस बात नै काट सकैं
जो पापी तोल घाट सकैं म्हारी संस्कृति कै बट्टा लावैं।।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
कालिदास बाणभट्ट रवीन्द्र नाथ नै श्यान बढ़ाई सै
खुसरो गालिब फिराक हुये सैं जिनकी कला सवाई सै
न्यारे-न्यारे बांटै जो इननै भारत के गद्दार कुहावैं।।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
जयदेव कुमार गंधर्व भीम सेन जोशी जसराज दिये
बड़े गुलाम अली मियां बिस्मिल्ला खान नै कमाल किये
एक दूजे नै जो नीचा कहते वे घटियापन दिखावैं।।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
सहगल हेमन्त मन्ना और लता गायकी मैं छागे ये
रफी नूर जहां नौशाद साथ मैं सब जनता नै भागे ये
रणबीर बरोने आले कान्ही ये हिन्दु मुस्लिम लखावैं।।
चार मीनार कुतुब ताज महल ये च्यार चांद लगावैं।।
[23/05, 3:34 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आपा ...धापी
आपा धापी माच रही चारों कूट रोल्या पड़ग्या।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
ये घर बणे तबेले लोगो रही माणस की खोड़ नहीं
सोच तै परहेज करैं बात का टोहते औड़ नहीं
झूठ पै चालै पूरी दुनियां साच का जुलूस लिकड़ग्या।।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
मेहनत करी लोगां नै विज्ञान नै राह दिखाया
या दुनिया बदल दई घणा खून पसीना बाहया
लालची नै डाण्डी मारी गरीब कै साहमी अड़ग्या।।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
न्याय की बात भूलगे नहीं ठीक करया बंटवारा
पांच सितारा होटल दूजे कान्ही फूटया ढारा
गरीब की कमाई का मुनाफा अमीर कै बड़ग्या।।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
टीवी पै सपने हमनै आज बूख दिखाये जावैं
रणबीर तै लालच दे कै उल्टे प्रचार कराये जावैं
सच्चाई नै भूल गए भोग मैं माणस बड़ग्या।।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या।।
[23/05, 3:36 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: मतना लाओ वार सुणो , हो जाओ तैयार सुणो।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
1. गांव, गली, शहर, कुचे मैं इज्जत म्हारी महफूज नहीं
अत्याचार होते रोजाना करता कोए महसूस नहीं
नहीं लड़ाई आसान सुणो चाहिए युद्ध घमासान सुणो
मारे जावैं शैतान सुणो ,बची नहीं समाई रै ।।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
2. रूढ़िवादी विचार क्यों देखो बनके ये दीवार खड़े
कहने को होते देखो ये यहां बढ़िया प्रचार बड़े
दुश्मन गेरता फूट सुणो , ऐसे मचाए लूट सुणो
अब तुम जाओ उठ सुणो , सही ना जा पिटाई रै।।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
3. ये अन्नदाता कहने वाले आज कहां पर चले गए
कर्म कर ना फल की चिंता,अरमान हमारे छले गए
नहीं सहें अपमान सुणो , पायें हम सम्मान सणो
चले ऐसा अभियान सुणो , डंके की चोट बताई रै।।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
4. जीना है तो लड़ना होगा, संघर्ष हमारा नारा किसानों
संगठन बना के कदम बढ़ाएं,दूर नहीं किनारा किसानों
अब तो उंचा बोल भाई, झिझक ले अपनी खोल भाई
जाए दुश्मन डोल भाई , रणबीर अलख जगाई रै।।
ले ऐके का हथियार सुणो , लड़नी आज लड़ाई रै।।
[25/05, 8:25 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: साथ देउन्गी बालक का अपनी जान की बाजी लाकै
यो कुनबा पाछे लागरया कहवै जाँच करवाले जाकै
पहले गर्भ ऊपर या घनी कसूती नजर जमाई
कहते छोरा चाहिए चाहे करवानी पडे सफाई
घरक्याँ नै घनी धमकई लगा पाता जाँच कराकै
देवर जेठ मेरे नयों कहते हमनै बेटा चाहिए
जाँच कराले छोरी हो तै तुरत सफाई कराईये
सीधी तरा मान जाईये के काढेगी सर फुडवाकै
एक तरफ तो गर्भ पी यो परिवार प्यार दिखावै
दूजी तरफ जाँच कराके बस छोरा पाया चाहवै
हरेक मने समझावै बात मान ले सर झुकाकै
दोगले समाज का चेहरा आछी ढाला साहमी आया
जमा नहीं जाँच करवाऊं मने बी मन समझाया
रणबीर साथ मैं पाया जब देख्या नजर उठाकै
[25/05, 8:52 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: सुनियो मेरी भी
चारों तरफ तैं घेरया ,सांस मुश्किल तैं लेरया
कति निचोड़ कै गेरया,राम क्यूँ आंधा होग्या।।
भावां पर नजर टिकी,बधावन की आस किमै
बेरा ना ये कितना बढ़ेंगे ,आवैगी मनै सांस किमै
दीखै फन्दा फाँसी का ,बखत नहीं सै हांसी का
दौरा पड़ै सै खांसी का , राम क्यूँ आन्धा होग्या।।
पूरा हांगा ला हमनै दिन रात खेत क्यार कमाया रै
मंडी मैं जिब लाग्गी बोली बहोत घणा घबराया रै
ना मेरी समझ मैं आया, नहीं किसे नै समझाया
पग पग पै धोखा खाया ,राम क्यूँ आन्धा होग्या।।
धरती बैंक आल्याँ कै लाल स्याही मैं चढ़गी देखो बीस लाख मैं एक किल्ला कुड़की कीमत बढ़गी देखो
बीस लाख मैं के करूंगा, किस डगर पैर धरूंगा
दो चार साल मैं डूब मरूंगा,राम क्यूँ आंधा होग्या
मेरे बरगे भाई सल्फास की,गोली खा खा मरते देखो
जी मेरा बी करता खाल्यूं, आज गधे खेती चरते देखो
नहीं देखूँ मैं कुआं झेरॉ , रणबीर सिंह साथी मेरा संघर्ष चलवांगे चौफेरा , राम क्यूँ आंधा होग्या।।
[27/05, 8:26 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *के आज का जिक्र करूं यो बख्त कसूता आग्या।।*
*कार्पोरेट की लूट का साया पूरे देश के मैं छाग्या।।*
1
अडानी अंबानी नै तो देश मैं अपना जाल बिछाया सै
गामोली शहरी की लूट का तरीका गजब
अपनाया सै
*देश तोड़क ताकतों कै भी मौका चोखा थ्याग्या ।।*
2
बेरोजगारी म्हंगाई भूखमरी नै घणा उद्यम मचाया सै
शिक्षा स्वास्थ्य के मुद्दे तैं सरकार नै ध्यान हटाया सै
*इनतै ध्यान हटावण खातर टैग जात धर्म का पाग्या ।।*
3
धर्म की धार्मिकता छोड़ कै धर्मांधता का घेरा घाल्या
कांवड़ कित्तै मूर्ती पूजा का बहम म्हारे मन मैं डाल्या
*अंधविश्वास म्हारी एकता नै पूरे देश मैं यो खाग्या।।*
4
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई ये रहते आए भाई भाई
इनकी एकता कै धर्मांधता नै कसूती आग लगाई
*रणबीर नै कलम पिनाई कार्पोरेट भगाओ नारा भाग्या।।*
[28/05, 12:37 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: **साथी राजरानी की शहादत**
गेस्ट टीचर्स के संघर्ष को देखकर एक बात याद आ गयी । शीला बाई पास पर प्रदर्शन पर गोलियां चली । वहां राजरानी भी गोली का शिकार हुई। जीप ड्राइवर राजरानी को लेकर आया और मैं भी इमरजेंसी में पहुंचा। वहां क्या हुआ इस बारे उन्हीं दिनों एक रागनी लिखी थी पेश है :---
बिन आयी मौत साहमी तड़फै सड़क पै पड़ी हुई।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
1
धड़ाम दे पडी सड़क पै खून फव्वारा ना काबू आरया
साथी तो ठावैं पुलिस रोकै मन होग्या उसका खारया
धक्का स्टार्ट जीप मेरी उन सबनै फेर धक्का मारया
घाल जीप मैं चाल पड़े चेहरां पीला पड़ता जारया
पीली पड़गी राजरानी कितै कितै सांस अड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
2
ड्रिप लायी ईसीजी मशीन वा सीधी लाइन दिखावै
कई डॉक्टर कट्ठे होगे एक छाती बार बार दबावै
खत्म होली राजरानी कहता डॉक्टर भी घबरावै
चारों कान्ही हाहाकार मच्या गैल भीड़ चढ़ती आवै
देखैं पड़ी खून मैं लतपथ साथिन उड़ै खड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
3
पड़ी राजरानी बिस्तर पै जनों मेरी तरफ लखावै
इसा दिखाई देवै जनों यो हमनै सन्देश देना चाहवै
आत्म सम्मान बचाल्यो रलकै आज हकूमत दबावै
संघर्ष का रास्ता लेल्यो यो मंजिल तक पहोंचावै
मुठ्ठी भींचगी राजरानी की थी जाड़ी भी कड़ी हुई।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
4
गोली मारी सांथल के म्हां करया जुल्मी काम सुणो
राजरानी गेस्ट टीचर नै यो दिया आखरी पैगाम सुणो
नेता अफसर पुलिस की कसनी होगी लगाम सुणो
आख़री सांस मैं उसनै लिया साथिन का नाम सुणो
रणबीर रोवै उड़ै खड़या साच्ची बात ना घड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
[29/05, 4:24 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: कमला का सपना टूट गया
डॉक्टर बनूं पढ़ लिख कै यो मन का सपना मेरा।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
1.
