Wednesday, 14 January 2026

लैंगिक मुद्दे

हरियाणा में स्वास्थ्य में लैंगिक मुद्दे https://pratibimbmedia.com/gender-issues-in-healthcare-in-haryana/

Wednesday, 7 January 2026

130..150

[06/01, 8:01 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 130
मॉल खजाने 
मॉल खजाने धरे रहज्यांगे , तूँ रोटी खावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
1
टैक्स की चोरी खूब करी तनै छोड़ दिया साथ सच्चाई का
बैंक के लोन डकार गया ना रहया औड़ काली कमाई का
पीस्से कित धरूं की चिंता ना विश्वास रहया सगे भाई का
गुड़गामा मैं दो फ्लैट खरीदे नाम लिखाया भरतो ताई का
कई करोड़ का मालिक फेर और पीसा पावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
2
कंजूस माखी चूस होग्या तूँ घटिया तरीके अपनावै रै
आत्म सम्मान तोड़ै हिणे का गैल कद अपना घटावै रै
अपना बैरी खुद मैं होग्या बन्द गली मैं बड़ता जावै रै
खोखला पूरा जीवन होग्या साच तनै खावण आवै रै 
घर अपने मैं तूँ पराया होग्या दखे बतलावन नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
3
भारया होग्या गैंडे बरगा नहीं नींद चैन की सोवै रै
मन का अँधेरा दुखी करै फेर दारू मैं आपा खोवै रै
एबी होग्या धुत नशे में तूँ बेउन्माना पीस्सा खोवै रै
सब किमैं तेरे धोरै फेर भी क्यों डले सुरग मैं  ढोवै रै
बालू शाही धरी तेरे साहमी मूंह मैं आवण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
4
नहीं तनै कितै भी चैन पड़ै मन में घणी उचाटी छाज्या 
नहीं दो पैग तैं काम बणै पूरी बोतल भीतर तैं खाज्या
काला धन दिमाग चढ़ा दे फेर क्यूकर मन शान्ति पाज्या
भूल भलैया बनी जिंदगी सारी उम्र न्यों ए खपाज्या 
रणबीर बरोने आला तेरे पै गीत बणावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
[06/01, 8:02 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 131
लेगे उडारी देखो
मियां बीबी रहगे ऐकले तीनो बालक लेगे उडारी देखो|
के के सपने संजोये थे जिब हुई ये संतान म्हारी देखो |
बचपन उनका सही बीते करे दीन रात काले हमनै
क्याहें की परवाह करी ना बहा पसीना पाले हमनै
पढ़न खंदाये लाड लड़ाए तनखा खर्ची सारी देखो|
कदे रुसजया कदे कुबध करै यो छोरा सबते छोटा मेरा
बड़ी छोरी हुई सयानी शादी का दुःख था मोटा मेरा
बिचली छोरी का के जिकरा वा तिनुओं मैं न्यारी देखो|
एक अम्बाला दूजी सूरत मैं परिवार अपने चला रही
ये मोबाइल साँझ सबेरी हमते रोजाना ही मिला रही
बात करें दुनिया भर की उमर बीतती जारी देखो
कई बार बहोत ऐकले मियां बीबी हम हो ज्यावें सें
झगडा करल्याँ छोटी बात पै लड़भीड़ सो ज्यावें सें
रणबीर सिंह आप बीती सै कलम मेरी पुकारी देखो
[06/01, 8:05 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 132
मैडीकल के छात्र के कत्ल के वक्त लिखी एक रागनी 
क्यों खिलता फूल तोड़ दिया घणा बुरा जमाना आग्या।।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
1
तीनों यारां नै मैना में मौज मस्ती खूब मनाई थी नींद की गोली यतेन्द्र नै बीयर बीच मिलाई थी कई दिन पहलम कत्ल की उनै स्कीम बनाई थी गल घोंटकै मार दिया आवाज कती ना आई थी   
सारी डॉक्टर कौम कै यतेंद्र यो कसूती कालस लाग्या।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
2
माता कै के बाकी रही जब खबर कत्ल की आई टेलीफोन पै बात हुई ईबीसी फेटण भी नहीं पाई कोर्स पूरा होग्या सोचै थी मैं कर दयूं इब सगाई
क्यों कत्ल हुया बेटे का ना करी कदे कोये बुराई
खुद तै चल्या गया सोनी फेर पूरे घर नै जमा ढाग्या।।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
3
क्यों यार का यार बैरी करते क्यों विचार नहीं 
दारू नशे हिंसा का रोक्या क्यों यो व्यापार नहीं 
कांफ्रेंस प्यावैं जमकै दारू न्यों होवै उद्धार नहीं 
या हिंसा ना रोकी तो बचै किसे का घरबार नहीं
दारू नशे हिंसा का पैकेज यो चारों तरफ आज छाग्या।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
4
एक औड़ नै कुआं दीखै दूजे औड़ खाई मैं धसगे
घणे जण्यां के अरमानों नै ये नाग काले डसगे
बैर ईर्ष्या लोभ मोह जनूँ तो रग रग के मैं बसगे 
हरियाणे के छोरे छोरी कसूते भंवर के मैं फ़सगे
मैडीकल ऊपर सोचो मिलकै रणबीर सवाल यो ठाग्या।।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
[06/01, 8:07 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 133
हरयाणा के समाज मैं
गरीबां की मर आगी हरयाणा के समाज मैं।।
रैहवन नै मकान कडै , खावन नै नाज नहीं
पीवन नै पानी कडै , बीमार   नै इलाज नहीं
महंगाई जमा खागी हरयाणा के समाज मैं।।
कपास पीटी धान पीट दिया गेहूं की बारी सै 
गीहूं की गोली खा खा  मरगे हुई घनी लाचारी सै 
किसान की धरती जागी हरयाणा के समाज मैं।।
बदेशी  कंपनी कब्ज़ा करगी ये हिंदुस्तान मैं
लाल कालीन बिछाए किसने इनकी श्यान मैं
इतनी घनी क्यों भागी हरयाणा के समाज नै।।
महिलाओं  पै अत्याचार बढे आंख म्हारी मिचगी
दलितों के ऊपर क्यों तलवार म्हारी खिंचगी   
रणबीर की छंद छागी हरयाणा के समाज मैं।।
[06/01, 8:10 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 134
माहौल तो किमैं होना चाहिए पढ़ने और पढ़ाने का
मानस नै मानस समझै हो यो काम ईमान बचाने का
1
कमाई करकै गरीब मरले इंसानियत या मारी जा
इज्जत आबरू बचावै क्यूकर दिन धोली मैं तारी जा
इसे माहौल मैं जी कै कड़े बख्त सै किताब उठाने का।।
2
म्हारा मान सम्मान नहीं कोए हमनै मानस लांता ना
भीतरला चाहवै कुछ करना मौका कोए थ्यानता ना
समाज मैं दोयम दर्जा के फायदा आजादी ल्याने का।।
3
बाजार मैं सब किमैं बिक गया न्यों कहनियां पावैं सैं 
जिपै बस मेहनत बेचने नै ऊंपै यो तोहमद लावैं सैं 
पीसा दीन ईमान होगया ढंग बदल्या समाज चलाने का।।
4
अफसर बनकै भी मानस बनै देखो सही इंसान नहीं 
खुद की इंसानियत खो दी देखें मन का शैतान नहीं
रणबीर दिन धोली की लूट ना दीखै के फायदा इब बताने का ।।
[06/01, 8:12 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 135
क्या बताया भला---
*वन संरक्षण के कानून लगा कै जुल्म कररी सै सरकार।।*
*बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।*
1
देश भर मैं लाखां हेक्टेयर जंगल कारपोरेट ताहिं उजाड़े
सुप्रीम कोर्ट भी आंख मूंदग्या जब जंगलां के तंबू पाड़े
खोरी की झुग्गी झोंपड़ी तोड़ी हजारां लोग गए लिकाड़े
हरियाणा के शासन नै करे बहोत घणे उन गेल्याँ खाड़े
*कोरोना काल मैं बेघर करने पै ये हुक्म करे बारम्बार।।*
बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।
2
पाछले मिहने की सात तारीख नै फैंसला कोर्ट नै दोहराया
बेदाखली प्रक्रिया पूरी करो छह हफ्ते का टाइम सुनाया
खोरी गांव अरावली पर्वत के जंगलां का हिस्सा बताया
सरकारी जमीन पै अवैध कब्जा पंजाबी कानून दिखाया 
*उजाड़ कै खोरी तैं बसाने का नहीं हुक्म किया दरबार।।*
बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।
3
भूमाफिया नै ये जमीन गैर कानूनी ढंग तैं बेची कहते
सन उन्नीस सौ सत्तर तैं मजदुर बताये खोरी मैं 
रहते
उबड़ खाबड़ जमीन समतल करी दुख दर्द बहोत सहते
दुख हुआ बहोत घणा जिब देखे झोंपड़ी मकान ढहते
*कट्ठे होकै कररे मुकाबला पुलिस की होसै लाम्बी कतार।।*
बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।
4
पांच सितारा होटल बनारे  उनपै सवाल क्यों ना ठाया
फार्म हाउस भी बना राखे जिकरा तक कोण्या आया
दोभांत कानून लागू करने मैं कारण मजदूर समझ पाया
संघर्ष का रास्ता खोरी गांव नै आखिर मैं सै अपनाया
*रणबीर या लाम्बी लड़ाई सै जीतै कमेरा हारैगा साहूकार।।*
बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।
[06/01, 8:15 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 136
ठण्डी बाल
तन ढक्कन नै चादर ना घणी ठण्डी बाल चलै।
एक कून मैं पड़ रहना धरां सिर कै हाथ तलै।।
1. फुटपाथ सै रैन बसेरा घणे सुन्दर मकान थारे
दो बख्त की रोटी मुश्किल रोज बनैं पकवान थारे
दीखे इरादे बेइमान थारे सत्ते का जी बहोत जलै।।
2. होटल मैं बरतन मांजैं करैं छोटी मोटी मजूरी
थारे घरां की करैं सफाई घर अपने मैं गन्द पूरी
कद समझी या मजबूरी जाड़ी बाजैं ज्यों शाम ढलै।।
3. थारे ठाठ-बाट देख निराले हूक उठे दिल म्हारे मैं
पुल कै नीचै लेटे देखां लैट चसै उड़ै चौबारे मैं
गरम कमरे थारे मैं यो साहब मेम का प्यार पलै।।
4. म्हारी एक नहीं सुनै राम थारे महलां बास करै
इसे राम नै के हम चाटां पूरी ना कोए आस करै
रणबीर सब अहसास करै दिल मैं आग बलै।।
[06/01, 8:16 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 137
स्मार्ट गाँव 
दोहला गाम सोहने का स्मार्ट गाम बनावैंगे देखो ।।
मीडिया मैं प्रचार करा वाह वाही पावैंगे देखो ।।
पांच गाम छांटे कहते इणनै स्मार्ट बनावैंगे रै
बाक़ी साढ़े छह हजार बाट मैं जीवन बितावैंगे रै
पांच का बी ना बेरा कितने स्मार्ट हो ज्यावैंगे देखो ।।
दिल्ली मैं राष्ट्रपति नै उद्घाटन बटन दबाया 
गाम आलयाँ नै बजा ताली उनका सम्मान जताया 
दुनिया मैं खबर गई कई तरां दिखावैंगे देखो 
स्मार्ट सिटी स्मार्ट गाम बुलेट ट्रेन का नारा देखो
काला धन बैंकां खाते मैं 15 लाख आरया देखो 
साथ सबका विकास के शगूफे सुनावैंगे देखो।।
गरीब की पढ़ाई सेहत सब पढण बिठाई 
अम्बानी धोरै पहोंचा दी टैक्स लगा म्हारी कमाई
इब सबक पांच नै पिचानवै जरूर सिखावैंगे देखो ।।
[06/01, 8:18 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 138
तीज मनाया करते
पींघ घालकै  खूब झूलते हम नयों तीज मनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
1
पहरकै  सूट रंग बिरंगे सब झूलन जाया करती हे
मिलकै साम्मन  के गीत हम बहोतै गाया करती हे
देवर जयेठ  भी इधर  उधर डोलते नजर आया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
2
दो दो पटड़ी पै खडी होकै खूब ए पींघ बधान्ती बेबे   
उप्पर जा सिर घूम जांता जिब तले नै लखान्ती बेबे 
देवर जयेठ देख नज़ारे बहोतै मजाक उड़ाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
3
दो च्यार घंटे सुख की साँस थोड़ी देर लिया करती 
एक दूजी के साहमी दिल अपना खोल दिया करती  
मस्त साम्मन  का मौसम खीर हलवा बनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
4
बेरा ना कित गयी वे तीज कर याद दिल भर आवै
बाजार की भेंट चढ़े त्यौहार म्हारी ना पर बासावै
रणबीर सिंह मेहर सिंह बरगे  न्यारे छंद बनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
[06/01, 8:20 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 139
विवेक तैं सोचां
किसानो थारे बरगा विज्ञानी मनै कोए भी नहीं पाया।।
थारे अनुभव तैं थामनै खेती मैं खूब नाम कमाया।।
भैंस खरीदी जब थामनै धार काढ कै देखी बताई 
बुलध खरीदया थामनै सार काढ़ कै देखी बताई 
अगवा पिछवा हवा हिसाब हमेशा ही थामनै लगाया।।
पर मण्डी मैं जाकै बेबस विज्ञान काम नहीं आया रै
भा नै देकै मारे धरती कै जी थारा घणा दुःख पाया रै
कदे समझलयो लूट की जड़ जात्यां मैं किसान बंटाया ।।
पंजाब का किसान बोल्या आतंकवादी कैहकै पीटया 
हीर गुजर जाट मैं बाँट हरियाणे का किसान भींच्या
किसान की तोड़ एकता जात्यां पै आपस मैं भिड़ाया ।।
अम्बानी अडानी की लूट रणबीर जारी रहैगी देखो 
जात्यां मैं बंटी किसानी कितनी पिटाई सहैगी देखो 
जात पात का पहरा चश्मा विवेक चश्मा थारा बगाया ।।
[06/01, 8:21 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 140
कहानी घर घर की
मरे गरीबी के बोझ तलै , तेरी बी ना कोए पार चलै  
अमीरी हमनै रोज छलै , शरीर  को कसूत सताऊँ मैं
दो घरों में जाकै मैं करूँ यो पूरा काम सफाई का
एक घर डाक्टर का सै दूजा घर वकील अन्यायी का
दोनों घरों का के जिकरा सै , मेरे पै ना कोए फिकरा सै
ख़राब सबका जिगरा सै , पेट पकड़ बैठे दिखाऊँ मैं
वकील साहब की वकालत बस इसी ए सी बतावें
ओला बोला पीसा उन धौरे धंधा कई ढाल का चालावें
घर मैं पीटता  घरआली नै , बाहर देखो शान निराली नै
बेटा ठाएँ हाँडै  दुनाली नै , के के सारी खोल सुनाऊँ मैं ||
डाक्टरनी दुखी कई बर बैठी रोंवती  वा पाई बेबे  
शौतन का दुःख झेल रही कई बै चुप कराई बेबे  
बड्डी कोठ्ठी पर दिल छोट्टे, बाहर शरीफ भित्तर खोट्टे
कुछ तो अकल के बी मोट्टे  , कई बै अंदाज लगाऊं मैं ||
घूर घूर कै देखै मने ना डाक्टर का एतबार बेबे
उसकी आँख्यां  मैं दीखे यो शैतान हरबार बेबे
डाक्टर का घर छोड़ दिया , तीजे घर मैं बिठा जोड़ लिया
काढ मने यो निचोड़ लिया रणबीर यो बख्त पुगाऊँ मैं ||
[07/01, 9:39 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 1
एक महिला के विचार

