Wednesday, 22 February 2023

किसान के बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

 रागनी आज के हालात पर 

किसान के बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

अडानी अम्बानी नै बढा कै कै दिन राज चलै थारा रै।।

1

जनता दे मारी धरती कै बेरोजगारी खूब बढ़ाई 

या शिक्षा करदी घणी म्हंगी जनता कैसे करै पढ़ाई

पुलिस फौज सारै बुलाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

किसान कै बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

2

अपने यौवन पै भ्रष्टाचार तरीके न्यारे काढ़ लिए 

मेहनत कश आज देखो ये पूरे देश मैं बाढ़ दिए

मीडिया नै गोदी मैं बिठाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

किसान कै बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

3

बीमारी आज बढ़ती जां अस्पतालों मैं मिलै ना दवाई

बेमौत मारी जावै जनता कितै बी होती नहीं सुनाई

देशद्रोही का ठप्पा लगाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

किसान कै बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

गैंग रेप छेड़छाड़ आज दिन पै दिन बढ़ते जावैं 

घर मैं ना बाहर महफूज रणबीर बीर नै धमकावैं 

चारों कूट भरम फैलाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

किसान कै बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

जात नै माणस का माणस बैरी बणा जबर राख्या सै।

 कुछ साथियों को बुरा लग सकता है मगर जिंदगी में जात की खेलबाजी अंदर तक देखने के बाद ही इस जगह पर पहोंचा हूँ या पहुँचा दिया गया हूँ । 1978 की मैडीकल कालेज की 98 दिन लंबी हड़ताल जिसमें पूरा कालेज जाट नॉन जाट में बंट गया था और उसके बाद के झटके जिन्होंने आँखे खोल कर देखने को मजबूर कर दिया । 


जात नै माणस का माणस बैरी बणा जबर राख्या सै।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

