Sunday, 7 June 2020

आपा ...धापी

आपा ...धापी
आपा धापी माच रही चारों कूट रोल्या पड़ग्या।
एक दूजे का गल काटैं नाज गोदामां मैं सड़ग्या
म्हारे घर बणे तबेले रही माणस की खोड़ नहीं
सोच तै परहेज करैं बात का टोहते औड़ नहीं
झूठ पै चालै पूरी दुनियां साच का जुलूस लिकड़ग्या।।
मेहनत करी लोगां नै विज्ञान नै राह दिखाया
या दुनिया बदल दई  घणा खून पसीना बाहया
लालची नै डाण्डी मारी गरीब कै साहमी अड़ग्या।।
न्याय की बात भूलगे नहीं ठीक करया बंटवारा
पांच सितारा होटल दूजे कान्ही फूटया ढारा
गरीब की कमाई  का मुनाफा अमीर कै बड़ग्या।।
टीवी पै सपने हमनै आज खूब  दिखाये जावैं
रणबीर लालच दे देकै उल्टे प्रचार कराये जावैं
सच्चाई  नै भूल गए भोग मैं माणस बड़ग्या।।

माणस का धरम

माणस का धरम
रम के सै माणस का मनै कोण बतादयो नै।
माणस मारो लिख्या कड़ै मनै कोए दिखादयो नै।।
माणस तै मत प्यार करो कौणसा   धरम सिखावै
सरेआम बलात्कार करो कौणसा  रम सिखावै
तम दारू का ब्यौपार करो कौणसा  धरम सिखावै
रोजाना नर संहार करो कौणसा धरम सिखावै
रम क्यों खून के प्यासे मनै कोण समझादयो नै।।
ईसा  राम और अल्लाह जिब एक बताये सारे रै
इनके चाहवण आले बन्दे क्यूं खार कसूती खारे रै
क्यों एक दूजे नै मारण नै एके जी हाथां ठारे रै
अमीर देस हथियार बेच कै खूबै मौज उड़ारे रै
बैर करो मारो काटो लिखै वो ग्रंथ भुलादयो नै ।।
मानवता का तत कहैं सब धरमां की जड़ मैं सै
प्रेम कुदरत का सारा सब धरमां की लड़ मैं सै
कदे कदीमी प्रेम का रिस्ता माणस की धड़ मैं सै
कटटरवाद नै घेर लिया यो  धरम जकड़ मैं सै
लोगां तै अरदास मेरी क्यूकरै इनै छटवादयो नै।।
यो जहर तत्ववाद का सब धरमां मैं फैला दिया
कटटरवाद घोल प्याली मैं सब तांहि पिला दिया
स्कीम बणा दंगे करे इन्सान खड़या जला दिया
बड़ मानवता का आज सब धर्मां नै हिला दिया
रणबीर रोवै खड़या इनै चुप करवादयो नै।।

मैम्बर पंचायत

2.तर्ज : फूल तुम्हें भेजा है खत में
मैम्बर पंचायत चुनी  खुशी गात मैं छाई  थी।
ज्ञान विज्ञान आल्यां नै किमै ज्ञान की बात बताई  थी।।
सबतै पहलम हुआ सामना सुनियो देवर मेरे तैं
न्यों बोल्या बैठकां मैं नहीं जाणा बात बता दी तेरे तैं
भाई  तै मैं बतला ल्यूंगा इशारे से मैं धमकाई  थी।।
चाही लोगां तै बात करी घूंघट बीच मैं यो आण मरया
घूंघट खोलण की बाबत यो देवर नै घर ताण गिरया
पति मेरे नै साथ दिया पर कोण्या पार बसाई  थी।।
मिहने मैं एक मीटिंग हो इसा पंचायती कानून बताया
मैम्बर सरपंच करैं फैंसला जा फेर लागू करवाया
बिना मीटिंग फैंसले ले कै पंचायत पढ़ण बिठाई  थी।।
क्यूकर वार्ड का भला करूं तिरूं डूबूं जी मेरा होग्या
सरपंच के चौगरदें बदमाशां का यो पूरा  घेरा होग्या
घर आला बोल्या चाल सम्भल कै मैं न्यों समझाई  थी।।
न्यारी-न्यारी सारे कै हम क्यों होकै लाचार खड़ी बेबे
यो हमला घणा भारया सै बिना हथियार खड़ी बेबे
मजबूत संगठन बणावां रणबीर नै करी लिखाई  थी।

