Tuesday, 22 July 2014

दिल्ली आल्यो


गिणकै दिये बोल तीन सौ साठ दिल्ली आल्यो।
नहीं सुणते बात हम देखैं बाट दिल्ली आल्यो।।
र्इब खत्म म्हारी पढ़ार्इ कति गोलते कोण्या
हम मरते बिना दवार्इ कति तोलते कोन्या
कति बोलते कोण्या बनरे लाट दिल्ली आल्यो।।
इसी नीति अपनार्इ किसान यो बरबाद करया
घर उजाड़ कै म्हारा अपणा यो आबाद करया।
घणायो फसाद करया तोल्या घाट दिल्ली आल्यो।।
म्हारे बालक सरहद पै अपनी ज्यान खपावैं
थारे घूमैं जहाज्यां मैं म्हारे खेत खान कमावैं
भूख मैं टेम बितावैं थारे सैं ठाठ दिल्ली आल्यो।।
सात सौ चीजां की रणबीर ये सीम खोल दर्इ
गउ भैंस बकरी म्हारी ये बिकवा बिन मोल दर्इ
मचा रोल दर्इ गया बेरा पाट दिल्ली आल्यो।।


आयी तीज


मॉनसून नै इबकै बहोतै बाट या दिखाई बेबे 
बरस्या नहीं खुलकै बूंदा बांदी सी आयी बेबे 
साम्मण के मिहने मैं सारे कै हरयाली छाज्या
सोचै प्रदेश गया पति भाज कै घर नै आज्या  
ना गर्मी ना सर्दी रूत या घणी ए सुहाई बेबे 
कोये हरया लाल कोये जम्फर पीला पहर रही 
बाँट गुलगुले सुहाली फैला खुशी की लहर रही 
कोये भीजै बूंदां मैं कोये सुधां लत्यां नहाई बेबे 
आयी तीज बोगी बीज आगली फसल बोई या 
झूला झूल कै पूड़े खाकै थाह मन की टोही या 
पुरानी तीज तो इसी थी आज जमा भुलाई बेबे 
बाजार की संस्कृति नै म्हारी तीज जमा भुलाई 
इस मौके पर जाया करती  प्रेम की पींघ बढ़ायी 
कहै रणबीर सिंह कैसे करूँ आज की कविताई 

ईद और तीज



तीजां का त्यौहार आ जाता है मगर मेहर सिंह को फ़ौज से छूटी नहीं मिलती । गॉव बरौना बहुत याद आता है । वो बाग़ भरा पूरा और वहां डाले गए झूले । बार बार उसके इमाग में घूमते हैं । सोचता है और क्या लिखता है । 
मतना देखिये बाट प्रेमकौर छूटी मनै मिली कोन्या।  
मनै कई तरियां बात करी कोए चाल चली कोन्या । 
पहर कै दाम्मण काला तीज मनावन जाईये जरूर 
फ़ौजी नै गीत लिख कै भेज्या सबनै बताईये जरूर
जरूर तीज मनाईये कदे कहै पींघ तो घली कोन्या । 
पींघ बढ़ा कै नाक सासू की जरूर तोड़ कै नै ल्याईयो 
सुहाली पूड़े और गुलगले सब रेल मिल कै नै खाईयों 
आपस की राड़ घरां मैं होती जमा या भली कोन्या । 
सारे गाम  नै मेरे तरफ की या राम राम दियो जरूर 
दोनो भान रहियो प्रेम तैं आदर सम्मान कियो जरूर 
फ़ौज मैं हालात नहीं अच्छे लड़ाई इब्बै टली कोन्या । 
 इस मिहने साम्मण की या रुत घनी गजब बताई
ईद बी आज काल मैं या जावै पूरे गुहांड मैं मनाई    
रणबीर करै कविताई छाणी बरोने की गली कोन्या । 

