Friday, 30 March 2018

81.105



-81-

गुप्ती घा
गुप्ती घा जिगर मैं होगे पीकै दारू सतावै मतना।
निरदोसी से कुन्बा तेरा इसकै दोस लगावै मतना।।
पीकै दारू पड़या रहै कटती नहीं दिन रात पिया
बिना बात तूं करै पिटाई दुख पावै सै गात पिया
घरकी इज्जत खोदी तनै और बट्टा लगावै मतना।।
बुरे करम रोज करै सै तनै कति शरम नहीं आवै
चोरी जारी ठग्गी सब सिखी चोर कै पीस्से लेज्यावै
तेरी क्यूकर धोक मारूं मान सम्मान घटावै मतना।।
क्यूं दारू पीकै गल्तान रहे दिल अपने की बात बता
तड़कै शुरू होज्या नहीं देखै दोफारा और रात बता
होवण लागरी कुणबा घाणी और गलती खावै मतना।।
तेरी दारू करण आज पड़गे बालकां नै धक्के खाणे
क्यूं दारू की खातर बेचै बरतन भांडे ये तनै बिराणे
रणबीर मौत मुंह मैं जिन्दगी म्हारी धकावै मतना।।















-82-

याहे दुनिया
जो सै वो सै इस दुनिया मैं जानल्यां हम सच्चाई नै।
बाकी बात झूठ सारी नहीं आवां किसे की भकाई मैं।।
आज की दुनिया का अपना एक इतिहास बताया
झूठे कामचोरों नै अपना यो मुखौटा न्यारा बनाया
साच झूठ मैं जंग होती, कुदरत नै पाठ पढ़ाया
साच छिप नहीं सकती, झूठ की हो नश्वर काया
पदार्थ तै बनी दुनिया, समझां विद्वानां की लिखाई नै।।
पदार्थ के कई गुण सैं, हर बख्त गतिमान रहै
कदे नष्ट नहीं हो सकता, दुनिया का विद्वान कहै
परिवर्तनशीलता गुण सै, न्यां साइंसदानकहै
वैज्ञानिक सोच जिसकी उनै गुणां की पहचान रहै
पदार्थ का ज्ञान लेना हो सरतो चमेली भरपाई नै।।
या दुनिया कुदरत के नियमां के हिसाब मैं चलती
माणस करै छेड़खानी तो आंख कुदरत की बलती
जै नियमां का पालन हो कुदरत साथ म्हारे रलती
इसको नष्ट करता बाजार या बात इसकै खलती
बाजार नै माणस लूटे, लूटी कुदरत अन्याई नै।।
विज्ञान नै कुदरत की सच्चाई के भेद खोल दिये
मानव श्रम करै दौलत पैदा लगा सही तोल दिये
वैज्ञानिक सोच उंचा गुण सै बता सच्चे बोल दिये
इस सोच के दम पै देखो पाप के हांडे फोड़ दिये
रणबीर बरोने आला समझै विज्ञान की गहराई नै।।

               





-83-

बाबा फरीद
बाबा फरीद तेरे शहर मैं आज निराला
पहलम आली सारी चीजां का बदल्यां मनै रंग देख्या।।
1. फरीद तेरे काट नै आज कर कूण बदनाम रहे सैं
  बणकै तेरे रूखाले छिपा अपणे काले काम रहे सैं
  खड़क जाम पै जाम रहे सैं शरीफ आदमी दंग देख्या
  पहलम आली सारी चीजां...
2. काला धन कमा कमा ये शरीफ बणे बदमाश दखे
  तेरी माला जप जप कै माणस होगे उदास दखे
  गरीब कै बची ना आस दखे अमीर कसूता नंग देख्या
  पहलम आली सारी चीजां...
3. तेरे बख्त के प्यार मुलाहजे मुश्किल टोहे पावैं देख
  जनता मैं शरीपफ बणते रात अन्धेरी गुल खिलावैं देख
  महिला नै सतावैं देख नेता अफसर के संग देख्या
  पहलम आली सारी चीजां...
4. त्याग और तपस्या आज फरीद सब कड़ै चली गई
  तेरी सादी भोली जनता सभी जगह पर छली गई
  या बेकसूर दली गई रणबीर सिंह बी तंग देख्या
  पहलम आली सारी चीजां...












-84-

काला धन
किसनै किसका के ठा राख्या, मुंह नै सुजाएं हांड रहे।
जनता बनाई काली गउ अमीर बण से सांड रहे।।
1. धन काला और काले काम, सफेद लबादा औढ़ रहे
  वैश्वीकरण नै बता दवाई, फैला समाज मैं कोढ़ रहे
  कदे हवाला यो कदे तहलका, कर कांड पै कांड रहे।।
2. रक्षक बणकै भक्षक आगे, समाज का ताना तोड़ दिया
  गुण्डागदरी छाई समाज मैं, शरीफ का बाणा छोड़ दिया
  आजादी की जंग के मुखबर, बैठे कुर्सी पै बांड रहे।।
3. घर शीतल ये कार ठंडी, होटल पांच सितारा इनके
  चित बी मेरी पिट बी मेरी, आज पौ बारा इनके
  उनके चलैं जहाज हवाई जिनके बण भांड रहे।।
4. पीस्सा छाग्या दुनिया मैं, आज बाजार कब्जा करग्या
  अमीर घणा अमीर होग्या, गरीब ज्यान तै मरग्या
  रणबीर बरोने आले कै, अमीर तोहमद मांड रहे।।















-85-
मुर्गी पहलम अक अण्डा
चम्पा: घणी ए दुखी करी बहना इस छोटे से परिवार नै
चमेली: कड़ तोड़ कै धर दी मेरी बालकां की इस लार नै।।
चम्पा: जिस घर मैं थोड़े बालक सुण्या ओ आच्छा घर हो सै
      पढ़णा लिखणा हो बढ़िया ना करजे का डर हो सै
      क्याहें चीज का तोड़ा ना सुरग मैं कहैं न नर हो सै
      प्यार रहे छोटे घर के म्हां एक दूजे की खबर हो सै
      इतना कुछ दे कै बी मैं क्यों दुखी करी करतार नै।।
चमेली: नौ बालक जणे थे मनै बस पांच ईब आगै बेबे
      नहीं मिलै दवाई बख्त पै जिब दिन उल्टे लागैं बेबे
      ये गाम आले मेरे उपर बोल घणे कसूते दागैं बेबे
      सारे कमा कै ल्यावां सां फेर म्हारे भाग ना जागैं बेबे
      बड्डा कुणबा साहरा देवै क्यूकर समझाउं संसार नै।।
चम्पा: मनै चिन्ता रहवै रोजाना उनकी ठीक पढ़ाई की
      सेहत ठीक ना रैहती या पड़ती मार दवाई की
      मारबल का मकान हो चिन्ता पानी सप्लाई की
      घरां काम बाहर नौकरी औटूं डाट थारे जमाई की
      बालक टी.वी. नै चूघैं मार दिये चैनलां की भरमार नै।।
चमेली: दोनूं बाहण दुखी सां नहीं बात काबू मैं आई
      छोटे बड्डे का ना रोला या विकास मैं रोल बताई
      मेहनत के फल का बंटवारा ना देता ठीक दिखाई
      माण का माण बैरी औरत जा घणी सताई
      कौन बैरी खोस कै लेग्या आज सारी म्हारी बहार नै।











दोनूं: घणी जनसंख्या के कारण दुख कोण्या म्हारे ये
      म्हारे दुखां का कारण दीखैं जिन्दगी के बंटवारे ये
      इसी रची समाज व्यवस्था गरीब धरती कै मारे ये
      विकास का बे
      बेबे बैठकै सोचां क्यूकर करां दुखी घरबार नै।।
      इसा विकास हो देश मैं जिसमैं ठीक बंटवारा हो
      प्यार बढ़ै आपस में ना भाई का भाई हत्यारा हो
      बलात्कारी ना टोहे पावैं म्हारासुखी हर गलियारा हो
      जनसंख्या समस्या ना दीखै सबकै फेर उजियारा हो
      फेर परिवार नियोजन ना करना पड़ैगा सरकार नै।।




















-86-

तहलका डॉट कॉम
यो देख्या टी वी खोलकै
कॉम तहलका डॉट
या लागती दिल पै जाकै
बंगारु पीस्से गिनता पाया
इनै संघ का नाम कटाया
पार्या जार्ज म्हां टोल कै
कर लिऐ पूरे ठाठ
भारत की बोली लाकै।।
करकै दलाली घर भरे
काले धंधे तमाम करे
मरे फौजी जय बोल कै
ये सूनी करगे खाट
छाती मैं गोली खाकै।।
चोरी सीना जोरी दिखाते
धरम का जहर पफैलाते
पिलाते मैं घोल कै
दिन पूरे तीन सौ साठ
जनता नै बहकाकै।।










-87-

पापी
वायदा करकै नाटै, उंका ना पूरा पाटै।
डाहल नै खुद काटै, पीटें जावै लकीर नै।।
वो हमेश झूठ का साथ होसै
सोच उसकी जमा बासी होसै
वो माणस पापी हो, करै अपना धापी हो
थाह ना जा नापी हो, बात कही कबीर नै
ना बात बतावै दिल की कदे,
ना बात करै अकल की कदे,
हो करम का मुआ, वो लालच का कुंआ
जहरी उंका सुआ, करै खतम शरीर नै।।
विज्ञान का बैरी कसूता होसै,
इनै बरतै खूब नपूता वोसै,
तकनीक नै बरतै, पीस्सा खूबैए खरचै
औरां नै ओ बरजै, सराहवै सै अमीर नै।।
ओ बनी बनी का यार सबका
चोर चार ठग जितना तबका
झूठ पै ऐश करता, फेर बी ना भरता
कहे बिना ना सरता, बरोनिया रणबीर नै।।










-88-

राजबाला अपने पति अजीत से पूछती है कि गुजारा कैसे होगा? गिहूं पिटगे, धान पिटग्या, बिजली महंगी, खाद महंगी, पढ़ाई महंगी और दवाई महंगी। अजीत राजबाला को अपने दिल की बात बताता है:-
खेती नै बचावै जो, रोटी बी दिलावै जो, देश नै चलावै जो
इसी लहर उठाणी सै जरूर।।
धनी देश एक टोल बनारे, ये मिलजुल रोल मचारे
बिगाड़ी म्हारी चाल, तारली जमकै खाल, करे गलूरे लाल,
इनकी काट बिछाणी सै जरूर।।
ये मंदिर नै हटकै लियाये, जिब रोटी दे नहीं पाये
जात तै हम बांटे, धर्म पै खूब काटे, मन करे सैं खाटे
या मानवता बचाणी सै जरूर।।
बाजार की दया पै छोड़ दिये, अमरीका तै गठजोड़ किये
पीट दिया धान क्यों, काढ़ी म्हारी ज्यान क्यों, ना कोए ध्यान क्यों
या कमीशन बिठाणी सै जरूर।।
नंगी फिल्में गन्दे गाणे टीवी पै, लिहाज बची ना परजीवी पै
रणबीर सुण ले, सही राही चुन ले, कर पक्की धुन ले
नई समाज बणाणी सै जरूर













-89-

सपना राजबाला का
  रोटी कपड़ा किताब कॉपी नहीं घाट दिखाई देंगे
  मार पिटाई बंद हो सारी ओ दिन कद सी आवैगा।।
  चेहरे की त्यौरी मिटज्यां सब ठाठ दिखाई देंगे
  काम करण के घंटे पूरे फेर आठ दिखाई देंगे
  म्हारे बालक बणे हुये मुल्की लाठ दिखाई देंगे
  कूकै कोयल बागां मैं प्यारी ओ दिन कद सी आवैगा।।
  दूध दही का खाणा हो बालकां नै मौज रहैगी
  छोरी मां बापां नै फेर कति ना बोझ रहैगी
  तांगा तुलसी नहीं रहै दिवाली सी रोज रहैगी
  बढ़िया ब्यौहार हो ज्यागा ना सिर पै फौज रहैगी
  ना हो औरत नै लाचारी ओ दिन कद आवैगा।।
  सुलफा चरस फीम का ना कोए भी जमली पावै
  माणस डांगर नहीं रहै ना कोए जंगली पावै
  पीस्सा ईमान नहीं रहै ना कोए नकली पावै
  दान दहेज करकै नै दुख ना कोए बबली पावै
  होवैं बराबर नर और नारी ओ दिन कद सी आवैगा।।
  माणस के गलै न माणस नहीं कदे बी काटैगा
  गाम बरोना रणबीर का असली सुर नै छाटैगा
  लिख कै बात चमेली की सब दुख सुख नै बांटैगा
  वोह पापी होगा जो इस सुणनै तै बांटैगा
  राड़ खत्म हो म्हारी थारी ओ दिन कद सी आवैगा।।









-90-

अजीत की बात सुनकर राजबाला पूछती है कि इसका इलाज क्या हो? अजीत कहता है मुझे नहीं पता क्या बनेगा? राजबाला कहती है कि सोचना तो पड़ेगा। अपनी पुरानी खेती बोनी छोड़ कर पफूल की खेती आखिर कहां ले जाएगी हमें? क्य कहती है भला:-
खेती म्हारी टोचन करदी, ईब दुनिया के मण्डी बाजार तै।
बदेशी कंपनी बेलमाम घूमैं, ना काबू आवैं सरकार तै।।
1. गिहूं, बाजारा बोणा छोड़कै, हम फूल उगावण लाग्गै हो
  अपणे बिना पफूलां के क्यों, उनके महम सजावण लाग्गे हो
  शादी पै माखी भिनकै उनकी, क्यों टहल बजावण लाग्गे हो
  देशी खेती मंधी मारदी, सब किसान बतलावण लाग्गे हो
  म्हारा उजड़णा लाजमी सै, जो चाले इसे रफतार तै।।
2. मुंह मांगी कीमत देकै, फूल उगावण नै मजबूर करैं
  उनके स्वाद पूरे होज्यां, हमनै रोटियां तै भी दूर करैं
  गिहूं की कीमत पै सब्जी बोवां, किमै गलती जरूर करैं
  यो रास्ता पिट लिया हम, इस राही पै गरूर करैं
  भूख फैले बोहत घणी कैसे मिलै भोली भरतार तै।।
3. कुपोषण म्हारे देस मैं ईब, दिन दिन और बढ़ैगा हो
  धरती की ताकत मारी जा, म्हारा पैदावार घटैगा हो
  मन्दी का दौर चाल पड़या, महंगाई का ताप चढ़ैगा हो
  गरीब आदमी मारया जागा, चौड़े जुलूस कढ़ैगा हो
  जनता दुखी सै इन झूठे, नारां की तेरी हुंकार तै।।
4. भारत का किसान मरया तै, आजाद बचै हिन्दुस्तान नहीं
  देश बचावण की कौण कहै, जिब बचै यो इन्सान नहीं
  मानवता खतरे में गेरदी, क्यों बोलै यो भगवान नहीं
  अनैतिकता पै खड़ै होकै, मानतवा बचाना आसान नहीं
  कहै रणबीर सिंह बरोने आला, लड़ै कलम के हथियार तै।।




-91-

एक दिन जोगी किसान की दशा पर गाने लगता है तो राजबाला टोक देती है और रूप बसन्त के किस्से से सुनाने को कहती है तो जोगी सुनाता है बात उस वक्त की जब जहाज से सेठ रूप को समुन्द्र में धक्का मार कर गिरा देता है और चन्द्र को अपने कब्जे में कर लेता है:-
सेठ कै बेइमाना होग्या रूप समुन्द्र मैं धिका दिया।
पराई नार पै नीत डिगाई असली रूप दिखा दिया।।
1. भौंचक्का रैहग्या रूप एक बै बात समझ मैं आई ना
  थोड़ा ए तिरना जाणै था उड़ै दिया कुछ दिखाई ना
  चन्द्रा चन्द्रा रूक्के मारे चन्द्रा नै दिया सुनाई ना
  नहीं हौंसला हारया रूप नै जोर पूरा लगा दिया।।
2. जोर की बाल चाल पड़ी समुद्र मैं फेर लहर चली
  तिरता होया एक तख्ता आया नजर रूप की ठहर चली
  साहरा रूप नै तख्ते का सांस पफेर वाई पहर चली
  रूप नै ले कै वा किस्ती पास बसे एक शहर चली
  हौंस आवन्ते उठ लिया चन्द्रा का नाम गुंजा दिया।।
3. कड़ै थी चन्द्र क्यूकर बोले कैद जहाज मैं पड़ी हुई
  एक एक करकै याद आगी रूप नै चिन्ता बड़ी हुई
  रोवन्ती दीखै चन्द्रा रूप नै जहाज उपर खड़ी हुई
  मुक्का मार लिया छाती मैं रूप कै मजबूरी अड़ी हुई
  रोया रूप दहाड़ मारकै उड़ै पत्ता-पत्ता रूला दिया।।
4. बैठ पेड़ की छाया मैं हटकै अपणे कीे तैयार किया
  सोचै सेठ नै धोखे तै क्यों इस घटिया वार किया
  दीन ईमान सब भूल गया पर नारी पै मन मार लिया
  सेठ तै बदला लेने का पक्का मन मैं धार लिया
  रणबीर बरोने आले नै फेर कलम सही चला दिया।।





-92-

राजबाला घर के काम से फारिग होकर जोगी का इन्तजार कर रही थी। दो मिनट बाद जोगी आ गया और उसने गीत सुनाया:
एड्डी ठा ठा देखूं सूं यो जमाना कड़ै जा लिया।
के बणैगी आगे सी मैं इसे चिन्ता नै खा लिया।।
1. बुलध गया टैªक्टर आ गया यो थ्रैसर हमने भाया
  मशीन पानी काढ़ै देखो हार वेस्टर कम्बाइन आया
  महारे पै आरा चलाया क्यों कम्प्यूटर ठा लिया।।
2. चाक्की आटा पीस्सै बिजली दूध बिलोवै म्हारा
  बटन दबा गंडासा चालै धनवानां के पौ बारा
  गरीब का कड़ै गुजारा जोड़ सारा ला लिया।।
3. नवोदय मैं पढ़ै उनके म्हारे स्कूल सरकारी मैं
  बढ़िया दवा दारू उनकी म्हारे सड़ैं बीमारी मैं
  सोचां पड़े लाचारी मैं नूनी किसनै ता लिया।।
4. टी.वी. उपर फिल्म नंगी किंके दम पै दिखाई जां
  औरत दी एक चीज बणा बाजार मैं बोली लाईजां
  चौड़ै रिश्वत खाई जां रणबीर औड़ आ लिया।।














