Wednesday, 1 March 2023

बहुमूल्य प्रतिभा हरियाणे की उनको पढ़ण बिठा रहे।।

 बहुमूल्य प्रतिभा हरियाणे की उनको पढ़ण बिठा रहे।।

अयोग्य बेकूफ आगै बढ़ाये विरोधी स्वर को दबा रहे।।
1
तकनीक और सूचना का युग पूरा संसार एक गाम बणाया
इसके दम पै  कारपोरेट नै गली मोहल्ले तक जाल बिछाया
स्थानीय काम धंधे पिटगे गरीब कै सांस चढ़ा रहे।।
2
बहोत घरों मैं मां बाप अगली पीढ़ी बारे चिंता ठारे
कोये रास्ता नहीं दीखता ज्यां करकै घना भय खारे
सुलटे काम बचे कोण्या उल्टे काम पीसा घणा दिवा रहे।।
3
किसान मजदूर सरपंच पिटरे मिलजुल कै मंच बनाना हो
नया नवजागरण जात पात के खिलाफ हर गांव चलाना हो
अडानी अम्बानी हर लूट रहे किसान आंदोलन ये सिखा रहे।।
4
शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार पै संकट ल्या दिया भारी भाई
जातपात धर्म मजहब पै बांटकै म्हारी अक्कल मारी भाई
रणबीर सिंह बरगे  लिखारी यो संघर्ष का राह दिखा रहे।।

माहौल चारों कान्हीं का देवै सै तनावपूर्ण दिखाई।।

 



माहौल चारों कान्हीं का देवै सै तनावपूर्ण दिखाई।।
अविश्वास हिंसा अपराध नै आज चौपड़ सार बिछाई ।।
1
यो नशे पते का व्यापार देखो पकड़ घणी तूल रहया
बेरोजगारी अर म्हंगाई का फंदा जनता पै झूल रहया
अविश्वास का आडंबर फूल रहया फिजूलखर्ची भी छाई।।
2
सोशल मीडिया पै भी अंधविश्वास खूब फैलाया जा
चमत्कार बताकै पढ़या लिख्या यो आज भकाया जा
मंदिर मस्जिद मैं खँदाया जा चर्च भी इनकै संग आई।।
3
संघर्ष का रास्ता छुड़वाकै पूजा पाठ का राह दिखाया
धार्मिक आस्था म्हारी थारी इनका सहारा लेकै भकाया
हर दो मील पै मंदिर खुलाया असली संकट जावै छिपाई।।
4
सरपंच दुखी कर राखे किसानी संकट भी घणा बढ़ाया
सरकारी ढांचा बेचकै नै प्राईवेट ताहिं आज यो थमाया
हरेक तबका सडकां पै आया रणबीर नै कलम
घिसाई।।

