Thursday, 28 April 2011

DAHEJ

POLICE HARYANA KI



JAMANE ME KYON AYE???

SEHAT KA RAJ

SAFDAR TUMHE SALAAM

KISAN KI PUKAR

HAMARI VIRASAT

Naya Saal

kisa parivar

GHUNGHAT

YO GHAR

Thursday, 14 April 2011

BHIM RAO AMBEDKAR

NUMBER OF GOTRA INCREASING

हरनाथ की तुम्बा हेड़ी
ब्लोक -सालहावास 
जिला- झझर
कुल गौत्र -३७ saintis  


chal

दुश्मनों  की  चाल में हम आ गए
अपना ही घर लूट के  हम खा गए

khoon

धर्म  क्या  है जात क्या है रस्मों का इक जाल है
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सबका ही खून लाल है   

ankhon hi ankhon mein

गुस्सा दिखाते जनाब आँखों से 
हम भी देंगे जवाब आँखों से
तुम से ऑंखें मिला मिला के
हम भी लेंगें हिसाब आँखों से ||
आँखों से तुमने घृणा दिखाई
हमने गुंजाया इन्कलाब आँखों से ||
लूट के मेहनत हमारी तुम
फिर जाके पीते sharab  आँखों से ||
ranbir  ढूंढते रहे है हर दम
अपने दुखों की किताब आँखों से||

Tuesday, 12 April 2011

गौरी गौरी रेशम डोरी शरक फरांसी हो सै
सुथरी बहु गरीब के घर मैं मरद नै फांसी हो सै
मैं सूँ जोहड़ लेट का पानी तूं सै लता गंग नीर का
भोली भोली सूरत तेरी काम करै सै रफल तीर का
हँसना बुरा बीर का चोर की दुश्मन खांसी हो सै ||
मने भगत बहोत से देखे सें जो काढें भूत बजा कै डोरू
एक आधे की कहता कोन्या बोहत फिरें सें इज्जत चोरू
साच्ची सै हीने की जोरू सबकी दासी हो सै ||
ध्यान लगा कै सुनती जा एक लेख बताऊँ अदालक का
बुरी गरीबी सबकी beebee jisa nrm sag palak का
doodh dahi हो malak का manganeeya की lhasi हो सै
sachi kahde bat dayachand munh tai jhooth kade na bolai
aad aut मैं chhipya rahai सै pahad bataya til कै auhlai
nirbal pai hanga tolai thade की hansi हो सै ||
मुझे समझो ना समझो खुद को तो समझो

salam safdar ko

सलाम सफ़दर को
समाज की खातर मरने आले आज तलक तो मरे नहीं ||
कुर्बान देश पर होने वाले कदे कभी किसी से डरे नहीं ||
सफ़दर की हांसी हवा मैं आज भी न्योंये गूँज रही
चारों धाम था मच्या तहलका हो दुनिया मैं बूझ रही
बैरी को नहीं सूझ रही पिछले गढ़े इब्बऐ भरे नहीं ||
मीडिया मैं जगहां बनाई विडीयो बढ़िया त्यार करी थी
खिलती कलियाँ के महां बात सही हर बार करी थी
जवानी उसकी हुनकर भरी थी गलत काम कदे करे नहीं ||
जितने जीया सफ़दर साथी जीया जमा जी भर कै नै
था लेखक बढ़िया अदाकार नुकड़ रच्या कोशिश कर कै नै
निभाया वायदा मर कै नै जुल्मों से सफ़दर डरे नहीं ||
एक सफ़दर नै राह दिखाई हजारों सफ़दर आगे आवैंगे
माला हाश्मी बनी सै चिंगारी घर घर मैं अलख जगावैंगे
हम फिरकापरस्ती तैं टकरावैंगे रणबीर के कलम जरे नहीं ||