-93-

राजबाला ने जागी से पूछा-कई दिन तक दिखाई नहीं दिये। जोगी बोला-हफ्रते के लिए गुजरात चला गया था। राजबाला पूछती है वहां के क्या हाल हैं? जोगी बताता है:
भुज शहर मैं जाकै हमनै, मलबे के
भूखे प्यासे और भीख मांगते, लाचार माणस बड़े देखे।।
1. मलबा पड़या चारों कान्ही, एकाध मकान बचा हुया
  कोए रोवै छात पै बैठया, कोए चिल्लावै था दब्या हुया
  कोहराम उड़ै मच्या हुआ, अफसर निढ़ाल खड़े देखे।।
2. अफरा-तफरी माच रही, किस नै कुछ ना सूझ रह्या
  ट्रक आला सामान ल्याया, कित तांरू न्यों बूझ रह्या
  शहर मौत तै जूझ रह्या, गिद्ध लाशां पै लड़े देखे।।
3. कितै कई-कई चिता जलैं थी, कितै कोए कराहवै था
  लाशों के
  माणस नै माणस बचावै था, खाली पाणी के घड़े देखे।।
4. कितै पूरा कुणबा खत्म होग्या, कितै यो बालक रोंता हांडै
  कितै कूण मैं पड़ी बेटी रोवै, कितै बाप एकला बांडै
  रणबीर सिंह तसवीर मांडै, लाशां के लुटते कड़े देखे।।














-94-

सुबह के बारा बज गये। जोगी का इकतारा नहीं सुनाई दिया। राजबाला कुछ बेचैन हुई। जोगी का इकतारा बज उठा, वह भाग कर गली में आई। जोगी गा रहा था:
गिणकै दिये बोल तीन सौ साठ दिल्ली आल्यो।
ना सुणते बात हम देखें बाट दिल्ली आल्यो।।
1. खत्म म्हारी पढ़ाई तम कति बोलते कोण्या
  मरते बिना दवाई तम कति सोचते कोण्या
  जुबां कति खोलते कोण्या होगे लाट दिल्ली आल्यो।।
2. इसी नीति अपनाई किसान यो बरबाद कर्या
  घर उजाड़ कै म्हारा अपणा यो आबाद कर्या
  तमनै यो फसाद कर्या तोलकै घाट दिल्ली आल्यो।।
3. म्हारे बालक सरहद पै अपणी ज्यान खपावैं
  थारे घूमैं जहाजां मैं म्हारे खेत खान कमावैं
  भूख मैं टेम बितावैं थारे सैं ठाठ दिल्ली आल्यो।।
4. सात सौ चीजां की रणबीर सीम खोल दई
  ये भैंस बकरी सब किबवा बिन मोल दई
  मचा रोल दई गया बेरा पाट दिल्ली आल्यो।।















-95-

स्वदेशी का
स्वदेशी का
भीतरले में जहर काला यो बाहर सफेद रंग थारा क्यूं।।
1. समाज बिगाड़ण की ठेकेदारी, अपणे नाम छुटाई आज
  नारी दी एक चीज बणा तमनै बीच बाजार बिठाई आज
  चेले चपट्यां ने उसके शरीर परै नजर सै गड़ाई आज
  दे दे कै फतवे थारे बरग्यां नै या क्यों घरां बिठाई आज
  बाजार मैं शरीर इनका बेचो लाओ मातृ शक्ति का नारा क्यूं।।
2. औरत ताहिं हक बराबर के नहीं देवणा चाहते हम
  जननी और देवी कैहकै नै इसको खूब भकाते हम
  क्लबां मैं नगा नचाते इसनै जिब क्यूं ना शरमाते हम
  दूजी कान्ही कसूर इसी का बेशरमी से बताते हम
  नैतिकता का नारा लाओ खोल्या अनैतिकता का भंडारा क्यूं।।
3. स्वदेशी का नारा उफंचे सुर मैं सब पुकार रहे
  न्योंत न्यौंत के बदेशी क्यों उजाड़ सब कारोबार रहे
  इसी नीति अपणा राखी सब खत्म कर रोजगार रहे
  मुट्ठीभर तै मौज करैं गरीबां कै उपर चला वार रहे
  थारे महल अटारी सारे गरीबां का फुट्या
4. आपा धापी मचा दई अराजकता का माहौल रचाया सै
  फासीज्म अराजकता के दम पै दुनिया मैं आया सै
  देश जाओ चाहे भाड़ मैं सुखी चाही अपणी काया सै
  अमीरां आग्गै गोड्डे टेक दिये गरीब घणा दबाया सै
  रणबीर की भूख दीखै कोन्या अमीरां के पौ बारा क्यूं।।







-96-
बाबू-बेटी
बाबू मनै रोकै मतना, जाण दे समिति के जत्थे मैं।
रैह बोल चुपकी हाथ ना लावै भिरड़ां के छते मैं।।
बेटी: समिति ने बदल ल्याण की या नई जंग छेड़ी सै
म्हारा विकास हिमाती किसका या तत्त काढ़ कै गेड़ी सै
पता लगाया किसनै गेरी म्हारे पाहयां मैं बेड़ी सै
माणस तै हैवान बनाये या आगे की राह भेड़ी सै
चोर बदमाशां नै जत्था चाहवै ईब देणा हत्थे मैं।।
बाबू: कैहवण की सैं बात बेटी, यो मनै सारा बेरा सै
पांचों आंगली बरोबर कोण्या योहे कैहणा मेरा सै
सबनै बरोबर करै समिति बोल्या तेरे पै छेरा सै
झूठे साचे दिखा कै सपने यो मन मोहया तेरा सै
समिति मैं कड़ै ताकत बेटी, या नहीं किसे खत्ते मैं।।
बेटी: इतनै बढ़िया माणस ना कोए बाबू दिल मानै मेरा
चाल तनै मिलवां दॅयं उनतै पफेर दिल ठुकज्या तेरा
महिला समता सही चाहवन्ते इतना तै मनै बेरा
जनता होश संभालै तो फेर होज्या दूर अन्धेरा
बैरी नै उलझा दिये सां ताश सुलफे अर सट्टे मैं।।
बाबे: बेरी तों समझण जोगी सै घण बुरा जमाना आर्या
रिश्तेदारां का भी नहीं भरोसा रोज अखबार बतार्या
उफंच-नीच किमै होगी तै मुश्किल होज्या घणी भार्या
तरूं डूबूं सै जी मेरा बेटी मनै नहीं किनारा पार्या
कड़ै समझ सै बेटी इतनी सादे भोले इस फत्ते मैं।।
बेटी: बाबू रोकै मतना दिल मैं उठया सै मेरे तूफान
अपनी बेटी पै राख भरोसा जग मैं बाकी सै इंन्सान
समिति चाहवै म्हारी भलाई मेरा सही उनमान
इसका जो ना साथ दिया तो छाज्यां सोर कै शैतान
रणबीर सिंह बरोने आला कफन बांधर्या मत्थे पै।।



-97-

एक दिन अजीत बहादुरगढ़ से दिल्ली जा रहा था। बस में एक महिला भीख मांगती हुई गा रही थी:
तेरी थोड़ी सी जिन्दगानी, इतनी क्यूं कर रया बेईमानी।
सिर पै काल तेरे छोरे, फिर भी समझया ना अग्यानी।।
मतलब का है कुटुम्ब कबीला जिसनै तूं कहता मेरा
ना तूं किसी का न कोई तेरा यो चिड़िया नैन बसेरा
तेरा कोई नहीं पिरानी, इतनी क्यों ठावै सै परेशानी।
क्यूं तूं बंध्या पाप के डोरै, या दुनिया है आनी जानी।।
पीस्से की म्यें हाय लागरी, न्यों होगी डूबा
या माया तेरे साथ चलै ना तूं जिसनै कहता मेरी
तेरी दो दिन की जिन्दगानी है, तूं ओस कैसा पानी।
मत मेहनत से अंखियां चारै जो चाहवै नाम निशानी।।
ओम नाम का जाप करया पर पड़ी मुश्किल सहनी
राम जी बी फर्क करण लागर्या बात पड़ी सै कहनी
रहनी ना तेरी जवानी, नहीं चलैगी कोए मनमानी।
तूं रहै खड़या गाम के गोरै, दूर हो ना तेरी परेशानी।।
रणबीर बरोने आला कहवै, कुछ तो दूर बुराई तै हटले
इस आपा धापी के चक्कर तै इब तो तूं न्यारा पटले
समझले ना कर ईब-नादानी, मत बन इतना अभिमानी।
तूं रह ज्यागा कालर कोरै, जो ना कुछ करने की ठानी।।











-98-

तहलका डॉट कॉम
तहलका नै बीन बजाई, या बाड़ खेत नै खाण लगी।
दलाली लेकै नाक कटाई, बांस चौगरदे आण लगी।।
1. मुनाफा खोर पूंजीवाद का, साहमी आग्या चेहरा आज
  पूंजीपतियां की पार्टियां कै, घूस नै घाल्या घेरा आज
  वामपंथ साफ सुथरा खड़या दिखाई देर्या आज
  बीजेपी समता पार्टी नै, यो बनाया घास पटेरा आज
  जमा नहीं शरमाई या, हटकै म्हारे कान्ही गडराण लगी।।
2. म्हारी भी जमा आंख फूटगी, इनकी साथ खड़े होगे रै
  दिमाग कै ताला ला लिया, पी सुलफा पड़कै सोगे रै
  म्हारी बेरुखी के कारण, ये बीज बिघन का बोगे रै
  के म्हारे बेटा बेटी कारगिल मैं, सहम ज्यान खोगे रै
  लाखां कुर्बानी दे आजादी पाई, आज उल्टी जाण लगी।।
3. हथियारां की होड़ बधाकै जो आगै बढ़णा चाहवैं सैं
  इत्र पाउडर बेच बेच जो, ईब आगै बढ़णा चाहवैं सैं
  दारू सुलफे की बणा सी
  ये दलाल बेच देश नै, सिर म्हारे पै मढ़णा चाहवैं सैं
  तरेपन साल की कमाई, या सरकार खिंडाण लगी।।
4. पूंजीपति वर्ग लुटेरा ईब, चौड़े मैं नंग होग्या देखो
  ईब तांहि समझे कोण्या, ज्यां मरण का
  तहलका टी.वी. पै देख कै, जमाना दंग होग्या देखो
  नेता अफसर कई डूब लिये, गेल्यां संघ होग्या देखो
  रणबीर नै करी कविताई, फेर दुनिया गाण लगी।।








-99-

किसनै संसार रच्या
सृष्टि के बारे मैं सब धर्मां नै न्यारा-2 अंदाज लगाया सै
देवी भगवती पुराण न्यों बोले एक देवी संसार रचाया सै
1. ब्रह्मा के भगत जगत में ब्रह्म को जनक बताते भाई
  शिव पुराण का किस्सा न्यारा शिवजी जनक कहाते भाई
  गणेश खंड न्यों कहवै गणेश जी दुनिया को चलाते भाई
  सूरज पुराण की दुनिया को सूरज महाराज घुमाते भाई
  विष्णु आले न्यों रुक्के मारैं विष्णु जी की निराली माया सै।।
2. विष्णु महेश के चेले दुनिया मैं घणे बताये देखो
  आपस में झगड़ा करकै कई बै सिर फुड़वाये देखो
  आपस की राड़ मेटण नै त्रिमूर्ति सिद्धांत ल्याये देखो
  ब्रह्म पै करै विष्णु पालै संहार शिव नै मचाये देखो
  बाइबल नै सबतै हटकै पैगम्बर का नाम चलाया सै।।
3. यो बुद्धमत उभर कै आया त्रिमूर्ति का विरोध किया
  जैन मत भी गया चलाया नहीं दोनों को सम्मान दिया
  यहूदी और धर्म इसाई एक ईश्वर को धार दिया
  इस्लाम नै एक परमात्मा मैं लाया सै अपणा जीया
  दुनिया मैं माणस नै एक ईश्वर सिद्धान्त पनपाया सै।।
4. सोच समझ कै इसाइयां नै यो परमेश्वर गलै लगाया
  मुसलमान क्यों पाछै रहैं न्यों अल्लाह हाकिम बनाया
  सिक्खां नै शब्द टोह लिये औंकार झट से जनाया
  हिन्दुआं नै तावल करकै नै ओम दिल पै खिनवाया
  घणे भगवान पैदा कर दिये रणबीर का जी घबराया सै।।






-100-

राजबाला की बात सुनकर चांद कौर अपनी बात बताती है कि अपने हक पर बोलने का क्या फल मिलता है। हमारा समाज क्या सोचता है हमारे बारे में:
जीणा होग्या भारी बेबे, तबीयत होगी खारी बेबे।
सबनै खाल उतारी बेबे, फेर बी जीवन की आस मनै।।
1. पुराना घेरा तोड़ बगाया,
  कमाया मनै जमा डटकै, उनके याहे बात खटकै
  मेरी हर बात अटकै, पूरा हुया अहसास मनै।।
2. मंुह मैं घालण नै होरे, चाहे बू

  डोरे डालैं श्याम सबेरी, कहते मनै गुस्सैल बछेरी
  कई बै मेरी राह घेरी, बैंल बतावैं ये बदमाश मनै।।
3. सम्भल-संभल मैं कदम धंरू, आण बाण पै सही मंरू
  करूं संघर्ष मिल जुलकै, हंसू बोलूं सबतै खुलकै
  ना जिउं घुल घुलकै, बात बतादी या खास मनै।।
4. चरित्रहीन ये बतादें, भों कोए तोहमद लादें
  खिंडादें ये इज्जत म्हारी, खुद करते ये चोरी जारी
  न्यों होज्या तबियत खारी, रणबीर आवै ना रास मनै।।














-101-

हवस पीस्से की
हवस पीस्से की दुनिया मैं घणी ए बुरी बतावैं हे।
पूंजीवाद नाश की राही मुट्ठीभर मौज उड़ावैं हे।।
1. आठ घण्टे जो काम करै बस मिलता पेट भराई हे
  आधी दुनिया बिन काम फिरै किसी नीति बनाई हे
  मेहनतकश धन करै पैदा ना कितै सुनाई हे
  ये खास रिति रिवाज बणाये म्हारी लूट कराई हे
  कामचोर मालिक बणकै बैठे हुकम चलावैं हे।।
2. सरकारी कारखाने बेचो निजीकरण का नारा यो
  सरकारी खरच्यां मैं कटौती विश्व बैंक चाहर्या यो
  स्वास्थ्य और शिक्षा पै कसूती नजर गड़ार्या यो
  रुपये की कीमत गेरण नै डालर उंचा ठार्या यो
  निजीकरण उदारीकरण कष्टां की कहैं दवाई हे।।
3. वैश्वीकरण के बाहनै दरवाजे म्हारे खुलवाये
  पैप्सी नाइके नेस्ले तांहि ये कालीन लाल बिछवाये
  ये आयात सीमा शुल्क सब क्याहें पर तै हटवाये
  निर्यात करो फालतू ये फूल सब्जी उगवाये
  म्हारा पीस्सा लूटण की ये नई-नई प्लान बणावैं हे।।
4. म्हारी पढ़ाई की चिन्ता ना म्हारे देशी साहूकारां नै
  म्हारी दवाई की चिन्ता ना म्हारे देशी ठेकेदारां नै
  म्हारी नौकरी की चिन्ता ना म्हारी देशी सरकारां नै
  म्हारी संस्कृति की चिन्ता ना म्हारे देशी थानेदारां नै
  रणबीर पीस्से की हवस ये रोज-रोज बढ़ावैं हे।।







-102-

खूनी कीड़े नई सदी के
नई सदी के ये खूनी कीड़े फेर गुलाम बनाया चाहवैं।
संकट फैला के चारों कान्हीं म्हारी मोर नचाया चाहवैं।।
1. पानी खाद बिजली पै सब्सिडी खत्म हुई सारी क्यों
  धरती लाल स्याही मैं चढ़ी दरवाजे खड़ी बीमारी क्यों
  ब्याह शादी मुश्किल होगे बढ़ी ईब बेराजगारी क्यों
  पेट्रोल डीजल महंगे करे ना
2. गिहूं अर चावल देश मैं ये चिड़िया घर मैं टोहे पावैंगे
  दूध शीत बिना ये बालक म्हारे भैंसा कान्ही लखावैंगे
  फसल के मालिक बिदेशी होज्यां दूर बैठकै हुकम चलावैंगे
  हम के बोवां अर के खावां देशी बदेशी साहूकार बतावैंगे
  दारू सुलफा स्मैक पिलाकै हमनै कूण मैं लाया चाहवैं।।
3. दारू बुरी बीमारी जगत के मां जानै दुनिया सारी भाई
  फेर क्यों या काढ़ी जावै सै नुकसान करती भारी भाई
  माफिया पाल ये दारू के करैं फेर फरमान जारी भाई
  म्हारे बालक फंसावैं जाल मैं म्हारी अकल मारी भाई
  लाशां के उपर दारू बेचैं अपणा मुनाफा बढ़ाया चाहवैं।।
4. अमरीका जापान मैं सब्सिडी हम देते सभी किसानां नै
  इम्पोर्ट ड्यूटी भारया उनकी पिटवाते म्हारे धानां नै
  उड़े कुत्ते बिल्ली मौज करैं मुश्किल आड़ै इन्सानां नै
  कमेरे जमा चूस कै बगाये देशी बिदेशी धनवानां नै
  कहै रणबीर सिंह मुनाफा खोर ये लगाम लगाया चाहवैं।।