1

दो किले आला जाट बी आज जाट सभा की कोली मैं

भूखा मरदा ब्राह्मण बी यो ब्राह्मण सभा की झोली मैं

फिरै भरमता रोड़ बिचारा आज रोड़ सभा की टोली मैं 

दलित भी बन्ट्या हुया देखो यो कई रंगों की रोली मैं 

जात पात का घणा कसूता दखे विष यो भर राख्या सै ।

2

जात के रंग ढंग मैं सै या मानवता बाँटण की मक्कारी 

कथनी घणी सुहानी लागै सै पर पाई करणी मैं गद्दारी 

काली नाग और पीत नाग ये भाई बिठाये एक पिटारी

मुँह मैं राम बगल मैं छुरी भाई सै या बुझी जहर दुधारी 

जात्यां के बुगळे भगतां नै यो मिला सुर मैं सुर राख्या सै।

3

ब्राह्मण खत्री वैश्य और शुद्र ये चार वरण बताये सुणो

मनु जी नै फेर वरणां कै जात्यां के पैबन्द लगाये सुणो

गोत नात कबिल्यां भितर बेरा नहीं कद सी आये सुणो

जन्म कारण जात माणस की ग्रन्थ लिख़कै ल्याये सुणो

इसकी आड़ मैं लुटेरे लूटैं माणस बणा सिफर राख्या सै।

4

ढेरयां आला कुड़ता म्हारा या जात पात बताई आज 

गेहूं के खेत मैं ऊग्या हुया बथुआ जात सुझाई आज

ठेके कै म्हां लागी सुरसी गिहूँआं की मर आई आज

ये कमेरे दुखी जात्यां मैं नेतावां नै चादर घुमाई आज

काढ बगादे यो कुड़ता इसनै आज कर बेघर राख्या सै।

5

जात छोड़ कट्ठे होंवैं काम करणिये भुखे मरणीये भाई 

गोत नात छोड़ कट्ठे हों ये जितने नौकरी चढ़निये भाई

टूचावाद छोडकै कट्ठे हों सब बेरोजगार फिरणीये भाई

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई ये मानवता पर चलनिये भाई 

म्हारै ना जात किसे काम की कर क्यों सबर राख्या सै।

6

सारी दुनिया रुके देकै नै ईब दो जमात बतारी देख 

एक कमेरा जिसकी मेहनत दुनिया मैं रंग दिखारी देख

दूजा लुटेरा जिसनै लूटी म्हारी सजाई दुनिया सारी देख

या पाले बंदी छिपाने खातर चलै जात की आरी देख

म्हारे माल के हम भिखमंगे यो बना आडम्बर राख्या सै।

बार बार झूठ बोलकै इसनै साच बतावण लागे रै ।।

 बार बार झूठ बोलकै इसनै साच बतावण लागे रै ।।

असली आंकड़े ल्हको कै झूठे  दिखावण लागे रै।।

1

सीबीआई पढण बिठाई सुप्रीम कोर्ट दिया घेरे मैं

रिजर्व बैंक कमजोर करया कई चीजां के फेरे मैं

हिन्दू राष्ट्र का देकै नारा धर्म जाल बिछावण लागे रै।।

असली आंकड़े ल्हको कै झूठे  दिखावण लागे रै।।

2

किसानी संकट बढ़ता आवै ना कोये ख्याल किसान का

या महंगाई बढ़ती जावै बुरा हाल गरीब इंसान का 

धर्मान्धता के नारे लवाकै दंगे करावण लागे रै।।

असली आंकड़े ल्हको कै झूठे  दिखावण लागे रै।।

3

बेरोजगारों की लाइन लाम्बी कावड़ ल्याण पै लादी

अंध विश्वास खूब फैलारे विज्ञान की भ्यां बुलादी

आज समाज मैं नफरत जान बूझ बढ़ावण लागे रै।।

असली आंकड़े ल्हको कै झूठे  दिखावण लागे रै।।

4

प्यारे हिंदुस्तान की बहुविविधता कोण्या भाती रै

जात धर्म पै बांट कै बण बैठे शासक खुरापाती रै

रणबीर भाईचारे की आवाज उठावण लागे रै ।। 

असली आंकड़े ल्हको कै झूठे  दिखावण लागे रै।।

जब जब जनता जागी  यो जुल्मी शोषक झुका दिया ।।

 जब जब जनता जागी  यो जुल्मी शोषक झुका दिया ।।

भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।। 

आजाद देश का सपना पहुंचा शहर और गांव मैं 

भगत सिंह फांसी टूटा जोश था  देश तमाम मैं

 दुर्गा भाभी गेल्याँ  जुटगी इस आजादी के काम मैं 

लाखाँ नर और नारी देगे या कुर्बानी गुमनाम मैं 

कुर्बानी बिना नहीं आजादी गांधी अलख जगा दिया ।।

भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।

गोरे गये आगे काले गरीबी जमा मिटी नहीं सै

बुराई बढती आवै सै भिद्द इसकी पिटी नहीं सै 

अच्छाई संघर्ष करण लागरी आस जमा घटी नहीं सै

जनता एक दिन जीतेगी या उम्मीद छुटी नहीं सै 

म्हारी एकता तोडण़ खातिर जात पात घणा फैला दिया।।

भारत तैं जुल्मी गौरा मिलकै सबनै भगा दिया।।

जात पात हरियाणा की सै सबतैं बड्डी बैरी भाइयो

विकास पूरा होवण दे ना दुनिया याहे कैहरी भाइयो

वैज्ञानिक सोच काट सै इसकी जड़ घणी गहरी भाइयो

अमीराँ की जात अमीरी म्हारै गरीबी फैहरी भाइयो

समता वादी समाज होगा संघर्ष का डंका बजा दिया ।।

भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।। 

दारू माफिया मुनाफा खोर इनकी पक्की यारी देखो 

भ्रष्ट पलसिया औछा नेता करता चौड़े गद्दारी देखो 

बिचोलिया घणे पैदा होगे म्हारी अक्ल मारी देखो 

लंबे जन संघर्ष की हमनै कर ली तैयारी देखो 

रणबीर भगत सिंह ने रास्ता सही दिखा दिया।।

भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।

अर्थव्यवस्था म्हारे देश की ढांचागत संकट बीच आगी।।

 अर्थव्यवस्था म्हारे देश की ढांचागत संकट बीच आगी।।

संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।

1

विकास दर बेरोजगारी के बहोत दिन आंकड़े छिपाए

इनमें फेरबदल करकै ना बढ़ता संकट ल्हको पाये

सेहत अर्थव्यवस्था की गिरी मामले सबकै साहमी आये

सरकारी अर्थशास्त्री भी आज बहोत घणे सैं घबराए

कबूल करने को मजबूर या कड़वी सच्चाई हिलागी।।

संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।

2

इस आर्थिक मंदी का आज मजदूर वर्ग शिकार होग्या रै

इनके हकां पै देखो चौड़े यो घणा कसूता प्रहार होग्या रै

जो थोड़ा घणा बचरया था तबाह पूरा परिवार होग्या रै

संकट बढ़ता जावै देश मैं मजदूर घणा लाचार होग्या रै

मजदूर वर्ग नै आर्थिक मंदी आज कसूती ढ़ालां खागी।।

संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।

3

आर्थिक मंदी खत्म करण नै या सरकार कानून बणावै

देशी बदेशी पूंजीपति के या सरकार तलवे चाटती पावै

लाखों करोड़ की करों मैं छूट कति देवंती नहीं शरमावै

तोहफे दे पूँजीपतियाँ नै हमनै देशभक्ति के पाठ पढ़ावै

बात पक्की इस मॉडल तैं या आर्थिक मंदी बढ़ती जागी।।

संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।

4

यूनियन बनाने के अधिकार पूंजीपति नै ढीले करवाये

वेतन भत्ते कम करकै नै इसनै हथियार कसूत चलवाये

फिक्की के इशारयां उप्पर पूरे अमल करकै दिखलाये

सौ कानून थे मजदूरों के चार संहिताओं मैं सिमटवाये

दीन हालात या मजदूरों की रणबीर की कलम बतागी।।

संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।

राज गुरु सुख देव भगत सिंह तेईस मार्च नै फांसी पै लटकाये।।

 राज गुरु सुख देव भगत सिंह तेईस मार्च नै फांसी पै लटकाये।।

हुसैनी वाला में अधजले तीनूं  सतलुज नदी के मैं गये बहाए।।

1

धार्मिक कट्टरवाद और अंधविश्वास समाज के बैरी बताये

विकास के पक्के रोड़े सैं इनपै लिख कै संदेश घर घर पहूंचाये

लिख मैं नास्तिक क्यों सूं एक पुस्तिका मैं अपने विचार बताये।।

2

इंसान के छूने से सवाल करया हम अपवित्र कैसे हो ज्यावैं 

पशु नै रसोई मैं ले जाकै क्यों हम अपनी गोदी के मैं बिठावैं

कति शर्म नहीं आती हमनै क्यों इसे रिवाज समाज मैं चलाये।।

3

जो चीज आजाद विचारों नै बर्दाश्त नही कर पावै देखो रै

हों इसी चीज खत्म समाज तैं तीनूं नौजवान चाहवैं देखो रै

समाजवाद के पढ़े विचार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लाये।।

4

लोग नहीं लड़ें आपस के मैं जरूरत वर्ग चेतना की बताई

किसान मजदूर की असली बैरी पूंजीपति की वर्ग समझाई

सुखदेव राजगुरु भगत सिंह नै रणबीर ना पाछै कदम हटाये ।।

उन्नीस सौ सात आंदोलन बारे जब हम किताब ठावैं रै।।10

 उन्नीस सौ सात आंदोलन बारे जब हम किताब ठावैं रै।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

1

लाला जी और अजित सिंह इस आंदोलन के अगाड़ी थे

पगड़ी सम्भाल आंदोलन के वे घणे तगड़े खिलाड़ी थे

पढ़कै पगड़ी सम्भाल जट्टा बांके दयाल कवि सुनावैं रै।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

2

गीत नै अभिमान किसानों का उन बख्तों मैं ललकार दिया

इस कविता के भाव को किसानों नै कर अंगीकार लिया

गोरे दबावण की खातर किसानों ऊपर घणे जुल्म ढावैं रै।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

3

गोरी सरकार कृषि कानून उन्नीस सौ सात के मैं ल्याई थी

चुपके चुपके पास करया नहीं चर्चा किसे तैं चलाई थी

नहर कालोनियां मैं रहवनियाँ के वे हक खोसे चाहवैं रै।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

4

बे उल्लादे जमींदार के मरे पाछै जमीन खोसी चाही थी

जिला अफसर मालिक होगा या काली कानून बनाई थी

लायलपुर मैं होकै कट्ठे ये हजारों किसान विरोध जतावैं रै।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

5

अजित सिंह लाला जी नै किसानों साथ मिलकै विरोध जताए

अनदेखी करी गोरयां नै और घणे उनपै जुल्म थे ढाये

दोनूं मांडले जेल भेज दिए गोरे आंदोलन दबाया चाहवैं रै।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

6

पूरा पंजाब कट्ठा होकै नै विरोध जतावण के ऊपर भिड़ग्या

बढ़ता गया विरोध गोरयां का कानून खारिज करणा पड़ग्या

ऐतिहासिक हुया वो आंदोलन जब हम हिसाब लगावैं रै ।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

7

गदर लहर बब्बर अकाली इणनै ये विचार आगै बढ़ाये थे 

भगत सिंह हर बरगे क्रांतिकारी आजादी जंग मैं छाये थे

उन्नीस सौ सैंतालीस मैं गोरयां तैं आजादी भारतवासी पावैं रै।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