पन्दरा अगस्त

पन्दरा अगस्त
पन्दरा अगस्त सैंतालिस का दिन लाखां जान खपा कै आया।
घणे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।
सैंतालिस की आजादी ईब  दो हजार  लिया
बस का भाड़ा याद करो यो कड़ै सी जा लिया
सीमैंट का कटटा कितने का आज कौणसे भा लिया
एक गिहूं बोरी देकै सीमैंट हमनै कितना पा लिया
चिन्ता नै घेर लिये जिब लेखा-जोखा आज लगाया।।
आबादी बधगी  दोगणी पर नाज चौगुणा पैदा करया
पचास मैं थी जो हालत उसमैं बताओ के जोड़ धरया 
बिना पढ़ाई  दवाई खजाना सरकारी हमनै रोज भरया
ईमानदारी  की करी कमाई  फेर बी मनै कड़ सरया
भ्रष्टाचार बेइमानी नै क्यों सतरंगा जाल बिछाया।।
यो दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी पाई  थी
यो दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फौज बनाई  थी
यो दिन देखण नै के गांधी  बापू नै गोली खाई  थी
यो दिन देखण नै के अम्बेडकर ने संविधान  बनाई थी
नये-नये घोटाले सुणकै यो मेरा सिर चकराया।।
गणतंत्र दिवस पै कसम उठावां नया हरियाणा बणावांगे
भगत सिंह का सपना धुरा उसनै पूरा कर दिखावांगे
ना हो लूट खसोट देस मैं घर-घर अलख जगावांगे
या दुनिया घणी सुन्दर होज्या मिलकै हांगा लावांगे
रणबीर सिंह मिलकै सोचां गया बख्त किसकै थ्याया।।

Saturday, 6 June 2020

आजादी

आजादी
देश पै खतरा मंडरावै लडां आजादी बचाने की लड़ाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
1
पूरे देश मैं फैल रहया खतरा यो मनुवाद का बताया
चलता आवै खतरा देश मैं इबै सामंतवाद का बताया
बढ़ता जावै सै शिकंजा आज पूंजीवाद का बताया
इन सब तैं बड्डा खतरा गया साम्राज्यवाद का बताया
संविधान नै पूरा खतरा आजादी इन खतरों तैं चाही।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
2
एक खतरा और बताया सै यो हिंदुत्ववाद का सुनियो
दूजा खतरा और छाया सै तालिबानवाद का सुनियो
तीजा खतरा और दिखाया सै यो संघवाद का सुनियो
चौथा खतरा समझाया सै यो आतंकवाद का सुनियो
इन खतरयां तैं मिलकै या आजादी की आवाज लगाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
3
पितृ सत्ता बड़ी बीमारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
भ्रूण हत्या उधम मचारी इसतैं भी आजादी चाहिये सै
दहेज का उत्पीड़न भारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
बेरोजगारी बढ़ती जारी इसतैं भी आजादी चाहिए सै
आर्थिक संकट बढ़ता जावै इसकी बात गई छिपाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।
4
हिदू राष्ट्र तैं आजादी हो यो सबका ही भाई चारा हो
इस्लामी राष्ट्र तैं आजादी हो पूरी दुनिया का नारा हो
जातपात से आजादी हो चाहवै अम्बेडकर म्हारा हो
अभिव्यक्ति की आजादी हो सबनै संविधान प्यारा हो
रणबीर बनती जावै सै नबै दस की पालेबन्दी भाई।।
इसकी खातर ज्यान झोंकी हक म्हारा आजादी बताई।।

किसान मजदूर आंदोलन जिंदाबाद--310-----


किसान मजदूर आंदोलन जिंदाबाद
गरीब और गरीब होग्या इसा तरीका महारे विकास का
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का
1
कहते गरीबी दूर करांगे कई नई स्कीम चलाई गई
विकेंद्रीकरण कर दिया देखो बात खूब फैलाई गई
सल्फास किसान क्यों खावै के कारण उसके सत्यानाश का
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का
2
नाबरॉबरी और कितनी या भारत मैं बधांते जावांगे
भगत सिंह के सपन्यां आल्या समाजवाद कद ल्यावांगे
छल कपट छाग्या देश मैं के होगा भ्रीष्टाचारी घास का
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का
3
माणस अपणा आप्पा भूल गया पीस्से का आज दास हुया
बेईमानी बढ़ती जावै सै बाजार का दबाव आज खास हुया
स्कॉच चलै पांच *सितारा मैं ख्याल ना म्हारी प्यास का
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का
4
प्यार की जगां हवस छागी नँगे होवण की होड़ लगी रै
शरीर बेचकै एश करो बाजार मैं या दौड़ लगी रै
रणबीर सिंह बरोने आला साथ निभावै सोहनदास का
अमीर और अमीर होग्या इसा आरा चलाया विनाश का

भक्षक किसान के



जो भक्षक किसान के वे रक्षक बणकै भकावैं।।
जात पात मैं बाँट कै ये लीडरी खूब चमकावैं।।
1