--

tod ho liya

निचोड़ हो लिया
सफ़दर जी की हत्या से निचोड़ हो लिया
हुया हड्खाया राजवर्ग यो तोड़ हो लिया
एक जनवरी साल नवासी मोटा चाला होग्या
हुया हमला सफ़दर ऊपर घायल कुढाला होग्या
हमलावर खुद राज करनीये खुल्ला पाला होग्या
सफ़दर के नाटक का ढंग योतै निराला होग्या
यो राजनीती और हत्या का गठजोड़ हो लिया ||
चारों कूट मैं शोक फैलग्या कूकी दुनिया सारी
गाँव गाँव और शहर शहर मैं दुखी हुए नर नारी
पैरिस लन्दन रोम के अन्दर सदमा था बड़ा भरी
कलाकार था जग मैं नामी थी संस्कृति प्यारी
यो सरकारी चिलत्तर का भन्दा फोड़ हो लिया ||
सफ़दर हाश्मी डस लिया सर्प राज का काला है
अभिव्यक्ति की आजादी का इब तक यो टाला है
राजवर्ग की भाषा बोलो वर्ना मुंह पर ताला है
साच पर से जो पर्दा ठावै उसी ज्यान का गाला है
राजवर्ग सारी जगह का दीखे एक औड हो लिया ||
जल्दी संभलो रचना कारो कला पर यो हमला है
जन पक्ष की कला हमारी ना बिल्कुल ये अबला है
रोंदना चाहते हो तुम जैसे करता हाथी पगला है
हबीब भारती विचार करों क्या कदम हमारा अगला है
वर्ग लुटेरा हत्यारा यो एक ठयोड़ हो लिया ||

nahle pe dahla

धरती हमारी हुई है बाँझ
किसान तपस्वी हुआ कंगाल
बणी सणी ख़त्म हो गयी
तथाकथित नेता रहे दंगाल
गाँव गाँव में दारू बिकती
घर घर में औरत पिटती
बैठे ये लोग ताश खेलते
महिला पर मजाक ठेलते
ना किसी से कोई काम है
कहता किस्में जयादा दम है
बदमाशों ने लंगोट घुमाया
राजनेता से हाथ मिलाया
भ्रष्ट पुलिस अफसर मिला है
भ्रष्ट ब्यूरोक्रेट साथ खड़ा है
चारों क़ि दोस्ती अब तय हैं
एक दूजे क़ि बोलेन जय हैं
लगा रहे हैं जोर पर जोर
चारों तरफ देखो बढ़ा शोर
बेरोजगारी का उठा भूचाल
किसान होते जा रहे बदहाल
ऊपर से नेताजी भी पुकारे
उस पठे को मज्जा चखारे
आगे बढ़के गलघोट लगादे
कहाँ पे पड़ेगी चोट बतादे
आज उसे कल उसे पटकदे
सामने बोले जो उसे झटकदे
याद छटी का दूध दिलाना
मत इसे हमारा नाम बताना
बता रहे दाँव पर दाँव देखो
नेताओं में है कांव कांव देखो

कुरीतियों पर चुप रहे कमान

आनर किलिंग समाज में श्यान
मारना और फिर मरना होगा
नाम गाँव का तो करना होगा
जनता तक रही है सांसें थाम
बताओ यूं चलेगा ये कैसे काम
हम बिना शादी के घूम रहे हैं
वे गोतों के नशे में झूम रहे हैं
वाह निकले हैं नहले पर दहले
कौन बोलेगा वहां सबसे पहले
खूब हुई देखो वहां धक्का पेल
पंचायत ने वहां दिखाया था खेल
अहम् सबका माइक पे टकराया
फैसला खास वहां हो नहीं पाया
पाँच घंटे तक मार पर मार हुई
झड़प आपस में बारम्बार हुई
ना दहेज़ पर बोला कोई वहां
दारू पर बंद रही सबकी जुबाँ
महिला भ्रूण हत्या को भूल गए
बस गोत्र शादी में सब झूल गए

kissa mhara thara 2

Monday, 11 April 2011

समालखा जीवन शाला

प्रजातंत्र


प्रजातंत्र
लग्गी दिल पै चोट , लेगे जात पै वोट
बनते साथ मैं नोट , यो परजातंत्र क खोट
ले गरीबी की ओट ,अमीर खेले धन मैं ||
नाम जनता क लेवें ये , अंडे अमीरों के सेहवें ये
बतावें माणस क दोष , कहैं या व्यवस्था निर्दोष
ये बुधि लेगे खोस , इसे करे हम मदहोश
ना करता कोए रोष , सोचूँ अपने मन मैं ||
ये साधें सें हित अपना, ना करैं ये पूरा सपना
जितने बैठे मुनाफाखोर , सबसे बड्डे डाकू चोर
सदा सुहानी इनकी भोर , ना पावै इनका छोर
थमा जात धर्म की ड़ोर, फूट गेर दी जन मैं ||
कुर्सी खातर रचते बदमाशी , ना लिहाज शर्म जरा सी
पालतू इनकी हो सरकार, ना जावै कहे तै बाहर
गरीबों की कहै मददगार , लारे दिए बारम्बार
इब रहया नहीं एतबार ,इस गदरी बन मैं ||
स्कूली किताबों पै तकरार , गन्दा साहित्य बेसुम्मार
सबको शिक्षा सबको कम , आजादी पै दिया पैगाम
पचास अनपढ़ बैठे नाकाम , पचास के लगते दाम
ना पढ़ते करैं बदनाम , आग लागरी तन मैं ||