मां बाबू अनपढ़ म्हारे घणे लाड प्यार तैं पढ़ाई
खेती मैं नहीं पूरा पाटै उल्टी सीधी ना कोए कमाई
धरती गहणे धरकै पढ़े दो बाहण और एक भाई
मेहनत कर आगै बढ़िये मेरे तैं या सीख सिखाई
दो भैंस बांध दूध बेचैं करजे का बढ़ता आवै घेरा।।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
2.
भाई नै एम ए करकै बी नहीं कितै नौकरी थ्याई
गाम मैं किरयाणे की फेर उसकी दुकान खुलाई
बड्डी बाहण बीएड कर बैठी या घर मैं बिन ब्याही
मेरी पी एम टी टैस्ट मैं सत्तरहवीं पोजीसन आई
काउंसलिंग खातर गई उड़ै दिया दिखाई झेरा।।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
3.
ठारा हजार म्हिने की पहले साल की फीस बताई
पसीना आया गात मेरे मैं धरती घूमती नजर आई
मेरै आंख्यां मैं आंसूं आगे फेर मां की तरफ लखाई
हाल क्यूकर ब्यां करूं मैं ना कलम मैं ताकत पाई
अपने दलाल बिठारया दीखै यो उडै़ वर्ग लुटेरा।।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
4.
फीस देण की आसंग कोण्या मन मारकै आगी फेर
गाम मैं यकीन करैं ना बोले माच्या किसा अन्धेर
इस सरकार मैं बैठे जितने ना कटावैं गरीबां की मेर
बेरा ना या कद होवैगी हम गरीब लोगां की सबेर
रणबीर न्यों बूझै ये बालक क्यूकर पढ़ावै कमेरा।।
मरीजां का इलाज करूंगी हो घर का दूर अन्धेरा।।
[29/05, 4:25 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: हमारा समाज
सुणले करकै ख्याल दखे, ये गुजरे लाखां साल दखे
सिंधु घाटी कमाल दखे, यो गया कड़ै लोथाल दखे,
यो करकै पूरा ख्याल दखे, खोल कै भेद बतादे कोए।।
सुसुरता नै भारत कानाम करया,वागभट्ट नै बढ़िया काम करया
ब्रह्म गुप्त नै हिसाब पढ़ाया, आर्यभट्ट जीरो सिखाया
नालन्दा नै राह दिखाया, तक्षशिला गैल कदम बढ़ाया
तहलका चारों धाम मचाया, ये गये कडै़ समझादे कोए।।
मलमल म्हारी का जोड़ नहीं, ताज कारीगिरी का जोड़ नहीं
हमनै सबको सम्मान दिया, सह सबका अपमान लिया
ग्रीक रोमन को स्थान दिया, भगवान का गुणगान किया
इसनै म्हारा के हाल किया, या सही तसबीर दिखादे कोए।।
दो सौ साल राजा म्हारे देस के, बदेसी बोगे बीज क्लेश के
फिरंगी का न्यों राज हुया, चिड़ी का बैरी बाज हुया
सारा खत्म क्यों साज हुआ, क्यों उनके सिर ताज हुया
क्यों इसा कसूता काज हुया, थोड़ा हिसाब लगादे कोए।।
लाहौर मेरठ जमा पीछै नहीं रहे, म्हरे वीर बहादुर नहीं डरे
फिरंगी देस के चल्या गया, कारीगर फेर बी मल्या गया
धर्म जात पै छल्या गया, संविधान म्हारा दल्या गया
क्यों इसा जाल बुण्या गया, रणबीर पै लिखवादे कोए।।
[29/05, 4:27 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: महिला की पुकार
खत्म हुई सै श्यान मेरी , मुश्किल मैं सै ज्याण मेरी, छोरी मार कै भाण मेरी, छोरा चाहिए परिवार नै।।
1
पढ़ लिख कै कई साल मैं ,मनै नौकरी थ्याई बेबे
सैंट्रो कार दी ब्याह मैं ,बाकि सब कुछ ल्याई बेबे
घर का सारा काम करूं, ना थोड़ा भी आराम करूं, पूरे हुक्म तमाम करूं, ओटूं सासू की फटकार नै।।
ख़त्म हुई सै---
2
पहलम मेरा साथ देवै था ,यो मेरे घर आला बेबे
दो साल पाछै छोरी होगी, फेर करग्या टाला बेबे
चाहवैं थे जांच कराई, कुन्बा हुया घणा कसाई, मैं बहोत घणी सताई, हे पढ़े लिखे घरबार नै।।
ख़त्म हुई सै---
3
जाकै रोई पीहर के म्हं , पर वे करगे हाथ खड़े
दूजा बालक पेट मैं जांच कराने के दबाव पड़े
ना जांच कराया चाहूँ मैं, पति के थप्पड़ खाऊँ मैं, जी चाहवै मर जाऊं मैं, डाटी सूँ छोरी के प्यार नै।।
खत्म हुई सै---
4
दूजी छोरी होगी सारा परिवार तण कै खड़्या हुया
नाराजगी और गुस्सा दिखे सबके मूंह जड़या हुया
किसकै धोरै जाऊं मैं, अपनी बात बताऊं मैं, रणबीर पै लिखवाऊं मैं,बदळां बेढंगे संसार नै।।
खत्म हुई सै----
[30/05, 9:42 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: खिड़वाली गांव के लोगों की 1857 की आजादी की लड़ाई में दी गई कुर्बानियों को याद करते हुए एक रागनी। क्या बताया भला:-
ठारा सौ सत्तावन मैं आजादी की पहली जंग लड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
1
मानस खिड़वाली के भिड़गे अंग्रेजां के साहमी जाकै
दो फिरंगी तहसील मैं मारे मेम पड़ी तिवाला खाकै
भीतरला जमा भरया पड़या बाट देखैं थे एड्डी ठाकै
पाछले जुलमां का सारा हिसाब फेर धरा लिया आकै
फिरंगी से लड़ने की पूरी गुप्त योजना सही घड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
2
बही शेख और लालू बाल्मिकी जमकै लड़ी लड़ाई थी
तिरखा बाल्मिकी मोहमा शेख हिम्मत खूब दिखाई थी
जुलफी मोची सुनार रामबक्स आजादी पानी चाही थी
बेमा बाल्मिकी इदुर मोची नै ज्यान की बाजी लाई थी
मुफ़ी औला पठान लड़या साथ मैं जनता खूब भिड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
3
मोहर नीलगर खिड़वाली का ना मुड़कै कदे लखाया
सायर बाल्मिकी लड़ाकू नै फिरंगी तैं सबक सिखाया
सुनाकी बाल्मिकी साथ लड़या वो कदे नहीं घबराया
बीर मर्द जितने सबनै धुर ताहिं का साथ निभाया
फिरंगी राज के कफ़न मैं इस जंग नै कील जड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
4
खिड़वाली ना रहया एकला साथ गामड़ी आया था
एक बै कब्जा रोहतक पै सबनै मिलकै जमाया था
फिरंगी भाज लिया था नहीं कोय रास्ता पाया था
बहादुरशाह जफ़र को राजा सबनै ही अपनाया था
रणबीर बरोने आला बतावै जंग की ये बात बड़ी।।
खिड़वाली की पलटन नै तोड़ी कई मजबूत कड़ी।।
[31/05, 2:15 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: बात पते की
