Wednesday, 8 June 2011
Tuesday, 7 June 2011
kheti
बैल की खेती क्यों छोड़ी हमने
पुराणी परंपरा क्यों तोड़ी हमने
गाय का स्थान माता का था
माता से मुंह क्यों मोड़ी हमने
जलसेना विद्रोह (मुम्बई)विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से
जलसेना विद्रोह (मुम्बई)विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
भारत की आजादी के ठीक पहले मुम्बई में रायल इण्डियन नेवी के सैनिकों द्वारा पहले एक पूर्ण हड़ताल की गयी और उसके बाद खुला विद्रोह भी हुआ। इसे ही जलसेना विद्रोह या मुम्बई विद्रोह (बॉम्बे म्युटिनी) के नाम से जाना जाता है। यह विद्रोह १८ फरवरी सन् १९४६ को हुआ जो कि जलयान में और समुद्र से बाहर स्थित जलसेना के ठिकानों पर भी हुआ। यद्यपि यह मुम्बई में आरम्भ हुआ किन्तु कराची से लेकर कोलकाता तक इसे पूरे ब्रिटिश भारत में इसे भरपूर समर्थन मिला। कुल मिलाकर ७८ जलयानों, २० स्थलीय ठिकानों एवं २०,००० नाविकों ने इसमें भाग लिया। किन्तु दुर्भाग्य से इस विद्रोह को भारतीय इतिहास मे समुचित महत्व नहीं मिल पाया है।
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भारत की आजादी के ठीक पहले मुम्बई में रायल इण्डियन नेवी के सैनिकों द्वारा पहले एक पूर्ण हड़ताल की गयी और उसके बाद खुला विद्रोह भी हुआ। इसे ही जलसेना विद्रोह या मुम्बई विद्रोह (बॉम्बे म्युटिनी) के नाम से जाना जाता है। यह विद्रोह १८ फरवरी सन् १९४६ को हुआ जो कि जलयान में और समुद्र से बाहर स्थित जलसेना के ठिकानों पर भी हुआ। यद्यपि यह मुम्बई में आरम्भ हुआ किन्तु कराची से लेकर कोलकाता तक इसे पूरे ब्रिटिश भारत में इसे भरपूर समर्थन मिला। कुल मिलाकर ७८ जलयानों, २० स्थलीय ठिकानों एवं २०,००० नाविकों ने इसमें भाग लिया। किन्तु दुर्भाग्य से इस विद्रोह को भारतीय इतिहास मे समुचित महत्व नहीं मिल पाया है।
sifar
रोटी कपडा मकान का हो जिकर
इनकी बिलकुल नहीं उनको फिकर
भ्रष्टाचार ही है एक गंभीर मामला
इसने कर ही दिया बाकि को सिफर
कितना जरूरी है रोजगार का मसला
पीछे धका ही गया इसे भ्रष्टाचार का मसला
सामाजिक न्याय के मामले पीछे छुट गए
कहाँ है महिला पर अत्याचार का मसला
kuchh shabd
जिसके पांव नहीं होते
वह हवा में रहता है
जो हवा में ही रहे
उसका क्या भरोसा
भ्रष्टाचार के अंधड़ में
आई है झूठ की हवाएं
सच को थामना होगा
Monday, 6 June 2011
काले धन की जड़
काले धन की जड़
जड़ कडै काले धन की किसे नै बी नहीं बताया ||
वट वरक्ष की ढालां इसनै दुनिया मैं जाल बिछाया||
काला धन उपजै कैसे इसकी तह मैं जाना होगा
कौनसा तरीका पैदा करता वो साहमी ल्याना होगा
नया सिस्टम बनाना होगा जिमैं हो इसका सफाया ||
स्विस बैंक का धन काला उल्टा आज्य भारत म्हारे मैं
मान्या जा देश की संपत्ति ना दो राय इसके बारे मैं
