Saturday, 7 May 2022
56 RAGNI
KISAN RAGNI 37
Sunday, 6 February 2022
ब्रूनो
*ब्रूनो नै चर्च में पढ़कै कहते पादरी बनना चाहया था।।*
*कॉपरनिकस की किताब पढ़कै उसनै पल्टा खाया था।।*1
सवाल उठाकै वो क्यों धरती सूरज पै बहस चाहवै
आगै अध्ययन करकै नै क्यों नहीं पता लगाया जावै
ज्यों ज्यों अध्ययन करै सूरज चौगरदें धरती घुमती पावै
चर्च की ताकत और गुस्सा पूरी ढ़ालां समझ मैं आवै
*ब्रूनो नै इसे कारण तैं इटली छोडण का मन बनाया था।।*
2
कुछ विद्वान सहमत होगे फेर साथ कदम नहीं धरया
दिन दूनी रात चौगुनी प्रचार करता ब्रूनो नहीं डरया
आम जनता का दिल उसनै यो पूरी तरियां दखे हरया
प्रयाग पैरिस इंग्लैंड जर्मनी मैं उसनै था प्रचार करया
*चर्च की दाब नहीं मानी हारकै चर्च नै भगोड़ा बताया था।।*
3
ज्यों ज्यों प्रचार करया चर्च का गुस्सा बढ़ावै था
ब्रूनो भी बढ़ता गया आगै ना पाछै कदम हटावै था
चर्च की छलां तैं बताओ कितने दिन बच पावै था
वैचारिक समझौता ना करूंगा यो सन्देश पहूंचावै था
*चर्च नै पकड़ण की खातर फेर कसूता जाल बिछाया था।।*
4
चर्च मानस तैयार किया वो ब्रूनो धोरै पढ़ना चाहवै सै
फीस तय करदी उसकी फेर एक पते कै ऊपर बुलावै सै
ब्रूनो भी शिष्य एक बनैगा मेरा सोच कै नै सुख पावै सै
चर्च की चाल सोची समझी समझ उसकी ना आवै सै
*गिरफ्तार कर लिया चर्च नै बहोत घणा गया सताया था ।।*
5
अमानवीय यातना दी चर्च नै ब्रूनो अपने मत नै छोड़ दे
पहले आली सोच कांहीं अपनी सोच नै ब्रूनो मोड़ दे
छह साल ताहिं मंड्या रहया चर्च ब्रूनो की कड़ तोड़ दे
लोहे के सन्दूक मैं राख्या ताकि मौसम यो शरीर निचौड़ दे
*यो अत्याचार चर्च का ब्रूनो का मनोबल गिरा ना पाया था ।।*
6
न्यायालय का ड्रामा रच कै घनी भूंडी सजा सुनवाई
इसी सजा दयो इसनै एक बी खून की बूंद ना दे दिखाई
ब्रूनो उलट कै बोल्या था सरकार घणी डरी औड़ पाई
रोम के चौंक मैं ब्रूनो खम्भे कै ल्याकै बांध्या था भाई
*रणबीर कपड़ा ठूंसकै मूंह मैं ब्रूनो जिंदा उड़ै जलाया था ।।*
प्यार करनिये
बोल बख्त के
हरियाणा में पंचायतों की सख्ती और रोक के बावजूद भी बढ़ रहे हैं प्रेम विवाह के मामले | सच्चा प्यार कभी नहीं झुकता |क़्या लिखा कवि ने भला--------
सच्चा प्यार करणियां नै कदे पाछै कदम हटाये कोन्या ।।
एक बर जो मन धार लिया मुड़्कै फेर लखाये कोन्या ।।
हीर रांझा नै अपने बख्तां मैं पूरा प्यार निभाया कहते
लीलो चमन हुये समाज मैं घणा ए लोड़ उठाया कहते
सोनी महिवाल सच्चे प्रेमी मौत को गले लगाया कहते
आज के पंचायती बेरा ना प्रेमियां नै क्यों नहीं सहते
सुण फरमान पंचायतियां के कदे प्रेमी घबराये कोन्या ।।
एक बर जो मन धार लिया मुड़्कै फेर लखाये कोन्या ।।
नल दमयन्ती का किस्सा हम कदे कदीमी सुणते आवां
दमयन्ती नै वर माला घाली या सच्चाई कैसे भुलावां
अपना वर आपै ए चुन्या क्यों इस परम्परा नै छुपावां
अपनी मर्जी तै जो ब्याह करैं उनकै फांसी क्यों लगावां
हरियाणा के प्रेमी जोड़े पंचायतां कै काबू आये कोन्या ।।
एक बर जो मन धार लिया मुड़्कै फेर लखाये कोन्या ।।
सत्यवान और सावत्री का किस्सा बाजे लख्मी गागे आड़ै
सावत्री लड़ी यमराज तै वे कहते पिंड़ा छुड़ा भागे आड़ै
सावत्री तै इतनी आजादी देकै लिखणियां बी छागे आड़ै
हरियाणा के आज के जोड़े फेर क़्यों फांसी पागे आड़ै
हरियाणा नम्बर वन प्यार मैं इसे गाने गाये कोन्या ।।
एक बर जो मन धार लिया मुड़्कै फेर लखाये कोन्या ।।
जातां बीच मैं प्रेम विवाह का चलन यो बढ़ता आवै सै
फांसी का फंदा दीखै साहमी पर प्यार की पींग बढ़ावै सै
इसी के चीज बताई प्यार मैं जो प्रेमियां नै उकसावै सै
रणबीर सोचै पड़्या खाट मैं बात समझ नहीं पावै सै
तहे दिल तै साथ सूं थारै मनै झूठे छन्द बनाये कोन्या ।।
एक बर जो मन धार लिया मुड़्कै फेर लखाये कोन्या ।।
चौधरी छोटू राम
चौधरी छोटू राम
****1***पंजाब मैं हिन्दू मुस्लिम सिख की पूरी एकता बनाई थामनै ॥
कट्टर वादियां तैं उन दिनां मैं थी जमकै धुल चटाई थामनै ॥
1
बीस मैं कांग्रेस छोड़ कै या यूनियनिस्ट पार्टी बनाई थी
पूरे पंजाब मैं यूनियनिस्ट पार्टी की लहर चलाई थी
महाजन संस्कृति की उन दिनाँ बही की लूट मिटाई थामनै ।।
कट्टर वादियां तैं उन दिनां मैं थी जमकै धुल चटाई थामनै ॥
2
गरीब किसान की जमीन कुड़की होवण तैं बचाई थी
हजारों हजार नौजवानां की फ़ौज मैं भर्ती कराई थी
भाखड़ा डैम बनवा करकै भाखड़ा नहर लिकड़वाई थामनै ॥
कट्टर वादियां तैं उन दिनां मैं थी जमकै धुल चटाई थामनै ॥
3
दोनों महायुद्धां मैं गोरयां की कहैं गलत मेर कटाई थी
कुछ भी हो छोटू राम पंजाब की सोयी जनता जगाई थी
कांग्रेस और मुस्लिम लीग तैं लेकै टक्कर दिखाई थामनै ॥
कट्टर वादियां तैं उन दिनां मैं थी जमकै धुल चटाई थामनै ॥
वकालत के बदले तौर तरीके नयी रीत निभाई थी
पाकिस्तान ना बनने देवां कठ्ठे होकै आवाज उठाई थी
रणबीर बरोणिया के बाबू की मदद खूब करी बताई थामनै।।
कट्टर वादियां तैं उन दिनां मैं थी जमकै धुल चटाई थामनै ॥
***2***
जन्म दिवस पर
#चौधरी छोटू राम लाला घासीराम से दो चार
क्यूकरै झज्जर के स्कूल मैं छोटूराम नै दाखला पाया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
1
स्कूल बीस किलोमीटर दूर गढ़ी सांपले तैं बताते
पैदल चाल कै आसंडे कै छारा जौन्धी म्हां कै जाते
मिहने मैं दो दिन तै बालक आण जाण मैं वे खपाते
आटा दाल घी घर तैं होस्टल मैं लेजाकै जमा कराते
छुटियाँ मैं घर नै आकै नै खेती बाड़ी मैं हाथ बंटाया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
2
मोहम्मद खान होस्टल मैं कई बात बताया करता
छोटू राम खेत मैं भी किताब लेकै नै जाया करता
सारे सूबे मैं फस्ट आईये मास्टर न्यों चाहया करता
वोहे अखबार पढ़ता रोज जो स्कूल मैं आया करता
छोटू राम का कठोर परिश्रम आखिर तै रंग ल्याया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
3
रिजल्ट नै छोटूराम का हौंसला घना बढ़ाया देखो
आगै जरूरी पढ़ना सै यो पक्का मन बनाया देखो
मौका देखकै बाबू तैं पढण का जिक्र चलाया देखो
आगै पढ़ने की सुनकै नै बाबू नै नाक चढ़ाया देखो
नौकरी टोहले छोटी मोटी बाबू नै छोटू समझाया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