क्यों दो आंख लेकै भी आंधे हमनै सड़ांध देवे दिखाई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
1
ईमानदारी का पाठ पढावें नेता अफसर संसार मैं
इनकम टैक्स की चोरी करना बालक सीखें परिवार मैं
इस काले धन की बहार मैं दीखे फेर कति सच्चाई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
2
ऊपर बैठे अफसर नेता लेरे बदेशी बैंकं मैं खाते ये
जड़ मैं भ्रष्टाचार पणपै तो क्यूकर हारे रहवैं पाते ये
इननै चाहियें चिमटे ताते ये इनकी कोए और दवाई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
3
साठ हजार करौड़ का कर्जा म्हारे देश के अमीरां पै
सरकार म्हारी चालती देखो इनकी काढी लकीरां पै
हम खंदाये संत और फकीरां पै साच समझ मैं आई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
4
दारू सुल्फा नशा खोरी हमतैं इनकी राही पकड़ा दी
बिना सोचें समझें हमनै भकड़ बाल कै नै दिखा दी
रणबीर सिंह नै छंद बना दी या साच जमा छिपाई ना ।।
बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आड़े बिलाई ना।।
[31/05, 2:16 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *5 जून सम्पूर्ण क्रांति दिवस*
*पांच जून नै काले कानून ऑर्डिनेंस पास करया रै।।*
*एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।*
1
उन्नीस सौ चुहत्तर के मैं पांच जून नै बीड़ा ठाया
जयप्रकाश नारायण नै सम्पूर्ण क्रांति नारा लाया
*जेपी नै इस तरियां शुरू नया इतिहास करया रै।।*
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
2
सम्पूर्ण क्रांति दिवस देश के ये किसान मनावैंगे
तीन कानूनाँ की प्रति किसान मजदूर जलावैंगे
*भाजपा नेतावां के दफ्तरां पै प्रोग्राम खास धरया रै।।*
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
3
जत्था दोआबा तैं चालकै सिंघु बार्डर पै पहोंच्या रै
बार्डरों पर डटे किसानां नै मिलकै यो दिन सोच्या रै
*बायकाट करो सरकार का फैंसला पास करया रै।।*
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
4
तीन कानून बिल बिजली रणबीर रद्द करवावैंगे
चारों लेबर कोड रद्द हों किसान मजदूर जोर लगावैंगे
*इनकी गलत नीतियों नै फसल का घास करया रै।।*
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
[31/05, 2:19 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: चालै कोण्या जोर
मेरा चालै कोण्या जोर मनै लूटैं मोटे चोर
नहीं पाया कोये ठौर कटी पतंग की डोर
मनै लावैं डांगर ढ़ोर यो किसा घोटाला रै।
मेरा बोलना जुल्म हुया
उनका बोलना हुक्म हुया
सारे ये मुनाफा खोर ये थमा धर्म की डोर
बनावैं ये म्हारा मोर सुहानी इनकी भोर
ऐश करैं डाकू चोर मन इनका काला रै।
ये भारत के पालन हार
क्यों चोरां के सैं ताबेदार
म्हारे पै टैक्स लगावैं बोलां तो खावण आवैं
मिल्ट्री सैड़ दे बुलावैं चोरां की मौज करावैं
काले का सफेद बणावै भजैं राम की माला रै।
महंगाई की मार कसूती
सिर म्हारा म्हारी जूती
यो रोजगार मन्दा सै यो सिस्टम गन्दा सै
यो मालिक का रन्दा सै घालै दोगला फंदा सै
क्यूकर जीवै बन्दा सै हुया ढंग कुढाला रै।
पत्थर पुजवा बहकाये
भक्षक रक्षक दिखाये
काले नाग डसगे क्यों ये शिकंजे कसगे क्यों
दो संसार बसगे क्यों गरीब जमा फ़ंसगे क्यों
रणबीर पै हंसगे क्यों कर दिया चाला रै।
ranbir dahiya
[31/05, 7:43 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: परथा
बाणै बैठे पाछै बेबे मनै हाथां पै महन्दी लाई हे।
चाचा ताऊ यारे प्यारयाँ कै जी भरकै हल्वा पूरी खाई हे।
1
रोज सांझ नै कट्ठी होकै ये गीत लुगाई गावैं थी तड़कै सांझ रगडै़ं बटना तेल भी मेरै चढ़ावैं थी कदे बंटैं पताशे कदे बाकली भी बाँटी जावैं थी मेरे साथ की छोरी मेरी गेल्या हंसी ठठे लावैं थी किसा होगा मेरा साँसरा इस चिन्ता नै मैं भरमाई हे।
2
ब्याह का दिन आया जिसकी देखें सारे बाट बेबे बीस तीस कति नहीं ये बराती एक सौ साठ बेबे
बढ़िया बिस्तर गए बिछाये कर दिये पूरे ठाठ बेबे
दारू का दौर शुरू हुया खुली बोतलों की डाट बेबे
नाचे छोर जोर लगाकै जब बारौठी की बारी आई हे।
3
बणड़ा उत्तरया घोड़ी तैं देहली म्हारी ऊपर आकै
घाल दई मनै उसकै माला बहोत घणी शरमा कै कोण्या दिख्या ऊंका मुखड़ा मनै घूंघट के म्हां कै धोरै खड़े बराती देखें थे मेरे कान्ही एडी ठा ठाकै दिन ढल लिया जब बरात फेरयाँ खातर बुलाई हे।।
4
खूब सजाया मंडप पंडत नै आलती पालती मारी अगड़ बगड़ की कट्ठी हुई बहू अर ये छोरी सारी
कई घन्टे लगा दिये मनै हुया बैठया रहना भारी
बणडे़ के फटके गेल्यां गांठ मेरी चादर की मारी
मन मन मैं पंडत ताहि मनै घनीए गाल सुनाई हे।।
5
फेरे खत्म हुये पाछै या बिद्या की फेर बात चली घुसर फुसर हुई उडै़ बाप मेरे कै या बात खली
ग्यारा सौ के वाणे हों उड़ती सी या बात मिली दिल मेरा बी हाल्या कानां जब या बात घली सारा घर लुट पिटवा कै बाबू नै मांग पुगाई हे।।
6
चलचल जी था मेरा कुछ समझ नहीं पाया
मां की आंख्या मैं आंसू मेरा जी बी भर आया बाबू का कमनू चेहरा मेरी आंख्या आगै छाया सांसरिया के देख नखरे डोल उठी मेरी काया रणबीर एक तरफ कुवां दिखै दूजीतरफ नै खाई हे ।।
[31/05, 8:30 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: कन्या भ्रूण हत्या समाज का बहुत घटिया काम बताऊं।।
महिला थोड़ी पुरुष घणे इसका असर आज गिनाऊं।।
1
महिला को दोयम दर्जा दे राख्या म्हारे समाज नै
हरेक जगां पाछै राखैं भूले बराबरी की आवाज नै
और भी कई मामले सैं खोल कै सारे पत्ते दिखाऊं।।
2