Friday, 18 July 2014

काढ़ा

काढ़ा
छोरी कै ताप आया था मने देसी काढ़ा प्याया फेर
जिब छः दिन हो लिए  डाक्टर मने बुलाया फेर
डाक्टर नै पूरी जाँच करकै शुरू कर इलाज दिया
हल्का खाना गया बताया बंद कर सब नाज दिया
दवा लिखी चार ढाल की फीस मैं कर लिहाज दिया
गन्दा पानी फैलावे बीमारी बता यो सही काज दिया
ताप फेर बी ना टूट्या पेट मैं दर्द जताया फेर ||
डाक्टर जमा हाथ खड़े करग्या काली रात अँधेरी थी
बीजल लस्कैं बाल चलती दी बीप्ता नै घेरी थी
खड्या लाखऊँ बेटी कान्ही जमा अकल मारगी मेरी थी
वा नयों बोली बाबू बचाले मैं घनी लाडली तेरी थी
गूंठा टेक कै पाँच हजार ब्याज पै मैं लयाया  फेर ||
चाल गाम तैं बाबू बेटी मेडिकल मैं चार बाजे आये
नर्स डाक्टर सोहरे  थक कै हमने आके नै वे ठाए
सारी बात बूझ कै म्हारी फेर बहोत से टेस्ट कराये
एक्सरे देख कै वे डाक्टर फेर आपस मैं बतलाये
परेशान जरूरी सै ताऊ अंत मैं छेद बताया फेर ||
पायां ताले की धरती खिसकी हाथ जोड़ कै फ़रमाया
मेरा खून चाहे जितना लेल्यो चाहूं बेटी नै बचाया
एक बोतल  एक माणस तै उसनै यो दस्तूर बताया
ओढ़ानै  मैं जाऊं कडे मने पह्याँ कान्ही हाथ बढाया
डाक्टर पाछे नै होग्या उसनै मैं धमकाया फेर ||
पलंग धौरे  बैठ गया मेरी बेटी मेरे कान्ही लखाई
एकदम सिसकी आगी मेरे पै ना गयी आंख मिलाई
डाक्टर नै बेरा ना क्यूकर फेर दया म्हारे पै आई
एक मने देई दो उडे तै बोतल खून की दिलवाई
परेशान सही होग्या डाक्टर नै धीर बंधाया फेर ||
बीस दिन रहे मडिकल मैं खर्चा तीस हजार होग्या
एक किल्ला पड्या टेकना पर बेटी का उपचार होग्या
मेडिकल  के डाक्टर का सारी उम्र का कर्जदार होग्या
उनकी उड़ऐ  देखी जिन्दगी रणबीर सिंह ताबेदार होग्या
इलाज करवाकै  बेटी का अपने घर नै मैं आया फेर ||

हरयाणा के समाज मैं


गरीबां की मर आगी हरयाणा के समाज मैं ||
रैहवन नै मकान कडै , खावन नै नाज नहीं
पीवन नै पानी कडै , बीमार   नै इलाज नहीं
महंगाई जमा खागी हरयाणा के समाज मैं ||
कपास पीटी धान पीट दिया गेहूं की बारी सै 
गीहूं की गोली खा खा मार्गे हुई घनी लाचारी सै 
किसान की धरती जागी हरयाणा के समाज मैं ||
बदेशी  कंपनी कब्ज़ा करगी ये हिंदुस्तान मैं
लाल कालीन बिछाए किसने इनकी श्यान मैं
इतनी घनी क्यों भागी हरयाणा के समाज नै ||
महिलाओं  पै अत्याचार बढे आंख म्हारी मींच्गी
दलितों के ऊपर क्यों तलवार म्हारी खिंचगी   
रणबीर की छंद छागी हरयाणा के समाज मैं ||
 

haal mahara

देश आजाद हुया था सैंतालिस मैं बहोत साल बीत गये
उनके बाँटे  दूध मलाई बता म्हारे कर्मों  मैं सीत गये
धनवानों के बिल्ली कुत्ते म्हारे तैं बढ़िया जीवन गुजारें  वे
म्हारे बिन भोजन कुपोषण होग्या खा खा कै घने डकारें वे
हमनै कहके नीच पुकारें वे घनी मादी चला वे रीत गये ||
जमीन असमान क अंतर किसने आज म्हारे बीच बनाया सै
सारी उमर हम खेत कमाते फेर बी साँस नहीं उल्गा आया सै 
सोच सोच कै सिर चकराया सै वे क्यूकर पाला जीत गये ||
तरक्की करि हरयाणा मैं अपना खून पस्सीना बहा कै रै
ऊपर ले तो फायदा ठगे हम बात देखते मुंह नै बा कै रै 
देखे चारों कान्ही धक्के खा कै रै मिल असली मीत गये ||
तीनो नकली लाल हरयाणा के उनते यो सवाल म्हारा रै  
गरीब क्यों घणा गरीब होग्या अमीर क भरया भंडारा रै
असली लाल परभात म्हारा रै रणबीर बना ये गीत गये ||  