थारी याद सतावै सै , दुख बढ़ता आवै सै

कानों पर कै जावै सै, मेरी कोए ना सुनता।।

1

एक औड़  तो सती का जश्न खूब मनाया जावै सै

औरत को दूजे कांही बाजार बीच नचाया जावै  सै

जड़ै होज्या सुनवाई, इंसानियत जड़ै बताई

समाजवाद की राही, मेरी कोए ना सुनता।।

2

मुनाफा खोरी की संस्कृति जिस समाज मैं आ ज्यावै

मानवता उड़ै बचै कोन्या या जड़ मूल तैं खा ज्यावै

पूंजी का खेल बताया, नहीं समझ मैं आया

क्यों आपस मैं भिड़वाया, मेरी कोए ना सुनता।।

3

और मुनाफा चाहिए सै चाहे लाश गेरनी हो ज्यावै 

शाइनिंग दुनिया आला एयरकंडीशंड मैं सो ज्यावै

गरीब क्यों आज मरै , मेहनत भी खूब करै

क्यों उसपै इलजाम धरै,मेरी कोए ना सुनता।।

आपा धापी मचा दई भाई का भाई गल काट रहया

नएपन के नाम पै नंगापन चाला कसूता पाट रहया

जात पात की राही या, ऊंच नीच की खाई या 

क्यों मचाई तबाही या, मेरी कोए ना सुनता।।
[07/01, 9:41 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 141
अपना हरियाणा ,सबका हरियाणा 
मशीन नै तरीके बदले खेत क्यार की कमाई के ।।
बैल गाड्डी जागां बाईक बदलाव दीखैं पढ़ाई के ।।
बाईक ऊपर चढ़ कै छोरा खेत मैं जावै देखो
ज्वार काट खेत म्हं तैं भरौटा बना धर ल्यावै देखो 
भरौटे गेल्याँ और बिठावै  काम ये घणी चतराई के।।
जिसकै ट्रेक्टर कोन्या उड़ै झोटा बुग्गी आगी रै
घर का काम अर या बुग्गी बीरबानी नै खागी रै
घणखरे काम करै औरत मर्द के काम ताश खिलाई के।।
प्रवासी मजदूर पै कई का टिक्या खेत क्यार का काम 
म्हणत तैं घिण होगी चाहवै चौबीस घण्टे आराम 
दारू घर घर मैं आगी बीमारी नै करे हालात तबाही के।।
नया अपना हरियाणा जात पात छोड़ बणावांगे
मानवता का झंडा हरेक गाम शहर पहोंचावांगे
कहै रणबीर बरौने आला छंद लिखे ना अंघाई के ।।
[07/01, 9:46 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 142
मंहगाई 
आज महंगाई का म्हारे देश मैं कोए औड़ नहीं ।।
मुफतखोरी तैं भुंडी देखो दूजी कोए होड़ नहीं ।।
बेरोजगारी और गरीबी इस विकास नै बधाई
अरब पति बने ख़रब पति चले लूट की राही
किसान फांसी खावै सै नहीं होती कितै सुनाई
आज जंगल खान सबकी बीच बाजार बोली लाई
कहैं सैं विकास करांगे चलै कोए कौड़ नहीं ।।
विकास का मॉडल यो विनास मॉडल पाया देखो
सरकारी सैक्टर पै यो पीपीपी ल्या बिठाया देखो
 शिक्षा महंगी करदी गरीब खड्या लखाया देखो 
गरीब कै इलाज बिना मौत काबुलावा आया देखो 
गरीब धक्के खान्ते हांडै बची कोए ठोड़ नहीं ।।
गीता कहै कर्म करें जा मत कर फल की आस 
करया हुया नहीं मिल्या पूरा था हर पर विश्वास 
हाड़ तोड़ काम करां सां फेर बी चित क्यों उदास 
नफे भोग लिए पिछले के अगले की करले ख्यास 
मेहनतकश क्यूँ भूखा खोज्या कोए तोड़ नहीं ।।
किस्मत कै बंधा गांडली म्हारी कमाई खोसी रै
ना पूरी दी मजदूरी म्हारी नाड़ हमेशा मोसी रै
किसान लूट लिया मण्डी मैं बना नीति दोषी रै
मजदूर किसान की लूट पै उनकी ताज पोसी रै
रोला पांच पिचानवै का दूजा असली जोड़ नहीं ।।
[07/01, 9:48 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 143
चमेली पड़ौस की महिलाओं के बीच दोपहर को बात करती है । 
सभी महिलाएं महंगाई के बारे में बताती हैं । लैक्सन आगे पर महंगाई फेर 
बी कम नहीं हुई । चमेली क्या कहती है ----
वोट देवां  जिब राखते हम सही गलत का ध्यान नहीं ॥ 
नाश करैंगे वे नेता जिनकै धोरै आज ईमान नहीं ॥ 
नजर घुमा कै देख लियो नित पेड़ झूठ का फलै सै 
सच का तेल घलै दीवे मैं तो यो ज्ञान उजाला जलै सै 
सच के दायरे मैं रहकै मन नहीं हिलाया हिलै सै 
सच पै खड्या रहवै उसनै दिलां मैं जगां मिलै सै 
विचार करै बुद्धि चेतन बिन चेतन मिलै ज्ञान नहीं ॥ 
भगत सिंह का नाम सुण्या धूम मचाई हिन्द म्हारे मैं 
तेईस बरस का फांसी चढग्या सोचो कदे इस बारे मैं 
सुणो आसान बात नहीं होती या ज्यान देनी आरे मैं 
घर बार कति छोड़ दिया उसनै देश के प्रेम इशारे मैं  
म्हणत करकै दौलत पैदा करां समझे जां इंसान नहीं ॥ 
साच्ची बात कहूँ थारे तैं हम सच्चाई मंजूर करावैं 
हाथ जोड़ कहूँ थारे तैं सच का साथ जरूर निभावें 
सच्चाई पै चलना चाहिए सच्चाई का घर दूर बतावैं 
बनावटी मिलावटी की जागां इंसानियत का नूर खिलावें 
सच्चा सौदा ए बिकवावेंगे झूठ की चलै दुकान नहीं ॥ 
वो मानस ना किसे काम का जो सच पै सिर धुनै नहीं 
अपनी कमाई का हिसाब वो बैठ कै कदे बी गिनै नहीं 
वोहे मानस सदा सुख पावै सै जो बात झूठी सुनै नहीं 
आज जो ठीक नहीं वो उस परम्परा का जाल बुनै नहीं 
छुआछात की जो बात करै वो इंसान की संतान नहीं ॥
[07/01, 9:49 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 144
हरयाणा  चुनाव के मुदे जिक्र कोए ना करता रै ॥ 
सबकी सेहत ठीक रहवै हाँ भरतें क्यूँ डरता रै ॥ 
आच्छी शिक्षा मिलै सबने  इस पर कोए विचार नहीं 
पढ़ाई पढन बिठा राखी इसतैं बड़ा अत्याचार नहीं 
क्वालिटी शिक्षा का नहीं कोए सही रास्ता उभरता रै॥ 
स्वास्थ्य सेवाएं प्राइवेट मैं गरीब जा नहीं पावै यो 
सरकारी ढांचा बैठ लिया आज गरीब किट जावै यो 
मुफ्त इलाज का दावा मरीज बिना इलाज मरता रै॥ 
बिना नौकरी लम्पट बनगे अपराधों का औड़ नहीं 
पीसा चलै कै सिफारिस हाँडो जिसका जोड़ तोड़ नहीं 
जनतंत्र पढण बिठाया भ्रष्ट का ना पेटा भरता रै ॥ 
नाज सड़ै गोदामां मैं जनता भूख तैं बिलख रही 
अमीरी गरीबी पै हँसै लुआ विकास के तिलक रही 

चुनाव अजेंडा जनता क्यूँ नहीं आज उभरता  रै ॥
[07/01, 9:50 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 145
विकास कहूँ या कहूँ तबाही 
विकास कहूँ या कहूँ तबाही , बात मेरी समझ नहीं आई,
हुई क्यों गामां की इसी छिताई , दिल्ली के गाम चर्चा मैं आये ॥ 
दिल्ली का विस्तार हुआ तो अनेक गाम इसमें आये थे 
धरती अक्वायर करी इनकी घने सब्ज बाग़ दिखाए थे 
बहोत घर बर्बाद हुए , जमा थोड़े घर आबाद हुए 
पीकै दारू कई आजाद हुए , चपेट मैं युवा लड़के आये॥ 
दिल्ली तैं कोए सबक लिया ना ईब हरयाणा की बारी 
एन  सी आर  के नाम तैं इसकी बर्बादी की तैयारी 
विकास पर कोए चर्चा ना , आज पूरा पटता खर्चा ना 
इसपै लिख्या कोए पर्चा ना , बीस लाख एक किल्ले के लाये॥ 
नशे का डूंडा पाड़  दिया ये नौजवान चपेट मैं आये 
फ्री सैक्श के खोल दरवाजे युवक युवती भरमाये 
हाल करे कसूते लूटेरे नै , मचाई लूट इनै चौफेरे  नै 
बाँट जात पात पै कमेरे नै , नंबर वन के नारे लगाये ॥ 
ईको अर जेंडर फ्रेण्डली विकास समता साथ ल्यावै 
ना तो दिल्ली जैसे खाग्या न्यूए एनसीआर इसनै खावै 
बहस विकास ऊप्पर चलावां , नया  हरयाणा किसा  बणावां 
रणबीर नक्शा मिलकै खिंचावाँ ,कैसे यो हरयाणा बच पाये ॥
[07/01, 9:52 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 146
जित बी जाऊं उड़ै घणी लाम्बी लाईन लगी क्यों पावै हे ||
सरकारी मैं भीड़ या जेब प्राइवेट खाली क्यों करावै हे ||
कुपोषण प्रदूषण मिलावट कारण बड्डे बीमारी के 
इनके बढ़ते जाने से बढे हमले ज्यान हमारी के 
इसपै किसे का ध्यान नहीं कसूर बतावैं करतारी के 
पौष्टिक खाना साफ पाणी हवा राज सेहत म्हारी के 
इन पै गौर करने नै म्हारी सरकार क्यों नजर चुरावै हे ||
बीमारी हुये पाछै इलाज का ढांचा जरूरी बतावैं 
कितै स्टाफ कम कितै दवाई मरीज घणे दुःख पावैं 
नीति खागी सरकारी ढांचे नै ये प्राइवेट फूलते जावैं 
सरकार का हैल्थ बजट ये जान कई नहीं बढ़ावैं 
कसूर किसे का होवै बेबे फेर सजा और कौए पावै हे ||
मरीज और डॉक्टर आज आहमी साहमी भिड़ा राखे हे 
तीन हजार नर्स जित उड़ै आठ सौ तैं काम चला राखे हे 
उपरल्यां नै अपने चेहते चोखी जागां बिठा राखे हे 
बढ़िया डॉक्टर नर्स भी जनता की न्यों गाली खावै हे ||
डीजीज डॉक्टर और ड्रग का फार्मूला फेल हो लिया हे 
म्हारी सरकारां खातर तो यो जमा खेल हो लिया हे 
बेईमान तो राज करते ईमानदार नै जेल हो लिया हे 
रणबीर कम्प्पणी और कुछ डाक्टरों का मेल हो लिया हे 
थ्री डी का नारा दुनिया मैं शार्ट कट का राह बतावै हे||
[07/01, 9:54 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 147
दो सखियाँ हैं । चांदकौर का दो साल पहले ब्याह हो जाता है । वह जब अपने पीहर आती है तो उसे पता चलता है कि कमला और युद्धबीर जो दूसरी जात से है और उसके कालेज में पढता है ,शादी करना चाहते हैं । एक रोज दोनों सखियाँ मिलती हैं ।चाँदकौर कमला से पूछती है कि क्या सुन रही हूँ । दोनों के सवाल जवाब होते हैं :-
चाँ- कमला सुणले बात मेरी मतना रोपै चाला हे।।
क:एक बै जो मन धार लिया  कोन्या होवै टाला हे।
चाँ: म्हारे बरगी छोरी नै ना वर आपै टोहना चाहिए
क:गलत रीत बात पुराणी ना इनका मोह होना चाहिए 
चाँ: अपनी जात कुटम्ब कबिला ना कदे नाम डबोना चाहिए 
क:जातपात का झूठा रोला दिल का बढ़िया होना चाहिए 
चाँ:के टोहया तनै छैल गाभरू रंगका दीखैकाला हे
क:रूप रंग मैं के धरया सै इंसान गजब निराला हे 
चाँ:नकशक रूप रंग पै तो या दुनिया मरतीआई सै
क:बिना विचार मिलें तो फेर कोन्या भरती खाई सै
चाँ: मात पिता वर टोहवैं या दुनिया करती आई सै
क: डांगर ज्यूँ खूंटै बांधैं जणो गऊ चरती पाई सै
चाँ:बात मानले कमला बेबे टोहले बीच बिचाला हे 
क: उंच नीच देख लई सै बदलूँ कोन्या पाला हे 
चाँ: यो तेरा भूत प्रेम का थोड़े दिन मैं उतर ज्यागा 
क: एक सै मंजिल म्हारी क्योकर प्यार बिखर ज्यागा 
चाँ: बख्त की मार पड़ैगी हे वो तनै छोड़ डिगर ज्यागा 
क:बख्त गैल लडां मिलकै संघर्ष मैं प्रेम निखर ज्यागा
चाँ: जानबूझ कै मतना करै जिंदगानी का गाला हे 
क: वो मनै चाहवै सै मैं फेरूं उसकी माला हे 
चाँ: गाम गुहांड घर थारे नै जात बाहर करैगा हे 
क: बढ़िया बात नै रोकै वो गल्त विचार मरैगा हे 
चाँ: घर बार बिना ना तमनै दिन चार सरैगा हे 
क: गादड़ की मौत मरै जो एक बार डरैगा हे 
चाँ:कमला तूँ फेर पछतावैगी थारा पिटै दिवाला हे 
क: चाँदकौर क्यों घबरावै सै रणबीर म्हारा रूखाला हे 
जुलाई 1989
[07/01, 9:55 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 148
रेगुलर नौकरी 

रेगुलर नौकरी पाना कोन्या कति आसान बताऊँ मैं ||
सी ऍम ऍम  पी सब धोरै पाँच साल तैं धक्के खाऊँ मैं ||  
पहलम कहवैं थे टेस्ट पास करे पाछै तूं बताईये 
पास करे पाछै बोले पहले चालीस गये बुलाईये 
एक विजिट चार सिफरिसी दो  हजार तले आऊँ मैं ||
सरकारी नौकरी रोज तड़कै ढूंढूं सूँ अख़बार मैं 
दुखी इतना हो लिया सूँ यकिन रहया ना सरकार मैं 
एजेंट हाँडें बोली लानते कहैं चाल  नौकरी दिवाऊं मैं  ||
एम् सी ए कर राखी कहैं डेटा आपरेटर लवा देवां 
कदे कहैं नायब तसीलदार ल्या तनै बना देवां 
तिरूँ डूबूं मेरा जी होरया सै पी दारू रात बिताऊँ मैं ||
घर आली पी एच डी करै उसकी फिकर न्यारी मने 
दोनूं बेरोजगार रहे तो के बनेगी या चिंता खारी मने  
रणबीर बरोने आले तनै सुनले दुखड़ा सुनाऊँ मैं ||
[07/01, 9:57 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 149
खुद बिना छात के हांडे छात मुहैया कराने आला।।
कल्याण कानून थोड़ी सी हमें राहत दिलाने आला।।
1
हरियाणे मैं बाइस लाख निर्माण मजदूर बताये 
इनमां तैं बीस प्रतिशत बस रजिस्टर सैं हो पाये
प्रवासी मजदूरों को नहीं दफ्तर राह बताने आला।।
2
ऑन लाइन ऑफ लाइन मजदूर आज उलझाये
निर्माण मजदूर दुखी हो आज सड़कां उपर आये
संघर्ष करकै नै हुया मजदूर मांग मनाने आला।।
3
एकाध मांग मानी म्हारी बाकियों पै कर इंकार रहे 
इलाज और दूसरी मांग नाटे जो चला सरकार रहे
उन्तीस सौ करोड़ जमा ना देता सरकार चलाने आला।।
4
एक आदमी एक सुविधा इसके बाहनै हक खोसैं
बयानबाजी ये करैं झूठी रणबीर मजदूरों को कोसैं
लाल झंडे तैं न्यारा यो नहीं पाया मेर कटाने आला ।।
[07/01, 9:58 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 150
भूख 
भूख बीमारी घणी कलिहारी कहैं इसका कोये इलाज नहीं।।
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।
1
भूख रूआदे भूख सुआदे भूख बिघन का काम करै
भूख सतादे भूख मरादे भूख ये जुल्म तमाम करै
कितना सबर इंसान करै उनकै माचै खाज नहीं ।।
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।
2
शरीर बिकादे खाड़े करादे भूख कति बर्बाद करै
आछे भुन्डे काम करादे मानस हुया बर्बाद फिरै
आज कौन किसे नै याद करै दीखै कोये हमराज नहीं 
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।
3
भूख पैदा करै भिखारी पैदा बड़े बड़े धनवान करै
एक नै भूख दे करकै दूजा पेट अपना बेउन्मान भरै
एक इत्तर मैं स्नान करै दूजे धोरै दो मुट्ठी नाज नहीं ।।
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।
4
लूट नै दुनिया भाइयो दो पाल्यां बिचाळै बांट दई 
मेहनत करने आला भूखा मक्कारी न्यारी छाँट दई
लूट नै सच्चाई आँट दी रणबीर सुनै धीमी आवाज नहीं ।।
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।

