Wednesday, 26 October 2016

किस्सा चन्द्रद्रशेखर आजाद

                
     अठारह सौ सतावण की आजादी की पहली जंग में लाखों लोगों ने कुर्बानियां दीं। उसके बाद अंग्रेजों का दमन का दौर और तेज हो जाता है। देश में पनपी हिन्दू-मुस्लिम एकता को तोड़ने के कुप्रयास किये जाते हैं। किसानों पर उत्पीड़न बेइन्तहा किया जाता है। ऐसे समय में भावरा गांव में चन्द्रशेखर आजाद का जन्म होता है। क्या बताया भला:
रागनी 1
तर्ज: चौकलिया
टेक  दूर दराज का गाम भावरा, पैदा चन्द्रशेखर आजाद हुया।।
     दुपले पतले बालक तै घर, तेईस जुलाई नै आबाद हुया।।

     मुगलां के पिट्ठू यूरोप के, सारे कै व्यौपारी छाये फेर दखे
     ईस्ट इन्डिया कम्पनी नै चारों, कान्हीं पैर फैलाये फेर दखे
     अंग्रेजां नै भारत उपर शाम, दाम, दण्ड भेद चलाये फेर दखे
     देश के नवाबां नै फिरंगी साहमी, गोड्डे टिकाये फेर दखे
     किसानां नै करया मुकाबला उनका तै न्यारा अन्दाज हुया।।
     ठारा सौ सत्तावण मैं आजादी की पहली जंग आई फेर
     आजादी के मतवाले वीरां नै कुर्बानी मैं नहीं लाई देर
     फिरंगी शासक हुया चौकन्ना गद्दारां की थी कटाई मेर
     हटकै म्हारे भारत देश पै घणी कसूती छाई अन्ध्ेार
     भारत की जनता नहीं मानी चाहे सब कुछ बरबाद हुया।।
     भुखमरी आवै थी तो भूख तै कदे लोग मरे नहीं थे
     अंग्रेजां के राज मैं अकाल खेत बचे हरे भरे नहीं थे
     टैक्स वसूल्या गाम उजाड़े लोग फेर बी डरे नहीं थे
     वुफछ हुये गुलाम कई नै जमीर गिरवी धरे नहीं थे
     विद्रोह की राही पकड़ी कुछ नै क्रान्ति का आगाज हुया।।
     युगान्तर अनुशीलन संगठन उभर कै आये बंगाल मैं
     कांग्रेस मैं गान्धी का स्वदेशी सहज सहज आया उफान मैं
     चोरा चोरी मैं गोली चाली चौकी जलाई इसे घमसान मैं
     गान्धी नै वापिस लिया निराशा छाई थी नौजवान मैं
     रणबीर चन्द्रशेखर इसे बख्त क्रान्ति की बुनियाद हुया।।
     गांव के हालात काफी खराब थे। चन्द्रशेखर का परिवार भी आर्थिक स्तर पर कमजोर था। चन्द्रशेखर गांव से चलकर शहर में आ जाता है और छोटा-मोटा काम
रागनी-2
तर्ज: चौकलिया
     गाम तै चाल चन्द्र शेखर शहर कै मैं आया फेर।।
     छोटा मोटा काम मिल्या रैहण का जुगाड़ बनाया फेर।।

     एक कमरे मैं कई रहवैं मुश्किल सोना होज्या था
     आधी बारियां भूखे प्यासे भीतरला सबका रोज्या था
     आजाद देखकै हालत नै वो अपणा आप्पा खोज्या था
     बीड़ी पी पी कै धुमा भरज्या कौन नींद चैन की सोज्या था
     देख हालत मित्रा प्यारयां की आजाद दुख पाया फेर।।
     दिल मैं सोची शहर मैं खामखा आकै ज्यान फंसाई
     उल्टा जांगा गाम मैं तो कसूती होवैगी जग हंसाई
     आड़े क्यूकर रहूं घुट कै कोन्या बात समझ मैं आई
     तिरूं डूबूं जी होग्या उसका हुई मन तै खूब लड़ाई
     न्यों तो बात बणैगी क्यूकर उसनै दिल समझाया फेर।।
     गरीबी के के काम करवादे इसका बेरा पाट गया
     फिरंगी की लूट का अहसास उंका कालजा चाट गया
     सोच सोच इन बातां नै वो दिल अपणे नै डाट गया
     जी हजूरी उनकी करने तै आजाद जमा नाट गया
     क्रान्ति का झन्डा आजाद नै पूरे मन तै ठाया फेर।।
     भगतसिंह राजगुरु तै उसनै तार भिड़ाये फेर
     सुखदेव शिव वर्मा हर बी उनकी गेल्यां आये फेर
     कई महिला साथ आई इन्कलाब के नारे लाये फेर
     जनून छाया सबमैं घणा मुड़कै नहीं लखाये फेर
     रणबीर मरने तक उसनै था वचन निभाया फेर।।
     वहां शहर में चन्द्रशेखर सहज सहज क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आ जाता है। सुखदेव, राजगुरु, शिव वर्मा, भगतसिंह के साथ उसका तालमेल बनता है। वह आजादी की लड़ाई का एक बहादुर सिपाही का सपना देखने लगता है। वह अपनी जिन्दगी दांव पर लगाने की ठान लेता है। क्या बताया फिर-
रागनी-3
तर्ज: चौकलिया
     चन्द्रशेखर आजाद नै अपणी जिन्दगी दा पै लादी रै।।
     फिरंगी गेल्या लड़ी लड़ाई उनकी जमा भ्यां बुलादी रै।।

     फिरंगी राज करैं देश पै घणा जुलम कमावैं थे
     म्हारे देश का माल कच्चा अपणे देश ले ज्यावैं थे
     पक्का माल बना कै उड़ै उल्टा इस देश मैं ल्यावैं थे
     कच्चा सस्ता पक्का म्हंगा हमनै लूट लूट कै खावैं थे
     भारत की फिरंगी लूट नै आजाद की नींद उड़ादी रै।।
     किसानां पै फिरंगी नै बहोत घणे जुलम
     खेती उजाड़ दई सूखे नै फेर बी लगान बढ़ाये थे
     जो लगान ना दे पाये उनके घर कुड़क कराये थे
     किसानी जमा मार दई नये नये कानून बनाये थे
     क्रान्तिकारियां नै मिलकै नौजवान सभा बना दी रै।।
     जात पात का जहर देश मैं इसका फायदा ठाया था
     आपस मैं लोग लड़ाये राज्यां का साथ निभाया था
     व्हाइट कालर आली शिक्षा मैकाले लेकै आया था
     साइमन कमीशन गो बैक नारा चारों कान्हीं छाया था
     म्हारी पुलिस फिरंगी नै म्हारी जनता पै चढ़ा दी रै।।
     जलियां आला बाग कान्ड पापी डायर नै करवाया था
     गोली चलवा मासूमां उपर आतंक खूब फैलाया था
     मनमानी करी फिरंगी नै अपना राज जमाया था
     जुल्म के खिलाफ आजाद नै अपना जीवन लाया था
     रणबीर नै तहे दिल तै अपणी कलम चलादी रै।।
     1921 में असहयोग आन्दोलन की लहर उठती है पूरे देश में। जगह-जगह पर प्रदर्शन, धरने किये जाते हैं। महात्मा गान्धी इस आन्दोलन के अग्रणी नेता थे। उधर ज्योतिबा फुले अपने
रागनी 4
     उन्नीस सौ इक्कीस मैं असहयोग आन्दोलन की जंग छिड़ी।।
     सारे हिन्दुस्तान की  जनता फिरंगी गेल्या आण भिड़ी।।

     जलूस काढ़ते जगां जगा पै गांधी की सब जय बोलैं
     भारत के नर नारी जेल गये जेल के भय तै ना डोलैं
     कहैं जंजीर गुलामी की खोलैं आई संघर्ष की आज घड़ी।।
     नौजवान युवक युवती चाहवैं देश आजाद कराया रै
     कल्पना दत्त नै कलकत्ता मैं चला गोली सबको बतलाया रै
     आजादी की उमंग उनमैं भरी नौजवान सभा बनी कड़ी।।
     ज्योतिबा फुले का चिंतन दलितां नै बार बार पुकारै था
     मनु नै जो बात लिख दी उन बातां नै जड़ तै नकारै था
     नवजागरण की चिंगारी देश मैं सुलगी कई जगां बड़ी।।
     एक माहौल आजादी का चारों कान्हीं जन जन मैं छाया रै
     गांधी और भगतसिंह का विचार आपस मैं टकराया रै
     रणबीर सिंह नै सोच समझ कै नये
     चन्द्रशेखर आजाद अपना रहने का स्थान बदलता रहता था। पुलिस क्रान्तिकारियों के पीछे लगी रहती। सातार नदी के किनारे आजाद एक कुटिया में साधु के भेष में रहने लगता है। पास के गांव में कत्ल हो जाता है। पुलिस की आवाजाही बढ़ जाती है। चन्द्रशेखर कैसे बचाता है अपने आपको:
रागनी 5
     सातार नदी के काठै आजाद एक कुटिया मैं आया।।
     साधु भेष धार लिया नहीं पता किसे ताहिं बताया।।