कलम पकड ल्यो


अपने हाथ कलम पकड़ो
चालाक आदमी फैयदा ठारे ,इब माणस की कमजोरी का
घर की खांड किरकरी लागे , कहैं गूद मीठा चोरी का
भगत और भगवान के बीच , दलाल बैठगे आकै
एक दूसरे की थाली पै , यें राखें नजर जमाकै
सीधी साच्ची बात करैं ना , यें करते बात घुमाकै
झोटे जैसे पले पड़े यें , सब माल मुफ्त क खा कै
म्हारी जेब पै बोझ डालते , अपनी जीभ चटोरी का||
हम बैठे भगवान भरोसे , ये कहरे हम दुःख दर्द हरैं
यें मंदिर की ईंट चुरा कै अपने घर की नीव धरैं
सारा बेच चढ़ावा खाज्याँ टीका लाकै ढोंग करैं
आप सयाने हम पागल बनाये , पाप करण तैं नहीं डरें
म्हारी राह मैं कांटे बोये , यें फैयदा ठारे धौरी का ||
राम के खातर खीलां फीकी ,यें काजू पिसता खावें
भगवान के ऊपर पंखा कोनी , यें ए सी मैं रास रचावें
मुर्गे काट चढ़ा पतीली , यें निश दिन छौंक लगावें
रिश्वत ले कै राम जी की , यें भगतों तैं भेंट करावें
बड़े बड़े गपौड़ रचें , यें करते काम टपोरी का ||
यें व्रत करारे धक्के तैं , धर्म का डर बिठा कै
खुद पड़े पड़े हुक्म चलावें म्हारी राखें रेल बना कै
टीके लाकै पोथी बांचें , कई राखें झूठे ढोंग रचा कै
'रामेश्वर ' सब अँधेरा मेटो , थाम तर्क के दीप जला कै
अपने हाथ कलम पकड़ो , लिखो इब अंत स्टोरी का ||

किस्सा म्हारा थारा

गुंडा गर्दी

गुंडा गर्दी
इस गुंडा गर्दी नै बेबे ज्यान काढ ली मेरी हे
सफ़ेद पोश बदमाशों नै इसी घाल दी घेरी हे
रोज तडकै होकै त्यार मनै हो कालेज के म्हं जाना
नापूता रोज कून पै पावै उन्नै पाछै साईकल लाना
राह मैं बूढ़े ठेरे बी बोली मारें हो मुश्किल गात बचाना
मुंह मैं घालन नै होज्याँ मने साब्ती नै चाहवें खाना
उस बदमाश जाले नै या चुन्नी तार ली मेरी हे ||
मने सहमी सी नै माँ आगे फेर बात बताई सारी
सीधी जाईये सीधी आईये मनै समझावै महतारी
तेरा ए दोष गिनाया जागा जै तनै या बात उभारी
फेर के रह्ज्यगा बेटी जिब इज्जत लुटजया म्हारी
बोली हाथ जोड़ कै कहरी मनै मान ली भतेरी हे ||
नयों गात बचा कै मनै पूरे तीन साल गुजार दीये
एच ए यूं मैं लिया दाखिला पढ़न के विचार कीये
वालीबाल मैं लिकड़ी आगे सबके हमले पार कीये
के बताऊँ किस किस नै मेरे पै जो जो वार कीये
मार मार कै तीर कसूते या छाती साल दी मेरी हे ||
कुछ दिन पहलम का जिकरा दूभर जीणा होग्या
इन हीरो होंडा आल्यां का रोज का गमीणा होग्या
कई बै रोक मेरी राही खड्या वोए कमीणा होग्या
उस दिन बी मैं रोक लाई घूँट खून का पीणा होग्या
कई हाँसें थे उडै जिब साईकल थाम ली मेरी हे ||
मेरी आँख्यां आगे अँधेरा था पर मने वो थपेड दीया
जोर का मारया धक्का मोटर साईकल धकेल दीया
नयों बोल्या मैं ना असली जै घाल नहीं नकेल दीया
तनै पडे भुगतना छोरी मोटा तित्तया यो छेड़ दीया
नयों कहै उस नीच जाले नै बांह मोस दी मेरी हे ||
भीड़ मैं तै फेर एक छोरा थोड़ा सा आगे नै आया था
के थारे बहन बेटी नहीं सै वो थोड़ा सा गुर्र्याया था
उतरया पेट मैं छः इंची बेचारे नै चक्कर खाया था
देख लिया अंजाम उसका जिन्नै बीच मैं पैर अड़ाया था
ठा फिट फटती भाज गये उन्नै लाज राख दी मेरी हे ||
एक बोल्या के बिगडया तेरा छोरा ज्यान तै खूज्यागा
दूजा बोल्या ताली दो हाथों बजै नया पवाडा बूज्यागा
मैं सोचूँ के होगा जिब यो बर्ताव म्हारी जड़ों मैं चूज्यागा
सराफत ना टोही पावै बदमाशी का लाग यो ढूँज्यागा
हांगा ला बचा लिया डाक्टरों नै बचा साख दी मेरी हे ||
हे मेरी बहना म्हारी गेल्याँ इसी बात रोज बनै सै हे
इसे ऊतों की या सड़कों ऊपर पूरी फ़ौज फिरै सै हे
एक एक करकै तेरी मेरी या कटती गुज फिरै सै हे
सब कठठी होल्यो नै सबनै कहती सरोज फिरै सै हे
पुलिश ना मदद करै रणबीर गांठ बांध दी मेरी हे ||