Wednesday, 31 December 2025

सफदर हाशमी

किस्सा सफदर हाशमी

*****1

निचोड़ हो लिया
सफ़दर जी की हत्या से निचोड़  हो लिया।।
हुया  हड्खाया राजवर्ग यो तोड़ हो लिया।।
1
एक जनवरी साल नवासी मोटा चाला होग्या
हुया हमला सफ़दर ऊपर घायल कुढाला होग्या
हमलावर खुद राज करनीये खुल्ला पाला होग्या 
सफ़दर के नाटक का ढंग योतै  निराला होग्या  
यो राजनीती और हत्या का गठजोड़ हो लिया ।।
2
चारों कूट मैं शोक फैलग्या कूकी दुनिया सारी 
गाँव गाँव और शहर शहर मैं  दुखी हुए नर नारी    
पैरिस लन्दन रोम के अन्दर सदमा था बड़ा भरी
कलाकार था जग मैं नामी थी संस्कृति प्यारी 
यो सरकारी चिलत्तर का भन्दा फोड़ हो लिया ।।
3
सफ़दर हाश्मी डस लिया सर्प राज का काला है
अभिव्यक्ति की आजादी का इब तक यो टाला है
राजवर्ग की भाषा बोलो वर्ना मुंह पर  ताला है
साच पर से जो पर्दा ठावै उसी ज्यान का गाला है
राजवर्ग सारी जगह का दीखे एक औड हो लिया ।।
4
जल्दी संभलो रचना कारो कला पर यो हमला है
जन पक्ष की कला हमारी ना बिल्कुल ये अबला है  
रोंदना चाहते हो तुम  जैसे करता हाथी पगला है
हबीब भारती विचार करों  क्या कदम हमारा अगला है
वर्ग लुटेरा हत्यारा यो एक ठयोड़  हो लिया ।। 

******2

भारी दिल से साथी सारे हो नतमस्तक करैं प्रणाम।।
सभी श्रद्धा के फूल चढ़ावैं सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।।

1)

सारे मिलकर कसम उठाएं जन जन तक ले जाएं पैगाम 
जो काम ये रहा अधूरा हम इसे पूरा देंगे सर अंजाम 
कभी ना देखें सुबह शाम सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।। 

2)

चलें उस पर जो राह तेरी ना करना बिल्कुल आराम 
सच्चाई का बिगुल बजावें कांप उठेंगे ये चारों धाम 
हो बदमाशों की नींद हराम सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।।

3

भरोसा है हम सबको सहादत जावे ना ये नाकाम 
सारी जनता पुकार उठी  है गुंडागर्दी को कसो लगाम
इंसानियत ना करो बदनाम सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।।

4

जाकर सभी अलख जगायें ठीक गलत का यह संग्राम 
जनता जब सुर में बोलेगी नहीं रहें फिर दूर मुकाम 
गूंजता रहेगा तुम्हारा नाम सफदर हाशमी तुम्हें सलाम।

5

सॉरी जनता अब जागेगी अभिव्यक्ति ना रहे गुलाम 
बोवे पेड़ बबूल का तो कहां से उगेंगे खेत में आम 
मुनाफाखोर ये बड़ा छद्दाम सफदर हाशमी तुझे सलाम।

6

हल्ला बोल को हम ले जाएंगे हर शहर और हर गाम रणबीर सिंह कैसे भूले शब्द तेरी कला तेरा कलाम 
साथी मरा नहीं गुमनाम सफदर हाशमी तमे तुम्हें सलाम।

******3

मौत सफदर की दिन धौली घंटी कानों के म्हां बजा गई।
बात कहण का हक सै म्हारा निशान सवालिया लगा गई।

1

तीन मुँही नागिन काली सी या गुंडागर्दी फण ठावै सै 
एक फण पै गुंडा बैठकै चाकू छुरी पिस्तौल चलावै सै 
दूजे फण पै पुलिस बैठकै गुंडयां का साथ निभावै सै 
तीजे फण पै शासक बैठकै पूरा ए प्रपंच यो रचावै सै 
मेरा रोम-रोम कर्णावै सै चोट छाती के भीतर समा गई ।

2

अपनी ज्यान की परवाह की ना दूज्यां की जान बचाई सै 
हिर फ़िर दीखै सफदर उसनै ज्यान की बाजी लाई सै
दरवाजे पै अड़या अंगद बणकै सीने मैं लाठी खाई सै
कलाकार था पक्का सुणले कला मैं ज्यान खपाई सै
चिता जली जब थारी हाशमी आग मन के म्हां लगा गई।

3

माला हाशमी नै मशाल उठाई साहिबाबाद फेर पहुंच गई 
वाहे जागां नाटक वोहे लेकै दरबारे जनता मैं पहुंच गई
शेरनी बरगा जिगरा लेरी दीखै फर्ज निभावण पहुंच गई 
बोल जमूरे हल्ला बोल बस्ती मैं दिखावण पहोंच गई
माला तेरी फोटो अखबारां मैं हुक दिल के म्हां उठा गई।

4

शरीर तेरे नै बेशक हमतैं अपना नाता तोड़ लिया सै 
कला तेरी तेरे कलाम तैं हमनै नाता जोड़ लिया गुंडागर्दी की राजनीति तैं मनै तो मूंह मोड़ लिया सै
समझण आले नै रणबीर काफी बता यो निचोड़ दिया सै
गुंडा गर्दी के खिलाफ मौत फिजां भारत के म्हां बणा गई 
5.1.1989

****4

जनतंत्र का असली चेहरा आंख्यां के स्याहमी आग्या।
इस की बुराई करनिया नै यो जमा जान तै खाग्या।

1

मेरा मन होया उदास सफदर हाशमी साथी खास 
कोण्या देखी जावै लाश रंज गात मैं छाग्या।
2

मनै पाट्या कोण्या तोल कौन करै इतनी रोल दिन धोली गुंडा टोल उड़ै क्युकर गोली चलाग्या।
3

गुंडे पुलिस यार हुए, मजदूरों पर वार हुए  ऊपर मालिक असली सवार हुए सफदर असली बात बताग्या।।
4
लूटैं डाकू चोर लुटेरे दिखावै नुक्कड़ असली चेहरे, म्हारे घालै बैरी घेरे सफदर घेरा तोड़ बगाग्या। 

*****5

तेरी कला के मोल का गुंडागर्दी के ढोल का आज तोड़ खुलासा होग्या रै।।

1

तेरी मौत की खबर सुनी मेरै बाकी रही कोण्या जनतंत्र का चेहरा साहमी मनै दिखाई देरया आज मोटा रास्सा होग्या रै।।

2

तेरी मौत हुए पाछे बेरा लाग्या कद और काठी का,पीठ तनै कति दिखाई कोण्या सीने मैं घा लाठी का 
मौत तैं बढ़कै असूल रहे सबके होठां पै झूल रहे उनका उलटा पाशा होग्या रै।

3

मेरी नजरां के म्हां मोल बढ़ग्या तेरे ईमान का एक दिन विचार तेरा चेहरा बदळै हिंदुस्तान का बैरी दुखी खासा होग्या रै।

4

ब्रेख्त के लवै पहुंच गया दुनिया रुक्के मारै 
बैरी संग महलां के म्हां रणबीर आज बिचारै 
नुक्कड़ तेरा प्यासा होग्या रै । 

********6

इबारत पढ़ली माला नै चेहरे के ऊपर लिखी हुई। 
तसवीर बैरी की देखी आंख्यां कै म्हां खींची हुई। 

1

पूरा साथ निभावण की कसम वो अपनी तोड़ चल्या 
माला पूरा करिए वो काम जो मैं अधूरा छोड़ चल्या 
कैहगी मुंह मैं मोड़ चल्या बिपता के म्हं फंसी हुई। 

2

हाशमी की आंख्यां मैं पूरा भरत देश दिया दिखाई
पंजाब का भंगड़ा लँगड़ा क्यों भाई का दुश्मन भाई
कितै लुटै भरतो भरपाई मुट्ठी हाशमी की भिंची हुई।
3
माला की हद छाती सै जो इतना सदमा ओट गई
आंसू पीगी वा हटकै जीगी छिपा अपनी चोट गई

साहिबाबाद उल्टी लौट गई हलचल उड़ै मची हुई।
4
बिना सफदर माला नै नाटक वोहे फेर खेल दिया था
उड़ै आतंक गुंडागर्दी का रणबीर कर फेल दिया था
इतना बता गेल दिया था याद दिल के म्हां बसी हुई।

7

सारे भारत मैं जाग हुई थारी मौत बनगी चिंगारी।। 
कला सड़कों पै आ उतरी करी लड़ने की तैयारी।।
1
भारत पाकिस्तान साथ मैं घणे देश तैयार हुए
कवि सम्मेलन साथ मैं नाटक कई हजार हुए
दुखी राजदरबार हुए माला हाशमी अलख जगारी।।
2
मोटे राम खेल्या नाटक दिल्ली मैं मशहूर हुया
थारी कला का प्रेमी यो दिल्ली का मजदूर हुया
क्यों हत्यारा मगरूर हुया ना कोये बात बिचारी।।
3
नाटक टीवी लिखना पढ़ना सब क्याहें मैं आगै था
नुक्कड़ नाटक इसा दिखावै जो देखै वोहे जागै था
दुश्मन नैं डर लागै था क्यों थारी कलम पुकारी।।
4
म्हारा काफिला बढ़ता जागा दुश्मन हत्यारे दंग होंगे
पैदा होवैं हज़ारों सफदर आड़े आर पार के जंग होंगे
रणबीर सिंह न्यारे ढंग होंगे या दिल्ली आज बतारी।।
8*****
दो जनवरी सफदर हाशमी याद तनै संसार करै।।
आंसू गेरै शबाना आजमी नाटक माला त्यार करै।।
1
थारी कुर्बानी रंग ल्याई नुक्कड़ मंडली त्यार हुई
कला जो थांमनै सिखाई थी दुश्मन से दो चार हुई
माला हाशमी पतवार हुई या समुंद्र गैहरा पार करै।।
2
सहमत नै मंगोल पुरी मैं जनोत्सव साछी मनाया रै
जो सपना देख्या  सफदर नै साकार वही बनाया रै
आम आदमी सिखाया रै नुक्कड़ सही हथियार जरै।।
3
फिरकापरस्ती नै देश पै अपना घेरा डाल दिया देखो
माणस का बैरी माणस धर्म का फेरा घाल दिया देखो
गाना बना फिलहाल दिया देखो कलम या होशियार करै।।
4
हिन्दू मुस्लिम लड़ा दिए अपना मतलब काढण नै
सफदर नै खेल दिखाया फिरते सिर नै चांडण नै
रणबीर सिंह नै डांटण नै दुखी म्हारी सरकार फिरै।।

******9

वार्ता:

14.12.90 को सफदर हाशमी को याद करते हुए एक रागनी लिखी---

समाज की खातर कुर्बान हुए वे आज तलक तो मरे नहीं ।।
कुर्बान देश पर होने वाले कदे कभी किसी से डरे नहीं ।।

1
सफ़दर की हांसी हवा मैं आज भी न्योंये गूँज रही
चारों धाम था मच्या तहलका हो दुनिया मैं बूझ रही 
बैरी को नहीं सूझ रही पिछले गढ़े इब्बऐ भरे नहीं ।।
2
मीडिया मैं जगहां बनाई विडीयो बढ़िया त्यार करी थी
खिलती कलियाँ के महां बात सही हर बार करी थी 
जवानी उसकी हुनकर भरी थी गलत काम कदे करे नहीं ।।
3
जितने जीया सफ़दर साथी जीया जमा जी भर कै नै 
था लेखक बढ़िया अदाकार नुकड़ रच्या कोशिश कर कै नै 
निभाया वायदा मर कै नै जुल्मों से सफ़दर डरे नहीं ।।
4
एक सफ़दर नै राह दिखाई हजारों सफ़दर आगे आवैंगे 
माला हाश्मी बनी सै चिंगारी घर घर मैं अलख जगावैंगे 
हम फिरकापरस्ती तैं टकरावैंगे रणबीर के कलम जरे नहीं ।।

*****10

साथी सफदर हाशमी अब जनवादी आंदोलन का एक जबरदस्त प्रतीक बन गया है।
सलाम सफ़दर को सलाम । उनके बारे एक रागनी के माध्यम से कुछ कहने का प्रयास---

सफदर हाशमी गूँजै आज भी कानां मैं पैगाम थारा।।।
पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।
1
बाजार व्यवस्था माणस खाणी खत्म करी चाही थी
नाटक खेल्या साहिबाबाद मैं ज्यान की बाजी लाई थी
चश्मयां आला हंसता चेहरा मन मैं घूमै तमाम थारा।।
पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।
2
मफलर घाल गले मैं नुकड़ नाटक खेल्या थामनै था
कांग्रेस के गुंडयां का वार छाती पै झेल्या थामनै था 
मारकै बी कड़ै मार सके वे अमर होग्या नाम थारा।।
पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।
3
सारी बात लिखदयूं थारी नहीं ताकत कलम मेरी मैं
हम हरियाणे के कलाकार करां रोशनी रात अंधेरी मैं
मनुवाद हटकै करया चाहवै हिंदुस्तान गुलाम म्हारा।।
पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।
4
दिल की एक एक धड़कन मैं पूरा अहसास थारा यो
थारा मजमून याद पूरा दिल नहीं सै कति खारा यो
रणबीर सिंह इंकलाबी थामनै सफदर सलाम म्हारा।।
पूरा करण लागरे आज अधूरा रहया जो काम थारा।।

Sunday, 28 December 2025

नया साल

1****
नया साल मुबारक एक रागनी के माध्यम से 
फासीवाद का शिकंजा सत्ता नए साल मैं बढावैगी।।
इसके विरोध मैं या जनता सडकां के ऊपर आवैगी।।
1
यो बेरोजगारी का मुद्दा इसका कितै बी जिकर कोन्या
फांसी खा खाकै किसान मरैं इसका कोय फिकर कोन्या 
आठ जनवरी नै देश मैं किसानी गांव बंध करावैगी।।
2
शिक्षा म्हंगी इलाज महंगा गरीब जमा निचौड़ दिया
असंगठित मजदूर मारया सारा कानून मरौड़ दिया
मजदूर कर्मचारी यूनियन दिल्ली मैं विरोध जतावैगी।।
3
पुलवामा कदे सीएए ल्यावैं जात धर्म पै बांट रहे
आर्थिक संकट के हल तैं शाह मोदी जी नाट रहे
नये साल मैं बैर आपस का सत्ता और घणा बधावैगी।।
4
जात धर्म पै लडां नहीं हम असली मांग उठावांगे
हो एकजुट नए साल मैं हम धर्मान्धता नै हरावांगे
देश की जनता मिलकै रणबीर बहुविविधता बचावैगी।।
2*****
साल 26
नया साल चौखे ब्योन्त आल्यां का
नए  साल मैं चौखे ब्यौंत आला खूबै काच्चे काटैगा भाई रै ॥ 
ऑन लाइन पर काम करावैगा बढ़िया स्कीम चलाई रै ॥ 
1
मॉल घने गजब के सब कुछ मिलै एक छत नीचै 
बाहर खड़या गरीब तो अपने खाली पेट नै भींचै 
ब्यौंत आला घरां बैठ करै बुकिंग जहाज हवाई रै ॥ 
2
अपोलो बरगे फाइव स्टार अस्पताल गजब खोले 
इलाज घना मंहगा करया सुनकै म्हारा हिया डोले 
गरीब मरो सड़कै नै कहवण की ये मुफ्त दवाई रै ॥ 
3
एयर कंडीशन्ड जीवन का न्यारा यो संसार बनाया 
स्कूल घर कार अस्पताल सारै इसका जाल बिछाया 
नये साल की आज रात नै जावैगी धूम मचाई रै ॥ 
मुबारक क्यांकि अर किसनै थोड़ा सै गम्भीर सवाल 
इंकलाब जिंदाबाद ला नारा किया सै गजब कमाल 
जनता नै बेचैनी अपनी पूरी दुनिया ताहिं बताई रै ॥ 
सब रंगां का समावेश भारत देश हमारा देश होवै 
जात पात और मजहब का आड़ै ना यो क्लेश होवै 
रणबीर सोच समझ कै करता अपनी  कविताई रै ॥
3******
नया साल 2026
हम नए साल में कदम मंजिल की तरफ बढ़ाएंगे ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥ 
1
गुणवत्ता वाली पढ़ाई वास्ते  जनता लाम बन्द करेंगे 
सबको सस्ता इलाज मिले ऐसा मिलके प्रबंध करेंगे
निर्माण के उदाहरण हम करके सबको दिखाएंगे ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥ 
2
अन्ध विश्वास के खिलाफ लंबा चलाएं एक अभियान 
सबका मिलके होगा प्रयास बने संवेदनशील इंसान 
प्रति गामी विचार को  वैज्ञानिक आधार से  हराएंगे ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥ 
3
मिल करके करेंगे विरोध  सभी दलित अत्याचार का 
महिला समता समाज में हो मुद्दा बनायेंगे प्रचार का 
रोजगार मिले सबको ये हम सब अभियान चलाएंगे ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥ 
4
सद्भावना बढे समाज में नफरत का विरोध करेंगे 
पूरे समाज का विकास हो इस पे पूरा शोध करेंगे 
नया साल मुबारक हो रणबीर आगे बढ़ते ही जायेंगे ॥
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएंगे ॥
4*****
 2026 का साल 
आज नया साल शुरू होग्या इसमैं नया हिंदुस्तान के चाहवै सै।।
किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
1
आंदोलन कारी किसानों को म्हारा सै क्रांतिकारी सलाम भाई  
जो किसान म्हारे शहीद होगे इतिहास मैं होग्या नाम भाई 
आज किसानी संघर्ष हटकै अपनी मांग जोर लगा उठावै सै।।
 किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
2
देश मैं इंसानियत हटकै उभरै हम इस साल मैं हाँगा लावांगे
म्हारा प्रजातंत्र फेर हुँकार भरै मिलकै संविधान नै बचावांगे
इस लड़ाई का राह हमनै यो किसानी संघर्ष सही दिखावै सै।।
किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
3
कदर जनता की आवाज की हटकै आवै म्हारे हिंदुस्तान मैं 
इज्जत होवै गरीब कमेंरे की होज्या शांति पूरे ही जहान मैं
हो गजब का भारत म्हारा जनता इंकलाब का नारा लावै सै।।
किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
इस साल मैं ईसा माहौल बनै इंसान नै पूरा सम्मान मिलै
कहै रणबीर नहीं लुटैं कमेरे उन सबका हट कै चेहरा खिलै 
संयुक्त किसान मोर्चे की जीत नए समाज की राह बतावै सै। 
किसानी संघर्ष फेर उठ लिया देखो जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
5******
 *2026 का नया साल* 
*आज नया साल शुरू होग्या हर हिंदुस्तानी इसमैं के चाहवै रै ।।*
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।*
1
आंदोलन कारी किसानों को म्हारा सै क्रांतिकारी सलाम भाई  
जो किसान म्हारे शहीद होगे इतिहास मैं होग्या नाम भाई 
*बाइस मैं भी संघर्ष जीत्या था सरकार  वायदे नहीं पुगावै रै।।*
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।*
2
देश मैं इंसानियत हटकै उभरै हम इस साल मैं हाँगा लावांगे
म्हारा प्रजातंत्र फेर हुँकार भरै मिलकै संविधान नै बचावांगे
*इस लड़ाई का राह हमनै यो किसानी संघर्ष सही दिखावै रै।।*
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।*
3
कदर जनता की आवाज की हटकै आवै म्हारे हिंदुस्तान मैं 
इज्जत होवै गरीब कमेंरे की होज्या शांति पूरे ही जहान मैं
*हो गजब का हिंदुस्तान म्हारा जनता ये नारे आज गूंजावै रै।।*
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।*
इस साल मैं ईसा माहौल बनै इंसान नै पूरा सम्मान मिलै
कहै रणबीर नहीं लुटैं कमेरे उन सबका हट कै चेहरा खिलै 
*इसकी खातर करां संघर्ष शहीद भगत सिंह  राह दिखावै रै।* 
*बेरोजगारी कति खत्म होज्या स्वास्थ्य शिक्षा सबनै मिल ज्यावै रै।।* 