कौन हवा भरे गुब्बारे मैं नहीं सारा खोल दिखाया ||
काला धन बनावै वा सट्टा बाजारी बंद करनी हो
प्रणाली उत्पादन की या लूट हमारी बंद करनी हो
काली देनदारी बंद करनी हो ना मानस जा सताया ||
नीम धरी पूंजीवाद की काले धन के दम पै देखो
पूंजीवाद ख़त्म करे बिन राज करैगा यो हम पै देखो
घनी जिमेदारी तम देखो रणबीर नै छंद बनाया ||
Sunday, 5 June 2011
दो बेकार दोस्त
दो बेकार दोस्त
दो बेकार दोस्त थे कुछ काम नहीं मिल रहा था . चलते चलते एक तलब किनारे आये . एक बोर्ड पर नज़र पडी .”डूबने वाले इन्सान को बचाने वाले को 500 Rs इनाम 'एक दोस्त को तैरना आता था दुसरे को नहीं जिसको तैरना आता था उसने दुसरे से कहा " तुम तालाब में कूदो और बचाओ बचाओ चिलाओ मैं तुम्हें बचाऊँगा 500 मिलेंगे 250 तू लेना 250 rs मैं लूँगा ' वह कूद गया . पर उसके चिलाने पर भी उसके दोस्त ने उसे निकालने से ना कह दिया | वह बोला तेरे पानी में कूदने के बाद मैंने दूसरा बोर्ड देखा ------
लहाश (डैड बॉडी ) को बहार निकालो और 1000Rs पाओ .
दो बेकार दोस्त
दो बेकार दोस्त थे कुछ काम नहीं मिल रहा था . चलते चलते एक तलब किनारे आये . एक बोर्ड पर नज़र पडी .”डूबने वाले इन्सान को
बचने वाले को 500 Rs इनाम 'एक दोस्त को तैरना आता था दुसरे को नहीं जिसको तैरना आता था उसने दुसरेसे कहा " तुम तलब में कूदो और बचाओ बचाओ चिलाओ मैं तुम्हें बचाऊँगा 500 मिलेंगे 250 तू लेना 250 rs मैं लूँगा ' वह कूद गया . पर उसके चिलाने पर भी उसके दोस्त ने उसे निकालने से ना कह दिया वह बोला तेरे पानी में कूदने के बाद मैंने दूसरा बोर्ड देखा ------
लहाश (डैड बॉडी ) को बहार निकालो और 1000Rs पाओ .
चोर के घर चोरी
चोर के घर चोरी
एक चोर एक करोड़ रपएये आर बहुत सा सोना चोरी करके भज रहया था | एक गूंगे और बहरे इन्सान के घर घुसग्या| माल वहां रख दिया और बोल्या - कल आके ले जाऊँगा | दुसरे दिन गया पर माल वहां कोणी था| बूझ्या- तो गूंगा ऐसे इशारे करता मानों वह कुछ नहीं जानता |
चोर अपने एक ऐसे दोस्त को ले आया जो गूंगों की भाषा जानता था और बोल्या-"इसको पूछ मॉल कहाँ है बतादे नहीं तो शूट कर दूंगा "गूंगा दर गया और अपनी भाषा मैं बोल्या--"घर के पीछे जो पेड़ सै उसके नीचे है "अब चोर तो कुछ समझा नहीं उसने दोस्त से पूछा --"के बताया "?दोस्त बोल्या --"बोलता है गोली मारदे मैं नहीं बताऊँगा "
BHAUTIKTA
भौतिक सम्पन्नता में हरयाणा उन्नत व् समर्द्ध राज्यों में आता है लेकिन भौतिक समर्धि व् परिस्थितियों में बदलाव को अभी सामाजिक सांस्कृतिक स्वीकृति नहीं मिली है
ABAADEE SANSADHAN BEE SAI
'मनरेगा ' मैं माट्टी ढोवें आज करोड़ों हाथ दिखे ||
बिना ज्ञान अधूरी लागे या संसाधन की बात दिखे||
नहीं बराबर दोनों बातें या साक्षरता और पढ़ाई
बिना समझें दस्तखत करना कोण्या सही दवाई