-103-

जुल्मी घूंघट
के होग्या दो दिन मैं क्यों घणा उपर नै मुंह ठाया तनै।
दुनिया मैं एक इन्सान मैं भी
1. बता भाभी गाम की इज्जत यो घूंघट ना तनै सुहावै क्यों
  रिवाज नीची नजर कर जीणे का आंख तै आंख मिलावै क्यों
  उघाड़े सिर चालै गाल मैं सरेआम म्हारी नाक कटावै क्यों
  सीटी मारैं कुबध करैं छोरे भिरड़ां के छत्ते के हाथ लगावै क्यों
2. रिवाजां की घाल कै बेड़ी क्यों बिठा करड़ा डर राख्या
  दुभान्त जिन रिवाजां मैं उनका भरोटा म्हारे सिर धर राख्या
  घूंघट का रिवाज घणा बैरी इनै पंख म्हारा कुतर राख्या
  कान आंख नाक मुंह बांधे ज्ञान दरवाजा बंद कर राख्या
  घूंघट ज्ञान का दुश्मन होसै पढ़ लिख बेरा लाया मनै।।
3. क्यूकर ज्ञान का दुश्मन सै तूं किसनै घणी भका राखी सै
  तेरे अपणी बुद्धि सै कोण्या और किसै नै चाबी ला राखी सै
  घूंघट तार गाम मैं म्हारी ईज्जत धूल मैं खिंडा राखी सै
  घूंघट धर्म पतिव्रता का न्यों म्हारे ग्रंथा मैं बता राखी सै
  उल्टे रिवाज चला घर मैं कसूता तूफान मचाया तनै।।
4. ब्याह तै पहलम तेरे भाई तै घूंघट की खोल करी थी
  मनै सारी बात साफ बताई इनै हां भरकै रोल करी थी
  कहूं थी और सोच समझल्यां इनै ब्याह की तोलकरी थी
  रणबीर सिंह गवाह म्हारा मनै कति नहीं मखोल करी थी
   इब मनै दबाना चाहो सारे नहीं दबूंगी बताया मनै।।










-104-

गलत बंटवारा
एक चौथाई और तीन चौथाई रोटी का बंटवारा यो।
म्हारी मेहनत कमाई उनकी गल्त सै डंगवारा यो।।
1. विश्व बैंक ने भारत तांहि जारी इसा फरमान करया
  सरकारी खरच्यां मैं कटौती जमा खुल्या ऐलान कर्या
  बीच की खाई चौड़ी होगी किसा उदारीकरण थारा यो।।
  म्हारी मेहनत कमाई ...
2. सब किमै नीलाम करण लागरे क्यों कौड़ियां के दामां मैं
  किसान तबाह होगे मजदूर मारे नाश ठाय्या गामां मैं
  अपणा बणकै चोट मारगे खुलग्या भेद सारा यो।।
  म्हारी मेहनत कमाई ...
3. बैर ईर्ष्या मेरा तेरी गोता मैं बांट कै लूट लिये
  स्वदेशी का
  रिवाजां की बेड़ी गेरदी आग्या समझ मैं नजारा यो।।
  म्हारी मेहनत कमाई ...
4. पूरी रोटी पै हक म्हारा सै रणबीर नै बताई या
  जनता विरोधी कानून बना म्हारी रोटी हथियाई या
  म्हारी किस्मत माड़ी बताकै करगे अपणे पौ बारा क्यों।।
  म्हारी मेहनत कमाई ...










-105-

दुखिया
तेरे दरवाजे पै दुखिया आई करिये मेरी सुणाई।
बैंक आल्यां नै भीतर कर दिया कति शरम ना आई।।
1. दिन रात कमाये दुख ठाये क्यों दूना टोटा आया यो
  ऐल फेल नहीं कर्या कोए खर्या खोटा क्यों पाया यो
  वो सोटा मार बिठाया क्यों करी कुणबे की रूसवाई।।
2. दस दिन हो लिए उनै गये नै कुछ ना लाग्या बेरा
  ना सूधे मंह कोए बात करै मेरै दिया चिन्ता नै घेरा
  मनै दीखै सै कुआं झेरा सब साची बात बताई।।।
3. मनै सुणी सै गोहाने मैं तार दिया उसका चाम कहैं
  सूधी मूधी यो सोल्हू भी पूरा का पूरा गाम कहैं
  सैकटरी नै दिया नाम कहैं अपणी खुन्दक काढ़ि चाही।।
4. अन्नदाता कहै सै तो फेर क्यों म्हारा इसा हाल हुआ
  तेरे धोरै आई नेताजी यो कुणबा कति नि
  थानेदार घणा चण्डाल हुआ रणबीर की करै पिटाई।।

51.80



-51-

आया फागण
फागण का म्हिना आग्या चारों कान्हीं हरियाली छाई।।
ईब ना गरमी ना सरदी लागै या रुत खेलण की आई।।
चम्पा चमेली सखी सहेली करी फागण खेलण की तैयारी
बहू नवेली मिलकै खेली पूरा फागण का रंग जमारी
साठे में बुढ़िया होरी रसिया जणूं तै पां मिंडकी ठारी
लाडू बरफी ल्याकै असरफी आंगली चाट चाट खारी
रिस्सालो मार धमोड़ा फेर नई तान खोज कै ल्याई।।
पीले फूल रहे खेत मैं झूल चाला मोटा रूपरया सै
सिरसों की फली लागैं भली पूरा ए पेड़ा झुकरया सै
खुभात करै अर उभाणा फिरै फील गुड हंसरया सै
धरती बांझ होन्ती आवै सै जी बिघण मैं फंसरया सै
या चांद की चांदनी रात मोर नै सुरीली कूक सुनाई।।
बाट दिखा कै हाड़े खवा कै फागण का म्हिना आया
लुगाइयां नै बैठ सांझ कै गीत सही सुर मैं ठाया
लखावै बैठी कोए देहल पै नहीं बालम घर मैं पाया
होली के दिन रैहगे दो नहीं कोए रंग गुलाल ल्याया
बिन बालम किसी होली इसे चिन्ता नै मैं खाई।।
देवर आकै गुलाल लगावै भाभी नै कोलड़ा भांज लिया
इतनै मैं रुक्का पड़ग्या दो ठोल्यां का लाठा बाज लिया
किसे का सिर फूट गया कोए घर कान्ही भाज लिया
देवर कै कोलड़ा लाग्या हो घणा कसूता नाराज लिया
रणबीर बरोने आले नै करी टूटी फूटी सी कविताई।।
-52-

गुडफील
हमनै तो सुननी कोण्या थारी कोए दलील रै
ये सारे गुड फीलते ईब तूं भी गुड फील रै
भूखा मरै कोए बात नहीं छोड़ दे चिन्ता सारी
गुड फील ज्यूकर फीलैं म्हारे अटल बिहारी
या करी तरक्की भारी बोले सभी वकील रै।।
गुड फीलण मैं सूखे जावैं क्यों तेरे प्राण देख
हेमा मालिनी फीलती फील रहे कल्याण देख
हो कितनी अपमान देख मान ले अपील रै।।
म्हंगाई की मार पड़ै पर इसनै भूल जाइये तूं
दारू पी गुड फील हो कति ना शरमाइये तूं
ठप्पा सही लगाइये तूं मत करिये
गुड फीलैं सैं कटियार फीलती उमा भारती
जयपुर मैं सिंधिया जी तारै रणबीर आरती
सुषमा नकल मारती गाड्डे छाती में कील रै।।

-53-

तीन मुंहा नाग
तीन मुंहा नाग काला  भारत देश नै डसग्या।
अमीरां की चान्दी होगी गरीब कसूता फंसग्या।।
मुद्राकोष का फण जहरी काट्या मांगै पाणी ना
दूजा फण विश्व बैंक का ईकी शक्ल पिछाणी ना
डब्ल्यू टी ओ तीजा फण बचती कुण्बा घाणी ना
काले नाग तै दूध जो प्यावै उंहतै माड़ा प्राणी ना
इसका जहर समाज की नस नस के मैं बसग्या।।
शिक्षा पै कम खरचा हो हुकम इसे सुणा दिये
सेहत बणै हवण तै मंतर गजब के पढ़ा दिये
कोडियां के दामां पै पब्लिक सैक्टर बिका दिये
भकाये फंदा
इस काले नाग के दम पै देश अमीर घणे छागे
गरीब देशां के बण हितैषी ये भ्रम घणा फैलागे
दुनिया के अमीर कट्ठे होकै चूट-चूट के खागे
अमीरपरस्त नीति बणाकै गरीब नै जमा दबागे
इसे डंक मारे अमीरां नै समाज धरती मैं थंसग्या।।
अमीर गरीब के बीच की खाई और चौड़ी होगी
ये बालक रुलते हांडैं इनकी जवानी बौड़ी होगी
बदेशी नाम की देशी तै घणी जालम जोड़ी होगी
म्हारे डांगर रोज मरैं ठाड्डी इनकी घोड़ी होगी
रणबीर की कविताई तै ज्योत अन्ध्ेारे मैं चसग्या।।
-54-

पीस्सा
माणस आले प्यार रहे ना जग में पीस्सा छाग्या।
माट्टी होगी त्याग भाव की जी घणा दुख पाग्या।।
विज्ञान की नई खोजां नै अनहोनी करकै दिखाई
नियम जाण कुदरत के या जिन्दगी सफल बणाई
गलत इस्तेमाल हो इसका तो घणी करदे तबाही
मुट्ठी भर लोगां नै इसपै अपनी धाक जमाई
नाज सड़ै गोदामां मैं भूखा दुख मैं फांसी खाग्या।।
कुछां के कुते ऐश करैं म्हारे बालक भूखे मरते
हम दिन रात कमावैं वे तै कमाई काली करते
चटनी नहीं नसीब हमनै वे पकवानां तैं डरते
पीस्से के अम्बार लगे इनके पेट कदे ना भरते
बिन पैंदे का लौटा हमनै मूरख बेकूफ बताग्या।।
म्हारी ईज्जत आबरू उतरै ईब खुले बाजार मैं
धेले की ना कदर रही आपस के ब्यौहार मैं
ना सही रिश्ते बनाए हमनै अपने परिवार मैं
औरत दी एक चीज बणा लालच के संसार मैं
बैडरूम सीन टीबी पै खुलकै दिखावण लाग्या।।
खेती खोसी डांगर खोसे ईब करैगा कंगला यो
ना सुहावै म्हारी झूंपड़ी खुदका बढ़िया बंगला यो
म्हारी लूट कमाई देखो हमनै बतावै पगला यो
रहे ताश खेलते तो नहीं समझ पावां हमला यो
बता रणबीर सिंह क्यों पीस्से का नंगापन भाग्या।।
-55-

नया पेटैंट मारैगा
यो पेटैंट के जंजाल बीरा, बतादे करकै ख्याल बीरा
उठती दिल मैं झाल बीरा, यो करै कैसे कंगाल बीरा
सै योहे मेरा सवाल बीरा, मनै जवाब दिये खोल कै।।
समिति नै कर जलसा इसकी सारी कमी बताई रै
सन सैंतालिस तै पहल्यां गोरयां नै लूट मचाई रै
आच्छी कहैं सरकार बीरा, समिति करै इन्कार बीरा
अमरीका की सै मार बीरा, देश बणाया बजार बीरा
किनैं बढ़ाई तकरार बीरा, मनै जवाब दिये तोल कै।।
खोज म्हारी कै झटका नये पेटैंट तै जरूर लागै
भूख गरीबी भारत की इसतै कदे बी कोन्या भागै
कोण्या बढ़या निर्यात बीरा, नहीं घट्या आयात बीरा
क्यूकर बचै औकात बीरा, म्हारी चढ़ी सै श्यात बीरा
क्यों मारग्या सन्पात बीरा, मनै जवाब दिये टटोल कै।।
खाद पानी बिजली खुसगे यो अपना बीज ना होगा
अस्पताल कॉलेज पै कब्जा बदेशी कंम्पनी का होगा
फेरना मिलै दवाई बीरा, या म्हंगी होगी पढ़ाई बीरा
इसनै रोल मचाई बीरा, जनता झूठ भकाई बीरा
क्यूकर बचै तबाही बीरा, मनै जवाब दिये बोल कै।।
चिन्ता रोज सतावै क्यूकर चालैगा यो परिवार मेरा
पेटैंट बढ़िया चीज सै इसतै दिल करै इनकार मेरा
खींच सही तसबीर बीरा, लडा कोए तदबीर बीरा
मसला घणा गम्भीर बीरा लिखै सही रणबीर बीरा
समझा ईकी तासीर बीरा मनै जवाब दिये खंगोल कै।।
-56-
वार्ता: वैश्वीकरण के दौर में देशों के बीच असमानाएं बढ़ती जा रही हैं और देशों के अन्दर भी असमानाएं बढ़ रही हैं। एक तरफ हाईटैक सिटी हैं। मॉल शॉप हैं। दूसरी तरफ कॉलोनियों में बनी दुकानों को सील किया जा रहा है ताकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मॉल शॉप चल निकलें। एयर कन्डीशन्ड घर हैं, कारें हैं और स्कूल हैं। गरमी की दुनिया देख ही नहीं पाते ये बच्चे। वास्तव में हिन्दुस्तान तरक्की पर है। क्या बताया भला:

जमीन जल और जंगल पै अमीर कब्जा बढ़ावै सै।
गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।
जमीन पै कब्जा करकै हाईटैक सिटी बनाते आज
उजड़ कै जमीन तै कित जावै ना खोल बताते आज
बीस लाख मैं ले कै किल्ला बीस करोड़ कमाते आज
इनके बालक तै ऐश करैं म्हारे ज्यान खपाते आज
आदिवासी नै जंगल मां तै हांगा करकै हटावै सै।।
जंगल काट-काट कै गेरे ये मुनाफा घणा कमागे रै
आदिवासी दिये भजा उड़ै तै बहुत से ज्यान खपागे रै
मान सम्मान खातर लड़े वे ज्यान की बाजी लागे रै
देशी लुटेरे बदेशी डाकुआं तै ये चौड़ै हाथ मिलागे रै
किसान की आज मर आगी यो संकट मैं फांसी लावै सै।।
बिश्लेरी पानी की बोतल बाजार मैं दस की मिलती रै
दूध सस्ता और पानी महंगा बात सही ना जंचती रै
साफ पानी नहीं पीवण नै बढ़ती बीमारी दिखती रै
पानी म्हारा दोहन उनका पीस्से की भूख ना मिटती रै
जमीन जंगल जल गया संकट बढ़ता ए आव सै।।
औरत दी एक चीज बना बाजार बीच या बिकती रै
म्हंगाई बढ़ती जा कीमत एक जगहां ना टिकती रै
घणा लालची माणस होग्या हवस कदे ना मिटती रै
अमीरी गरीबां नै खाकै बी आज जमा ना छिकती रै
रणबीर बरोने आला घणी साची लिखता घबरावै सै।।
-57-
वार्ता: एक मई का दिन दुनिया के इतिहास में एक महत्व पूर्ण दिन है। सन् .............में ...............में मजदूरों ने इकट्ठे हो कर अपने हकों के लिए आवाज उठाई थी। अपने खून की कुर्बानी दी थी। लाल झण्डे की महिमा को स्थापित किया था।क्या  बताया भला:

मई दिवस एक मई नै दुनिया मैं मनाया जावै।
दुनिया के मजदूरो एक हो नारा यो लगाया जावै।।
लड़ी मजदूरां नै कट्ठे होकै दुनियां मैं लड़ाई बेबे
लाल झण्डा रहवै सलामत छाती मैं गोली खाई बेबे
पूरी एकता दिखाई बेबे यो एहसास कराया जावै।।
दी शहादत मजदूरां नै अपने हक लेने चाहे थे
कई सौ मजदूर कट्ठे होकै शिकागे के मैं आये थे
एकता के नारे लाये थे म्हारा हक नहीं दबाया जावै।।
समाजवाद की दुनियां मैं नई सी एक लहर चली
चीन साथ वियतनाम या हर गली और शहर चली
दिन रात आठ पहर चली इतिहास मैं बताया जावै।।
उस दिन तै मजदूर दिवस मेहनत कश मणाण लगे
मजदूर एकता जिन्दाबाद सुण मालिक घबराण लगे
रणबीर सिंह गीत बणाण लगे एक मई नै गाया जावै।।
-58-
वार्ता: कमला बैठी बैठी सोच रही है। हमारे गिहूं का भाव हमें कम दिया जाता है। बाहर से गिहूं मंगवाया जाता है वह महंगा है। ऐसा क्यों? उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं सूझता। वह क्या सोचती है भला:

किसान तै पढ़ण बिठाया गिहूं का आयात करकै हे।
आत्म निर्भर देश बनाया ज्यान हथेली पर धरकै हे।।
किसानां के ये हितैषी नेता आज कड़ै बिलां मैं बड़गे
के मजबूरी सै हमनै क्यों गिहूं आयात करने पड़गे
गिहूं गोदामां मैं सड़गे चुहे खागे बोरी कुतर कै हे।।
पहलमै फांसी खा खाकै किसान मरण लाग रहे सैं
काले पीले हरे रोजाना इनकै लड़ण नाग रहे सैं
म्हारै पड़ण झाग रहे सैं ईब पैंडा छुटैगा मर कै हे।।
बिन किसान ना खेती बताई बिन खेती उद्योग कड़ै
क्यूकर देश बढ़ैगा आगै इतना दुखी किसान जड़ै
मुंह खोलना जरूर पड़ै पानी गया सिर पर कै हे।।
अमरीकी गिहूं पै सब्सिडी आज बी जारी क्यों बताई
भारत की गिहूं की सब्सिडी खत्म करण की अड़ लाई
हांगकांग मैं मोहर लगाई मुश्किल आवां उभर कै हे।।
भारत का किसान दुखी हुया फसल पिटगी चौड़े मैं
चांद तो कदे बी मांग्या ना करया सै गुजर थोड़े मैं
बदेशियां के घमोड़े मैं मरना पड़ैगा पसर के हे।।
बिना एकता ना काम चलै पिट्या किसान न्यारा-न्यारा
जातपात और गोत नात पै बांटया कैहकै यारा प्यारा
रणबीर सिंह नहीं म्हारा गुजारा मतना बैठो डरकै हे।।

