Thursday, 7 September 2017

3 OCTOBER

किसान मजदूरों की होवैगी हिसार मैं या रैली बताई
तीन अक्टूबर नै देश के किसानों की बैठक बुलाई।।
1
बणा नीति किसान विरोधी किसानी जमा बणा दी बोड़ी
मजदूरों पै संकट छाग्या म्हारी महंगाई नै कड़ तोड़ी
बिना लड़ाई पार ना जावै चालो सरतो और भरपाई।।
2
लागत फालतू खेती मैं आवत उसतैं कम होरी या
रोज कर्जा बढ़ता जावै सरकार असल राही खोरी या 
सब्सिडी पै नजर गाडरी सरकार हुई सै हड़खाई।।
3
बिना लड़ाई सुणल्यो भाईयो पार म्हारी जाणी ना
शासक तंत्र दुश्मन म्हारा इंका काट्या मांगै पाणी ना
किसान मजदूर की देखो आड़े होसै खाल तराई।।
4
मजदूर किसान मिलकै जन क्रांति इब ल्यावैंगे
किसान मजदूर की एकता इसनै मिलकै बचावैंगे
कहै रणबीर चालो रैली मैं जै चाहो सो ज्यान बचाई।।

सोचें मिलकै

किसान मजदूर सोचें मिलकै क्यों लुटगी मेहनत म्हारी।।
किसान फसल उगावै मजदूर बणावै महल अटारी।।
1
उबड़ खाबड़ खेत क्यार किसान की मेहनत नै सँवारे
मजदूर सड़क डैम बणाकै पूरे भारत नै चमकारे
किसान मजदूर की मेहनत क्यों मौज करता साहूकारी।।
किसान मजदूर सोचें मिलकै क्यों लुटगी मेहनत म्हारी।।
2
किसान और मजदूर की एकता बख्त की बात बताई जा
इन दोनों की एकता भाईयो जात गोत इलाके मैं खिंडाई जा
न्यारे न्यारे किसान मजदूर नुकसान ठारे सैं घणा भारी।।
किसान मजदूर सोचें मिलकै क्यों लुटगी मेहनत म्हारी।।
3
देश आगै बढ़या आज मेहनत करी मजदूर किसान
इनके बालक भूखे फिरते न्याकारी कोण्या पाया भगवान
काम करनिये रूलगे देखो पिटी सारै कै या ईमानदारी ।।
किसान मजदूर सोचें मिलकै क्यों लुटगी मेहनत म्हारी।।
4
सिस्टम लूट पाट का होग्या नीति खड़ी विरोध म्हारे थारे मैं
म्हारी लूट का तोड़ बताया किसान मजदूर के भाईचारे मैं
सोच समझ कै रणबीर की कलम दोनों का एका चाहरी।।
किसान मजदूर सोचें मिलकै क्यों लुटगी मेहनत म्हारी।।

व्यवस्था हुई हड़खाई

समाज व्यवस्था हुई हड़खाई सबतैं बड्डी बीमारी हे।।
इसका काटया मांगै पाणी ना कोये नर और नारी हे।।
1
सिरकी घाल करैं गुजारा जिननै देखो ताजमहल बनाये
उनके बालक मरते भूखे जिननै ये खेत क्यार कमाए
तनपै उनके लत्ता कोण्या जिननै कपड़े के मील चलाये
बिना दूध शीत के रहते वे जिननै ये डांगर ढोर चराये
भगवान भी आंधा कर दिया ना दिखता भ्रष्टाचारी हे।।
समाज व्यवस्था हुई हड़खाई सबतैं बड्डी बीमारी हे।।
2
जितना करड़ा काम म्हारा उतना नहीं सम्मान मिलता
दस नम्बरी माणस जितने उनका हुक्म सारै पिलता 
नकली फूल सजावैं पाखंडी ना असली उनकै खिलता
कहते उसके बिना आड़े यो पत्ता तक बी नहीं हिलता
सबकै उप्पर उसका ध्यान नहीं फेर किसे न्याकारी हे।।
समाज व्यवस्था हुई हड़खाई सबतैं बड्डी बीमारी हे।।
3
डांगर की कद्र फालतू यो माणस बेक़दरा संसार मैं
छोरे की कद्र घणी सै छोरी पराया धन परिवार मैं
किसे जुलम होण लागरे ये छपते रोज अखबार मैं
माणस खानी म्हारी व्यवस्था लादे बोली सरेबाजार मैं
कति छाँट कै इसनै चलाई महिला भ्रूण पै कटारी हे।।
समाज व्यवस्था हुई हड़खाई सबतैं बड्डी बीमारी हे।।
4
इस व्यवस्था मैं मुट्ठी भर तै हो घणे मालामाल रहे 
इसा जाल पूर दिया चला इसनै अपणी ढाल रहे
सोच समझ कै बढियो आगै माफिया कसूते पाल रहे
फौजी और पुलिसिया रणबीर कर इनकी रूखाल रहे
सही सोच के संघर्ष बिना जनता आज पिटती जारी हे।
समाज व्यवस्था हुई हड़खाई सबतैं बड्डी बीमारी हे।।