4
पसीनयां मैं नहाए पहोंचे लाला जी जाकै ठाया था
इशारा कर डोरी कान्ही पंखा बाबू खीचै चाहया था
उसका बेटा खाली बैठया छोटूराम कै छोह आया था
छोटूराम नै लाला जी को कसूती ढालाँ धमकाया था
रणबीर पंखे की घटना नै छोटू राम को दहलाया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
**3***
आज चौधरी छोटू राम की जयन्ती के मौके पर ।
बताते हैं कि चौधरी छोटू राम किसान को दो बातें सीखने की सीख देते थे। क्या बताया भला-------
सुण भोले से किसान दो बात मेरी मान ले।
बोलना ले सीख और दुश्मन को पहचान ले।
1
म्हारी कमाई कित जावै इसका बेरा लाणा हो
दुश्मन लूटैं मित्तर बणकै इसकी तह मैं जाणा हो
पूरा हिसाब लगाणा हो भले बुरे का सही ज्ञान ले।
बोलना ले सीख और दुश्मन को पहचान ले।
2
चोखी धरती आले का छोरा मनै बेरुजगार दिखा
मेहनत करने आले का मनै भरया परिवार दिखा
अपणे पै इतबार दिखा सुण लगाकै ध्यान ले।
बोलना ले सीख और दुश्मन को पहचान ले।
3
घोड़े घास की यारी या बता क्यूकर मिल ज्यागी
बकरी शेर की यारी या सारी दुनिया हिल ज्यागी
या यारी कैसे खिल ज्यागी तोड़न की ईब ठाण ले।
बोलना ले सीख और दुश्मन को पहचान ले।
4
इस सिस्टम के कारण भरष्टाचार सब होरे सैं
बाँट कै जात धर्म पै लूटैं मिलकै काले गोरे सैं
भूखे म्हारे छोरी छोरे सैं रणबीर बचा जान ले।
बोलना ले सीख और दुश्मन को पहचान ले।
***4***
चारों कांहीं
चारों कांहीं तैं लुट पिट लिया अपणा ठिकाणा पाज्या रै।।
जातपात और इलाके ऊपर के थ्याया मनै बताज्या रै।।
1
छोटू राम नै राह दिखाया बोलना ले सीख किसान रै
दुश्मन की पहचान करकै तोलना ले सीख किसान रै
तीस साल मैं हिरफिर कै कर्जा हट हट कै नै खाज्या रै।।
2
जात गोत इलाके पर किसान कसूते बांट दिए देखो
किसान की कमाई लूट लई सबतैं न्यारे छांट दिए देखो
आज अन्नदाता क्यों सै भूखा कोए मनै समझाज्या रै।।
3
दो किले धरती बची थी बीस लाख किले के लगवाए
धरती गई चालीस लाख फेर तनै वे भी खा पदकाये
चकाचौंध मची घणी कसूती आंख जमा चुंधियाज्या रै।।
4
पिस्से आले तेरी कौम के क्यों तनै तड़पता छोड़ गए
किमैं दलाल बने ठेकेदार तेरे तैं क्यों नाता तोड़ गए
रणबीर किसान सभा मैं सोच समझ कै इब तो आज्या रै।।
फरवरी 2014
****5***
एक किसान सर छोटू राम को याद करता है
एक बै हट कै आज्य छोटूराम किसान तनै आज बुलावै सै ॥
सन चालीस का कमेरा तनै आज बी उतना ए तै चाहवै सै ॥
1
म्हणत लगन पक्का इरादा थारे मैं गुण पूरी मिकदार मैं
गढ़ी सांपला मैं पैदा होकै थमनै देखि गरीबी परिवार मैं
जिक्र हुया थारा संसार मैं छोटूराम किसे कानून बनावै सै ॥
सन चालीस का कमेरा तनै आज बी उतना ए तै चाहवै सै ॥
2
धरती कुड़क ना होवै किसानी की यो थामनै कानून बनाया
गोड्यां ताहिं कर्जे मैं धँसरे थे थामनै आकै आजाद कराया
एक बै साँस उलगा सा आया वो खरना आज बी गुण गावै सै ॥
सन चालीस का कमेरा तनै आज बी उतना ए तै चाहवै सै ॥
3
खूब जतन करे हमनै ऊबड़ खाबड़ खेत संवारे फेर दखे
भाखड़ा डेम का बिजली पानी होगे वारे के न्यारे फेर दखे
दस तैं बीस मणे गीहूँ म्हारे फेर दखे म्हणत रंग ल्यावै सै ॥
सन चालीस का कमेरा तनै आज बी उतना ए तै चाहवै सै ॥
4
खाद बीज ले कर्जे पै म्हणत तैं खेत क्यार म्हारे लहलागे रै
फसल ले जिब मण्डी पहोंच्या भा कति तले नै ये आगे रै
बहोत किसान फांसी खागे रै रणबीर नहीं झूठ बहकावे सै ॥
सन चालीस का कमेरा तनै आज बी उतना ए तै चाहवै सै ॥
****6****
चौधरी सर छोटू राम
रोहतक जिले में गढ़ी सांपला यो नाम सुण्या होगा।।
इसे गाम का रहने आला यो छोटू राम सुण्या होगा।।
1
हलपति को गढ़पति और गढ़पति को छत्रपति बनाऊं
यो सपना संजोया था थामनै सबनै खोलकै नै सुनाऊं
सुखीराम सीरिया के घर मैं जन्मया रामरिछपाल बताऊँ
सबतै छोटा ज्यां बुलाया सबनै यो छोटू राम दिखलाऊँ
नटखट बताया बचपन मैं यो किस्सा आम सुण्या होगा।
इसे गाम का रहने आला यो छोटू राम सुण्या होगा।।
2
गाम के लड़कपन के खेल सीख लिए थे सारे भाई
ग्वाल्यां गेल्याँ आवारागर्दी सूरां कै डण्डे मारे भाई
जोहड़ मैं खूब नहाना गालां मैं दिए किलकारे भाई
पील अर पिच्चू तोड़ कै मिलकै नै दोस्त खारे भाई
पीछा छुड़ाने नै स्कूल भेज्या किस्सा तमाम सुण्या होगा
इसे गाम का रहने आला यो छोटू राम सुण्या होगा।।
3
होनहार बिरवान के होत चीकने पात बताये लोगो
ग्यारह साल की उम्र मैं फेरे उसतैं थे दिवाये लोगो
ज्ञानो देवी खेड़ी जट तैं ब्याह कै नै ल्याये लोगो
आगे नै गए बढंते फेर ना पाछै कदम हटाये लोगो
लाला जी के घर तैं जो लिया पैगाम सुण्या होगा
इसे गाम का रहने आला यो छोटू राम सुण्या होगा।।
4
दसवीं करे पाछै पढ़ाई की मुश्किल आई बताई देखो
मिशन कालेज तैं बीच मैं पड़गी छोड़नी पढ़ाई देखो
दो प्रोफेसर की टीम जाकै हटकै दिल्ली ल्याई देखो
रणबीर हाँगा ला करी एफे गाम की श्यान बढ़ाई देखो
इसतैं आगै मदद करी किस्सा छाजू राम सुण्या होगा
इसे गाम का रहने आला यो छोटू राम सुण्या होगा।।
*****7***
चौधरी छोटू राम लाला घासीराम से दो चार
क्यूकरै झज्जर के स्कूल मैं छोटूराम नै दाखला पाया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
1
स्कूल बीस किलोमीटर दूर गढ़ी सांपले तैं बताते
पैदल चाल कै आसंडे कै छारा जौन्धी म्हां कै जाते
मिहने मैं दो दिन तै बालक आण जाण मैं वे खपाते
आटा दाल घी घर तैं होस्टल मैं लेजाकै जमा कराते
छुटियाँ मैं घर नै आकै नै खेती बाड़ी मैं हाथ बंटाया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
2
मोहम्मद खान होस्टल मैं कई बात बताया करता
छोटू राम खेत मैं भी किताब लेकै नै जाया करता
सारे सूबे मैं फस्ट आईये मास्टर न्यों चाहया करता
वोहे अखबार पढ़ता रोज जो स्कूल मैं आया करता
छोटू राम का कठोर परिश्रम आखिर तै रंग ल्याया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
3
रिजल्ट नै छोटूराम का हौंसला घना बढ़ाया देखो
आगै जरूरी पढ़ना सै यो पक्का मन बनाया देखो
मौका देखकै बाबू तैं पढण का जिक्र चलाया देखो
आगै पढ़ने की सुनकै नै बाबू नै नाक चढ़ाया देखो