6*****
2026 का साल 
आज नया साल शुरू होग्या इसमैं नया हिंदुस्तान के चाहवै सै।।
किसानी संघर्ष टीकरी बॉर्डर का इसका जिकरा सुणण मैं आवै सै।।
1
आंदोलन कारी किसानों को म्हारा सै क्रांतिकारी सलाम भाई  
जो किसान म्हारे शहीद होगे इतिहास मैं होग्या नाम भाई 
आज देश किसानी संघर्ष का उभार फेर यो दिखावै सै।।
 
2
देश मैं इंसानियत हटकै उभरै हम इस साल मैं हाँगा लावांगे
म्हारा प्रजातंत्र फेर हुँकार भरै 
मिलकै संविधान बचावांगे
इस लड़ाई का राह हमनै यो किसान मजदूर संघर्ष दिखावै सै।।

3
कदर जनता की आवाज की हटकै आवै म्हारे हिंदुस्तान मैं 
इज्जत होवै गरीब कमेंरे की होज्या शांति पूरे ही जहान मैं
हो गजब का भारत म्हारा जनता इंकलाब का नारा लावै सै।।
इस साल मैं ईसा माहौल बनै इंसान नै पूरा सम्मान मिलै
कहै रणबीर नहीं लुटैं कमेरे उन सबका हट कै चेहरा खिलै 
इंकलाब जिंदाबाद का नारा नए समाज की राह बतावै सै।।
7******
 नए साल का सपना 
नया साल 2026
पूरा साल चल्या गया यो दो हजार पच्चीस साहूकारां का।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का।।
1
सर्व समावेशी शिक्षा हो स्कूल होवैं एक समान 
हरेक जात का सम्मान हो भाईचारा हो बलवान 
मरीज डॉक्टर का मेल हो इलाज पावै हर इंसान 
फसल कीमत मिल पावै फलें फुलें म्हारे किसान 
पर्दाफाश होज्या धर्म के आज के इन ठेकेदारां का।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का
2
मिलावट म्हारे समाज मैं नहीं टोही पावै चाहवां
नफरत का जहर समाज नै आज ना खावै चाहवां
बेरोजगारी कम होवै इसा माहौल आवै चाहवां 
कोये मानस प्रदेश में ना भूखा सो ज्यावै चाहवां 
होवै महिला महफूज ना जिकरा बचै बलात्कारां का।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का
3
म्हारा यो सबका हरियाणा गूँज उठै यो नारा भाई
छुआछूत खत्म हो सुधरै यो वातावरण म्हारा भाई
सरकार करै ख्याल बणै गरीबां का साहरा भाई
पोर्न फिल्म पै रोक लागै नशे तैं मिलै छुटकारा भाई
या जनता राह बाँधेगी देश भर मैं इन बदकारां का ।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का।।
4
युवा नै रोजगार मिलै कति ना फिरै आवारा भाई
सुख का सांस लेवै सरतो सुखी हो करतारा भाई
विकास चालै सही राही सही होवै बंटवारा भाई
संविधान के अनुसार चलै हिंदुस्तान यो म्हारा भाई
रणबीर सिंह छब्बीस साल हो मेहनत के अदाकाराँ का ।।
दो हजार छब्बीस मैं हो आच्छा  हाल  मेहनत कारां का।।

पीसे का जुगाड

धौला गाम सोहने का स्मार्ट गाम  बनावैंगे देखो।।
मीडिया मैं करा प्रचार वाह वाही पावैंगे देखो।।
1
पांच गाम छांटे कहते इननै स्मार्ट बनावैंगे रै
बाकी साढे़ सात हजार बाट मैं जीवन बितावैंगे रै
पांच का भी ना बेरा कितने स्मार्ट हो ज्यावैंगे देखो।।
2
दिल्ली मैं राष्ट्रपति नै उद्घाटन का बटन दबाया
गाम आल्यां नै बजा ताली उनका सम्मान जताया
दुनिया मैं खबर गई गाम नै चांद पै पहुँचावैंगे देखो।।
3
स्मार्ट सिटी स्मार्ट गाम बुलेटिन का नारा देखो
काला धन बैंक खात्यां मैं पंद्रा लाख आरया देखो
साथ सबका विकास सबका ये शगूफे सुनावैंगे देखो।।
4
गरीब की पढ़ाई सेहत सब पढ़न बिठाई भाई
अंबानी धोरै पहोंचा दी टैक्स लगा म्हारी कमाई भाई
सबक पांच नै ये पिचानवै जरूर 
सिखावैंगे देखो।।

महिलाओं बारे रागनी

महिलाओं बारे रागनियां 
1)
 जागी महिला अब हरियाणे की 
जुल्मो सितम नहीं सहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
1
खेतों में खलिहानों में दिन रात कमाई करती हैं
फिर भी दोयम दरजा हम बिना दवाई मरती हैं
बैठी बैठी नहीं सहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
2
देवी का दरजा देकर इस देवी को किसने लूटा
सदियों से हम गई दबाई समता का दावा झूठा
दहेज़ की बलि नहीं चढ़ेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
3
इंसान बन गए हैवान आज होते हैं अत्याचार 
यहाँ देखो नैया डूब रही अब हम थामेंगी पतवार
अबला बनकर नहीं मरेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
4
आगे बढे ये कदम हमारे पीछे ना हटने पायेंगे
जो मन धार लिया हमने अब करके वही दिखाएंगे
रणबीर सारी बात लहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।

2)

 जागी महिला हरियाणे की
करकै कमाल दिखाया सै, मिलकै नै कदम उठाया सै, खेतां मैं खूब कमाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
1. 
देश की आजादी खातर अपणी ज्यान खपाई बेबे
गामड़ी सांघी खिडवाली मैं न्यारी रीत चलाई बेबे
लिबासपुर रोहणात मैं बहादरी थी दिखलाई बेबे
अंग्रेजां तै जीन्द की रानी गजब करी लड़ाई बेबे
अंग्रेजां का भूत बनाया, यो सब कुछ दापै लाया,
देश आजाद कराणा चाहया जागी महिला हरियाणे की।।
2. 
देश आजाद होये पाछै हरित क्रांति ल्याई बेबे
खेत क्यार कमावण तै कदे नहीं घबराई बेबे
डांगर ढोर संभाले हमनै दिन रात कमाई बेबे 
घर परिवार आगै बढ़ाये स्कूलां करी पढ़ाई बेबे
हरियाणा आगै बढ़ाया सै ,सात आसमान चढ़ाया सै,
गुण्डयां का जुलूस कढ़ाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
3. 
हमनै गाम बराहणे मैं दारू बन्दी पै गोली खाई सै
खेलां के मैदानां मैं जगमति सांगवान खूबै छाई सै
सुशीला राठी बड्डी डॉक्टर हरियाणे की श्यान बढ़ाई सै
नकल रोकती बाहण सुशीला जमा नहीं घबराई सै
चावला नै नाम कमाया सै, महिला का मान बढ़ाया सै
यो रस्ता सही दिखाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
4. 
संतोष यादव बाहण म्हारी करकै कमाल दिखाया हे
सुमन मंजरी डीएसपी पुलिस मैं नाम कमाया हे
सांगवान मैडम नै बिमल जैन तै सबक सिखाया हे
नवराज जयवन्ती श्योकन्द जीवन सफल बनाया हे
ज्योति अरोड़ा सरोज सिवाच प्रशासन खूब चलाया हे
ये आगै बढ़ती जारी बेबे, करकै कमाल दिखारी बेबे
रणबीर मान बढ़ारी बेबे, जागी महिला हरियाणे की।।

3)

सावित्री बाई फुले के पुण्य दिवस के मौके पर

एक रागनी----
सावित्री बाई फुले आपको शत शत है प्रणाम म्हारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
1
तीन जनवरी ठारां सौ कतीस जन्मी दलित परिवार मैं
नौ साल की की शादी होगी ज्योतिराव फुले के घरबार मैं
उन बख्तों मैं समाज सुधार का था मुश्किल काम थारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
2
महिला शिक्षा की खातिर सबतैं पहला स्कूल खोल दिया
रूढ़िवादी विचारकों नै  डटकै हमला थारे पै बोल दिया
ना पाछै कदम हटाये महिला स्कूल खोले तमाम ठारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।

3
बाल विवाह के खिलाफ विधवा विवाह ताहिं छेड़ी जंग
सती प्रथा छुआछूत के किले विचार फैला करे थे तंग
ब्राह्मण विधवा गर्भवती का ज़िम्मै लिया इंतज़ाम सारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
4
ब्राह्मण ग्रंथ मत पढ़ो जात पात से बाहर आ जाओ
मेहनत से जाति बन्धन तोड़ो शिक्षा पूरी तम पा जाओ
लिखै रणबीर बरोने आला महिला शिक्षा का पैगाम थारा।।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।

4)

भटेरी गांव की भंवरी बाई, संघर्ष की जिनै राह दिखाई,सारे देश मैं छिड़ी सै लड़ाई, साथ मैं चालो सारी बहना।।
1
साथिन भंवरी नहीं अकेली हम कसम आज उठाते सारे
बाल विवाह की बची बुराई इसके खिलाफ जंग चलाते सारे
जालिमों की क्यों ज्यान बचाई, कचहरी क्यों मदद पै आई, सब छिपा रहे हैं सच्चाई,भंवरी साथिन पुकारी बहना।।
2
देकर झूठी दलीलें देखो बलात्कारियों को बचाते क्यों
परम्परा का ढोंग रचाकर असल सच्चाई को दबाते क्यों
भंवरी ने सही आवाज उठाई,जुल्मी चाहते उसे दबाई,समझ गई भरतो भरपाई, भंवरी नहीं बिचारी बहना।।
3
इस तरह से नहीं झुकेंगी जुल्मो सितम से टकरायेंगी
परम्परा की गली सड़ी जंजीरें आज हम तोड़ बगायेंगी
भटेरी ने नई लहर चलाई, समता की है पुकार लगाई, जयपुर में हूंकार उठाई, यह जंग रहेगी जारी बहना।।
4
फासीवाद का खूनी चेहरा इससे हरगिज ना घबरायेंगी
आगे बढ़े हैं कदम हमारे हम नया इतिहास बनायेंगी
रणबीर सिंह ने कलम चलाई, अपने डिक्ल की बात बताई,सच की हुई जीत दिखाई, ना सेखी है बघारी बहना।।

5)

 आज हम देखें औरत की जो सही तस्वीर सखी।। 
दिया समाज ने जो हमें उसको कहती तकदीर सखी।। 
घर में खटना पड़ता मर्दों की नजर में मोल नहीं औरत भी समझे इसे किस्मत लगा सकी तोल नहीं 
करती हम मखौल नहीं हमारी हालत है गंभीर सखी।।
घर खेत में काम करें जुताई और बुवाई करती बहना 
चारा पानी झोटा बुग्गी दिन और रात मरती बहना 
बैठी आहें भरती बहना समझें किस्मत की लकीर सखी।।
कैसा सलूक करते हमसे मालिक बंधवा का व्यवहार यहां 
खाना दोयम कपड़ा दोयम मिले सारा दोयम संसार यहां 
करोड़ों महिला बीमार यहां इलाज की नहीं तदबीर सखी।।
अहम फैंसले बिना हमारे मरद बैठ कर क्यों करते देखो 
जुल्म ढाते भारी हम पर नहीं किसी से डरते देखो 
हम नहीं विचार करते देखो तोडे़ं कैसे यह जंजीर सखी ।।
खुद चुपचाप सहती जाती मानें कुदरत का खेल इसको 
सदियों से सहती आई समझें राम का मेल इसको 
क्यों रही हो झेल ईसको मसला बहोत गम्भीर सखी।।
सदियों से होता ही आया पर किया मुकाबला है हमने 
सिर धड़की बाजी लगा नया रास्ता अब चुना है हमने 
जो सपना बुना है हमने होगा पूरा लिखे रणबीर सखी।।

6)

 दिन काटे चाहूं
दिन काटे चाहूं मैं ये कोण्या सुख तैं कटण देवैं।।
चुपचाप जीणा चाहूं मैं फेर कोण्या टिकण देवैं।।
1
झाड़ झाड़ बैरी होगे आज हम बरगी बीरां के
मोह माया तैं दूर पड़े फेर दिल डिगें फकीरां के
नामी बदमाश पाल राखे बाबा ना पिटण देवैं।।
अच्छाई के बोये बीज ये जमा नहीं पकण देवैं।।
2
कई बै जी करै फांसी खालयूं इनकै अकल लागै
सहेली बोली मेरी बात मान मत प्राणां नै त्यागै
किसे कै कसक ना जागै हमनै नहीं बसण देवैं।।
आगै बढ़े कदम म्हारे उल्टे हम नहीं हटण देवैं।।
3
बताओ पिया के करूं मैं इणपै तूँ गीत बनादे नै
द्रोपदी चीर हरण गाओ म्हारे चीर हरण पै गादे नै
बणा रागनी सुनादे नै हम तेज नहीं घटण देवैं।।
हरयाणे मैं शोर माचज्या दबा इसा यो बटन देवैं।।
4
गाम के गोरै खड़े पावैं भैंस के म्हां कै ताने मारैं
इंसानियत जमा भूलगे भों किसे की इज्जत तारैं
बिना बात ये खँगारैं हमनै और घणी घुटण देवैं।।
रणबीर सिंह बरगे म्हारी इज्जत ना लुटण देवैं।।

7)

या बढ़गी बेरोजगरी, यो करजा चढ़ग्या भारी, हुई दुखी जनता सारी, महान हुया हरियाणा।
1
म्हारे बालक मरैं बिना दवाई, महंगी होंती जावै पढ़ाई
नाबराबरी साँस चढ़ारी , कारपोरेट अत्याचारी, मीडिया इसका प्रचारी, महान हुया हरियाणा।
2
जात पात मैं बाँटी जनता, विरोध किया तो काटी जनता
किसान की श्यामत आरी, महिला की इज्जत जा तारी, बढ़ती जावै चोरी जारी
महान हुया हरियाणा।
3
झूठे जुमले रोजाना देते,खबर म्हारी कदे ना लेते, 
होंती जा तबियत खारी, जनता हिम्मत नहीं  हारी, शासक हुया भ्रष्टाचारी, 
महान होया हरियाणा। 
4
महिला वंचित सुणल्यो सारे, बिना संघर्ष के नहीं गुजारे
लड़े हैं जीत हुयी म्हारी, जीतैंगे भरतू  भरतारी , यो रणबीर म्हारा लिखारी, 
महान हुया हरियाणा ।

8)