कानून किसानों के हक मैं छोटूराम नै बणाये
धरती कुड़क नहीं होगी कर्जे माफ़ करवाये
भाखड़ा डेम बणा कै खेतों मैं पाणी ल्याये
कई बार अंग्रेजों को तीखे तेवर भी दिखाये
कोये बूझनिया कोण्या किसान क्यों फांसी खावैं।।
जात पात मैं बाँट कै ये लीडरी खूब चमकावैं।।
2
चौधरी चरण सिंह नै जमींदारी उन्मूलन कराया
यू पी का किसान मशीहा चौधरी जावै बतया
किसानों के हक मैं पूरा जीवन अपना लगाया
किसानों नै अपना नेता प्रधानमंत्री था बनाया
बागपत बड़ौत शामली के किसान भूल ना पावैं।।
जात पात मैं बाँट कै ये लीडरी खूब चमकावैं।।
3
पाछले कई सालां तैं किसान फांसी खा मरते
कई नेता मोलड़ कैहकै मजाक उसका करते
नीतियों का खामियाजा किसान आवैं धुरतैं भरते
नेता बहोतसे करैं दिखावा ना झूठ बोलण तैं डरते
करजे चढ़ाकै माफ़ करैं ये शोषण नीति चलावैं।।
जात पात मैं बाँट कै ये लीडरी खूब चमकावैं।।
4
किसान इस ढांचे भितरै आजाद होना मुश्किल लागै
पूरा सिस्टम पड़ै पलटना जिब किसान का करजा भागै
सिस्टम जिब पलटे जिब यो किसान नींद तैं जागै
जात धर्म के जाल तोड़कै हक कट्ठा होकै नै मांगै
रणबीर हर भेद तनै रक्षक भक्षक का समझावैं।।
जात पात मैं बाँट कै ये लीडरी खूब चमकावैं।।

कित का कौण बतावैं

आम तौर पर चुनाव के वक्त बहुत वायदे किये जाते हैं ।
 मगर चुनाव के बाद हालात बदल जाते हैं ।
क्या बताया इस रागनी में-------
बणे पाछै ना कोये बूझै कित का कौण बतावैं ।
जनता जाओ चाहे धाड़ कै घर अपना भरते जावैं।
ईब तलक तो बूझे ना आज याद आई सै म्हारी
गली गली मैं घूमै सै मंत्री जी की ईब महतारी
म्हणत लूट ली सै सारी म्हारे चक्कर खूब कटावैं।
पीसा दारू जात गोत का देख्या चाल्या दौर आड़ै
असली मुद्दे पाछै रैहगे असनायी नै पकड़या जोर आड़ै
म्हारा बनाया मोर आड़ै जा चंडीगढ़ मैं मौज उड़ावैं।
परवाह नहीं करते फेर म्हारी पढ़ाई और लिखाई की
बालकपन मैं बूढ़े होज्यां हमनै खावै चिंता दवाई की
ना सोचें म्हारी भलाई की उलटे हमपै इल्जाम लगावैं।
नित करते ये कांड हवाले समाज कति दबोया क्यों
म्हारी आह उटती ना माफ़ उनका कत्ल होया क्यों
साच हमतैं ल्हकोया क्यों ये सपने झूठे घणे दिखावैं।
रणबीर

भगत सिंह के सपने

भगत सिंह के सपने
सपने चकनाचूर करे थारे देश की सरकारां नै।
जल जंगल जमीन कब्जाए देश के सहूकारां नै ।
शिक्षा हमें मिलै गुणकारी ए भगत सिंह सपना थारा
मारै ना बिन इलाज बीमारीए भगत सिंह सपना थारा
भरष्टाचार कै मारांगे बुहारीए भगत सिंह सपना थारा
महिला आवै बरोबर म्हारीए भगत सिंह सपना थारा
बम्ब गेर आवाज सुनाईए बहरे गोरे दरबरां नै।
समाजवाद ल्यावां भारत मैंए भगत सिंह थारा सपना
कोए दुःख ना ठावै भारत मैंएभगत सिंह थारा सपना
दलित जागां पावै भारत मैंए भगत सिंह थारा सपना
अच्छाई सारै छावै भारत मैंए भगत सिंह थारा सपना
जनता चैन का सांस लेवै बिन ताले राखै घरबारां नै।
थारी क़ुरबानी के कारण ये आजादी के दिन आये
उबड़ खाबड़ खेत संवारे देश पूरे मैं खेत लहलाये
रात दिन अन्न उपजाया देश अपने पैरों पै ल्याये
चुनकै भेजे जो दिल्ली मैं उणनै हम खूब बहकाये
आये ना गोरयां कै काबू कर लिए अपने रिश्तेदारां नै।
समाजवाद की जगां अम्बानीवाद छाता आवै देखो
थारे सपने भुला कै धर्म पै हमनै लड़वावै देखो
मुजफ्फरनगर हटकै भगत सिंह तनै बुलावै देखो
दोनों देशों मैं कट्टरवाद आज यो बढ़ता जावै देखो
रणबीर खोल कै दिखावै साच आज के दरबारां नै।