नौकरी टोहले छोटी मोटी बाबू नै छोटू समझाया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
4
पसीनयां मैं नहाए पहोंचे लाला जी जाकै ठाया था
इशारा कर डोरी कान्ही पंखा बाबू खीचै चाहया था
उसका बेटा खाली बैठया छोटूराम कै छोह आया था
छोटूराम नै लाला जी को कसूती ढालाँ धमकाया था
रणबीर पंखे की घटना नै छोटू राम को दहलाया।।
संकट झेल झेल कै भी उसनै पढ़ाई मैं ध्यान लगाया।।
****8***
चौधरी छोटू राम की जयंती के मौके पर एक बात। क्या बताया भला--
हरियाणे के रोहतक मैं गढ़ी सांपला गाम सुण्या होगा ।।
इसे गाम का रहने आला चौधरी छोटू राम सुण्या होगा ।।
पैदा होकै गरीब घर मैं गरीबी का कष्ट झेल्या खूब
कां डंका और खेल कबड्डी साथ बालकां की खेल्या खूब
दंश गरीबी का ठेल्या खूब यो किस्सा तमाम सुण्या होगा ।।
उसकै जनून था पढ़ाई का लालटेन रौशनी मैं पढता
देख हालात मजदूर किसान की यो छोह घना बढ़ता
मेहनत की सीढ़ी चढ़ता गया शिखर नाम सुण्या होगा ।।
किसान कर्जे तैँ बाहर आवै इसे कानून बनाये फेर
अंग्रेजां की हकूमत ताहिं ये राह उसनै दिखाए फेर
इलाके आले समझाए फेर शिक्षा का पैगाम सुण्या होगा।।
सेकुलेरिज्म का हिम्माति था जिन्हा को ललकारया देखो
हिन्दू मुस्लिम का भाईचारा हकीकत मैं उतारया देखो
आखिर तक नहीं हारया देखो रणबीर सुबह शाम सुण्या होगा ।।
रणबीर 24.1.2014
***9***
चौधरी छोटू राम जयंती पर एक रागनी । क्या बताया भला--
या मैट्रिक की परीक्षा उन्नीस सौ एक मैं पास करी।।
प्रथम श्रेणी आई थी इसतैं ऊंचे की थी आस करी।।
1
कमजोर शरीर करके नै पूरा जोर नहीं लगा पाया
नंबर कम करकै नै छात्रवृति का नम्बर नहीं आया
आगली पढ़ाई की चिंता नै दिमाग उसका खाया
अपने दादा रामदास धोरै दुखड़ा जाकै नै सुनाया
दादा नै दोनों बेटे बुला कै पढाने की दरखास करी।।
प्रथम श्रेणी आई थी इसतैं ऊंचे की थी आस करी।।
2
बड़े बेटे नै नहीं ख्याल किया कानां परकै तारग्या
चाचा राजा राम उस ताहिं अपनी कमाई वारग्या
अपने भाई माँ आगै भी वो अपने हाथ पसारग्या
कालेज मैं लिया दाखिला सात मिहने मैं हारग्या
खर्चा पाट्या ना पढ़ाई छोडी माँ घणी उदास करी।।
प्रथम श्रेणी आई थी इसतैं ऊंचे की थी आस करी।।
3
गृह परीक्षा मैं अंग्रेजी मैं नम्बर बढ़िया लिए देखो
छात्रवृति मिली पर खर्चे नै घरके रम्भा दिए देखो
रोज चिंता खावै खर्चे की नहीं सुख तैं जिए देखो
नाम काटन की अर्जी देदी घूँट खून के पिये देखो
कालेज तै छोड़ दिया घराँ आकै लाम्बी साँस भरी।।
प्रथम श्रेणी आई थी इसतैं ऊंचे की थी आस करी।।
4
प्रिंसिपल नै दो प्रोफेसर दफ्तर मैं कहते बुलवाये
लज्जाराम उमरा खेड़ी के उनकी साथ मैं खंदाये
तीनों पहोंचे गढ़ी सांपला देख छोटू राम घबराये
समझा बुझा कै नै छोटूराम नै दिल्ली लेकैे आये
रणबीर बरोने आले नै लिखाई आज खास करी।।
प्रथम श्रेणी आई थी इसतैं ऊंचे की थी आस करी।।
****10***
भक्षक किसानों के जो सैं वे रक्षक बण खूब भकावैं रै।।
किसानों को बाँट कै जात्यां मैं ये लीडरी खूब चमकावैं रै।।
छोटू राम नै किसानों के हक मैं कई कानून बनाये देखो
धरती कुड़क नहीं होवैगी कर्जे भी माफ़ करवाये देखो
भाखड़ा डैम का नक्शा खींच्या पाणी के साधन बढ़ाये देखो
तनमन धन लगा दिया था सर की उपाधि पाये देखो
आज ताहिं पूजैं छोटू राम नै किसानों का मशीहा बतावैं रै।।
चौधरी चरण सिंह नै जमींदारी का खात्मा करवाया रै
यूं पी का किसान मशीहा चौधरी चरण सिंह कहाया रै
किसानों की खातर पूरा जीवन उसनै था लगाया रै
किसानों नै भी चौधरी को पलकों कै उप्पर बिठाया रै
पूरे हिन्दुस्तान के किसान उसनै भूल नहीं पावैं रै
छोटू राम चौधरी साहब बी इसा कानून नहीं बना पाये
किसान कदे बी इस कर्जे की जकड़ मैं नहीं आये
कर्जे माफ़ करे हटकै तीस साल मैं कर्जे छाये
ना इसे कानून बने किसान बार बार ना फंस जाये
ईसा रास्ता टोहना होगा जिसपै किसान ना फांसी लावैं रै।।
देश के किसानों इन भक्षकां की मिलकै पहचान करां
जात पात पर बांटे जिसनै उस कान्ही ना ध्यान धरां
साँझा मंच किसानों का बनाकै दिल्ली की नींद हरां
लड़ां उनतैँ जो भक्षक म्हारे खुद फांसी खाकै नहीं मरां
रणबीर मजदूर किसानों की क्रांति का बिगुल बजावैं रै।।
रणबीर -4.5.2015
बीर नहीं
रसायनिक हथियार आये पहले क़ि शमशीर नहीं
वक्त के साथ बदलती इस दुनिया का दस्तूर यही
कबीर रैदास सूफी संतों ने घुमा फिर ये बात कही
रोहतक जो छप्पन में था बची वह तस्वीर नहीं
खाना पीना बदल गया अब ज्वर बाजरे बचे कहाँ
हरयाणा नंबर वन हुआ डिस्को डांस में फ़सा जहाँ
बथुआ राबड़ी खिचड़ी गौजी बची खाने में खीर नहीं
कडुआ सच है बदलाव का इसे समझना जरूरी देखो
देखनी होगी दिशा इसकी इसको परखना जरूरी देखो
बदलाव कई तरह के होते कुछ को माने जमीर नहीं
जनता हक़ में बदलाव के ये नारे बहोत उछाले हैं
जनता बहकावे में आई मुंह से ये दूर हुए निवाले हैं
तर्क की नजर जनता की बणी प्रहरी रणबीर नहीं
जीत गया किसान
1.*****
संघर्ष का राहखेत क्यार खूब कमाया रै,
करकै नै कमाल दिखाया रै,
संघर्ष का राह अपनाया रै,
जाग्या किसान हिंदुस्तान का।।
1
देश की आजादी खातर अपनी ज्यान खपाई हमनै
पंजाब हरियाणा बिहार मैं न्यारी रीत चलाई हमनै
अंगरेजां का भूत बनाया रै,
सब किमैं दा पर लगाया रै,
फेर देश आजाद कराया रै,
जाग्या किसान हिंदुस्तान का।।
2
देश आजाद होये पाछै हम हरित क्रांति ल्याये भाई
खेत क्यार कामवण तैं हम कदे नहीं घबराये भाई
हिंदुस्तान आगै बढ़ाया सै,
सात आसमान चढ़ाया सै,
हटकै नै संघर्ष चलाया सै,
जाग्या किसान हिंदुस्तान का।।
3
हमनै पहले भी संघर्ष करे उणमैं लाठी गोली खाई रै
जय जवान जय किसान की बढ़िया तस्वीर बनाई रै
सरहद पै नाम कमाया सै,
देश का सम्मान बढ़ाया सै,
जवान कदे ना घबराया सै,
जाग्या किसान हिंदुस्तान का।।
4
तीन काले कानून चला आंदोलन आज वापिस कराई
जुल्मो सितम कै साहमी लड़ण की रिवाज चलाई
हम आगै बढ़ते जारे भाई,
संघर्ष बिगुल बजारे भाई,
रणबीर कलम चलारे भाई,
जाग्या किसान हिंदुस्तान का।।
Wednesday, 26 January 2022
Sunday, 16 January 2022
74 साल बीत गए
74 साल बीत गए
आजाद हुये सैंतालीस मैं साल चुहतर बीत गये।उनके बांटै दूध मलाई म्हारे करमां मैं बता सीत गये।।
1.