झोंपड़ियों मैं कितने बढ़गे क्यूं नहीं बात बताई
किसका जीना होया सुखाला ना बात सामने आई
आम आदमी न्यूएँ खारया अब बी मुक्के लात दिखे ||
शिक्षा साधन दे ठेके पै क्यूं फ़ायदा ठाना चाहवै
ठेकेदार हरेक मोड़ पै सब नोट कमाना चाहवै
पीसे लेके डिग्री बेचें ना गात उल्हाना चाहवै
कुशल हाथ इसी निति से बता किसे बताना चाहवै
कापी पिलसन महंगी होरी महंगी कलम दावत दिखे ||
मजदूरों की कुछ बढे कमाई इसा ब्योंत बनाना चाहिए था
मेहनतकश हाथों को कुछ नया इलाम सिखाना चाहिए था
हर एक हाथ मेरे देश का काम मैं लगाना चाहिए था
भूख बीमारी रही जड़े दखे ना नयूँ गिरकाना चाहिए था
ना बनी योजना कोई ऐसी जो करै सुखाला गात दिखे||
सियासत हावी शिक्षा ऊपर फैलया भ्रष्टाचार आडै
डिग्री बस एक कागज होगी शिक्षा होई व्यापार आडै
घनी आबादी नाश की टाट्टी बस यो सै प्रचार आडै
आबादी संसाधन बी सै ना करी बात स्वीकार आडै
रामेश्वर आजाद तो होग्या ना मिती अँधेरी रात दिखे ||
Saturday, 4 June 2011
MERA TERA
मेरा तेरा तेरा मेरा इसमें सारी उम्र गंवाई तनै
गर्व से कहो दहिया सूं न्यारी डफली बजाई तनै
सबते नयारा गोत दहिया याहे बीन सुनायी तनै
दहिया मैं भी सूं मैं सवाया न्यारी तर्ज गाई तनै
मानवता नै भुल्या अहंकार मैं जिन्दगी बिताई तनै
जात गोत का झगडा ठाकै झूठी स्यान बढ़ायी तनै
जाट कौम की ठेकेदारी बी सही नहीं निभायी तनै
गरीब जाट दुद्कारया या जाट कौम बहकाई तनै
वा जाट कौम की छोरी थी बुरी नजर टिकाई तनै
कड़े गई ठेकेदारी कौम की क्यों तार बगाई तनै
ऊपर तै करया दिखावा भीतर तै खिल्ली उडाई तनै
देख देख हरकत ये सारी या ठेकेदारी बिसराई मने
सब कौम के गरीबाँ की करनी चाही भलाई मने
CAN NOT BE SEPARATED
मगर संस्कृति और अर्थ व्यवस्था को अलग नहीं किया जा सकता | कारन यह है की जिस तरह संस्कृतियाँ भिन्न होती हैं उसी तरह अर्थ व्यवस्थाएं भी भिन्न होती हैं और उसके आपसी सम्बन्ध भी विभिन्न प्रकार के होते हैं
PARTIAL AUTONOMY
संस्कृति पूर्णत आर्थिक क्षेत्र पर निर्भर और उसी से निर्धारित नहीं होती ,बल्कि उसकी अपनी एक स्वायतता भी होती है और वह भी आर्थिक विकल्प को प्रभावित करती है
SANSKRITI KA RAJNAITIKARAN
आज हम एक ऐसी अवस्था में पहुँच गए हैं की संस्कृति की दिशा या प्रकृति काया होगी ,इसकी संभावनाएं सिमित होंगी या व्यापक ,वह जनहित में होंगी या अभिजनों के हित में ,वह जीवन को कौनसा अर्थ या परिभाषा देगी,इत्यादि बातों का निर्णय स्वयम संस्कृति क्षेत्र में नहीं हो रहा है, बल्कि आर्थिक राजनैतिक क्षेत्र में किया जा रहा है |
KAHAWAT
एक पुराणी जर्मन कहावत है कि रसोई घर में जो पकता है , उसकी सामग्री ही बहार से नहीं आती ; रसोई घर में क्या पकेगा , यह निर्णय भी बाहर से आता है --पॉल बरान
VIKAS YA VINAS KA RASTA????