संसार मैं तूँ क्यूँ आया, तनै के खोया के पाया,

 संसार मैं तूँ क्यूँ आया, तनै के खोया के पाया,

हिसाब कदे ना लाया, या न्यूएँ उम्र गुजारी।।

1

ना आच्छी किताब पढ़ी अश्लील साहित्य भाग्या

टी वी नशा हिंसा का यो माहौल शरीर नै खाग्या

बात काबू कोण्या आई, पकड़ी क्यूँ उल्टी राही

करी घर की तबाही, या बात ना कदे बिचारी।।

2

ज्ञान सबतैं बड्डा धन दुनिया मैं बताया रै

ज्ञान जीवन मैं बता कितना तनै कमाया रै

मन होज्या तेरा गन्दा ,यो काले धन का धंधा

बणग्या गल का फंदा, इसनै अक्कल फेर दी सारी।।

3

तूँ बचन सुथरे बोलै फेर करता घटिया काम 

पिछाण कर्मा तैं होवै खाली बचनों के ना दाम

यो संयम तनै खोया , बीज ईर्ष्या का बोया,

बहोतै गन्द सै ढोया, करनी सीखी चोरी जारी।।

4

समय सार जिंदगी का  कैहगे बड़े बड़ेरे न्यों 

कर बर्बाद समय नै बेहाल हुए भतेरे न्यों 

दूजे की कमी निगाही , ना देखी दिल की खाई

आज साफ दे दिखाई, रणबीर बेशर्मी थारी।।

Monday, 27 February 2023

धुरतैं धोखा करते आये

गेर रै गेर पत्ता गेर
महिला को सदियों से दबा कर रखा गया है परम्परा के नाम पर और तथाकथित घर की इज्जत के नाम पर । उसके साथ गैरबराबरी का व्यवहार किया जाता रहा है । हमारी कथाओं में ,सांगों  में भी महिला को बराबरी का इंसान कभी नहीं दिखाया गया। पितृसत्ता की मानसिकता के चलते  परिवार में मर्द हमेशा औरत को दबा कर रखता आया है। एक रागनी के माध्यम से कोशिश है हमारी परम्पराओं को खंगालने की---
धुर तैं धोखा करते आये परम्परा उघाड़ कै देख लियो
गरज गरज के प्यारे दिखाऊँ यो बेरा पाड़ कै देख लियो 
द्रोपदी जुए कै म्हं हार दई युधिष्ठर नै पासे डारे देखो 
शादी रचाई भोला जी नै पार्वती कै धक्के मारे देखो
सत की सीता घर तैँ ताहदी राम चन्द्र हद तारे देखो
डायन बता पद्मावत भी हरिश्चंद्र बचण तैँ हारे देखो 
ब्याही का भी तरस करैं ना ये पोथी पत्रे फाड़ कै देख लियो ।
अंगूठी देकै शकुंतला तैँ दुष्यंत बख्त पै भूल गया रै
पवन कुमार भी अंजना मैं काढ़ दोष फिजूल गया रै
नल काट साड़ी दमयंती की गेर फर्ज पै धूल गया रै
इसी इसी बातां का मामला पकड़ हमेश तूल गया रै
मौका आवै तो आँख बदलैं कितना ए चिंघाड़ कै देख लियो ।
जोधनाथ नै रूपाणी भी बण कै बीच खन्दाई देखो
धक्के खा खाकै बण मैं जिंदगी सहम गंवाई देखो 
चाप सिंह नै सोमवती भी पतिव्रता जार दिखाई देखो 
मदन सेन नै भी सोयी होई दई काट नानदे बाई देखो 
बीर कदे कुछ नहीं बोलेंगी या बांधी किवाड़ कै देख लियो 
किट ताहिं गिनाऊं परम्परा महिला हमेश थी साफ़ देखो 
हमेशा महिला दयावान होसै मर्द करते डोलें पाप देखो
कार चोरी जारी ठगी की कदे क़दीमी इनकी माफ़ देखो 
बीर मर्द का झगड़ा कोन्या सै या पितृसत्ता की छाप देखो
बराबरी का विचार रणबीर आज लिकाड़ कै देख लियो ।
रणबीर 
1.3.2015

Sunday, 26 February 2023

किसान तेरी धरती जागी इबतो लेले सम्भाला तूँ।

 किसानो जागो

किसान तेरी धरती जागी इबतो लेले सम्भाला तूँ।

नाश होवण लागरया किसान किसा रूखाला तूँ।

धरती खोसन का अध्यादेश भाजपा लेकै आई रै

पार्लियामेंट बाई पास इसी जुगत सै भिड़ाई रै

इब्बी सोवन लॉगरया कररया सै घणा चाला तूँ।

बिना सहमति धरती खोसैं इसा काला क़ानून चाहवैं

किसान हितेषी विकास हितेषी इसनै मोदी जी बतावैं

हजारां एकड़ एक फार्म की उसका कर दिया टाला क्यूँ 

विकास का बाहना लेकै अडानी की मेर कटाते

विपक्ष नै विकास विरोधी ये भजपा आले बताते 

समझ ले चाल इनकी क्यूँ करै सै गुड़ का राला तूँ

मतभेद भूल कै जातधर्म के सांझे मंच पर आओ रै

थारी ताकत बहोत घनी घेर कै दिल्ली दिखाओ रै

रणबीर खुद खड़या होकै खींच लड़ाई का पाला तूँ।

27.2.2015

Saturday, 25 February 2023

युद्ध नहीं शांति चाहिए 

 युद्ध नहीं शांति चाहिए 

युद्ध हुया तो मरेंगे हिंदुस्तान पाकिस्तान के सिपाही ।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

1

युद्ध उन्माद ठीक नहीं भावना मैं ये बहावैं सैं

दोनों कांहीं की सरकार भिड़ाये राखणा

चाहवैं सैं 

कश्मीरी जनता दो पाटों बीच सालों तैं पिसती आई।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