28 NOV

अठाईस नवम्बर के दिन विरोध दर्ज कराणा चाहिए ।
देश भक्त नागरिक जितने सबनै बाहर आणा चाहिए ।
आक्रोश प्रकट करकै हम सुनावां सरकार लुटेरी नै 
खामखा दुखी करण लागरी देखो जनता कमेरी नै 
गरीब गुरबे क्यूकर जीवैं यो मुश्किल जीना भतेरी नै 
मजदूरी कितै कितै बची सै भूख खावै शाम सबेरी नै 
मोदी जी अहंकार छोड़ कै गरीब तनै बचाणा चाहिए ।
देश के इतिहास का यो सबतै काला दौर बताया देख 
मोदी जी तनै सनक मैं जनता का यो मोर नचाया देख 
काले धन के नाम पै क्यों जनता का धोला कढाया देख 
पन्दरा बीस धन कुबेरों का तनै भोभा भरना चाह्या देख
अमीराँ की खातर गरीबों पै ना इसा तीर चलाना चाहिए।
आर्थिक जाम पूरे हिंदुस्तान मैं  घणा कसूता लगा दिया रै
कारखाने फैक्ट्री बन्द हुए कईयों को विदेश भगा दिया रै
काले धन का इलाज पक्का नोट बन्दी को बता दिया रै
निर्माण कार्य ठप्प होंगे कईयां कै दीवा यो बुझा दिया रै
दुकानदार बैठे माखी मारैं ना घणा कहर ढाणा चाहिए ।
भूल्या भटक्या आया गाहक तो दो हजार का नोट देवै
खुले कोन्या व्यापारी पै तो चीज किस तरियां वो लेवै 
खोमचे रेहड़ी पटरी आला मार सबतै ज्यादा वो खेवै
मीडिया में प्रधानमंत्री रो कै आँख कई बरियाँ यो भेवै
सब्ज बाग़ दिखा जनता को नयों नहीं बहकाना चाहिए।
अपने पीसे कढ़ावण नै जनता क्यों भिखारी बनादी
कई घण्टे लाम्बी लाइन मैं या जनता खड़ी करवादी
इस नोट बंदी के रासे मैं छः दर्जन ज्यान ये गंवादी
बईमान खुश हांड रहे सैं ईमानदारों कै फांसी लवादी
कहै कुलदीप मोदी जी ना गरीब इतना दबाना चाहिए ।

KHATTAR SAHAB

दलित अत्याचार पर, महिला के बलात्कार पर 
फैल रहे व्यभिचार पर, खट्टर जी बताओ हमनै।।
1
दलित अत्याचार आज बी कम होंते दें दिखाई ना
महिला का यौन शोषण इसमें कोए कमी आई ना
महंगाई के उभार पर, रूढ़िवाद के प्रचार पर 
कालेधन की मार पर, खट्टर जी बताओ हमनै।।
दलित अत्याचार पर, महिला के बलात्कार पर 
फैल रहे व्यभिचार पर, खट्टर जी बताओ हमनै।।
2
कालेज स्कूलों मैं यो भगवाकरण क्यों फैलाया सै
सारे कै बिठा कै संघी इतना उधम क्यों मचाया सै
पढ़ाई के व्यापार पर , नकल की भरमार पर 
नॉन अटैंडिंग कतार पर,खट्टर जी बताओ हमनै।।
दलित अत्याचार पर, महिला के बलात्कार पर 
फैल रहे व्यभिचार पर, खट्टर जी बताओ हमनै।।
3
मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना देती नहीं दिखाई
पीजीआई मैं खाली सीट इनपै नौकरी नहीं लाई
बीमारी के उभार पर, मरीजों के उपजार पर
डॉक्टरों के भ्रष्टाचार पर, खट्टर जी बताओ हमनै।।
दलित अत्याचार पर, महिला के बलात्कार पर 
फैल रहे व्यभिचार पर, खट्टर जी बताओ हमनै।।
4
बेरोजगारी घणी बढादी किसान क्यों फांसी खावै
महिला कितै महफूज ना किस आगै दुखड़ा गावै
बेरोजगारी की मार पर, पोर्नोग्राफी के बाजार पर
इस लूटू साहूकार पर, खट्टर जी बताओ हमनै।।
दलित अत्याचार पर, महिला के बलात्कार पर 
फैल रहे व्यभिचार पर, खट्टर जी बताओ हमनै।।