भाई बाहण कोन्या बराबर भाई की जगां ऊंची सै
कैहवण नै सैं बराबर पर असल मैं महिला नीची सै
मानैं दोनों नै बराबर समाज नै मैं क्यूकर समझाऊं।।
3
समान काम कम भुगतान महिला तैं किया जावै
अवैतनिक श्रम का भी फालतू बोझ दिया जावै
श्रम बाजार मैं महिला की कैसे हिस्सेदारी बराबर ल्याऊं।।
4
गर्भावस्था के बख्त रणबीर महिला मौत ज्यादा बताई
पुरुष महिला अनुपात मैं महिला की कमी सै आई
बस छोरे के जन्म ऊपर छठ ना छोरी की छठ मनाऊं।।
[01/06, 6:20 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: बढ़ती महंगाई नै आम जनता कै आज साँस चढ़ाई रै।।
नौकरी पेशा वर्ग किसान की मुशीबत और बढ़ाई रै ।।
1
छोटा व्यापारी भी इसके बोझ तलै आज दब लिया
रसोई गैस डीजल के बढ़े दाम नै समाज जकड़ दिया
घर के बजट कै फांसी इन बढ़े दामों नै आज लगाई रै ।।
2
घर चलाना मुश्किल होया तो रसोई खर्च बढ़ता जारया
पेट भराई नहीं हो पाती करजा जावै यो चढ़ता भारया
बालकों के कम खाने नै उनकी सेहत कसूती ढाई रै ।।
3
बढ़ती महंगाई नै मुश्किल करी बालकों की पढ़ाई
स्वास्थ्य की देखभाल भी महंगी कई नै ज्याण
गंवाई
संकट कई ढाल के बढ़गे मुश्किल सबकी या गिनाई रै ।।
4
किसान का खेती करना घने घाटे का सौदा यो होग्या
खेती की लागत बढ़गी एमएसपी किसान नै डबोग्या
रणबीर की कविता पै भी या महंगाई कसूती छाई रै ।।
[02/06, 1:54 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आजादी
खतरे मैं आजादी म्हारी जिंदगी बणा मखौल दी।
इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।
आजादी पावण की खातर असली उठया तूफ़ान था
लाठी गोली बरस रही थी जेलां मैं नहीं उस्सान था
एक तरफ बापू गांधी दूजी तरफ मजदूर किसान था
कल्पना दत्त भगत सिंह नै किया खुल्ला ऐलान था
इंक़लाब जिंदाबाद की उणनै या ऊंची बोल दी ।
सत्तावन की असल बगावत ग़दर का इसे नाम दिया
करया दमन फिरंगी नै उदमी राम रूख पै टांग दिया
सैंतीस दिन रहया जूझता कोये ना मिलने जाण दिया
हंस हंस देग्या कुर्बानी हरियाणे का रख सम्मान दिया
हिन्दू मुस्लिम एकता नै गौरी फ़ौज या खंगोल दी।
भारतवासी अपने दिलां मैं नए नए सपने लेरे थे
नहीं भूख बीमारी रहने की नेता हमें लारे देरे थे
इस उम्मीद पै हजारों भाई गए जेलों के घेरे थे
दवाई पढ़ाई का हक मिलै ये नेक इरादे भतेरे थे
गौरे गए आगे काले रणबीर की छाती छोल दी।
फुट गेरो और राज करो ये नीति वाहे चाल रहे रै
कितै जात कितै धर्म नै ये बना अपनी ढाल रहे रै
आपस मैं लोग लड़ाए लूट की कर रूखाल रहे रै
वैज्ञानिक नजर जिसकी जी नै कर बबाल रहे रै
इक्कीसवीं की बात करैं राही छटी की खोल दी।
2003.2004
[02/06, 1:56 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *हरियाणे के वीरो जागो*
*हरियाणे के वीरो जागो तजो जात के बाणे नै।*
*ढेरयां आला कुड़ता सै समझो इसके ताणे नै।*
1
गरीब माणस नै मरज्याणी गरीब भाई तैं दूर करै
अमीर होज्यां एक थाली मैं यो गरीब मजबूर फिरै
*अमीर इस्तेमाल भरपूर करै गरीबाँ नै बहकाणे नै।*
अमीरां का छोरा कोये बेरोजगार जमा ना पाणे का
पुलिस कचहरी सब उनके ख़ाली हुक्म ना जाणे का
*गरीब लूट कै खाणे का टोहया सै राह मरज्याने नै।*
मेहनत जात गरीबाँ की और कोये तो जात नहीं
जाट ब्राह्मण सिर फुड़वावें मिलै खान नै भात नहीं
*जात मिटा सकै दुभांत नहीं बात कही सै स्याणे नै।*
जात के ठेकेदारां की बांदी या करै इनकी ताबेदारी
आम आदमी जकड़ लिया अमीर करै पूरी पहरेदारी
*रणबीर करै नहीं चाटूकारी नहीं बेचै अपणे गाणे नै।*
[02/06, 2:00 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *नोएडा और गुड़गामा*
*आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।*
*युवा और युवतियों की या मजबूरी दिखाणी चाही।*
1
मियाँ बीबी ये दोनों मिलकै आज खूब कमावैं देखो
तीस लाख का पैकेज ये साल का दोनों पावैं देखो
तड़कै आठ बजे त्यार हो नौकरियां पर जावें देखो
रात के ग्यारह बजे ये वापिस घर नैं आवैं देखो
*इन कमेरयां की आज या पूरी कथा सुणानी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
2
अपने पारिवारिक रिश्ते बताओ कैसे चलावैं रै
ऐकले रैह रैह कै शहरां मैं ये कैरियर बनावैं रै
भीड़ मैं रैह कै भी अपने नै कतिअकेला पावैं रै
गांम गेल्याँ अपना रिश्ता बताओ कैसे निभावैं रै
*आज के दौर की या विरोधाभाष दिखाणी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
3
मोटे वेतन की नौकरी छोड नहीं पावैं देखो भाई
अपने बालकां नै घरां छोड़ कै नै जावैं देखो भाई
फुल टाइम की मेड एजेंसी तैं ये ल्यावैं देखो भाई
उसके धोरै बालक ये अपने पलवावैं देखो भाई
*मजबूरी या लाइफ आज इणनै अपनाणी चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
4
मात पिता दूर रहवैं टाइम काढ़ नहीं पाते भाई
दादा दादी नाना नानी इनके बन्द हुए खाते भाई
घर मैं आवैं इस्तै पहले बालक तो सो जाते भाई
नॉएडा गुड़गामा का रणबीर यो हाल सुनाते भाई
*बदल गया जमाना हरयाणा ली अंगड़ाई चाही।*
आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।
[02/06, 2:01 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आजादी
देश पै खतरा मंडरावै लडां आजादी बचाने की लड़ाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
1
पूरे देश मैं फैल रहया खतरा यो मनुवाद का बताया
चलता आवै खतरा देश मैं इबै सामंतवाद का बताया
बढ़ता जावै सै शिकंजा आज पूंजीवाद का बताया
इन सब तैं बड्डा खतरा गया साम्राज्यवाद का बताया