2

पुलवामा आतंकी हमले मैं कित चूक रही

सरकार की 

 क्यों चुप्पी उसपै जो  बात गवर्नर नै भी स्वीकार की 

हजार तैं फालतू संख्या किसके हुकम तैं गई बढ़ाई।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

3

कार उस हाई वे पै बीच में रोकी क्यूं ना बताओ रै

हवाई जहाज की फ़ाइल क्यों दाबी गई समझाओ रै

खुफिया एजेंसी की सूचना क्यो ना करी

कार्यवाही।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

4

इस आतंकी हमले पै सुरक्षा पै कई उठे सवाल ये

करकै नै पूरी इन्क्वारी बेरा पाड़ो कौन दलाल ये 

रणबीर कहै चौकस रहियो सोचो शांति की राही।।

अमरीका हथियार बेच कै करावै दोनों की तबाही।।

जाइये मनै बताकै

 जाइये मनै बताकै


घसे कसूते दुःखी होरे सां देख मुरारी आकै।

अपणे हाथां क्यूं ना गेरता कुएं के मां ठाकै।।

1. देश दम म्हारे पै फल्या यो

  अमीर घर दीवा बल्या यो

  म्हारा सब किमै छल्या यो घिटी मैं गूंठा लाकै।।

2. तेरा चेला दुखड़ा

  मेहनत कर भूखा सोवै सै

  तनै सारे कै टोहवै सै सोग्या अमीरां कै जाकै।।

3. तनै गरीब क्यों नहीं भाता

  क्यों ना म्हारी तरफ लखाता

  तूं कद खोलै म्हारा खाता जाइये मनै बताकै।।

4. बचया छिदा इन्सान आड़ै

  सब देखै भगवान आडै़

  घर होगे शमशान आड़ै रणबीर कथा सुणाई गाकै।।

नशे की लत माड़ी

 नशे की लत माड़ी

एक बै आदत पड़ज्या तो छूटै ना कितने ऐ ताण तुड़ा ले ॥

मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा  चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

1        

तम्बाकू की लत होज्या तो कैंसर रोग की खुलज्या सै राही

दमा बधै और साँस रोग भी मचावै बुढ़ापे मैं घणी तबाही

खांसी बलगम तड़कै ऐ तड़क माणस नै खूबै ऐ रूआ ले ॥

 मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

2       

 दारू की लत  का काम बुरा पूरे हरियाणा मैं छागी देखो

माणस की इस लत के कारण महिला दुःख पागी देखो

गैंग रेप बढे हरियाणा मैं या गिरती साख कौन बचा ले ॥

  मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा  चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

3         

पर नारी की लत कसूती घर परिवार बर्बाद करै

महिला पुरुष के रिश्त्यां मैं या कसूता खटास भरै

नहीं छूटै या लत मनास की चाहे कोए कितना ऐ समझाले ॥

मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा  चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

4         

ताश खेलण की लत बढ़ी हरियाणे के गामां  गालों मैं

जुए की लत नै द्रोपदी का चीर हरण कराया दरबारों मैं

असर  होवैगा पूरा जै कोए रागनी पूरे सुर के मैं गा ले ॥

 मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ॥

5         

कई लड़के और लड़की भी ये कई लत्तां के शिकार हुए

समाज सुधार की जरूरत ये रणबीर सिंह के विचार हुए

  कुछ पुलिस नेता अफसर हुए ये लत खोरों के रखवा ले  ॥

  मुश्किल होज्या ऐब छुड़ाणा  चाहे कितनी ऐ कसम दुआ ले ।।

किस्सा शहीद भगत सिंह 2

 15*******



भगत सिंह राज गुरु सुखदेव के सपने अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इसके कारणों में जाना और विचार करना जरूरी है। क्या बताया भला--

