Saturday, 15 March 2014

वोट देवां

चमेली पड़ौस की महिलाओं के बीच दोपहर को बात करती है ।
सभी महिलाएं महंगाई के बारे में बताती हैं । लैक्सन आगे पर महंगाई फेर
बी कम नहीं हुई । चमेली क्या कहती है ----
वोट देवां  जिब राखते हम सही गलत का ध्यान नहीं ॥
नाश करैंगे वे नेता जिनकै धोरै आज ईमान नहीं ॥
नजर घुमा कै देख लियो नित पेड़ झूठ का फलै सै
सच का तेल घलै दीवे मैं तो यो ज्ञान उजाला जलै सै
सच के दायरे मैं रहकै मन नहीं हिलाया हिलै सै
सच पै खड्या रहवै उसनै दिलां मैं जगां मिलै सै
विचार करै बुद्धि चेतन बिन चेतन मिलै ज्ञान नहीं ॥
भगत सिंह का नाम सुण्या धूम मचाई हिन्द म्हारे मैं
तेईस बरस का फांसी चढग्या सोचो कदे इस बारे मैं
सुणो आसान बात नहीं होती या ज्यान देनी आरे मैं
घर बार कति छोड़ दिया उसनै देश के प्रेम इशारे मैं  
म्हणत करकै दौलत पैदा करां समझे जां इंसान नहीं ॥
साच्ची बात कहूँ थारे तैं हम सच्चाई मंजूर करावैं
हाथ जोड़ कहूँ थारे तैं सच का साथ जरूर निभावें
सच्चाई पै चलना चाहिए सच्चाई का घर दूर बतावैं
बनावटी मिलावटी की जागां इंसानियत का नूर खिलावें
सच्चा सौदा ए बिकवावेंगे झूठ की चलै दुकान नहीं ॥
वो मानस ना किसे काम का जो सच पै सिर धुनै नहीं
अपनी कमाई का हिसाब वो बैठ कै कदे बी गिनै नहीं
वोहे मानस सदा सुख पावै सै जो बात झूठी सुनै नहीं
आज जो ठीक नहीं वो उस परम्परा का जाल बुनै नहीं
छुआछात की जो बात करै वो इंसान की संतान नहीं ॥

CHUNAV

हरयाणा  चुनाव के मुदे जिक्र कोए ना करता रै ॥
सबकी सेहत ठीक रहवै हाँ भरतें क्यूँ डरता रै ॥
आच्छी शिक्षा मिलै सबने  इस पर कोए विचार नहीं
पढ़ाई पढन बिठा राखी इसतैं बड़ा अत्याचार नहीं
क्वालिटी शिक्षा का नहीं कोए सही रास्ता उभरता रै॥
स्वास्थ्य सेवाएं प्राइवेट मैं गरीब जा नहीं पावै यो
सरकारी ढांचा बैठ लिया आज गरीब किट जावै यो
मुफ्त इलाज का दावा मरीज बिना इलाज मरता रै॥
बिना नौकरी लम्पट बनगे अपराधों का औड़ नहीं
पीसा चलै कै सिफारिस हाँडो जिसका जोड़ तोड़ नहीं
जनतंत्र पढण बिठाया भ्रष्ट का ना पेटा भरता रै ॥
नाज सड़ै गोदामां मैं जनता भूख तैं बिलख रही
अमीरी गरीबी पै हँसै लुआ विकास के तिलक रही

चुनाव अजेंडा जनता क्यूँ नहीं आज उतरता  रै ॥

विकास कहूँ या कहूँ तबाही

विकास कहूँ या कहूँ तबाही
विकास कहूँ या कहूँ तबाही , बात मेरी समझ नहीं आई,
हुई क्यों गामां की इसी छिताई , दिल्ली के गाम चर्चा मैं आये ॥
दिल्ली का विस्तार हुआ तो अनेक गाम इसमें आये थे
धरती अक्वायर करी इनकी घने सब्ज बाग़ दिखाए थे
बहोत घर बर्बाद हुए , जमा थोड़े घर आबाद हुए
पीकै दारू कई आजाद हुए , चपेट मैं युवा लड़के आये॥
दिल्ली तैं कोए सबक लिया ना ईब हरयाणा की बारी
एन  सी आर  के नाम तैं इसकी बर्बादी की तैयारी
विकास पर कोए चर्चा ना , आज पूरा पटता खर्चा ना
इसपै लिख्या कोए पर्चा ना , बीस लाख एक किल्ले के लाये॥
नशे का डूंडा पाड़  दिया ये नौजवान चपेट मैं आये
फ्री सैक्श के खोल दरवाजे युवक युवती भरमाये
हाल करे कसूते लूटेरे नै , मचाई लूट इनै चौफेरे  नै
बाँट जात पात पै कमेरे नै , नंबर वन के नारे लगाये ॥
ईको अर जेंडर फ्रेण्डली विकास समता साथ ल्यावै
ना तो दिल्ली जैसे खाग्या न्यूए एनसीआर इसनै खावै
बहस विकास ऊप्पर चलावां , नया  हरयाणा किसा  बणावां
रणबीर नक्शा मिलकै खिंचावाँ ,कैसे यो हरयाणा बच पाये ॥