     जिब बी कोए साथी पुलिस की पकड़ मैं आज्या था
     आजाद ठिकाना थोड़ी वार मैं कितै और बणाज्या था
     इसे सूझबूझ के कारण पुलिस तै ओ बच पाया।।
     पास के गाम मैं एक बै किसे माणस का कत्ल हुया
     चरचा होगी सारे कै फेर पुलिस का पूरा दखल हुया
     पुलिस दरोगा तफतीस करी कुटी मैं फेरा लाया।।
     दरोगा नै देख कै आजाद बिल्कुल ही शान्त रहया
     ध्यान तै सुण्या सब कुछ जो दरोगा नै उंतै कहया
     बोल्या धन्यवाद दरोगा जी आगै फेर जिकर चलाया।।
     साध्ुाआं का ठोर ठिकाना यू सारा संसार दरोगा जी
     छोड़ दिया बरसां पहलम यू घर परिवार दरोगा जी
     रणबीर आजाद नै न्यों दरोगा तै पीछा छटवाया।।
     बाबा जी की मढ़ी में पुलिस अपना डेरा डाल देती है। क्रान्तिकारी मढ़ी का निरीक्षण करने पहुंचते हैं कि पुलिस वालों को क्या ठिकाने लगाया जा सकता है। क्या बताया भला:
रागनी 6
     क्रान्तिकारी टोली आई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
     दोनूआं नै शीश नवाई रे बाबा जी की मढ़ी मैं।।

     भगतां की टोली मैं उननै पूरी सेंध लगाई फेर
     चीलम की उनकी बी थोड़ी वार मैं बारी आई फेर
     आजाद तै चीलम पकड़ाई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
     कदे बीड़ी बी पी कोन्या चीलम हाथ मैं आई
     घूंट मारकै चीलम फेर राजगुरु तै पकड़ाई
     राजगुरु नै दम लगाई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
     मढ़ी का पूरा पूरा उसनै हिसाब लगाया फेर
     माणस घणे मारे जांगे उनकी समझ आया फेर
     आंख तै आंख मिलाई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
     प्रणाम करकै बाबा जी नै दोनूं उल्टे आये थे
     बाकी टोली आल्यां तै मढ़ी के हालात बताये थे
     रणबीर करै कविताई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
     दो पुलिस वालों से आजाद व राजगुरु का आमना सामना मढ़ी में हो जाता है। साधु को अपनी चिन्ता होती है। पुलिस वाले अपने अपने
रागनी 7
     आहमी साहमी होगे चारों एक पल तक आंख मिली।।
     न्यारे न्यारे दिमागां मैं न्यारे  

     साधु सोचै फंसे खामखा यो आजाद मनै मरवावैगा
     आजाद सोचै दोनूं पुलिसिया क्यूकर इनतै टकरावैगा
     एक सिपाही सोचै आजाद पै इनाम तै थ्यावैगा
     दूजा सोचै नाम हो मेरा इनाम सारा मेरे बांटै आवैगा
     के तूं आजाद सै सुण कै बी चेहरे पै उसके हंसी खिली।।
     नहीं चौंक्या आजाद जमा सादा भोला चेहरा बनाया
     साध्ुा तो हमेशा आजाद हो सै कोए भाव नहीं दिखाया
     पुलिसिया कै शक होग्या पुलिस थाने का राह बताया
     हनुमान की पूजा करनी हमनै वार हो बहाना बनाया
     दरोगा तै हनुमान बडडा कैहकै उसकी थी दाल गली।।
     आगरा शहर क्रान्तिकारियों के शहर की तरह जाना जाने लगा था। आजाद कभी आगरा कभी कानपुर अपने डेरे बदलता रहता था। दूसरों को भी चौकन्ना रहने को कहता था। एक बार एक जगह आजाद फंस जाता है तो कैसे निकलता है। क्या बताया भला:
रागनी 8
तर्ज: चौकलिया
     आगरा शहर एक बख्त क्रान्तिकारियां का शहर बताया।।
     फरारी जीवन बिता रहे चाहते अपणा आप छिपाया।।

     कदे झांसी और कदे आगरा मैं आकै रहवै आजाद
     जितने दिन रहै आगरा रहो चौकन्ने कहवै आजाद
     बारी बारी सब पहरा देते
     साथी रात पहरे पै सोग्ये उठकै सब लहवै आजाद
     पहरा देने आला साथी फेर बहोत करड़ा धमकाया।।
     साथी सुणकै चुप रैहग्या उसकी आंख्या पानी आग्या रै
     देख कै रोवन्ता उस साथी नै आजाद घणा दुख पाग्या रै
     ड्यूटी पहलम खत्म करादी खुद पै बेरा ना के छाग्या रै
     कोली भरली प्यार जताया उसनै अपनी छाती लाग्या रै
     अनुशासन और प्यार का आजाद नै जज्बा दिखाया।।
     कानपुर मैं दोस्त धेारै आजाद नै कुछ दिन बिताये
     कांग्रेसी माणस व्यापारी लेन देन करते बतलाये
     सलूनो का दिन पत्नी नै बूंदी के लड्डू बनवाये
     परांत मैं भरकै चाल पड़ी पुलिस दरोगा घर मैं आये
     पुलिस आले कै बांध राखी उसनै भाई तत्काल बनाया।।
     बोली माड़ा झुकज्या नै च्यार लाड्डू उसतै थमा दिये
     परांत सिर पै आजाद कै दरोगा जी बेवकूफ बना दिये
     इसा बर्ताव देख दरोगा नै सब भेद बता दिये
     फिरंगी नजर राखता जिनपै नाम सबके गिना दिये
     रणबीर बरोने आले नै यो आजाद घणा कसूता भाया।।
     झांसी के पास राजा का पिछलग्गू एक सरदार था। उसके यहां रहकर आजाद ने कुछ वक्त बिताया। यहां कई लोगों को निशानेबाज बनाया। राजा के बैरी क्रान्तिकारियों को उकसाते थे कि राजा को मारकर धन लूट लो। मगर आजाद इसे ठीक नहीं मानता - क्या बताया भला:
रागनी 9
तर्ज: चौकलिया
     झांसी धौरे एक राजा का चमचा सरदार बताया रै।।
     आजाद नै थोड़े दिन उड़ै अपणा बख्त बिताया रै।।

     झांसी के क्रान्तिकारी निशाना लाणा सिखा दिये
     अचूक निशाना साधन मैं पारंगत सभी बना दिये
     राजा मार कै धन जुटाओ रास्ते कुछ नै बता दिये
     बैरी राजा के सलाह देवैं अन्दाजे आजाद लगा लिये
     टाल मटौल कर आजाद नै मौका टाल्या चाहया रै।।
     राजा के बैरी बोले के पाप जुल्मी नै मारण का
     कंस मारण खातर के पाप कृष्ण रूप धारण का
     के हरजा खोल बता मौत के घाट तारण का
     आजाद बोल्या मसला सै गहराई तै विचारण का
     हिंसा म्हारी मजबूरी सै आजाद नै समझाया रै।।
     या मजबूरी म्हारे पै शासक आज के थोंप रहे
     झूठ भकावैं और लूटैं चाकू कसूते घोंप रहे
     सच्चाई का लाग्या बेरा माणस सारे चोंक रहे
     हम चटनी गेल्यां खाते ये लगा घीके छोंक रहे
     हत्यारे कोन्या हम दोस्तो चाहते देश आजाद कराया रै।।
     नेक इरादा नेक काम का ध्येय सै म्हारा यो
     नेक तौर तरीके अपणावां सार बात का सारा यो
     आजादी म्हारी मंजिल सै फरज म्हारा थारा यो
     रणबीर सिंह की कविताई सही लिखै नजारा यो
     नरहत्या का आजाद विरोधी उसनै इसा जज्बा दिखाया रै।।
     साधु बाबा के पास अमूल्य रतन था। उसे बाबा से हथिया कर क्रान्तिकारी हथियार खरीदना चाहते थे। सलाह की। बाबा की कुटी देखने गये। मगर कई आदमी मारे जाने के भय से उन्होंने यह योजना नहीं बनाई। आजाद और क्रान्तिकारी किसी के जीवन से खिलवाड़ नहीं करते थे। क्या बताया भला:
रागनी 10
तर्ज: चौकलिया
     अमूल्य रतन उसके धौरे साधु  का बेरा पाड़ लिया।।
     गंगा जी के घाट कुटिया राह गोन्डा ताड़ लिया।।