सपने चकनाचूर करे थारे देश की सरकारां नै।
जल जंगल जमीन कब्जाए देश के सहूकारां नै ।
1
शिक्षा हमें मिलै गुणकारी , भगत सिंह सपना थारा
मरै ना बिन इलाज बीमारी, भगत सिंह सपना थारा
भ्रष्टाचार कै मारांगे बुहारी, भगत सिंह सपना थारा
महिला आवै बरोबर म्हारी, भगत सिंह सपना थारा
बम्ब गेर आवाज सुनाई, बहरे गोरे दरबारां नै।
2
समाजवाद ल्यावां भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
कोए दुःख ना ठावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
दलित जागां पावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
अच्छाई सारै छावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
जनता चैन का सांस लेवै बिन ताले राखै घरबारां नै।
3
थारी क़ुरबानी के कारण ये आजादी के दिन आये
उबड़ खाबड़ खेत संवारे देश पूरे मैं खेत लहलाये
रात दिन अन्न उपजाया देश अपने पैरों पै ल्याये
चुनकै भेजे जो दिल्ली मैं उणनै हम खूब बहकाये
आये ना गोरयां कै काबू कर लिए अपने रिश्तेदारां नै।
4
समाजवाद की जगां अम्बानीवाद छाता आवै देखो
थारे सपने भुला कै धर्म पै हमनै लड़वावै देखो
मुजफ्फरनगर हटकै भगत सिंह थामनै बुलावै देखो
दोनों देशों मैं कट्टरवाद आज यो बढ़ता जावै देखो
रणबीर खोल कै दिखावै साच आज के नम्बरदारां नै।

16*********

भारत देश बहुत सालों तक गुलाम रहा। देश भक्तों ने संघर्ष किया तो 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। सबसे बड़ा गणतन्त्र है। क्या बताया भला--
यो गणतंत्र सबतै बड्डा भारत आवै कुहाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
दो सौ साल गोरया नै भारत गुलाम राख्या म्हारा था
गूंठे कटाये कारीगरां के मलमत दाब्या म्हारा था
सब रंगा का समोवश था फल मीठा चाख्या म्हारा था
भांत-भांत की खेती म्हारी नहीं ढंग फाब्या म्हारा था
फूट गेर कै राज जमाया कही जाती बात समाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
वीर सिपाही म्हारे देस के ज्यान की बाजी लाई फेर
लक्ष्मी सहगल आगै आई महिला विंग बनाई फेर
दुर्गा भाभी अंगरेजां तै जमकै आड़ै टकराई फेर
याणी छोरियां नै गोरयां पै थी पिस्तौल चलाई फेर
गोरे लागे राजे रजवाड़यां नै अपणे साथ मिलाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
3
आवाज ठाई जिननै उनके फांसी के फंदे डार दिये
घणे नर और नारी देस के काले पाणी तार दिये
मेजर जयपाल नै लाखां बागी फौजी त्यार किये
फौज आवै बगावत पै म्हारे बड्डे नेता इन्कार किये
नेवी रिवोल्ट हुया बम्बी मैं अंग्रेज लगे दबाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
4
आजादी का सपना था सबकी पढ़ाई और लिखाई का
आजादी का सपना था सबका प्रबन्ध हो दवाई का
आजादी का सपना था खात्मा होज्या सारी बुराई का
आजादी का सपना था आज्या बख्त फेर सचाई का
हिसाब लगावां आजादी का रणबीर सिंह के गाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।

17********

पन्दरा अगस्त आजादी का दिन --एक लेखा जोखा उन कुर्बानियों का जिनके दम पर देश आजाद हुआ---

कितने गये काला पानी कितने शहीद फांसी टूटे रै।।
पाड़  बगा दिए  गोरयां के गढ़रे थे जो देश मैं खूंटे रै ।।
1
पहली आजादी की जंग थारा सो सतावन  मैं लड़ी थी
बंगाल आर्मी करी बगावत जनता भी साथ भिड़ी थी
ठारा  सौ सतावन के मैं जन क्रांति के बम्ब फूटे रै ।।
2
भगत सिंह सुख देव राजगुरु फांसी का फंदा चूमे
उधम सिंह भेष बदल कै लन्दन की गालाँ  मैं घूमे
चंदर शेखर आजाद साहमी गोरयां के छक्के छूटे रै।।
3
सुभाष चन्द्र बोश नै आजाद हिंद फ़ौज बनाई थी
महिला विंग खडी करी लक्ष्मी सहगल संग आई थी
धुर तैं आजादी खातिर ये किसान मजदूर भी जुटे रै ।।
4
गाँधी की गेल्याँ जनता जुड़गी हर तरियां साथ दिया 
चाल खेलगे गोरे फेर बी देश मैं बन्दर बाँट किया
बन्दे मातरम अलाह हूँ अकबर ये हून्कारे उठे रै ।।
5
सोच घूमै इब्बी जिसने देख्या खूनी खेल बंटवारे का
लाखां घर बर्बाद हुए यो क़त्ल महमूद मुख्त्यारे का
दो तिहाई नै आज बी रोटी टुकड़े पानी संग घूंटे रै ।।
6
छियासठ साल मैं करी तरक्की नीचे तक गई नहीं
ऊपरै ऊपर गुल्पी आजादी नीचै जावन दई नहीं
रणबीर सिंह टोह कै ल्यावै खुये मक्की के भूट्टे  रै ।।