धनवानां के बिल्ली कुत्ते म्हारे तै बढ़िया जीवन गुजारैं वे
बिना भोजन कुपोषण होग्या म्हारै खा-खा के घणे डकारैं वे
हमनै कैहकै नीच पुकारैं वे घणी माड़ी चला रीत गये।।
उनके बांटै दूध मलाई म्हारे करमां मैं बता सीत गये।।
2.
जमीन आसमान का अन्तर किसनै आज म्हारे बीच बणाया
खेत कमावां सारी उमर फेर बी सांस ना उलगा आया
सोच-सोच कै सिर चकराया सै वे क्यूकर पाला जीत गये।।
उनके बांटै दूध मलाई म्हारे करमां मैं बता सीत गये।।
3.
तरक्की करी हरियाणे मैं अपणा खून पसीना बाहकै रै
उपर ले तो फायदा ठागे हम बाट देखते मुंह बाकै रै
देखे चारों कान्ही धक्के खाकै रै मिल असली मीत गये।।
उनके बांटै दूध मलाई म्हारे करमां मैं बता सीत गये।।
4.
जितने ठेकेदार सैं हरियाणे के उनतै यो सवाल म्हारा रै
गरीब क्यों घणा गरीब होग्या अमीर का भरग्या भंडारा रै
कमेरा लागै घणा प्यारा रै रणबीर बणा ये गीत गये।।
उनके बांटै दूध मलाई म्हारे करमां मैं बता सीत गये।।
महावीर नरवाल की याद में ---260 ----
*ज्ञान विज्ञान आंदोलन नै थारी याद बहोत घणी आवै।।*
*नरवाल थारा मुस्कुराता चेहरा कदे नहीं भुलाया जावै।।*
1
बणवासा मैं जन्म लिया पिता प्रताप सिंह सूबेदार थे
माता फूलवती तैं मिले घणे पहली संतान नै प्यार थे
हाई स्कूल जनता बुटाना के बताए छात्र होनहार थे
दसवीं पास करकै नै आगै पढ़ने के थारे विचार थे
*एचएयू मैं बीएससी होनर्ज मैं दाखिला सत्तर मैं ले पावै।।*
नरवाल थारा मुस्कुराता चेहरा कदे नहीं भुलाया जावै।।
2
गोल्ड मैडल लिया बीएससी मैं हांगा ला करी पढ़ाई थी
छात्रों के हक मैं जोर लाकै एचएयू मैं लड़ी लड़ाई थी
वैज्ञानिक सोच का सहारा लेकै उनकी ताकत बढ़ाई थी
इंदरजीत साथी का सम्पर्क पाया
एचएयू मैं जगां बनाई थी
*तर्क वितर्क करकै प्रशासन तैं अपनी बात समझावै।।*
नरवाल थारा मुस्कुराता चेहरा कदे नहीं भुलाया जावै।।
3
एमरजेंसी का विरोध किया था दोनूं जेल मैं डाल दिये
एक साल ताहिं राखे जेल मैं उड़ै कर पक्के ख्याल लिये
शिव वर्मा हर की किताब पढ़ी और पढ़ाये कमाल किये
एमरजेंसी पाछै टीचर मोर्चे हटकै दोनों नै सम्भाल लिए
*बाजरे की नई किस्म खोज कै अपना यो हुनर चमकावै।।*
नरवाल थारा मुस्कुराता चेहरा कदे नहीं भुलाया जावै।।
4
अध्यापिका नीलम गेल्याँ थामनै प्रेम विवाह रचाया था
एक लड़की एक लड़का जन्मे न्यों परिवार आगै बढ़ाया था
नीलम जी साथ छोड़गी मां बाप दोनों का फर्ज निभाया था
हिसार तैं रोहतक आये विज्ञान मंच पै समय लगाया था
*स्कूल कालेजों मैं जाकै खेल खेल मैं वैज्ञानिक सोच फ़ैलावै।।*
नरवाल थारा मुस्कुराता चेहरा कदे नहीं भुलाया जावै।।
नताशा बेटी अर आकाश बेटे तैं क्रांतिकारी विचार समझाये
नताशा बेटी नै जेएनयू मैं सीएए खिलाफ अभियान चलाये
झूठे मुकदमे बणा उनपै सरकार नै छात्र जेल अंदर पहुचाये
महावीर थामनै बेटी नताशा के हौंसले जेल मैं भी बढ़ाये
*फ़िल्म संस्थान कलकत्ता मैं आकाश अपना हुनर बढ़ावै।।*
नरवाल थारा मुस्कुराता चेहरा कदे नहीं भुलाया जावै।।
साक्षरता आंदोलन हिसार मैं गजब की भूमिका निभाई
जाट आरक्षण मैं भड़की हिंसा झट सद्भावना समिति बनाई
पूरे हरियाणा मैं लायब्रेरी अभियान
इसकी पूरी प्लान समझाई
जन विज्ञान केंद्र हरियाणा की नींव नरवाल थामनै धराई
ज्ञान विज्ञान आंदोलन अधूरे काम पूरे करण पै जोर लगावै।।
बणवासे गाम के छोरे नै रोल मॉडल की छवि बनाई रै
गाम तैं चालकै एचएयू मैं छात्र यूनियन की श्यान बढ़ाई रै
बहनों के लालण पालण मैं थामनै
गजब जिम्मेदारी निभाई रै
मिलकै समाज सुधार की हरियाणे मैं खूब अलख जगाई रै
*मूर्ख रणबीर सब किमैं थारे बारे एक रागनी मैं पिरोया चाहवै।।*
नरवाल थारा मुस्कुराता चेहरा कदे नहीं भुलाया जावै।।
ली अंगड़ाई
#रागनी
संयुक्त किसान मोर्चे नै ली अंगड़ाई
किसान वादा खिलाफी पै विश्वासघात दिवस मनावैगा ।।
इकतीस जनवरी ने यो इस सोई सरकार नै चेतावैगा।।
1
सिंघु बॉर्डर पै किसान मोर्चे की मीटिंग हुई बताई रै
भविष्य की दिशा और काम इस पर बहस कराई रै
कुछ जरूरी करें सैं फैसले चुनाव मोर्चा नहीं लड़ावैगा ।।
2
नौ दिसंबर का समझौता है मोदी सरकार भूल गई
केस वापसी नहीं हुई बात या पकड़ फेर टूल
गई
शहीद किसानों का मुआवजा लागै मोदी नहीं दिलावैगा।।
लखीमपुर खीरी हत्याकांड पै बीजेपी बेशर्मी दिखाई सै
पक्का मोर्चा जावै लगाया कर फैसला एकता जताई सै
मिशन उत्तर प्रदेश रहै जारी किसान पूरा हांगा लगावैगा।।
4
एमएसपी पर भी कमेटी इब तलक बनाई कोण्या
कसूता धोखा देग्या रै मोदी कति शर्म आई कोण्या
किसान मजदूर कट्ठा होकै रणबीर सडकों उपर आवैगा।।
Wednesday, 3 November 2021
बस में
रमलू नै महिला कंडक्टर तैं बूझया - थाम कितने घंटे बस मैं रहो सो ?
महिला कंडक्टर - जी 24 घंटे।
रमलू - वा क्युकर ?