हमने जो विकास का रास्ता चुना है
क्या??
वह विनास का रास्ता तो नहीं कहीं ?
क्यों सोचने को मजबूर हूँ मैं पता नहीं
आप भी सोचते हैं हैं कि नहीं मग़र ये
यकिन है मुझे कि एक दिन आपको
जाम और हुस्न के ख्यालों से बाहर
आकर हम सबको मिलकर सोचना तो
होगा !!!
तो फिर देर क्यों??
क्या??
वह विनास का रास्ता तो नहीं कहीं ?
क्यों सोचने को मजबूर हूँ मैं पता नहीं
आप भी सोचते हैं हैं कि नहीं मग़र ये
यकिन है मुझे कि एक दिन आपको
जाम और हुस्न के ख्यालों से बाहर
आकर हम सबको मिलकर सोचना तो
होगा !!!
तो फिर देर क्यों??
JANTA BHI KAM DOSHI NAHIN HAI
मुझे पढाया बताया मेहनत और ईमानदारी
ऊंचे मानवीय गुण हैं हम कहलाते संस्कारी
ठीक उल्टा देख रहा हूँ आज के अपने समाज में
बेईमानी और घोटाले छाये बड़े नए अंदाज में
पांच एकड़ जमीन बिकी रुपये तीन करोड़ मिले
दो भाई दो बहन के रिश्ते बाँट पे बुरी तरह हिले
भाईयों ने दी दोनों बहनों की पांच लाख की सुपारी
भून डाली गोलियों से भूल गए सब दुनियादारी
छोटे ने बड़े को अपने रास्ते से चाहा हटवाना फिर
सोते हुए का काट कर ये फैंक दिया नहर में सिर
तीन करोड़ का मालिक बना खिलाके पैसे बच गया
ईमानदारी का और मेहनत का नया इतिहास रच गया
अपराधीकरण और भ्रष्टाचार हमारे समाज में छाये
इमानदार चुप बैठे देखो इनके सामने सिर छुकाए
ऍम अल ए भी फिर लोगों ने बना ही दिया उसको
किसे दोष दें यहाँ पर रणबीर नहीं पता चला मुझको
Monday, 30 May 2011
bhukhmari
भुखमरी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार
बढ़ते ही जा रहे बिलकुल बेसुम्मार
जात गोत इलाके और धर्म पे बांटा
ऐस करते देश के देखो साहूकार
PARAMPARA AUR MAHILA KA SHOSHAN
परंपरा की घूंटी मैं महिला तै जहर पिलाया बेबे
दुभांत छिपी हुई इसमें नहीं समझ मैं आया बेबे
धुर तैं धोखा करते आए आज की नयी बात नहीं
गरज गरज के प्यारे सैन फेर बूझते ये जात नहीं
द्रोपद जुए मैं हारी फेर युधिष्ठर नहीं शरमाया बेबे ||
रचा शादी पार्वती तै भोला जी उन्नै दूतकारै था
हरिचंद बी डायन बता कै मदनावत नै मारे था
दुष्यंत नै शकुन्तला भकाई न मुड़ कै लखाया बेबे ||
नल नै दमयंती की बी बन के मां साड़ी काटी बेबे
अंजना भी पवन के कारन उस्तै न्यारी पाटी बेबे
रूपा रानी को जोध नाथ नै जंगल राह दिखाया बेबे||
चापसिंह नै सोमवती पै झूठे इल्जाम लगाये बेबे
परंपरा और इज्जत के पहरे खूब बिठाये बेबे
अपनी खातर खुली छूट हमें बंधक बनाया बेबे ||