प्रदूषण


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।
दुनिया मैं दिल्ली शहर , ग्याहरवें नम्बर पै बताया रै।।
1
यमुना पढ़ण बिठादी या , ईब गंगा की बारी कहते रै
तालाब घनखरे सूख लिए, विकास की लाचारी कहते रै
संकट पाणी का कसूता , भारत प्यारे पै मंडराया रै।।
म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।
2
जंगल साफ करण लागरे ,विनाश के लगा गेर दिए
वायु प्रदूषण बढ़ता जावै, विकास के नारे टेर दिए
जंगल जमीन खान बेचे,  विकास का खेल रचाया रै।।
म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।
3
प्रदूषण कारण लाखों लोग बख्त तैं पहल्यां मरज्यावैं
ये प्रदूषण उम्र करोड़ों की कई साल कम कर ज्यावै
पूरे भारत देश म्हारे मैं, प्रदूषण नै कहर मचाया रै।।
म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।
4
विकास की जागां देखो विनास की राही चाल रहे
पाणी सपड़ाया पेड़ काटे घणे कसूते घर घाल रहे
संभलो जनता कहै रणबीर प्रदूषण नै देश रम्भाया रै।।
म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।

Wednesday, 9 August 2017

सांझी विरासत


कोणार्क और अजंता एलोरा म्हारी खूबै श्यान बढ़ावैं
चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं
1
दोनूँ भारत की विरासत इसतैं कौण आज नाट सकै
साहमी पड़ी दिखै सबनै कौण इस बात नै काट सकै
जो पापी तोल घाट सकैं म्हारी संस्कृति कै बट्टा लावैं ||
 चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं
2
कालिदास बाणभट्ट या रविंद्र नाथ नै श्यान बढ़ायी सै
खुसरो ग़ालिब फ़िराक हुये जिनकी कला सवायी सै
जो  न्यारे न्यारे बांटै इणनै वे भारत के गद्दार कुहावैं||
चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं
3
जयदेव कुमार गंधर्व भीमसेन जोशी जयराज दिए
बड़े गुलाम अली मियां बिस्मिल्ला नै कमाल किये
एक दूजे नै  जो नीचा कहते वे घटियापन दिखावैं
चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं
4
सहगल हेमंत मन्ना और लता गायकी मैं छागे देखो
रफ़ी नूरजहां नौशाद साथ मैं ये जनता नै भागे देखो
रणबीर बरोने आले कांहिं ये सारे बहन भाई लखावैं
चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं
 



Tuesday, 8 August 2017

Cultural Heritage of India

Cultural Heritage of India --A folk song of its kind
सुणले करकै ख्याल दखे , ये गुजरे लाखां साल दखे
सिंधु घाटी का कमाल दखे ,यो कड़ै गया लोथाल दखे
करकै नै पड़ताल दखे , खोल कै भेद बतादे कोये ||
1
सुसुरता नै देश का नाम करया , बाग़ भट्ट नै चौखा काम करया
ब्रह्म गुप्त नै हिसाब पढ़ाया ,आर्यभट्ट नै जीरो सिखाया
नालंदा नै रह दिखाया , तक्षिला गैल  कदम बढ़ाया
तहलका चारों और मचाया , ये गई कड़ै समझादे कोये ||
2
मलमल म्हारी का जोड़ ना था , ताज कारीगिरी का तोड़ ना था
हमनै सबको सम्मान दिया , सह सबका अपमान लिया
ग्रीक रोमन नै योगदान दिया , भगवान का गुणगान किया
इसनै म्हारा के हाल किया या सही तस्वीर दिखादे कोये ||
3
दो सो साल अंग्रेज राजा देश के , ये गोरे  बोगे बीज क्लेश के
फिरंगी का  न्यों कब्ज़ा  हुया , चिड़िया का बैरी बाज हुया
म्हारा ख़त्म सुर और साज हुया उनके सर ऊपर ताज हुया
क्यों घणा  कसूता काज हुया ,थोड़ा सा हिसाब लगादे कोये ||
4
लाहौर मेरठ जमा पीछे नहीं रहे ,वीर बहादुरों नै घणे जुल्म सहे
फिरंगी देश से चल्या गया, यो  कारीगर फेर बी मल्या गया
यो धर्म जात पै छल्या गया , संविधान म्हारा यो दल्या गया
क्यों इसा जाल बुण्या गया , रणबीर सिंह पै लिखवादे कोये