महिला के अपने पति से सवाल

महिला के अपने पति से सवाल

सारे एकसी बात करैं किसकी मानूं बात पिया ॥
वोट लियाँ पाछै कई मारते कसूती लात पिया ॥
म्हारी पढ़ाई उप्पर सब अपने रंग मैं बोलैं
म्हारी कैड़ खड़े होकै थोड़े से बात सही  तोलैं
ये बालक नयों ए घूमैं  कोए नहीं पूछै जात पिया ॥
बीमार होज्यां तो इलाज करवाना मुस्किल होवै  
झाड़ फूंक पूजा पाजा गरीब इलाज उड़ै टोहवै
अन्धविसवासी कहै बतावैं म्हारी ऑकात पिया ॥
बिना नौकरी पैर भिड़ावैं कला धन खींच रह्या
क्यों खेवनहार आँख इस कंही तैं मींच रह्या
बेकार मानस नै बरतै खूबै या जात पात पिया॥
अमीर गरीब की खाई खुबै आज बढ़ायी देख
राम का रोल्ला नहीं सै नीति इसी ए बनाई देख

रणबीर बतावै हमनै कैसे कटै या रात पिया ॥

पति पत्नी में लेफ्ट और आप की रैल्ली पर बहस

पति पत्नी में लेफ्ट और आप की रैल्ली पर बहस
महिला --लेफ्ट पार्टियां की रैल्ली हिसार मैं दखे उसमें जाना चाहूँ सूँ
पुरुष -----आप पार्टी की रैल्ली रोहतक मैं दखे तनै मैं बताना चाहूँ सूँ
महिला    के लेगा आप मैं जाकै यो तो भानमती का कुनबा बताते हैं
             बिना आइडियोलॉजी की पार्टी अपनी को केजरी जताते हैं
             कुछ बात सही सैं उनकी पर महिला इशू तो नहीं उठाते हैं
            दलित के सवालों पर भी अपने पत्ते नहीं खोल दिखाते हैं
            खाप पर सही साफ समझ नहीं मैं न्यूँ समझाना चाहूँ सूँ ॥
  पुरुष   लेफ्ट देख लिया बंगाल मैं तीस साल का राज करया
             ईमानदारी बरती पूरी सै पर आम का नहीं पेट भरया
             धरती बंटी सबतैं फालतू पर मजदूर नै क्यूँ ना सरया
             ममता नै क्यूँ कूँ मैं लाया कुर्सी पर तैं क्यूँ तार गिरया
 लेफ्ट हरयाणा मैं कमजोर सै ज्यां आप नै ल्याना चाहूँ सूँ ॥
महिला    किते की ईंट किते का रोड़ा भानमती नै कुनबा जोड्या
             घनी तरियां की सोच के मानस इस बात नै मन तोड़या
             कई जगां एक दूजे कै  सर ठीकड़ा आपस के मैं फोडया
              रोहतक जन सेवा संसथान नै इस कान्ही मुंह मोड़या
              यो जनसंघी पक्का सै पिया साच साच दिखाना चाहूँ सूँ॥
पुरुष        लेफ्ट की रैली तैं आप की रैल्ली या घनी बड्डी होवैगी  
              फेर बताऊँ तनै  माथा पकड़ कै साँझ नै आकै रोवेगी
              मेरे जी नै रोजाना तूँ बीज बिघन के संतरा बोवेगी
              लेफ्ट का झूठा गुणगान करकै तूँ झूठे झगडे झोवैगी
               लेफ्ट का इबै ब्योंत नहीं सै ज्यां आप अपनाना चाहूँ सूँ॥
महिला     और तो मनै बेरा ना पर संघर्ष मैं रोज ये देखे बताऊँ
              सही विवेकशील बात करैं ये मैं दिल खोलकै  दिखाऊँ
              महिला दलित के हिमायती कितने किस्से गिनवाऊं
              त्रिपुरा केरल बंगाल मैं आवैंगे चाल हिसार समझाऊँ
              कुलदीप कहै आप की छाप दिल तेरे तैं हटाना चाहूँ सूँ॥
 