ज़िब ज़िब जनता जागी

ज़िब ज़िब जनता जागी
जिब जिब जनता जागी यो जुल्मी शोषक झुका दिया।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै हम सबनै था भगा दिया।
1ण् आजाद देश का सपना पहोंच्या शहर और गाम मैं
भगत सिंह फांसी टूट्या जोश था देश म्हारे तमाम मैं
दुर्गा भाभी भी गेल्याँ जूटगी इस आजादी के काम मैं
लाखां नर और नारी देगे अपनी कुर्बानी ये गुमनाम मैं
क़ुरबानी बिना नहीं आजादी गांधी अलख जगा दिया।
2ण् गोर गए काले आगे गरीबी जमां मिट्टी नहीं सै देखो
बुराई बढ़ती आवै सै भिद्द इसकी पिटी नहीं सै देखो
अच्छाई संघर्ष करण लागरी आस घटी नहीं सै देखो
जनता सारी समझ रही या उम्मीद छुटी नहीं सै देखो
समतावादी समाज होगा संघर्ष का डंका बजा दिया।
3ण् जात पात हरयाणे की सै सबतैं बडडी बैरी भाईयो
विकास पूरा होवण दे ना दुनिया यह कैहरी भाईयो
वैज्ञानिक सोच काट बताई जड़ घणी गहरी भाईयो
अमीरां की जात अमीरी म्हारै गरीबी फैहरी भाईयो
म्हारी एकता तोड़ण खातर जात पात घणा फैला दिया।
4ण् दारू माफिया मुनाफा खोर इनकी पक्की यारी देखो
भ्रष्ट पुलिसिया ओछा नेता करता चौड़ै गद्दारी देखो
बिचौलिया घणे पैदा होगे म्हारी अक्ल मारी देखो
लाम्बे जन संघर्ष की हमनै करली सै तयारी देखो
लिखै रणबीर भगत सिंह नै यो रस्ता सही दिखा दिया ।







लाला हरदयाल

लाला हरदयाल

हिन्दुस्तान से बाहर कई जगह पर छाये क्रांतिकारी
सी आई डी गोरी सरकार को सब ख़बरें पहुँचारी

ग़दर पार्टी को बैन करो अमेरिका पर दबाव बनाया
लाला हरदयाल चलाते पार्टी गोरों ने ये पता लगाया
अमेरिकन सरकार ने मुकद्ममाँ लाला पर चलवाया
अनार्किज्म पर भाषण का दोष उन पर लगवाया

वारंट निकाले पुलिस ने हजार डॉलर के चालान पर

ग़दर पार्टी ने जमानत दिलवाई पार्टी के आह्वान पर

अमरीकी समाचार पत्रों ने अभियान चलाया भारी

गलत वारंट निकाले हैं इस बात पर खाल उतारी

अंग्रेजों के जूते मत चाटो यह जोरों से बात उठाई

लोकतन्त्र बदनाम किया है खबर अख़बारों में छाई

अमेरिका ने गोरों के दबाव में देना चाहा देश निकाला

अख़बारों में यह मुद्दा भी गया था पूरी तरह उछला

ग़दर पार्टी ने लाला जी को खुद भेजने का प्लान बनाया

लाला जी को स्विट्जेटलैंड सोच समझ के पहुंचाया

ग़दर पार्टी में लाला हरदयाल हमेशा याद किये जायेंगे

पंजाबी और हिन्दुस्तानी उनको कभी ना भुला पाएंगे

रणबीर

10. 9. 2015

गुंडागर्दी

गुंडागर्दी
इस गुंडा गर्दी नै बेबे ज्यान काढ़ ली मेरी हे ।
सफ़ेद पोश बदमशां नै इसी घाल दी घेरी हे ।

रोज तड़कै होकै त्यार मनै हो कालेज के म्हं जाणा
नपूता रोज कूण पै पावै उनै पाछै साइकल लाणा
राह मैं बूढ़े ठेरे बी बोली मारैं हो मुश्किल गात बचाणा
मुँह मैं घालन नै होज्यां मनै चाहवैं साबती खाणा
उस बदमाश नाश जले नै चुन्नी तार ली मेरी हे ।

मनै सहमी सी नै माँ आगै फेर बात बताई सारी
सीधी जाईये सीधी आईये मनै समझावै महतारी
तेरा ए दोष गिनाया जागा जै तणै या बात उभारी
फेर के रैहज्यागा बेटी ज़िब इज्जत लुटज्या म्हारी
माँ हाथ जोड़ कै बोली तेरे और भतेरी हे ।