महिला कंडक्टर- देखिए, 8 घंटे तो सिटी बस मैं रहूं सूं अर बाकी के 16 घंटे घर आले के बस मैं ।
Tuesday, 2 November 2021
स्वास्थ्य का ढांचा
मुनाफाखोर कम्पनियां नै यो स्वास्थ्य ढांचा कब्जाया।।
पाणी बिकता खाणा महंगा यो प्रदूषण आज फ़ैलाया।।
1 सरकारी स्वास्थ्य सेवा ढावैं प्राईवेट नै बढ़ावा देवैं
जनता धक्के खा सरकारी मैं प्राईवेट घणे पीस्से लेवैं
दवा मशीन महंगी करदी गरीब मुश्किल तैं खेवैं
पीस्से आले की ज्याण बचै गरीब दुत्कार सेहवैं
बीमारियां का औड़ नहीं कदे डेंगू कदे स्वाइन फ्लू आया।।
पाणी बिकता खाणा महंगा यो प्रदूषण आज फ़ैलाया।।
2 एम्पेनलमेंट पै प्राईवेट का इलाज लेते कर्मचारी
बड़े अस्पतालों मैं जावै अफसरशाही या सारी
लाखों मैं इलाज हर्ट अटैक का बचै जेब जिसकी भारी
प्राइवेट बीमा कंपनी भी भ्रष्टाचार मैं धँसती जारी
घर फूंक तमाशा पड़ै देखना जै चाहते ज्याण बचाया।।
पाणी बिकता खाणा महंगा यो प्रदूषण आज फ़ैलाया।।
3 वातावरण प्रदूषण तैं बढ़ी कैंसर और दमा बीमारी
कीटनाशक बढे गात मैं जिंदगी मुश्किल होती जारी
झोला छाप दवा देसी ये बनी गरीब की लाचारी
ये आर एम पी डॉक्टर स्टीरायड खिलावैं भारी
घणे बढ़गे टोने टोटके बढ़ी अन्धविश्वास की माया।।
पाणी बिकता खाणा महंगा यो प्रदूषण आज फ़ैलाया।।
4 एक तरफ हैल्थ टूरिज्म दूजी तरफ झाड़ फूंक छाये
कितै कमी नर्सों की कितै ये डॉक्टर कम बताये
कितै कमी दवा की कितै औजार कम ल्या पाये
निजी अस्पताल रोज खुलैं ना कोये कानून बनाये
रणबीर सिंह मुनाफे नै म्हारी सेहत का धुम्मा ठाया।।
पाणी बिकता खाणा महंगा यो प्रदूषण आज फ़ैलाया।।
Sunday, 24 October 2021
मंगत राम शास्त्री
हरियाणवी गजल
मिरी आजाद ख्याली का मनै कुछ तो हुया फैदा.
मेरा बेखौफ जीणे का तरीका हो लिया लैह्दा..
मुबारक हो उनै मझबी किताबां की पवित्तरता
जड़ै बेअदबियां कहकै कतल करणे का हो रैदा.
बिना जाणें बिना समझें धरम के नाम पै हत्या
निरी धरमान्धता कोन्या पलानिंग हो सै बाकैदा.
सुणैं ना बात भी पूरी करैं हत्या कसाई
ज्यूं इजाजत या नहीं देन्दा गुरू दशमेश का कैदा.
चुवाइस हो जनम लेवण त पहले जो छंटाई की
बता फेर कोण चाह्वैगा गरीबां कै हुवै पैदा.
लिकड़ ज्या तोड़ कै पिंजरा बगावत कर जमान्ने तै
के दाई ऊत जा री सै जो जीवनभर भरै बैदा.
इबारत जो लिखी संविधान म्हं निरपेख पन्थां की
बचाणी लाजमी होगी कवि "खड़तल" करै वैदा.
मंगतराम शास्त्री "खड़तल"
सुभाष चन्द्र बोस
सभी दोस्तों को महान देशभक्त सुभाषचंद्र बोस के जन्मदिन की क्रांतिकारी बधाई । नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन् 1897 कोओड़िशाकेकटकशहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथबोस और माँ का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारीवकीलथे मगर बाद में उन्होंने निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। उन्होंने कटक कीमहापालिका में लम्बे समय तक काम किया था और वेबंगालविधानसभाके सदस्य भी रहे थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हेंरायबहादुरका खिताब दिया था। प्रभावती देवी के पिता का नाम गंगानारायण दत्त था। दत्त परिवार कोकोलकाताका एक कुलीन परिवार माना जाता था। प्रभावती और जानकीनाथ बोस कीकुल मिलाकर 14 सन्तानें थी जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष उनकी नौवीं सन्तान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरद चन्द्र सेथा। शरदबाबू प्रभावती और जानकीनाथ के दूसरे बेटे थे। सुभाष उन्हें मेजदा कहते थें। शरदबाबू की पत्नी का नाम विभावती था।शिक्षादीक्षा से लेकर आईसीएस तक का सफरसुभाष का उन दिनों का चित्र जब वे सन् 1920 में इंग्लैण्ड आईसीएस करने गये हुए थेकटक के प्रोटेस्टेण्ट यूरोपियन स्कूल से प्राइमरी शिक्षा पूर्ण कर 1909 में उन्होंने रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में दाखिला लिया। कॉलेज के प्रिन्सिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का सुभाष के मन पर अच्छा प्रभाव पड़ा। मात्र पन्द्रह वर्ष की आयु में सुभाष ने विवेकानन्द साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर लिया था। 1915 में उन्होंनेइण्टरमीडियेट की परीक्षा बीमार होने के बावजूद द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1916 में जब वे दर्शनशास्त्र (ऑनर्स) में बीए के छात्र थे किसी बात पर प्रेसीडेंसी कॉलेज के अध्यापकों और छात्रों के बीच झगड़ा हो गया सुभाष ने छात्रों का नेतृत्व सम्हाला जिसके कारण उन्हें प्रेसीडेंसी कॉलेज से एक साल के लिये निकाल दिया गया और परीक्षा देने पर प्रतिबन्ध भी लगा दिया। 49वीं बंगाल रेजीमेण्ट में भर्ती के लिये उन्होंने परीक्षा दी किन्तु आँखें खराब होने के कारण उन्हें सेना के लिये अयोग्य घोषित कर दिया गया। किसी प्रकार स्कॉटिश चर्च कॉलेज में उन्होंने प्रवेश तो ले लिया किन्तु मन सेना में ही जाने को कह रहा था। खाली समय का उपयोग करने के लियेउन्होंने टेरीटोरियल आर्मी की परीक्षा दी और फोर्ट विलियम सेनालय में रँगरूट के रूप में प्रवेश पा गये। फिर ख्याल आया कि कहीं इण्टरमीडियेट की तरह बीए में भी कम नम्बर न आ जायें सुभाष ने खूब मन लगाकर पढ़ाई की और 1919में बीए (ऑनर्स) की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।कलकत्ता विश्वविद्यालयमें उनका दूसरा स्थान था।पिता की इच्छा थी कि सुभाष आईसीएस बनें किन्तु उनकी आयु को देखते हुए केवल एक ही बार में यह परीक्षा पास करनी थी। उन्होंने पिता से चौबीस घण्टे का समय यह सोचने के लिये माँगा ताकि वे परीक्षा देने या न देने पर कोई अन्तिम निर्णय ले सकें। सारी रात इसी असमंजस में वह जागते रहे किक्या किया जाये। आखिर उन्होंने परीक्षा देने का फैसला किया और 15 सितम्बर 1919 को इंग्लैण्ड चले गये। परीक्षा की तैयारी के लिये लन्दन के किसी स्कूल में दाखिला न मिलने पर सुभाष ने किसी तरह किट्स विलियम हाल में मानसिक एवं नैतिक विज्ञान की ट्राइपास (ऑनर्स) की परीक्षा का अध्ययन करने हेतु उन्हें प्रवेश मिल गया। इससे उनके रहने व खाने की समस्या हल हो गयी। हाल में एडमीशन लेना तो बहाना था असली मकसद तो आईसीएस में पास होकर दिखाना था। सो उन्होंने 1920 में वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त करते हुए पास कर ली।इसके बाद सुभाष ने अपने बड़े भाई शरतचन्द्र बोस को पत्र[7]लिखकर उनकी राय जाननी चाही कि उनके दिलो-दिमाग पर तोस्वामी विवेकानन्दऔर महर्षिअरविन्द घोषके आदर्शों ने कब्जा कर रक्खा है ऐसे में आईसीएस बनकर वह अंग्रेजों की गुलामी कैसे कर पायेंगे? 