18****** **

भगत सिंह हर के सपने
जिन सपन्यां खातर फांसी टूटे हम मिलकै पूरा करांगे ।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
1
सबको मिलै शिक्षा पूरी यही तो थारा विचार बताया
समाज मैं इंसान बराबर तमनै यो प्रचार बढ़ाया
एक दूजे नै कोए ना लूटै थामनै समाज इसा चाहया
मेहनत की लूट नहीं होवै सारे देश मैं अलख जगाया
आजादी पाछै कसर रैहगी हम ये सारे गड्ढे भरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
2
फुट गेरो राज करो का गोरयां नै खेल रचाया था
छूआ छूत पुराणी समाज मैं लिख पर्चा समझाया था
समाजवाद का पूरा सार सारे नौजवानों को बताया था
शोषण रहित समाज होज्या इसा नक्शा चाहया था
थारे विचार आगै लेज्यावांगे हम नहीं किसे तैं डरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
3
नौजवानो को भगत सिंह याद आवै सै थारी क़ुरबानी
देश की खातर फांसी टूटे गोरयां की एक नहीं मानी
देश की आजादी खातर तकलीफ ठाई थी बेउन्मानी
गोरयां के हाथ पैर फूलगे जबर जुल्म करण की ठानी
क्रांतिकारी कसम खावैं देश की खातर डूबाँ तिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
4
बहरे गोरयां ताहिं हमनै बहुत ऊंची आवाज लगाई
जनता की ना होवै थी सुनायी ज्यां बम्ब की राह अपनाई
नकाब फाड़ना जरूरी था गोरे खेलें थे  घणी चतुराई
गोरयां की फ़ौज म्हारी माहरे उप्पर करै नकेल कसाई
रणबीर कसम खावां सां चाप्लूसां तैं नहीं घिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।

19********
**भगत सिंह के रास्ते को अपनाना  होगा**

एक दिन जनता जागैगी, भ्रष्ट राजनीति भागैगी, घोटाल्याँ पाबंदी लागैगी, इन सबकी सै आस मनै।।
1
असल मैं तो नौकरी आज बहोत घणी बची कोण्या
बिना सिफारिश पीसे मिलज्या या बात जँची कोण्या
यो हिसाब जनता माँगैगी,या कसूरवारां नै टाँगैगी,
ठेकेदारां नै पूरा छांगैगी, इसका सै अहसास मनै।।
2
जो भी परिवर्तन आया वा या जनता ल्याई देखो
शोषण का रूप बदल्या जब जनता ली अंगड़ाई देखो
लगाम अमीरों कै लागैगी,हथकड़ी उनकै फाबैगी,
जनता उस दिन नाचैगी,उलगी आवैगी सांस मनै।।
3
जनता की जनवादी क्रांति सुधार आवै पूरे समाज मैं
कोये भूखा नहीं सोवै अमन शांति छावै पूरे समाज मैं
छुआछूत ना टोही पावैगी ,भ्रष्टाचार ना भाजी थ्यावैगी, भूख ना फेर सतावैगी , बनता दीखै इतिहास मनै।।
4
यो हासिल करने खातर  भगत सिंह बनना होगा
जनतंत्र असली खातर संघर्ष मैं उतरना होगा
अर्थ नीति बदली जावैगी,फेर सांस मैं सांस आवैगी,दुनिया मैं शांति छावैगी, रणबीर देवै विश्वास मनै।।

20*******

लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही ।।
1
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा, करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं , लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे, संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी थारे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तमनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।