     बैठ कै बतलाये सारे बाबा जी पै रतन ल्यावां
     बेच कै उसनै हथियारां का हम भण्डार खूब बढ़ावां
     योजना बना घणी पुख्ता रात अँधेरी  मैं जावां
     डरा धमका बाबा जी नै योजना सिरै चढ़ावां
     सोच हथियारां का फेर थोड़ा घणा जुगाड़ लिया।।
     गुलाबी ठण्ड का मौसम रात जमा अन्धेरी थी
     अँधेरे  बीच चसै दीवा छटा न्यारी बखेरी थी
     रात नौ बजे भगतां की संख्या उड़ै भतेरी थी
     चरस की चीलम चालैं दुनिया तै आंख फेरी थी
     गांजा पीवैं जोर लगाकै कर घर कसूता बिगाड़ लिया।।
     राजगुरु आजाद नै तुरत स्कीम एक बनाई थी
     शामिल होगे साधुआं मैं चीलम की बारी आई थी
     मारी घूंट अपणी बारी पै देर कति ना लाई थी
     चीलम पीगे जिननै कदे बीड़ी ना सुलगाई थी
     सारी बात निगाह लई देख कुटी का कबाड़ लिया।।
     वापिस आकै न्यों बोले काम नहीं सै होवण का
     माणस घणे मारे जावैंगे माहौल बणैगा रोवण का
     रतन बदले इतने माणस तुक नहीं सै खोवण का
     चालो उल्टे चालांगे समों नहीं जंग झोवण का
     रणबीर नहीं आजाद नै जीवन से खिलवाड़ किया।।
     साइमन कमीशन भारत में आता है। उसका विरोध पूरे भारत में होता है। पंजाब में भी विरोध किया जाता है। अंग्रेजों की पुलिस अत्याचार करती है। लाला लाजपतराय पर लाठियां बरसाई जाती हैं। वे शहीद हो गये। बदला लेने को क्रान्तिकारियों ने साइमन को मारने का प्रण किया। साण्डरस मारा जाता है। चानन सिपाही क्रान्तिकारियों के पीछे भागता है भगतसिंह और राजगुरु के पीछे। आजाद गोली चलाता है चानन सिंह को गोली ठीक निशाने पर लगती है। आजाद को बहुत दुख होता है चानन सिंह की मौत का। क्या बताया भला:
रागनी 11
तर्ज: चौकलिया
     साइमन कमीशन गो बैक नारा गूंज्या आकाश मैं।।
     साण्डर्स कै गोली मारकै पहोंचा दिया इतिहास मैं।।

     राजगुरु की पहली गोली साण्डर्स मैं समा गई थी
     भगतसिंह की पिस्तौल निशाना उनै बना गई थी
     चानन सिंह सिपाही कै लाग इनकी हवा गई थी
     पाछै भाज लिया चानन बन्दूक उसनै तना दई थी
     दोनूआं के बीच कै लाया अचूक निशाना खास मैं।।
     थोड़ी सी चूक निशाने की घणा पवाड़ा धर जाती
     भगतसिंह कै राजगुरु का सीना छलनी कर जाती
     आजाद जीवन्ता मरता क्रान्तिकारी भावना मर जाती
     आजादी के परवान्यां के दुर्घटना पंख कतर जाती
     आजाद गरक हो ज्याता आत्मग्लानि के अहसास मैं।।
     चानन सिंह के मारे जाने का अफसोस हुया भारी था
     आजाद नै जीवन प्यारा था वो असल क्रान्तिकारी था
     खून के प्यासे आतंकवादी प्रचार यो सरकारी था
     सूट एट साइट का उड़ै फरमान हुया जारी था
     विचलित कदे हुया कोन्या भरया हुआ विश्वास मैं।।
     कठिन काम तै घबराया ना चन्द्रशेखर की तासीर थी
     आजाद भारत की उसकै साहमी रहवै तसबीर थी
     इसकी खातर दिमाग मैं कई
     आजाद नै चौबीस घन्टे दीखैं गुलामी की जंजीर थी
     रणबीर आजाद कैहरया फायदा म्हारे इकलास मैं।।
     एक दिन राजगुरु एक महिला की तसवीर वाला एक कैलेंडर लाकर कमरे में टांग देता है। आजाद कैलेंडर देखकर नाराज होता है और उतार कर फैंक देता है। दोनों में कहासुनी होती है। क्या बताया भला:
रागनी 12
     आगरा मैं थे क्रान्तिकारी उस बख्त की बात सुणाउं मैं।।
     आजाद और राजगुरु बीच छिड़या यो जंग दिखलाउं मैं।।

     राजगुरु नै फोटो आला कलैण्डर ल्याकै टांग दिया
     आजाद नै टंग्या देख्या अखाड़ बाढ़ै वो छांग दिया
     बोल्या उलझ तसबीरां मैं फिसलैंगे न्यों समझाउं मैं।।
     राजगुरु आया तो बूझया कलैंडर क्यों पाड़ बगाया
     आजाद बोल्या क्रान्ति का क्यों तनै बुखार चढ़ाया
     क्यों सुन्दर तसबीर पाड़ी यो सवाल बूझणा चाहूं मैं।।
     सुन्दर महिला की थी ज्यांतै पाड़ी सै तसबीर मनै
     दोनूं काम साथ ना चालैं पाई अलग तासीर मनै
     राजगुरु भाई गुस्सा थूक दे कोन्या झूठ भकाउं मैं।।
     एक गाडडी के दो पहिये बीर मरद बतलाये सैं
     सुन्दरता बिना संसार किसा सवाल सही ठाये सैं
     आजाद मुलायम हो बोल्या आ बैठ तनै समझाउं मैं।।
     सन् 1921 में असहयोग आन्दोलन बड़े पैमाने पर शुरू हो जाता है। नवजागरण की लौ शहर गाम हर जगह पहोंचने लगती है। गांधी और भगतसिंह के विचार लोगों के सामने आते हैं। उनके बीच टकराव भी सामने आता है। क्या बताया भला:
रागनी 13
     उन्नीस सौ इक्कीस मैं असहयोग आन्दोलन की जंग छिड़ी।।
     पूरे भारत की जनता फिरंगियां गेल्यां फेर आण भिड़ी।।

     जलूस काढ़ते जगां जगां पै गांधी की सब जय बोलैं
     भारत के नर नारी जेल गये जेल के भय तैं ना डोलैं
     कहैं जंजीर गुलामी की खोलैं आई संघर्ष की आज घड़ी।।
     नौजवान युवक युवती चाहवैं देश आजाद कराया
     कल्पना दत्त नै कलकत्ता मैं चला गोली सबको बताया
     आजादी की उमंग सबमैं भरी नौजवान सभा बनी कड़ी।।
     ज्योतिबा फुले का चिंतन दलितां नै बार बार पुकौर था
     मनु नै जो बात लिख दी उन बातां नै जड़तै नकारै था
     नवजागरण की चिंगारी देश मैं सुलगै जगां जगां पड़ी।।
     एक माहौल आजादी का चारों कान्ही जन जन मैं छाया फेर
     गांधी भगतसिंह का विचार आपस मैं टकराया फेर
     कहै रणबीर बरोने आला
     एक हिस्सा क्रान्तिकारियों को आतंकवादी के रूप में देखता है। फिरंगी भी क्रांतिकारियों के बारे में आतंकवाइी कर इस्तेमाल करके तरह तरह की भ्रान्तियां फैलाने का पुरजोर प्रयास करते हैं। खूनी संघर्ष और अहिंसा के बीच बहस तेज होती है। क्या बताया भला:
रागनी 14
     क्रान्किारी हत्यारे कोन्या सन्देश दुनिया मैं पहोंचाया रै।। 
     जीवन तै प्यार घणा सै परचे मैं लिख कै बतलाया रै।।

     जीवन तै प्यार ना होतै बढ़िया जीवन ताहिं क्यों लड़ैं
     अत्याचार और जुलम के साहमी हम क्रान्तिकारी क्यों अड़ैं
     फिरंगी साथ जरूर भिड़ैं आजादी का सपना भाया रै।।
     शोषणकारी चालाक घणा पुलिस फौज के बेड़े लेरया
     म्हारे साथी कर कर भरती भारत देश नै गेड़े देरया
     खूनी संघर्ष कमेड़े लेरया फिरंगी समझ पाया रै।।
     तख्ता पलट करने नै हथियार उठाने पड़ ज्यावैं
     घणा नरक हुया जीवन सब घुट घुट कैनै मर ज्यावैं
     नींव जरूरी धरज्यावैं समाज बराबरी का चाहया रै।।
     समतावादी समाज होगा ये शोषण भारी रहै नहीं
     बिना ताले के घर होंगे कितै चोरी जारी रहै नहीं
     लूट खसोट म्हारी रहै नहीं रणबीर छन्द बनाया रै।।

रागनी 15
     फिरंगी सरकार मूंगी तै अपणी बात सुणाणी चाही।।
     असैम्बली मैं बम ंफैंकण की फेर पुख्ता स्कीम बनाई।।