Sunday, 10 April 2011

गलत विज्ञानं /


ANTHEEN SANSAR

ठेकेदारों की आप्पा धाप्पी

किसे और की कहानी कोन्या

बैठ्या सोचूँ


विज्ञानं का पैगाम


MESSAGE OF SCIENCE

टैक्शों की भरमार

टैक्शों की भरमार
देख लिया थारा राम राज माफ़ करो हम तंग होगे ||
टैक्स लगा कै कमर तोड़ दी पहले तै भी नंग होगे ||
दूनी तीग्नी और चौगनी म्हारी उगाही होगी रै
बड़े बड़े धनवानों की तो मन की चाही होगी रै
म्हारी जेब पडी सै खाली कतई सफाई होगी रै
क्यूकर कुनबा चालैगा या घनी तबाही होगी रै
जीना मुश्किल होरया देखो कति मरण के ढंग होगे ||
चूल्हा टैक्स यो दूल्हा टैक्स लाया टैक्स पानी पै
शिक्षा टैक्स यो रक्षा टैक्स लाग्या टैक्स थाली पै
जेल टैक्स यो खेल टैक्स लाग्या टैक्स हाली पै
आन पै टैक्स जान पै टैक्स टैक्स लाया घरआली पै
टैक्शों की भरमार देख्ल्यो ये मोट्टे उत मलंग होगे ||
बिजली टैक्स बटन टैक्स मीटरों पै चाला होग्या
माल पै टैक्स बढाया दूना ज्यान का गाला होग्या
बीज पै टैक्स खाद पै टैक्स बख्त यो निराला होग्या
रजिस्टरीयों पै टैक्स बढ़ाये यो ढंग कुढाला होग्या
सुखा बाढ़ अर राज नै मारे देख देख कै दंग होगे ||
किते साईकिल टैक्स मोटर टैक्स लागे टैक्स सगाई पै
जीन टैक्स यो मरण टैक्स लागे टैक्स कष्ट कमाई पै
चाह पै टैक्स ब्याह पै टैक्स यो लागे टैक्स मिठाई पै
तेल पै टैक्स रेल पै टैक्स लागे टैक्स जहाज हवाई पै
सतबीर सिंह ये टैक्स नहीं सें म्हारी ज्यान पै जंग होगे ||