21********

राज गुरु सुख देव भगत सिंह तेईस मार्च नै फांसी पै लटकाये।।
हुसैनी वाला में अधजले तीनूं  सतलुज नदी के मैं गये बहाए।।
1
धार्मिक कट्टरवाद और अंधविश्वास समाज के बैरी बताये
विकास के पक्के रोड़े सैं इनपै लिख कै संदेश घर घर पहूंचाये
लिख मैं नास्तिक क्यों सूं एक पुस्तिका मैं अपने विचार बताये।।
2
इंसान के छूने से सवाल करया हम अपवित्र कैसे हो ज्यावैं
पशु नै रसोई मैं ले जाकै क्यों हम अपनी गोदी के मैं बिठावैं
कति शर्म नहीं आती हमनै क्यों इसे रिवाज समाज मैं चलाये।।
3
जो चीज आजाद विचारों नै बर्दाश्त नही कर पावै देखो रै
हों इसी चीज खत्म समाज तैं तीनूं नौजवान चाहवैं देखो रै
समाजवाद के पढ़े विचार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लाये।।
4
लोग नहीं लड़ें आपस के मैं जरूरत वर्ग चेतना की बताई
किसान मजदूर की असली बैरी पूंजीपति की वर्ग समझाई
सुखदेव राजगुरु भगत सिंह नै रणबीर ना पाछै कदम हटाये ।।

22********
किस्सा शहीद भगत सिंह
भगत सिंह जेल से अपने पिताजी के नाम एक पत्र लिखकर सरकार को उनके द्वारा भेजी अपील का सख्त विरोध करते हैं । क्या बताया इस रागनी में :-
अर्जी पिता किशनसिंह नै ट्रिब्यूनल ताहीं दी बताई थी।।
दलील दे बचाव खातर  कोर्ट जाणे की प्लान बनाई थी ।।
भगत सिंह और उसके साथी इसतैं सहमत नहीं बताये
अंग्रेजां की बदले की नीति बोले पिता समझ नहीं पाये
जिंदगी की भीख नहीं मांगां सन्देश बाबू धोरै भिजाई थी।1।
दलील दे बचाव खातर-------
हम तो हैरान पिताजी क्यों आपनै आवेदन भेज दिया
बिना मेरे तैं सलाह करें इसा गल्त क्यों काम किया
राजनितिक विचारों की दूरी कई बारियां समझाई थी।
2।
दलील दे बचाव खातर-------
थारी हाँ ना के ख्याल बिना मैं अपना काम करता आया सूँ
मुकद्दमा नहीं लड़ूंगा इसपै मैं धुर तैं खड़या पाया सूँ
अपने सिद्धान्त कुर्बान करकै नहीं बचना कसम खाई थी3।
दलील दे बचाव खातर---------
आप पिता मेरे ज्यां करकै मनै सख्त बात नहीं लिखी सै
थारी या बड़ी कमजोरी बात साफ़ मनै कहनी सिखी सै
रणबीर इस्सी उम्मीद कदे मनै आपतैं नहीं लगाई थी।।4
दलील दे बचाव खातर---------
16.9.16

23*********
जब जब जनता जागी  यो जुल्मी शोषक झुका दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
आजाद देश का सपना पहुंचा शहर और गांव मैं
भगत सिंह फांसी टूटा जोश था  देश तमाम मैं
दुर्गा भाभी गेल्याँ  जुटगी इस आजादी के काम मैं
लाखाँ नर और नारी देगे या कुर्बानी गुमनाम मैं
कुर्बानी बिना नहीं आजादी गांधी अलख जगा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
गोरे गये आगे काले गरीबी जमा मिटी नहीं सै
बुराई बढती आवै सै भिद्द इसकी पिटी नहीं सै
अच्छाई संघर्ष करण लागरी आस जमा घटी नहीं सै
जनता एक दिन जीतेगी या उम्मीद छुटी नहीं सै
म्हारी एकता तोडण़ खातिर जात पात घणा फैला दिया।।
भारत तैं जुल्मी गौरा मिलकै सबनै भगा दिया।।
जात पात हरियाणा की सै सबतैं बड्डी बैरी भाइयो
विकास पूरा होवण दे ना दुनिया याहे कैहरी भाइयो
वैज्ञानिक सोच काट सै इसकी जड़ घणी गहरी भाइयो
अमीराँ की जात अमीरी म्हारै गरीबी फैहरी भाइयो
समता वादी समाज होगा संघर्ष का डंका बजा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
दारू माफिया मुनाफा खोर इनकी पक्की यारी देखो
भ्रष्ट पलसिया औछा नेता करता चौड़े गद्दारी देखो
बिचोलिया घणे पैदा होगे म्हारी अक्ल मारी देखो
लंबे जन संघर्ष की हमनै कर ली तैयारी देखो
रणबीर भगत सिंह ने रास्ता सही दिखा दिया।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।