     आठ अप्रैल का दिन छांट्या थोड़ा खुड़का करने का
     अहिंसा वेफ
     जनता मैं जोश भरने का सही रास्ता टोहया भाई।।
     दमनकारी कानून देश पै वे लगाया चाहवैं थे
     क्रान्तिकारी बात अपणी उड़ै पहोंचाया चाहतैं थे
     फिरंगी नै बताया चाहवैं थे तूं सै जुलमी अन्याई।।
     बम पैंफक्या उसकी गेल्यां बांट्या एक परचा था
     पूरी दुनिया मैं उस दिन हुया गजब चरचा था
     कुर्बानी का भारया दरजा था भगतसिंह नै फांसी खाई।।
     परचे मैं लिख राख्या था किसा भारत हम बणावांगे
     सबनै शिक्षा काम सबनै हिन्द की श्यान बढ़ावांगे
     जात पात नै मिटावांगे रणबीर की या कविताई।।
रागनी 16
     शचीन्द्र नाथ की संगिनी प्रतिभा नै शोक जताया था।।
     राख जलूस था बड़ा भारी जो पार्क मैं आया था।।
     बोली खुदीराम बोस की राख का ताबीज बनाया था
     अपणे बालकां के गले मैं जनता नै वो पहनाया था
     प्रतिभा नै समझाया था जनून जनता मैं छाया था।।
     वा बोली राख आजाद की एक चुटकी लेवण आई
     इसा क्रान्तिकारी कित पावै अंग्रेजां की भ्यां बुलाई
     राख नहीं टोही पाई कुछ हिस्सा ए बच पाया था।।
     आजाद इस तरियां फेर आजाद हुया संसार तै
     पुलिस घबराया करै थी आजाद की एक हुंकार तै
     वा बोली सरकार तै आजाद ना कदे घबराया था।।
     फिरंगी का राज रणबीर ईंका खात्मा करां मिलकै
     जात पात नै भुला कै आजादी खातर मरां मिलकै
     शीश अपणे धरां मिलकै आजाद नै न्यों फरमाया था।।
रागनी 17
     जीवन्ते जी हाथ ना आउं आजाद नै किया ऐलान था।।
     कदे पुलिस हाथ ना आया घणा सजग इनसान था।।

     सताईस फरवरी का दिन इसका हाल सुणाउं
     सन उनीस सौ इकतीस का मैं सही साल बताउं
     आजाद घिरया दिखाउं अल्प्रैफड पार्क का मैदान था।।
     बैठ पार्क मैं लिया सपना आजाद भारत देश का
     चित्रा दिल मैं उभरया सब रंगा के समावेश का
     इन्तजार था सन्देश का ना पुलिस का अनुमान था।।
     दोनूं कान्हीं तै दनादन गोली चाली पार्क मैं डटकै
     कैसे बेरा लाया पुलिस नै बात आजाद कै खटकै
     पुलिस पास ना फटकै डर छाया बे उनमान था।।
     अचूक निशाने का माहिर चन्द्रशेखर आजाद था
     भारत देश आजाद कराणा पूरा उसनै आगाज था
     रणबीर नया अन्दाज था देना चाहया फरमान था।
रागनी 18
     अपणी पिस्तौल सिर अपणा जीन्ते जी काबू कोन्या आया।।
     मरे मरे पै गोली दागी इतना डर था पुलिस पै छाया।।

     अल्फ्रेंड  पार्क  मैं आहमी साहमी दनादन गोली चाली
     पुलिसिये कई जणे थे ऐकले नै कमान सम्भाली
     निशाना गया नहीं खाली अंग्रेज अफसर घबराया।।
     यूनिवर्सिटी के छात्रा उड़ै इकट्ठे हुये इतनी वार मैं
     खबर मौत की एक दम फैली सारे ही बाजार मैं
     पार्क के भीतर बाहर मैं कप्तान पुलिस का लखाया।।
     देख भीड़ पार्क के म्हां पुलिस नै गोली चलानी चाही
     कलैक्टर हालात समझग्या गोली की करी मनाही
     पुलिस बदलगी अपणी राही बिना गोली काम चलाया।।
     इलाहाबाद पूरा बन्द होग्या हड़ताल हुई थी भारी
     पान खोमचे आले शामिल थे अर तांगे की सवारी
     रणबीर कठ्ठी जनता सारी नारा इन्कलाब का लाया।।

सैमण गाम


महम तहसील का गाम बताया सैमण उसका नाम कहै।
पांच हजार किल्ले धरती जाटां का असली गाम कहैं।।
1. छत्तीस जात बसैं उड़ै अपणे दुःख सुख बांटैं सैं
  कदे हंसकै कदै लड़कै अपणे दिनां नै काटैं सैं
  मुश्किल तै दिल डाटैं वे ना थ्यावैं पूरे दाम कहैं।।
2. छुआछूत कुछ कम होग्या पूरे बन्धन ये टूटे ना
  जातपात गोत नात के रिवाज जमा बी छूटे ना
  पाप के घड़े फूटे ना बाट देखते सुबो शाम कहैं।।
3. पहलम आला प्यार मुलहाजा ना दीखता किसे घर मैं
  मां बाहन और बेटी सांस लेवन्ती आज घणे डर मैं
  इस मातृत्व के सिर मैं लावैं झूठा इल्जाम कहैं।।
4. टी वी ब्लयू फिल्म आज ये करते नंगेपन का प्रचार
  सही गलत और गलत सही चलाया जुलमी कारोबार
  रणबीर सिंह करता तैयार सुणल्यो नया पैगाम कहैं।।

Panchayat

सुणियो ईब कथा सुणाउं, खोल कै सारी बात बताउं।।
साच कैहन्ता ना शरमाउं, पंचायतां की रेल बनाई।।
1. कहवण नै ताकत बधाई असल मैं बात और दखे 
   हांडैं हाजरी लान्वते ना सरपंच का करैं गौर दखे 
  पंचायती राज का खोल सै, इसमैं होरी घणी रोल सै
  बिना बजट सब गोल सै, पंचायतां की रेल बणाई।।
2. मैम्बर पंचायत बणी सरपंच मीटिंग बुलावै ना
  कारवाई रजिस्टर चाहूं देखणा नपूता दिखावै ना
  ग्राम सभा पढ़ण बिठादी झूठी मीटिंग हुई दिखादी
  साइन करवा हुई बतादी, पंचायतां की रेल बणाई।।
3. अफसर भी म्हारे डूब गये देखती आंख्यां माखी खावैं
  गाल पक्की जिब हुई नहीं तो क्यों हुया खरच बतावैं
  बी डी ओ की हिस्सा पत्ती सै, सरपंच तै इनकी बत्ती सै
  गाम मैं आवै मास्सा रत्ती सै, पंचायत की रेल बणाई।।
4. चौधर के भूखे सरपंची के ये दावेदार बणे देखो
  सुलफे तै फुरसत ना आप्पे मैं थानेदार बणे देखो
  गालां की सुध नहीं लेवैं ये, बैठे बस थूक बिलौवें ये
  रणबीर के ताकू चभौवैं ये, पंचायतां की रेल बणाई।।

हरयाणा का माहौल



एक बै  आदत  पड्ज्या तो छूटै  ना  कितने ए ताण  तुडाले ।।
मुश्किल  होज्या ऐब छुडाना चाहे कितनी ए कसम दुआले ।।
तम्बाकू की लत  होज्या तो कैंसर रोग की खुल ज्य़ा राही 
दमा  बढे और साँस रोग भी मचावै  बुढापे  के मैं तबाही  
खांसी बलगम तडकें ए तड़क  मानस नै खूबे ए रूआले ।।
दारू की लत का काम बुरा पूरे हरयाणा मैं छागी देखो 
माणस  की इस लत के कारण महिला दुःख पागी देखो 
गैंग रेप बढ़े हरयाणा मैं या गिरती साख कौन बचाले ।।
पर नारी की लत कसूती या घर परिवार बर्बाद करै   
महिला पुरुष के मीठे रिश्त्याँ मैं या कसूता खटास भरै 
नहीं छुटती लत माणस की कोए कितना ए समझाले ।।
ताश खेलन की लत बढ़ी हरयाने के गामाँ की गालाँ मैं 
जुए की लत कारण द्रोपदी का चीरहरण हुया दरबारां  मैं 
परम्परावादी रूढ़ीवादी नेता पुलिश अफसर रख वाले ।।
हरयाणा के लड़के लडकी कई लतां के शिकार हुए 
समाज सुधार की जरूरत घनी रणबीर के विचार हुए 
सते फरमाना दिल तैं तूं या रागनी ऊंचे सुर मैं गाले ।।

रेप मैनिया


 
यो रेप मैनिया क्यों म्हारे हरयाणा के मैं छाग्या रै ।।
पढ़ पढ़ कै हादसे रोजाना जी घणा दुःख पाग्या रै ।।
जिस कै  लागै वोहे जानै दूजा के जानै पीर पराई 
म्हारै भी दुःख नहीं होंता जब तक ना झेलै माँ जाई 
सर पर कै पानी गया समाज पूरा घबराग्या रै ।।
कुछ अत्याचार बढ़ाये परम्परावादी रिवाज नै रै 
बाकी कसर पूरी करदी  इस बाजारी समाज नै रै 
महिला बनाई भोग की वस्तु बुरा जमाना आग्या रै ।।
बदमाशों की देखी जा सफेदपोश बदमाश होग्या 
माहौल पूरे समाज का यो अपराधों के बीज बोग्या 
बाड़ खेत नै खाण लगी रूखाला मुंह काला कराग्या रै।।
रेपिस्ट उनकी जिन्दगी मैं ये जहर कसूता घोलें 
हिम्मत उन महिलाओं की जो इसके खिलाफ बोलें 
कहै रणबीर बारोने आला छोह मैं छंद बनाग्या रै ।।