22 अप्रैल 1921 को भारत सचिव ई०एस० मान्टेग्यू को आईसीएस से त्यागपत्र देने का पत्र लिखा। एक पत्र देशवन्धु चित्तरंजन दास को लिखा। किन्तु अपनी माँ प्रभावती का यह पत्र मिलते ही कि "पिता, परिवार के लोग या अन्य कोई कुछ भी कहे उन्हें अपने बेटे के इस फैसले पर गर्व है।" सुभाष जून 1921 में मानसिक एवं नैतिक विज्ञान में ट्राइपास (ऑनर्स) की डिग्री के साथ स्वदेश वापस लौट आये।स्वतन्त्रता संग्राम में प्रवेश और कार्यकोलकाता के स्वतन्त्रता सेनानीदेशबंधु चित्तरंजन दासके कार्य से प्रेरित होकर सुभाष दासबाबू के साथ काम करना चाहते थे।इंग्लैंडसे उन्होंने दासबाबू को खत लिखकर उनके साथ काम करने की इच्छा प्रकट की।रवींद्रनाथ ठाकुरकी सलाह के अनुसार भारत वापस आने पर वे सर्वप्रथममुम्बईगये औरमहात्मा गांधीसे मिले। मुम्बई में गांधी जी मणिभवन में निवास करते थे। वहाँ 20 जुलाई 1921 को गाँधीजी और सुभाष के बीच पहली मुलाकात हुई। गाँधी जी ने उन्हेंकोलकाता जाकर दासबाबू के साथ काम करने की सलाह दी। इसके बाद सुभाष कोलकाता आकर दासबाबू से मिले।उन दिनों गाँधी जी ने अंग्रेज़ सरकार के खिलाफअसहयोग आंदोलनचला रखा था। दासबाबू इस आन्दोलन काबंगालमें नेतृत्व कर रहे थे। उनके साथ सुभाष इस आन्दोलन में सहभागी हो गये। 1922 में दासबाबू नेकांग्रेसके अन्तर्गतस्वराज पार्टीकी स्थापना की।विधानसभाके अन्दर से अंग्रेज़ सरकार का विरोध करने के लिये कोलकाता महापालिका का चुनाव स्वराज पार्टी ने लड़कर जीता और दासबाबू कोलकाता के महापौर बन गये। उन्होंने सुभाष को महापालिका का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी बनाया। सुभाष नेअपने कार्यकाल में कोलकाता महापालिका का पूरा ढाँचा और काम करने का तरीका ही बदल डाला। कोलकाता में सभी रास्तों के अंग्रेज़ी नाम बदलकर उन्हेंभारतीयनाम दिये गये। स्वतन्त्रता संग्राम में प्राण न्यौछावर करने वालों के परिवारजनों को महापालिका में नौकरी मिलने लगी।बहुत जल्द ही सुभाष देश के एक महत्वपूर्ण युवा नेता बन गये।जवाहरलाल नेहरूके साथ सुभाष ने कांग्रेस के अन्तर्गत युवकों की इण्डिपेण्डेंस लीग शुरू की। 1928 में जबसाइमन कमीशनभारत आया तब कांग्रेस ने उसे काले झण्डे दिखाये। कोलकाता में सुभाष ने इस आन्दोलन का नेतृत्व किया। साइमन कमीशन को जवाब देने के लिये कांग्रेस ने भारत का भावी संविधान बनाने का काम आठ सदस्यीय आयोग को सौंपा।मोतीलाल नेहरूइस आयोग के अध्यक्ष और सुभाष उसके एक सदस्य थे। इस आयोग ने नेहरू रिपोर्ट पेश की। 1928 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में कोलकाता में हुआ। इस अधिवेशन में सुभाष ने खाकी गणवेश धारण करके मोतीलाल नेहरू को सैन्य तरीके से सलामी दी। गाँधी जी उन दिनों पूर्ण स्वराज्य की माँग से सहमत नहीं थे। इस अधिवेशन में उन्होंने अंग्रेज़ सरकार से डोमिनियन स्टेटस माँगने की ठान ली थी। लेकिन सुभाषबाबू और जवाहरलाल नेहरू कोपूर्ण स्वराजकी माँग से पीछे हटना मंजूर नहीं था। अन्त में यह तय किया गया कि अंग्रेज़ सरकार को डोमिनियन स्टेटस देने के लिये एक साल का वक्त दिया जाये। अगर एक साल में अंग्रेज़ सरकार ने यह माँग पूरी नहीं की तो कांग्रेस पूर्ण स्वराज की माँग करेगी। परन्तु अंग्रेज़ सरकार ने यह माँग पूरी नहीं की। इसलिये 1930 में जब कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता मेंलाहौरमें हुआ तब ऐसा तय किया गया कि 26 जनवरी का दिन स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जायेगा।26 जनवरी 1931 को कोलकाता में राष्ट्र ध्वज फहराकर सुभाष एक विशाल मोर्चे का नेतृत्व कर रहे थे तभी पुलिस नेउन पर लाठी चलायी और उन्हें घायल कर जेल भेज दिया। जब सुभाष जेल में थे तब गाँधी जी ने अंग्रेज सरकार से समझौताकिया और सब कैदियों को रिहा करवा दिया। लेकिन अंग्रेज सरकार नेभगत सिंहजैसे क्रान्तिकारियों को रिहा करने सेसाफ इन्कार कर दिया। भगत सिंह की फाँसी माफ कराने के लियेगाँधी जी ने सरकार से बात तो की परन्तु नरमी के साथ। सुभाष चाहते थे कि इस विषय पर गाँधीजी अंग्रेज सरकार के साथ किया गया समझौता तोड़ दें। लेकिन गांधीजी अपनी ओर से दिया गया वचन तोड़ने को राजी नहीं थे। अंग्रेज सरकार अपने स्थान पर अड़ी रही और भगत सिंह व उनके साथियों को फाँसी दे दी गयी। भगत सिंह को न बचा पाने पर सुभाष गाँधी और कांग्रेस के तरिकों से बहुत नाराज हो गये।कारावास1939 में सुभाषचन्द्र बोस का अखिल भारतीय कांग्रेस कमीटी की बैठक में आगमनसौजन्य: टोनी मित्रअपने सार्वजनिक जीवन में सुभाष को कुल 11 बार कारावास हुआ। सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 में छह महीने का कारावास हुआ।1925 में गोपीनाथ साहा नामक एक क्रान्तिकारी कोलकाता के पुलिस अधीक्षक चार्लस टेगार्ट को मारना चाहता था। उसने गलती से अर्नेस्ट डे नामक एक व्यापारी को मार डाला। इसके लिए उसे फाँसी की सजा दी गयी। गोपीनाथ को फाँसी होनेके बाद सुभाष फूट फूट कर रोये। उन्होंने गोपीनाथ का शव माँगकर उसका अन्तिम संस्कार किया। इससे अंग्रेज़ सरकार ने यह निष्कर्ष निकाला कि सुभाष ज्वलन्त क्रान्तिकारियों से न केवल सम्बन्ध ही रखते हैं अपितु वेउन्हें उत्प्रेरित भी करते हैं। इसी बहाने अंग्रेज़ सरकार ने सुभाष को गिरफ़्तार किया और बिना कोई मुकदमा चलाये उन्हें अनिश्चित काल के लियेम्याँमारकेमाण्डलेकारागृह में बन्दी बनाकर भेज दिया।5 नवम्बर 1925 को देशबंधु चित्तरंजन दास कोलकाता में चल बसे। सुभाष ने उनकी मृत्यु की खबर माण्डले कारागृह में रेडियो पर सुनी। माण्डले कारागृह में रहते समय सुभाषकी तबियत बहुत खराब हो गयी। उन्हेंतपेदिकहो गया। परन्तु अंग्रेज़ सरकार ने फिर भी उन्हें रिहा करने से इन्कार कर दिया। सरकार ने उन्हें रिहा करने के लिए यह शर्त रखी कि वे इलाज के लियेयूरोपचले जायें। लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इलाज के बाद वे भारत कब लौट सकते हैं। इसलिए सुभाष ने यह शर्त स्वीकार नहीं की। आखिर में परिस्थिति इतनी कठिन हो गयी कि जेल अधिकारियों को यह लगने लगा कि शायद वे कारावास में ही न मर जायें। अंग्रेज़ सरकार यह खतरा भी नहीं उठाना चाहती थी कि सुभाष की कारागृह में मृत्यू हो जाये। इसलिये सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया। उसके बाद सुभाष इलाज के लियेडलहौजीचले गये।