      

नकली झाड़ू असली झाड़ू

नकली झाड़ू असली झाड़ू
असली झाड़ू नकली झाड़ू की फर्क समझ नहीं आई
एक झाड़ू केजरी लेरया असली झाड़ू पाछे नै धिकाई
नकली झाड़ू रोहतक मैं बैठ कै नै आयी सफारी मैं
असली झाड़ू हिसार मैं आयी टूटी फूटी सवारी मैं
रैली तैं उलटे जाते देखे जिब मनै फर्क दिया दिखाई
पाँच सीटों मैं तैं दो पर चौखे पीसे आले छांटे बताये
बिना दो नंबर के ये पीसे एक मैं किस ढालाँ कमाए
हिसार कुरुक्षेत्र जूत बज्या टिकट सही कै ना थयाई
कितै की ईंट कितै का रोड़ा केजरी  नै कुनबा जोड़या
केजरीवाल नै असल झाड़ू तैं बूझो क्यूँ मुंह मोड़या
बिना आइडियोलॉजी ना कोए पार्टी लाम्बी चल पायी
मोदी मोदी करैं अमीर हम उनकी बहका मैं आवैं
किसानो सोच लियो बिना असली झाड़ू ना काबू पावैं
कांग्रेस झाड़ू आड़ू भजपा झाड़ू मानस मार बताई


भाजपा

भाजपा हुई सै हड़खाई भाई मोदी मोदी पुकारै रै॥
मोदी अमरीका का टोडी किसान नहीं बिचारै रै॥
अटल बिहारी माफी मांगकै जेल तैं बाहर आये थे
गोडसे आर एस एस का जिनै गांधी मार गिराए थे
मंदिर मस्जिद के झगडे अपने हथियार सँवारै रै॥
देशी की बात करै बदेशियाँ तैं हमेश हाथ मिलाये रै
बदेशी लूट के खोले दरवाजे हाम समझ ना पाये रै
दंगे करवा हिन्दू मुस्लिम के घने मानस या मारै रै॥
इतिहास गवाह सै इसका देश का या नाश करैगी
डंडे गेल्यां हाँकैगी सबनै अम्बानी का पाणी भरैगी
भाजपा नै रोको किसानो फासीवाद खड्या द्वारै रै॥
आज कही याद राखियो याद कमजोर म्हारी देखो
भजपा आगी तो मुशीबत होज्या सबनै भारी देखो
सोच समझ कै वोट गेरियों भाजपा जरूरी हारै रै॥

Thursday, 6 February 2014

लिए दिल नै डाट

एक  परिवार गरीबी में मजदूरी करके  है ।
रमेश अपनी पत्नी से बातचीत करता है ।
 कवि  के शब्दों में ___

लिए दिल  नै  डाट , मतना देखै बाट
घर बच्या ना खाट , खोस लेगी महँगाई ॥
हो लिए  सब तरां तैं तंग
इब होगे सैं मरने के ढंग
मारैगी या  बीमारी , इलाज हुया भारी
देख किसी  लाचारी , म्हारे साहमी आई ॥
बर्बादी डाटी नहीं डटी सै
ईज्जत सब तरियां घटी सै
तीन मैं दो मरगे , आँख बंद करगे
घने लाले पड़गे , नहीं सुणी दुहाई ॥
\होगी म्हारी जिंदगी पैमाल
महंगाई नै करे सां बेहाल
नहीं रहे सुखी , सुण सूरज मुखी
कर दिए दुखी , कसूती फांसी लाई ॥
किसकै जाकै टक्कर मारां
चढ्या कर्जा क्यूकर तारां
राह कोए बताओ , सूली पै ना चढ़ाओ
कुछ तरस खाओ , रणबीर करो सुनाई ॥ 