8

रणबीर फेर दी गूंज सुनाई पगड़ी सम्भाल सरोकारों की

काले कानून ल्याई सरकार नहीं पूछ म्हारे विचारों की

पगड़ी सम्भाल स्वाभिमान पै ये गायक गीत सुनावैं रै।।

यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।

Tuesday, 21 February 2023

पगड़ी सम्भाल का दिन आज देश मैं मनाया जावै।।*

 *पगड़ी सम्भाल का दिन आज देश मैं मनाया जावै।।*

*अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।*

1

एंग्लो सिख युद्ध मैं भाग लिया परदादा फते सिंह नै 

आधी जायदाद जब्त करी गोरयां नै म्हारे हिन्द मैं

*दादा अर्जुन सिंह उन बख्तों का  समाज सुधारक कहावै।।*

अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।

2

किशन सिंह पिता चाचा अजीत लड़ी आजादी की लड़ाई

चाचा स्वर्ण सिंह साथ मैं इंकलाब जिंदाबाद गूंजाई

*अंग्रेज गोरा इनकै ऊपर सारे तरां के यो जुल्म ढ़ावै।।*

अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।

3

घर की महिलावां नै भी इनका धुर ताहिं साथ निभाया

दादी जयकौर मां विद्यावती कदम तैं था कदम मिलाया

*चाची हरनाम कौर हुक्म कौर भी सारै आगै खड़ी पावै।।*

अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।

4

अंग्रेजों के जुल्मों के खिलाफ लाया पगड़ी सम्भाल का नारा

बालक भगत सिंह नै आंख्या देख्या था यो सारा नजारा

*रणबीर यो किसान आंदोलन पगड़ी सम्भाल याद दिलावै।।*

अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।

मैडीकल के छात्र के कत्ल के वक्त लिखी एक रागनी 

 मैडीकल के छात्र के कत्ल के वक्त लिखी एक रागनी 

क्यों खिलता फूल तोड़ दिया घणा बुरा जमाना आग्या।।

यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।

1

तीनों यारां नै मैना में मौज मस्ती खूब मनाई थी नींद की गोली यतेन्द्र नै बीयर बीच मिलाई थी कई दिन पहलम कत्ल की उनै स्कीम बनाई थी गल घोंटकै मार दिया आवाज कती ना आई थी   

सारी डॉक्टर कौम कै यतेंद्र यो कसूती कालस लाग्या।

यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।

2

माता कै के बाकी रही जब खबर कत्ल की आई टेलीफोन पै बात हुई ईबीसी फेटण भी नहीं पाई कोर्स पूरा होग्या सोचै थी मैं कर दयूं इब सगाई

क्यों कत्ल हुया बेटे का ना करी कदे कोये बुराई

खुद तै चल्या गया सोनी फेर पूरे घर नै जमा ढाग्या।।

यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।

3

क्यों यार का यार बैरी करते क्यों विचार नहीं 

दारू नशे हिंसा का रोक्या क्यों यो व्यापार नहीं 

कांफ्रेंस प्यावैं जमकै दारू न्यों होवै उद्धार नहीं 

या हिंसा ना रोकी तो बचै किसे का घरबार नहीं

दारू नशे हिंसा का पैकेज यो चारों तरफ आज छाग्या।

यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।

4

एक औड़ नै कुआं दीखै दूजे औड़ खाई मैं धसगे

घणे जण्यां के अरमानों नै ये नाग काले डसगे

बैर ईर्ष्या लोभ मोह जनूँ तो रग रग के मैं बसगे 

हरियाणे के छोरे छोरी कसूते भंवर के मैं फ़सगे

मैडीकल ऊपर सोचो मिलकै रणबीर सवाल यो ठाग्या।।

यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।

हम दिए धरती कै मार, कसूते

 हम दिए धरती कै मार, कसूते विश्व बैंक के वार, करने हाथ पड़ें दो चार , सुनियो भारत के नर नारी।।

1

खेती पर काले बादल छाए कमर तोड़ कै धरी रै धान कपास गेहूं पिटया जमा नाड़ मोड़कै धरी रै सब्सिडी खत्म कर दी ,क्यों हांडी पाप की भरदी असली नहीं हम दरदी विश्व बैंक में घणी डांडी मारी।। 

2

कारखाने लाखां बंद होगे ना बच्या कितै रोजगार नेता अपराधी माफिया का यो खाली जा ना वार काला धन बाजार मैं आया, अमेरिका ने जाल बिछाया,मध्यम वर्ग खूब भकाया, दिखाकै सपने बड़े भारी।।