1930 में सुभाष कारावास में ही थे कि चुनाव में उन्हें कोलकाता का महापौर चुना गया। इसलिए सरकार उन्हें रिहा करने पर मजबूर हो गयी। 1932 में सुभाष को फिर से कारावासहुआ। इस बार उन्हेंअल्मोड़ाजेल में रखा गया। अल्मोड़ा जेल में उनकी तबियत फिर से खराब हो गयी। चिकित्सकों की सलाह पर सुभाष इस बार इलाज के लिये यूरोप जाने को राजी हो गये।यूरोप प्रवास१९३३ में शल्यक्रिया के बाद आस्ट्रिया के बादगास्तीनमें स्वास्थ्य-लाभ करते हुएसन् 1933 से लेकर 1936 तक सुभाष यूरोप में रहे। यूरोप में सुभाष ने अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए अपना कार्य बदस्तूर जारी रखा। वहाँ वेइटलीके नेतामुसोलिनीसे मिले, जिन्होंने उन्हें भारत के स्वतन्त्रता संग्राम मेंसहायता करने का वचन दिया।आयरलैंडके नेता डी वलेरा सुभाष के अच्छे दोस्त बन गये। जिन दिनों सुभाष यूरोप में थे उन्हीं दिनों जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू काऑस्ट्रियामें निधन हो गया। सुभाष ने वहाँ जाकर जवाहरलालनेहरू को सान्त्वना दी।बाद में सुभाष यूरोप में विठ्ठल भाई पटेल से मिले। विठ्ठल भाई पटेल के साथ सुभाष ने मन्त्रणा की जिसे पटेल-बोस विश्लेषण के नाम से प्रसिद्धि मिली। इस विश्लेषण में उन दोनों ने गान्धी के नेतृत्व की जमकर निन्दा की। उसके बाद विठ्ठल भाई पटेल जब बीमार हो गये तो सुभाष ने उनकी बहुत सेवा की। मगर विठ्ठल भाई पटेल नहीं बचे, उनका निधन हो गया।विठ्ठल भाई पटेल ने अपनी वसीयत में अपनी सारी सम्पत्ति सुभाष के नाम कर दी। मगर उनके निधन के पश्चात् उनके भाईसरदार वल्लभ भाई पटेलने इस वसीयत को स्वीकार नहीं किया। सरदार पटेल ने इस वसीयत को लेकर अदालत में मुकदमा चलाया। यह मुकदमा जीतने पर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपने भाई की सारी सम्पत्ति गान्धी के हरिजन सेवा कार्य को भेंट कर दी।1934 में सुभाष को उनके पिता के मृत्युशय्या पर होने की खबर मिली। खबर सुनते ही वे हवाई जहाज सेकराचीहोते हुए कोलकाता लौटे। यद्यपि कराची में ही उन्हे पता चल गया था कि उनके पिता की मृत्त्यु हो चुकी है फिर भी वे कोलकाता गये। कोलकाता पहुँचते ही अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और कई दिन जेल में रखकर वापस यूरोप भेज दिया।ऑस्ट्रिया में प्रेम विवाहसुभाष का उनकीपत्नीके साथ दुर्लभचित्रसन् 1934 में जब सुभाषऑस्ट्रिया में अपना इलाज कराने हेतु ठहरे हुए थे उस समय उन्हें अपनी पुस्तक लिखने हेतु एक अंग्रेजी जानने वाले टाइपिस्ट की आवश्यकता हुई। उनके एक मित्र नेएमिली शेंकल(अं: Emilie Schenkl) नाम की एक ऑस्ट्रियन महिला से उनकी मुलाकात करा दी। एमिली के पिता एक प्रसिद्धपशु चिकित्सकथे। सुभाष एमिली[8]की ओर आकर्षितहुए और उन दोनों में स्वाभाविक प्रेम हो गया।नाजी जर्मनीके सख्त कानूनों को देखते हुए उन दोनों ने सन् 1942 में बाड गास्टिन नामक स्थान परहिन्दूपद्धति से विवाह रचा लिया।वियेनामें एमिली ने एक पुत्री को जन्म दिया। सुभाष ने उसे पहली बार तब देखा जब वह मुश्किल से चार सप्ताह की थी। उन्होंने उसका नाम अनिता बोस रखा था। अगस्त 1945 मेंताइवानमें हुई तथाकथित विमान दुर्घटना में जब सुभाष की मौत हुई, अनिता पौने तीन साल की थी।[9][10]अनिता अभी जीवित है। उसका नाम अनिता बोस फाफ (अं: Anita Bose Pfaff) है। अपने पिता के परिवार जनों से मिलने अनिता फाफ कभी-कभी भारत भी आती है।हरीपुरा कांग्रेस का अध्यक्ष पदनेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गान्धी के साथ हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन में (सन् 1938) उन दोनों के बीचराजेन्द्र प्रसादऔर नेताजी के वायेंसरदार बल्लभ भाई पटेलभी दिख रहे हैं।1938 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हरिपुरा में होना तय हुआ। इस अधिवेशन से पहले गान्धी जी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सुभाष को चुना। यह कांग्रेस का 51 वाँ अधिवेशन था। इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चन्द्र बोस का स्वागत 51 बैलों द्वारा खींचे हुए रथ में किया गया।इस अधिवेशन में सुभाष का अध्यक्षीय भाषण बहुत ही प्रभावीहुआ। किसी भी भारतीय राजनीतिक व्यक्ति ने शायद ही इतना प्रभावी भाषण कभी दिया हो। अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में सुभाष ने योजना आयोग की स्थापना की। जवाहरलाल नेहरू इसकेपहले अध्यक्ष बनाये गये। सुभाष नेबंगलौरमें मशहूर वैज्ञानिक सरविश्वेश्वरय्याकी अध्यक्षता में एक विज्ञान परिषद की स्थापना भी की।1937 मेंजापाननेचीनपर आक्रमण कर दिया। सुभाष की अध्यक्षता में कांग्रेस नेचीनीजनता की सहायता के लिये डॉ॰ द्वारकानाथ कोटनिस के नेतृत्व में चिकित्सकीय दल भेजने का निर्णय लिया। आगे चलकर जब सुभाष ने भारत केस्वतन्त्रता संग्राममें जापान से सहयोग किया तब कई लोग उन्हे जापान की कठपुतली और फासिस्ट कहने लगे। मगर इस घटना से यह सिद्ध होता हैं कि सुभाष न तो जापान की कठपुतली थे और न ही वे फासिस्ट विचारधारा से सहमत थे।कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा1938 में गान्धीजी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सुभाषको चुना तो था मगर उन्हें सुभाष की कार्यपद्धति पसन्द नहीं आयी। इसी दौरान यूरोप मेंद्वितीय विश्वयुद्धके बादल छा गए थे। सुभाष चाहते थे किइंग्लैंडकी इस कठिनाई का लाभ उठाकर भारत का स्वतन्त्रता संग्राम अधिक तीव्र किया जाये। उन्होंने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में इस ओर कदम उठाना भी शुरू कर दिया था परन्तु गान्धीजी इससे सहमत नहीं थे।1939 में जब नया कांग्रेस अध्यक्ष चुनने का वक्त आया तब सुभाष चाहते थे कि कोई ऐसा व्यक्ति अध्यक्ष बनाया जाये जो इस मामले में किसी दबाव के आगे बिल्कुल न झुके। ऐसा किसी दूसरे व्यक्ति के सामने न आने पर सुभाष ने स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष बने रहना चाहा। लेकिन गान्धी उन्हें अध्यक्ष पद से हटाना चाहते थे। गान्धी ने अध्यक्ष पद के लियेपट्टाभि सीतारमैयाको चुना। कविवररवीन्द्रनाथ ठाकुरने गान्धी को खत लिखकर सुभाष को ही अध्यक्ष बनाने की विनती की।प्रफुल्लचन्द्र रायऔरमेघनाद साहाजैसे वैज्ञानिक भी सुभाष को ही फिर से अध्यक्ष के रूप में देखना चाहतें थे। लेकिन गान्धीजी ने इस मामले में किसी की बात नहीं मानी। कोई समझौता न हो पाने पर बहुत बरसों बाद कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष पद के लिये चुनाव हुआ।