Tuesday, 1 July 2014

नया निजाम

नया निजाम किन किन बातां पै खरया उतरैगा देखियो।।
झूठ के साहरै मीडिया तैं कितने दिन निखरैगा देखियो।।
विकास का माॅडल यो कौणसा ईब अपनाया जावैगा देखो
मेहनतकश तैं यो कौणसा लोलीपोप थमाया जावैगा देखो
बदेशी  पूंजी ताहिं दरवाजा कितना खुलवाया जावैगा देखो
कितने जणे रोंद पाहयां तलै भारत उठाया जावैगा देखो
ताम झाम सारा का सारा कितने दिन मैं बिखरैगा देखियो।।
मंहगाई डायन नै सबकै कसूते घर घाल दिये सैं देखो
मेहनतकश  के घर मैं आज भक्कड़ बाल दिये सैं देखो
अम्बानी अडानी बरगे ये कर माला माल दिये सैं देखो
मंहगाई क्यूकर रोकी जागी कौणसे ख्यााल दिये सैं देखो
मंहगाई नहीं रुकी तो यो आम तावला ए बिफरैगा देखियो।।
भ्रष्टाचार  तैं मुक्ति का आज कौणसा रास्ता अपनाया जावैगा
इलैक्सनां  का खर्चा ईब यो क्यूकर कितना उघाया जावैगा
बेलगाम घोड़े कै यो  लगाम किस तरियां लगाया जावैगा
देखना बाकी सै आम आदमी किस तरियां भकाया जावैगा
भ्रष्टाचार हिस्सा व्यवस्था का किस तरियां डिगरैगा देखियो।।
एक जंग और खड़ी साहमी देश  म्हारे मैं बेरोजगारी की
अठाइस करोड़ युवा शक्ति सै शिकार इस महामारी की
किततैं पैदा होवैगा रुजगार कैसे मुक्ति इस बीमारी की
युवा की उम्मीद बहोत घणी देखी समों इसनै लाचारी की
नहीं दिख्या सही रास्ता तो यो घणा कसूता चिंगरैगा देखियो।।
इलैक्सन पहलम खूब हुया काले धन का जिकरा देखो
इसनै उल्टा ल्यावण खातर चाहिये कसूता जिगरा देखो
आगै काला नहीं बणै कित सै इसका फिकरा देखो
कित कित तैं रोक्या जावैगा आज तव्यां पै सिकरा देखो
काला धन बेरहम घणा सै किस ढालां सुधरैगा देखियो।।
महिलावां की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करी जावैगी देखो
रेप छेड़ छाड़ छीना झपटी क्यूकर कम हो पावैगी देखो
छांट कै पेट मैं मारी जान्ती क्यूकर संसार मैं आवैगी देखो
काम मुश्किल बहोत सै कद सुख तैं या रोटी खावैगी देखो
हामी भरी से इन कामां की राज कद सी मुकरैगा देखियो।।

Naya Nijam


या निजाम किन किन बातां पै खरया उतरैगा देखियो।।
झूठ के साहरै मीडिया तैं कितने दिन निखरैगा देखियो।।
विकास का मॉडल यो कौणसा ईब अपनाया जावैगा देखो
मेहनतकश  तैं यो कौणसा लोली पोप थमाया जावैगा देखो
बदेशी पूंजी ताहिं दरवाजा कितना खुलवाया जावैगा देखो
कितने जणे रोंद पाहयां तलै भारत उठाया जावैगा देखो
ताम झाम सारा का सारा कितने दिन मैं बिखरैगा देखियो।।
मंहगाई डायन नै सबकै कसूते घर घाल दिये सैं देखो
मेहनतकश  के घर मैं आज भक्कड़ बाल दिये सैं देखो
अम्बानी अडानी बरगे ये कर माला माल दिये सैं देखो
मंहगाई क्यूकर रोकी जागी कौणसे ख्यााल दिये सैं देखो
मंहगाई नहीं रुकी तो आम तावला ए बिफरैगा देखियो।।
भ्रश्टाचार तैं मुक्ति का आज कौणसा रास्ता अपनाया जावैगा
 इलेक्शनों का खर्चा ईब यो क्यूकर कितना उघाया जावैगा
बेलगाम घोड़े कै यो  लगाम किस तरियां लगाया जावैगा
देखना बाकी सै आम आदमी किस तरियां भकाया जावैगा
भ्रश्टाचार हिस्सा व्यवस्था का किस तरियां डिगरैगा देखियो।।
एक जंग और खड़ी साहमी देश  म्हारे मैं बेरोजगारी की
अठाइस करोड़ युवा षक्ति सै शिकार इस महामारी की
किततैं पैदा होवैगा रुजगार कैसे मुक्ति इस बीमारी की
युवा की उम्मीद बहोत घणी देखी समों इसनै लाचारी की
नहीं दिख्या सही रास्ता तो यो घणा कसूता चिंगरैगा देखियो।।
इलैक्षन पहलम खूब हुया काले धन का जिकरा देखो
इसनै उल्टा ल्यावण खातर चाहिये कसूता जिगरा देखो
आगै काला नहीं बणै कित सै इसका फिकरा देखो
कित कित तैं रोक्या जावैगा आज तव्यां पै सिकरा देखो
काला धन बेरहम घणा सै किस 
महिलावां की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करी जावैगी देखो
रेप छेड़ छाड़ छीना झपटी क्यूकर कम हो पावैगी देखो
छांट कै पेट मैं मारी जान्ती क्यूकर संसार मैं आवैगी देखो
काम मुश्किल  बहोत सै कद सुख तैं या रोटी खावैगी देखो
हामी भरी से इन कामां की राज कद सी मुकरैगा देखियो।।