नयों गात बचा बचा कै पूरे तीन साल गुजार दिए
एच ए यूं मैं लिया दाखला पढ़ण के विचार किये
वालीबाल मैं लिकड़ी आगै सबके हमले पार किये
मार मार कै तीर कसूते या छाती सालदी मेरी हे ।

कुछ दिन पहलम का जिकरा दूभर जीना होग्या
इन हीरो हांडा आल्याँ का रोज का गमीना होग्या
कई बै रोक मेरी राही खड़या एक कमीना होग्या
उस दिन बी मैं रोक लई घूँट खून का पीना होग्या
रणबीर कई खड़े रहैं साईकिल थम लें मेरी हे ।






पी पी पी

11. 9. 15
पी पी पी नै म्हारे देश का कर दिया बंटाधार
देखियो के होगा ।
पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप नै खत्म करे  खाते सरकारी
कारपोरेट कम्पनी जनता नै ये लूट लूट कै खाती जारी
मशीन मैं टेस्ट तीन हजार बिल मैं दिखावैं सात हजार
देखियो के होगा ।
सरकारी नौकरी खत्म प्राइवेट मैं आरक्षण कोन्या रै
कीमत चढ़गी आसमानाँ बच्चन के लक्षण कोन्या रै
आरक्षण पै जाट और पटेलां का जोर सै धुआंधार
देखियो के होगा ।
पी पी पी नै सरकारी पीपे जमा खाली कर दिए आज
गोज खाली पेट भी खाली कति बेहाली कर दिए आज
गरीबी भी बढ़ती जावै अम्बानी के बढ़े सैं अम्बार
देखियो के होगा ।
सरकारी मारया सरकार नै प्राइवेट खूब बढ़ाया देखो
अडाणी और अम्बानी कांग्रेस भाजपा चढ़ाया देखो
रणबीर आपाधापी मचा दी कौनी जनता तैँ प्यार
देखियो के होगा ।

कृष्ण जी सुनले तनै

पंडित श्री कृष्ण शर्मा सिसाना से फ़ौजी मेहर सिंह के साथ थे ।
 दोनों लिखारी थे। कई बार आपस में बातचीत होती उनकी।
एक बार फौजी मेहर सिंह ने उनको एक बात सुनायी.
कृष्ण जी सुनले तनै दिल की या बात सुनावां सां
गोरे भुंडे लागैं सैं इणनै मार भगाना चाहवाँ सां ।
ईष्ट इंडिया कम्पनी नै पहलम व्यापार फैलाया
राजवाड़े हुआ करैं थे एक एक पै राज जमाया
जात धर्म पै बंटे हुए आपस मैं राड़ बढ़ावां सां ।
डेढ़ सौ साल होंगे म्हारे पै इणनै पूरा राज जमाया
रेल बिछाई व्यापार खातर लूट का जाल बिछाया
ठारा सौ सतावन मैं आजादी का बिगुल बजावां सां ।
पहली जंग आजादी की कई कारणां हार गए रै
गोरयां नै कसे शिंकजे हो घने वे होशियार गए रै
भगत सिंह महात्मा गांधी लड़ते लड़ाई पावां सां ।
जावेंगे ये गोरे लाजमी आई एन ए मैं आये फौजी
छोड़ अंगरेजी सेना नै बोस गेल्याँ ये पाये फौजी
रणबीर देश की खातर जज्बा खूब दिखावां सां ।

अंग्रेजां नै घणे जुल्म ढाये

मेहर सिंह एक दिन मोर्चे पर लेटे लेटे सोचता है।
क्या बताया भला ््
अंग्रेजां नै घणे जुल्म ढाये अपणा राज जमावण मैं ।
फूट गेरो राज करो ना वार लाई नीति अपनावण मैं ।
किसानों पर घणे कसूते अंग्रेजों नै जुल्म कमाये थे
कोल्हू मैं पीड़ पीड़ मारे लगान भी उनके बढ़ाये थे
जंगलां की शरण लिया करते ये पिंड छुटवावण मैं ।
मजदूरों को बेहाल करया ढाका जमा उजाड़ दिया
मानचैस्टर आगै बढ़ा जलूस ढाका का लिकाड़ दिया
ढाका की आबादी घटी माहिर मलमल बणावण मैं।
ठारा सौ सतावन की जंग मैं  देशी सेना बागी होगी
अंग्रेजां के हुए कान खड़े या चोट कसूती लागी होगी
आजादी की पहली जंग लड़ी गयी थी सत्तावण मैं।
युवा घने सताए गोरयां नै सारे रास्ते लांघ दिए देखो
भगत सिंह राजगुरु सुखदेव ये फांसी टांग दिए देखो
रणबीर सिंह करै कविताई या जनता जगावण मैं।