-59-
वार्ता: आईटी के क्षेत्र में जहां एक तरफ कुछ लोगों को नौकरियां मिली वहीं पर उनकी मुशीबतें भी बढ़ी हैं। कंपनी में लड़का-लड़की 18 घण्टे बिताते हैं। घर में 6 घण्टे। 6 घण्टे में से पांच घण्टे सोना। एक घण्टा परिवार के साथ यानी पत्नी के साथ तो कौन सा सम्बन्ध ज्यादा महत्वपूर्ण है। 18 घण्टे वाला या एक घण्टे वाला। क्या बताया कवि ने भला: दो शादीशुदा लड़के-लड़की में बच्चा बणाणे की समस्या:

एक जणा दिल्ली मैं दूजा हैदराबाद में बताया।
बालक बणाणा बेड़ी लागै यो किसा जमाना आया।।
आई टी मैं मिली नौकरी औधा उंचा पागी सै
नौकरी मैं पाछे पड़ज्या उनै चिन्ता खागी सै
बहाने करण लागी सै पतिदेव भी समझाया।।
बालक तै घणा तै यो कैरियर प्यारा होग्या आज
किसा जमाना आया बीज बिघन के बोग्या आज
प्यार भावना खोग्या आज माणस रोब्बट बनाया।।
तीस साल की उम्र होगी बालक कोए हुया नहीं
जिन्दगी की तन्हाई एकला जावै रहया नहीं
किसे तै जावै कहया नहीं नहीं कोए रास्ता पाया।।
न्यारी-न्यारी जागां पै उनके नये रिश्ते बणण लगे
बेरा पाटै एक दूजे तै रणबीर सिंह जलण लगे
तलाक त्यारी करण लगे घर मैं संकट छाया।।
-60-
जीन्द जिले के अलेवा खण्ड के गांव डाहौला में किताब सिंह की सुपुत्री मीना की शादी एक महीना पहले लोन गांव के स्वरूप सिंह के लड़के सतबीर सिंह से हो जाती है। लोन गांव जो नरवाना में है नैन गोत्र का गांव है और इसमें 10-15 घर नेहरा गोत्र के रहते हैं। कहते हैं नेहरा और नैन गोत का भाईचारा है। बख्त आ लिया अक यू भाईचारा तोड़ना पड़ैगा ना तै यू तोड़या जागा। बुलधां की खेती क्यूं छोड़ दी इन ंपचातियों नै जो गोतां की परम्परा की कोल्ली भरें हांडैं सै? क्या बताया कवि ने भला:

अलेवा खण्ड का गाम डाहौला उड़ै गोत विवाद बनाया।
नेहरा और नैन ये भिड़गे बिना बात का शोर मचाया।।
लोन गाम मैं नरेश गोत के दस पन्दरा घर बताये
नेहरा छोरी ना ब्याही आवै पंचात नै फरमान सुनाये
पहलम बी ब्याह हुये सैं ईबकै क्यों एतराज जताया।।
मीना बेटी किताब सिंह की सतबीर सिंह के संग ब्याही
लोन गाम के नेहरा कहते इस तरियां मचै तबाही
एक धेले का जुर्माना पंचात नै इस शादी उपर लाया।।
एक बै सोचां सीले मत नै क्यूकर पार पड़ै इस
दिन पै दिन गोत बधते जावैं आपस मैं लड़ैं इस
गोतां की तकरार डबोवै पुराना रिवाज चलता आया।।
किसे की ब्याह शादी ना हो जै इस तरियां रोक रहवै
समचाने मैं गोत पन्दरा कोए किसै नै कुछ ना कहवै
रणबीर घणे गाम जित ना जावै खेड़े का गोत बचाया।।
-61-
बोल बख्त के: पैप्सी जहर
आज शाम को टी.वी. चैनल सहारा समय पर 5.00 बजे खबर सुनी जहर का घूंट। बताया गया कि 24 प्रतिशत से ज्यादा कीटनाशक कोका कोला में पाये गये। दिल दहल गया और एक रागनी के माध्यम से आत्मा पुकारी। क्या बताया भला:
जहर पीवां पैप्सी कोलां मैं, मौत के मुंह मैं जावां रै।
सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।
पाणी मैं जहर घुलग्या इसका हमनै बेरा कोन्या
घणा कसूता घाल दिया टूटता दीखै घेरा कोन्या
हरित क्रांति हरियाणा में खुशी थोड़े लोगां मैं ल्याई
घणे लोगां मैं कीटनाशक नै या घणी रची तबाही
आज पाछै बोतल हम नहीं पैप्सी कोला की ठावां रै।।
अनतोल्या इस्तेमाल हुया सै पाछले दस सालां मैं
शरीर निचोड़ बगा दिया लाली बची नहीं गालां मैं
बदेशी कंपनी लूटैं हमनै ये हजर पिलाकै देखो
मुनाफा कमावैं अरबां का कीटनाशक खिलाकै देखो
कसम खावां आज सारे हाथ नहीं ठण्डे कै लावां रै।।
खाज गात मैं करदी सै आज घर कोए बच्या नहीं
दमा बीमारी बाधू होगी खुलासा म्हारै जंच्या नहीं
गैस पेट की बढ़ती जा महिला हुक्टी पीवण लाग्गी
नामर्दी का शिकार होकै पीढ़ी युवा जीवण लाग्गी
इलाज कितै होन्ता कोन्या बताओ हम कित जावां रै।।
कई साल तै रुक्या नहीं जहर का खेल न्योंए चालै
के बरा किस-किस के जीवन पै हाथ रोजाना घालै
कैंसर बधता जावै आज कई विद्वान बतावैं देखो
जन्म जात बीमारी बधगी आंकड़े ये दिखावैं देखो
कहै रणबीर बरोने आला ईबतैं मोर्चा जमावां रै।।
-62-
भ्रश्टाचार व भय मुक्त हरियाणा
भ्रष्टाचार और भय मुक्त हरियाणा देखण चाल पड़या।
आम आदमी सरकारी आफिस मैं पाया बेहाल खड़या।।
बिना पीस्से फाइल सरकै ना किसे महकमेे मैं जा देखो
ठेकेदारां की ईब चान्दी होरी बेउमाना रहे खा देखो
डीजल पैट्रोल के भा देखो लागै नाग तत्काल लड़या।।
भय छारया चारों कान्ही कद यो एक्सीडैंट होज्या
एक कार मैं हो कुन्बा सारा गहरी नींद मैं सोज्या
भय बीच बिघन के बोज्या माणस देखै फिलहाल खड़या।।
कितै भय पहलवानां का कितै भय थानेदारी का होज्या
कितै भय राजपाट का कितै भय रिश्तेदारी का होज्या
कितै भय भ्रष्टाचारी का होज्या पल मैं बबाल खड़या।।
भ्रष्टाचार की जड़ गहरी यो बड़ पाड़णा आसान कडै
बेकूफ बहादर सै वो जो बिनां जड़ां नै पहचान लड़ै
रणबीर बीच घमासान अडै़ छोड़ डॉक्टरी नाल खड़या।।
-63-
कट्ठे होल्यां
बहोत दिन होगे पिटत्यां नै ईब कट्ठे होकै देख लियो।
बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।
करड़ी मार नई नीतियां की या सबपै पड़ती आवै सै
देश नै खरीदण की खातर बदेशी कंपनी बोली लावै सै
या ठेकेदारी प्रथा सारे कै बाहर भीतर छान्ती जावै सै
बदेशी कंपनी पै कमीशन यो नेता अफसर खावै सै
मन्दिर का छोड़ कै पैण्डा भूख गरीबी पै रोकै देख लियो।।
जड़ै जनता की हुई एकता उड़ै की सत्ता घबराई सै
थोड़ा घणा जुगाड़ बिठाकै जनता बहकानी चाही सै
जड़ै अड़कै खड़ी होगी जनता लाठी गोली चलवाई सै
लैक्शनां पाछै कड़ तोड़ैंगे या सबकी समझ मैं आई सै
ये झूठे बरतन जितने पावैं ताम सबनै धोकै देख लियो।।
हालात जटिल हुये दुनिया मैं समझणी होगी बात सारी
ईब ना समझे तो होज्या नुकसान म्हारा बहोतैए भारी
पैनी नजर बिना दीखै दुश्मन हमनै घणा समाज सुधारी
हम सब की सोच पिछड़ी नजर ना नये रास्ते पै जारी
भीतरले मैं अपणे भी दिल दिमाग गोकै देख लियो।।
जात धरम इलाके पै हम न्यारे-न्यारे बांट दिये रै
कुछ की करी पिटाई कुछ लालच देकै छांट लिये रै
म्हारी एकता तोड़ बगादी ये पैर जड़ तै काट दिये रै
ये देशी बदेशी लुटेरे म्हारे हकां नै नाट लिये रै
रणबीर सिंह दुख अपणे के ये छन्द पिरोकै देख लियो।।
-64-
क्यों बैठ्या
चांदकौर    : सारी दुनिया मनावै आजादी तों क्यों बैठ्या मुंह नै बाकै।
रणबीर  क्यों माथे की फूट रही देख चारों तरफ नजर गडाकै।।
चांदकौर
आजादी पाछै म्हारे देश मैं कहवैं तरक्की हुई सै भारी
खेतां के म्हां फसल लहरावैं देखो हरित क्रांति आरी
बुल्ध गया टैªक्टर आग्या किसान नै जमकै बाजी मारी
टाटा बिड़ला के कारखाने सारे देश मैं देवैं किलकारी
कुएं का मिंडक बण्या बैठ्या देख ले तरक्की तूं जाकै।।
रणबीर
जो जो तनै ये बात बताई इन सबका मनै बेरा सै
म्हारे आजाद देश मैं जमकै खूब कमाया कमेरा सै
मेहनत करकै खान खेत मैं चाहया नया सबेरा सै
धन-दौलत पैदा करकै बी ना हुया दूर अन्धेरा सै
नफा टोटा यो सारा बतादे तों मनै सही सही समझाकै।।
चांदकौर
इतना मनै बेरा ना पर उत्सव मनावै सरकार सै
रूक्के मारती हांडै सै के झूठ कही मनै भरतार सै
शिक्षा का पूरे देश मैं बतावै करया हमनै प्रसार सै
तरां-तरां की भजाई बेमारी इसका करै प्रचार सै
किस्मत का खेल बतावैं झांकी न्यारी न्यारी दिखलाकै।।
रणबीर
मेहनत करी किसान नै पूड़े टाटा बिड़ला पोगे क्यों
कपड़ा बुण्या हजारां गज फेर बालक नंगे सोगे क्यों
त्याग तपस्या और सच्चाई दीन जहान तै खोगे क्यों
मुखबिर बने जो अंग्रेजां के बे शासक म्हारे होगे क्यों
सूत कसूत तै नपै आजादी या नापी रणबीर नै गाकै।।
-65-
हरि के हरियाणे मैं
श्यामत म्हारी आई, कोन्या दीखै राही, चढ़ी सै करड़ाई
हरि के हरियाणे में।।
बोहर और भालोठ बताये, रूड़की किलोई संग दिखाये
कर्जा च
हरि के हरियाणे मैं।
धरती चढ़गी लाल स्याही मैं, कसर नहीं रही तबाही मैं
आज घंटी खुड़की, किलोई चाहे रूड़की, होवैगी म्हारी कुरड़ी
हरि के हरियाणे मैं।।
आमदन या घाट लिकड़ती लागत तो बाधू लानी पड़ती
सब्सिडी खत्म म्हारी, देई घरां मैं बुहारी, श्यामत आगी भारी
हरि के हरियाणे मैं।।
महंगी होन्ती जा सै पढ़ाई रै, रणबीर मरैं बिना दवाई रै
दुख होग्या भार्या, मन बी होग्या खार्या, नहीं रास्ता पार्या
हरि के हरियाणे मैं।।
-66-
जाल अमेरिका का
अमरीका तनै जाल बिछाया हिंसा सैक्स नशा खूब फलाया।
हरेक देश दबाणा चाहया, तेरी चाल समझ मैं आई सै।।
फीम सुलफा चरस बिकादी,हथियारां की सुरंग बिछादी
तेरे होगे सही पौ बारा, यो नौजवान फंसग्या म्हारा
म्हारी तबीयत होगी खारया, थारी सारी काली कमाई सै।।
तूफान अश्लीलता काल्याया, गाभरू कै खून मुंह लाया
चैनल पर चैनल चलाया, अराजकता कसूत फलाई सै।।
ब्लयू फिल्मां की बाढ़ सी ल्यादी,काली कमाई इसमैं बी लादी
हिंसा के रिकार्ड तोड़ दिये, म्हारे छोरा छोरी जोड़ लिये
ये हिंसक घोड़े खुले छोड़ दिये, सोच समझ चाल चलाई सै।।
एक हाथ तै लूटै सै हमनै, दूजे हाथ तै चूटै सै हमनै
न्यांे ध्यान हटावै सचाई तैं, ऐश करै म्हारी कमाई पै
रणबीर की कविताई पै, उम्मीद जनता नै लाई सै।।
-67-
दुख गेरया
दुख अमरीका नै गेरया इसका पटग्या सै बेरा।
नहीं पता संसार नै एक बै सबनै बता दियो।।
आंख्यां पै चरबी चढ़गी
दादागिरी घणी बढ़गी
यो कार करै घणी माड़ी
अमरीकन सूंडी ल्या बाड़ी
खागी या परिवार नै, संदेशा उसपै पहोंचा दियो।।
यो किसे तै नहीं डरै सै
घणी खोटी नीत करै सै
करता घणे यो रंग ठाठ
हम होगे सां बारा बाट
लेग्या खोस बहार नै, या उसतै कोए समझा दियो।।
न्यों कहते जोड़ कै हाथ
कड़ै सै गामां की पंचात
या बात करियो न्याय की
म्हारै काया मैं ना बाकी
छोड़ कै नै तकरार नै, ये मिलकै कदम बढ़ा दियो।।
कसर छोड्डी ना छल की
धोखे मैं
इनै हद करी जुलम की बाढ़ लाई नंगी फिल्म की
इसके झूठे प्रचार नै, रणबीर खोल कै दिखा दियो।।
-68-
सौ के तोड़ की
राजबाला जोगी के इन्तजार में थी। चांद कौर कहती है-जोगी पुरानी बातें सुनाता है, नई बात नहीं। राजबाला बोली यो नया जोगी सै पुराना कोनी। इतने में जोगी आ जाता है तो राजबाला कहती है कोए नई बात सुणाओ। जोगी टी वी संस्कृति पर सुनाता है:
टी वी सीरियल उपर जूता क्यों आपस मैं बाज रहया।
झूठी बात नहीं मैं कहता बता सब साची आज रहया।।
1. बाबू न्यूज सुण्या चाहवै, उस खातर कोए टेम नहीं
  बैड रूम सीन कद आज्या यो बच्चा कोए नेम नहीं
  बधती जावै इस टी वी की कम क्यूं होन्ती फेम नहीं
  फैशन शो के नाम पै हो इसपै जमा नंगा नाच रहया।।
2. म्हारी संस्कृति खतरे मैं कहै दिखाये घणा प्यार रहे सैं
  भूंडे चेनलां की रोजाना कर क्यूं आड़ै भरमार रहे सैं
  महिला शरीर बेच टी वी पै बढ़ा कूण व्यापार रहे सैं
  औरत जिम्मेवार सै इसकी कर यो झूठा प्रचार रहे सैं
  चित बी मेरी पिट बी मेरी खुल ना इनका राज रहया।।
3. अंग्रेजी फिल्म जमा उघाड़ी हमनै टी वी पै दिखावैं क्यों
  नैतिकता की दुहाई दे कै फेर उल्टा इल्जाम लगावैं क्यों
  नशीली दवा मौत माणस की कारखाने मैं बनावैं क्यों
  कदे जवान साच समझले उसनै गलत राही लावैं न्यों
  म्हारे दिल दिमाग पै हमला जंग कसूता माच रहया।।
4. देश के नौजवानो म्हारे पै कई
  दारू सुलफा दवा नशीली करैं जमा खोखला तनै दिखाउं
  दे हथियार तनै करावैं अपणी रूखाली तनै मैं जताउं
  ईब बी लेल्यो सम्भाला रै, रणबीर रागनी थारी बनाउं
  हमला छोटा मोटा कोण्या यो हिल भारत का ताज रहया।।
-69-
आजादी के पचपन साल
पचपन साल की आजादी मैं के खोया के पाया हे।
भगत सिंह से वीरां नै जिस खातिर खून बहाया हे।।
1. किसी आजादी आयी देश मैं गरीबां का यो सवाल सै
  बेरोजगारी क्यूं बढ़ी सवाई म्हारा किसनै ख्याल सै
  जवानी जाल्याी बाई पास कै पचास साल का कमाल सै
  नामर्दी नै जमां गोड्डे तोड़े हाल हुया बेहाल सै
  खूनी जोंक चिपट रही सारा खून चूस बगाया हे।।
2. अपणे पाहयां देश खड़या हो पचास साल के थोड़े थे
  शुरू-शुरू मैं चाले पाहयां ये उद्योग सरपट दौड़े थे
  पब्लिक सैक्टर आया देश मैं भाजे देख कठफोड़े थे
  मुनाफा खोर नै लूट मचाई बरसे म्हारे पै कोड़े थे
  देश पढ़ण बिठा दिया बेबे लूट-लूट कै खाया हे।।
3. इतने मैं भी ना साधी ये बदेशी कंपनी बुलाई लई
  जनता जाओ चाहे भाड़ मैं या तोंद अपनी फुला लई
  इनके गलूरे लाल पड़े पर म्हारी कमर तै झुका दई
  ऐश करते काले धन पै बहु बेटी म्हारी रूला दई
  करजे के म्हां भारत दाब्या यू गरीब घणा सताया हे।।
4. ज्यान काढ़ली घोटाल्यां नै डंकल नै कड़ तोड़ दई
  भ्रष्टाचार मैं ये नेता डूबे जनता की नाड़ मरोड़ दई
  मुनाफाखोर व्यवस्था नै या म्हारी जवानी निचोड़ दई
  हक खोसकै महिलाओं के बीच बजार में छोड़ दई
  धार्मिक कट्टरवाद नै कहै रणबीर देश खिंडाया हे।।
-70-
दिल्ली आल्यो
गिणकै दिये बोल तीन सौ साठ दिल्ली आल्यो।
नहीं सुणते बात हम देखैं बाट दिल्ली आल्यो।।
ईब खत्म म्हारी पढ़ाई कति गोलते कोण्या
हम मरते बिना दवाई कति तोलते कोन्या
कति बोलते कोण्या बनरे लाट दिल्ली आल्यो।।
इसी नीति अपनाई किसान यो बरबाद करया
घर उजाड़ कै म्हारा अपणा यो आबाद करया।
घणायो फसाद करया तोल्या घाट दिल्ली आल्यो।।
म्हारे बालक सरहद पै अपनी ज्यान खपावैं
थारे घूमैं जहाज्यां मैं म्हारे खेत खान कमावैं
भूख मैं टेम बितावैं थारे सैं ठाठ दिल्ली आल्यो।।
सात सौ चीजां की रणबीर ये सीम खोल दई
गउ भैंस बकरी म्हारी ये बिकवा बिन मोल दई
मचा रोल दई गया बेरा पाट दिल्ली आल्यो।।
-71-
दहेज
बिना दहेज के ब्याह करां और करवावां हरियाणे मैं।
कट्ठे होकै नै एक न्यारी मिशाल रचावां हरियाणे मैं।।
म्हारे समाज नै दहेज की बीमारी खोखला करगी रै
ईबतै लेल्यां किमै उभारा या पाप की हांडी भरगी रै
मेरे पक्की बात जरगी रै इनै धूल चटावां हरियाणे मैं।।
औरत बी एक इन्सान होसै याबात समझ में आगी
आधी दुनिया समाज के मैं दुख ये बहोत घणे ठागी
ईब या ना सताई जागी अभियान चलावां हरियाणे मैं।।
गलत बात नै छोड़कै पाछे सही बात पै विचार करांगे
दुनिया मैं बिगाड़ आया उसकै खिलाफ प्रचार करांगे
ठीक अपने हम परिवार करांगे कैसे बचावां हरियाणे मैं।।
एक नवजागरण जो चाल रहया इनै और मजबूत करां
इन्सानियत म्हारी मंजिल सै भगत सिंह की
मौत तै हम नहीं डरां रणबीर अलख जगावां हरियाणे मैं।।
-72-
घूंघट तार बगाया हे
यो घूंघट तार बगाया हे, खेतां मैं खूब कमाया हे।
खेलां मैं नाम कमाया हे, हम आगै बढ़ती जारी बेबे।।
लिबासपुर रोहनात के मैं बहादरी खूब दिखाई बेबे
अंग्रेजां तै जीन्द की रानी नै गजब लड़ी लड़ाई बेबे
हमको दबाना चाहया हे, दोयम दरजा बताया हे
जाल मै कसूता फंसाया हे,न्यों म्हारी अक्ल मारी बेबे।।
डांगर
खूब बोल सहे हमनै ये स्कूलां मैं करी सै पढ़ाई बेबे
सब कुछ दा पै लाया देखो, सबनै खवाकै खाया देखो
ना गम चेहरे पै आया देखे, कदे हारी कदे बीमारी बेबे।।
नकल रोकती बहन सुशीला जमा नहीं घबराई सै
दुनिया मैं अदभुत मिशाल अपनी ज्यान खपाई सै
गन्दी राजनीति साहमी आई, औरतां पै श्यामत आई
फेर बी सै अलख जगाई, देकै कुर्बानी भारी बेबे।।
लड़ती मरती पड़ती हम मैदाने जंग मैं डटरी देखो
कायदे कानूनां तै आज म्हारी समाज हटरी देखो
हर महिला मैं लहर उठी, हर गली और शहर उठी
सुबह श्याम दोपहर उठी, रणबीर की कलम पुकारी बेबे।।