संविधान नै पूरा खतरा आजादी इन खतरों तैं चाही।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
2
एक खतरा और बताया सै यो हिंदुत्ववाद का सुनियो
दूजा खतरा और छाया सै तालिबानवाद का सुनियो
तीजा खतरा और दिखाया सै यो संघवाद का सुनियो
चौथा खतरा समझाया सै यो आतंकवाद का सुनियो
इन खतरयां तैं मिलकै या आजादी की आवाज लगाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
3
पितृ सत्ता बड़ी बीमारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
भ्रूण हत्या उधम मचारी इसतैं भी आजादी चाहिये सै
दहेज का उत्पीड़न भारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
बेरोजगारी बढ़ती जारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
आर्थिक संकट बढ़ता जावै इसकी बात गई छिपाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
4
हिदू राष्ट्र तैं आजादी हो यो सबका ही भाई चारा हो
इस्लामी राष्ट्र तैं आजादी हो पूरी दुनिया का नारा हो
जातपात से आजादी हो चाहवै अम्बेडकर म्हारा हो
अभिव्यक्ति की आजादी हो सबनै संविधान प्यारा हो
रणबीर बनती जावै सै नबै दस की पालेबन्दी भाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
[02/06, 3:40 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: अन्ध विश्वास का हमला सालो साल यो बढ़ता जावै ॥
कुम्म के मेले का खेल देखो हमने या बात सै समझावै ।।
1
एक सौ बयालीस साल पहले ठारा सौ बियासी मैं मनाया
बीस हजार का कुल खर्चा यो आठ लाख आने आल्याँ पै बताया
महा कुम्म दो हजार पच्चीस का खर्च साढ़े सात हजार करोड़ आवै।।
2
ठारा सौ ब्यासी मैं कुंभ मैं कुल आठ लाख लोग नहाये कहते
ठारा सौ चौरानवै मैं कुंभ मैं दस लाख लोग बताये कहते
दो हजार पच्चीस मैं कुंभ मैं या चालीस करोड जनता नहावै ।।
3
इन चालीस करोड़ लोगों का कितना खर्चा और आवैगा
किराया भाड़ा रोटी राटी का खर्चा कितना और वो ठावैगा
इतना बेजोड धन देश का जनता इस कुंभ के म्हां गँवावै ।।
4
इस सारी आवा जायी मैं जनता और भी कई दुख ठावै बताई
इस सार धन तैं पूरी होज्या कईयों की पढाई और दवाई
रणबीर सोच सोच कैभी ना बात पूरी इसपै लिख पावै।।
[02/06, 3:48 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: फातिमा शेख
संदेश सामाजिक सुधारों का फातिमा शेख नै जन जन तक पहुंचाया।।
पहली मुस्लिम महिला देश की जिसनै शिक्षा का अलख जगाया।।
1
नौ जनवरी ठारा सौ कतीस मैं महाराष्ट्र पुणे मैं जन्म लिया था
फातिमा के भाई उस्मान शेख नै ज्योतिबा फुले का साथ दिया था
फातिमा शेख नै सावित्री बाई फूले गेल्यां कदम तैं कदम मिलाया।।
2
दलित और पिछड़े वर्ग की बच्चियों की शुरू करी थी पढ़ाई
इसकी खातर ठारा सौ अड़तालिस मै पहले स्कूल की नीम धराई
गजब अथक प्रयास थे उनके गरीब वंचितों को पढ़ना लिखना सिखाया।।
3
उन्नीसवीं सदी का अंत और बीसवीं की शुरुआत का बख्त बताया
हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली मैं फातिमा हर नै कर यो कमाल दिखाया
समाज ठेकेदारों नै रोड़े अटकाये पर उननै नहीं पीछे कदम हटाया।।
4
विधवा विवाह और सती प्रथा इनके खिलाफ आवाज उठाई थी
बाल विवाह कै ऊपर भी जनता फातिमा हर नै बार बार समझाई थी
फातिमा हर को सलाम करने की खातर रणबीर नै कलम उठाया।।
[03/06, 8:50 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: अमीर गरीब की भारत मैं खाई बढ़ती जारी ।।
एक भूख का रोगी बताई दूजे ने कब्ज सतारी।।
1
पहला बीमार कहवै मेरा होता नहीं गुजारा
डेढ़ कमरे का मकान सै गाल मैं रहती गारा
कर्ज लेकै जिंदगी बीतै होरे बारा छह ठारा
बालकां की फीस पुगै ना मुश्किल डांगर नै चारा मैं आज फिरूं विपत का मारया सब तरियां लाचारी।।
2
खेत कमाऊं हांगा लाऊँ जमा ठाली फिरता कोन्या
मेरा एक किला बिक लिया कर्ज उतरता कोन्या या अन्न की बाँधी काया सै बिन खाए सरता कोन्या
छोरा हांडै पैर भिड़ान्ता कोये ब्याह करता कोन्या
कौन ईसा जो डरता कोन्या बेटी घरां कंवारी ।।
3
दूजा बीमार कहवै मेरै कब्ज रहवै सै बेमियादी उठया बैठया नहीं जावै जोर करै या बा बादी चलती हाणा पेट कै मनै या पड़ै बांधनी बाधी दमा होया कई साल तैं मेरी पूरी चूल हिलादी भोजन की होज्या बर्बादी खाणा पचना हो
भारी।।
4
एक कै रोग टोटे का दूजे कै धन की लागी
काई
एक नै तो खावण नै कोन्या दूजे की सै भूख गंवाई
अमीर गरीब की हम पाटाँ सोच समझ कै नै खाई
इसतैं न्यारी और नहीं इस जग में बताई कोए लड़ाई
रणबीर सिंह की कविताई न्यों जोखन घणी ठारी ।।
[03/06, 5:38 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: जिंदगी आंदोलन मैं लादी धन धन सै बसाऊ राम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
1
पन्दरा अगस्त तिहत्तर मैं बसाऊ दुनिया के मैं आया
दलित किसान परिवार मैं बसाऊ दुनिया के मैं आया
पन्दरा अगस्त तिहत्तर मैं कलौंदा का राह तनै पाया
क्यानवै मैं दस जमा दो का करया पास एग्जाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
2
तिराणवै मैं जींद मैं करी साक्षरता मैं थी भागीदारी
नरवाना खण्ड के जथ्यां मैं करी थी बड़ी हिस्सेदारी
कमला महिपाल सांग बनाया तोड़े बेड़े बन्द तमाम तनै ।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
3
मेहनत करकै करी हासिल रागनी लिखने गाणे मैं तनै
गाम गाम जा कै अलख जगाई जींद सिमाणे मैं तनै
सामूहिकता अपनाई सांग मैं खुली छोडी लगाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
4