हर क्यान्हें मैं मिलावट होगी

हर क्यान्हें मैं मिलावट होगी
हरयाणे का हाल सुणो के के होवै आज सुनाऊँ मैं ।
मिलावट छागी चारों कूट मैं पूरी खोल बताऊँ मैं।
बर्फी खोआ मिलें बनावटी भरोसा नहीं मिठाई का
नकली टीके तैं मरीज मरते भरोसा नहीं दवाई का
आट्टा और मशाले नकली ना भरोसा दाल फ्राई का
पानी प्रदूषित हो लिया भरोसा नहीं दूध मलाई का
कुछ भी खाँते डर लागै सोचें जाँ ईब के खाऊँ मैं।
बीज नकली खाद नकली ना बेरा पाटै असली का
डीजल पेट्रोल मैं मिलावट ना बेरा पाटै नकली का
कीट नाशक घुले पाणी मैं ना बेरा पाटै बेअक्ली का
कद नकली धागा टूटज्या ना बेरा पाटै तकली का
पाणी सिर पर कै जा लिया ना कति झूठ भकाऊं मैं।
राजनीति मैं मिलावट होगी नकली असली होगे रै
ये मिलावटी आज खेत मैं  बीज बिघण के बोगे रै
माणस बी आज दो नंबर के नैतिकता सारी खोगे रै
असली माणस नकली के बोझ साँझ सबरी ढोगे रै
बैठया बैठया सोचें जाँ ईंनतै कैसे पिंड छुटाऊं मैं।
मिलावटी चीज तो बिकती यो दीन ईमान बिकता
माणस मरवाकै बी इनका पेट जमा नहीं छिकता
मिलावट के अन्धकार मैं कोए कोए बस दिखता
जनता एकता के आगै यो मुश्किल नकली टिकता
रणबीर जतन करकै नै बंजर के मैं फूल उगाऊं मैं ।
21. 1. 2015











पृथ्वीसिंह बेधड़क

पृथ्वीसिंह बेधड़क को यू पी और हरयाणा के लोग
अच्छी तरह से जानते हैं उनकी एक रचना ;
भजन पेश  है
हाय रोटी
जय जय रोटी बोल जय जय रोटी ।
बिन रोटी बेकार जगत मैं दाढ़ी और चोटी्बोल जय
गर्मी सर्दी धूप बर्फ जिसनै सर पै ओटी।
पूंजीपति नै बुरी तरह उसकी गर्दन घोटी्बोल जय।1।
दाना खिलाया दूब चराई और हरी टोटी।
जिस दिन ब्याई खोल कै लेग्या सूदखोर झोटी्बोल जय।2।
मंदिर मस्जिद और शिवाले की चोटी खोटी।
बिन रोटी कपड़े के ये सब चीजें हैं छोटी् बोल जय।3।
नहीं हम चाहते महल हवेली नहीं चाहते कोठी।
हम चाहते हैं रोटी कपड़ा रहने को तम्बोटी्बोल जय।4।
मेहनतकश  कशो एक हो जाओ कस कर लँगोटी।
सारी दुनिया तेरे चरण मैं फिरै लौटी लौटी ्बोल जय ।5।
जिसनै रोटी छीन हमारी की गर्दन मोटी ।
पृथ्वीसिंह श्बेधडकश् होय उनकी ओटी बोटी।6।

खाई

खाई
खाई चौड़ी होंती आवै सै इसनै आज कौण पाटैगा।
गरीब जनता का हाथ सही मैं आज कौण डाटैगा।
बधगी घर घर मैं खाई या बधगी पूरे समाज मैं
देशां के बीच की खाई ना बताते पूरे अंदाज मैं
अमरीका टोप पै रहवण नै आतंकवाद पै काटैगा।
एक देश के भित्तर भी कई ढाल की खाई दीखैं
एक अरबपति बनरया दूजे ये भूखे पेट नै भींचें
शांति कड़े तैं आवैगी जब कारपोरेट इसतै नाटैगा।
लड़ाई बढ़ेगी इस तरियां विनास की राही करकै
पिचानवै हों कठे होंवैंगे चौड़ी होंती खाई करकै
नहीं तो पर्यावरण प्रदूषण सबका कालजा चाटैगा।
लोभ लालच और मुनाफ़ा और बधारे इस खाई नै
समाज गया रसातल मैं चौड़ै भाई  मारै सै भाई नै
रणबीर सिंह समझावै देखो छंद यो न्यारा छांटैगा।