Sunday, 6 August 2017

आत्म हत्या इलाज नहीं

आत्म हत्या इलाज नहीं हँसता हमपै यो लुटेरा 
मर्ज समझल्याँ एक बै तो दूर नहीं यो सबेरा 
1
ट्रेक्टर की बाही मारै ट्यूबवैल का रेट सतावै
थ्रेशर की कढ़ाई मारै भा फसल का ना थ्यावै 
फल सब्जी ढूध सीत सब ढोलां मैं घल ज्यावै 
माटी गेल्याँ माटी होकै बी सुख का साँस ना आवै 
बैंक मैं सारी धरती जाली दीख्या चारों कूट अँधेरा
2
निहाले पै रमलू तीन रूपया सैकड़े पै ल्यावै
वो साँझ नै रमलू धोरे दारू पीवन नै आवै
निहाला कर्ज की दाब मैं बदफेली करना चाहवै
विरोध करया तो रोज पीस्याँ की दाब लगावै
बैंक अल्यां की जीप का बी रोजाना लग्या फेरा
3
बेटा बिन ब्याह हाँडै सै घर मैं बैठी बेटी कंवारी
रमली रमलू नयों बतलाये मुशीबत कट्ठी होगी सारी 
खाद बीज नकली मिलते होगी ख़त्म सब्सिडी म्हारी
माँ टी बी की बीमार होगी बाबू कै दमे की बीमारी
रौशनी कितै दीखती कोन्या घर मैं टोटे का डेरा
4
माँ अर बाबू म्हारे नै यो जहर धुर की नींद सवाग्या
माहरे घर का जो हाल हुआ वो सबके साहमी आग्या 
जहर क्यूं खाया उनने यो सवाल कचौट कै खाग्या 
म्हारी कष्ट कमाई उप्पर कोए दूजा दा क्यों लाग्या
कर्जा बढ़ता गया म्हारा मरग्या रणबीर सिंह कमेरा 

कला का पहला क्षण

कला का पहला क्षण
कई बार आप 
अपनी शरीर के दर्द में 
अकेले छूट जाते हैं 
और कलम के बजाय 
तकिये के निचे या मेज की दराज में 
दर्द की कोई गोली ढूँढते हैं 
बेशक जो दर्द सिर्फ आपका नहीं है 
लेकिन आप उसे गुजर न जाने दें 
यह भी हमेशा मुमकिन नहीं 
कई बार एक उत्कट शब्द 
जो कविता के लिए नहीं 
किसी से कहने के लिए होता है 
आपके तालू से चिपका होता है 
और  कोई नहीं होता आस पास 
कई बार शब्द नहीं 
कोई चेहरा याद आता है 
या कोई पुराणी शाम 
और आप कुछ देर 
कहीं और चले जाते हैं रहने के लिए 

शहीद ऊधम सिंह के बहाने


इस सदी  के दूसरे दशक का एक और साल समापन की ओर जा रहा है । इस सदी के तमाम सालों की तरह इस साल भी पूरी दुनिया की बहुसंख्यक मेहनतकश आबादी की जि़न्दगी पर छाया सरमायेदारी  का कुहरा छँटने की बजाय और गहरा होता गया। जैसा कि अन्देशा था, इस साल फ़ासीवाद के रूझान  हमारे देश में अपने पैर अभूतपूर्व रूप से पसारते  हुए दिखाई दिए । ढाई साल पहले जनता को लोक-लुभावने वायदों के छलावे में फँसाकर सत्ता में पहुँची वर्तमान सरकार ने उन वायदों को पूरा करने में अपने फिसड्डीपन को छिपाने के लिए साल की शुरुआत से ही संघ परिवार की वाहिनियों की  मदद से पूरे देश में सुनियोजित ढंग से अन्धराष्ट्रवादी उन्माद फैलाया। साथ ही संघ परिवार का  गिरोह इस साल साम्प्रदाय‍िक व जातिगत विद्वेष को बढ़ावा देने की अपनी पुरानी रणनीति को नयी ऊँचाइयों पर ले गया। जब ये कुत्सित रणनीतियाँ भी सरकार के निकम्मेपन को छिपाने में कारगर नहीं साबित हुईं तो साल के अन्त में काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक करने के नाम पर मेहनतकश जन-जीवन पर ही सर्जिकल स्ट्राइक कर डाली जिससे आम लोग अभी तक त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। तीस दिसंबर के बाद भी हालात सुधरेंगे यह कहना मुश्किल लगता है । 