Saturday, 15 March 2014

वोट देवां

चमेली पड़ौस की महिलाओं के बीच दोपहर को बात करती है ।
सभी महिलाएं महंगाई के बारे में बताती हैं । लैक्सन आगे पर महंगाई फेर
बी कम नहीं हुई । चमेली क्या कहती है ----
वोट देवां  जिब राखते हम सही गलत का ध्यान नहीं ॥
नाश करैंगे वे नेता जिनकै धोरै आज ईमान नहीं ॥
नजर घुमा कै देख लियो नित पेड़ झूठ का फलै सै
सच का तेल घलै दीवे मैं तो यो ज्ञान उजाला जलै सै
सच के दायरे मैं रहकै मन नहीं हिलाया हिलै सै
सच पै खड्या रहवै उसनै दिलां मैं जगां मिलै सै
विचार करै बुद्धि चेतन बिन चेतन मिलै ज्ञान नहीं ॥
भगत सिंह का नाम सुण्या धूम मचाई हिन्द म्हारे मैं
तेईस बरस का फांसी चढग्या सोचो कदे इस बारे मैं
सुणो आसान बात नहीं होती या ज्यान देनी आरे मैं
घर बार कति छोड़ दिया उसनै देश के प्रेम इशारे मैं  
म्हणत करकै दौलत पैदा करां समझे जां इंसान नहीं ॥
साच्ची बात कहूँ थारे तैं हम सच्चाई मंजूर करावैं
हाथ जोड़ कहूँ थारे तैं सच का साथ जरूर निभावें
सच्चाई पै चलना चाहिए सच्चाई का घर दूर बतावैं
बनावटी मिलावटी की जागां इंसानियत का नूर खिलावें
सच्चा सौदा ए बिकवावेंगे झूठ की चलै दुकान नहीं ॥
वो मानस ना किसे काम का जो सच पै सिर धुनै नहीं
अपनी कमाई का हिसाब वो बैठ कै कदे बी गिनै नहीं
वोहे मानस सदा सुख पावै सै जो बात झूठी सुनै नहीं
आज जो ठीक नहीं वो उस परम्परा का जाल बुनै नहीं
छुआछात की जो बात करै वो इंसान की संतान नहीं ॥

CHUNAV

हरयाणा  चुनाव के मुदे जिक्र कोए ना करता रै ॥
सबकी सेहत ठीक रहवै हाँ भरतें क्यूँ डरता रै ॥
आच्छी शिक्षा मिलै सबने  इस पर कोए विचार नहीं
पढ़ाई पढन बिठा राखी इसतैं बड़ा अत्याचार नहीं
क्वालिटी शिक्षा का नहीं कोए सही रास्ता उभरता रै॥
स्वास्थ्य सेवाएं प्राइवेट मैं गरीब जा नहीं पावै यो
सरकारी ढांचा बैठ लिया आज गरीब किट जावै यो
मुफ्त इलाज का दावा मरीज बिना इलाज मरता रै॥
बिना नौकरी लम्पट बनगे अपराधों का औड़ नहीं
पीसा चलै कै सिफारिस हाँडो जिसका जोड़ तोड़ नहीं
जनतंत्र पढण बिठाया भ्रष्ट का ना पेटा भरता रै ॥
नाज सड़ै गोदामां मैं जनता भूख तैं बिलख रही
अमीरी गरीबी पै हँसै लुआ विकास के तिलक रही