73-
किसी आजादी
देश मैं किसी आजादी आई, गरीबां कै और गरीबी छाई।
अमीरां नै सै लूट मचाई, म्हारी पेश कोए ना चलती।।
भगत सिंह नै दी कुर्बानी, जनता नै खपाई जवानी
हैरानी हुई थी गोरयां नै, कमर कसी छोरी छोरयां नै
देश बांट दिया सोहरयां नै, जयां म्हारी काया जलती।।
ये गोरे गये तो आगे काले, हमनै नहीं ये कदे सम्भाले
चाले कर दिये बेईमाना नै, भूल गये हम इन्सानां नै
इन म्हारे देशी हकुमरानां नै, करदी मूल भूत गलती।।
बोवनिया की धरती होगी, सब जात्यां की भरती होगी
सरती होगी नहीं बिरान, खुश होवैंगे मजदूर किसान
भगत सिंह करै ऐलान, अंग्रेजां कै ये बात खलती।।
मुनाफाखोर देश पै छाये, पीस्से पै सब लोग नचाए
लगाये भाव बीच बाजार मैं, आपस की तकरार मैं
किसे बी घर परिवार मैं आस नहीं कोए बी पलती।।
ये मकान सैं परिवार नहीं, माणस तो सैं घरबार नहीं
सरकार नहीं सुनती म्हारी, जाल कसूता बुनती जारी
गरीबां कै आज ठोकर मारी, रणबीर कै आग बलती।।
-74-
झांक कै देखां अपने भीतर
रिश्ते नाते जीवन मूल्य सारे हीतो बदल रहे सैं।
पीस्से हवस के जीवन मैं आज बढ़ दखल रहे सैं।।
मानव सामाजिक प्राणी सै पशु की
दया करुणा त्याग छोड़ ऐशो आराम मैं झूमता जावै
असली प्रेम लैला मजनंू का यो माणस भूलता जावै
खा खा कै मेहनत दूजे की आज घणा फूलता जावै
खाओ पीओ हाथ ना आओ पूरी बदल शकल रहे सैं।।
दुख सुख के हम साथी आज बच्या सरोकार कड़ै सै
मतलबी आज दोस्त होया माड़ी माड़ी बातां पै लड़ै सै
भाग लालसा बढ़ती जा अथाह प्रेम था हुया जड़ै सै
एड्स बीमारी खावै हमनै हालत घणी बिगड़ी अड़ै सै
मानवता सारी भुला दई कर मोटी अकल रहे सैं।।
त्याग तपस्या बलिदान कड़ै आपा धापी माच रही
औरत एक चीज बनाई हवस समाज मैं नाच रही
झूठ अपना राज देश मैं चला बणकै नै साच रही
दौलत सबके जीवन मैं कर या तीन दो पांच रही
राक्षस बन भक्षक आगे बदल ये अमल रहे सैं।।
रोज के जीवन मैं धन काला घर मैं आग्या आज
काला धन यो जीवन काला दिमाग मैं छाग्या आज
धौला धन पिछड़ गया मात काले तै खाग्या आज
धन काला कालस धौले कै समाज के मैं लाग्या आज
कहै रणबीर अमरीका की कर हम नकल रहे सैं।।
-75-
देख लिया जमाना
घूम जमाना देख लिया, म्हारी कितै सुनाई कोन्या।
रोल कड़ै सै जमाने मैं, म्हारी समझ मैं आई कोन्या।।
महंगा लेकै सस्ता देना, कमा-कमा कै मर लिये रै
लूट म्हारी कमाई किसनै, ये घर अपने भर लिये रै
कर्जे सिर पर लिये रै, बचण नै जागां पाई कोन्या।।
दिन-दिन महंगी होती जावै, बालकां की पढ़ाई या
पढ़े पाछै रोजगार नहीं सलॅफास की गोली खाई या
कित जावै कमाई या खोल कै बात बताई कोन्या।।
अपोलो जिसे अस्पताल नये-नये खोले जावैं रै
घणा म्हंगा इलाज उड़ै हम बाहर खड़े लखावैं रै
सरकारी के ताला लावैं रै, देता जमा दिखाई कोन्या।।
अमीरां की खातर ये बदेशी कम्पनी तैयार खड़ी
गरीबां की मर आगी बाजारी नागन आज लड़ी
रणबीर सिंह नै छन्द घड़ी करी जमा अंधाई कोन्या।।
-76-
गुन्डा गरदी
इस गुण्डागर्दी नै बेबे ज्यान काढ़ ली मेरी हे।
सफेद पोश बदमाशां नै इसी घाल दी घेरी है।।
रोज तड़कै होकै त्यार मनै हो कालेज के मैं जाणा
नपूता रोज कूण पै पावै उनै पाछै साइकल लाणा
राह मैं बूढ़े ठेरे बी बोली मारैं हो मुश्कल गात बचाणा
मुंह मैं घालण नै होज्यां मनै चाहवैं साबती खाणा
उस बदमाश जलै नै या चुन्नी तारली मेरी हे।।
मनै सहमी सी नै मां आगै फेर बात बताई सारी
सीधी जाइये सीधी आइये मनै समझावै महतारी
तेरा ए दोष गिनाया जागा जै तनै या बात उभारी
फेर के रहज्यागा बेटी जिब इज्जत लुटज्या म्हारी
मां हाथ जोड़कै बोली तेरे बरगी और भतेरी हे।।
न्यों गात बचा बचाकै पूरे तीन साल गुजार दिये
एच ए यू मैं लिया दाखला पढ़ण के विचार किये
वालीबाल मैं लिकड़ी आगै सबके हमले पार किये
के बताउं किस किसनै मेरे पै जो जो वार किये
मार मार कै तीर कसूते या छाती सालदी मेरी हे।।
कुछ दिन पहलम का जिकरा दूभर जीना होग्या
इन हीरो हान्डा आल्यां का रोज का गमीना होग्या
कई बै रोक मेरी राही खड़या एक कमीना होग्या
उस दिन बी मैं रोक लई घूंट खून का पीना होग्या
रणबीर कई खड़े रहैं साइकिल थाम लें मेरी हे।।
-77-
खुला बाजार
खेती म्हारी जोड़ दई ईब दुनिया के खुले बाजार तै।
बदेशी कम्पनी खुल्ली चरैं ना काबू आवैं सरकार कै।।
गिहूं बाजरा बोणा छोड़कै हम फूल उगावण लागे रै
अपने बिना फूलां के उनके महम सजावण लागे रै
दादी पै माक्खी भिनकैं उनकी टहल बजावण लागे रै
देशी खेती मंूधी मारदी सब किसान कराहवण लागे रै
म्हारा उजड़ना लाजमी सै जो चाल्ले इसे रफतार तै।।
मुंह मांगी कीमत देकै फूल उगावण नै मजबूर करैं
उनके स्वाद तो पूरे होज्यां हमनै रोटियां तै दूर करैं
गिहूं की कीमत पै सब्जी बोवां हम गलती जरूर करैं
कई देशां नै भुगत लिया हम क्यों इसपै गरुर करैं
भूख फैलै बहोत घणी ना मिल पावै भोली भरतार तै।।
कुपोषण म्हारे देश मैं ईब दिन दिन और बढ़ैगा रै
धरती की ताकत मारी जा म्हारा पैदावार घटैगा रै
मन्दी का दौर चाल पड़या म्हंगाई का ताप चढ़ैगा रै
गरीब किसान मारया जागा चौड़े मैं जुलूस क
जनता घणी दुखी सै इन झूठे नारयां की हुंकार तै।।
भारत का किसान मरया तै आजाद बचै हिन्दुस्तान नहीं
देश बेचण की काण कहवै जिब बचै यो इन्सान नहीं
मानवता खतरे मैं गेरदी क्यों बोलै यो भगवान नहीं
अनैतिकता पै खड़े होकै मानवता बचाना आसान नहीं
कहै रणबीर सिंह बरोने आला लड़ै कलम के हथियार तै।।
-78-
म्हारी कुर्बानी
म्हारी कुर्बानी हरियाणा मैं एक दिन रंग लयावैगी।
झूठ की हाण्डी फूटैगी साच खूब्बै सम्मान पावैगी।।
किसान आन्दोलन बढ़ैगा या धरती भीड़ी होज्यागी
किसान के बेटे पुलिस मैं उनकी आत्मा रोज्यागी
सरकार खोखली होज्यागी जवान हजारां खावैगी।।
बन्द एम आई टी सी कई औरों का नम्बर आया सै
पीस्से कोन्या तनखा के कदम ज्यां करड़ा ठाया सै
हरियाणा दां पै लाया सै या वारी समझ मैं आवैगी।।
हमने सोचना बन्द करया या गलती करदी भारी
इस अेहदी पन के कारण गई म्हारी खाल उतारी
विचार की ताकत न्यारी या म्हारी चेतना जगावैगी।।
बढ़िया इन्सान किसा हो सै इसपै विचार करांगे रै
सुन्दर समाज का सपना इसमें पूरे रंग भरांगे रै
आपस में नहीं लड़ांगे रै बात रणबीर की भावैगी।।
-79-

बोल बख्त के
बड़े पैमाने पर किसानों की जमीनें छिन रही हैं। जल पर देशवासियों का अधिकार खत्म होता जा रहा है। कृषि उत्पादों की कीमातें में गिरावट तथा उत्पादन के लिए जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। जंगल में आदिवासियों को खदेड़ा जा रहा है। सरकारी बैंक व्यापारिक बैंक हो गये हैं। खेतों के लिए किसानों को 36 प्रतिशत से लेकर 60 प्रतिशत तक सालाना सूद की दर पर कर्जा लेने के लिए स्थानीय महाजनों और साहूकारों के चंगुल में धकेला जा रहा है। स्टॉक मार्किट व अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी का बोल बाला है। सभ्यता का अर्थ आत्मा की सभ्यता और आचरण की सभ्यता होता था। वर्तमान में सभ्यता का अर्थ स्वार्थ और आडम्बर हो गया है। युवा लड़के-लड़कियों, दलितों व महिलाओं को हासिये पर धकेला जा रहा है। जब तक ये तबके बिखरे हुए हैं तब तक ये घाय के टुबड़े हैं, एक होकर ये जहाज खींचने वाले रस्से हो जायंेगे। क्या बताया भराः
आत्म सम्मान बेच देश का धनवान बने हांडैं सैं।
पाखण्ड रचा कै दिन धौली भगवान बने हांडैं सैं।।
लच्छेदार भाषण देकै जनता बेकूफ बनाई किसनै
हमनै लूटैं कामचोर बतावैं या प्रथा चलाई किसनै
खूनी भेड़िया इस समाज मैं इन्सान बने हांडैं सैं।।
बालक इनके बिगड़लिये सब अवगुण पाल रहे रै
सट्टा बाजारी चोरी जारी चाल कसूती चाल रहे रै
पशु भावना के शिकार ये नौजवान बने हांडैं सैं।।
इन्सानियत सारी भूल गये पीस्सा ईष्ट भगवान हुया
सारे परिवार खिंड मिंड होगे रोब्बट यो इन्सान हुया
समाज की ये बढ़ा कै पीड़ा दयावान बने हांडैं सैं।।
परम्परा के घेरे में पहल्यां घर मैं बोच दबाई किसनै
आधुनिकता के नाम पै या बाजार ल्या बिठाई किसनै
रणबीर महिला चीज बनाई खुद दलाल बने हांडैं सैं।।
-80-
किस्स लीला चमन
चमन भाई क्यों रोवै
हिम्मत मतना हारै तूं रोवण की करदे टाल।।
थारे प्रेम उफपर ज्यान अपनी वार देउफं मैं
न्यारे करणियो नै घाट मौत के तार देउफं मैं
जी करता सुधार देउं मैं थारे बिगड़े हाल।।
मनै तो चमन कदे प्यार नहीं करया रै
न्यों सोचू था के इस प्यार मैं धरया रै
आज मेरा कालजा भरया रै घणी कसूती
इसे प्रेम के रोड़ा अटकावै सही धम नहीं
करना चाहिये नीचे करम नहीं कहावैगा चण्डाल।।
तेरा प्रेम सै साच्चा चमन मत उदास हो
सच्चाई की आड़ मैं तपकै कुन्दन खास हो
रणबीर बुराई का नाश हो पक्का सै ख्याल।।

ठेकेदारां की आपा धापी


या आपाधापी मचा दई इन देस के ठेकेदारां नै।
सारे रिकार्ड तोड़ दिये धन के भूखे साहूकारां नै।।
विकास तरीका घणा कुढ़ाला बेरोजगार बढ़ाया रै
घर कुणबा कोए छोड़या ना घणामहाघोर मचाया रै
बाबू बेटा तै दारू पीवैं सास बहू मैं जंग कराया रै
बूढ़यां की कद्र कड़े तै हो जवानां का मोर नचाया रै
माणस तै हैवान बणाये सभ्यता के थानेदारां नै।।
इसा विकास नाश करैगा क्यों म्हारै जमा जरती ना
गरीब अमीर की या खाई क्यों कदे बी भरती ना
चारों कान्ही माफिया छाग्या बुराई आज डरती ना
अच्छाई मैं ताकत इतनी फेर बी या कदे मरती ना
बदेशी कंपनी छागी देदी छूट राजदरबारां नै।।
अमरीका दादा पाक गया दुनियां मैं आतंक मचाया
सद्दाम हुसैन साहमी बोल्या यो इराक पढ़ण बिठाया
युगोस्लाविया पै बम्ब गेरे यो कति नहीं शरमाया
तीसरी दुनिया चूस लई भारत मैं भी जाल फैलाया
बदेशी अर देशी डाकू सिर चढ़ाये सरकारां नै।।
उल्टी राही चला दई म्हारे देस की जनता किसनै
बेरा पाड़ां सोच समझ कै देश तै भजावां उसनै
उस विकास नै बदलां मोर बनाया सै जिसनै
रणबीर इसा विकास हो जो मेटदे सबकी तिसनै
दीन जहान तै खो देगी जनता इन दरकारां नै।।

गलत विज्ञान

 गलत विज्ञान
मानवता का विनाश करै जो इसा इन्सान चाहिये ना।
संसार नै गलत दिशा देवै इसा विज्ञान चाहिये ना।।
विज्ञान पै पाड़या बेरा अणु मैं ताकत बहोतै भारी सै
अणु भट्टी तै बणै बिजली जगमगावै दुनिया सारी सै
अणु बम तो विनासकारी सै इसा शैतान चाहिये ना।।
मानवता नै बड़ी जरूरत सै आज अन्न और वस्त्रां की
जंग की जरूरत जमा नहीं ना जरूरत अणु शस्त्रां की
जो पैरवी करै अस्त्रां की इसा भगवान चाहिये ना।।
कड़ै जरूरत सै उनकी कारखाने जो हथियार बणावैं
बणे पाछै चलैं जरूरी ये दुनिया मैं हाहाकार मचावैं
विज्ञान कै तोहमद लावैं इसा घमासान चाहिये ना।।
हिरोशिमा की याद आवै शरीर थर-थर कांपण लाग्गै
विज्ञान का गलत प्रयोग मानवता सारी हांफण लाग्गै
दुनिया टाडण लाग्गै रणबीर इसा कल्याण चाहिये ना।।