Monday, 3 February 2014

विक्रम और चमेली

विक्रम और चमेली प्रेम विवाह करते हैं । घरवाले नाराज थे । मगर भगत सिंह से काफी प्रभावित हुए । समाज सुधर के काम में जुट गए । लेकिन विक्रम आप में जाने का मन बनता है और दिल्ली चला जाता है । चमेली गाओं में अकेली रह जाती है । एक दिन क्या लिखती है चिठ्ठी में ---
आप मैं चाल पड़या दिल तोड़ कै नयी नवेली का ॥ 
दोनों नै क्रान्ति की कसम खाई जी लागै ना अकेली का ॥ 
मेरे दिल पै  के गुजरी सै थाम मरदां नै के बेरा 
करवट बदलतें रात चली जा होज्या न्यूयें सबेरा 
बिना तेरे साथ विक्रम यो घर भूतां का डेरा 
तेरे बिन दिल मैं अँधेरा के सपने की हवेली का ॥ 
दिल की दिल मैं रहै थारे बिन कैसे हो मन चाह्या 
असली रही बीच छोड़ चल्या दूजा रह अपनाया 
मेरे वो बख्त याद आवै जो मनै थारी साथ बिताया 
संघर्ष मैं जी लगता कोन्या मन मैं लागै ना उम्हाया ॥ 
क्रांति तैं भरी सै काया समझ हाल तूँ चमेली का ॥ 
हाली बिन धरती सूनी बिना सवार के घोड़ी 
विचार मेल बिना कलह रहै घनी नहीं तो थोड़ी 
मनै सोची म्हारी या धुर तक चलैगी जोड़ी 
आप मैं दम कडै सै क्रांति विचार ना धेली कोड़ी  
बिन परखनिया देख किरोड़ी होज्या सस्ता धेली का ॥ 
आप मैं पार पड़ै कोन्या देख लिए गुण ग़ाकै नै 
याद रखिये बात मेरी कदे भूलै आप मैं जाकै नै 
राजी खुसी की खबर दिए मेरी चिठ्ठी नै पाकै नै 
जै उल्टा आवैगा तो मैं गाऊंगी गीत उम्हा कै नै 
रणबीर मतलब  खुलैगा इस अनखुली पहेली का ॥ 

पछतावैगा

चमेली और विक्रम मुनक गाओं के रहने वाले हैं । साक्षर भारत में काफी जोर शोर से काम किया ।  अब ज्ञान विज्ञानं समिति के सदस्य हैं । भगत सिंह के सपनो का भारत बनाने का उनका सपना है । अचानक आप की दिल्ली में जीत से विक्रम काफी प्रभावित हो जाता है और मन बना लेता है आप में जाने का । चमेली मना  करती है और क्या कहती है विक्रम को भला ---
मतना आप मैं जावै , चमेली न्यूँ  समझावै , तेरी समझ ना आवै 
                                                           तूँ पाछै पछतावैगा ॥ 
जनता नै दुखी होके नै बी जे पी कांग्रेस ढहा दई हो 
उम्मीद हम सब की जीत नै चारोँ कांही बढ़ा दई हो 
कांग्रेस बी जे पी भ्रष्टाचार की ढकनी या उठा दई हो 
जनता की ताकत कितनी दोनूंआं तैं सै दिखा दई हो 
दबाव हम बनावैं , सही रास्ता दिखावैं , भीतर तो घुट ज्यावै 
                                                           दबाव काम आवैगा ॥ 
भ्रष्टाचार की जड़ गहरी लड़ना इतना आसान कड़ै 
बाजार की व्यवस्था जड़ सै इब करना घमासान पड़ै 
व्यवस्था बदलै ना जब तक कठ्ठा हो ना किसान लड़ै 
शाषक हमनै पीटण खातर  नए नए तीर कमान घड़ै 
नब्बै दस का रोला सै , शाषक नहीं बोला सै ,संस्कृति का लाठोला सै 
                                                           रोज साँस चढावैगा ॥ 
जात  गोत  नात मजहब मैं किसान कसूते बाँट दिए
मुजफ्फर नगर मैं पुरानी एकता के ये पर काट दिए
साम्प्रदायिकता के सांटे गेल्याँ सबके बैल हांक दिए
जाट किसान मुस्लिम किसान न्यारे न्यारे छाँट दिए
याद छोटू राम आवै , कूण आज धीर बंधावै ,हटकै प्रेम बढ़ावै
                                                          एकता हटके ल्यावैगा ॥
भाई अर बहनो सुणल्यो आज का दौर कसूता घना
बेचैनी बढ़ती आवै देखो शासक वर्ग तो नपूता घना
बेचैनी का फायदा ठाकै डाकू बनया चाहवै सपूता घना
डैमोक्रेसी खतरे मैं गेरदी शासक हुआ कपूता घना
आज खिंचाई रघबीर , भारत की तस्वीर , गरीब की तहरीर
                                                        हरियाणे नै जगावैगा ॥