साथी वीरेंदर शर्मा---320-----

साथी वीरेंदर शर्मा
सन 1992 में साक्षरता आंदोलन के दौर में साथी ने कार में आग लगने पर अपनी जान जोखिम में डाल कर कर की सवारियों को तो बचा लिया मगर सड़क पर फैले पैट्रोल की आग में बुरी तरह झुलस गया और दो तीन दिन तक मौत से संघर्ष किया।
ज्यांन की परवाह की ना कूदया पीड़ा देख परायी रै।।
जवानी खपादी वीरेंद्र नै समझ दूज्यां की भलाई रै।।
उसतै बढ़िया दीखै कोण्या भाई अकल इंसान की
म्हारे ताहिं राह दिखाई सै उसनै असल इंसान की
भुलाये तैं भी ना भूली जा भाई शक्ल इंसान की
म्हारे ताहिं तस्वीर बनाई उसनै अटल इंसान की
न्यों कहैया करै था साथी मिलकै लडांगे लड़ाई रै।।
लोगों के मोल उसनै रोज घटते बढ़ते देखे भाई
बदमाशों की चांदी आड़ै शरीफ लोग पिटते देखे
लोगों मैं बढ़ी बेरोजगारी सही राह तैं हटते देखे
शहीद भगत सिंह से वीर आजादी पै मिटते देखे
भगत सिंह की राही चल्या वीरेंद्र वीर सिपाही रै।।
ज्ञान विज्ञान समिति मैं थी साथी की कताई हुई
एक एक बात कै उप्पर थी समिति मैं सफाई हुई
समाज कैसे चलता म्हारा बैठकै पूरी धुनाई हुई
गया समझाया हमेशा गरीब की क्यूँ पिटाई हुई
शहीद वीरेंद्र समझ गया अनपढ़ता की खाई रै।।
साथी तेरे सपनों को हम मंजिल तक ले जायेंगे
सच कहना अगर बगावत हम गीत यही गायेंगे
आज नहीं तो कल साथी पूरी दुनिया पर छायेंगे
मानव का बैरी मानव हो ना ऐसा जमाना लायेंगे
रणबीर ईबे रंग अधूरा बनाई तसबीर जो भाई रै ।।

डॉक्टर की पुकार

डॉक्टर की पुकार
म्हारी आह पै माचै रोल्ला उनका खून भी माफ़ होज्या ।
सरकार तो न्यों चाहवै सै या म्हारी तनखा हाफ होज्या ।
दो साल तरले करते होगे करते कोए सुनायी ना
भिखारी जिसा ब्यौहार करते बात सिरै चढाई ना
हमनै करी कोताही ना या बात जनता मैं साफ़ होज्या।
पांच साल मैं डाक्टरी पढकै सारा पी एच सी चलावां
चौबीस घण्टे लागे रहवाँ हम बैठ कै थोड़े से सुस्तावां
तनखा बढ़वाना चाहवाँ शासन जलकै नै राख होज्या।
म्हारी एकता तोडण खातर घणी गहरी चाल चलैं
डरावैं और धमकावैं सैं कदे ना ये सीढ़ी ढाल चलैं
चाल उल्टी तत्काल चलैं नुक्सान चाहे लाख होज्या।
म्हारा कैरियर बर्बाद करकै बताओ तमनै के थ्यावै
म्हारा हक हमनै मिलज्या बता किसे का के जावै
रणबीर तो साथ निभावै दुनिया चाहे खिलाफ होज्या।

मजदूर की हालत

मजदूर की हालत
मनै मजदूरी ना मिलती हुया दुखी घरबार मेरा।।
कितै चांदना नहीं दीखै छाया चारों तरफ अँधेरा।।
फुटया ढूंढ एक कमरा मुश्किल हुया गुजारा रै
चौमासे मैं मुशीबत भारी यो घर टपकै म्हारा रै
माछर खावैं ताप चढ़ै खावण नै आवै सूना डेरा।।
पड़ौसियाँ कै सोणा पड़ै संकट होज्या घणा भारी
रोजगार कोए थयावै ना रूखी सूखी रोटी म्हारी
कहैं कामचोर दारू बाज काम नै ना करै जी तेरा।।
दिन रात मण्डी रैहवै बीमारी मैं भी घरआली या
भैंस पाल दूध बेचकै नै करती म्हारी रूखाली या
बालकां की कड़ै पढ़ाई ज़िब जीने का नहीं बेरा।।
कुआँ न्यारा भेंट करैं ना राजी साथ बिठा कै रै
महंगाई नै लूटे जहर जात धर्म का फैला कै रै
रणबीर अंसमझी मैं कहवैं यो किस्मत का फेरा।।