चन्द्र सिंह गढ़वाली


आज हम आजाद देश के नागरिक हैं । आजादी के बाद हमने बहुत कुछ् हासिल किया है । लेकिन वे लोग जिनकी वजह से हमने आजादी पाई , उनके विषय में हम ज्यादा नहीं जानते, न ही उनके त्याग और संघर्षों को जानते हैं । किसी प्राप्ति का मूल्य तभी आँका  जा सकता है जब हम उसके पीछे के बलिदान को समझें । देश के अनेकानेक लोग कई प्रकार से स्वतन्त्रता के लिए संघर्ष रत रहे । कुछ देशभग्ति  की पराकाष्ठा तक पहुँच गए और अमर हो गए पर अधिकांश देशभक्त कहीं किसानों को, कहीं फ़ौज के सिपाहियों को , कहीं हिन्दू मुस्लिम अवाम को संगठित करते हुए नींव के पत्थर बन गए । चन्द्र सिंह गढ़ वाली भी ऐसे सामान्य फ़ौजी थे जिन्होंने गढ़वाल रायफल्ज  का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों का हुकम मानने से इंकार कर दिया और अंग्रेजों की  हिन्दू मुस्लिम बंटवारे की निति को विफल करके लोगों को देशप्रेम का सन्देश दिया । अंग्रेज सरकार ने उनके साथ बहुत सख्ती बरती लेकिन वे देश के लिए लड़ते रहे ।आज के दौर में ऐसे जन नायकों की विरासत को समझना और उससे सबक लेना हमारी जरूरत है । उम्मीद है चन्द्र सिंह गढ़वाली का यह किस्सा सबको प्रेरित करेगा ।
रागनी --1
आजाद देश के वासी सोचो आजादी क्यूकर पाई देखो
जिन करकै आजाद हुए उनकी याद भुलाई देखो ।। 
उन शहीदों के बारे हमने रति भर भी ज्ञान नहीं
उनका त्याग और क़ुरबानी इन सबकी पहचान नहीं
उनका संघर्ष याद कराँ घनी तकलीफ ठाई  देखो।।
अनेकानेक लोग देश के जिनने अपना बलिदान दिया
भगत सिंह राजगुरु सुखदेव जीवन पूरा कुर्बान किया
हँसते हँसते देश की खातिर फांसी इन नै खाई देखो ।।
कितै संघर्ष की खातिर संतान किसानों का बनाया
कितै फ़ौज के सिपाहियों नै अपना देश प्रेम दिखाया
हिन्दू मुस्लिम एकता की नींव मजबूत बनाई देखो ।।
हिन्दू मुस्लिम एकता म्हारी अंग्रेजों नै तोड़ बगाई या
देश का बंटवारा करकै अपनी तुर्पी चाल चलायी या
इस बंटवारे के दुखों की नहीं होगी या भरपाई देखो ।।
इन अमर शहीदों मैं एक हुआ चन्द्र सिंह गढ़वाली
फ़ौज मैं बगावत की नींव सबकी साहमी थी डाली
रणबीर सिंह नै दिल लाके करी सै कविताई देखो ।।

BRITISHERS

अंग्रेजों नै घने जुलम कमाए अपना राज जमावान मैं
फूट गेरो तरज करो वर लाई न निति अपनावन  मैं
किसानों पर घने कसूते अंग्रेजों नै जुलम कमाए थे
कोहलू मैं पीड़ पीड़ मारे लगान उनके बढ़ाए थे
जगलों  की शरण लिया करते अपने पिंड छटवावन मैं
मजदूरों का बेहाल करया ढाका जमा उजाड़  दिया
मानचैस्टर आगै बढाया जलूस म्हारा लिकाड़ दिया
ढाका की आबादी घटगी माहिर मलमल बनावन मैं
युवा घने सताए गोरयां नै ये सारी सीम लाँघ गए
बंदर बाँट मचा देश मैं फेर रच घने ये सांग गए
पहली आजादी आली जंग लड़ी गयी थी सतावन मैं
ठारा सौ सतावन की जंग मैं देशी सेना बागी होगी
अंग्रेजों के हुए कान खड़े चचोत कालजै लगी होगी
रणबीर सिंह की कविताई हो सै  जनता जगावन मैं

Friday, 21 October 2016

खाई


हरियाणा में भी सामाजिक स्तर पर खाई बढ़ती 
जा रही है ।  कैसे पाटा जाये यह हम सब के लिए
बड़ी चुनौती है ।  क्या बताया भला ---
खाई चौड़ी होंती आवै सै इसनै आज कौण पाटैगा।
गरीब जनता का हाथ सही मैं आज कौण डाटैगा।
बधगी घर घर मैं खाई या बधगी पूरे समाज मैं 
देशां के बीच की खाई ना बताते पूरे अंदाज मैं 
अमरीका टोप पै रहवण नै आतंकवाद पै काटैगा।
एक देश के भित्तर भी कई ढाल की खाई दीखैं
एक अरबपति बनरया दूजे ये भूखे पेट नै भींचें 
शांति कड़े तैं आवैगी जब कारपोरेट इसतै नाटैगा।
लड़ाई बढ़ेगी इस तरियां विनास की राही करकै 
पिचानवै हों कठे होंवैंगे चौड़ी होंती खाई करकै
नहीं तो पर्यावरण प्रदूषण सबका कालजा चाटैगा।
लोभ लालच और मुनाफ़ा और बधारे इस खाई नै
समाज गया रसातल मैं चौड़ै भाई  मारै सै भाई नै
रणबीर सिंह समझावै देखो छंद यो न्यारा छांटैगा।

सबका हरियाणा -हमारा हरियाणा

सबका हरियाणा -हमारा हरियाणा 

बड़ा गुणगान होगा शाइनिंग 15 प्रतिशत  हरियाणा का 
मगर 85 प्रतिशत सफरिंग हरियाणा का जिक्र नहीं होगा 
एक नवम्बर के हरयाणा दिवस के मौके पर एक सपना 
 मेरा  भी ~~~~~
मिलजुल कै नया हरयाणा हम घणा आलीसान बनावांगे
नाबराबरी खत्म करकै नै हरयाणा आसमान पहोंचावांगे
बासमती चावल हरयाणे का दुनिया के देशां मैं जावै आज
चार पहिये की मोटर गाड़ी  यो सबतैं फालतू बणावै आज
खेल कूद मैं हम आगै बढ़गे एशिया मैं सम्मान बढ़ावांगे
चोरी जारी ठग्गी नहीं रहवैंगी भ्रष्टाचार नहीं टोहया पावै
मैरिट तैं मिलैं दाखिले सबनै शिक्षा माफिया खड़या लखावै
मिलकै सारे हरयाणा वासी इन बातों नै परवान चढ़ावांगे
ठेकेदारां की ठेकेदारी खत्म होज्या खत्म थानेदारी होवै
बदमाशों की बदमाशी खत्म हो फेर खत्म ताबेदारी होवै
निर्माण और संघर्ष का नारा यो पूरे हरयाणा मैं गूंजावांगे
दहेज़ खातिर दुखी होकै नहीं औरत फांसी खा हरयाणा मैं 
कदम बढ़ाये एकबै जो आगै फेर ना पाछै जाँ हरयाणा मैं 
बराबर के माहौल मैं महिलाओं के अरमान खिलावांगे 
छुआ छूत का नहीं नाम रहै सब रल मिल रहैं गामां मैं 
त्याग तपस्या और मोहबत की ये फुहार बहैं गामां मैं
दिखा मानवता का रास्ता जातधर्म का घमासान मिटावांगे 
हरयाणा के लड़के और लड़की कन्धे तैं कन्धा मिला चालैंगे
देकै कुर्बानी ये छोरी छोरे नए हरयाणा की नींव डालैंगे
गीत रणबीर सिंह नै बनाया मिलकै हम सारे ही गावांगे

Friday, 14 October 2016

बाबा साहब अम्बेडकर

बाबा साहब अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म का धारण
 कर लिया था तो कई बार हिन्दू  उनको घर 
वापस आ जाने की बात  करते थे तो क्या 
जवाब होता था बाबा  साहेब का क्या बताया भला ---