भारत ही नहीं दुनिया के विभिन्न हिस्सों में धुर-दक्षिणपन्थी व फ़ासिस्ट रुझान वाली ताक़तों ने अपना वीभत्स सिर उठाया और 2007 से जारी विश्व व्यापी मन्दी से निजात न मिलता देख पश्चिम के विकसित मुल्कों में नस्लवाद, रंगभेद, प्रवासी-विरोधी प्रवृत्तियाँ अपने चरम पर दिखीं। साल के अन्त तक आते-आते विश्व पूँजीवाद के सिरमौर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में ट्रम्प जैसे फ़ासिस्ट और लम्पट धनपशु की जीत के बाद अब इस बात में शक की कोई गुंजाइश नहीं बची है कि पूँजीवाद ने आज मनुष्य‍ता को उस अन्धी गली में पहुँचा दिया है जहाँ वह उन्माद, नफ़रत कि़स्म-कि़स्म के प्रतिक्रियावादी विचारों और मूल्यों के अत‍िरिक्त और कुछ भी देने में नितान्त अक्षम है।


म्हारा हरयाणा

म्हारा हरयाणा दो तरियां आज दुनिया के महँ छाया
आर्थिक उन्नति करी कम लिंग अनुपात नै खाया (टेक)

छाँट कै मारें पेट मैं लडकी समाज के नर नारी
समाज अपनी कातिल की माँ कै लावै जिम्मेदारी
जनता हुइ सै हत्यारी पुत्र लालसा नै राज जमाया।।

औरत औरत की दुश्मन यो जुमला कसूता चालै
आदमी आदमी का दुश्मन ना यो रोजै ए घर घालै
समाज की बुन्तर सालै यो हरयाणा बदनाम कराया।।

वंश का पुराणी परम्परा पुत्र नै चिराग बतावें देखो
छोरा जरूरी होना चाहिए छोरियां नै मरवावें देखो
जुलम रोजाना बढ़ते जावें देखो सुन कै कांपै सै काया।।

अफरा तफरी माच रही महिला कितै महफूज नहीं
जो पेट मार तैं बचगी उनकी समाज मैं बूझ नहीं
आती हमनै सूझ नहीं, रणबीर सिंह घणा घबराया।।

हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति हरियाणा



हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह ही हो

चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नामाकरण शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम की जगह जन संघ नेता डा. मंगल सेन के नाम पर रखे जाने की हरियाणा सरकार की सिफारिश का  हरियाणा ज्ञान विज्ञानं समिति  कड़ा विरोध जताती  है। उल्लेखनीय है कि गत 3 दिसम्बर को लोकसभा में संसद सदस्य श्रीरवनीत सिंह के एक प्रश्न के उत्तर में नागरिक उद्यन राज्य मंत्री डा. महेश शर्मा ने बताया कि ‘‘पंजाब सरकार ने मोहाली स्थित इंटरनेशन एयरपोर्ट का नाम शहीदे-ए-आजम भगत सिंह के नाम पर किए जाने का प्रस्ताव भेजा था। 2010 में हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी यही आग्रह किया था। परंतु बाद में मुख्यमंत्री ने एक पत्र द्वारा एयरपोर्ट का नाम डा. मंगलसेन के नाम पर रखे जाने का अनुरोध किया। सम्बन्धित मंत्रालयों से परामर्श किया गया परंतु सर्वानुमति के अभाव में नाम नहीं रखा जा सका है।
हरियाणा में भाजपा की  सरकार अपने नीहित ओच्छे स्वार्थों की पूर्ति के लिए हमारे आजादी के बड़े योद्धा का अपमान कर रही है। दिवंगत डा. मंगल सैन आर.एस.एस. और जनसंघ के नेता रहे है परंतु वे अपने राजनीतिक जीवन में अनेक ऐसे क्रियाकलापों के कारण विवादास्पद रहे थे। सच्चाई यह है कि भाजपा व जनसंघ के नेता आजादी के आंदोलन में पूरी तरह से गायब थे इसलिए अब भाजपा सत्ता के दुरूपयोग द्वारा नकली नायक निर्मित करने के काम में लगी हुई है।
 समिति  प्रदेश भाजपा सरकार द्वारा हमारे आजादी के महान योद्धा शहीद भगत सिंह की विरासत के साथ किसी प्रकार के अपमानजनक फैसलों का पुरजोर विरोध करेगी। समिति  जनता से अपील करती  है कि भाजपा सरकार के इस घिनौने हथकंडे को विफल करने के लिए संगठित आवाज उठायी  जाये ।