24*********
23 मार्च शहादत दिवस के मौके पर
देख हालत आज देश की थारी याद घणी आवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
1
सबको शिक्षा काम सबको का नारा थामने लाया था
इंकलाब जिंदाबाद देश में जोर लगा गुंजाया था
शोषण रहित समाज थारी डायरी लिखा पावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
2
अंग्रेजों के खिलाफ थाम नै जीवन दा पै लगा दिया

आजादी का संदेश यो घर घर के में पहुंचा दिया
तीनों साथी फांसी चढ़गे  देश शहादत मना वै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
3
सरफरोशी की तमन्ना बोले इब म्हारे दिल मैं सै
देखना सै जोर कितना बाजू ए कातिल थारे मैं सै
एक नौजवान तबका थाम नै उतना ए चाहवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
4
धर्म के नाम पर समाज बांटें आज देश भगत बनरे
हिंदू मुस्लिम के नाम पै बना कै पाले बन्दी तनरे
रणबीर थारी कुर्बानी हम सब मैं जोश लयावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।

25********
जनता की जनवादी क्रांति हम बदल जरूर ल्यावाँगे रै ॥ 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
1
जनतन्त्र का मुखौटा पहर कै राज करै सरमायेदारी या
जल जंगल जमीन धरोहर बाजार के मैं बेचै म्हारी या
हम लोगां का लोगां की खातर लोगां का राज चलावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
2
कौन लूटै जनता नै इब सहज सहज पहचान रहे
आज घोटाले पर घोटाले कर ये कारपोरेट बेईमान रहे
एक दिन मिलकै इन सबनै हम जेल मैं पहोंचावांगे रै  ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
3
जनता जाओ चाहे भाड़ मैं बिदेशी पूंजी तैं हाथ  मिलाया
दरवाजे खोल दिए उन ताहिं गरीबाँ का सै भूत बनाया
जमा बी हिम्मत नहीं हारां मिलकै नै सबक सिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
4
बढ़ा जनता मैं  बेरोजगारी ये नौजवान भटकाये देखो 
जात पात गोत नात मैं बांटे आपस मैं भिड़वाये देखो
किसान मजदूर के दम पै करकै संघर्ष दिखावांगे रै ॥

किस्सा शहीद भगत सिंह

 


किस्सा शहीद भगत सिंह
शहीद भगत सिंह की याद में क्या बताया भला---
***1
हट कै क्यूकर बुलाऊँ मैं , पुनर्जन्म नहीं गया बताया ।।
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
1
तेईस साल का था जिब तूं फांसी का फंदा चूम गया
इन्कलाब जिंदाबाद का नारा फिरंगी का सिर घूम गया
पगड़ी सम्भाल जट्टा का गाना इनपै भारतवासी झूम गया
बम्ब गेरया असम्बली के मैं तूं मचा देश मैं धूम गया
समतावादी समाज बानावां इसका विचार यो बढाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
2
मार्क्सवाद तैं ले कै प्रेरणा शोषण ख़त्म करना चाहया था
सबके हक़ बराबर होंगे इंकलाबी नारा यो लाया था
यानी सी उमर भगत सिंह तेरी गाँधी को समझाया था
गोरे जा कै काले आज्यांगे  सवाल तनै यो ठाया था
क्रांतिकारी नौजवानों का संगठन तमनै मजबूत बनाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
3
ढाल ढाल के भारत वासी सबकी भलाई चाही तनै
यो सपना पूरा होज्या म्हारा नौजवान सभा बनाई तनै
अंध विश्वासी भारत मैं लड़ी विचारों की लडाई तनै
वर्ग संघर्ष सही रास्ता जिसपै थी  शीश चढ़ाई तनै 
तेरा रास्ता भूल गये ना सबकै आजादी का फल थ्याया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
4
तेरे सपनों का भारत देश भगत सिंह हम बना वांगे
मशाल जो तनै जलाई वा घर घर मैं हम ले ज्यावांगे
थाम नै फांसी खाई थी हम ना पाछै कदम हटा वांगे
जात पात गोत नात पै ना झूठा झगडा हम ठा वांगे
रणबीर सिंह बरोने आले नै दिल तैं यो छंद बनाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।