baad khet nai khavai

बाड़ खेत नै खावै आज सुभाष बोस थारे सपने सब धराशायी कर दिए
समाज के ठेकेदारों ने |  क्या बताया भला ---
सोने का दिया रांग बना यो मोट्टा चाला होग्या ||
पतासे की खांड बनादी यो गुड़ का राल्ला होग्या||
आज पीतल कै ऊपर सोने का घोल चढ़ावें सें
साच का गल घोट कै झूठ का ढोल बजावें सें
ठग चोर घने शरीफ बनें रपट रोल मचावें सें
कैह अमृत का प्याला जहर का मोल बढ़ावें सें
चारों कूट बदमाशी फ़ैली मरण का ढाला होग्या ||
सच्चाई छोड़ कै क्यूं झूठ तै नाता जोड़ लिया
मेहनत करने आले का जमा खून निचौड़ लिया
देश बेच दिया सारा कमीशन कई करोड़ लिया
पीस्सा आज भगवान होग्या घरबार तोड़ दिया
औरत बीच बाजार बिठादी यो ढंग कुढाला होग्या ||
ये दिन देखण नै के गाँधी जी नै गोली खाई थी
ये दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी परनायी थी
ये दिन देखण नै के रानी झाँसी नै लड़ी लडाई थी
ये दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फ़ौज बनाई थी
इसी आजादी आई सै यो ज्यान का गाला होग्या ||
कट्टर पंथ का जहर फैलाया बाग़ बगीचे सूक गये
भाई का बैरी भाई आज हुया कडे पुराने रसूख गये
इब्बी साच्ची बात जानलयां कौन बधा या भूख गये
लिखी रणबीर बात असली खुस क्यूं म्हारे टूक गये
हमपे जाल यो गेर दिया बैरी महरा रूखाला होग्या ||

आठ मार्च

किस्सा 1857

Saturday, 9 April 2011

लिंग भेद एक रागनी

लाल बहादुर शाश्त्री

वैज्ञानिक नजर के दम पै जिंदगी

१५ पन्दरा अगस्त

१५ पन्दरा अगस्त

आज का हरयाणा



सेहत दिवस ७ अप्रैल

छबीस जनवरी का दिन

भारत देश का नारा

सूरज साहमी कोहरा टिके ना


SURAJ SAHMI KOHRA TIKAI NAA

Crimes

दुनिया के बारे में अलग अलग विचार


DIFFERENT OPINIONS ABOUT THIS UNIVERSE/ FOLK SONG

टेंशन ओवर दलित सवरण इन किलाजफर्गढ़


KILAJAFARGARH KI GHATI EK GHATNA PAR ADHARIT

Sunday, 3 April 2011

डॉ रणबीर सिंह दहिया

नया समाज

राजबाला अपने पति अजीत से पूछती है की गुजारा कैसे होगा ? गेहूं पिटगे, धान पिट गया , बीजली महंगी , पढ़ाई महँगी ,और दवाई महंगी | अजीत राज बाला को अपने दिल की बात बताता है ---