Saturday, 5 August 2017

क्रांतिकारियों का सपना रै।

हरया भरया हरियाणा हो , जित सेहत मंद खाना हो,
खत्म जात पात का बाणा हो, क्रांतिकारियों का सपना  रै।।
1
आर्थिक आधार तरक्की के इनतै आगै जाणा होगा 
सामाजिक आधार बिगड़गे इनको ठीक बनाना होगा
सबनै बढ़िया पढ़ाई मिलै, सबनै बढ़िया दवाई मिलै
सबनै बढ़िया कमाई मिलै, क्रन्तिकारियों का सपना रै
हरया भरया हरियाणा हो, जित सेहत मंद खाना हो
खत्म जात पात का बाणा हो, क्रन्तिकारियों का सपना रै
भाई तैं भाई का प्यार यो परवान चढै हरियाणा मैं 
महिला नै सम्मान मिलै या आगै बढ़ै हरियाणा मैं
किसान खुशहाल होवै रै, मजदूर ना बेगार ढोवै रै
उद्योग ना रफ्तार खोवै रै, क्रन्तिकारियों का सपना रै
हरया भरया हरियाणा हो , जित सेहत मंद खाना हो,
खत्म जात पात का बाणा हो, क्रन्तिकारियों का सपना रै
घरां कै ताले ना लावै कोए इस समाज हो म्हारा देखो
इज्जत के नाम पै ना मारैं इस रिवाज हो म्हारा देखो
म्हारा रिश्ता भाण भाई का , म्हारा तरीका ब्याह सगाई का, 
ना बणै कारण रुसवाई का, क्रन्तिकारियों का सपना रै
हरया भरया हरियाणा हो , जित सेहतमंद यो खाना हो,
खत्म जात पात का बाणा हो, क्रन्तिकारियों का सपना रै
4
अमीर गरीब की दूरी भाण भाईयो कम करनी होगी
प्रगतिशील समाज की नींव आज मिलकै धरनी होगी 
आसान यो काम अधूरा कोण्या , कर सकै अकेला जमूरा कोण्या,
 थारे म्हारे बिन हो पूरा कोण्या, क्रन्तिकारियों का सपना रै 
हरया भरया हरियाणा हो , जित सेहतमंद यो खाना हो,
खत्म जात पात का बाणा हो, क्रन्तिकारियों का सपना रै

माणस का धरम

बात पते की
धरम के सै माणस का मनै कोए बताद्यो नै।
माणस मारो लिख्या कड़ै मनै कोए दिखाद्यो नै।।
माणस तै मत प्यार करो कौणसा धरम सिखावै
सरेआम बलात्कार करो कौणसा धरम सिखावै
तम दारू का ब्यौपार करो कौणसा धरम सिखावै
रोजाना नर संहार करो कौणसा धरम सिखावै
धरम क्यों खून के प्यासे मनै कोण समझाद्यो नै।।
ईसा राम और अल्लाह जिब एक बताये सारे रै
इनके चाहवण आले बन्दे क्यूं खार कसूती खारे रै
क्यों एक दूजे नै मारण नै एके जी हाथां ठारे रै
अमीर देस हथियार बेच कै खूबै मौज उड़ारे रै
बैर करो मारो काटो लिखै वो ग्रंथ भुलाद्यो।।
मानवता का तत कहैं सब धरमां की जड़ मैं सै
प्रेम कुदरत का सारा सब धरमां की लड़ मैं सै
कदे कदीमी प्रेम का रिस्ता माणस की धड़ मैं सै
कट्टरवाद नै घेर लिया यो धरम जकड़ मैं सै
लोगां तै अरदास मेरी क्यूकरै इनै छटवाद्यो नै।।
यो जहर तत्ववाद का सब धरमां मैं फैला दिया
कट्टरवाद घोल प्याली मैं सब तांहि पिला दिया
स्कीम बणा दंगे करे इन्सान खड़या जला दिया
बड़ मानवता का आज सब धर्मां नै हिला दिया
रणबीर रोवै खड़या इनै चुप करवाद्यो नै।।