बाबा साहेब नै कहया  तम कौनसे घर की बात करो । 
वर्ण व्यवस्था मजबूत करो चर्चा याहे दिन रात करो । 
जिस घर का सपना तम हम सबनै दिखलाओ सो रै 
दुः स्वपन नै सपना कहकै हमनै दिन रात भकाओ सो रै 
इसा थारा घर का सपना जानवरां नै भी मात करो ।1 । 
घर ईसा बनाया थामनै नहीं परिवार कठ्ठा हो खावै 
कुछ की झूठण जिस घर मैं बाकी का भोज बणज्यावै 
इसे घर नै के चाटां जड़ै व्यभिचार होवै उत्पात करो । 2 । 
म्हारे समाज के घरां मैं यो सब कुछ न्यारा न्यारा देखो 
कुआं न्यारा और भांडे न्यारे न्यारा यो सबका हारा देखो 
ईसा घर जिसमै तूँ ठाली बाकी मिलकै खुभात करो । 3 । 
घर मैं वापसी चाहो रै दखे लालच दे दे कई लाख की 
चूल हिलादी जमा परवाह नहीं मानव की साख की 
कहै रणबीर बाबा साहेब की गेल्याँ मत दुभाँत करो । 4 । 

Thursday, 6 October 2016

हरियाणा स्वास्थ्य क्षेत्र का 50 साल का सफर 

अपने हाथ कलम पकड़ो

अपने हाथ कलम पकड़ो 
चालाक आदमी फैयदा ठारे , इब माणस की कमजोरी का 
घर की खांड किरकरी लागे , कहैं गूड़  मीठा चोरी का
भगत और भगवान के बीच , दलाल बैठगे आकै 
एक दूसरे की थाली पै , यें  राखें नजर जमाकै 
सीधी साच्ची बात करैं ना , यें करते बात घुमाकै 
झोटे जैसे पले पड़े  यें , सब माल मुफ्त का  खा कै 
म्हारी जेब पै बोझ डालते , अपनी जीभ चटोरी  का||
हम बैठे भगवान भरोसे , ये कहरे हम दुःख दर्द हरैं
यें मंदिर की ईंट चुरा कै अपने घर की नीव धरैं  
सारा बेच चढ़ावा खाज्याँ टीका  लाकै ढोंग करैं 
आप सयाने हम पागल बनाये , पाप करण तैं नहीं डरें
म्हारी राह मैं कांटे बोये , यें फैयदा ठारे  धौरी का  ||
राम के खातर खीलां फीकी ,यें काजू पिसता खावें
भगवान के ऊपर पंखा कोनी , यें ए सी मैं रास रचावें 
मुर्गे काट चढ़ा पतीली , यें निश दिन छौंक लगावें 
रिश्वत ले कै राम जी की , यें भगतों तैं भेंट करावें 
बड़े बड़े  गपौड़ रचें , यें करते काम टपोरी का ||
यें व्रत करारे धक्के तैं , धर्म का डर बिठा कै 
खुद पड़े पड़े हुक्म चलावें म्हारी राखें  रेल बना कै
टीके लाकै पोथी बांचें , कई राखें झूठे ढोंग रचा कै 
'रामेश्वर ' सब अँधेरा मेटो , थाम तर्क के दीप जला कै 
अपने हाथ कलम पकड़ो , लिखो  अंत इस स्टोरी का ||

Sunday, 2 October 2016

निचोड़ हो लिया

निचोड़ हो लिया
सफ़दर जी की हत्या से निचोड़  हो लिया
हुया  हड्खाया राजवर्ग यो तोड़ हो लिया
एक जनवरी साल नवासी मोटा चाला होग्या
हुया हमला सफ़दर ऊपर घायल कुढाला होग्या
हमलावर खुद राज करनीये खुल्ला पाला होग्या 
सफ़दर के नाटक का ढंग योतै  निराला होग्या  
यो राजनीती और हत्या का गठजोड़ हो लिया ||
चारों कूट मैं शोक फैलग्या कूकी दुनिया सारी 
गाँव गाँव और शहर शहर मैं  दुखी हुए नर नारी    
पैरिस लन्दन रोम के अन्दर सदमा था बड़ा भरी
कलाकार था जग मैं नामी थी संस्कृति प्यारी 
यो सरकारी चिलत्तर का भन्दा फोड़ हो लिया || 
 सफ़दर हाश्मी डस लिया सर्प राज का काला है
अभिव्यक्ति की आजादी का इब तक यो टाला है
राजवर्ग की भाषा बोलो वर्ना मुंह पर  ताला है
साच पर से जो पर्दा ठावै उसी ज्यान का गाला है
राजवर्ग सारी जगह का दीखे एक औड हो लिया ||
जल्दी संभलो रचना कारो कला पर यो हमला है
जन पक्ष की कला हमारी ना बिल्कुल ये अबला है  
रोंदना चाहते हो तुम  जैसे करता हाथी पगला है
हबीब भारती विचार करों  क्या कदम हमारा अगला है
वर्ग लुटेरा हत्यारा यो एक ठयोड़  हो लिया ||

Saturday, 1 October 2016

नारी


मानस तो बनै बिचारा कहैं  बीघनों  क़ी जड़ नारी 

बतावें वासना छिपाने को चोट कामनी क़ी हो न्यारी 
योग ध्यान करनीया  नारद पूरा योगी गया जताया  
विश्व मोहिनी पै गेरी लार काया मैं काम जगाया 
पाप लालसा डटी ना उसकी मोहिनी का कसूर बताया 
सदियाँ होगी औरत उप्पर हमेशा यो इल्जाम लगाया 
आगा पाछा देख्या कोन्या सही बात नहीं बिचारी ||
कीचक बी एक हुआ बतावें विराट  रूप का साला 
दासी बणी द्रोपदी पै दिया टेक पाप का छाहला 
अपनी बुरी नजर जमाई करना चाहया मुंह काला 
भीम बलि नै गदा उठाई जिब देख्या जुल्म कुढाला
सारा राज पुकार उठया था नौकरानी क़ी अक्कल मारी ||
पम्पापुर मैं रीछ राम का एक बाली बेटा होग्या रै 
सुग्रीव क़ी बहु खोस लई बीज कसूते बोग्या रै 
गेंद बना दी जमा बीर क़ी उसका आप्पा खोग्या रै 
ज़मीन का हक़ खोस लिया मोटा रास्सा होग्या रै 
सबते घनी सताई जावै घर मैं हो चाहे कर्मचारी ||
पुलस्त मुनि का पोता हांगे मैं पूरा मगरूर था 
पंचवटी तैं  सीता ठा कै   घमंड नशे मैं चूर था 
सीता बणी कलंकिनी थी धोबी का वचन मंजूर था 
उर्मिला का तप फालतू था जिकरा चाहिए जरूर था 
झूठी श्यान क़ी बाली चढ़ाई रणबीर या सबला नारी ||
     