MAHILA VIRODHI MAHAUL HARYANA MAIN
महिला विरोधी माहौल नजर हरयाने मैं आवै
माँ तृ शक्ति जिंदाबाद उपरले मन तै नारा लावै
असुरक्षा बढ़ी चारों कान्ही महिला जमा घिरगी रै
महिला अजेंडा थारे फेर लिंग अनुपात गिरगी रै
दिशा म्हारी कदे गलत हो रोजाना याहे चिंता खावै ||
महिला महिला की बैरी झूठ पी गैहटा जोड लिया
साच्ची बात किमै दूसरी उस्तै मुंह क्यों मोड़ लिया
पितृसत्ता पुत्र लालसा पै नहीं कोए उंगली ठावै ||
म्हारी मानसिकता सुनल्यो साईं कसूती हत्यारी
धन दौलत मैं हिस्सा न बात बात पर जा दुत्कारी
पूरी मोर्चे बंदी करदी दरवाजा नहीं ढूँ ढया पावै ||
इस निराशा मैं बी कई महिला आगे बढ़ी बताऊँ
खेलां मैं छाई करैं संघर्ष हरेक मोर्चे पै दिखाऊँ
रणबीर सिंह जी लाकै सच्चाई सबकी साहमी ल्यावै ||
Sunday, 29 May 2011
BHINT MAIN AALA
भींत मैं आला आँख मैं जाला दिल मैं काला दुःख देज्या
खेत रिहाला पोह का पाला कपटी रुखाला दुःख देज्या
औरत भली उम्र भर सुख दे या खोटी नारी दुःख देज्या
भले का सत्संग सिखर चढ़ादे नीच की यारी दुःख देज्या
Saturday, 28 May 2011
DUBHANT AURAT KE SAATH --YUG YUGON SE
धुर तैं धोखा करते आए आज कद नयी रीत होंसैं
गरज गरज के प्यारे बहना लोग किसके मीत होंसैं
द्रोपद जुए के मैं हारी युधिसठर पासे डारै था हे
शादी करकै पारवती नै भोला भी दूदकारै था हे
सत की सीता घर तै ताहदी रामचंद्र हद त़ारै था हे
हरिश्चंदर भी डायन बता कै मदनावत नै मारै था हे
ये ब्याही का बी तरस करैं ना इनकी के प्रीत होंसैं ||
गूंठी देकै शकुंतला नै दुष्यंत बखत पै नाट गया हे
नल रजा बी दमयंती की बण मैं साड़ी काट गया हे
पवन कुमार बी अंजना गेल्याँ के करनी कर घाट गया हे
इसी इसी बा तां नै सुन कै दिल मर्दों तै पाट गया हे
ये बीर बिचारी कुछ ना बोलें कोए पीट दे भींत होंसैं ||
रूप रानी जोंध नाथ नै बाण कै बीच खंदायी थी हे
बण मैं धक्के खाकै मरगी मुद कै घर ना आई थी हे
चाप सिंह नै भी सोमवती पति बरता ज़ार बताई थी हे
मदन सैन नै दी सूती काट नाग दे बाई थी हे
बखत पड़े पै आंख बदल जायं इनकी खोटी नीट होंसैं ||
कद लग खोट कहूं मर्दों के बीर बीचारी साफ़ सें हे
बीर भतेरी दयावंत नर डोलें करते पाप सै हे
बेईमानी और चोरी जरी मर्दों की माफ़ सें हे
बीर मरद के झगडे ऊपर गुरु मुंशी की छाप सें हे
उपर तली के गाने दयाचंद के गीत होंसैं ||
Friday, 27 May 2011
Tuesday, 24 May 2011
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