चुनाव अजेंडा जनता क्यूँ नहीं आज उतरता  रै ॥

विकास कहूँ या कहूँ तबाही

विकास कहूँ या कहूँ तबाही
विकास कहूँ या कहूँ तबाही , बात मेरी समझ नहीं आई,
हुई क्यों गामां की इसी छिताई , दिल्ली के गाम चर्चा मैं आये ॥
दिल्ली का विस्तार हुआ तो अनेक गाम इसमें आये थे
धरती अक्वायर करी इनकी घने सब्ज बाग़ दिखाए थे
बहोत घर बर्बाद हुए , जमा थोड़े घर आबाद हुए
पीकै दारू कई आजाद हुए , चपेट मैं युवा लड़के आये॥
दिल्ली तैं कोए सबक लिया ना ईब हरयाणा की बारी
एन  सी आर  के नाम तैं इसकी बर्बादी की तैयारी
विकास पर कोए चर्चा ना , आज पूरा पटता खर्चा ना
इसपै लिख्या कोए पर्चा ना , बीस लाख एक किल्ले के लाये॥
नशे का डूंडा पाड़  दिया ये नौजवान चपेट मैं आये
फ्री सैक्श के खोल दरवाजे युवक युवती भरमाये
हाल करे कसूते लूटेरे नै , मचाई लूट इनै चौफेरे  नै
बाँट जात पात पै कमेरे नै , नंबर वन के नारे लगाये ॥
ईको अर जेंडर फ्रेण्डली विकास समता साथ ल्यावै
ना तो दिल्ली जैसे खाग्या न्यूए एनसीआर इसनै खावै
बहस विकास ऊप्पर चलावां , नया  हरयाणा किसा  बणावां
रणबीर नक्शा मिलकै खिंचावाँ ,कैसे यो हरयाणा बच पाये ॥

महिला के अपने पति से सवाल

महिला के अपने पति से सवाल

सारे एकसी बात करैं किसकी मानूं बात पिया ॥
वोट लियाँ पाछै कई मारते कसूती लात पिया ॥
म्हारी पढ़ाई उप्पर सब अपने रंग मैं बोलैं
म्हारी कैड़ खड़े होकै थोड़े से बात सही  तोलैं
ये बालक नयों ए घूमैं  कोए नहीं पूछै जात पिया ॥
बीमार होज्यां तो इलाज करवाना मुस्किल होवै  
झाड़ फूंक पूजा पाजा गरीब इलाज उड़ै टोहवै
अन्धविसवासी कहै बतावैं म्हारी ऑकात पिया ॥
बिना नौकरी पैर भिड़ावैं कला धन खींच रह्या
क्यों खेवनहार आँख इस कंही तैं मींच रह्या
बेकार मानस नै बरतै खूबै या जात पात पिया॥
अमीर गरीब की खाई खुबै आज बढ़ायी देख
राम का रोल्ला नहीं सै नीति इसी ए बनाई देख

रणबीर बतावै हमनै कैसे कटै या रात पिया ॥

पति पत्नी में लेफ्ट और आप की रैल्ली पर बहस

पति पत्नी में लेफ्ट और आप की रैल्ली पर बहस
महिला --लेफ्ट पार्टियां की रैल्ली हिसार मैं दखे उसमें जाना चाहूँ सूँ
पुरुष -----आप पार्टी की रैल्ली रोहतक मैं दखे तनै मैं बताना चाहूँ सूँ
महिला    के लेगा आप मैं जाकै यो तो भानमती का कुनबा बताते हैं
             बिना आइडियोलॉजी की पार्टी अपनी को केजरी जताते हैं
             कुछ बात सही सैं उनकी पर महिला इशू तो नहीं उठाते हैं
            दलित के सवालों पर भी अपने पत्ते नहीं खोल दिखाते हैं
            खाप पर सही साफ समझ नहीं मैं न्यूँ समझाना चाहूँ सूँ ॥
  पुरुष   लेफ्ट देख लिया बंगाल मैं तीस साल का राज करया
             ईमानदारी बरती पूरी सै पर आम का नहीं पेट भरया
             धरती बंटी सबतैं फालतू पर मजदूर नै क्यूँ ना सरया
             ममता नै क्यूँ कूँ मैं लाया कुर्सी पर तैं क्यूँ तार गिरया
 लेफ्ट हरयाणा मैं कमजोर सै ज्यां आप नै ल्याना चाहूँ सूँ ॥
महिला    किते की ईंट किते का रोड़ा भानमती नै कुनबा जोड्या
             घनी तरियां की सोच के मानस इस बात नै मन तोड़या
             कई जगां एक दूजे कै  सर ठीकड़ा आपस के मैं फोडया
              रोहतक जन सेवा संसथान नै इस कान्ही मुंह मोड़या
              यो जनसंघी पक्का सै पिया साच साच दिखाना चाहूँ सूँ॥
पुरुष        लेफ्ट की रैली तैं आप की रैल्ली या घनी बड्डी होवैगी  
              फेर बताऊँ तनै  माथा पकड़ कै साँझ नै आकै रोवेगी
              मेरे जी नै रोजाना तूँ बीज बिघन के संतरा बोवेगी
              लेफ्ट का झूठा गुणगान करकै तूँ झूठे झगडे झोवैगी
               लेफ्ट का इबै ब्योंत नहीं सै ज्यां आप अपनाना चाहूँ सूँ॥
महिला     और तो मनै बेरा ना पर संघर्ष मैं रोज ये देखे बताऊँ
              सही विवेकशील बात करैं ये मैं दिल खोलकै  दिखाऊँ
              महिला दलित के हिमायती कितने किस्से गिनवाऊं
              त्रिपुरा केरल बंगाल मैं आवैंगे चाल हिसार समझाऊँ
              कुलदीप कहै आप की छाप दिल तेरे तैं हटाना चाहूँ सूँ॥
 