एक आह्वान रागनी 
हम कदम मिलजुल के मंजिल की तरफ बढ़ाएं बहना ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएं बहना ॥ 
गुणवत्ता वाली पढ़ाई वास्ते  जनता लाम बन्द करेंगी 
सबको सस्ता इलाज मिले ऐसा मिलके प्रबंध करेंगी 
निर्माण के उदाहरण हम करके सबको दिखाएं बहना ॥ 
अन्ध विश्वास के खिलाफ लंबा चलाएं एक अभियान 
सबका मिलके होगा प्रयास बने संवेदनशील इंसान 
प्रति गामी विचार को  वैज्ञानिक आधार से  हराएं बहना ॥ 
मिल करके करेंगे विरोध  सभी दलित अत्याचार का 
महिला समता समाज में हो 
मुद्दा बनायेंगे प्रचार का 
रोजगार मिले सबको ये हम सब अभियान चलाएं बहना ॥ 
सद्भावना बढे समाज में नफरत का विरोध करें सभी
पूरे समाज का विकास हो इस पे पूरा शोध करें सभी 
बढ़े हुए कदम हमारे रणबीर आगे बढ़ते ही जायें बहना ॥

9)

जाल बिछा हमनै लूट रही कारपोरेट की मकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
1
म्हारी मेहनत के दम पै और अमीर होंते जावैं देखो
खून पसीना म्हारा बहता ये बैठ एसी मौज उडावैं देखो
के के दुख गिनावैं देखो कड़ म्हारी जमा अकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
2
म्हारी लूट का तोड़ खुलासा कार्ल मार्क्स करग्या बताया
मेहनत म्हारी करै पैदा पूंजी कैपिटल किताब मैं समझाया 
सारे जग मैं सच पाया भारी पूंजीवाद की तकड़ी बेबे ।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
3
दुनिया के घणे देश ये पूंजीवाद की पूजा करते देखो
अपनी कूबध लहकोवण नै घनी ए झूठ घड़ते देखो
अपनी करी मैं घिरते देखो विकास राह गलत पकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
4
भारत मैं भी आज कारपोरेट साम्प्रदायिकता तैं हाथ मिलारया
कमेरयां की एकता तोड़ण नै यो धर्मांधता खूब फैलारया 
लिख रणबीर भी समझारया तोड़ो नफरत की लकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।

10)

सीढ़ी घड़ादे चन्दन रूख की सासड़ तीज ये मेरी आई री।।
चन्दन रूख ना म्हारै क्यों ना पीहर तैं घड़ा कै ल्याई री।।
1
अपनी तैं दे दी झूल पाटड़ी म्हारे तैं  दिया यो पीसणा
फोडूँ री सासड़ चाक्की के पाट क्यों चाहवै मनै घिसणा
आज तो दिन त्योहार का सै चाहिए ऊंच नीच भुलाई री।।
2
मनै खन्दा दे री मेरे बाप कै बीर आया यो माँ जाया
बहु इबकै यहीं तीज मना री तेरा पिया छुट्टी आया
गगन गरजै बिज्जल पाटै या मरती फसल तिसाई री।।
3
लरज लरज कै जावै बहू या जाम्मन की डाहली देख
पड़कै नाड़ ना तुड़ा लिए तेरी मां देगी मनै गाली देख
नन्द भी हचकोले मारैगी कहवैगी पहलम ना बताई री।।
4
मन मैं गुद गुद सी माच रही झूलण जाऊं बाग मैं हे
चढ़ पींघ पै जोर लगा कै मैं पींघ बधाऊँ बाग मैं हे
तीज रल मिलकै मनावां सारे रणबीर की या कविताई री।।

11

 हरियाणा के समाज मैं औरत कै घली जंजीर, क्यों हमनै दीखती नहीं।।
1
पहलम दुभान्त हुया करती
दुखी सुखी हम जिया करती
पीया करती इलाज मैं यो परम्परा का नीर, चिता तैं उठती नहीं।।
2
पेट मैं ए मारण की तैयारी
घनखरी दुनिया हुई हत्यारी
गांधारी आज भी लिहाज मैं
पीटती जावै वाहे लकीर,नई राही दीखती नहीं।।
3
बचावनिया और मारनिया के 
घले पाले खेल करनिया के
घेरनिया के मिजाज मैं यो 
मामला सै गम्भीर, क्यों हमनै सूझती नहीं।
4
समाज करना  चाहवै सफाया
सैक्स सेलेक्शन औजार बनाया
बताया सही अंदाज मैं, झूठ नहीं सै रणबीर, कलम चूकती नहीं।।

12)

आयी तीज 
मॉनसून नै इबकै बहोतै बाट या दिखाई बेबे ।।
बरस्या नहीं खुलकै बूंदा बांदी सी आयी बेबे ।।
साम्मण के मिहने मैं सारे कै हरयाली छाज्या 
सोचै प्रदेश गया पति भाज कै घर नै आज्या 
ना गर्मी ना सर्दी रूत या घणी ए सुहाई बेबे ।।
कोये हरया लाल कोये जम्फर पीला पहर रही 
बाँट गुलगुले सुहाली फैला खुशी की लहर रही 
कोये भीजै बूंदां मैं कोये सुधां लत्यां नहाई बेबे।।
 आयी तीज बोगी बीज आगली फसल बोई या 
झूला झूल कै पूड़े खाकै थाह मन की टोही या 
पुरानी तीज तो इसी थी आज जमा भुलाई बेबे ।। 
बाजार की संस्कृति नै म्हारी तीज जमा भुलाई 
इस मौके पर जाया करती प्रेम की पींघ बढ़ायी 
कहै रणबीर सिंह कैसे करूँ आज की कविताई बेबे।।

पौष्टिक आहार का गहराता संकट

पौष्टिक आहार का गहराता संकट

भारत में भोजन और पोषण का संकट दो ध्रुवों में बंटा दिखता है। ग्रामीण भारत में अब भी कुपोषण, रक्ताल्पता, कम वजन जैसे मामलों का उच्च स्तर पाया जाता है। यहां बच्चों और महिलाओं की पोषण स्थिति विशेष चिंता का विषय है। दूसरी ओर, शहरी क्षेत्र में भोजन की उपलब्धता तो है, पर उसकी गुणवत्ता की समस्या है।

दुनिया आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां आर्थिक तरक्की और तकनीक की चमक के बीच भोजन जैसी बुनियादी जरू जरूरत इंसान की पहुंच से दूर होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रपट बताती है कि दुनिया की बयालीस फीसद आबादी पौष्टिक भोजन पर खर्च नहीं कर पाती। यह केवल गरीबी का आंकड़ा नहीं, बल्कि वैश्विक नीतियों, बाजार व्यवस्थाओं और आर्थिक असमानताओं का ऐसा आईना है, जिसमें हमारी सामूहिक विफलता दिखती है। जब भोजन जैसे मानव अधिकार को भी बाजार के हवाले कर दिया जाए, तो समाज कमजोर होता है, चाहे वह कितना ही विकसित क्यों न दिखे। भारत का विकास ढांचा मजबूत दिख सकता है, पर उसकी बुनियाद में पोषण का अभाव साफ महसूस होता है।

वैश्विक स्तर पर देखें तो अफ्रीका, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देश पौष्टिक भोजन के संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सहारा के दक्षिण वाले अफ्रीकी क्षेत्र में तो हालात इतने खराब हैं कि 60 से 80 फीसद आबादी पौष्टिक भोजन का खर्च ही नहीं उठा सकती। वहीं यूरोप, आस्ट्रेलिया और उत्तर अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भोजन की पहुंच बेहतर है, पर वहां असंतुलित आहार, प्रसंस्कृत खाद्य और मोटापे जैसी समस्याएं स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। भारत में भोजन और पोषण का संकट दो ध्रुवों में बंटा दिखता है। ग्रामीण भारत में अब भी कुपोषण, रक्ताल्पता, कम वजन जैसे मामलों का उच्च स्तर पाया जाता है। बच्चों और महिलाओं की पोषण स्थिति विशेष चिंता का विषय है। दूसरी ओर, शहरी भारत में खाने की उपलब्धता तो है, पर उसकी गुणवत्ता की समस्या है। समय की कमी, काम का तनाव, और तेज बाजार-चालित संस्कृति ने डिब्बाबंद खाद्य, जंक फूड और मीठे पेयों को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बना दिया है। एक तरफ कुपोषण और दूसरी ओर अतिपोषण, दोनों मिलकर स्वास्थ्य संकट को और जटिल बनाते हैं।
खाद्य महंगाई ने भारतीय रसोई को जिस तरह प्रभावित किया है, वह चिंता का विषय है। दालें, खाद्य तेल, फल, सब्जियां और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने संतुलित भोजन की लागत बहुत बढ़ा दी है। एक औसत भारतीय परिवार की मासिक आमदनी का बड़ा हिस्सा केवल कैलोरी-आधारित भोजन पूरा करने में ही खर्च हो जाता है, जबकि पौष्टिक भोजन की थाली उनकी पहुंच से दूर चली जाती है। यह स्थिति बताती है कि भोजन केवल बाजार व्यवस्था का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे एक सामाजिक सुरक्षा अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत की कृषि अब भी मानसून पर अत्यधिक निर्भर है। मगर असामान्य बारिश, सूखा, बाढ़ और तापमान में बदलाव ने फसल उत्पादकता को प्रभावित किया है, जिससे बाजार में दाम बढ़ते हैं। समस्या नीतिगत प्राथमिकताओं की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली अभी भी मुख्य रूप से अनाज-आधारित है, गेहूं और चावल पर केंद्रित है। जबकि शरीर को विविध पोषक तत्त्वों की भी आवश्यकता होती है।

भारत में फल, सब्जियां, दालें, अंडे और डेयरी जैसे घटक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली या सरकारी पोषण कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। इसी वजह से मध्याह्न भोजन की तरह अन्य योजनाएं भोजन तो देती हैं, पर पूर्ण पोषण सुनिश्चित नहीं कर पातीं। दुनिया के कई देशों ने भोजन को राष्ट्रीय विकास की धुरी बनाकर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ब्राजील का 'शून्य भुखमरी' अभियान इसका उदाहरण है, जिसने स्थानीय कृषि, सबसिडी और पोषण कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया। जापान ने 'शोकू इकु' नीति के तहत बच्चों को भोजन विज्ञान की शिक्षा दी। एक ऐसा ढांचा, जो स्पष्ट करता है कि भोजन केवल खाने की वस्तु नहीं, बल्कि संस्कृति, समझ और स्वास्थ्य का आधार है। दक्षिण कोरिया ने प्रसंस्कृत खाद्य पर सख्त नियंत्रण लागू किए, जिससे जीवनशैली संबंधी बीमारियों में गिरावट आई। भारत इनसे सीख लेकर अपने कार्यक्रमों को अधिक वैज्ञानिक और आधुनिक बना सकता है। दरअसल, ओषण की कमी का असर व्यक्तिगत स्तर से कहीं अधिक व्यापक है। यह कार्यक्षमता, शिक्षा और उत्पादकता को प्रभावित करता है। कमजोर और कुपोषित बच्चे स्कूल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। कुपोषित युवा समाज में सक्रिय योगदान दिने में पीछे रह जाते हैं।

यह समझना आवश्यक है कि भोजन कोई साधारण आर्थिक वस्तु नहीं है। यह सामाजिक न्याय, समानता और मानव अधिकार का मूल तत्त्व है। जब एक बड़ी आबादी पौष्टिक भोजन वहन नहीं कर पाती, तो समाज के लिए यह अनदेखा करने योग्य आंकड़ा नहीं रह जाता। यह श्वह बिंदु है, जहां नीतियों, बाजार, कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य-चारों को मिलकर समाधान तैयार करना होगा। भारत के पोषण संकट को समझने के लिए एक स्वस्थ थाली में वास्तव में क्या होना चाहिए, यह समझने की जरूरत है। बच्चों की थाली में प्रोटीन (दाल, अंडा, दूध), कैल्शियम, आयरन, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा अनिवार्य हैं। ये तत्त्व न केवल हड्डियों और दिमाग के विकास के लिए जरूरी हैं, बल्कि रक्ताल्पता, संक्रमणों की अधिकता, थकान, आंखों की कमजोरी और सीखने की क्षमता में कमी जैसी समस्याओं से भी बचाते हैं। यह अफसोसनाक है कि भारत के लाखों बच्चों की थाली आज भी इन आवश्यक तत्त्वों से खाली है और इसका असर उनके पूरे जीवन पर पड़ता है।

महिलाओं और वृद्धों के पोषण की जरूरतें इससे भी अधिक विशिष्ट हैं। महिलाओं को विशेष रूप से आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन की अधिक मात्रा चाहिए। वहीं वृद्धजन के लिए ओमेगा-3, फाइबर, विटामिन बी, कैल्शियम और मैग्नीशियम अत्यंत आवश्यक हैं, जो उन्हें हृदय रोग, मधुमेह, हड्डियों के क्षरण और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाते हैं। लेकिन पारिवारिक और सामाजिक संरचना के कारण अक्सर इन्हीं समूहों की थाली सबसे पहले कमजोर होती है, जिससे बीमारी एक स्थायी साथी बन जाती है। सरकारी नीतियां और जमीनी ढांचा पोषण सुधार का दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं। देश में आंगनबाड़ी और स्कूल का भोजन कक्ष बच्चों के पोषण का बड़ा आधार माने जाते हैं, पर इनकी स्थिति असमान और अक्सर संसाधन-विहीन नजर आती है। आज भारत के सामने प्रश्न यह नहीं कि भोजन कितनी मात्रा में उपलब्ध है, बल्कि यह है कि क्या गुणवत्ता पूरक भोजन सही कीमत और सही समय पर हर नागरिक तक पहुंच पा रहा है?

भारतीय कृषि में कीटनाशकों और रसायनों का उपयोग जिस तेजी से बढ़ा है, वह पोषण संकट का एक और अदृश्य कारण बन रहा है। खेतों में सब्जियां और फलों पर अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव न केवल फसलों की गुणवत्ता को कम करता है, बल्कि लंबे समय में लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव छोड़ता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि इन रसायनों का अंश खाद्य पदार्थों में बचा रह जाता है, जिससे बच्चों में तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं महिलाओं में हार्मोन असंतुलन और वयस्कों में कैंसर और गुर्दा रोगों का खतरा बढ़ जाता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस क्षेत्र में न तो निगरानी सख्त है, न ही किसानों को सुरक्षित विकल्पों की पर्याप्त जानकारी मिल पाती है। जैविक खेती और कम-रसायन जैसे विकल्पों की चर्चा तो होती है, पर जमीनी स्तर पर उनकी पहुंच नगण्य है। अगर राष्ट्र एक मजबूत, सक्षम और स्वस्थ भविष्य चाहता है, तो भोजन को बाजार का उत्पाद नहीं, बल्कि सार्वभौमिक अधिकार घोषित करना होगा। तभी वास्तविक विकास की नींव मजबूत होगी।

स्त्रोत:- 
मनीष जैसल
जनसत्ता, न्यूज़ पेपर
11 दिसम्बर 2025

मुनेश त्यागी

दुनिया के क्रांतिकारियों के महान नायक समाजवादी डॉक्टर अर्नेस्टो चे ग्वैरा
*****************************************