Friday, 30 September 2016

NO ONE HARYANA


दुनिया रूक्के देरी हरयाणा घनी तरक्की करग्या रै ||
सब चीजां के ठाठ लग्गे कोठा नाज का भर ग्या   रै|| 
जीरी गिन्हूं कपास अर इंख की खेती बढती जावै सै 
देश के सुब्याँ मैं नंबर वन यो  हरयाणा का आवै सै 
सड़क पहोंचगी सारै गाम गाम बिजली लसकावै    सै 
छैल गाभरू छोरा इसका लड़न  फ़ौज के म्हें जावै सै 
खेतां के म्हें नया खाद बीज ट्रेक्टर घराटा ठावै सै  
फरीदाबाद  सोनीपत  हिसार पिंजौर मील सिटी लावै सै  
सारे भारत मैं भाइयो इंका सूरज शिखर मैं चढ़ग्या रै ||
ये बात तो भाई हर रोज बता बता दिल डाटे जाँ रै 
इस चकाचौंध के पाछै सै घोर अँधेरा नाटें जाँ रै  
जो भी हुआ फायदा बेईमान आपस मैं बांटें जाँ रै 
भका भका जातां के चौधरी नाड़ म्हारी काँटें जाँ रै 
अपनी काली करतूतां नै जात के तल्ले ढान्पें  जाँ रै 
बोलै जो उनके खिलाफ वे झूठे केसां  मैं फांसे  जाँ रै  
कुछ परवाने भाइयो फिर भी  इनके करतब नापें  जाँ रै 
बिन धरती अर दो किल्ले आला ज्यां तैं मरग्या रै ||
खम्बे मीटर गाम गाम मैं बिजली के इब तार गए 
ओवर सीयर एस सी सब कर बंगले अपने त्यार गए 
चार पहर भी ना बिजली आवै बाट देख देख हार गए 
बिना जलाएं  बिजली के बिल कर कसूती मार गए  
ट्यूबवेल कोन्या चालै ट्रानस्फोर्मार के जल तार गए 
पैसे आल्यां  के ट्यूबवेल थ्रेशर चल धुआं धार  गए 
गरीबां की गालाँ मै दूना कीचड देखो आज भरग्या  रै  ||
गाम गाम मैं सड़क बनाई फायदा कौन उठावैं सें 
बस आवै जावै कदे कदे लोग बाट मैं मुंह बावैं  सें
पैसे आल्यां  के छोरट  ले मोटर साईकिल धूल उड़ावें सें 
टरैक्टर ट्राली सवारी ढोवें मुंह मांगे किराये ठहरावै सें 
सड़क टूटरी  जागां  जागां साईकिल मैं पंकचर हो ज्यावें  सें 
रोड़ी फ़ोडै  पां गरीबां के जो मजबूरी मैं पैदल जावैं सें 
बस नै रोकें कोन्या रोकें तो भाडा गोज नै कसग्या रै ||
बिन खेती आल्यां  का गाम मैं मुश्किल रहना  होग्या
मजदूरी उप्पर चुपचाप  दबंगा का जुल्म सहना होग्या 
चार छः  महीने खाली बैठ पेट की गेल्याँ फहना होग्या 
चीजां के रेट तो बढ़गे प़र पुराने   प़र बहना  होग्या 
फालतू मतना मांगो  नफे  दबंग का नयों  कहना होग्या 
गाम छोड़ शहर पडे आना घर एक तरियां ढहना होग्या 
भरे नाज के कोठे फेर भी पेट कमर कै मिलग्या   रै  ||
खेती करणिया  मैं भी लोगो जात कारगर वार करै 
एक जागां बिठावै  गरीब अमीर नै ना कोए विचार करै 
किसान चार ठोड बँट लिया कैसे नैया इब पार तिरै  
ट्रैक्टर आले  बिना ट्रैक्टर आल्यां  की या  लार फिरै 
इनकी हालत किसी होगी बिलखता यो  परिवार फिरै 
बिना धरती आल्यां का आज नहीं कोए भी एतबार करै  
जात मैं जमात पैदा होगी बेईमान नै खतरा बधग्या रै ||
घन्याँ की धरती लाल स्याही मैं बैंक के महां चढ्गी थी
दो लाख मैं बेच किल्ला चेहरे की लाली  सारी झडगी  थी 
चूस चूस कै खून गरीब का अमीर के मुंह लाली बढगी थी 
कर्जे माफ़ होगे एक ब़र तो फेर कीमत  धरती की बधगी थी 
आगे कैसे काम चलैगा रै   एक ब़रतो इसतैं सधगी थी   
आगली पीढ़ी  के करैगी म्हारी तै क्यूकरै ए  धिकगी थी 
हँसना गाना भूल गए जिन्दा रहवन का सांसा पड़ग्या रै|| 
शहरों का के जिकरा  करूँ  मानस आप्पा भूल रहया यो 
आप्पा धापी माच रही आज पैसे के संग झूल रहया यो  
याद बस आज रिश्वत खोरी  जमा नशे मैं टूहल रहया यो 
इन्सान तै हैवान बनग्या  मिलावट में हो मशगूल रहया यो 
चोरी जारी ठगी बदमाशी सीख भूल सब उसूल रहया यो 
इसी तरक्की कै लागै  गोली पसीना बह फिजूल रहया यो 
फेर   भी रुके मारे तरक्की के कलम  लिखना बंद करग्या रै || 

बख्त पुगाऊँ मैं


कहानी घर घर की--नौकरानी की नजर से  अपने पति को संबोधन 
मरे गरीबी के बोझ तलै , तेरी बी ना कोए पार चलै  
अमीरी हमनै रोज छलै , शरीर  को कसूत सताऊँ मैं ||
दो घरों में जाकै मैं करूँ यो पूरा काम सफाई का 
एक घर डाक्टर का सै दूजा घर वकील अन्यायी का 
दोनों घरों का के जिकरा सै , मेरे पै ना कोए फिकरा सै 
ख़राब सबका जिगरा सै , पेट पकड़ बैठे दिखाऊँ मैं ||
वकील साहब की वकालत बस इसी चलती  बतावैं 
ओला बोला पीसा उन धौरे धंधा कई ढाल का चलावैं  
घर मैं पीटता  घरआली नै , बाहर देखो शान निराली नै 
बेटा ठाएँ हाँडै  दुनाली नै , के के सारी खोल सुनाऊँ मैं ||
डाक्टरनी दुखी कई बर बैठी रोंवती  वा पाई बेबे  
शौतन का दुःख झेल रही कई बै चुप कराई बेबे  
बड्डी कोठ्ठी पर दिल छोट्टे, बाहर शरीफ भित्तर खोट्टे
कुछ तो अकल के बी मोट्टे  , कई बै अंदाज लगाऊं मैं ||
घूर घूर कै देखै मने ना डाक्टर का एतबार बेबे 
उसकी आँख्यां  मैं दीखे यो शैतान हरबार बेबे 
डाक्टर का घर छोड़ दिया , तीजे घर मैं बिठा जोड़ लिया 
काढ मने यो निचोड़ लिया रणबीर यो बख्त पुगाऊँ मैं ||

Wednesday, 21 September 2016

भाजपा और सरकार


बढ़ा महंगाई लूट मचावै, जात धर्म पर लड़वावै
भाई चारा तोड़या चाहवै,चटा जनता नै धूळ रही।।
अम्बानी और अडाणी की मातहत है सरकार म्हारी
ठेकेदारी प्रथा बढ़ा बढ़ा कै जनता की खाल उतारी
कह कै आछे दिन भकारी, नफरत घणी ए फैलारी
बदेशी कंपनी सिर चढ़ारी, तोड़ देश के असूल रही ।।
भ्रष्टाचार बढ़ता जावै व्यापम घोटाला देखो आज
अध्यादेश चौथी बरियां ल्या करै चाला देखो आज
महिला पै करैं थानेदारी, कर कर फरमान जारी
रूढ़िवाद की बणी प्रचारी, पकड़ बात ये तूल रही।।
विकास जनता का कहते तिजूरी भरैं अम्बानी की
सब्सिडी खत्म गरीबों की , बढ़ा दई अडाणी की
दलित पर बढ़ मार रही, महिला खड़ी पुकार रही
बढ़ क्यों अत्याचार रही, राज नशे मैं टूहल रही।।
आच्छे दिनों का सपना के बेरा कित खोग्या रै
मजदूर किसान कर्मचारी घणा दुखी होग्या रै
बरोने आला रणबीर रै, लिखता सही तहरीर रै
मामला घणा गंभीर रै, भाई चारा जमा भूल रही ।।

Saturday, 17 September 2016

अंध विश्वास

भक्षक बणकै रक्षक आगे देश का सत्यानाश होवैगा ||
आस्था के नाम के उप्पर अंध विश्वास इतिहास होवैगा ||
डैमोक्रेसी म्हारी पै कसूता हमला बोल दिया भारत मैं 
बिदेशी पूँजी ताहिं दरवाजा पूरा खोल दिया भारत मैं 
मिलिटरी अड्डा बण्या भारत मुश्किल अहसास होवैगा ॥ 
आस्था के नाम के उप्पर अंध विश्वास इतिहास होवैगा ॥  
विकास का नारा लाया मीडिया खरीद लिया पूरा देखो 
अमीरां आगे टेक दिए गोड्डे किसान बनाया जमूरा देखो 
मारा मारी और महंगाई बढी यो मुश्किल विस्वास होवैगा ॥ 
आस्था के नाम के उप्पर अंध विश्वास इतिहास होवैगा ॥  
बहुविविधता हिंदुस्तान की पै या तलवार  लटका दई 
बीफ गऊ और गीता ऊपर देश की जनता भटका दई
कश्मीर भी  पढण बिठा दिया यो और बदहवास होवैगा ॥ 
आस्था के नाम के उप्पर अंध विश्वास इतिहास होवैगा ॥  
सामाजिक सुरक्षा की धज्जियाँ हर रोज उडन लाग रही 
महिला अत्याचार बढे देखो दलित कै आ रोज झाग रही 
रणबीर बरौने आला कहै हावी समाज पै बदमाश होवैगा ॥ 
आस्था के नाम के उप्पर अंध विश्वास इतिहास होवैगा ॥ 

Wednesday, 14 September 2016

भगत सिंह हर के सपने


जिन सपन्यां खातर फांसी टूटे हम मिलकै पूरा करांगे ।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
सबको मिलै शिक्षा पूरी यही तो थारा विचार बताया
समाज मैं इंसान बराबर तमनै यो प्रचार बढ़ाया
एक दूजे नै कोए ना लूटै थामनै समाज इसा चाहया
मेहनत की लूट नहीं होवै सारे देश मैं अलख जगाया
आजादी पाछै कसर रैहगी हम ये सारे गड्ढे भरांगे।।
फुट गेरो राज करो का गोरयां नै खेल रचाया था
छूआ छूत पुराणी समाज मैं लिख पर्चा समझाया था
समाजवाद का पूरा सार सारे नौजवानों को बताया था
शोषण रहित समाज होज्या इसा नक्शा चाहया था
थारे विचार आगै लेज्यावांगे हम नहीं किसे तैं डरांगे।।
नौजवानो को भगत सिंह याद आवै सै थारी क़ुरबानी
देश की खातर फांसी टूटे गोरयां की एक नहीं मानी
देश की आजादी खातर तकलीफ ठाई थी बेउन्मानी
गोरयां के हाथ पैर फूलगे जबर जुल्म करण की ठानी
क्रांतिकारी कसम खावैं देश की खातर डूबाँ तिरांगे।।
बहरे गोरयां ताहिं हमनै बहुत ऊंची आवाज लगाई
जनता की ना होवै थी सुनायी ज्यां बम्ब की राह अपनाई
नकाब फाड़ना जरूरी था गोरे खेलें थे घणी चतुराई
गोरयां की फ़ौज म्हारी माहरे उप्पर करै नकेल कसाई
रणबीर कसम खावां सां चाप्लूसां तैं नहीं घिरांगे।।