किसान आंदोलन मैं टोल पै जमकै पाला थाम्या भाई
नई नई रागनी लिख टोल पै हांगा लाकै थामनै गाई
रणबीर करै तहे दिल तैं साथी बसाऊ सलाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
[03/06, 6:12 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: जिंदगी आंदोलन मैं लादी धन धन सै बसाऊ राम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
1
पन्दरा अगस्त तिहत्तर मैं बसाऊ दुनिया के मैं आया
दलित किसान परिवार मैं बसाऊ दुनिया के मैं आया
पन्दरा अगस्त तिहत्तर मैं कलौंदा का राह तनै पाया
क्यानवै मैं दस जमा दो का करया पास एग्जाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
2
तिराणवै मैं जींद मैं करी साक्षरता मैं थी भागीदारी
नरवाना खण्ड के जथ्यां मैं करी थी बड़ी हिस्सेदारी
कमला महिपाल सांग बनाया तोड़े बेड़े बन्द तमाम तनै ।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
3
मेहनत करकै करी हासिल रागनी लिखने गाणे मैं तनै
गाम गाम जा कै अलख जगाई जींद सिमाणे मैं तनै
सामूहिकता अपनाई सांग मैं खुली छोडी लगाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
4
किसान आंदोलन मैं टोल पै जमकै पाला थाम्या भाई
नई नई रागनी लिख टोल पै हांगा लाकै थामनै गाई
रणबीर सत्याइस मई इक्कीस आखिरी बसाऊ सलाम तनै।।
ज्ञान विज्ञान आंदोलन का शत शत सै प्रणाम तनै।।
[03/06, 7:39 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आपा धापी देश मैं
या घनी आपाधापी मचाई देश के इन ठेकेदाराँ ने ॥
सारे रिकार्ड तोड़ बगाये धन के लालची साहूकारां नै ।।
1
विकास राही माणस खाणी इनै रोजगार घटाया सै
महिला जमा बाहर राखी इसा महाघोर मचाया सै
बाबू बेटा ज्यानी दुश्मन बहु सास मैं जंग कराया सै
बुढ़यां की कदर कड़ै जिब जवानां का मोर नचाया सै
माणसे तैं हैवान बणा दिये सभ्यता के थानेदाराँ नै ।।
2
इसा विकास नाश करैगा म्हारा या बात क्यों
जरती ना
गरीब अमीर की या खाई आज दुनिया में भरती ना
चारों कान्ही माफिया बधगे या बुराई आज हरती ना
अच्छाई पै हमला इनका फेर बी कदे या मरती ना
बदेशी कम्पनी छागी छूट दे राखी राज दरबाराँ नै।।
3
अमेरीका दादा पाक गया सारे कै आतंक मचाया सै
सद्दाम हुसैन साहमी बोल्या इराक पढ़ण बिठाया सै
यूगोस्लाविया पै बम्ब गैरे यो कति ना शरमाया सै
तीसरी दुनिया चूस लई भारत में जाल बिछाया सै
बदेशी अर देशी डाकू सिए पै चढ़ाये सरकारां नै।।
4
उल्टी राही चला दई म्हघर देश की जनता किसनै रै
सोच समझ कै बेरा पाड़ां देश तै भजावां
उसनै रै
इस विकास राही नै बदलाँ मोर बणाया सै जिसनै रै
रणबीर इसा विकास हो जो मेटै सबकी ए तिसनै रै
दीन जहान तै खो देगी या जनता इसे बदकाराँ ने ॥
[05/06, 8:18 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: पायरिला बीमारी
सन छत्तीस का जिकर सुणो पायरिला बीमारी आगी रै ॥
ईंख की सारी की सारी फसल कसूती तरियां खागी रै ॥
1
गंडे तै गुड़ नहीं बन पाया कोडियां के दाम बिक्या राला
किसानों मैं हा हा कार माचगी होया कुन्बे की ज्यान का गाला
आगले साल गंडा बोया ना दिल मैं भय की छाया छागी रै॥
2
बरबादी मैं कसर रही ना इलाके मैं हाहा कार मच्या
अड़तीस उत्तालिस मैं अकाल नै ताण्डव आण
रच्या
स्कूल कालेज बी बन्द होगे थे चोट घणी कसूती लागी रै॥
3
खराब खेती अकाल कारण भूख मरे थे किसान सारे
बे जमीन्याँ की बुरी हालत फिरते दिन रात म
मारे मारे
पते पेड़ों के पशु ख़ाँवंते खूंटे तड़वा कै गादड़ी भागी रे ॥
4
देश स्तर पै आजादी की जंग अपना जोर पकड़ री थी
दूसरे महा युद्ध की आशंका दुनिया नै जकड़
री थी
लिखै रणबीर बरोनिमा इन बखतां की रागनी सागी रै।
[05/06, 3:00 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: सौ मैं तै पिचासी भारत वासी बांट दिये कई चाल चलाकै।।
जातपात का खेल रचया यो पटक दिये घरती
पै घुमाकै।।
1
जात मैं भी फेर गोत घुसाये सही जमीनी सच्चाई बताऊँ
दलित भी फेर आगै बाँट राखे एक दूजे के खिलाफ दिखाऊं
चाल गिणाऊँ से कितनी इनकी देखे थक जाउँ गिन्णवाकै ॥
2
इलाका वाद का जहर भरया आकै इन बदेशी गोरयां नै
मार्शल कौम यो खड़ा करया आकै इन बदेशी गोरयां नै
मनु स्मृति नै बांट राखे सां म्हौरै छोंक वर्णों के लगा कै ।।
3
छतीस सौ जात बतावैं पूरे म्हारे इस हिन्दुस्तान मैं रै
सात आठ धर्म बताये बसैं बात न्यारी पूरे जहान
मैं रै
कैसे बनैगी एकता इन सबकी धर देगी दुनिया नै हिला कै ॥
4
इतनी विविधता और कितै नहीं या टोही पावैगी तोड़क बी बनी पर कदे जोड़क बी बण जावैगी
रणबीर आसान काम नहीं हिम्मत कर कलम उठा कै ॥
[05/06, 3:29 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: आर्य समाज नै छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई थी।।
चालती हवा आखिर सी मैं या हरियाणे मैं भी आई थी।।
1
पहला महायुद्ध खत्म हुया तो माहौल बण्या हरियाण मैं
चौधरी छोटूराम का यो नाम
सबनै सुण्या हरियाणे मैं
बलदेव सिंह नै गोरया के खिलाफ आवाज लगाई थी ।।॥
2
उन्नीस सौ आस पास कहैं सांघी मैं जनेऊ धार लिया था
ब्राह्मण बनिया कट्ठे होगे जनेऊ वो उल्टा तार लिया था
जाट शुद्ध मान्या जावै था जनेऊ धारण की मनाही थी ।।
3
समाज सुधार मैं आर्य समाज नै हुआछूत पै सवाल करया
कुछ नै सांझले कुओं का जतन करकै कमाल करया
छुआछूत बीमारी कै थोड़ी घणी खरोंच बतावैं आई थी ।।
4
पढ़ाई लिखाई में भी साफ
छुआछूत दिखाई देवै थी
दलित के बालक का रास्ता कहते कई बै रोक लेवै थी रणबीर आर्य समाज नै कुछ तो अलख जगाई थी ॥....