Saturday, 1 February 2014

चौधरी छोटू राम


पंजाब मैं हिन्दू मुस्लिम सिख की पूरी एकता बनाई तनै ॥
कट्टर वादियां तैं उन दिनां मैं थी जमकै धुल चटाई तनै ॥
बीस मैं कांग्रेस छोड़ कै या यूनियनिस्ट पार्टी बनाई तनै ॥
पूरे पंजाब मैं यूनियनिस्ट पार्टी की लहर  चलाई तनै ॥
महाजन संस्कृति की उन दिनाँ बही की लूट मिटाई तनै ॥
गरीब किसान की जमीन कुड़की होवण तैं बचाई तनै ॥
हजारों हजार नौजवानां की फ़ौज मैं भर्ती कराई तनै ॥
भाखड़ा डैम बनवा करकै भाखड़ा नहर लिकड़वाई तनै ॥
दोनों महायुद्धां मैं गोरयां की कहैं गलत मेर कटाई तनै ॥
कुछ भी हो छोटू राम पंजाब की सोयी जनता जगाई तनै ॥
कांग्रेस और मुस्लिम लीग तैं लेकै टक्कर दिखाई तनै ॥
वकालत के बदले तौर तरीके नयी रीत निभाई तनै ॥
पाकिस्तान ना बनने देवां कठ्ठे होकै आवाज उठाई तनै ॥ 

Friday, 31 January 2014

किसान के शोषण के बारे एक गीत (रागनी )

किसान के शोषण के बारे एक गीत (रागनी )

मौलड़ कहकै तनै तेरा शोषण साहूकार करै ॥
मौलड़ कोन्या करम तेरे तैं तूँ ना इंकार करै ॥

भैंस खरीदी तनै जिब धार काढ़ कै  देखी  थी
बुलद खरीदया तनै जिब खूड बाह कै देखी थी
वैज्ञानिक ढंग अपनाये कौन नहीं स्वीकार करै ॥

हल की फाली तनै अपने सहमी तयार करायी
पिछवा बाल की महत्व तनै ध्यान मैं ल्याई
पूरी खेती बाड़ी मैं तर्क विवेक तैं सब कार करै ॥

एक  क्वींटल गंडे की तनै कितनी कीमत थ्यायी
इसकी बैठ कै तनै  कद  विवेक तैं हिस्साब लगाई
शीरा अर खोही कितनी थी नहीं खाता तैयार करै ॥

तनै मौलड़ कह्वानीया ना चाह्ता हिस्साब सीखाना \
हमनै तो चाहिए कमेरे म्हारी लूट का खाता बनाना
रणबीर बरोने  आला लिखकै तनै होशियार करै ॥

Saturday, 25 January 2014

sindhu ghati

सिन्धु घाटी
सुणले करकै ख्याल दखे, ये गुजरे लाखां साल दखे
सिंधु घाटी का कमाल दखे, यो गया कड़ै लोथाल दखे,
यो करकै पूरा ख्याल दखे, खोल कै भेद बतादे कोए।।
सुसुरता नै देश का नाम करया, वागभटट नै चौखा काम करया
ब्रह्रा गुप्त नै हिसाब पढ़ाया, आर्यभटट जीरो सिखाया
नालन्दा नै राह दिखाया, तक्षशिला गैल कदम बढ़ाया
तहलका चारों धा मचाया, ये गये कडै़ समझादे कोए।।
मलमल म्हारी का जोड़ नहीं, ताज कारीगिरी का जोड़ नहीं
हमनै सबको सम्मान दिया, सह सबका अपमान लिया
ग्रीक रोमन को स्थान दिया, भगवान का गुणगान किया
इसनै म्हारा के हाल किया, या सही तसबीर दिखादे कोए।।
दो सौ साल राजा म्हारे देस के, बदेसी बोगे बीज क्लेश के
फिरंगी का न्यों राज हुया, चिड़ी का बैरी बाज हुया
सारा खत्म क्यों साज हुआ, क्यों उनके सिर ताज हुया
क्यों इसा कसूता काज हुया, थोड़ा हिसाब लगादे कोए।।
लाहौर मेरठ जमा पीछै नहीं रहे, म्हरे वीर बहादुर नहीं डरे
फिरंगी देस के चल्या गया, कारीगर फेर बी मल्या गया
र्म जात पै छल्या गया, संविधा म्हारा दल्या गया
क्यों इसा जाल बुण्या गया, रणबीर पै लिखवादे कोए।।







 \\\\\\\\\\\\\\\\\\\

Friday, 24 January 2014

kon kise

कोण किसे की गेल्यां आया कोण किसे की गेल्यां जावै
सोचै के साथ जा शमशान घाट पर तैं  जब उल्टा आवै
दि न सलीके से उगा रात ठिकाने से रही
दोस्ती अपनी भी कुछ रोज ज़माने से रही
चाँद लम्हों को ही बंटी हैं मुसव्विर ऑंखें
\जिंदगी रोज तो तस्वीर बनाने से रही
इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी
रात जंगल में कोई शमअ जलने से रही
निदा फाजली

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
किश्ती के मुसाफिर ने समुन्दर नहीं देखा
बेवक्त अगर जाऊँगा सब चोंक पड़ेंगे
इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा
बशीर बद्र
ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुमने मेरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा
पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा

Saturday, 18 January 2014

Raat andheree

गरीब किसान
किसके आगै जाकै रोउं मैं चारों तरफ अन्धेरा दीखै रै
रात अन्धेरी का मनै नहीं होन्ता ईब सबेरा दीखै रै
दो भाई दो बाहण मेरे सैं या पांच किल्ले धरती म्हारी
दोनों भाई करैं सैं पढ़ाई या हाली की मेरी जिम्मेदारी
मेहनत दिन रात पड़ै करनी गर्मी सर्दी खेणी हो सारी
टिड्डी आज्यां कै ओले पड़ज्यां देज्यावैं सारे कै बुहारी
दो भैंस दो बुलध गैल इनकी यो दुखी चितेरा दीखै रै।।
दोनूं भाई पढ़ण खंदाये फिकर सै उनकी पढ़ाई का
बाहण दोनूं मेरी साथ खेत में हा़थ बंटावैं भाई का
कई बोले पढ़ाओ छोरियां नै मत करो काम बुराई का
मेरे मां बाबू चाहवैं दिल तैं करना यो काम भलाई का
छोरियां के ब्याह की चिन्ता दुखी बाबू का चेहरा दीखै रै।।
एक भाई जेबीटी करकै मास्टरजी की नौकरी पाग्या रै
दूजा भाई पहलवानी का पुलिस भर्ती मैं फायदा ठाग्या रै
दखे मनै बहोत घणी खुषी हुई उल्गा सांस मनै भी आग्या रै
पर सिवासण बाहण घरां बैठी यो फिकर घणा खाग्या रै
ये कई जोड़ी जूती टूटली मेल का कोन्या कमेरा दीखै रै।।
उन बख्तां मैं पांच सात पास बालक पाया करते रै
दस बारा साल की छोरी उसकी साथ लगााया करते रै
छो तीन साल पाछै दूसर कै सासरे मैं खंदाया करते रै
अपनी ताकत के हिसाब तैं सब दहेज जुटाया करते रै
रणबीर सिंह छोरी के ब्याह मैं खर्च करना भतेरा दीखै रै।।

Saturday, 4 January 2014

आम आदमी नै या राजनीती खागड़ बनाते देर नहीं लगती / जनता को आम आदमी को नकेल डाल कर रखने की जरूरत है ।  अब यह जनता पर निर्भर करता है कि वह कौनसी नकेल डालती है जात पात की या ईमानदारी की और गुणवत्ता की । 

JANTA


Friday, 3 January 2014

रोहतक का हाल सुनो

रोहतक का हाल सुनो इसमैं जामां नै सिर घुमाया।।
किला रोड का जिकरा करते नहीं खाली स्थान बताया।।

आटो का औड़ रहया नहीं स्कूटी घणी ए घूम रही
मोटर बाईक टेढ़ी मेढ़ी ये भीड़ बीच मैं घूम रही
कारां का नहीं कोए ठिकाणा कडे़ तैं इतना पीस्सा आया।।

साइकिल चलाना मुश्किल सै कोए बी साइड मारज्या
पैदल का कोए खाता नहीं कोए बी छोह नै तारज्या
रोजाना रोड एक्सीडैंट होवैं मौत नै अपना खेल रचाया।।

एक्सीडैंट पाछै फिरैं ढूंढते नहीं वैंटीलेटर थ्यावै
सांस उपर नीचै होरी कोए मरीज कित लेज्यावै
वैंटीलेटर के नाम पर प्राईवेट नै जाल बिछाया।।

या वैंटीलेटर की लूट दखे घणे घर उजाड़ देवै
बीस हजार रोज का खर्चा बैलैंस नै बिगाड़ देवै
हाई टैक नै इलाज देखल्यो असमानां पै पहोंचाया।।