सोमवार के ब्रत

सोलां सोमवार के ब्रत राखे मिल्या नहीं सही भरतार 
दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घना सै करतार
1
बालकपन तैं चाहया करती मन चाहया भरतार मिलै
बराबर की इंसान समझै ठीक ठयाक सा घरबार मिलै
उठते बैठते सोच्या करती बढ़िया सा मनै परिवार मिलै
मेरे मन की बात समझले नहीं घणा वो थानेदार मिलै
इसकी खात्तर मन्नत मानी चढ़ावे चढ़ाए मनै बेसुमार
दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घणा सै करतार
मेरी सहेली नै ब्याह ताहिं एक खास भेद बताया था 
सोलां सोमवार के ब्रत करिये मेरे को समझाया था
बोली मनचाहया वर मिलै जिसनै यो प्रण पुगाया था
मनै पूरे नेग जोग करे एक बी सोमवार ना उकाया था
बाट देखै बढ़िया बटेऊ की यो म्हारा पूरा ए परिवार 
दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घणा सै करतार
3
कई जोड़ी जूती टूटगी फेर जाकै नै यो करतार पाया
पहलम तै बोले बहु चाहिए ना चाहिए सै धन माया
ब्याह पाछै घणे तान्ने मारे छोरा बिना कार के खंदाया
सपने सारे टूटगे मेरे बेबे सोमवार ब्रत काम ना आया
पशु बरगा बरतावा सै ना करै माणस बरगा व्यवहार
दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घणा सै करतार
4
ये तो पाखण्ड सारे पाये ना भरोसा रहया भगवान मैं
उसकी ठीक गलत सारी पुगायी ना दया उस इंसान मैं 
फेर न्यों बोले पाछले मैं कमी रही भक्ति तनै पुगाण मैं
आंधा बहरा राम जी भी नहीं आया पिटती छुड़ाण मैं
कहै रणबीर बरोने आला आज पाखंडाँ की भरमार 
दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घणा सै करतार 

( कन्या भ्रुण हत्या )



                                            ------रामधारी खटकड़

     कौण सुणैगा पीड मेरी , मैं किसनै आज सुणाऊँ
     आस  पेट  की  मरवावैं , मैं क्यूकर कहण पुगाऊँ........(टेक)

1.  एक बेटी मेरै पहलां हो री , बहोतै लागै प्यारी
     आस दूसरी होई गर्भ म्हं , या  भी  सै  लाचारी
     घर-कुणबे नै बेटा चाहिए , सबनै बात बिचारी
     डाक्टर धोरै लेजावण की ,  कर  रे  थे  तैयारी
     अल्ट्रासाउण्ड करवा दिया , सारी खोल बताऊँ...............

2.  कन्या बताई मेरे गर्भ म्हं , उतरे सब के चेहरे 
     मेरा  पति न्यूं  कहण  लग्या , भाग फूटग्ये मेरे
    फिर बोल्या ले करा सफाई , गर्दिश के सैं  फेरे
    मैं बोली क्यूं जुल्म करै , ये काम ना आच्छे तेरे
   चाल ओडे तै घर नै आग्ये , मैं चारों ओड लखाऊँ.................

3.  छोह म्हं आकै कहण लगे , यू गर्भ गिराणा चाहिए
     दुज्जी छोरी होवण ना दें ,  पिण्ड छुडाणा  चाहिए
     मैं  बोली  के खोट मेरा , कुछ तो  शरमाणा  चाहिए
     वे बोले तनै घर-कुणबे का  कहण  पुगाणा  चाहिए
     आज मेरी कोय सुणता ना, मैं कित जा रुधन मचाऊँ.............

4.  बूंद  लहू  की  मारण  खातर  पूरी  त्यारी  हो ली
     बेटी नै दें मार गर्भ म्हं , लिहाज-शर्म कति  खो ली 
     कडै गया भगवान म्हारा, कित जा शान लहको ली
     म्हारे पांयाँ की या बेडी  ,   क्यूकर  जा   गी   खोली
    "रामधारी" दे साथ म्हारा  ,  फेर मैं भी झण्डा ठाऊँ......
               ×                          ×                      ×

म्हारी खोज म्हारी सभ्यता

 -- विज्ञान यूनिवर्सल है 
सारी खोजें बाहर हुई हिंदुस्तान कित सै
घड़ी बंधी जो हाथ पै इटली मैं हुई खोज बताई।।
भाप के इंजन की कर खोज इंग्लैंड नै ली अंगड़ाई।।
1
खुर्दबीन की खोज कदे नीदरलैंड मैं हुई बताई सै
बैरोमीटर तैं टॉरीसैली नै मौसमी खबर सुनाई सै
गुब्बारा सतरा सौ तिरासी मैं हमनै दिया दिखाई सै
टेलीग्राफ की खोज नै फेर फ्रांस की श्यान बधाई सै
गैस लाइट के आणे तैं जग मैं हुई घणी रूसनाई।।
घड़ी बंधी जो हाथ पै इटली मैं हुई खोज बताई।।
2
इटली के पी टैरी नै टाइप राइटर फेर बनाया रै
हम्फ्री डेवी नै लैंप सेफ्टी बणा मॉडल दिखाया रै
माचिस की खोज नै ठारा सौ छब्बीस याद दिलाया रै
साइकिल नै बनाने आला मैकलीन नाम बताया रै
ठारा सौ तितालिस सन मैं फैक्स मशीन गई बनाई।।
घड़ी बंधी जो हाथ पै इटली मैं हुई खोज बताई।।
3
ज्ञान विज्ञान आगै बढ़ग्या नए नए करे आविष्कार
अमरीका नै लिफ्ट खोजी मंजिलां की लागी लार
ठारा सौ बावन मैं फ्रांस मैं वायुयान नै भरी उडार
टेलबेट नै फ़ोटो खींचण की विधि करदी या त्यार
वैज्ञानिक सोच के दाम पै नई नई तरकीब सिखाई।।
घड़ी बंधी जो हाथ पै इटली मैं हुई खोज बताई।।
4
थॉमसन नै वैल्डिंग मशीन अमेरिका में तैयार किया
एडिसन नै बल्ब बिजली जगमगा पूरा संसार दिया
मोटर साइकिल डैमलर नै सड़कों पै फेर तार दिया
उन्नीस सौ बावन मैं हायड्रोजन बम भी सिंगार दिया
रणबीर आगे की फेर कदे बैठ कै करैगा कविताई ।।
घड़ी बंधी जो हाथ पै इटली मैं हुई खोज बताई।।