26.50



-26-

हमारा समाज
सुणले करकै ख्याल दखे, ये गुजरे लाखां साल दखे
सिंधु घाटी कमाल दखे, यो गया कड़ै लोथाल दखे,
यो करकै पूरा ख्याल दखे, खोल कै भेद बतादे कोए।।
सुसुरता नै देष का नाम करया, वागभट्ट नै चौखा काम करया
ब्रह्म गुप्त नै हिसाब पढ़ाया, आर्यभट्ट जीरो सिखाया
नालन्दा नै राह दिखाया, तक्षशिला गैल कदम बढ़ाया
तहलका चारों धाम मचाया, ये गये कडै़ समझादे कोए।।
मलमल म्हारी का जोड़ नहीं, ताज कारीगिरी का जोड़ नहीं
हमनै सबको सम्मान दिया, सह सबका अपमान लिया
ग्रीक रोमन को स्थान दिया, भगवान का गुणगान किया
इसनै म्हारा के हाल किया, या सही तसबीर दिखादे कोए।।
दो सौ साल राजा म्हारे देस के, बदेसी बोगे बीज क्लेश के
फिरंगी का न्यों राज हुया, चिड़ी का बैरी बाज हुया
सारा खत्म क्यों साज हुआ, क्यों उनके सिर ताज हुया
क्यों इसा कसूता काज हुया, थोड़ा हिसाब लगादे कोए।।
लाहौर मेरठ जमा पीछै नहीं रहे, म्हरे वीर बहादुर नहीं डरे
फिरंगी देस के चल्या गया, कारीगर फेर बी मल्या गया
धर्म जात पै छल्या गया, संविधान म्हारा दल्या गया
क्यों इसा जाल बुण्या गया, रणबीर पै लिखवादे कोए।।










-27-

पोलीथीन
पोलीथीन नै म्हारे दे शहर का कर दिया बंटा धार
                          देखियो के होगा।।
नहीं गलै ना पिंघलै लोगो धरती पर तै मिटै नहीं
खेत क्यार का नाश करै नुकसान करण तै हटै नहीं
म्हारे जिस्यां पै उटै नहीं या पोलीथीन की मार
                          देखियो के होगा।।
कागज के लिफाफे म्हारे कति पढ़ण नै बिठा दिये
सन के थैले खूंटी टांगे मजे किसानां तै चखा दिये
सस्ते दामां बिका दिये इंहका इसा चढ़या बुखार
                          देखियो के होगा।।
गली नाली मैं जा कै जिब ये रोक लगादे भारी सै
गन्दे नाले बैक मारज्यां फैलै घणी बीमारी सै
न्यों होवै पीलिया महामारी सै माचै घणी हाहाकार
                          देखियो के होगा।।
बढ़िया वातावरण बिना म्हारा रैहणा मुश्किल होज्या गा
के बेरा किसका बालक न्यूं मौत के मुंह में सोज्या गा
रणबीर सही छन्द पिरोज्या गा सही प्रचार, देखियो के होगा।।












-28-

 लिंग भेद
स्त्री पुरुष की दुनिया मैं स्त्री नीची बताई समाज नै।
फरज और अधिकारां की तसबीर बनाई समाज नै।।
शादी पाछै पति गेल्यां सम्बन्ध बणाणे का अधिकार
ब्याह पाछै मां बणैगी नहीं तो मान्या जा व्याभिचार
पुरुष चौगरदें घुमा दियो यो नारी का पूरा संसार
मां बेटी बहू सास का रच दिया घर और परिवार
एक इन्सान हो सै महिला या बात छिपाई समाज नै।।
परिवार का दुनियां मैं पुरुष मुखिया बणाया आज
सारे फैंसले वोहे करैगा पक्का फैंसला सुणाया आज
धन धरती सारी उसकी कसूता जाल बिछाया आज
चिराग नहीं छोटी वंश की छोरा चिराग बताया आज
संबंधा की छूट उसनै या रिवाज चलाई समाज नै।।
पफर्ज औरत के बताये घर के सारे काम करैगी या
बेटा पैदा करै जरूरी घर का रोशन नाम करैगी या
औरत पति देव की सेवा सुबह और श्याम करैगी या
सारे रीति रिवाज निभावै बाणे कति तमाम करैगी या
बूढ़े और बीमारां की सेवा जिम्मे लगाई समाज नै।।
पुरुष परिवार का पेट पालै उसका फर्ज बताया यो
महिला नै सुरक्षा देवैगा उसकै जिम्मे लगाया यो
दुभांत का आच्छी तरियां रणबीर जाल बिछाया यो
फर्ज का मुखौटा ला कै औरत को गया दबाया यो
बीर हर तरियां सवाई हो या घणी दबाई समाज नै।।







-29-

 रूढ़िवाद
रूढ़िचाद यो म्हारे देस मैं क्यों चारों कान्ही छाया।
फरज माणस का सच कहने का ना जाता आज निभाया।।
पुराने मैं सड़ांध उठली पर नया कुछ बी कड़ै आड़ै
नया जो चाहवै सै ल्याणा पार ना उसकी पड़ै आड़ै
घनखरा ए माल सड़ै आड़ै कहैं राम की सब माया।।
वैज्ञानिक सोच का पनपी लाया कदे विचार नहीं
पुराणा सारा सही नहीं हुया इसका प्रचार नहीं
नये का वैज्ञानिक आधार नहीं अन्धकार चौगरदें छाया।।
नये मैं बी असली नकली का रास्सा कसूत छिड़ग्या
वैज्ञानिक दृष्टि बिना यो म्हारा दिमाग जमा फिरग्या
साच झूठ बीच मैं घिरग्या हंस बी खड़या चकराया।।
पिछड़े विचारां का प्रचार जनता नै आज भकाया चाहवैं
बालकां का दूध खोस कै गणेश नै दूध पिलाया चाहवैं
दाग जनता कै लाया चाहवैं रणबीर सिंह बी घबराया।।















-30-

 झूठे वायदे
सारे आकै न्यों कहवैं हम गरीबां की नैया पार लगावां।
एक बै वोट गेर दयो म्हारी धरती पै सुरग नै ल्यावां।।
वोट मांगते फिरैं इसे जणु फिरैं सगाई आले रै
जीते पाछे ये जीजा और हमसैं इनके साले रै
पांच साल बाट दिखावैं एडी ठा ठाकै इन कान्हीं लखावां।।
नाली तै सोडा पीवण आले के समझैं औख करणिया नै
कार मैं चढ़कै ये के समझैं नंगे पांव धरणियां नै
देसी-विदेसी अमीर लूटैं इनके हुकम रोज बजावां।।
गरमी मैं भी जराब पहरैं के जाणैं दरद बुआई का
गन्डे पोरी नै भी तरसां इसा बोदें बीज खटाई का
जो लुटते खुले बाजार मैं उनका कौणसा देश गिणावां।।
फरक हरिजन और किसान मैं कौण गिरावै ये लीडर
ब्राह्मण नै ब्राह्मण कै जाणा कौण सिखावैं ये लीडर
गरीब और अमीर की लड़ाई रणबीर दुनिया मैं बतावां।।















-31-

सैंतालिस की आजादी
15 अगस्त सैंतालिस का दिन लाखां ज्यान खपा कै आया।
घसे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।
सैंतालिस की आजादी पाछै दो हजार आ लिया
बस का भाड़ा याद करो आज कड़ै जा लिया
सीमेंट का कट्टा कितने का आज कौणसे भा लिया
एक गिहूं बोरी दे कै सीमेंट हमने कितना पा लिया
चिन्ता नै घेर लिये जिब लेखा-जोखा आज लगाया।।
आबादी बधी दोगणी पर नाज चौगुणा पैदा करया
पचास मैं थी जो हालत उसमैं बताओ के जोड़ धरया
बिना पढ़ाई दवाई खजाना सरकारी हमनै रोज भरया
ईमानदारी की करी कमाई फेर बी हमनै कड़ै सरया
भ्रष्टाचार बेइमानी नै क्यों सतरंगा जाल बिछाया।।
यो दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी पाई थी
यो दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फौज बनाई थी
यो दिन देखण नै के गांधी बापू नै गोली खाई थी
यो दिन देखण नै के अम्बेडकर संविधान बनाई थी
नये-नये घोटाले सुणकै यो मेरा सिर चकराया।।
आजादी दिवस पै कसम उठावां नया हरियाणा बणावांगे
भगत सिंह का सपना अधूरा उनै पूरा कर दिखावांगे
ना हो लूट खसोट देस मैं घर-घर अलख जगावांगे।
या दुनिया घणी सुन्दर होज्या मिलकै हांगा लावांगे
रणबीर सिंह मिलकै सोचां गया बख्त किसकै थ्याया।।






-32-

 वजूद ईश्वर का
ईश्वर का वजूद दुनिया मैं कोए सिद्ध नहीं कर पाया।
सबनै अपणे अपणे
जो सिद्ध होग्या उसनै स्वीकारां विज्ञान नै पढ़ाया यो
जो नहीं हुया उसनै खोजां विज्ञान नै सिखाया यो
विज्ञान सिद्धान्त बनाया यो भगवान पै सवाल उठाया।।
ईश्वर का वजूद स्वीकारैं इसका मिल्या आधार कड़ै
बिना सबूत क्यूकर मानैं ईश्वर पाया साकार कड़ै
ईश्वर बनाया संसार कड़ै मामला समझ नहीं आया।।
मनुष्य नै ईश्वर रचाया कल्पना का साहरा लिया रै
कुदरत खेल समझ ना आया ईश्वर का सहारा लिया रै
भगवान का भूत बनाया यो खड़या खड़या लखाया।।
जिब सिद्ध हो ज्यागा तो इसका वजूद रणबीर मानै
इतनै साइंस के प्रयोगां तै पूरी दुनिया नै पहचानै
ईश्वर नै सारे के छानै उसनै कड़ै अपणा धूना लाया।।
















-33-

वैज्ञानिक नजर के करै
वैज्ञानिक दृष्टि अपणाणे तै माणस कै फरक के पड़ज्या।
दैवी शक्ति तैं ले छुटकारा वो खुद प्रयत्नवादी बणज्या।।
आत्म विश्वास बढ़ै उसमैं अन्ध विश्वासी फेर रहै नहीं
समस्या की तैह मैं जावैगा वो सत्यानाशी फेर रहै नहीं
तुरत फुरत कुछ कहै नहीं साच्ची बात पै जमा अड़ज्या।।
तर्क संगत विचार की आदत माणस के म्हां आज्या फेर
हवा मैं हार पैदा करके साईं बाबा क्यूकर भकाज्या फेर
माणस सही रास्ता पाज्या फेर नहीं तो दिमाग जमा सड़ज्या।।
बेरा लागै जीवन मृत्यु का एक जनम समझ मैं आवै
आगले पाछले जनम के पचड़यां तै वो मुक्ति पावै
साथ नहीं कुछ बी जावै म्हारे मिनटां भीतर सांस लिकड़ज्या।।
माणस इस जीवन यात्रा मैं क्यूकर सुन्दर और बणावै
आपा मारे पार पड़ै जीवन मैं या बात समझ मैं आवै
रणबीर साथ गीत बणावै कदे थोड़ा सुर बिगड़ज्या।।















-34-

 अन्तहीन संसार
अन्तहीन संसार का अन्त कहैं कदे नहीं आवैगा।
संसार रूकता नहीं कितै यो आगै बढ़ता जावैगा।।
विज्ञान नई खोज करै मानवता नै सुख पहोंचावै
विवेक माणस का फेर इनै सही दिशा मैं ले ज्यावै
सत्य खोज निरन्तर चलावै झूठ नै हमेश्या हरावैगा \\
पदार्थ हमेश्या गति शील हो इसका गुण बताया यो
नष्ट नहीं होवै कदे बी बदलता आकार दिखाया यो
साइंस नै पाठ पढ़ाया यो पदारथ ना नष्ट हो  पावैगा।।
खोज हमेश्या जारी रहती न्यांे विज्ञान हमनै बतावै
हम बुद्धि गेल्यां काम करां भावां मैं बैहने तै बचावै
सिद्ध हुया उसनै अपणावै बाकी पै सवाल उठावैगा।।
अज्ञानी मां बीमार बालक नै तांत्रिक धोरै ले ज्यावैगी
ज्ञानी मां डॉक्टर तै दिखाकै बालक की दवाई ल्यावैगी
भावां मैं बैह ज्यावैगी तो बालक ना जमा बच पावैगा।।















-35-

 गलत विज्ञान
मानवता का विनाश करै जो इसा इन्सान चाहिये ना।
संसार नै गलत दिशा देवै इसा विज्ञान चाहिये ना।।
विज्ञान पै पाड़या बेरा अणु मैं ताकत बहोतै भारी सै
अणु भट्टी तै बणै बिजली जगमगावै दुनिया सारी सै
अणु बम तो विनासकारी सै इसा शैतान चाहिये ना।।
मानवता नै बड़ी जरूरत सै आज अन्न और वस्त्रां की
जंग की जरूरत जमा नहीं ना जरूरत अणु शस्त्रां की
जो पैरवी करै अस्त्रां की इसा भगवान चाहिये ना।।
कड़ै जरूरत सै उनकी कारखाने जो हथियार बणावैं
बणे पाछै चलैं जरूरी ये दुनिया मैं हाहाकार मचावैं
विज्ञान कै तोहमद लावैं इसा घमासान चाहिये ना।।
हिरोशिमा की याद आवै शरीर थर-थर कांपण लाग्गै
विज्ञान का गलत प्रयोग मानवता सारी हांफण लाग्गै
दुनिया टाडण लाग्गै रणबीर इसा कल्याण चाहिये ना।।















-36-

ठेकेदारां की आपा धापी
या आपाधापी मचा दई इन देस के ठेकेदारां नै।
सारे रिकार्ड तोड़ दिये धन के भूखे साहूकारां नै।।
विकास तरीका घणा कुढ़ाला बेरोजगार बढ़ाया रै
घर कुणबा कोए छोड़या ना घणामहाघोर मचाया रै
बाबू बेटा तै दारू पीवैं सास बहू मैं जंग कराया रै
बूढ़यां की कद्र कड़े तै हो जवानां का मोर नचाया रै
माणस तै हैवान बणाये सभ्यता के थानेदारां नै।।
इसा विकास नाश करैगा क्यों म्हारै जमा जरती ना
गरीब अमीर की या खाई क्यों कदे बी भरती ना
चारों कान्ही माफिया छाग्या बुराई आज डरती ना
अच्छाई मैं ताकत इतनी फेर बी या कदे मरती ना
बदेशी कंपनी छागी देदी छूट राजदरबारां नै।।
अमरीका दादा पाक गया दुनियां मैं आतंक मचाया
सद्दाम हुसैन साहमी बोल्या यो इराक पढ़ण बिठाया
युगोस्लाविया पै बम्ब गेरे यो कति नहीं शरमाया
तीसरी दुनिया चूस लई भारत मैं भी जाल फैलाया
बदेशी अर देशी डाकू सिर चढ़ाये सरकारां नै।।
उल्टी राही चला दई म्हारे देस की जनता किसनै
बेरा पाड़ां सोच समझ कै देश तै भजावां उसनै
उस विकास नै बदलां मोर बनाया सै जिसनै
रणबीर इसा विकास हो जो मेटदे सबकी तिसनै
दीन जहान तै खो देगी जनता इन दरकारां नै।।



-37-

किस्सा म्हारा-थारा
वार्ता: सरोज को बहु झोलरी जाना पड़ता है। दो चुल्हे होने के कारण खरचा और बढ़ जाता है। बाकी परेशानियां उठानी पड़ती हैं वह अलग। भरत सिंह अपणी माड़ी किस्मत को कोसता है तो सरोज एक इतवार को उसका होंसला बढ़ाती है और क्या कहती है? कवि के शब्दों में:

जो आया दुनियां के म्हां उनै पड़ै लाजमी जाणा हो।
सुरग नरक किसनै देख्या बस होसै फरज पुगाणा हो।।
बीर मरद तै हो उत्पत्ति या जाणै दुनिया सारी सै
पांच भूत के योग तै या बणी सृष्टि न्यारी सै
या तासीर खास योग की जीव मैं होवै न्यारी सै
मिजाज जिब बिगड़ै भोग का जीव नै हो लाचारी सै
इसकी गड़बड़ मैं मौत कहैं हो बन्द सांस जब आणा हो।।
पहले जनम मैं जिसे करे कहैं इस जनम मैं भुगतै
इस जनम मैं जिसे करे कहैं अगले के म्हां निबटै
दोनों बात गलत लागै क्यों ना इसका इसमें सिमटै
साहमी हुए की चिन्ता ना क्यों बिना हुए कै चिपटै
इसे जनम का रोला सारा बाकी लागै झूठा ताणा हो।।
मनुष्य सामाजिक जीव कहैं बिन समाज डांगर होज्या
लेकै समाज पै चाहिये देणा बिन इसके बांदर होज्या
माली बिना बाग और खेती बिन पाणी बांगर होज्या
मरकै कोए ना आया उलटा जलकै पूरा कांगर होज्या
साइंस नै बेरा पाड़ लिया ईब छोड्डो
आच्छे भूण्डे करमां करकै या दुनिया हमनै याद करै
या गुणी के गुण गावै आड़ै पापी कंस की यादे तिरै
यो शरीर जल बणै कारबन प्यारा कर कर याद मरै
मेहर सिंह पफौजी बरोने का रणबीर करता याद फिरै
करमां आला ना मरै कदे ना पाले राम का गाणा हो।।