           ,,,,,मुनेश त्यागी 

      अंतर्राष्ट्रीय क्रांतिकारी समाजवादी चे ग्वेरा ने कहा था कि पूरी दुनिया ही क्रांतिकारियों की कार्यशाला है। वे किसी देश, शहर या राज्य तक सीमित नहीं रह सकते। दुनिया में जहां कहीं भी शोषण, अन्याय, जुल्म और युद्ध हो रहे हैं, वे वहां जाकर उनके खात्में का संघर्ष छेड़ें। आज 9 अक्टूबर 1967 दुनिया के महान अंतर्राष्ट्रीयतावादी क्रांतिकारी कॉमरेड चे ग्वेरा का बलिदान दिवस है जो बोलीविया में क्रांति करते हुए वहां के जंगलों में सीआईए और बोलीविया की सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
      चे ग्वैरा एक अर्जेंटाइनी क्रांतिकारी डॉक्टर थे जिन्होंने पूरी दक्षिणी अमरीका का मोटरसाइकिल से दौरा किया था और क्रांति की तलाश करते करते मेक्सिको पहुंच गए थे और वहां उन्होंने गरीब बस्ती में जाकर कोढ़ी मरीजों का इलाज करना शुरू किया। वहीं पर उनकी मुलाकात क्यूबा के क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो से हुई और यहीं से चे ग्वैरा फिदेल कास्त्रो के दल के साथ, क्युबा में सशस्त्र क्रांति करने के लिए, उनके साथ आ गए और क्यूबा में तानाशाह बतिस्ता के शोषणकारी शासन का अंत करके, क्यूबा में सशस्त्र क्रांति की और किसानों मजदूरों का राज्य कायम किया। चे गुएवारा क्यूबा मिशन में एक डॉक्टर के रूप में भर्ती किए गए थे, मगर जब वहां लड़ाकू क्रांतिकारियों की कमी हुई तो उन्होंने दवाई का झोला छोड़कर, बंदूक हाथ में थाम ली और क्यूबा के फिदेल कास्त्रो और उनके साथियों के साथ मिलकर सशस्त्र क्रांति की, शस्त्र का विरोध शस्त्र से किया और किसान और मजदूरों का राज्य कायम किया और क्यूबा में समाजवादी समाज की स्थापना की।
      चे गुवेरा एक डॉक्टर थे। क्यूबा के लोगों ने उन्हें प्यार और सम्मान से "चे" की उपाधि से नवाजा। चे का अर्थ है,,, सम्मानीय, सर, महाशय। उसके बाद वे सारी दुनिया में "चे" के नाम से प्रसिद्ध हो गए और आज भी लोग उन्हें चे के नाम से ही जानते हैं। उनकी महानता इस बात से सिद्ध हुई थी कि वे दुनिया के सारे लड़ाकू क्रांतिकारियों को अपना भाई समझते थे और कहां करते थे कि दुनिया में जहां कहीं भी अन्याय और शोषण हो, वहां उनका मुकाबला और उनका खात्मा किया जाए।
     क्यूबा में चे ग्वैरा ने क्यूबन क्रांतिकारियों के साथ मिलकर सफल क्रांति की, किसानों मजदूरों का राज्य कायम किया, किसान मजदूरों की सत्ता और सरकार कायम की और वहां की सारी जनता को शिक्षा, काम, इलाज, मकान, रोजगार, सुरक्षा जैसी बुनियादी मोहिया करायी और तमाम तरह के शोषण, अन्याय, गैर बराबरी, भेदभाव का खात्मा किया और एक समाजवादी समाज का निर्माण किया ।
      अमर क्रांतिवीर चे ग्वैरा  का मानना था कि जिस आदमी के दिलो-दिमाग में अन्याय, शोषण, गुलामी, असमानता, भेदभाव और  जुल्मों सितम के खिलाफ गुस्सा नहीं आता, उनको देखकर वह परेशान नहीं होता, तो वह एक सच्चा क्रांतिकारी, एक सच्चा मार्क्सवादी लेनिनवादी नहीं हो सकता और जिसे इन्हें देख कर गुस्सा आता है, वह मेरा असली कॉमरेड है, असली क्रांतिकारी है।
     उनका कहना था कि क्रांति एक संगठित प्रयास है। यह मजदूरों और किसानों की एकता और एकजुट संघर्ष के बिना नहीं हो सकती। उनका कहना था कि "क्रांति एक ऐसा फल नहीं है जो खुद ब खुद जमीन पर आ गिरता हो, इस फल को जमीन पर गिराने के लिए मेहनत करनी पड़ती है।" उन्होंने आगे कहा कि "मैं कोई मुक्तिदाता नहीं हूं, मुक्तिदाता नहीं होते हैं, जनता स्वयं ही अपने को मुक्त करती है और जनता ही सबसे बड़ी मुक्तिदाता होती है।"
     जब बोलीविया के जंगलों में क्रांति के लिए लड़ते हुए चे गुएवारा को गिरफ्तार कर लिया गया तो साम्राज्यवादी एजेंटों द्वारा गोली मारे जाने से पहले कामरेड चे ग्वेरा ने कहा था कि "तुम मेरे शरीर को तो मार सकते हो लेकिन तुम मेरे विचारों को नहीं मार सकते।" आज यह बात शत प्रतिशत सही है कि कामरेड चे ग्वेरा हमारे बीच में नहीं है, उनके शरीर का अंत कर दिया गया है, मगर उनके विचार पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। पूरी दुनिया के लोग मजदूर, किसान, क्रांतिकारी नौजवान और छात्र उनको याद करते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलते हैं और क्रांति के अभियान में शामिल हैं और क्रांति की प्रक्रिया को, उसके मार्ग को, लगातार आगे बढ़ा रहे हैं और क्रांति की लौ को जलाये हुए हैं।
     क्यूबा की सरकार में, वे कई पदों पर मंत्री रहे। उन्होंने सारी दुनिया का दौरा किया, हिंदुस्तान का भी दौरा किया और उसके बाद कांगो में चले गए जहां उन्होंने क्रांतिकारी लड़ाई में भाग लिया और वहां के लड़ाकूओं को गुरिल्ला वारफेयर की जानकारी दी। इसके बाद एक सोची-समझी रणनीति के तहत चे ग्वैरा क्रांति करने के लिए बोलिविया में चले गए, जहां उन्होंने एक गुरिल्ला सेना का निर्माण किया और इतिहासकार कहते हैं अगर कुछ किसान गद्दारी ना करते और उनके कुछ अपने ही साथी, उनका विरोध ना करते तो उन्होंने वहां पर भी क्रांति सफल कर दी थी।
      मगर अफसोस, चे ग्वैरा बोलीविया में क्रांति के लिए लड़ते लड़ते शहीद हो गए और कुछ अपने ही साथियों की मुखबिरी के करण, वहां पर क्रांति सफल होते-होते रह गई। आज उन्हीं अमर शहीद महान क्रांतिकारी कामरेड अर्नेस्टो चे ग्वेरा का बलिदान दिवस है। यह बहुत खुशी की बात है कि चे ग्वैरा के चले जाने के बाद वहां की जनता ने क्रांति के अभियान को बंद नहीं किया। वहां के क्रांतिकारी नेतृत्व ने धीरे-धीरे अपनी गलतियों से सीखा, उन्हें सुधारा और उसके बाद बोलीविया में क्रांति कर दी। आज वहां किसानों मजदूरों की क्रांतिकारी सरकार जनता के कल्याण के कार्य कर रही है।
     दोस्तों, आइए हम उनकी याद में क्रांति के कारवां को, समाजवादी समाज व्यवस्था के अभियान को, विचारों को, आगे बढ़ाएं और उनके चाहे समाज की स्थापना करें और  भारत में एक ऐसा समाज कायम करें जिसमें सबको आधुनिक, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले, सबको आधुनिक और मुफ्त इलाज मिले, सबको काम मिले, सबको घर मिले, सबको रोटी, कपड़ा और सुरक्षा मिले, जहां पर किसी का शोषण ना हो, किसी के साथ अन्याय ना हो, किसी के साथ जुल्म ना हो, किसी के भी साथ ज्यादती ना हो और पूरे समाज में समता, समानता और भाईचारे का साम्राज्य कायम हो।
    चे ग्वेरा एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे कि जहां धर्म, जाति, भाषा, वर्ण, क्षेत्र और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव ना हो, आदमी और औरत के साथ बराबरी का बर्ताव किया जाए, जहां औरतों को भोग्या और मनोरंजन की वस्तु न समझा जाए, सेक्स की वस्तु ना समझी जाए और उसके साथ बराबरी का व्यवहार किया जाए और उन सबको पढ़ने, लिखने, रोजगार और अपना संपूर्ण विकास करने का मौका दिया जाए।
     महान क्रांतिकारी कामरेड चे ग्वैरा एक ऐसे ही अंतर्राष्ट्रीयतावादी क्रांतिकारी थे। उनका मानना था कि दुनिया में जहां कहीं भी जुल्म ज्यादती, अत्याचार, शोषण और अन्याय हो रहा हो, उसका वहां विरोध किया जाए और वहां के लोगों के साथ मिलकर, उस जनविरोधी व्यवस्था का खात्मा करके, उसके स्थान पर एक समाजवादी व्यवस्था वाली समाज की स्थापना करनी चाहिए। उनके विचारों की मुहिम को आगे बढ़ाया जाए। उनके लिए यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
      कॉमरेड चे ग्वेरा आज भी दुनिया के हीरो बने हुए हैं। सबसे ज्यादा नौजवान उन्हीं की छपी हुई कैंप और टी शर्ट पहनते हैं। वे समाजवाद के अमर सेनानी है, क्रांति के अमिट वाहक हैं। जब तक यह दुनिया रहेगी, जब तक यह प्रकृति रहेगी, तब तक दुनिया के महान क्रांतिकारी डॉ चे ग्वैरा का नाम अमर रहेगा।
इंकलाब जिंदाबाद,
समाजवाद जिंदाबाद, 
क्रांतिकारी चे ग्वैरा जिंदाबाद, 
क्रांतिकारी अंतर्राष्ट्रीयतावाद जिंदाबाद।
      दक्षिणी अमेरिका में अपनी मोटरसाइकिल पर घूमते हुए उन्होंने वहां की जनता के साथ, वहां के पूंजीवादी शासकों द्वारा किए जा रहे शोषण, अन्याय, जुल्म और गैर बराबरी के दर्शन किए थे और उनको अपनी आंखों से देखा था और उन्होंने कई देशों में वहां की सरकारों के साथ मिलकर, इस लुटेरे और अमानवीय पूंजीवादी निजाम का खात्मा करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि "दुनिया में सबसे बड़ी बीमारी "पूंजीवाद" है। जब तक यह पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था खत्म करके, इसके स्थान पर समाजवादी व्यवस्था कायम नहीं कर दी जाती, तब तक जनता को उसके बुनियादी अधिकार नहीं मिलेंगे।"
       आज के परिवेश में हम देख रहे हैं कि आज भी दुनिया के लुटेरे पूंजीवादी साम्राजवादी देश, पूरी दुनिया में तबाही मचाये हुए हैं, पूरी दुनिया को लूटकर, पूरी दुनिया का शोषण करके, जुल्म करके, युद्ध करके, उसके साथ अन्याय करके, अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और पूरी दुनिया पर अपना कब्जा और प्रभुत्व कायम करना चाहते हैं। नैटो और अमेरिका आज इसी अभियान में लगे हुए हैं और पूरी दुनिया से समाजवादी व्यवस्था और सोच को खत्म करने पर तुले हुए हैं। सच में चे ग्वेरा ने कितने मार्के की बात कही थी कि "पूंजीवादी साम्राज्यवाद ही सारी दुनिया की बीमारियों की जड़ है और समाजवादी समाज और संस्कृति ही सारी दुनिया की बीमारियों की असली और सबसे कारगर दवा है।" महान क्रांतिकारी चे ग्वेरा की वह बात आज भी उतनी ही सही साबित हो रही है।

Friday, 12 December 2025

harkishan singh surjeet

पौष्टिक आहार

पौष्टिक आहार का गहराता संकट

भारत में भोजन और पोषण का संकट दो ध्रुवों में बंटा दिखता है। ग्रामीण भारत में अब भी कुपोषण, रक्ताल्पता, कम वजन जैसे मामलों का उच्च स्तर पाया जाता है। यहां बच्चों और महिलाओं की पोषण स्थिति विशेष चिंता का विषय है। दूसरी ओर, शहरी क्षेत्र में भोजन की उपलब्धता तो है, पर उसकी गुणवत्ता की समस्या है।

दुनिया आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां आर्थिक तरक्की और तकनीक की चमक के बीच भोजन जैसी बुनियादी जरू जरूरत इंसान की पहुंच से दूर होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रपट बताती है कि दुनिया की बयालीस फीसद आबादी पौष्टिक भोजन पर खर्च नहीं कर पाती। यह केवल गरीबी का आंकड़ा नहीं, बल्कि वैश्विक नीतियों, बाजार व्यवस्थाओं और आर्थिक असमानताओं का ऐसा आईना है, जिसमें हमारी सामूहिक विफलता दिखती है। जब भोजन जैसे मानव अधिकार को भी बाजार के हवाले कर दिया जाए, तो समाज कमजोर होता है, चाहे वह कितना ही विकसित क्यों न दिखे। भारत का विकास ढांचा मजबूत दिख सकता है, पर उसकी बुनियाद में पोषण का अभाव साफ महसूस होता है।

वैश्विक स्तर पर देखें तो अफ्रीका, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देश पौष्टिक भोजन के संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सहारा के दक्षिण वाले अफ्रीकी क्षेत्र में तो हालात इतने खराब हैं कि 60 से 80 फीसद आबादी पौष्टिक भोजन का खर्च ही नहीं उठा सकती। वहीं यूरोप, आस्ट्रेलिया और उत्तर अमेरिका जैसे क्षेत्रों में भोजन की पहुंच बेहतर है, पर वहां असंतुलित आहार, प्रसंस्कृत खाद्य और मोटापे जैसी समस्याएं स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। भारत में भोजन और पोषण का संकट दो ध्रुवों में बंटा दिखता है। ग्रामीण भारत में अब भी कुपोषण, रक्ताल्पता, कम वजन जैसे मामलों का उच्च स्तर पाया जाता है। बच्चों और महिलाओं की पोषण स्थिति विशेष चिंता का विषय है। दूसरी ओर, शहरी भारत में खाने की उपलब्धता तो है, पर उसकी गुणवत्ता की समस्या है। समय की कमी, काम का तनाव, और तेज बाजार-चालित संस्कृति ने डिब्बाबंद खाद्य, जंक फूड और मीठे पेयों को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बना दिया है। एक तरफ कुपोषण और दूसरी ओर अतिपोषण, दोनों मिलकर स्वास्थ्य संकट को और जटिल बनाते हैं।
खाद्य महंगाई ने भारतीय रसोई को जिस तरह प्रभावित किया है, वह चिंता का विषय है। दालें, खाद्य तेल, फल, सब्जियां और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने संतुलित भोजन की लागत बहुत बढ़ा दी है। एक औसत भारतीय परिवार की मासिक आमदनी का बड़ा हिस्सा केवल कैलोरी-आधारित भोजन पूरा करने में ही खर्च हो जाता है, जबकि पौष्टिक भोजन की थाली उनकी पहुंच से दूर चली जाती है। यह स्थिति बताती है कि भोजन केवल बाजार व्यवस्था का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे एक सामाजिक सुरक्षा अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत की कृषि अब भी मानसून पर अत्यधिक निर्भर है। मगर असामान्य बारिश, सूखा, बाढ़ और तापमान में बदलाव ने फसल उत्पादकता को प्रभावित किया है, जिससे बाजार में दाम बढ़ते हैं। समस्या नीतिगत प्राथमिकताओं की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली अभी भी मुख्य रूप से अनाज-आधारित है, गेहूं और चावल पर केंद्रित है। जबकि शरीर को विविध पोषक तत्त्वों की भी आवश्यकता होती है।

भारत में फल, सब्जियां, दालें, अंडे और डेयरी जैसे घटक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली या सरकारी पोषण कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। इसी वजह से मध्याह्न भोजन की तरह अन्य योजनाएं भोजन तो देती हैं, पर पूर्ण पोषण सुनिश्चित नहीं कर पातीं। दुनिया के कई देशों ने भोजन को राष्ट्रीय विकास की धुरी बनाकर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ब्राजील का 'शून्य भुखमरी' अभियान इसका उदाहरण है, जिसने स्थानीय कृषि, सबसिडी और पोषण कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया। जापान ने 'शोकू इकु' नीति के तहत बच्चों को भोजन विज्ञान की शिक्षा दी। एक ऐसा ढांचा, जो स्पष्ट करता है कि भोजन केवल खाने की वस्तु नहीं, बल्कि संस्कृति, समझ और स्वास्थ्य का आधार है। दक्षिण कोरिया ने प्रसंस्कृत खाद्य पर सख्त नियंत्रण लागू किए, जिससे जीवनशैली संबंधी बीमारियों में गिरावट आई। भारत इनसे सीख लेकर अपने कार्यक्रमों को अधिक वैज्ञानिक और आधुनिक बना सकता है। दरअसल, ओषण की कमी का असर व्यक्तिगत स्तर से कहीं अधिक व्यापक है। यह कार्यक्षमता, शिक्षा और उत्पादकता को प्रभावित करता है। कमजोर और कुपोषित बच्चे स्कूल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। कुपोषित युवा समाज में सक्रिय योगदान दिने में पीछे रह जाते हैं।

यह समझना आवश्यक है कि भोजन कोई साधारण आर्थिक वस्तु नहीं है। यह सामाजिक न्याय, समानता और मानव अधिकार का मूल तत्त्व है। जब एक बड़ी आबादी पौष्टिक भोजन वहन नहीं कर पाती, तो समाज के लिए यह अनदेखा करने योग्य आंकड़ा नहीं रह जाता। यह श्वह बिंदु है, जहां नीतियों, बाजार, कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य-चारों को मिलकर समाधान तैयार करना होगा। भारत के पोषण संकट को समझने के लिए एक स्वस्थ थाली में वास्तव में क्या होना चाहिए, यह समझने की जरूरत है। बच्चों की थाली में प्रोटीन (दाल, अंडा, दूध), कैल्शियम, आयरन, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा अनिवार्य हैं। ये तत्त्व न केवल हड्डियों और दिमाग के विकास के लिए जरूरी हैं, बल्कि रक्ताल्पता, संक्रमणों की अधिकता, थकान, आंखों की कमजोरी और सीखने की क्षमता में कमी जैसी समस्याओं से भी बचाते हैं। यह अफसोसनाक है कि भारत के लाखों बच्चों की थाली आज भी इन आवश्यक तत्त्वों से खाली है और इसका असर उनके पूरे जीवन पर पड़ता है।

महिलाओं और वृद्धों के पोषण की जरूरतें इससे भी अधिक विशिष्ट हैं। महिलाओं को विशेष रूप से आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन की अधिक मात्रा चाहिए। वहीं वृद्धजन के लिए ओमेगा-3, फाइबर, विटामिन बी, कैल्शियम और मैग्नीशियम अत्यंत आवश्यक हैं, जो उन्हें हृदय रोग, मधुमेह, हड्डियों के क्षरण और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाते हैं। लेकिन पारिवारिक और सामाजिक संरचना के कारण अक्सर इन्हीं समूहों की थाली सबसे पहले कमजोर होती है, जिससे बीमारी एक स्थायी साथी बन जाती है। सरकारी नीतियां और जमीनी ढांचा पोषण सुधार का दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं। देश में आंगनबाड़ी और स्कूल का भोजन कक्ष बच्चों के पोषण का बड़ा आधार माने जाते हैं, पर इनकी स्थिति असमान और अक्सर संसाधन-विहीन नजर आती है। आज भारत के सामने प्रश्न यह नहीं कि भोजन कितनी मात्रा में उपलब्ध है, बल्कि यह है कि क्या गुणवत्ता पूरक भोजन सही कीमत और सही समय पर हर नागरिक तक पहुंच पा रहा है?