Tuesday, 31 December 2013

मुबारक नया साल

मुबारक नया साल 
नए  साल मैं चौखे ब्यौंत आला खूबै काच्चे काटो भाई रै ॥ 
ऑन लाइन पर काम कराओ बढ़िया स्कीम चलायी रै ॥ 
मॉल घने गजब के सब कुछ मिलै एक छत नीचै 
बाहर खड़या गरीब तो अपने खाली पेट नै भींचै 
ब्यौंत आला घरां बैठ करै बुकिंग जहाज हवाई रै ॥ 
अपोलो बरगे फाइव स्टार अस्पताल गजब खोले 
इलाज घना मंहगा करया सुनकै म्हारा हिया डोले 
गरीब मरो सड़ कै नै कहवण की ये मुफ्त दवाई रै ॥ 
एयर कंडीशन्ड जीवन का न्यारा यो संसार बनाया 
स्कूल घर कार अस्पताल सारै इसका जाल बिछाया 
नये साल की आज रात नै जावैगी धूम मचाई रै ॥ 
मुबारक क्यांकि अर किसनै थोडा गम्भीर सवाल 
आप पार्टी आगै ल्याई जनता का सै गजब कमाल 
जनता नै बेचैनी अपनी पूरी दुनिया ताहिं बताई रै ॥ 
सब रंगां का समावेश भारत देश हमारा देश होवै 
जात पात और मजहब का आड़ै ना यो क्लेश होवै 
रणबीर सोच समझ कै करता अपनी  कविताई रै ॥ 

Monday, 30 December 2013

मुबारक नए साल की

मुबारक नए साल की
शाइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया अंतर बढ़ता जाता रै ।
क्यूकर पाटाँ इस अंतर नै नहीं कोए मनै समझाता रै ।
यो शाइनिंग इंडिया बहोत घणी आगै जा लिया बताऊँ मैं
गुड़गामा नया और पुराना देखल्यो ना जमा झूठ भकाऊँ  मैं
नए और पुराने का अंतर रोज मेरे जिस्याँ नै उलझाता  रै ।
पुराने ढाँचयाँ तैं लोग घणे दुखी हो लिए हिंदुस्तान म्हारे के
पुराणी सोच ओछी जूती सै काटै पैरों नैं या किसान म्हारे के
नए ढांचे लूट के बनाये सैं भ्रष्टाचार घुमै सै दनदनाता रै ।
नए साल मैं नयी इबारत जनता लिखनी चाहवै जरूर
जात मजहब तैं उप्पर उठकै या भ्रष्टाचार मिटावै जरूर
लड़ाई लम्बी सै संघर्ष मांगती कति नहीं झूठ भकांता रै ।
सिस्टम एक रात मैं बदलै इसा इतिहास ना तोह्या पावै
सिर धड़ की क़ुरबानी मांगै जिब खरोच या इसकै आवै
मेरा जी तो अंतर कम करने को अपनी कलम घिसाता रै ।

Monday, 16 December 2013

TARK AUR VIVEK KI DUNIYA



Reasoning is one of the major component of Scientific Temper

GHUNGHAT TAR BAGAYA HEY


EVEN TODAY THERE IS GHUNGHAT IN RURAL HARYANA

our heritage

डॉ रणबीर सिंह दहिया

विज्ञानं का पैगाम


MESSAGE OF SCIENCE

अपने हाथ कलम पकड़ो

अपने हाथ कलम पकड़ो
चालाक आदमी फैयदा ठारे , इब माणस की कमजोरी का
घर की खांड किरकरी लागे , कहैं गूँद मीठा चोरी का
भगत और भगवान के बीच , दलाल बैठगे आकै
एक दूसरे की थाली पै , यें राखें नजर जमाकै
सीधी साच्ची बात करैं ना , यें करते बात घुमाकै
झोटे जैसे पले पड़े यें , सब माल मुफ्त का  खाकै
म्हारी जेब पै बोझ डालते , अपनी जीभ चटोरी का||
हम बैठे भगवान भरोसे , ये कहरे हम दुःख दर्द हरैं
यें मंदिर की ईंट चुरा कै अपने घर की नीव धरैं
सारा बेच चढ़ावा खाज्याँ टीका लाकै ढोंग करैं
आप सयाने हम पागल बनाये , पाप करण तैं नहीं डरें
म्हारी राह मैं कांटे बोये , यें फैयदा ठारे धौरी का ||
राम के खातर खीलां फीकी ,यें काजू पिसता खावें
भगवान के ऊपर पंखा कोनी , यें ए सी मैं रास रचावें
मुर्गे काट चढ़ा पतीली , यें निश दिन छौंक लगावें
रिश्वत ले कै राम जी की , यें भगतों तैं भेंट करावें
बड़े बड़े गपौड़ रचें , यें करते काम टपोरी का ||
यें व्रत करारे धक्के तैं , धर्म का डर बिठा कै
खुद पड़े पड़े हुक्म चलावें म्हारी राखें रेल बना कै
टीके लाकै पोथी बांचें , कई राखें झूठे ढोंग रचा कै
'रामेश्वर ' सब अँधेरा मेटो , थाम तर्क के दीप जला कै
अपने हाथ कलम पकड़ो , लिखो इब अंत स्टोरी का ||