3

टीवी पै घणे चैनल आगे ये भुंडी फ़िल्म दिखावैं

औरत दी एक चीज बणा बाजार मैं बोली लावैं

महिला भी इंसान होसै, न्यों उसका अपमान होसै, ना हमनै उन्मान होसै,पुरानी रीत कई अत्याचारी।।

4

पढ़ाई लिखाई महंगी करी यो गरीब कड़ै जावै

पढ़ लिख कै बिना पहोंच दफ़्तरां के धक्के खावै

अनैतिकता मैं पलै बढ़ै, वो नैतिकता के नारे गढ़ै

रणबीर की छाती पै चढै, छलनी करदी छाती सारी।।

Monday, 20 February 2023

बासठ किसान मजदूर संगठन ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।

 16 जून का आंदोलन --एक रागनी 

बासठ किसान मजदूर संगठन ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।

खेती व मजदूर विरोधी नीति या भाजपा नै अपनाई रै।।

1

किसान की तरफ ध्यान नहीं या स्वामीनाथन नै नाट गई 

फांसी खा खा किसान मरैं भाजपा ले राज के ठाठ गई

न्यारे न्यारे बांट कै जातयाँ मैं किसानां की करी सै पिटाई रै।।

बासठ किसान मजदूर संगठन  ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।

2

मजदूरों पै हमला बोल्या मनरेगा के बजट घटाया रै

ठेकेदारी प्रथा नै म्हारे देश मैं घणा कोहराम मचाया रै

महंगाई दिन दूनी बढ़ती जावै होन्ती ना कितै सुनाई रै।।

बासठ किसान मजदूर संगठन  ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।

3

सोलां जून का दिन भारत का ईब नया इतिहास रचैगा

किसान मजदूर मोर्चे आगै नहीं जुल्मी बेईमान बचैगा

सरमायेदारों के कर्जे माफ करे ना म्हारी कितै सुनाई रै।

बासठ किसान मजदूर संगठन ये लेवैंगे अंगड़ाई रै।।

4

लुटेरे और कमेरे बीच मैं आज घलता आवै पाला भाई

रणबीर सिंह बरोने आला कहै लेल्यो ईब सम्भाला भाई

किसान कमेरे की यारी खोलैगी मानवता की नई राही रै।।

बासठ किसान मजदूर संगठन ये लवैंगे अंगड़ाई रै।।

ज्ञान विज्ञान आंदोलन नै आंख खोल दी म्हारी

 ज्ञान विज्ञान आंदोलन नै आंख खोल दी म्हारी

समतावादी संसार बनावां या इच्छा बढ़ती जारी।।

भेद लोग लुगाई के 

जात पात की खाई के

सरतो धापां ताई के

विकास की राही के,समझेंगे सब नर नारी।।

समतावादी संसार बनावां या इच्छा बढ़ती जारी।।

2

अमरीका दादा हो गया

बीज बिघन के बो गया

सुख हमारा खो गया

आम आदमी सौ गया, इब नींद खुलती आरी।।

समतावादी संसार बनावां या इच्छा बढ़ती जारी।।

3

कोरोना बात समझाई

गरीब की नहीं सुनाई

संसार मैं खोल बताई

समता नहीं टोही पाई,  टूटी जनता की खुमारी।।

समतावादी संसार बनावां या इच्छा बढ़ती जारी।।

4

मंजिल नहीं कहते दूर

हमारी ताकत भरपूर

अमरीका का गरूर 

तोड़ैगी दुनिया जरूर,रणबीर की कलम पुकारी।।

समतावादी संसार बनावां या इच्छा बढ़ती जारी।।

चोर जार नशेबाज जुआरी 

 चोर जार नशेबाज जुआरी 

चोर जार नशेबाज जुआरी बढ़ते जावैं समाज मैं ॥ 

इनकी लिखूं कहानी सुणो अपणे ही अंदाज मैं ॥ 

पहले बात करू चोर की हाथ सफाई दिखावैं ये 

घने  चोर तो  ताला तोड़ लें दुष्ट कमाँ कै नहीं खावैं ये 

घिटी मैं गूंठा  देकै मारदें  घर साफ़ कर ले ज्यावै ये 

राह चलती महिला की चेन दो मिनट मैं झपटावें ये 