      

नकली झाड़ू असली झाड़ू

नकली झाड़ू असली झाड़ू
असली झाड़ू नकली झाड़ू की फर्क समझ नहीं आई
एक झाड़ू केजरी लेरया असली झाड़ू पाछे नै धिकाई
नकली झाड़ू रोहतक मैं बैठ कै नै आयी सफारी मैं
असली झाड़ू हिसार मैं आयी टूटी फूटी सवारी मैं
रैली तैं उलटे जाते देखे जिब मनै फर्क दिया दिखाई
पाँच सीटों मैं तैं दो पर चौखे पीसे आले छांटे बताये
बिना दो नंबर के ये पीसे एक मैं किस ढालाँ कमाए
हिसार कुरुक्षेत्र जूत बज्या टिकट सही कै ना थयाई
कितै की ईंट कितै का रोड़ा केजरी  नै कुनबा जोड़या
केजरीवाल नै असल झाड़ू तैं बूझो क्यूँ मुंह मोड़या
बिना आइडियोलॉजी ना कोए पार्टी लाम्बी चल पायी
मोदी मोदी करैं अमीर हम उनकी बहका मैं आवैं
किसानो सोच लियो बिना असली झाड़ू ना काबू पावैं
कांग्रेस झाड़ू आड़ू भजपा झाड़ू मानस मार बताई


भाजपा

भाजपा हुई सै हड़खाई भाई मोदी मोदी पुकारै रै॥
मोदी अमरीका का टोडी किसान नहीं बिचारै रै॥
अटल बिहारी माफी मांगकै जेल तैं बाहर आये थे
गोडसे आर एस एस का जिनै गांधी मार गिराए थे
मंदिर मस्जिद के झगडे अपने हथियार सँवारै रै॥
देशी की बात करै बदेशियाँ तैं हमेश हाथ मिलाये रै
बदेशी लूट के खोले दरवाजे हाम समझ ना पाये रै
दंगे करवा हिन्दू मुस्लिम के घने मानस या मारै रै॥
इतिहास गवाह सै इसका देश का या नाश करैगी
डंडे गेल्यां हाँकैगी सबनै अम्बानी का पाणी भरैगी
भाजपा नै रोको किसानो फासीवाद खड्या द्वारै रै॥
आज कही याद राखियो याद कमजोर म्हारी देखो
भजपा आगी तो मुशीबत होज्या सबनै भारी देखो
सोच समझ कै वोट गेरियों भाजपा जरूरी हारै रै॥

Thursday, 6 February 2014

लिए दिल नै डाट

एक  परिवार गरीबी में मजदूरी करके  है ।
रमेश अपनी पत्नी से बातचीत करता है ।
 कवि  के शब्दों में ___

लिए दिल  नै  डाट , मतना देखै बाट
घर बच्या ना खाट , खोस लेगी महँगाई ॥
हो लिए  सब तरां तैं तंग
इब होगे सैं मरने के ढंग
मारैगी या  बीमारी , इलाज हुया भारी
देख किसी  लाचारी , म्हारे साहमी आई ॥
बर्बादी डाटी नहीं डटी सै
ईज्जत सब तरियां घटी सै
तीन मैं दो मरगे , आँख बंद करगे
घने लाले पड़गे , नहीं सुणी दुहाई ॥
\होगी म्हारी जिंदगी पैमाल
महंगाई नै करे सां बेहाल
नहीं रहे सुखी , सुण सूरज मुखी
कर दिए दुखी , कसूती फांसी लाई ॥
किसकै जाकै टक्कर मारां
चढ्या कर्जा क्यूकर तारां
राह कोए बताओ , सूली पै ना चढ़ाओ
कुछ तरस खाओ , रणबीर करो सुनाई ॥ 