tod ho liya

निचोड़ हो लिया
सफ़दर जी की हत्या से निचोड़ हो लिया
हुया हड्खाया राजवर्ग यो तोड़ हो लिया
एक जनवरी साल नवासी मोटा चाला होग्या
हुया हमला सफ़दर ऊपर घायल कुढाला होग्या
हमलावर खुद राज करनीये खुल्ला पाला होग्या
सफ़दर के नाटक का ढंग योतै निराला होग्या
यो राजनीती और हत्या का गठजोड़ हो लिया ||
चारों कूट मैं शोक फैलग्या कूकी दुनिया सारी
गाँव गाँव और शहर शहर मैं दुखी हुए नर नारी
पैरिस लन्दन रोम के अन्दर सदमा था बड़ा भरी
कलाकार था जग मैं नामी थी संस्कृति प्यारी
यो सरकारी चिलत्तर का भन्दा फोड़ हो लिया ||
सफ़दर हाश्मी डस लिया सर्प राज का काला है
अभिव्यक्ति की आजादी का इब तक यो टाला है
राजवर्ग की भाषा बोलो वर्ना मुंह पर ताला है
साच पर से जो पर्दा ठावै उसी ज्यान का गाला है
राजवर्ग सारी जगह का दीखे एक औड हो लिया ||
जल्दी संभलो रचना कारो कला पर यो हमला है
जन पक्ष की कला हमारी ना बिल्कुल ये अबला है
रोंदना चाहते हो तुम जैसे करता हाथी पगला है
हबीब भारती विचार करों क्या कदम हमारा अगला है
वर्ग लुटेरा हत्यारा यो एक ठयोड़ हो लिया ||

salam safdar ko

सलाम सफ़दर को
समाज की खातर मरने आले आज तलक तो मरे नहीं ||
कुर्बान देश पर होने वाले कदे कभी किसी से डरे नहीं ||
सफ़दर की हांसी हवा मैं आज भी न्योंये गूँज रही
चारों धाम था मच्या तहलका हो दुनिया मैं बूझ रही
बैरी को नहीं सूझ रही पिछले गढ़े इब्बऐ भरे नहीं ||
मीडिया मैं जगहां बनाई विडीयो बढ़िया त्यार करी थी
खिलती कलियाँ के महां बात सही हर बार करी थी
जवानी उसकी हुनकर भरी थी गलत काम कदे करे नहीं ||
जितने जीया सफ़दर साथी जीया जमा जी भर कै नै
था लेखक बढ़िया अदाकार नुकड़ रच्या कोशिश कर कै नै
निभाया वायदा मर कै नै जुल्मों से सफ़दर डरे नहीं ||
एक सफ़दर नै राह दिखाई हजारों सफ़दर आगे आवैंगे
माला हाश्मी बनी सै चिंगारी घर घर मैं अलख जगावैंगे
हम फिरकापरस्ती तैं टकरावैंगे रणबीर के कलम जरे नहीं ||



--

GHUNGHAT

SEHAT KA RAJ

GUPTI JAKHAM

15 AUGUST

गरीब किस्सान की आप बीती

गरीब किस्सान की आप बीती
दो किल्ले धरती सै मेरी मुश्किल हुया गुजारा रै॥ 
खाद बीज सब महंगे होगे कुछ ना चालै  चारा रै॥ 
बुलध यो पड्या बेचना ट्रैक्टर की सै  मार पड़ी
मैं एकला कोन्या लोगो मेरे जिस्याँ की लार खड़ी
स्वाद प्याज की चटनी का पाछै सी होग्या खारा रै ॥ 
मिंह बरस्या कोन्या ट्यूबवैल का खर्चा खूब हुया
धान पिटग्या मंदी के माँ इसका चर्चा खूब हुया 
चावल का भा ना तले आया देख्या इसा नजारा रै ॥ 
भैंस बांध ली बेचूं दूध यो दिन रात एक करां
तीन हजार भैंस बीमारी के गए डाक्टर के घरां 
तीस हजार कर्जा सिर पै टूट्या पड्या ढारा  रै ॥ 
बालक धक्के खान्ते हाँडै  इननै रुजगार नहीं 
छोरी बिन ब्याही बिन दहेज़ कोए त्यार नहीं
छोरा हाँडै गालाँ  मैं मेरे बाबू का चढ़ज्या पारा रै॥ 
घर आली करै सिलाई दिन रात करै वा काले
खुभात फालतू बचत नहीं हुए ये कसूते चाले
दारू पी दिल डाटूं ये  बालक कहैं मने आवारा रै॥ 
कर्जा जिस पै लिया उसकी नजर घनी बुरी सै
घरां आकै जम्जया सै दिलपै चल्ले मेरे छुरी सै
रणबीर बरोनिया का बिक्गया  घर का हारा  रै॥