[05/06, 5:42 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: केन्द्र सरकाराँ नै म्हारे देश का कर दिया बंटा धार,देखियो के होगा।।
1
कमा कमा खेतों मैं मरगे लूट कै पैप्सी कोला लेग्या
पलंग निवारी देऊँगा कैहकै खोस यो खटोला लेग्या
बढ़ा म्हंगाई हम जमा मार दिये चारों कान्ही हाहाकार,देखियों के होगा।।
2
घुसपैठिये लिए बाड़ देश मैं ये गफलत मैं सोई वीर सैनिक लड़े जमकै मिशाल नहीं पावैगी टोही
यो अटल बिहारी सै नकल बिहारी डबोवै बीच मझदार,देखियो के होगा।।
3
स्वदेशी का ढोंग रचाकै इनै राख्या देश अंधेरे मैं कबरी कबरी भाषा बोलैं ना करते मेर कमेरे मैं आयात खोल कै मुद्रा कोष की बोलैं जय जयकार,देखियो के होगा।।
4
मजहब पै झगड़े करवाकै हिन्दू कार्ड कैस करवाग्या
पूंजीपति की टहल बजाई असली चेहरा सहमी आग्या
अयोध्या की भोली जनता पै या चली खूब कटार,देखियो के होगा।।
5
विष्णु भागवत चलता करके या धक्का पेल करी देखो
कानूनों का मखौल उड़ाकै नीलाम भेल करी देखो
राजनीति और धर्म की कट्ठी चलाई गई या तलवार,देखियो के होगा।।
6
कांग्रेस और भाजपा आर्थिक नीति पर साथ खड़ी सैं
बीमा क्षेत्र पब्लिक सैक्टर निजी करण की छाप जड़ी सैं
उदारीकरण की ये कररैं बड़ाई जनता नै दी ललकार ,देखियो के होगा।।
7
नकली लाल हरियाणे के पूँजी पति के दलाल सारे
असली लाल हरियाणे के कमजोर सैं फिलहाल
सारे
ईब साथ देकै लाल झण्डे का करल्यां भूल सुधार, देखिया के होगा।
[07/06, 7:17 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: विवेक
सूरज साहमी कोहरा टिकै ना अज्ञान विवेकमयी वाणी कै।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
1
ढोंग अर अन्ध विश्वास पै टिक्या चिन्तन फेर बचै कोण्या
यज्ञ हवन वेद शास्त्र फेर पत्थर पूजा प्रपंच रचै कोण्या
पुरोहित की मिथ्या बात का दुनिया मैं घमशान मचै कोण्या
मन्द बुद्धि लालची माणस कै विवेकमय दया पचै कोण्या
शिक्षित अनपढ़ धनी निर्धन बीच मैं आवैं फेर कहाणी कै।।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
2
आत्मा परमात्मा सब गौण होज्यां सामाजिक दृष्टि छाज्या फेर
समानता एक आधार बणै औरत सम्मान पूरा पाज्या फेर
मानवता पूरी निखर कै आवै दुनिया कै जीसा आज्या फेर
कार्य काररणता नै समझकै माणस कैसे गच्चा खाज्या फेर
माणस माणस का दुख समझै ना गुलाम बणै राजराणी कै।।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
3
संवेदनशील समाज होवै ईश्वर केंद्र मैं रहवै नहीं
मानव केन्द्रित संस्कृति हो पराधीनता कोए सहवै नहीं
स्वतंत्रता बढ़ै व्यक्ति की परजीवी कोण कहवै नहीं
खत्म हां युद्ध के हथियार माणस आपस मैं फहवै नहीं
विवेक न्याय करूणा समानता खरोंच मारैं सोच पुराणा कै।।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
4
अदृश्य सत्ता का बोझ आड़ै फेर कति ना टोहया पावै
सोच बिचार के तरीके बदलैं जन चेतना बढ़ती जावै
मनुष्य खुद का सृष्टा बणै कुदरत गैल मेल बिठावै
कर्म बिना बेकार आदमी जो परजीवी का जीवन बितावै
रणबीर बरोने आला नहीं लावै हाथ चीज बिराणी कै।।
अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण लगै हो पैदा चिन्तन न्या प्राणी कै।।
[07/06, 3:46 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: राज जनता का
जनता द्वारा जनता का जनता खातर राज बाणावांगे ।।
कल्याणकारी योजना आखरी माणस लुग पहोंचावांगे ॥
1
डेमोक्रेसी आज देश मैं बड़े बड़े इजारेदाराँ की देखो
दिखावा जनता की हिमाती ताबेदारी थानेदाराँ की देखो
मेर कटावै संकट के मां बड़े बड़े जमींदाराँ की देखो
कारपोरेट आगै लाइन लागी नेता ताबेदाराँ की देखो
म्हारा कोण सै असली बैरी घर घर मैं अलख जगावांगे ।।
2
म्हारे बेटा बेटी इसमैं चुणैं कहैं पुलिस फौज म्हारी रै
या मारूति मालिक की सुणैं
कहैं पुलिस फौज म्हारी रै
हम हड़ताल कराँ तो धुणैं कहैं पुलिस फौज म्हारी रै
यो कारपोरेट रणनीति बुणैं कहैं पुलिस फौज म्हारी रै
इस पुलिस फौज नै मिलकै जनता के हक मैं ल्यावांगे ॥
3
खेत मजदूरों के संगठन ये मजबूत बणाणे होंगे
जातपात गोत नात छोड़ जनता संघर्ष बढ़ाने होंगे
नब्बे होवें एक पाले मैं दस दूजे पाले मैं खंदाने होंगे
मिलकै मालिक मजदूर होंवैं खून चूश हटाणे होंगे
भारत चमकै दुनिया मैं मानवता का पाठ पढ़ावांगे ॥
4
भ्रष्ट नेता भ्रष्ट अफसर भ्रष्ट पुलिस मार भगावां
भ्रष्यचार ना टोहया पावै जनता पहरेदार बिठावां
झूठ पिटती हांडै भारत मैं हम सच का साथ निभावां
फेयर इलेक्शन होण लगै इसमैं पीसा नहीं बहावावां
रणबीर कैह बणाकै नै सुन्दर हिन्नुस्तान दिखावांगे ॥
[07/06, 4:09 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: उल्टे काम और नशे पते का माफिया गामां ताहिं जा लिया।।युवती युवक यो बेरोजगारी की चिन्ता नै आज खा लिया ।।
1
दारू बिना कोए घर बच्या ना माणस चाहे बचरया हो
दारु का आदि माणस घरां पवाड़े घणे रचरया हो
घर तबाह करे दारू नै यो कैंसर घराँ बुला लिया ।।
2
नौजवान युवक युवती फंसे उल्टे कामां के घेरे मैं
बख्त तैं पहलम बूढ़े दीखैं ना तेज बची चेहरे मैं
सकारात्मक एजेंडा खोस कै उल्टे कामों मैं फंसा लिया।।
3
रिश्वत देदे मिलैं नौकरी दलाल नोट कमावैं सैं
फस्ट डिविजन आच्छे नम्बर सीनियर खड़े लखावैं सैं
खूनी होज्यां बरी कोर्ट मैं ईमानदार आज ढा लिया ॥
4
नौजवान युवक युवती सैं
सम्राज्यवाद के निशाने पै अमरीका की बुरी नजर पड़ी म्हारे इस बेमोल खजाने पै
कहै रणबीर सिंह मनै थारे संग कलम ठा लिया ।।
[07/06, 4:47 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: किसनै दोष देवां बिगड़गे भारत के कुछ नर नारी ।।
गरीब ज्यान तैं मरते दीखैं करल्यो नै होशियारी।।
1
पैदल चलना छोड़ दिया चाहे हो दो किल्ले जाणा
तड़की सारा दूध बेच दे चाय गैल बिस्कुट खाणा
बणणे चाहेवैं छैल छबीले बड्डे चोर जवारी ॥
2
गाम लूटकै खागे भाइयो ये नेता भ्रष्टाचारी देखो
सुलफा आया गैल भांग कै बढ़ी दारू बीमारी देखो
घोटाले दर घोटाल्यां की आज होरी घणी मारा मारी ।।
3
किसान मेहनत करकै टोटे मैं जिन्दगी बितावै सै
हर चार मिन्ट मैं एक किसान फांसी फन्दा लावै सै
फसल बढ़िया कीमत थोड़ी इस ढालां देई बुहारी ।।
4
किसान मरया तो सुणल्यो ना हिन्दुस्तान बचैगा रै
जन क्रान्ति का तावला ए ओड्यो बिगुल बजैगा रै
कहे रणबीर सिंह सोचां या बात बिगड़ती जारी ॥