निभाई

आज ही शहीद भगत सिंह पर रचित एक रागनी::
भगतसिंह नै अपनी निभाई ईब हम अपनी निभावांगे ।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
इंसानियत भूलकै समाज हैवानियत कान्ही चाल पड़या
शोषण रहित समाज का सपना चौराहे पै बेहाल खड़या
थारा संगठन जिस खातर लड़या उस विचार का परचम फैहरावांगे।।
तेईस साल की कुल उम्र चरों कान्ही तैं इतना ज्ञान लिया
बराबर हों इंसान दुनिया के मिलकै तमनै ब्यान दिया
मांग महिला का सम्मान लिया थारी क्रांति का झंडा लैहरावांगे।।
हंसते हंसते फांसी चूमगे इंकलाब जिंदाबाद का नारा लाया
बम्ब गैर कै एसैम्बली मैं नारा अंग्रेजां कै था याद दिलवाया
मिलकै सबनै प्रण उठाया गोरयां नै हम बाहर भजावांगे।।
जेल मैं पढी किताब के थोड़ी नोट किया सब डायरी मैं
आतंकवादी का मतलब समझां फर्क समझां क्रांतिकारी मैं
कहै रणबीर बरोने आला घर घर थारा सन्देश लेज्यावांगे।।
11.9.2016

एक शर्त

भगत सिंह ने आखिरी ख़त में अपने मन के विचार किस प्रकार से 
रखे एक रागनी के माध्यम से कवि ने क्या बताया भला :
टेक:
एक शर्त पर रहूँ जिन्दा देश मैं घूमूं आजादी तैं पूरी।।
पाबंदी ना लगै कोए बचाऊँ देश नै बर्बादी तैं जरूरी।।
1
हम क्रांतिकारी प्रतीक बने आज हिंदुस्तानी क्रांति के
क्रांतिकारी आदर्श आगै ल्यागे छोड्डे ना छोर कोए भ्रान्ति के
आदर्श रैहकै फांसी टूटूं जरूरी इसमें ना कोय गरूरी।।
2
जिन्दा रहया तो इतना ऊंचा हरगिज मैं नहीं रैह पाऊँगा
जो मेरे भीतर की कमजोरी उणनै कितने दिन छिपाऊँगा
साहमी आगी तो जनता तैं बनै क्रांति प्रतीक की दूरी।।
3
फांसी चढ़ने की सूरत मैं माताएं बालकां नै बतावैंगी
भगत सिंह बणिये बेटा बढ़ती कतार नहीं थम पावैंगी
इतने क्रांतिकारी हों पैदा गोरयां नै हो जाने की मजबूरी।।
4
न्यों लिख्या ख़त मैं काम मानवता का बाकी रैहग्या दखे
आजादी तैं जिन्दा रैह पाता तो मैं पूरा करता कैहग्या दखे
रणबीर उस पल की बाट कैहग्या चढ़ावै सै शरूरी।।

भगत सिंह तेईस साल का

भगत सिंह तेईस साल का यो नौजवान हुया क्रांतिकारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
नौजवान सभा बनाकै सारे क्रन्तिकारी एक मंच पै आये 
गोरयां की गुलामी खिलाफ पूरे देश मैं अलख जगाये 
आजाद राजगुरु सुखदेव पड़े थे गोरयां पै भारी।1।
गोरयां नै आतंकवादी ये सारे क्रांतिकारी बताये दखे
म्हारी आजाद सरकारां नै नहीं ये इल्जाम हटाये दखे
देखी म्हारी सरकारां की आज पूरे देश नै गद्दारी।2।
फांसी का हुक्म सुनाया सारे देश नै विरोध करया था
यो विरोध देख कसूता अंग्रेज बहोत घणा डरया था
एक दिन पहलम फांसी तोड़े जनता नै भरी हूंकारी ।3।
इंसानी समाज का सपना भगत सिंह हर नै लिया यो
गोरे गए ये देशी आगे सपन्यां पै ध्यान नहीं दिया यो
कहै रणबीर बरोने आला म्हारै थारी याद घणी आरी ।4।

चोट

चोट
या चोट मनै ,गई घोट मनै,गई फिरते जी पै लाग
ईब खेलूं मैं खूनी फाग।।
चाला होग्या गाला होग्या क्यूकर बात बताऊँ बेबे
इज्जत गंवाई चिंता लाई क्यूकर ज्यान बचाऊँ बेबे
डाकू लुटेरे फिरैं घनेरे क्यूकर गात छिपाऊं बेबे
देख अकेली करी बदफेली क्यूकर हालात बताऊँ बेबे
ना पार बसाई नहीं रोटी भाई मेरै सुलगै बदन मैं आग
ईब मैं खेलूं खूनी फ़ाग ।।
के बुझेगी भाण राहन्दे काटूँ दिन मर पड़कै हे
दिन रात परेशान हुई मैं रोऊं कोठे मैं बड़कै हे
बात बणी घणी कसूती मेरे भीतर मैं रड़कै हे
रामजी किसा खेल रचाया सोचूँ खाट मैं पड़कै हे
ये उल्टा धमकावैं मनै कुलटा बतावैं उसनै कहैं ये बेदाग
ईब मैं खेलूं खूनी फ़ाग ।।
जिस देश मैं नहीं करते सही सम्मान लुगाई का
उस देश का नाश लाजमी जड़ै अपमान लुगाई का
सारी उम्र भज्या रामजी नहीं भुगतान दुहाई का
घणा अष्टा बना दिया सै यो इम्तिहान लुगाई का
मैं तो मरली दिल मैं जरली ल्याऊं नाश जले कै झाग
ईब मैं खेलूं खूनी फाग।।
राम गाम सुनता होतै हम कति ज्यान तैं मरली
औरत ईब्बे और सताई जा या मेरे दिल मैं जरली
सबला लूटी अबला लूटी बना दासी घर मैं धरली
इबै तो और सहना होवैगा रणबीर के इतने मैं सरली
होंठ सीऊं कोण्या चुप जीऊँ कोण्या तेरा करूं सामना निर्भाग
ईब मैं खेलूं खूनी फ़ाग ।।

महिला समिति

महिला समिति की महिलाएं अपनी मांगों के लिए डी. सी.की कोठी
 पर धरना देती हैं । उनकी नेता भरतो को बुलाने आती हैं ।भरतो 
तैयार होकर चलती है तो मौजी उसका पति पूछता है कहाँ जा रही
 हो। भरतो इस सवाल जवाब में क्या कहती है भला:
मौजी:
तैयारी करकै कित चाली यो बालक इब्बे याणा सै।।
भरतो: 
महिला समिति का धरणा उसके म्हं मनै जाणा सै।।
मौजी:
इबकी गई कद आवैगी यो खाणा किन्नै बनाणा सै।।
भरतो:
रोटी पोकै धरदी मनै बस घाल कै तनै खाणा सै।।
मौजी:
के काढैगी धरने पै ये उल्टी सीख सिखावैं सैं
या राही तो ठीक नहीं तनै इसपै कौन ले ज्यावैं सैं
मनै नहीं बेरा लाग्या कौन ये पाठ पढ़ावैं सैं
पाछले दो मिहने होगे बढ़ चढ़ कै बात बणावैं सैं
घरां रैहना जरूरी तेरा हमनै टूर पै जाणा सै।।
भरतो:
सारी उम्र मैं मेरा तो पहला बुलावा आया यो
महिला समिति बणी सै उसनै कदम उठाया यो
औरत नै जागना चाहिए पूरी ढालाँ समझाया यो
बिजली पाणी की खातर धरणा आज लगाया यो
इतनी सी मोहलत दे दे मनै तो वचन पुगणा सै।।
मौजी:
दिल की बूझै मेरी तो आछी लागी ये बात नहीं
कित धक्के खावैगी तों पहचानै क्यों औकात नहीं
न्यों घर छोड़ कै जाणा दीखै आछी शुरुआत नहीं
कहण मानले यो मेरा बस इतना ही समझाणा सै।।
भरतो:
कई पढी लिखी ये बेबे बढ़िया बात बतावैं सैं
बीर नै आगै आणा चाहिए इस तरियां समझावैं सैं
बीर मर्द नै ये गाड्डी के पहिये दो दिखावैं सैं
घर का संकट कम होज्या न्यों धरणा आज लगावैं सैं
रणबीर सिंह संग मिलकै घर घर अलख जगावैं सैं ।।