खेती नै बचावै जो , रोटी बी दिलावै जो , देश सही चलावै जो

इसी लहर उठानी सै जरूर ||--

धनी देश एक टोल बनारे ,ये मिलजुल कै रोल मचारे

बिगाड़ी म्हारी चाल, तारली जमके ख़ाल ,उनके गलूरे लाल

इनकी काट बिछानी सै जरूर ||

ये मंदिर नै हटके लियाये,जिब रोटी नहीं दे पाये

जात पै हम बांटे ,धर्म पै खूब काटे ,मन कर दिए खाट्टे

या मानवता बचानी सै जरूर ||

बाजार की दया पै छोड़ दिए , अमरीका तै कर गठजोड़ लिए

पीट दिया धान क्यों ,काढी म्हारी ज्यान क्यों ,ना कोए ध्यान क्यों

या कमीशन बिठानी सै जरूर ||

नंगी फ़िल्में गंदे गाने टी वी पै ,लिहाज बची ना परजीवी पै

रणबीर सिंह सुनले , सही राही चुनले, कर पक्की धुन ले

नई समाज बनानी सै जरूर||

औ दिन कद आवैगा

मार पिटाई बंद हो सारी औ दिन कद आवैगा ||

रोटी कपडा किताब कापी नहीं घाट दिखाई देंगे

चेहरे की त्योरी मिटजयां सब ठाठ दिखाई देंगे

काम करण के फेर पूरे घंटे आठ दिखाई देंगे

म्हारे बालक बने हुए मुल्की लाठ दिखाई देंगे

कूकै कोयल बागां मैं प्यारी औ दिन कद आवैगा ||

दूध दही का खाना हो बालकां नै मौज रहैगी

छोरी माँ बापां नै फेर कति ना बोझ रहैगी

तांगा तुलसी नहीं रहै दिवाली सी रोज रहैगी

बढ़िया व्यव्हार हो ज्यागा ना सिर पै फ़ौज रहैगी

ना हो औरत नै लाचारी औ दिन कद आवैगा ||

सुल्फा चरस फ़ीम का ना कोए भी अमली पावै

माणस डांगर जिसा ना रहै ना कोए जंगली पावै

दान दहेज़ करकै नै दुःख ना कोए बी बबली पावै

पीस्सा ईमान नहीं रहै ना कोए नकली पावै

होवें बराबर नर और नारी औ दिन कद आवैगा ||

माणस के गल नै माणस नहीं कदे बी काटैगा

गाम बरोना रणबीर का असली सुर नै छाँटैगा

लिख कै बात बबिता की सब दुःख सुख बांटैगा

वोह तो पापी होगा जो इसा सुनने तै नाटैगा

रद ख़तम हों म्हारी थारी औ दिन कद आवैगा ||

मैच

जीत गये --बल्ले बल्ले

टी वी ऊपर बैठ कै हमनै लंका भारत लड़े देखे ||

दोनों तरफ के ख़िलाड़ी मैदान के महँ अड़े देखे ||

लोग बैठे चारों कान्ही मैदान खचाखच भरया हुया

कोए घरमैं बैठ्या कोए ,एलसीडी साहमी धरया हुया

कोए चुप कोए डरया हुया कई निढाल खड़े देखे ||

श्री लंका नै शुरू करया साँस म्हारी बंद करदी ये

दौ सौ चुहतर रन छः पै बना कै साहमी धरदी ये

असमंजस दिलों मैं भरदी ये चौके छके जड़े देखे ||

जीतेंगे या हारेंगे हम चर्चा जौर की चाल पड़ी या

अपने अपने अंदाजे थे थी मुश्किल तत्काल घडी या

देखै जनता बेहाल खड़ी या कई मजबूत बड़े देखे ||

सचिन और सहवाग गये मायूसी घनी छागी फेर

धोनी और गंभीर नै जंग थामन मैं ना लाई देर

लंका के ख़िलाड़ी करे ढेर मूंधे मूंह कई पड़े देखे ||

भारत की देख इसी एकता धयान दिल मैं आया यो

भ्रष्टाचार ख़त्म होज्या जै इतना ऐका करकै भजाया यो

रणबीर सिंह गीत बनाया यो छंद तुरत घड़े देखे ||

चश्मा जात का

चश्मा जात का --बैरी म्हारा

जिस दिन भाईयो यो जात का चश्मा टूटैगा

उस दिन पैंडा म्हारा जुल्मी शोषण तैं छूटैगा

हमनै बाँटन नै बैरी नै हथियार बनाई या

गेहूं के खेत मैं पैदा खरपतवार बताई या

दीवार जै नहीं ढाई या सिर म्हारा फूटैगा ||

म्हारे सेष के सब माणस जात्यां मैं बाँट दिए

नयों म्हारी एकता के लुटेरयाँ नै पर काट दिए

समझान तै नाट दिए यो लुटेरा हमनै चूटैगा ||

लुटेरयाँ की जात मुनाफा आंख खोल देख्या ना

लुटेरे एकै बोली बोलें हमने बोल कै देख्या ना

नाप तोल कै देख्या ना मुनाफा खोर न्यूं लूटैगा ||

रणबीर बरोने आला याहे बिनती आज करै सै

नए ज़माने मैं क्यों इसकी कुली आज भरै सै

इस्ते काम ना आज सरै सै इसतैं दूना गल घूंटैगा ||
बात पते की

क्यों दो आंख लेकै भी आंधे हमनै सड़ांध देवे दिखाई ना

बिल्ली देख कबूतर आंख मूँद कै कहवै आ डै बिलाई ना

ईमानदारी का पाठ पढावें नेता अफसर संसार मैं

इनकम टैक्स की चोरी करना बालक सीखें परिवार मैं

इस काले धन की बहार मैं दीखे फेर कति सच्चाई ना ||

ऊपर बैठे अफसर नेता लेरे बदेशी बैंकं मैं खाते ये

जड़ मैं भ्रष्टाचार पणपै तो क्यूकर हरे रहवैं पाते ये

इननै चाहियें चिमटे ताते ये इनकी कोए और दवाई ना ||

साठ हजार करौड़ का कर्जा म्हारे देश के अमीरां पै

सरकार म्हारी चालती देखो इनकी काढी लकीरां पै

हम खंदाये संत और फकीरां पै साच समझ मैं आई ना ||

दारू सुल्फा नशा खोरी हमतैं इनकी राही पकड़ा दी

बिना सोचें समझें हमनै भकड़ बाल कै नै दिखा दी

रणबीर सिंह नै छंद बना दी या साच जमा छिपाई ना ||

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