Friday, 5 June 2020

अजन्मी बेटी

अजन्मी बेटी
चिंघाड़ अजन्मी बेटी की हमनै देती नहीं सुणाई।
किस्सा जमाना आग्या हुये माणस कातिल अन्याई।
पेट मैं मरवाना सिखया तकनीक इसी त्यार करी
लिहाज और शर्म सारी पढ़े लिख्याँ नै तार धरी
महिला संख्या घटती जा दुनिया मैं हुई रूसवाई।
परम्परा और कई रिवाज ये बुराई की जड़ मैं रै
दुभांत महिला की गेल्याँ होवै सबके बगड़ मैं रै
छोरे की खातर छोरी पै कटारी पैनी सै चलवाई।
महिला कम हुई सैं ज्यां इनपै अत्याचार बढ़गे
खरीद फरोख्त होण लगी साथ मैं व्यभिचार बढ़गे
घर के भित्तर और बाहर ज्यांन बिघन मैं आई।
पुत्र लालसा की जड़ घनी गहरी म्हारे समाज मैं
दोयम दरजा और दुभांत छिपी सै इस रिवाज मैं
इस आधुनिक समाज नै और रापट रोल मचाई।
महिला शोषण के खिलाफ आवाज उठण लगी
विरोध की चिंगारी आज हरियाणा मैं दिखण लगी
समाज के एक हिस्से नै बराबरी की मांग उठाई।
महिला नै इस माहौल मैं अपने कदम बढ़ा दिए
पिछड़ी सोच आल्याँ के कई बै छक्के छुड़ा दिए
रणबीर नै भी साथ मैं  या अपनी कलम घिसाई ।


गरीब की बहू

गरीब की बहू
एक गरीब परिवार की बहू खेत में घास लेने गई।
वहां दो पड़ौस के लड़के उसे दबोच लेते हैं।
 क्या बनती है््
कोए सुणता होतै सुणियो दियो मेरी सास नै जाकै बेरा।
ईंख के खेत मैं लूट लई छाग्या मेरी आंख्यां मैं अन्धेरा।
चाल्या कोण्या जाता मेरे पै मन मैं कसूती आग बलै सै
दिमाग तै कति घूम रहया यो मेरा पूरा गात जलै सै
पिंजरे मैं घिरी हिरणी देखो या देखै कितै कुंआ झेरॉ।
म्हारे दो पड़ौसी उड़ै खेत मैं घात लगायें बैठे थे
मुँह दाब खींच ली ईंख मैं ईथर भी ल्यायें बैठे थे
गरीब की बहू ठाड्डे की जोरू मनै आज पाटग्या बेरा।
यो काच्चा ढूंढ रहवण नै भरया गाळ मैं कीचड़ री
पति नै ना दिहाड़ी मिलती घरके कहवैं लीचड़ री
गुजारा मुश्किल होरया सै बेरोजगारी नै दिया घेरा।
नहां धोकै बाळ बाहकै घूमै खाज्या किलो खिचड़
उंकी इसी हालत घर मैं जण होसै भैंस का चीचड़
खिलौने बेच गालाँ मैं दो रोटी का काम चलै मेरा।
घरां आकै रिवाल्वर दिखा धमकाया सारा परिवार
बोल चुपाके रहियो नातै चलज्यागा यो हथियार
भीतरला रोवै लागै सुना मनै यो बाबयां बरगा डेरा।
मेरे बरगी बहोत घनी बेबे जो घुट घुट कै नै जीवैं
दाब चौगिरदें तैं आज्यावै हम घूँट जहर का पीवें
यो रणबीर कलम उठाकै कहै हो लिया सब्र भतेरा।



इंदिरा गांधी

इंदिरा गांधी
तूँ  सुनिए इंदिरा गांधी  क्यूँ हमनै फिरै भकांदी
म्हारी नहीं समझ मैं आंदी तेरा समाजवाद कद आवैगा।
एक तरफ तूँ आपणे आप लाखों रूपया खर्च करै
दूजी तरफ एक गरीब आदमी भूखे पेट तैं तड़फ मरै
करै क्यूँ घोर अत्याचार सै तेरे बंगले कोठी कार सै
गरीब का रहडू बेकार सै वो क्यूकर दिल संझावैगा।
एक तरफ तूँ करै घोषणा सबके बराबर के अधिकार
दूजी तरफ कोई मांगै रोटी तूँ खोलदेै जेलों के द्वार
या कार माड़ी इंदिरा ताई तूँ ल्यांति जावै तानाशाही
तेरे जांदी के दें पैर दिखाई  राज पाट तेरा यो जावैगा।।
करकै लूट लूटेरे ख़ागे हम कैसे सुख का सांस जियां
कमेरे वर्ग का खून चूसरे तेरे टाटा बिरला डालमियां
लोक सभा मैं मददगार इनके रेडियो टी वी तार इनके
बैंक कारखाने कार इनके यो समाजवाद कूण ल्यावैगा।।
तेरे ढोल के पोल खुलगे सर्वहारा ईब जाग उठया सै
सीना तान खड़या होग्या ज्यूँ मार फुंकार नाग उठया सै
रूठ्या सै मजदूर किसान यो खोसैगा तेरे तैं कमान
रैहज्याओगे सब हैरान  जब यो दम तमनै दिखावैगा।।
1983 की डायरी से