चोर बी के करैं और कोए नौकरी ना इस राज मैं ॥ 

जार आदमी दुष्ट घना पर नारी पै नीत  धरै सै रै 

कुकर्म करता हाँडै वो उसका पेट नहीं भरै सै रै 

पकड़या जा जब जूत लगैं जूतां तैं बस डरै सै रै 

नालियां मैं मुंह मारता एक दिन बेमौत मरै सै रै 

पहर धोले लत्ते यो घूमै दुनिया  हवाई जहाज मैं ॥ 

नशे बाज का के कहना रोज नशा करना उसनै 

तर तर तर जुबान चलै किसे तैं ना डरना उसनै 

सुल्फा गान्झा भांग धतूरा पी डूब मरना उसनै 

अगल बगल मैं झाँकै फेर पाप घड़ा भरना उसनै 

नशा उतर ज्या तो कहै सुधरना चाहूँ कर इलाज मैं ॥ 

चोर जार नशेबाज जुआरी सब तैं मानस बताये 

औढ़न पहरण नहान खान तैं ये बालक तरसाये 

घाघरे टूम तक ना बक्शी चोरी कर नशे चढ़ाये 

गाम मैं आतंक फैलाया सरीफ मानस घबराये 

रणबीर समझाया चाहवै समाज सुधर की खाज मैं ॥

Sunday, 19 February 2023

महिला गेल्याँ किसे ढाल की बदफेली जमा स्वीकार नहीं।।

 महिला गेल्याँ किसे ढाल की बदफेली जमा स्वीकार नहीं।।

बलात्कारी साथ खड़ी हो वा किसे दीन की सरकार नहीं ।।

एम एल ए मंत्री शामिल पावैं देश का औड़ आग्या देखो

महिला ताहिं सुरक्षित आज रहया राज दरबार नहीं ।।

दो तीन केश बलात्कार के पाछै सी सबकै साहमी आये

बलात्कारियों संग जलूस काढ़ें बर्दास्त यो व्यवहार नहीं ।।

बलात्कारी जमानत ले ज्यावै यो किसा फैंसला जज का

पीड़िता पै केस दर्ज होवै इसतैं बड्डा तो अत्याचार नहीं ।।

रेपकांडां की बाढ़ देश मैं यो राज क्यों जालिम होग्या रै

एम पी उल्टे सीधे ब्यान दे दें के उनकै घर परिवार नहीं।।

महिला सम्मान खतरे मैं यो पूरे देश मैं आग्या देखो रै

रणबीर जन एकता तैं बढ़िया और कोये हथियार नहीं ।।

Saturday, 18 February 2023

म्हारे देश कै बट्टा लाया प्यारे मोदी नै।।

 म्हारे देश कै बट्टा लाया प्यारे मोदी नै।।

काले धन उपर बहकाया प्यारे मोदी नै।।
1
बाड़ खेत नै खागी नल दमयंती सुनते रहे
नींद आई रूखाले नै पापी जाल बुनते रहे
नफरत का माहौल बनाया प्यारे मोदी नै।।
काले धन उपर बहकाया प्यारे मोदी नै।।
2
बिना दवाई और पढ़ाई म्हारे बालक रूलगे रै
सचाई की हुई पिटाई झूठ के फाटक खुलगे रै
धर्मान्धता का जहर फैलाया प्यारे मोदी नै।।
काले धन उपर बहकाया प्यारे मोदी नै।।
3
नैतिकता पै प्रहार करैं बन नैतिकता के रखवाले
नँगे पन का प्रचार करैं बन नैतिकता के रखवाले
लूट खसोट का बाजार बढ़ाया प्यारे मोदी नै।।
काले धन उपर बहकाया प्यारे मोदी नै।।
4
पाखंड का लेकै सहारा भारत की जनता लड़वाई
गऊ माता का ले बहाना या नफरत बहोत फैलाई
कुलदीप घणा कहर यो ढाया प्यारे मोदी नै।।
काले धन उपर बहकाया प्यारे मोदी नै।।

बम्बई


बम्बई 

कोठी बंगले अर भूखे कंगले बम्बई की तसबीर भाई रै। 

मेहनत करता वो भूख मरता दुनिया की तकदीर भाई रै।। 

1.  

समुद्र किनारा शहर प्यारा इसतै आच्छी बात नहीं सै 

महल अट्टारी बनती जारी बिन पीस्से औकात नहीं सै 

पीस्सा ईमान हुया भगवान रही माणस की जात नहीं सै 

इनसान मशीन करले यकीन पफुरसत दिन रात नहीं सै 

होटल आलीशान ये बढ़ावैं मान मनै सही तदबीर लड़ाई रै। 

2.  