सब समझते थे कि जब महात्मा गान्धी ने पट्टाभि सीतारमैय्या का साथ दिया हैं तब वे चुनाव आसानी से जीत जायेंगे। लेकिन वास्तव में सुभाष को चुनाव में 1580 मत और सीतारमैय्या को 1377 मत मिले। गान्धीजी के विरोध के बावजूद सुभाषबाबू 203 मतों से चुनाव जीत गये। मगर चुनावके नतीजे के साथ बात खत्म नहीं हुई। गान्धीजी ने पट्टाभि सीतारमैय्या की हार को अपनी हार बताकर अपने साथियों से कह दिया कि अगर वें सुभाष के तरीकों से सहमत नहीं हैं तो वें कांग्रेस से हट सकतें हैं। इसके बाद कांग्रेस कार्यकारिणी के 14 में से 12 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। जवाहरलाल नेहरू तटस्थ बने रहे और अकेले शरदबाबू सुभाष के साथ रहे।1939 का वार्षिक कांग्रेस अधिवेशन त्रिपुरी में हुआ। इस अधिवेशन के समय सुभाषबाबू तेज बुखार से इतने बीमार हो गये थे कि उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर अधिवेशन में लाना पड़ा। गान्धीजी स्वयं भी इस अधिवेशन में उपस्थित नहीं रहे और उनके साथियों ने भी सुभाष को कोई सहयोग नहीं दिया।अधिवेशन के बाद सुभाष ने समझौते के लिए बहुत कोशिश की लेकिन गान्धीजी और उनके साथियों ने उनकी एक न मानी। परिस्थिति ऐसी बन गयी कि सुभाष कुछ काम ही न कर पाये। आखिर में तंग आकर 29 अप्रैल 1939 को सुभाष ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना3 मई 1939 को सुभाष ने कांग्रेस के अन्दर हीफॉरवर्ड ब्लॉकके नाम से अपनी पार्टी की स्थापना की। कुछ दिन बाद सुभाष को कांग्रेस से ही निकाल दिया गया। बाद में फॉरवर्ड ब्लॉक अपने आप एक स्वतन्त्र पार्टी बन गयी।द्वितीय विश्वयुद्धशुरू होने से पहले से ही फॉरवर्ड ब्लॉक ने स्वतन्त्रता संग्राम को और अधिक तीव्र करने के लिये जन जागृति शुरू की।3 सितम्बर 1939 को मद्रास में सुभाष को ब्रिटेन और जर्मनी में युद्ध छिड़ने की सूचना मिली। उन्होंने घोषणा की कि अब भारत के पास सुनहरा मौका है उसे अपनी मुक्ति के लिये अभियान तेज कर देना चहिये। 8 सितम्बर 1939 को युद्ध के प्रति पार्टी का रुख तय करने के लिये सुभाष को विशेष आमन्त्रित के रूप में काँग्रेस कार्य समिति में बुलाया गया। उन्होंने अपनी राय के साथ यह संकल्प भी दोहराया कि अगर काँग्रेस यह काम नहीं कर सकती है तो फॉरवर्ड ब्लॉक अपने दम परब्रिटिश राजके खिलाफ़ युद्ध शुरू कर देगा।
Wednesday, 4 August 2021
पी वी सिंधु का मैडल पक्का
पी वी सिंधु का मैडल पक्का
मार दिया इसनै आज छक्काओकिहारा को दिया धक्का
थोड़ा सा दिल नै थाम लियो ।।
बैंडमिंटन मैं रियो मैं खेल दिखाया देखो
फाइनल मैं पहोंच कै मान बढ़ाया देखो
मीडिया न्यों अंदाज लगावै
मैडल पक्का जरूर बतावै
यो देश थारी तरफ लखावै
सिंधु लगा जोर तमाम दियो ।।
जापान की लड़की हरा अपने पैर जमाये
स्पेनी लड़की गेल्याँ पेचे फाइनल मैं बताये
राष्ट्रपति म्हारे नै दी सै बधाई
प्रधानमन्त्री नै करी सै बड़ाई
परिवार नै खूब खुशी मनाई
काल थकन का मत नाम लियो ।।
रात नै सोईये सिंधु थकान बी तार लिए
काल कौनसे गुर लाने कर विचार लिए
पूरे दम खम तैं खेलिए सिंधु
वार स्पेन की के झेलिये सिंधु
नम्बर तो फालतू लेलिए सिंधु
जितना हार का ना नाम लियो ।।
गोल्ड मैडल पै तूँ ध्यान राखिये पूरा हे
एक गोल्ड देश ले ख्याल राखिये पूरा हे
म्हारे देश की छोरी छारी सैं
रणबीर खूब जोर लगारी सैं
बेशक पेट मैं चलैं कटारी सैं
बुलंद कर देश का नाम दियो ।।
सिंधु जिसनै गोल्ड मैडल दिलवाया यो।।
बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीत आज इतिहास रचाया यो।।
पहली भारतीय बनीं सिंधु जिसनै गोल्ड मैडल दिलवाया यो।।1
सिंधु नै ओकुहारा को सीधे गेमां मैं लाकै जोर हराया रै
हांगा लाकै खेली पी वी सिंधु गोल्ड मैडल देश मैं आया रै
इक्कीस सात इक्कीस सात तैं हराकै देश गौरव बढ़ाया यो।।
पहली भारतीय बनीं सिंधु जिनै गोल्ड मैडल दिलवाया यो।।
2
ओकुहारा के खिलाफ यो कैरियर रिकॉर्ड नौ सात करया
स्विट्जरलैंड में पी वी सिंधु नै बैडमिंटन मैं इतिहास रचया
नोजोमी ओकुहारा को मात देकै नै खास माहौल बनाया यो।।
पहली भारतीय बनीं सिंधु जिसनै गोल्ड मैडल दिलवाया यो।।
3
वर्ल्ड के स्तर पै बैडमिंटन मैडल ना कोये बी ल्याया रै
पी वी सिंधु की मेहनत नै रविवार नै यो मैडल पाया रै
शाबाश पी वी सिंधु तनै म्हारी झंडा तिरंगा जितवाया यो।।
पहली भारतीय बनीं सिंधु जिसनै गोल्ड मैडल दिलवाया यो।।
4
यो मुकाबला अड़तीस मिनट चल्या पसीनम पसीन्यां होई
दो सौ सतरा की हार का बदला लेकै याद वा पुरानी धोई
बढ़त बना कै पहले खेल मैं रणबीर आगै कदम उठाया यो ।।
पहली भारतीय बनीं सिंधु जिसनै गोल्ड मैडल दिलवाया यो।।
हिंदुस्तान और हैदराबाद
हिंदुस्तान और हैदराबाद का नाम इस दुनिया मैं लिखवाया सै।।
सिंधु जीतकै टोक्यो मैं मैडल अपने देश का नाम चमकाया सै।।
1
नगर घर गाम सारे तनै देवण लागरे बहोत घणी बधाई आज
थारे कोच की और थारी लग्न गजब का या रंग ल्याई आज
पूरे घर और परिवार नै भी थारा होंसला खूब बढ़ाया सै।।
सिंधु जीतकै टोक्यो मैं मैडल अपने देश का नाम चमकाया सै।।
2
आंध्रप्रदेश बाट देखरया जीत की पूरी पूरी खुशी
मनाने की
मात पिता नै हुई घणी खुशी दूजा गोल्ड मैडल ल्याने की
कश्मीर तैं कन्याकुमारी ताहिं देश जीत पै खुशी मनाता पाया सै।।
सिंधु जीतकै टोक्यो मैं मैडल अपने देश का नाम चमकाया सै।।
3
खेल मैदान मैं चौकसी पूरी हिम्मत करती चली गई फेर
एक एक प्वाइंट जीत कै कदम आगै धरती चली
गई फेर
दूसरे ऑलम्पिक मैडल का यो रेकॉर्ड थामनै बनाया सै।।
सिंधु जीतकै टोक्यो मैं मैडल अपने देश का नाम चमकाया सै।।
4
बढ़ो हमेशा आगै सिंधु बेटी थाम मुड़कै कदे लखाईयो ना
मुश्किलों का करियो सामना कदम पाछे नै हटाईयो ना
रणबीर बरौने आले नै थारी श्यान मैं यो छंद बनाया सै।।
सिंधु जीतकै टोक्यो मैं मैडल अपने देश का नाम चमकाया सै।।
Saturday, 19 June 2021
तीज
तीजां का त्यौहार
लाल चूंदड़ी दामन काला ,झूला झूलन चाल पड़ी।
कूद मारकै चढ़ी पींग पै ,देखें सहेली साथ खड़ी ।
झोटा लेकै पींघ बधाई , हवा मैं लाल चूंदड़ी लहराई
ऊपर जाकै तले नै आई , उठें दामण की झाल बड़ी।
पींघ दूगनी बढ़ती आवै, घूंघट हवा मैं उड़ता जावै
झोटे की हींग बढ़ावै ,बाजैं पायां की ये छैल कड़ी ।
मुश्किल तैँ आयी तीज, फुहारां मैं गयी चूंदड़ी भीज
नयी उमंग के बोगी बीज, सुख की देखि आज घड़ी।
रणबीर पिया की आई याद , झूलन मैं नहीं आया स्वाद
नहीं किसे नै सुनी फ़रियाद आंसूआं की या लगी झड़ी।