भारतीय कृषि में कीटनाशकों और रसायनों का उपयोग जिस तेजी से बढ़ा है, वह पोषण संकट का एक और अदृश्य कारण बन रहा है। खेतों में सब्जियां और फलों पर अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव न केवल फसलों की गुणवत्ता को कम करता है, बल्कि लंबे समय में लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव छोड़ता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि इन रसायनों का अंश खाद्य पदार्थों में बचा रह जाता है, जिससे बच्चों में तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं महिलाओं में हार्मोन असंतुलन और वयस्कों में कैंसर और गुर्दा रोगों का खतरा बढ़ जाता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस क्षेत्र में न तो निगरानी सख्त है, न ही किसानों को सुरक्षित विकल्पों की पर्याप्त जानकारी मिल पाती है। जैविक खेती और कम-रसायन जैसे विकल्पों की चर्चा तो होती है, पर जमीनी स्तर पर उनकी पहुंच नगण्य है। अगर राष्ट्र एक मजबूत, सक्षम और स्वस्थ भविष्य चाहता है, तो भोजन को बाजार का उत्पाद नहीं, बल्कि सार्वभौमिक अधिकार घोषित करना होगा। तभी वास्तविक विकास की नींव मजबूत होगी।

स्त्रोत:- 
मनीष जैसल
जनसत्ता, न्यूज़ पेपर
11 दिसम्बर 2025

Wednesday, 10 December 2025

महिला

महिलाओं बारे रागनियां 
1)
 जागी महिला अब हरियाणे की 
जुल्मो सितम नहीं सहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
1
खेतों में खलिहानों में दिन रात कमाई करती हैं
फिर भी दोयम दरजा हम बिना दवाई मरती हैं
बैठी बैठी नहीं सहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
2
देवी का दरजा देकर इस देवी को किसने लूटा
सदियों से हम गई दबाई समता का दावा झूठा
दहेज़ की बलि नहीं चढ़ेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
3
इंसान बन गए हैवान आज होते हैं अत्याचार 
यहाँ देखो नैया डूब रही अब हम थामेंगी पतवार
अबला बनकर नहीं मरेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
4
आगे बढे ये कदम हमारे पीछे ना हटने पायेंगे
जो मन धार लिया हमने अब करके वही दिखाएंगे
रणबीर सारी बात लहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।

2)

 जागी महिला हरियाणे की
करकै कमाल दिखाया सै, मिलकै नै कदम उठाया सै, खेतां मैं खूब कमाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
1. 
देश की आजादी खातर अपणी ज्यान खपाई बेबे
गामड़ी सांघी खिडवाली मैं न्यारी रीत चलाई बेबे
लिबासपुर रोहणात मैं बहादरी थी दिखलाई बेबे
अंग्रेजां तै जीन्द की रानी गजब करी लड़ाई बेबे
अंग्रेजां का भूत बनाया, यो सब कुछ दापै लाया,
देश आजाद कराणा चाहया जागी महिला हरियाणे की।।
2. 
देश आजाद होये पाछै हरित क्रांति ल्याई बेबे
खेत क्यार कमावण तै कदे नहीं घबराई बेबे
डांगर ढोर संभाले हमनै दिन रात कमाई बेबे 
घर परिवार आगै बढ़ाये स्कूलां करी पढ़ाई बेबे
हरियाणा आगै बढ़ाया सै ,सात आसमान चढ़ाया सै,
गुण्डयां का जुलूस कढ़ाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
3. 
हमनै गाम बराहणे मैं दारू बन्दी पै गोली खाई सै
खेलां के मैदानां मैं जगमति सांगवान खूबै छाई सै
सुशीला राठी बड्डी डॉक्टर हरियाणे की श्यान बढ़ाई सै
नकल रोकती बाहण सुशीला जमा नहीं घबराई सै
चावला नै नाम कमाया सै, महिला का मान बढ़ाया सै
यो रस्ता सही दिखाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
4. 
संतोष यादव बाहण म्हारी करकै कमाल दिखाया हे
सुमन मंजरी डीएसपी पुलिस मैं नाम कमाया हे
सांगवान मैडम नै बिमल जैन तै सबक सिखाया हे
नवराज जयवन्ती श्योकन्द जीवन सफल बनाया हे
ज्योति अरोड़ा सरोज सिवाच प्रशासन खूब चलाया हे
ये आगै बढ़ती जारी बेबे, करकै कमाल दिखारी बेबे
रणबीर मान बढ़ारी बेबे, जागी महिला हरियाणे की।।

3)

सावित्री बाई फुले के पुण्य दिवस के मौके पर

एक रागनी----
सावित्री बाई फुले आपको शत शत है प्रणाम म्हारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
1
तीन जनवरी ठारां सौ कतीस जन्मी दलित परिवार मैं
नौ साल की की शादी होगी ज्योतिराव फुले के घरबार मैं
उन बख्तों मैं समाज सुधार का था मुश्किल काम थारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
2
महिला शिक्षा की खातिर सबतैं पहला स्कूल खोल दिया
रूढ़िवादी विचारकों नै  डटकै हमला थारे पै बोल दिया
ना पाछै कदम हटाये महिला स्कूल खोले तमाम ठारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।

3
बाल विवाह के खिलाफ विधवा विवाह ताहिं छेड़ी जंग
सती प्रथा छुआछूत के किले विचार फैला करे थे तंग
ब्राह्मण विधवा गर्भवती का ज़िम्मै लिया इंतज़ाम सारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
4
ब्राह्मण ग्रंथ मत पढ़ो जात पात से बाहर आ जाओ
मेहनत से जाति बन्धन तोड़ो शिक्षा पूरी तम पा जाओ
लिखै रणबीर बरोने आला महिला शिक्षा का पैगाम थारा।।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।

4)

भटेरी गांव की भंवरी बाई, संघर्ष की जिनै राह दिखाई,सारे देश मैं छिड़ी सै लड़ाई, साथ मैं चालो सारी बहना।।
1
साथिन भंवरी नहीं अकेली हम कसम आज उठाते सारे
बाल विवाह की बची बुराई इसके खिलाफ जंग चलाते सारे
जालिमों की क्यों ज्यान बचाई, कचहरी क्यों मदद पै आई, सब छिपा रहे हैं सच्चाई,भंवरी साथिन पुकारी बहना।।
2
देकर झूठी दलीलें देखो बलात्कारियों को बचाते क्यों
परम्परा का ढोंग रचाकर असल सच्चाई को दबाते क्यों
भंवरी ने सही आवाज उठाई,जुल्मी चाहते उसे दबाई,समझ गई भरतो भरपाई, भंवरी नहीं बिचारी बहना।।
3
इस तरह से नहीं झुकेंगी जुल्मो सितम से टकरायेंगी
परम्परा की गली सड़ी जंजीरें आज हम तोड़ बगायेंगी
भटेरी ने नई लहर चलाई, समता की है पुकार लगाई, जयपुर में हूंकार उठाई, यह जंग रहेगी जारी बहना।।
4
फासीवाद का खूनी चेहरा इससे हरगिज ना घबरायेंगी
आगे बढ़े हैं कदम हमारे हम नया इतिहास बनायेंगी
रणबीर सिंह ने कलम चलाई, अपने डिक्ल की बात बताई,सच की हुई जीत दिखाई, ना सेखी है बघारी बहना।।

5)

 आज हम देखें औरत की जो सही तस्वीर सखी।। 
दिया समाज ने जो हमें उसको कहती तकदीर सखी।। 
घर में खटना पड़ता मर्दों की नजर में मोल नहीं औरत भी समझे इसे किस्मत लगा सकी तोल नहीं 
करती हम मखौल नहीं हमारी हालत है गंभीर सखी।।
घर खेत में काम करें जुताई और बुवाई करती बहना 
चारा पानी झोटा बुग्गी दिन और रात मरती बहना 
बैठी आहें भरती बहना समझें किस्मत की लकीर सखी।।
कैसा सलूक करते हमसे मालिक बंधवा का व्यवहार यहां 
खाना दोयम कपड़ा दोयम मिले सारा दोयम संसार यहां 
करोड़ों महिला बीमार यहां इलाज की नहीं तदबीर सखी।।
अहम फैंसले बिना हमारे मरद बैठ कर क्यों करते देखो 
जुल्म ढाते भारी हम पर नहीं किसी से डरते देखो 
हम नहीं विचार करते देखो तोडे़ं कैसे यह जंजीर सखी ।।
खुद चुपचाप सहती जाती मानें कुदरत का खेल इसको 
सदियों से सहती आई समझें राम का मेल इसको 
क्यों रही हो झेल ईसको मसला बहोत गम्भीर सखी।।
सदियों से होता ही आया पर किया मुकाबला है हमने 
सिर धड़की बाजी लगा नया रास्ता अब चुना है हमने 
जो सपना बुना है हमने होगा पूरा लिखे रणबीर सखी।।

6)

 दिन काटे चाहूं
दिन काटे चाहूं मैं ये कोण्या सुख तैं कटण देवैं।।
चुपचाप जीणा चाहूं मैं फेर कोण्या टिकण देवैं।।
1
झाड़ झाड़ बैरी होगे आज हम बरगी बीरां के
मोह माया तैं दूर पड़े फेर दिल डिगें फकीरां के
नामी बदमाश पाल राखे बाबा ना पिटण देवैं।।
अच्छाई के बोये बीज ये जमा नहीं पकण देवैं।।
2
कई बै जी करै फांसी खालयूं इनकै अकल लागै
सहेली बोली मेरी बात मान मत प्राणां नै त्यागै
किसे कै कसक ना जागै हमनै नहीं बसण देवैं।।
आगै बढ़े कदम म्हारे उल्टे हम नहीं हटण देवैं।।
3
बताओ पिया के करूं मैं इणपै तूँ गीत बनादे नै
द्रोपदी चीर हरण गाओ म्हारे चीर हरण पै गादे नै
बणा रागनी सुनादे नै हम तेज नहीं घटण देवैं।।
हरयाणे मैं शोर माचज्या दबा इसा यो बटन देवैं।।
4
गाम के गोरै खड़े पावैं भैंस के म्हां कै ताने मारैं
इंसानियत जमा भूलगे भों किसे की इज्जत तारैं
बिना बात ये खँगारैं हमनै और घणी घुटण देवैं।।
रणबीर सिंह बरगे म्हारी इज्जत ना लुटण देवैं।।

7)

या बढ़गी बेरोजगरी, यो करजा चढ़ग्या भारी, हुई दुखी जनता सारी, महान हुया हरियाणा।
1
म्हारे बालक मरैं बिना दवाई, महंगी होंती जावै पढ़ाई
नाबराबरी साँस चढ़ारी , कारपोरेट अत्याचारी, मीडिया इसका प्रचारी, महान हुया हरियाणा।
2
जात पात मैं बाँटी जनता, विरोध किया तो काटी जनता
किसान की श्यामत आरी, महिला की इज्जत जा तारी, बढ़ती जावै चोरी जारी
महान हुया हरियाणा।
3
झूठे जुमले रोजाना देते,खबर म्हारी कदे ना लेते, 
होंती जा तबियत खारी, जनता हिम्मत नहीं  हारी, शासक हुया भ्रष्टाचारी, 
महान होया हरियाणा। 
4
महिला वंचित सुणल्यो सारे, बिना संघर्ष के नहीं गुजारे
लड़े हैं जीत हुयी म्हारी, जीतैंगे भरतू  भरतारी , यो रणबीर म्हारा लिखारी, 
महान हुया हरियाणा ।

8)

एक आह्वान रागनी 
हम कदम मिलजुल के मंजिल की तरफ बढ़ाएं बहना ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएं बहना ॥ 
गुणवत्ता वाली पढ़ाई वास्ते  जनता लाम बन्द करेंगी 
सबको सस्ता इलाज मिले ऐसा मिलके प्रबंध करेंगी 
निर्माण के उदाहरण हम करके सबको दिखाएं बहना ॥ 
अन्ध विश्वास के खिलाफ लंबा चलाएं एक अभियान 
सबका मिलके होगा प्रयास बने संवेदनशील इंसान 
प्रति गामी विचार को  वैज्ञानिक आधार से  हराएं बहना ॥ 
मिल करके करेंगे विरोध  सभी दलित अत्याचार का 
महिला समता समाज में हो 
मुद्दा बनायेंगे प्रचार का 
रोजगार मिले सबको ये हम सब अभियान चलाएं बहना ॥ 
सद्भावना बढे समाज में नफरत का विरोध करें सभी
पूरे समाज का विकास हो इस पे पूरा शोध करें सभी 
बढ़े हुए कदम हमारे रणबीर आगे बढ़ते ही जायें बहना ॥

9)

जाल बिछा हमनै लूट रही कारपोरेट की मकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
1
म्हारी मेहनत के दम पै और अमीर होंते जावैं देखो
खून पसीना म्हारा बहता ये बैठ एसी मौज उडावैं देखो
के के दुख गिनावैं देखो कड़ म्हारी जमा अकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
2
म्हारी लूट का तोड़ खुलासा कार्ल मार्क्स करग्या बताया
मेहनत म्हारी करै पैदा पूंजी कैपिटल किताब मैं समझाया 
सारे जग मैं सच पाया भारी पूंजीवाद की तकड़ी बेबे ।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
3
दुनिया के घणे देश ये पूंजीवाद की पूजा करते देखो
अपनी कूबध लहकोवण नै घनी ए झूठ घड़ते देखो
अपनी करी मैं घिरते देखो विकास राह गलत पकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
4
भारत मैं भी आज कारपोरेट साम्प्रदायिकता तैं हाथ मिलारया
कमेरयां की एकता तोड़ण नै यो धर्मांधता खूब फैलारया 
लिख रणबीर भी समझारया तोड़ो नफरत की लकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।

10)

सीढ़ी घड़ादे चन्दन रूख की सासड़ तीज ये मेरी आई री।।
चन्दन रूख ना म्हारै क्यों ना पीहर तैं घड़ा कै ल्याई री।।
1
अपनी तैं दे दी झूल पाटड़ी म्हारे तैं  दिया यो पीसणा
फोडूँ री सासड़ चाक्की के पाट क्यों चाहवै मनै घिसणा
आज तो दिन त्योहार का सै चाहिए ऊंच नीच भुलाई री।।
2
मनै खन्दा दे री मेरे बाप कै बीर आया यो माँ जाया
बहु इबकै यहीं तीज मना री तेरा पिया छुट्टी आया
गगन गरजै बिज्जल पाटै या मरती फसल तिसाई री।।
3
लरज लरज कै जावै बहू या जाम्मन की डाहली देख
पड़कै नाड़ ना तुड़ा लिए तेरी मां देगी मनै गाली देख
नन्द भी हचकोले मारैगी कहवैगी पहलम ना बताई री।।
4
मन मैं गुद गुद सी माच रही झूलण जाऊं बाग मैं हे
चढ़ पींघ पै जोर लगा कै मैं पींघ बधाऊँ बाग मैं हे
तीज रल मिलकै मनावां सारे रणबीर की या कविताई री।।

11

 हरियाणा के समाज मैं औरत कै घली जंजीर, क्यों हमनै दीखती नहीं।।
1
पहलम दुभान्त हुया करती
दुखी सुखी हम जिया करती
पीया करती इलाज मैं यो परम्परा का नीर, चिता तैं उठती नहीं।।
2
पेट मैं ए मारण की तैयारी
घनखरी दुनिया हुई हत्यारी
गांधारी आज भी लिहाज मैं
पीटती जावै वाहे लकीर,नई राही दीखती नहीं।।
3
बचावनिया और मारनिया के 
घले पाले खेल करनिया के
घेरनिया के मिजाज मैं यो 
मामला सै गम्भीर, क्यों हमनै सूझती नहीं।
4
समाज करना  चाहवै सफाया
सैक्स सेलेक्शन औजार बनाया
बताया सही अंदाज मैं, झूठ नहीं सै रणबीर, कलम चूकती नहीं।।

12)