शिवसेना भाई उड़ै छाई बदमाशी का कोए औड़ नहीं 

माफिया राज बताया आज इसका कहैं कोए जोड़ नहीं 

फिल्मी सितारे टोर बनारे राजकुमार तै घणी मरोड़ नहीं 

सारी बात मिलै फुटपाथ छत नीचे कई करोड़ नहीं 

हुया हैरान मैं करूं बखान परेशान चलता राहगीर भाई रै।। 

3.  

परिन्दा नया टोहलें ठया पल मैं जेब साफ करैं 

उपर नीचे नीचे उपर पीस्सा बांट कै इन्साफ करैं 

करैं हद बन्दी और पाले बन्दी ना दूजे नै माफ करैं 

बड़े घराने शाही खजाने लूट का हाफा-हाफ करैं 

नजर आवै इनै कोन छिपावै जो लूट अमीर मचाई रै।। 

4.  

घणी लम्बाई और चौड़ाई इस शहर बम्बई की रै 

ऊंची इमारत और तिजारत मशहूर शहर बम्बई की रै 

फुटपाथ बतावैं शर्त लगावैं बड्डी शहर बम्बई की रै 

ठगी बतावैं किस्से सुनावैं नामी शहर बम्बई की रै 

सुण कमल या कहै अमन या लिखै रणबीर कतिवाई रै।।

मजदूर--20 --

 मजदूर

कुछ भी आच्छा नहीं लागै बिन मकसद हांडूँ मैं।

नहीं दिन रात चैन मनै बस पड़या पड़या बाँडूँ मैं।

1

मजदूरी मिलती कोण्या मिहने मैं दिन बीस मनै

खेत क्यार मैं मशीन आगी करी सै तफ्तीश मनै

ध्याड़ी दोसौ कम तीस मनै मुश्किल दिन काढूँ मैं।

2

सडकां पै काम रहया ना ईंट भट्ठे भी बन्द होगे

चिनाई भी कम होरी सै ये लाखों मजदूरी खोगे

मालिक तो ऐसी मैं सोगे नक्सा असली मांडूँ मैं।

3

गाम बरोणा जिला सोनीपत हरियाणा मैं बास सै 

होली क्युकर खेलूं मैं मेरा मन रहवै यो उदास सै

नहीं याड़ी कोये खास सै चेहरा किसका माँडूँ मैं।

4

गरीब की बूझ नहीं आज ख्याल होवै अमीरां का

हमनै भकावैं न्यों कैहकै सारा खेल सै लकीरां का

बाणा हुया फ़क़ीरां का रणबीर नया गीत चाँडूँ मैं।

किसा वर हो

 किसा वर हो

सरोज सरतो ब्याह शादी की आपस मैं बतलाई हे।

सरोज किसा वर चाहवै अपना उसनै बात चलाई हे।

1

सरोज बोली शांत शुभा हो माणस सबर आला हो

लिहाज करना आंता हो विश्वास गजब निराला हो 

शरीर का चाहे सांवला हो मन का नहीं वो काला हो

निस्वार्थ भाव का धौरी हो समझै बख्त कुढ़ाला हो

दौलत का वो भूखा ना हो ना जाणै घणी अंघाई हे।

सरोज किसा वर चाहवै अपना उसनै बात चलाई हे।

2

पाछली गलती तैं सीखै वो आगे का फेर ख्याल करै

जमा बहाने नहीं बणावै कही बात तैं कति नहीं फिरै

असलियत का हिम्माती हो दिखावे पै नहीं कान धरै

दहेज का लोभी नहीं हो पराई चीज ऊपर नहीं मरै

अपने दिल की खोल सारी सरोज नै बात बताई हे।

सरोज किसा वर चाहवै अपना उसनै बात चलाई हे।

3

ऊंचा रूतबा हो उसका घमंड जमा नहीं करता हो 

औरां नै बर्बाद करकै नै वो ना अपने घर नै भरता हो

झूठी बात नै नहीं मानै साच कहन तैं ना डरता हो 

अत्याचार के विरोध मैं वो सोच कै नै डिंग धरता हो

दोस्त आला बरतेवा करै नहीं समझै निरी लुगाई हे।

सरोज किसा वर चाहवै अपना उसनै बात चलाई हे।

4

सीधी पाधरी शादी करले ईसा मानस वो खास हो 

निराशा नहीं हो जिसमैं आशा हमेशा उसके पास हो

दुख सुख का हो साथी ना सुल्फे दारू का दास हो

मनै भी एक इंसान समझै चाहूँ बढ़िया मेरी सास हो

रणबीर के धोरै जावांगी उसपै इसी लिस्ट बताई हे।

सरोज किसा वर चाहवै अपना उसनै बात चलाई हे।

साथी वीरेंदर शर्मा

 साथी वीरेंदर शर्मा


सन 1992 में साक्षरता आंदोलन के दौर में साथी ने कार में आग लगने पर अपनी जान जोखिम में डाल कर कार की सवारियों को तो बचा लिया मगर सड़क पर फैले पैट्रोल की आग में बुरी तरह झुलस गया और दो तीन दिन तक मौत से संघर्ष किया।