Monday, 3 February 2014

विक्रम और चमेली

विक्रम और चमेली प्रेम विवाह करते हैं । घरवाले नाराज थे । मगर भगत सिंह से काफी प्रभावित हुए । समाज सुधर के काम में जुट गए । लेकिन विक्रम आप में जाने का मन बनता है और दिल्ली चला जाता है । चमेली गाओं में अकेली रह जाती है । एक दिन क्या लिखती है चिठ्ठी में ---
आप मैं चाल पड़या दिल तोड़ कै नयी नवेली का ॥ 
दोनों नै क्रान्ति की कसम खाई जी लागै ना अकेली का ॥ 
मेरे दिल पै  के गुजरी सै थाम मरदां नै के बेरा 
करवट बदलतें रात चली जा होज्या न्यूयें सबेरा 
बिना तेरे साथ विक्रम यो घर भूतां का डेरा 
तेरे बिन दिल मैं अँधेरा के सपने की हवेली का ॥ 
दिल की दिल मैं रहै थारे बिन कैसे हो मन चाह्या 
असली रही बीच छोड़ चल्या दूजा रह अपनाया 
मेरे वो बख्त याद आवै जो मनै थारी साथ बिताया 
संघर्ष मैं जी लगता कोन्या मन मैं लागै ना उम्हाया ॥ 
क्रांति तैं भरी सै काया समझ हाल तूँ चमेली का ॥ 
हाली बिन धरती सूनी बिना सवार के घोड़ी 
विचार मेल बिना कलह रहै घनी नहीं तो थोड़ी 
मनै सोची म्हारी या धुर तक चलैगी जोड़ी 
आप मैं दम कडै सै क्रांति विचार ना धेली कोड़ी  
बिन परखनिया देख किरोड़ी होज्या सस्ता धेली का ॥ 
आप मैं पार पड़ै कोन्या देख लिए गुण ग़ाकै नै 
याद रखिये बात मेरी कदे भूलै आप मैं जाकै नै 
राजी खुसी की खबर दिए मेरी चिठ्ठी नै पाकै नै 
जै उल्टा आवैगा तो मैं गाऊंगी गीत उम्हा कै नै 
रणबीर मतलब  खुलैगा इस अनखुली पहेली का ॥ 

पछतावैगा

चमेली और विक्रम मुनक गाओं के रहने वाले हैं । साक्षर भारत में काफी जोर शोर से काम किया ।  अब ज्ञान विज्ञानं समिति के सदस्य हैं । भगत सिंह के सपनो का भारत बनाने का उनका सपना है । अचानक आप की दिल्ली में जीत से विक्रम काफी प्रभावित हो जाता है और मन बना लेता है आप में जाने का । चमेली मना  करती है और क्या कहती है विक्रम को भला ---
मतना आप मैं जावै , चमेली न्यूँ  समझावै , तेरी समझ ना आवै 
                                                           तूँ पाछै पछतावैगा ॥ 
जनता नै दुखी होके नै बी जे पी कांग्रेस ढहा दई हो 
उम्मीद हम सब की जीत नै चारोँ कांही बढ़ा दई हो 
कांग्रेस बी जे पी भ्रष्टाचार की ढकनी या उठा दई हो 
जनता की ताकत कितनी दोनूंआं तैं सै दिखा दई हो 
दबाव हम बनावैं , सही रास्ता दिखावैं , भीतर तो घुट ज्यावै 
                                                           दबाव काम आवैगा ॥ 
भ्रष्टाचार की जड़ गहरी लड़ना इतना आसान कड़ै 
बाजार की व्यवस्था जड़ सै इब करना घमासान पड़ै 
व्यवस्था बदलै ना जब तक कठ्ठा हो ना किसान लड़ै 
शाषक हमनै पीटण खातर  नए नए तीर कमान घड़ै 
नब्बै दस का रोला सै , शाषक नहीं बोला सै ,संस्कृति का लाठोला सै 
                                                           रोज साँस चढावैगा ॥ 
जात  गोत  नात मजहब मैं किसान कसूते बाँट दिए
मुजफ्फर नगर मैं पुरानी एकता के ये पर काट दिए
साम्प्रदायिकता के सांटे गेल्याँ सबके बैल हांक दिए
जाट किसान मुस्लिम किसान न्यारे न्यारे छाँट दिए
याद छोटू राम आवै , कूण आज धीर बंधावै ,हटकै प्रेम बढ़ावै
                                                          एकता हटके ल्यावैगा ॥
भाई अर बहनो सुणल्यो आज का दौर कसूता घना
बेचैनी बढ़ती आवै देखो शासक वर्ग तो नपूता घना
बेचैनी का फायदा ठाकै डाकू बनया चाहवै सपूता घना
डैमोक्रेसी खतरे मैं गेरदी शासक हुआ कपूता घना
आज खिंचाई रघबीर , भारत की तस्वीर , गरीब की तहरीर
                                                        हरियाणे नै जगावैगा ॥