-38-

किसे और की कहानी कोन्या
किसे और की कहानी कोण्या, इसमें ये राजा राणी कोन्या
सै अपनी बात बिरानी कोण्या, थोड़ा दिल नै थाम लियो।।
यारी घोड़े घास की भाई, नहीं चालै दुनिया कहती आई
बाहूं और फेर बोउं खेत मैं, बालक रुलते म्हारे रेत मैं
भरतो मरती मेरी सेत मैं, अन्नदाता का मत नाम लियो।।
जमकै लूटै सै मण्डी सबनै, बीज खाद मिलै म्हंगा हमनै
लूटाई मजदूर किसान की, ये आंख फूटी भगवान की
यो भरै तिजूरी शैतान की, देख इसके तम काम लियो।।
छप्पण साल की आजादी मैं, कसर रही ना बरबादी मैं
ये बालक म्हारे बिना पढ़ाई, मरैं बचपन मैं बिना दवाई
कड़ै गई म्हारी कष्ट कमाई, झूठी होतै तम लगाम दियो।।
शेर बकरी का मेल नहीं सै, घणी चालै धक्का पेल नहीं सै
आप्पा मारैं पार पड़ैगी म्हारी,, जिब कट्ठी होकै जनता सारी,
लीख काढ़ै या सबतै न्यारी, रणबीर सिंह का सलाम लियो।।















-39-

बैठ्या सोचूं
बैठ्या सोचूं खेत के डोलै ईब क्यूकर होवै गुजारा।
ज्वार बाजरा आलू पिटग्या गिहूं धान भी म्हारा।।
खूब जतन कर खेत मनै उबड़ खाबड़ संवारे फेर
दस मणे तै बीस मणे हुये ज्वार बाजरे म्हारे फेर
खाद बीज की कीमतां नै जमा धरती कै मारे फेर
पूरे हरियाणा मैं लागे हरित व्रफांति के नारे फेर
दस पन्दरा बरसां मैं इसका यो फुट्या लागै गुबारा।।
धनी किसान जो म्हारे गाम के फायदा खूब उठोगे
उपर का धन खूब कमाया बालक नौकरी पागे
बिन साधन आले मरगे दुखां के बादल छागे
म्हारे नेता गाम मैं आकै म्हारी किस्मत माड़ी बतागे
सत्संग मैं जावण लागे जिब और ना चाल्या चारा।।
सत्संग मैं बढ़िया बात करैं गरीबी पै चुप रैहज्यां
सुरग नरक की बहसां मैं ये सींग कसूते फैहज्यां
मेरे बरगे रहवैं सोचते जमा बोल चुपाके सैहज्यां
जिनकी पांचों घी मैं वे घटिया बोल कई कैहज्यां
खेती क्यों तबाह होगी ना भेद खोल बतावैं सारा।।
गिहूं पड्या सड़ै गोदामां मैं रणबीर देख्या जान्ता ना
इसा हाल क्यों हुया इसका कारण समझ आन्ता ना
कहैं फूल फल उपज्याल्यो राह कोए मनै पान्ता ना
फल फूल कड़ै बिकैगा या बात कोण बतान्ता ना
टिकाउ खेती बचा सकै सै हो किलोई चाहे छारा।।








-40-
छब्बीस जनवरी
छब्बीस जनवरी का दिन भाई लाखां ज्यान खपा कै आया
घणे हुए कुर्बान देश पै जिब आजादी का राह पाया।।
सैंतालिस की आजादी ईब यो दो हजार च्यार आ लिया
बस भाड़ा था कितना याद करो आज कड़ै सी जा लिया
एक सीमेंट कट्टा कितने का आज कौणसे भा ठा लिया
एक गिहूं की बोरी देकै आज यो खाद कितना पा लिया
चिन्ता नै घेर लिया जिब यो सारा लेखा जोखा लाया।।
आबादी तै बधी तीन गुणी पर नाज चौगुणा पैदा करया
सैंतालिस मैं थी जो हालत उसमैं बताओ के जोड़ धरया
बिना पढ़ाई दवाई खजाना हमनै सरकारी रोज भरया
ईमानदारी तै करी कमाई पफेर बी तमनैनहीं सरया
भ्रष्टाचार बेइमानी नै क्यों सतरंगा जाल बिछाया।।
यो दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फौज बनाई थी
यो दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी खाई थी
यो दिन देखण नै के गांधी बापू जी नै गोली खाई थी
यो दिन देखण नै के अम्बेडकर ने संविधान रचाई थी
नये-नये घोटाले देख कै यो गरीब का सिर चकराया।।
हरियाणा धरती पै कसम उठावां नया हरियाणा बणावांगे
भगत सिंह का सपना अधूरा उनै करकै पूरा दिखावांगे
ना हो लूट खसोट देश मैं या घर-घर अलख जगावांगे
या दुनिया खूबै सुन्दर होज्या मिलकै हांगा लावांगे
रणबीर सिंह मिलकै सोचो गया बख्त किसकै थ्याया।।







-41-

बंटवारा
हुई तरक्की भोत मारगी या गड़बड़ बंटवारे की।
सदा कमेरा वर्ग दबाया या नीति हिन्द म्हारे की।।
सबको मिलै पढ़ाई छह अरब डालर का खरच बताया
अमरीका मैं श्रंगार तांहि आठ अरब डालर जावै खिंडाया
पाणी और सफाई का खरचा नौ अरब डालर आज दिखाया
ग्यारा अरब डालर यूरोप मैं आइसक्रीम पर खरचा आया
चार सौ अरब डालर का नशा करावैं होज्या शक्ल छुहारे की।।
सबकी सेहत की खातर तेरा अरब डालर कुल चाहवैं सै
अमीर रुक्के मारैं पीस्से कोण्या म्हारा सेहत बजट घटावैं सै
अमरीका यूरोप के कुत्ते बिल्ली सतरा अरब डालर खावैं सै
जापान मैं मनोरंजन पै ये पैंतीस अरब डालर बहावैं सैं
झूठी कोण्या जमा साची सै तसबीर इस विकास प्यारे की।।
झूठा नहीं कोए आंकड़ा मानव विकास रिपोर्ट मैं बताया
तीसरी दुनिया चूस बगादी ईब जी सेवन दुनिया मैं छाया
विश्व बैंक और डब्ल्यूटीओ नै अमीरां का साथ निभाया
मुद्रा कोष नै डान्डी मारकै म्हारा नाश का बीड़ा ठाया
नौकरी खत्म करण लागरे कविता सविता मुखत्यारे की।।
नशे की दवाई और दारू बेचैं दूसरा धंधा हथियारां का
तीसरा धन्धा इत्र फुलेल का इन अमरीकी साहूकारां का
विकास नहीं विनास पै टिक्या जीवन इन थानेदारां का
बंटवारा ठीक हो दुनिया मैं मन नहीं करता ठेकेदारां का
अमीर गरीब की खाई मैं मर आई रणबीर बिचारे की।।








-42-

इलाज पति का
पांच हजार मनै उधारे दे दे पति मेरा बीमार हुया।
मैडीकल मैं पड़या तड़पै घणा मोटा त्यौहार हुया।।
1 दो बोतल खून मांग्या, डाक्टरां नै परेशन बोल दिया
  न्यों बोले मोल नहीं बिकता यो भेद तमाम खोल दिया
  एक बोतल तै मेरा काढ़या दूजी का पांच सै मोल दिया
  एक दो तै खावण नै आये, ओ बिचला मदद गार हुया।।
2 पन्दरा हजार खर्चा आया, ओ काम जोगा रहया नहीं
  मरणे तै तो बचग्या फेर दरद उंपै जान्ता सहया नहीं
  ल्हुकमा सुलफा दारू पीज्या जावै कुछ बी कहया नहीं
  सारे ताणे तुड़ा कै देख लिए जाता और फहया नहीं
  जिसकै घर बर्तन मांजूं उंकै साहरै घर बार हुया।।
3 एक दिन मनै अपणा दुखड़ा बहन जी आगै रोया
  वकील पति नै बेरा लाग्या उसनै अपणा धीरज खोया
  शाम सबेरी करै वो इशारे दिल मेरा घणा दुखी होया
  एक दिन करी छेड़खानी उनै बीज बिघन का बोया
  दुनिया उनै कहै देवता पर मेरा जीना दुश्वार हुया।।
4 तिरूं डूबूं जी मेरा होग्या किस आगै दुख रोउं मैं
  वकील का करूं सामना तै सारे कुणबे की रोटी खोउं मैं
  चुपकी रहूं तो उसकी बदफेली का शिकार होउं मैं
  और कितै नहीं साहरा दीखै रणबीर पै मुंह धोउं मैं
  सुण्या सै गरीबां का यो बरोने मैं मददगार हुया।।









-43-
लाल बहादुर शास्त्री
लाल बहादुर शास्त्री का कद छोटा उंचा घणा बिचार था
जय जवान जय किसान का नारा लाया घणा दमदार था
दुनिया मैं या उत्थल पुथल चारों कान्ही माच रही थी
गुलाम देशां मैं अंग्रेजी सेना खेल नंगा नाच रही थी
गरीब जनता की साथ मैं या कर खींचम खंाच रही थी
लाल बहादुर नै जन्म लिया साल उन्नीस सौ पांच रही थी
शारदा प्रसाद बाप टीचर था सादा गरीब परिवार था।।
डेढ़ साल का जमा बालक याणा पिता स्वर्ग सिधार गये
छोटे से बालक उपर जिम्मेदारी परिवार की ये डार गये
चाचा के कहने पै वाराणसी मैं पढ़ खातर पधार गये
मिश्रा जी मिले शहर मैं उनके हो पक्के मददगार गये
आजादी की जंग का मिश्रा नै खाका बताया बारम्बार था।।
लाल बहादुर शास्त्री जी कै आजादी का जनून चढ़या
महात्मा गांधी जी पै उननै असहयोग का पाठ पढ़या
जिब बायकॉट की बात चली शास्त्री सबतै आगै कढ़या
मिश्रा और चाचा नाराज हुये लाल पै गुस्सा खूब बढ़या
माता ललिता देवी नै साथ दिया जताया अपना प्यार था।।
लाहौर सैसन कांग्रेस का शास्त्री अटैंड करकै आया
पूर्ण स्वराज का नारा लाकै जंग का गया बिगुल बजाया
आजादी पाछै जनता का मंत्री पद पै साथ निभाया
नेहरू बाद प्रधानमंत्री बने देश आगै बढ़ाना चाहया
कहै रणबीर बरोने आला वो माणस घणा होनहार था।।









-44-

असहयोग आन्दोलन
असहयोग आन्दोलन की मन मैं पूरी उमंग भरी थी।
चाचा और मिसरा जी नै प्रकट नाराजी खूब करी थी।।
स्कूल कॉलेज बायकाट का गांधी जी नै नारा लाया था
बीए का एक साल बच्या शास्त्री नै कदम बढ़ाया था
चाचा नै इस बात का बेरा लाग्या भूंडी
मिसरा नै चाचा के सुर मैं अपना बी सुर मिलाया था
बोले अपनी पढ़ाई करले ज्यान बिघन मैं घिरी थी।।
अंग्रेजां के राज मैं भारत घणी कसूती
सुणकै हुकम चाचा जी का उसकै काला सांप सा लड़ग्या
बोल्या मैं बायकॉट करूंगा अपनी बात पै अड़ग्या
घर और शास्त्री बीच मैं इस बात का रासा छिड़ग्या
मिसरा जी कै साहमी उसनै दिल की बात खोल धरी थी।।
चाचा मिसरा दोनूं नाट गये शास्त्री का जी दुख पाया था
वो माता कै आगै रोया जाकै जी खोल कै उसतै दिखाया था
माता नै सारी बात सुणकै होंसला उसका बधाया था
बी.ए. पास करूंगा जरूरी इसका प्रण करवाया था
कई बार जेल मैं गया जलस्यां मैं बिछाई खूब दरी थी।।
दर्शन मैं ली शास्त्री डिग्री लड़ते-लड़ते करी पढ़ाई
बचन दिया जो माता जी तै बात वा पूरी करकै दिखाई
वाराणसी तै अलाहबाद आ आजादी जंग मैं जान खपाई
पीछै मुड़कै नहीं देख्या फेर अंग्रेजां की थी भ्यां बुलाई
अंग्रेज एक दिन भाजैंगे बात लाल बहादुर कै जरी थी।।








-45-

ठण्डी बाल
तन
एक कून मैं पड़ रहना धरां सिर कै हाथ तलै।।
1. फुटपाथ सै रैन बसेरा घणे सुन्दर मकान थारे
  दो बख्त की रोटी मुश्किल रोज बनैं पकवान थारे
  दीखे इरादे बेइमान थारे सत्ते का जी बहोत जलै।।
2. होटल मैं बरतन मांजैं करैं छोटी मोटी मजूरी
  थारे घरां की करैं सफाई घर अपने मैं गन्द पूरी
  कद समझी या मजबूरी जाड़ी बाजैं ज्यों शाम
3. थारे ठाठ-बाट देख निराले हूक उठे दिल म्हारे मैं
  पुल कै नीचै लेटे देखां लैट चसै उड़ै चौबारे मैं
  गरम कमरे थारे मैं यो सैक्स का व्यापार पलै।।
4. म्हारी एक नहीं सुनै राम थारे महलां बास करै
  इसे राम नै के हम चाटां पूरी ना कोए आस करै
  रणबीर सब अहसास करै दिल मैं आग बलै।।















-46-

गाम-गाम की कहानी आज की या सुणियो आज सुणाउं मैं
दलितां का हुया जीवना मुश्किल यो किस्सा आज बताउं मैं।।
1.     गाम किला जफरगढ़ मैं कहर दलितां उपर
      मकान तोड़े मारे पिट्टे जुलम दबंगा नै बरपाया रै
      वीरवार की रात कहैं भगवती जागरण था करवाया रै
      महिला पुरुष बैठें
      दबंग जात के छोरयां की आगे की करतूत गिणाउं मैं।।
2.     दस बारा नौजवनां का टोल दबंग समाज का आया
      महिलावां पाछै बैठ गये उनपै पात्थर रेल बरसाया
      छेड़खानी करी भद्दा बोले घणा कसूता बिघन खिंडाया
      महिलावां नै टोक दिये दबंगा का न्यों सिर चकराया 
      दलित बी इन्सान हों सैं इस समझ की कमी दिखाउं मैं।।
3.     आयोजकां न उन बिगड़ैलांे को थोड़ा घणा समझाया
      दबंग कौम के होनहारां की मण्डली नै उधम रचाया
      झगड़ा करया उल्टा बोले कसूता रोब जमाना चाहया
      इसे बीच मैं किसे नै जाकेै पुलिस तांहि फोन खड़काया
      गरीब की बहु सबकी जोरू कोन्या जमा झूठ भकाउं मैं।।
4.     पुलिस आगी गाम मैं किसे नै जागरण मैं आण बताया
      दबंग कौम के उतां मांतै उड़ै कोए नहीं टोहया पाया
      चार पांच पुलिस आल्यां नै जागरण पूरा चलवाया
      दबंग कौम नै दलितां पै अपना खौफ खूब फैलाया
      रणबीर सिंह बरोनिया कहै या साच साहमी ल्याउं मैं।।









-47-

दास्तान
जीणा होग्या भारी बेबे, तबीयत होज्या खारी बेबे।
नहीं सुनाई म्हारी बेबे, फेर बी जीवण की आस मनै।
1. ठीक
  कमाया मनै जमा डटकै, मेरा बोलना घणा खटकै
  दुख मैं कोण पास फटकै, यो पूरा सै अहसास मनै।।
2. मुंह मैं घालण नै होरे ये, चाहे बूढ़े हों चाहे छोरे ये
  डोरे ये डालैं शाम सबेरी, ,कहवैं मनै गुस्सैल बछेरी
  मेरी कई बर राही घेरी, गैल बतावैं ये बदमास मनै।।
3. सम्भल-सम्भल मैं कदम धरूं, सही बात पै जमा मरूं
  करूं संघर्ष मिल जुल कै, हंसू बोलूं सबतै खुलकै
  नहीं जीउं घुल-घुल कै, या बात समझली खास मनै।।
4. चरित्रहीन का इल्जाम लग्या, मेरा भीतरला और जग्या
  सग्या लूटै इज्जत म्हारी, ओहे बणज्या समाज सुधारी
  कहता फिरै मनै कलिहारी, रणबीर का विश्वास मनै।।














-48-

त्याग
सोनिया गांधी का त्याग देख कै मनै आंख्यां आंसू ल्यायें देखे।
आखरी फैसला सुणणे नै कान रेडियो पर सब लगायें देखे।।
कोए कहवै ड्रामा रच राख्या सै या हटकै हां भर लेगी
कोए कहवै इस बिना कांग्रेस दो दिन के मैं मर लेगी
कोए कहवै के बेरा था इतनी तावली या डर लेगी
कोए कहवै त्याग करया अपणा कद उंचा कर लेगी
दस जनपथ पै लोग कर्इ्र मनै नजर गड़ायें देखे।।
भाजपा नै जात दिखाई बदेशी का मुद्दा फेर उठाया रै
गोबिन्दाचार्य आत्म सम्मान का मंच बणा कै ल्याया रै
देश संविधान तै उपर उसनै टी वी उपर बताया रै
आत्म सम्मान राष्ट्र का घणा कसूता
बिना बात बदेशी का मुद्दा उमा और सुषमा ठायें देखे।।
देश के आत्म सम्मान पै इतनी कसूती
आड़ै भूखतै मरैं हजारां इन बातां पै कान नहीं धरते
मन्दिर साझला ना कुआं साझै हिन्दुत्व का दम भरते
हिन्दू राष्ट्र की बात करैं देश तोड़ण तै नहीं डरते
देश बेच्या सारा जिननै वे देशी ठप्पा चिपकायें देखे।।
सोनिया गांधी बहन नै भारत देश तै इतना प्यार किया
प्रधान मंत्री पद देश पै उसनै भाइयो देखो वार दिया
भारत देश का जन आदेश पूरी तरियां अंगीकार किया
धर्म निरपेक्ष मोर्चा सबनै मिल करकै नै तैयार किया
न्यूनतम साझा कार्यक्रम पै देशवासी आस जमायंे देखे।।