ज्यांन की परवाह की ना कूदया पीड़ा देख परायी रै।।

जवानी खपादी वीरेंद्र नै समझ दूज्यां की भलाई रै।।

उसतै बढ़िया दीखै कोण्या भाई अकल इंसान की

म्हारे ताहिं राह दिखाई सै उसनै असल इंसान की

भुलाये तैं भी ना भूली जा भाई शक्ल इंसान की

म्हारे ताहिं तस्वीर बनाई उसनै अटल इंसान की

न्यों कहैया करै था साथी मिलकै लडांगे लड़ाई रै।।

लोगों के मोल उसनै रोज घटते बढ़ते देखे भाई

बदमाशों की चांदी आड़ै शरीफ लोग पिटते देखे

लोगों मैं बढ़ी बेरोजगारी सही राह तैं हटते देखे

शहीद भगत सिंह से वीर आजादी पै मिटते देखे

भगत सिंह की राही चल्या वीरेंद्र वीर सिपाही रै।।

ज्ञान विज्ञान समिति मैं थी साथी की कताई हुई

एक एक बात कै उप्पर थी समिति मैं सफाई हुई

समाज कैसे चलता म्हारा बैठकै पूरी धुनाई हुई

गया समझाया हमेशा गरीब की क्यूँ पिटाई हुई

शहीद वीरेंद्र समझ गया अनपढ़ता की खाई रै।।

साथी तेरे सपनों को हम मंजिल तक ले जायेंगे

सच कहना अगर बगावत हम गीत यही गायेंगे

आज नहीं तो कल साथी पूरी दुनिया पर छायेंगे

मानव का बैरी मानव हो ना ऐसा जमाना लायेंगे

रणबीर ईबे रंग अधूरा बनाई तसबीर जो भाई रै ।।

बीफ गऊ भारत माता आगे असली मुद्दे फैंक बगाये।।

 बीफ गऊ भारत माता

बीफ गऊ भारत माता आगे असली मुद्दे फैंक बगाये।।
लव जिहाद देश द्रोही गैल कब्रिस्तान नै ठाकै ल्याये।।
1
कितने करोड़ युवाओं को रोजगार दिया बताते कोण्या
गंगा मैया कितनी साफ़ हुई जिकरा कति चलाते कोण्या
बुल्लेट ट्रेन के कोच कितने तैयार करे दिखाते कोण्या
मेक इन इंडिया का के नतीजे लिखे कितै पाते कोण्या
दलित विरोध बढाँते जावैं दलित राष्ट्रपति भी बनाये।।
लव जिहाद देश द्रोही गैल कब्रिस्तान नै ठाकै ल्याये।।
2
कितने दागी नेता जेल गए नहीं कोये हिसाब बताया
पन्दरा लाख म्हारे खातयाँ मैं आज तलक कोन्या आया
कश्मीर का हाल बुरा करया पीडीएफ तैं हाथ मिलाया
जवानों के खाण पीण मैं यो सुधार थोड़ा बी ना पाया
झूठे इतने वायदे करकै देखो फ़ौज के जवान बहकाये।।
लव जिहाद देश द्रोही गैल कब्रिस्तान नै ठाकै ल्याये।।
3
किसान आमदनी दुगणी करांगे जोर के नारे लगाये थे
डीजल पैट्रोल करांगे सस्ते घणे सब्ज बाग़ दिखाये थे
फांसी नहीं खावण देवांगे जुमले बहोत घणे सुनाये थे
स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करांगे ये सन्देश पहोंचाये थे
गरीबी कति टोही नहीं पावैगी सपन्यां मैं खूब घुमाये।।
4
ईमानदारों के खाते मैं यो म्हारा भारत देश आया कोण्या
रूपये के मुकाबले यो डॉलर नीचे नै आता पाया कोण्या
स्मार्ट सिटी का नक्शा थारा इस जनता नै भाया कोण्या
बहुविविधता पढ़न बिठा दी यो भाईचारा भाया कोण्या
कहै रणबीर बरोने आला दिमाग लगा मनै छंद रचाये ।।
लव जिहाद देश द्रोही गैल कब्रिस्तान नै ठाकै ल्याये।।