आयी तीज 
मॉनसून नै इबकै बहोतै बाट या दिखाई बेबे ।।
बरस्या नहीं खुलकै बूंदा बांदी सी आयी बेबे ।।
साम्मण के मिहने मैं सारे कै हरयाली छाज्या 
सोचै प्रदेश गया पति भाज कै घर नै आज्या 
ना गर्मी ना सर्दी रूत या घणी ए सुहाई बेबे ।।
कोये हरया लाल कोये जम्फर पीला पहर रही 
बाँट गुलगुले सुहाली फैला खुशी की लहर रही 
कोये भीजै बूंदां मैं कोये सुधां लत्यां नहाई बेबे।।
 आयी तीज बोगी बीज आगली फसल बोई या 
झूला झूल कै पूड़े खाकै थाह मन की टोही या 
पुरानी तीज तो इसी थी आज जमा भुलाई बेबे ।। 
बाजार की संस्कृति नै म्हारी तीज जमा भुलाई 
इस मौके पर जाया करती प्रेम की पींघ बढ़ायी 
कहै रणबीर सिंह कैसे करूँ आज की कविताई बेबे।।

****
महिलाओं बारे रागनियां 
1)
 जागी महिला अब हरियाणे की 
जुल्मो सितम नहीं सहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
1
खेतों में खलिहानों में दिन रात कमाई करती हैं
फिर भी दोयम दरजा हम बिना दवाई मरती हैं
बैठी बैठी नहीं सहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
2
देवी का दरजा देकर इस देवी को किसने लूटा
सदियों से हम गई दबाई समता का दावा झूठा
दहेज़ की बलि नहीं चढ़ेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
3
इंसान बन गए हैवान आज होते हैं अत्याचार 
यहाँ देखो नैया डूब रही अब हम थामेंगी पतवार
अबला बनकर नहीं मरेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।
4
आगे बढे ये कदम हमारे पीछे ना हटने पायेंगे
जो मन धार लिया हमने अब करके वही दिखाएंगे
रणबीर सारी बात लहेंगी महिला अब हरियाणे की।।
आगे बढ़कर बात करेंगी महिला अब हरियाणे की ।।

2)

 जागी महिला हरियाणे की
करकै कमाल दिखाया सै, मिलकै नै कदम उठाया सै, खेतां मैं खूब कमाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
1. 
देश की आजादी खातर अपणी ज्यान खपाई बेबे
गामड़ी सांघी खिडवाली मैं न्यारी रीत चलाई बेबे
लिबासपुर रोहणात मैं बहादरी थी दिखलाई बेबे
अंग्रेजां तै जीन्द की रानी गजब करी लड़ाई बेबे
अंग्रेजां का भूत बनाया, यो सब कुछ दापै लाया,
देश आजाद कराणा चाहया जागी महिला हरियाणे की।।
2. 
देश आजाद होये पाछै हरित क्रांति ल्याई बेबे
खेत क्यार कमावण तै कदे नहीं घबराई बेबे
डांगर ढोर संभाले हमनै दिन रात कमाई बेबे 
घर परिवार आगै बढ़ाये स्कूलां करी पढ़ाई बेबे
हरियाणा आगै बढ़ाया सै ,सात आसमान चढ़ाया सै,
गुण्डयां का जुलूस कढ़ाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
3. 
हमनै गाम बराहणे मैं दारू बन्दी पै गोली खाई सै
खेलां के मैदानां मैं जगमति सांगवान खूबै छाई सै
सुशीला राठी बड्डी डॉक्टर हरियाणे की श्यान बढ़ाई सै
नकल रोकती बाहण सुशीला जमा नहीं घबराई सै
चावला नै नाम कमाया सै, महिला का मान बढ़ाया सै
यो रस्ता सही दिखाया सै, जागी महिला हरियाणे की।।
4. 
संतोष यादव बाहण म्हारी करकै कमाल दिखाया हे
सुमन मंजरी डीएसपी पुलिस मैं नाम कमाया हे
सांगवान मैडम नै बिमल जैन तै सबक सिखाया हे
नवराज जयवन्ती श्योकन्द जीवन सफल बनाया हे
ज्योति अरोड़ा सरोज सिवाच प्रशासन खूब चलाया हे
ये आगै बढ़ती जारी बेबे, करकै कमाल दिखारी बेबे
रणबीर मान बढ़ारी बेबे, जागी महिला हरियाणे की।।

3)

सावित्री बाई फुले के पुण्य दिवस के मौके पर

एक रागनी----
सावित्री बाई फुले आपको शत शत है प्रणाम म्हारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
1
तीन जनवरी ठारां सौ कतीस जन्मी दलित परिवार मैं
नौ साल की की शादी होगी ज्योतिराव फुले के घरबार मैं
उन बख्तों मैं समाज सुधार का था मुश्किल काम थारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
2
महिला शिक्षा की खातिर सबतैं पहला स्कूल खोल दिया
रूढ़िवादी विचारकों नै  डटकै हमला थारे पै बोल दिया
ना पाछै कदम हटाये महिला स्कूल खोले तमाम ठारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।

3
बाल विवाह के खिलाफ विधवा विवाह ताहिं छेड़ी जंग
सती प्रथा छुआछूत के किले विचार फैला करे थे तंग
ब्राह्मण विधवा गर्भवती का ज़िम्मै लिया इंतज़ाम सारा।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।।
4
ब्राह्मण ग्रंथ मत पढ़ो जात पात से बाहर आ जाओ
मेहनत से जाति बन्धन तोड़ो शिक्षा पूरी तम पा जाओ
लिखै रणबीर बरोने आला महिला शिक्षा का पैगाम थारा।।।
पहली महिला शिक्षक देश की लिया जावै नाम थारा।

4)

भटेरी गांव की भंवरी बाई, संघर्ष की जिनै राह दिखाई,सारे देश मैं छिड़ी सै लड़ाई, साथ मैं चालो सारी बहना।।
1
साथिन भंवरी नहीं अकेली हम कसम आज उठाते सारे
बाल विवाह की बची बुराई इसके खिलाफ जंग चलाते सारे
जालिमों की क्यों ज्यान बचाई, कचहरी क्यों मदद पै आई, सब छिपा रहे हैं सच्चाई,भंवरी साथिन पुकारी बहना।।
2
देकर झूठी दलीलें देखो बलात्कारियों को बचाते क्यों
परम्परा का ढोंग रचाकर असल सच्चाई को दबाते क्यों
भंवरी ने सही आवाज उठाई,जुल्मी चाहते उसे दबाई,समझ गई भरतो भरपाई, भंवरी नहीं बिचारी बहना।।
3
इस तरह से नहीं झुकेंगी जुल्मो सितम से टकरायेंगी
परम्परा की गली सड़ी जंजीरें आज हम तोड़ बगायेंगी
भटेरी ने नई लहर चलाई, समता की है पुकार लगाई, जयपुर में हूंकार उठाई, यह जंग रहेगी जारी बहना।।
4
फासीवाद का खूनी चेहरा इससे हरगिज ना घबरायेंगी
आगे बढ़े हैं कदम हमारे हम नया इतिहास बनायेंगी
रणबीर सिंह ने कलम चलाई, अपने डिक्ल की बात बताई,सच की हुई जीत दिखाई, ना सेखी है बघारी बहना।।

5)

 आज हम देखें औरत की जो सही तस्वीर सखी।। 
दिया समाज ने जो हमें उसको कहती तकदीर सखी।। 
घर में खटना पड़ता मर्दों की नजर में मोल नहीं औरत भी समझे इसे किस्मत लगा सकी तोल नहीं 
करती हम मखौल नहीं हमारी हालत है गंभीर सखी।।
घर खेत में काम करें जुताई और बुवाई करती बहना 
चारा पानी झोटा बुग्गी दिन और रात मरती बहना 
बैठी आहें भरती बहना समझें किस्मत की लकीर सखी।।
कैसा सलूक करते हमसे मालिक बंधवा का व्यवहार यहां 
खाना दोयम कपड़ा दोयम मिले सारा दोयम संसार यहां 
करोड़ों महिला बीमार यहां इलाज की नहीं तदबीर सखी।।
अहम फैंसले बिना हमारे मरद बैठ कर क्यों करते देखो 
जुल्म ढाते भारी हम पर नहीं किसी से डरते देखो 
हम नहीं विचार करते देखो तोडे़ं कैसे यह जंजीर सखी ।।
खुद चुपचाप सहती जाती मानें कुदरत का खेल इसको 
सदियों से सहती आई समझें राम का मेल इसको 
क्यों रही हो झेल ईसको मसला बहोत गम्भीर सखी।।
सदियों से होता ही आया पर किया मुकाबला है हमने 
सिर धड़की बाजी लगा नया रास्ता अब चुना है हमने 
जो सपना बुना है हमने होगा पूरा लिखे रणबीर सखी।।

6)

 दिन काटे चाहूं
दिन काटे चाहूं मैं ये कोण्या सुख तैं कटण देवैं।।
चुपचाप जीणा चाहूं मैं फेर कोण्या टिकण देवैं।।
1
झाड़ झाड़ बैरी होगे आज हम बरगी बीरां के
मोह माया तैं दूर पड़े फेर दिल डिगें फकीरां के
नामी बदमाश पाल राखे बाबा ना पिटण देवैं।।
अच्छाई के बोये बीज ये जमा नहीं पकण देवैं।।
2
कई बै जी करै फांसी खालयूं इनकै अकल लागै
सहेली बोली मेरी बात मान मत प्राणां नै त्यागै
किसे कै कसक ना जागै हमनै नहीं बसण देवैं।।
आगै बढ़े कदम म्हारे उल्टे हम नहीं हटण देवैं।।
3
बताओ पिया के करूं मैं इणपै तूँ गीत बनादे नै
द्रोपदी चीर हरण गाओ म्हारे चीर हरण पै गादे नै
बणा रागनी सुनादे नै हम तेज नहीं घटण देवैं।।
हरयाणे मैं शोर माचज्या दबा इसा यो बटन देवैं।।
4
गाम के गोरै खड़े पावैं भैंस के म्हां कै ताने मारैं
इंसानियत जमा भूलगे भों किसे की इज्जत तारैं
बिना बात ये खँगारैं हमनै और घणी घुटण देवैं।।
रणबीर सिंह बरगे म्हारी इज्जत ना लुटण देवैं।।

7)

या बढ़गी बेरोजगरी, यो करजा चढ़ग्या भारी, हुई दुखी जनता सारी, महान हुया हरियाणा।
1
म्हारे बालक मरैं बिना दवाई, महंगी होंती जावै पढ़ाई
नाबराबरी साँस चढ़ारी , कारपोरेट अत्याचारी, मीडिया इसका प्रचारी, महान हुया हरियाणा।
2
जात पात मैं बाँटी जनता, विरोध किया तो काटी जनता
किसान की श्यामत आरी, महिला की इज्जत जा तारी, बढ़ती जावै चोरी जारी
महान हुया हरियाणा।
3
झूठे जुमले रोजाना देते,खबर म्हारी कदे ना लेते, 
होंती जा तबियत खारी, जनता हिम्मत नहीं  हारी, शासक हुया भ्रष्टाचारी, 
महान होया हरियाणा। 
4
महिला वंचित सुणल्यो सारे, बिना संघर्ष के नहीं गुजारे
लड़े हैं जीत हुयी म्हारी, जीतैंगे भरतू  भरतारी , यो रणबीर म्हारा लिखारी, 
महान हुया हरियाणा ।

8)

एक आह्वान रागनी 
हम कदम मिलजुल के मंजिल की तरफ बढ़ाएं बहना ॥ 
हमारी बहुविविधता को दे हर क़ुरबानी बचाएं बहना ॥ 
गुणवत्ता वाली पढ़ाई वास्ते  जनता लाम बन्द करेंगी 
सबको सस्ता इलाज मिले ऐसा मिलके प्रबंध करेंगी 
निर्माण के उदाहरण हम करके सबको दिखाएं बहना ॥ 
अन्ध विश्वास के खिलाफ लंबा चलाएं एक अभियान 
सबका मिलके होगा प्रयास बने संवेदनशील इंसान 
प्रति गामी विचार को  वैज्ञानिक आधार से  हराएं बहना ॥ 
मिल करके करेंगे विरोध  सभी दलित अत्याचार का 
महिला समता समाज में हो 
मुद्दा बनायेंगे प्रचार का 
रोजगार मिले सबको ये हम सब अभियान चलाएं बहना ॥ 
सद्भावना बढे समाज में नफरत का विरोध करें सभी
पूरे समाज का विकास हो इस पे पूरा शोध करें सभी 
बढ़े हुए कदम हमारे रणबीर आगे बढ़ते ही जायें बहना ॥

9)

जाल बिछा हमनै लूट रही कारपोरेट की मकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
1
म्हारी मेहनत के दम पै और अमीर होंते जावैं देखो
खून पसीना म्हारा बहता ये बैठ एसी मौज उडावैं देखो
के के दुख गिनावैं देखो कड़ म्हारी जमा अकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
2
म्हारी लूट का तोड़ खुलासा कार्ल मार्क्स करग्या बताया
मेहनत म्हारी करै पैदा पूंजी कैपिटल किताब मैं समझाया 
सारे जग मैं सच पाया भारी पूंजीवाद की तकड़ी बेबे ।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
3
दुनिया के घणे देश ये पूंजीवाद की पूजा करते देखो
अपनी कूबध लहकोवण नै घनी ए झूठ घड़ते देखो
अपनी करी मैं घिरते देखो विकास राह गलत पकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।
4
भारत मैं भी आज कारपोरेट साम्प्रदायिकता तैं हाथ मिलारया
कमेरयां की एकता तोड़ण नै यो धर्मांधता खूब फैलारया 
लिख रणबीर भी समझारया तोड़ो नफरत की लकड़ी बेबे।।
गरीब जनता इसके फंदे मैं घणी कसूती जकड़ी बेबे।।

10)

सीढ़ी घड़ादे चन्दन रूख की सासड़ तीज ये मेरी आई री।।
चन्दन रूख ना म्हारै क्यों ना पीहर तैं घड़ा कै ल्याई री।।
1
अपनी तैं दे दी झूल पाटड़ी म्हारे तैं  दिया यो पीसणा
फोडूँ री सासड़ चाक्की के पाट क्यों चाहवै मनै घिसणा
आज तो दिन त्योहार का सै चाहिए ऊंच नीच भुलाई री।।
2
मनै खन्दा दे री मेरे बाप कै बीर आया यो माँ जाया
बहु इबकै यहीं तीज मना री तेरा पिया छुट्टी आया
गगन गरजै बिज्जल पाटै या मरती फसल तिसाई री।।
3
लरज लरज कै जावै बहू या जाम्मन की डाहली देख
पड़कै नाड़ ना तुड़ा लिए तेरी मां देगी मनै गाली देख
नन्द भी हचकोले मारैगी कहवैगी पहलम ना बताई री।।
4
मन मैं गुद गुद सी माच रही झूलण जाऊं बाग मैं हे
चढ़ पींघ पै जोर लगा कै मैं पींघ बधाऊँ बाग मैं हे
तीज रल मिलकै मनावां सारे रणबीर की या कविताई री।।

11

 हरियाणा के समाज मैं औरत कै घली जंजीर, क्यों हमनै दीखती नहीं।।
1
पहलम दुभान्त हुया करती
दुखी सुखी हम जिया करती
पीया करती इलाज मैं यो परम्परा का नीर, चिता तैं उठती नहीं।।
2
पेट मैं ए मारण की तैयारी
घनखरी दुनिया हुई हत्यारी
गांधारी आज भी लिहाज मैं
पीटती जावै वाहे लकीर,नई राही दीखती नहीं।।
3
बचावनिया और मारनिया के 
घले पाले खेल करनिया के
घेरनिया के मिजाज मैं यो 
मामला सै गम्भीर, क्यों हमनै सूझती नहीं।
4
समाज करना  चाहवै सफाया
सैक्स सेलेक्शन औजार बनाया
बताया सही अंदाज मैं, झूठ नहीं सै रणबीर, कलम चूकती नहीं।।

12)

आयी तीज 
मॉनसून नै इबकै बहोतै बाट या दिखाई बेबे ।।
बरस्या नहीं खुलकै बूंदा बांदी सी आयी बेबे ।।
साम्मण के मिहने मैं सारे कै हरयाली छाज्या 
सोचै प्रदेश गया पति भाज कै घर नै आज्या 
ना गर्मी ना सर्दी रूत या घणी ए सुहाई बेबे ।।
कोये हरया लाल कोये जम्फर पीला पहर रही 
बाँट गुलगुले सुहाली फैला खुशी की लहर रही 
कोये भीजै बूंदां मैं कोये सुधां लत्यां नहाई बेबे।।
 आयी तीज बोगी बीज आगली फसल बोई या 
झूला झूल कै पूड़े खाकै थाह मन की टोही या 
पुरानी तीज तो इसी थी आज जमा भुलाई बेबे ।। 
बाजार की संस्कृति नै म्हारी तीज जमा भुलाई 
इस मौके पर जाया करती प्रेम की पींघ बढ़ायी 
कहै रणबीर सिंह कैसे करूँ आज की कविताई बेबे।।