Saturday, 1 February 2014

चौधरी छोटू राम


पंजाब मैं हिन्दू मुस्लिम सिख की पूरी एकता बनाई तनै ॥
कट्टर वादियां तैं उन दिनां मैं थी जमकै धुल चटाई तनै ॥
बीस मैं कांग्रेस छोड़ कै या यूनियनिस्ट पार्टी बनाई तनै ॥
पूरे पंजाब मैं यूनियनिस्ट पार्टी की लहर  चलाई तनै ॥
महाजन संस्कृति की उन दिनाँ बही की लूट मिटाई तनै ॥
गरीब किसान की जमीन कुड़की होवण तैं बचाई तनै ॥
हजारों हजार नौजवानां की फ़ौज मैं भर्ती कराई तनै ॥
भाखड़ा डैम बनवा करकै भाखड़ा नहर लिकड़वाई तनै ॥
दोनों महायुद्धां मैं गोरयां की कहैं गलत मेर कटाई तनै ॥
कुछ भी हो छोटू राम पंजाब की सोयी जनता जगाई तनै ॥
कांग्रेस और मुस्लिम लीग तैं लेकै टक्कर दिखाई तनै ॥
वकालत के बदले तौर तरीके नयी रीत निभाई तनै ॥
पाकिस्तान ना बनने देवां कठ्ठे होकै आवाज उठाई तनै ॥ 

Friday, 31 January 2014

किसान के शोषण के बारे एक गीत (रागनी )

किसान के शोषण के बारे एक गीत (रागनी )

मौलड़ कहकै तनै तेरा शोषण साहूकार करै ॥
मौलड़ कोन्या करम तेरे तैं तूँ ना इंकार करै ॥

भैंस खरीदी तनै जिब धार काढ़ कै  देखी  थी
बुलद खरीदया तनै जिब खूड बाह कै देखी थी
वैज्ञानिक ढंग अपनाये कौन नहीं स्वीकार करै ॥

हल की फाली तनै अपने सहमी तयार करायी
पिछवा बाल की महत्व तनै ध्यान मैं ल्याई
पूरी खेती बाड़ी मैं तर्क विवेक तैं सब कार करै ॥

एक  क्वींटल गंडे की तनै कितनी कीमत थ्यायी
इसकी बैठ कै तनै  कद  विवेक तैं हिस्साब लगाई
शीरा अर खोही कितनी थी नहीं खाता तैयार करै ॥

तनै मौलड़ कह्वानीया ना चाह्ता हिस्साब सीखाना \
हमनै तो चाहिए कमेरे म्हारी लूट का खाता बनाना
रणबीर बरोने  आला लिखकै तनै होशियार करै ॥

Saturday, 25 January 2014

sindhu ghati

सिन्धु घाटी
सुणले करकै ख्याल दखे, ये गुजरे लाखां साल दखे
सिंधु घाटी का कमाल दखे, यो गया कड़ै लोथाल दखे,
यो करकै पूरा ख्याल दखे, खोल कै भेद बतादे कोए।।
सुसुरता नै देश का नाम करया, वागभटट नै चौखा काम करया
ब्रह्रा गुप्त नै हिसाब पढ़ाया, आर्यभटट जीरो सिखाया
नालन्दा नै राह दिखाया, तक्षशिला गैल कदम बढ़ाया
तहलका चारों धा मचाया, ये गये कडै़ समझादे कोए।।
मलमल म्हारी का जोड़ नहीं, ताज कारीगिरी का जोड़ नहीं
हमनै सबको सम्मान दिया, सह सबका अपमान लिया
ग्रीक रोमन को स्थान दिया, भगवान का गुणगान किया
इसनै म्हारा के हाल किया, या सही तसबीर दिखादे कोए।।
दो सौ साल राजा म्हारे देस के, बदेसी बोगे बीज क्लेश के
फिरंगी का न्यों राज हुया, चिड़ी का बैरी बाज हुया
सारा खत्म क्यों साज हुआ, क्यों उनके सिर ताज हुया
क्यों इसा कसूता काज हुया, थोड़ा हिसाब लगादे कोए।।
लाहौर मेरठ जमा पीछै नहीं रहे, म्हरे वीर बहादुर नहीं डरे
फिरंगी देस के चल्या गया, कारीगर फेर बी मल्या गया
र्म जात पै छल्या गया, संविधा म्हारा दल्या गया
क्यों इसा जाल बुण्या गया, रणबीर पै लिखवादे कोए।।







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