-49-

अब तक का सफर
पन्दरा अगस्त सैंतालिस मैं हमनै देश आजाद कराया रै।
हजारां लाखां बीर मरद जिननै सब किमै दा पै लाया रै।।
एक छत्र राज अंग्रेजां का जड़ै सूरज कदे छिप्या नहीं
बाहणा था व्यापार करण का लालच उनपै दब्या नहीं
गूंठे कटवाए कारीगरां के जुलम उनका घट्या नहीं
मजदूर किसान लूट लिए मेहनतकश कदे हंस्या नहीं
एका करकै जंग मैं उतरे फिरंगी ना भाज्या थ्याया रै।।
आजाद भारत का सपना देष पूरा आत्मनिर्भर होवै
शिक्षा मिलै सबनै पूरी ना कोए बालक भूखा सोवै
महिला पै हिंसा खत्म हो अपणे घरां चैन तै सोवै
छुआछात नहीं रहैगी ना कोए सिर पै मैला
सुभाष बोश भगत सिंह नै इन्कलाब का नारा लाया रै।।
देश के मजदूर किसानां नै पसीना घणा बहाया फेर
माट्टी गेल्यां माट्टी होकै कई गुणानाज उगाया फेर
कई सौ लोगां की कुर्बानी डैम भाखड़ा बनाया फेर
हरित क्राांति हरियाणे मैं एक बै नया दौर आया फेर
दस की तो खूब ऐश हुई नब्बै जमा खड़या लखाया रै।।
देश और तरक्की करै म्हारा वैश्वीकरण का नारा ल्याए
झूठ मूठ की बात बणाकै हम भारतवासी गए भकाए
ऐश करैं ले करज बदेशी देष के बेच खजाने खाए
बदेशी कंपनी खातर फेर झट पट दरवाजे खुलवाए
रणबीर सिंह मरै भूखा नाज गोदामां मैं सड़ता पाया रै।।







-50-

फागण
मनै पाट्या कोण्या तोल, क्यों करदी तनै बोल
नहीं गेरी चिट्ठी खोल, क्यों सै छुट्टी मैं रोल
मेरा फागण करै मखोल, बाट तेरी सांझ तड़कै।।
या आई फसल पकाई पै, या जावै दुनिया लाई पै
लागै दिल मेरे पै चोट, मैं ल्यूं क्यूकर इसनै ओट
सोचूं खाट के मैं लोट, तूं कित सोग्या पड़कै।।
खेतां मैं मेहनत करकै, रंज फिकर यो न्यारा धरकै
लुगाइयां नै रोनक लाई, कट्ठी हो बुलावण आई
मेरा कोण्या पार बसाई, तनै कसक कसूती लाई
पहली दुलहण्डी याद आई, मेरा दिल कसूता धड़कै।।
इसी किसी तेरी नौकरी, कुणसी अड़चन तनै रोकरी
अमीरां के त्योहार घणे सैं, म्हारे तो एकाध बणे सैं
खेलैं रलकै सभी जणे सैं, बाल्टी लेकै मरद ठणे सैं
मेरे रोंगटे खड़े तनै सैं, आज्या अफसर तै लड़कै।।
मारैं कोलड़े आंख मीचकै, खेलैं फागण जाड़ भींचकै
उड़ै आग्या था सारा गाम, पड़ै था थोड़ा घणा घाम
पाणी के भरे खूब ड्राम, दो तीन थे जमा बेलगाम
मनै लिया कोलड़ा थाम, मारया आया जो जड़कै।।
पहल्यां आली ना धाक रही, ना बीरां की खुराक रही
तनै मैं नई बात बताउं, डरती सी यो जिकर चलाउं
रणबीर पै बी लिखवाउं, होवे पिटाई हररोज दिखाउं
कुण कुण सै सारी गिणवाउं, नहीं खड़ी होती अड़कै।।

अन्तहीन संसार

अन्तहीन संसार
अन्तहीन संसार का अन्त कहैं कदे नहीं आवैगा।
संसार रूकता नहीं कितै यो आगै बढ़ता जावैगा।।
विज्ञान नई खोज करै मानवता नै सुख पहोंचावै
विवेक माणस का फेर इनै सही दिशा मैं ले ज्यावै
सत्य खोज निरन्तर चलावै झूठ नै हमेश्या हरावैगा \\
पदार्थ हमेश्या गति शील हो इसका गुण बताया यो
नष्ट नहीं होवै कदे बी बदलता आकार दिखाया यो
साइंस नै पाठ पढ़ाया यो पदारथ ना नष्ट हो  पावैगा।।
खोज हमेश्या जारी रहती न्यांे विज्ञान हमनै बतावै
हम बुद्धि गेल्यां काम करां भावां मैं बैहने तै बचावै
सिद्ध हुया उसनै अपणावै बाकी पै सवाल उठावैगा।।
अज्ञानी मां बीमार बालक नै तांत्रिक धोरै ले ज्यावैगी
ज्ञानी मां डॉक्टर तै दिखाकै बालक की दवाई ल्यावैगी
भावां मैं बैह ज्यावैगी तो बालक ना जमा बच पावैगा।।

वैज्ञानिक नजर के करै

वैज्ञानिक नजर के करै
वैज्ञानिक दृष्टि अपणाणे तै माणस कै फरक के पड़ज्या।
दैवी शक्ति तैं ले छुटकारा वो खुद प्रयत्नवादी बणज्या।।
आत्म विश्वास बढ़ै उसमैं अन्ध विश्वासी फेर रहै नहीं
समस्या की तैह मैं जावैगा वो सत्यानाशी फेर रहै नहीं
तुरत फुरत कुछ कहै नहीं साच्ची बात पै जमा अड़ज्या।।
तर्क संगत विचार की आदत माणस के म्हां आज्या फेर
हवा मैं हार पैदा करके साईं बाबा क्यूकर भकाज्या फेर
माणस सही रास्ता पाज्या फेर नहीं तो दिमाग जमा सड़ज्या।।
बेरा लागै जीवन मृत्यु का एक जनम समझ मैं आवै
आगले पाछले जनम के पचड़यां तै वो मुक्ति पावै
साथ नहीं कुछ बी जावै म्हारे मिनटां भीतर सांस लिकड़ज्या।।
माणस इस जीवन यात्रा मैं क्यूकर सुन्दर और बणावै
आपा मारे पार पड़ै जीवन मैं या बात समझ मैं आवै
रणबीर साथ गीत बणावै कदे थोड़ा सुर बिगड़ज्या।।

वजूद ईश्वर का


ईश्वर का वजूद दुनिया मैं कोए सिद्ध नहीं कर पाया।
सबनै अपणे अपणे ढंग तै   अंदाज
जो सिद्ध होग्या उसनै स्वीकारां विज्ञान नै पढ़ाया यो
जो नहीं हुया उसनै खोजां विज्ञान नै सिखाया यो
विज्ञान सिद्धान्त बनाया यो भगवान पै सवाल उठाया।।
ईश्वर का वजूद स्वीकारैं इसका मिल्या आधार कड़ै
बिना सबूत क्यूकर मानैं ईश्वर पाया साकार कड़ै
ईश्वर बनाया संसार कड़ै मामला समझ नहीं आया।।
मनुष्य नै ईश्वर रचाया कल्पना का साहरा लिया रै
कुदरत खेल समझ ना आया ईश्वर का सहारा लिया रै
भगवान का भूत बनाया यो खड़या खड़या लखाया।।
जिब सिद्ध हो ज्यागा तो इसका वजूद रणबीर मानै
इतनै साइंस के प्रयोगां तै पूरी दुनिया नै पहचानै
ईश्वर नै सारे के छानै उसनै कड़ै अपणा धूना लाया।।












सैंतालिस की आजादी 15 अगस्त


15 अगस्त सैंतालिस का दिन लाखां ज्यान खपा कै आया।
घसे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।
सैंतालिस की आजादी पाछै दो हजार आ लिया
बस का भाड़ा याद करो आज कड़ै जा लिया
सीमेंट का कट्टा कितने का आज कौणसे भा लिया
एक गिहूं बोरी दे कै सीमेंट हमने कितना पा लिया
चिन्ता नै घेर लिये जिब लेखा-जोखा आज लगाया।।
आबादी बधी दोगणी पर नाज चौगुणा पैदा करया
पचास मैं थी जो हालत उसमैं बताओ के जोड़ धरया
बिना पढ़ाई दवाई खजाना सरकारी हमनै रोज भरया
ईमानदारी की करी कमाई फेर बी हमनै कड़ै सरया
भ्रष्टाचार बेइमानी नै क्यों सतरंगा जाल बिछाया।।
यो दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी पाई थी
यो दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फौज बनाई थी
यो दिन देखण नै के गांधी बापू नै गोली खाई थी
यो दिन देखण नै के अम्बेडकर संविधान बनाई थी
नये-नये घोटाले सुणकै यो मेरा सिर चकराया।।
आजादी दिवस पै कसम उठावां नया हरियाणा बणावांगे
भगत सिंह का सपना अधूरा उनै पूरा कर दिखावांगे
ना हो लूट खसोट देस मैं घर-घर अलख जगावांगे।
या दुनिया घणी सुन्दर होज्या मिलकै हांगा लावांगे
रणबीर सिंह मिलकै सोचां गया बख्त किसकै थ्याया।।





झूठे वायदे

 झूठे वायदे
सारे आकै न्यों कहवैं हम गरीबां की नैया पार लगावां।
एक बै वोट गेर दयो म्हारी धरती पै सुरग नै ल्यावां।।
वोट मांगते फिरैं इसे जणु फिरैं सगाई आले रै
जीते पाछे ये जीजा और हमसैं इनके साले रै
पांच साल बाट दिखावैं एडी ठा ठाकै इन कान्हीं लखावां।।
नाली तै सोडा पीवण आले के समझैं औख करणिया नै
कार मैं चढ़कै ये के समझैं नंगे पांव धरणियां नै
देसी-विदेसी अमीर लूटैं इनके हुकम रोज बजावां।।
गरमी मैं भी जराब पहरैं के जाणैं दरद बुआई का
गन्डे पोरी नै भी तरसां इसा बोदें बीज खटाई का
जो लुटते खुले बाजार मैं उनका कौणसा देश गिणावां।।
फरक हरिजन और किसान मैं कौण गिरावै ये लीडर
ब्राह्मण नै ब्राह्मण कै जाणा कौण सिखावैं ये लीडर
गरीब और अमीर की लड़ाई रणबीर दुनिया मैं बतावां।।






रूढ़िवाद

रूढ़िवाद
रूढ़िचाद यो म्हारे देस मैं क्यों चारों कान्ही छाया।
फरज माणस का सच कहने का ना जाता आज निभाया।।
पुराने मैं सड़ांध उठली पर नया कुछ बी कड़ै आड़ै
नया जो चाहवै सै ल्याणा पार ना उसकी पड़ै आड़ै
घनखरा ए माल सड़ै आड़ै कहैं राम की सब माया।।
वैज्ञानिक सोच का पनपी लाया कदे विचार नहीं
पुराणा सारा सही नहीं हुया इसका प्रचार नहीं
नये का वैज्ञानिक आधार नहीं अन्धकार चौगरदें छाया।।
नये मैं बी असली नकली का रास्सा कसूत छिड़ग्या
वैज्ञानिक दृष्टि बिना यो म्हारा दिमाग जमा फिरग्या
साच झूठ बीच मैं घिरग्या हंस बी खड़या चकराया।।
पिछड़े विचारां का प्रचार जनता नै आज भकाया चाहवैं
बालकां का दूध खोस कै गणेश नै दूध पिलाया चाहवैं
दाग जनता कै लाया चाहवैं रणबीर सिंह बी घबराया।।







लिंग भेद

लिंग भेद
स्त्री पुरुष की दुनिया मैं स्त्री नीची बताई समाज नै।
फरज और अधिकारां की तसबीर बनाई समाज नै।।
शादी पाछै पति गेल्यां सम्बन्ध बणाणे का अधिकार
ब्याह पाछै मां बणैगी नहीं तो मान्या जा व्याभिचार
पुरुष चौगरदें घुमा दियो यो नारी का पूरा संसार
मां बेटी बहू सास का रच दिया घर और परिवार
एक इन्सान हो सै महिला या बात छिपाई समाज नै।।
परिवार का दुनियां मैं पुरुष मुखिया बणाया आज
सारे फैंसले वोहे करैगा पक्का फैंसला सुणाया आज
धन धरती सारी उसकी कसूता जाल बिछाया आज
चिराग नहीं छोटी वंश की छोरा चिराग बताया आज
संबंधा की छूट उसनै या रिवाज चलाई समाज नै।।
पफर्ज औरत के बताये घर के सारे काम करैगी या
बेटा पैदा करै जरूरी घर का रोशन नाम करैगी या
औरत पति देव की सेवा सुबह और श्याम करैगी या
सारे रीति रिवाज निभावै बाणे कति तमाम करैगी या
बूढ़े और बीमारां की सेवा जिम्मे लगाई समाज नै।।
पुरुष परिवार का पेट पालै उसका फर्ज बताया यो
महिला नै सुरक्षा देवैगा उसकै जिम्मे लगाया यो
दुभांत का आच्छी तरियां रणबीर जाल बिछाया यो
फर्ज का मुखौटा ला कै औरत को गया दबाया यो
बीर हर तरियां सवाई हो या घणी दबाई समाज नै।।




हमारा समाज


-26-

हमारा समाज
सुणले करकै ख्याल दखे, ये गुजरे लाखां साल दखे
सिंधु घाटी कमाल दखे, यो गया कड़ै लोथाल दखे,
यो करकै पूरा ख्याल दखे, खोल कै भेद बतादे कोए।।
सुसुरता नै देष का नाम करया, वागभट्ट नै चौखा काम करया
ब्रह्म गुप्त नै हिसाब पढ़ाया, आर्यभट्ट जीरो सिखाया
नालन्दा नै राह दिखाया, तक्षशिला गैल कदम बढ़ाया
तहलका चारों धाम मचाया, ये गये कडै़ समझादे कोए।।
मलमल म्हारी का जोड़ नहीं, ताज कारीगिरी का जोड़ नहीं
हमनै सबको सम्मान दिया, सह सबका अपमान लिया
ग्रीक रोमन को स्थान दिया, भगवान का गुणगान किया
इसनै म्हारा के हाल किया, या सही तसबीर दिखादे कोए।।
दो सौ साल राजा म्हारे देस के, बदेसी बोगे बीज क्लेश के
फिरंगी का न्यों राज हुया, चिड़ी का बैरी बाज हुया
सारा खत्म क्यों साज हुआ, क्यों उनके सिर ताज हुया
क्यों इसा कसूता काज हुया, थोड़ा हिसाब लगादे कोए।।
लाहौर मेरठ जमा पीछै नहीं रहे, म्हरे वीर बहादुर नहीं डरे
फिरंगी देस के चल्या गया, कारीगर फेर बी मल्या गया
धर्म जात पै छल्या गया, संविधान म्हारा दल्या गया
क्यों इसा जाल बुण्या गया, रणबीर पै लिखवादे कोए।।

पोलीथीन

पोलीथीन
पोलीथीन नै म्हारे देश  शहर का कर दिया बंटा धार
                          देखियो के होगा।।
नहीं गलै ना पिंघलै लोगो धरती पर तै मिटै नहीं
खेत क्यार का नाश करै नुकसान करण तै हटै नहीं
म्हारे जिस्यां पै उटै नहीं या पोलीथीन की मार
                          देखियो के होगा।।
कागज के लिफाफे म्हारे कति पढ़ण नै बिठा दिये
सन के थैले खूंटी टांगे मजे किसानां तै चखा दिये
सस्ते दामां बिका दिये इंहका इसा चढ़या बुखार
                          देखियो के होगा।।
गली नाली मैं जा कै जिब ये रोक लगादे भारी सै
गन्दे नाले बैक मारज्यां फैलै घणी बीमारी सै
न्यों होवै पीलिया महामारी सै माचै घणी हाहाकार
                          देखियो के होगा।।
बढ़िया वातावरण बिना म्हारा रैहणा मुश्किल होज्या गा
के बेरा किसका बालक न्यूं मौत के मुंह में सोज्या गा
रणबीर सही छन्द पिरोज्या गा सही प्रचार, देखियो के होगा।।

फांसी कोई इलाज नहीं



फांसी खाने से निजात नहीं मिलेगी बल्कि इस किसान विरोधी सिस्टम को फांसी पर लटकाया जाना चाहिए । क्या बताया रचनाकार ने *****
फांसी कोई इलाज नहीं हँसता हमपै यो लुटेरा ~
मर्ज समझल्याँ एक बै तो दूर नहीं यो सबेरा ~
1
ट्रेक्टर की बाही मारै ट्यूबवैल का रेट सतावै
थ्रेशर की कढ़ाई मारै भा फसल का ना थ्यावै 
फल सब्जी दूध सीत सब ढोलां मैं घल ज्यावै 
माटी गेल्याँ माटी होकै बी सुख का साँस ना आवै 
बैंक मैं सारी धरती जाली दीख्या चारों कूट अँधेरा~
2
निहाले पै रमलू तीन रूपया सैकड़े पै ल्यावै
वो साँझ नै रमलू धोरे दारू पीवन नै आवै
निहाला कर्ज की दाब मैं बदफेली करना चाहवै
विरोध करया तो रोज पीस्याँ की दाब लगावै
बैंक आल्यां की जीप का बी रोजाना लाग्या फेरा~
3
बेटा बिन ब्याह हाँडै सै घर मैं बैठी बेटी कंवारी
रमली रमलू नयों बतलाये मुशीबत कट्ठी होगी सारी 
खाद बीज नकली मिलते होगी ख़त्म सब्सिडी म्हारी
माँ टी बी की बीमार होगी बाबू कै दमे की बीमारी
रौशनी कितै दीखती कोन्या घर मैं टोटे का डेरा~
4
माँ अर बाबू म्हारे नै यो जहर धुर की नींद सवाग्या
माहरे घर का जो हाल हुआ वो सबके साहमी आग्या 
जहर क्यूं खाया उननै यो सवाल कचौट कै खाग्या 
म्हारी कष्ट कमाई उप्पर कोए दूजा दा क्यों लाग्या
कर्जा बढ़ता गया म्हारा मरग्या रणबीर सिंह कमेरा ~