[07/06, 7:12 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *वैज्ञानिक नजर*
*वैज्ञानिक नजर के दम पै जिन्दगी नै समार लिये।।*
*जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।*
1
सादा रैहणा उचे विचार साथ मैं पौष्टिक खाणा यो
मानवता की धूम मैच चाहिये इसा संसार बसाणा यो
सुरग की आड़ै नरक की आड़ै ना कितै और ठिकाणा यो
पड़ौसी की सदा मदद करां दुख सुख मैं हाथ बंटाणा यो
*धरती सूरज चौगरदें घूमै ब्रूनो नै सही प्रचार किये।।*
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
2
साच बोलणा चाहिये पड़ै चाहे थोड़ा दुख बी ठाणा रै
नियम जाण कुदरत के इसतै चाहिये मेल बिठाणा रै
हाथ और दिमाग तै कामल्यां चाहिये दिल समझाणा रै
गुण दोष तै परखां सबनै अपणा हो चाहे बिराणा रै
*जांच परख की कसौटी पै चढ़ा सभी संस्कार लिये।।*
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
3
इन्सान मैं ताकत भारी सै नहीं चाहिये मोल घटाणा
सच्चाई का साथ निभावां पैड़े चाहे दुख बी ठाणा
लालची का ना साथ देवां सबनै चाहिये धमकाणा
मारकाट की जिन्दगी तै ईब चाहिये पिंड छटवाणा
*पदार्थ तै बनी दुनिया इसनै चीजां को आकार दिये।।*
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
4
दुनिया बहोतै बढ़िया इसनै चाहते सुन्दर और बणाणा
जंग नहीं होवै दुनिया मैं चाहिये इसा कदम उठाणा
ढाल-ढाल के फूल खिलैं चाहिये इनको आज बचाणा
न्यारे भेष और बोली दुनिया मैं न्यारा नाच और गाणा
*शक के घेरे मैं साइंस नै रणबीर सिंह सब डार दिये।।*
जीवन दृष्टि सही बणाकै बदल पुराने विचार लिये।।
[08/06, 6:03 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *बीरो धर्मा*
*दारु नाश करै घर का दीमक की ढालां शरीर नै खावै।।*
*मां बाप घणे दुखी रहवैं घर आली ऊपर संकट छावै।।*
1
शुरु शुरू मैं तो ब्याह शादी मैं दो चार घूंट लगाई रै
सहज सहन आदत पड़गी चाह कै नहीं छुट पाई रै
*कदे इस कदे उस गाल मैं पी कै नै दारू पड़या पावै ॥*
2
तड़कै उठकै कान पकड़ ले ईब ना कदे पीऊंगा
छोड छाड या दारू बीरो मैं तेरी खातर जीऊंगा
*उसे सांझ नै बीरो उसनै ठाकै अपणे कांधे पै ल्यावै॥*
3
आगले दिन पां पाकड़ ले खड़दू करै परिवार मैं बीरो घी प्यावै रहै दाऊ छोडण की इन्तजार मैं
*रात नै कई कई घण्टे लुग बीरो धर्म नै रोज समझावै।।*
3
आठ दस साल बीतगे तीन बालक घर मैं रलगे
दारू नशे मैं रहवै रोजाना खावण के लाले पड़गे जेवर *गैहने बेच कै पीवै कै चोरी करकै नै जरूर चढ़ावै।।*
4
खेत क्यार तैं चोरी करले दारू हुई घणी जरूरी या
बीरो कहवै घराँ बैठ कै पीले समझै सै मजबूरी वा
*बीरो की तै हद छाती सै रणबीर धर्मे नै ईबी चाहवै ।।*
[10/06, 7:33 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: पढ़ाई लिखाई व्यापार बणादी देश के सरमायेदार नै।
या फीस कई गुणा बधा दी मारे म्हंगाई की रफ्रतार नै।।
1.
स्कूल बक्से ना बक्से कालेज इस बढ़ती फीस के जाल तैं
कश्मीर तै केरल तक बींधे यो मांस तार लिया सै खाल तै
चारों कान्ही हाहाकार माचग्या इस आण्डी बाण्डी चाल तैं
जमा धरती कै मार दिये के तम वाकफ ना म्हारे हाल तै
एक चौथाई साधण जुटाओ कहवैं लूटो जनता लाचार नै।।
2.
यूजीसी कटपुतली बणादी उल्टे नियम बणवाये जावैं
दो सी बीस फीस थी पहलम तेरां हजार भरवाये जावैं
दिल्ली यूनिवर्सिटी मैं सात हजार शुरू मैं धरवाये जावैं
बन्धुओ थारी बढ़ी फीस या लेगी खोस कै म्हारी बहार नै।।
3.
दो हजार आटोनोमस कालेज पूरे भारत में चलाये सैं
नये कोर्स कम्प्यूटर बरगे इनके अन्दर ये खुलवाये सैं
इन कोर्सों के रूपये लाखां इन कालजां नै भरवाये सैं
गरीब बालक माखी की ढालां काढ़ कै बाहर बगाये सैं
युद्ध कान्हीं ध्यान बंटा कै चाहो बढ़ाना इस भ्रष्टाचार नै।।
4.
विश्व बैंक के कहने पै बन्धुओ क्यों गोड्डे टेके तमनै
उनके फायदे खातर क्यों म्हारे फायदे नहीं देखे तमनै
सब्सिडी खत्म गरीबां की बर्बादी पै परोंठे सेके तमनै
जनता साथ जान बूझ कै ईब फंसा लिये पेचे तमनै
रणबीर सिंह की कलम बचावै देश की पतवार नै।।
[10/06, 7:38 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: *भर्ती*
पीस्याँ का जुगाड़ बनाया या धरती गहणै धरकै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
1
दोनों जणे आगै पाछै चाले ज्यूँ घोड़ी कै पाछै बछेरा
कितना दुखी पाग्या मेरी खातर भाईयो बाप यू मेरा
कहया सिपाही बणकै बाबू मैं दुःख दूर करूंगा तेरा
दस के बनाऊँ बीस लाख जै कदे बस चालैगा मेरा
सपने मैं चढ़ घोड़ी पै चल्या धर्मबीर सिपाही बणकै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
2
बाबू के दिल मैं धड़का था कदे बिचौलिया पीसे खाज्या
धरती खोयी पीसे भी जाँ कदे ज्यान मरण मैं ना आज्या
कदे झूठ बहका कै बिचौलिया म्हारै थूक कसूता लाज्या
सोचै बिस्वास करना होगा न्यूएँ क्यूकर नौकरी थ्याज्या
बाबू घबराया नहीं देख्या था इसे रासे के मैं पड़कै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
3
टूटे से ऑटो मैं बैठकै नै दोनूं शहर बीच आगे कहते
एस पी दफ्तर मैं भीड़ देखी भोत घणे चकरागे कहते
माणस ऊपर माणस चढ़रया वे एकबै घबरागे कहते
बोली चढ़गी पंदरा पै कई बिचौलिए बतलागे कहते
सी एम की सिफारिस वे आले चालें घणे अकड़कै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
4
साठ सीट बतावैं थे सिफारिशों का भाईयो औड़ नहीं था
कई सीएम के कुछ पीएम के टेलीफोनों का तोड़ नहीं था
गाभरू छोरे छह फिट के उड़ै उनका कोय जोड़ नहीं था
पढ़ाई लियाकत अर गातकै कोय उड़ै बांधै मोड़ नहीं था
लाइन मैं धर्मबीर लाग्या लत्ते काढण एक एक करकै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
5
जिले जिले मैं पुलिस की भर्ती रूका रोला माच गया
असनाई रिश्तेदारी टोहवैं मामला दिखा साच गया
कई सिफारशी हुए भर्ती बाकि पै यो पीसा नाच गया
बिचौलियाँ के पौ बारा हरेक कर तीन दो पांच गया
बिचौलिया नै नोट गिनाये चाय का कप सुपड़ कै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।
6
भर्ती होवण की खातर उड़ै हजारां छोरे आरे देखे
सुथरा छैल गात रै उनका चेहरे कति मुरझारे देखे
रिश्वत खोरी खुली होरी छोरयां कै पसीने आरे देखे
गेल्याँ हिम्मती भी ये रणबीर पाँ कै पाँ भिड़ारे देखे
लिस्ट मैं आग्या बिचौलिया लेग्या बाकि के गिण कै नै।।
नौकरी दिवावण चाल दिया लाखां गोज मैं भरकै नै।।