पहले तीज

पहले तीज बड़े जोश खरोश के साथ मनाया करते मगर 
अब जोश काफी कम हो गया है | कारण ? रोहतक से भालौठ 
तक पिछले से पिछले साल देखने गया बहुत कम झूल मिली | 
बात चलती है तो एक महिला क्या बताती है तीज के बारे में --

पींग घालकै खूब झूलते हम न्यों तीज मनाया करते ||
छोरी बहु सब कट्ठी होकै शिवाले ऊपर जाया करते ||
1
पहर सूट रंग बिरंगे सब झूलन जाया करती हे
हम मिलकै गीत साम्मण के खूब गाया करती हे
देवर ज्येठ भी आस पास डोलते नजर आया करते ||
छोरी बहु सब कट्ठी होकै शिवाले ऊपर जाया करते ||
2
दो दो छोरी पींघ बांध कै खूबै ए पींग बढान्ती बेबे
ऊपर जा सर घूम जानता जिब तले नै लखांती बेबे
देवर ज्येठ देख नज़ारे खूबै ऐ मजाक उड़ाया करते ||
छोरी बहु सब कट्ठी होकै शिवाले ऊपर जाया करते ||
3
साँस सुखके इस ढालां हम थोड़ी देर ले लिया करती
एक दूजी के साहमी दिल अपना खोल दिया करती
मस्त साम्मण का मौसम बेबे हल्वा खीर बनाया करते ||
छोरी बहु सब कट्ठी होकै शिवाले ऊपर जाया करते ||
4
बेरा ना कड़ै गई वे तीज कर याद दिल भर आवै हे
बाजार कै भेंट चढ़े त्यौहार म्हारी ना पार बसावै हे
रणबीर मेहर सिंह हर न्यारे प्यारे छंद बनाया करते ||
छोरी बहु सब कट्ठी होकै शिवाले ऊपर जाया करते ||

सन 14 की तीज

 
सन 14 की तीज का सुण्लयो हाल सुणाउं मैं।।
बोहर भालोठ आया देख कै ना पाई पींग बताउं मैं।।
1
गुलगुले सुहाली मनै कितै टोहै पाये कोण्या सुनियो
नीम पीपल झूलैं जिनपै नजर आये कोण्या सुनियो
काला दामण लाल चूंदड़ी ल्याकै कड़े तैं दिखउं मैं।।
बोहर भालोठ आया देख कै ना पाई पींग बताउं मैं।।
2
नीम पीपल के डाहले पै जेवड़यां की पींग घालते रै
झूल झूलते तो ये पते टहनी उनकी गैल हालते रै
मिलकै पड़ौसन झूल्या करती ईब कड़े तैं ल्याउं मैं।।
बोहर भालोठ आया देख कै ना पाई पींग बताउं मैं।।
3
कोथली मैं सुहाली आन्ती ये पूड़े घरां बनाया करते 
कई दिन सुहानी घेवर रल मिलकै सब खाया करते 
लंगर बांध देवर झोटे देता ये के के बात गिणाउं मैं।।
बोहर भालोठ आया देख कै ना पाई पींग बताउं मैं।।
तीजां का त्यौहार साम्मण मैं मौसम बदल जावै देखो
अकेलापन दूर होज्या सै मेल मिलाप यो बढ़ावै देखो
क बोहर भालोठ आया देख कै ना पाई पींग बताउं मैं।।
कहै रणबीर हुड्डा पार्क मैं तीस नै तीज मणाउं मैं।।