2*******

भगत सिंह (जन्म: 28  सितम्बर 1907 , मृत्यु: 23 मार्च 1931) भारत के एक प्रमुख क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे। भगतसिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है। इन्होंने केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप इन्हें 23 मार्च 1931 को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी पर लटका दिया गया। सारे देश ने उनके बलिदान को बड़ी गम्भीरता से याद किया। पहले लाहौर में साण्डर्स-वध और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय असेम्बली में चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान की। भगत सिंह ने मार्क्सवादी विचारधारा का गहन मंथन किया और इसी को संघर्ष का आधार बनाया |
सोने की चिड़िया  भारत म्हारा इसका हाल देखले आकै  ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
1
मेहनत कश देशवासियों नै यो खून पसीना एक करया
खेत कारखाने खूब कमाए यो देश खजाना खूब भरया
टाटा अम्बानी लूट कै लेगे आज अपने प्लान बनवाकै ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
2
तीनों फांसी का फन्दा चुम्मे दुनिया मैं इतिहास बनाया
थारी क़ुरबानी नै भारत मैं  आजादी का अलख जगाया
दिखावा करैं थारे नाम का असल मैं धरे टांड पै बिठाकै ॥
3
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
भ्रष्टाचार ठाठे मारै देखो दिल्ली के राज दरबारों मैं
कुछ भृष्ट नेता भ्रष्ट अफसर मौज करैं सरकारों मैं
बाट आजादी के फ़लां की आज  हम देखां सां मुंह बाकै ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
4
प्रेरणा लेकै थारे तैं हम आज कसम उठावां सारे रै
ज्यान की बाजी लाकै नै सपने पूरे करां थारे रै
लिखै रणबीर साची सारी आज एक एक बात जमाके ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥

3*******

भगत सिंह राज गुरु सुखदेव के सपने अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इसके कारणों में जाना और विचार करना जरूरी है। क्या बताया भला--

सपने चकनाचूर करे थारे देश की सरकारां नै।
जल जंगल जमीन कब्जाए देश के सहूकारां नै ।
1
शिक्षा हमें मिलै गुणकारी , भगत सिंह सपना थारा
मरै ना बिन इलाज बीमारी, भगत सिंह सपना थारा
भ्रष्टाचार कै मारांगे बुहारी, भगत सिंह सपना थारा
महिला आवै बरोबर म्हारी, भगत सिंह सपना थारा
बम्ब गेर आवाज सुनाई, बहरे गोरे दरबारां नै।
2
समाजवाद ल्यावां भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
कोए दुःख ना ठावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
दलित जागां पावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
अच्छाई सारै छावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
जनता चैन का सांस लेवै बिन ताले राखै घरबारां नै।
3
थारी क़ुरबानी के कारण ये आजादी के दिन आये
उबड़ खाबड़ खेत संवारे देश पूरे मैं खेत लहलाये
रात दिन अन्न उपजाया देश अपने पैरों पै ल्याये
चुनकै भेजे जो दिल्ली मैं उणनै हम खूब बहकाये
आये ना गोरयां कै काबू कर लिए अपने रिश्तेदारां नै।
4
समाजवाद की जगां अम्बानीवाद छाता आवै देखो
थारे सपने भुला कै धर्म पै हमनै लड़वावै देखो
मुजफ्फरनगर हटकै भगत सिंह थामनै बुलावै देखो
दोनों देशों मैं कट्टरवाद आज यो बढ़ता जावै देखो
रणबीर खोल कै दिखावै साच आज के नम्बरदारां नै।

4*******

भारत देश बहुत सालों तक गुलाम रहा। देश भक्तों ने संघर्ष किया तो 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। सबसे बड़ा गणतन्त्र 74 साल का हो गया  है। क्या बताया भला--
यो गणतंत्र सबतै बड्डा भारत आवै कुहाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
दो सौ साल गोरया नै भारत गुलाम राख्या म्हारा था
गूंठे कटाये कारीगरां के मलमत दाब्या म्हारा था
सब रंगा का समोवश था फल मीठा चाख्या म्हारा था
भांत-भांत की खेती म्हारी नहीं ढंग फाब्या म्हारा था
फूट गेर कै राज जमाया कही जाती बात समाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
वीर सिपाही म्हारे देस के ज्यान की बाजी लाई फेर
लक्ष्मी सहगल आगै आई महिला विंग बनाई फेर
दुर्गा भाभी अंगरेजां तै जमकै आड़ै टकराई फेर
याणी छोरियां नै गोरयां पै थी पिस्तौल चलाई फेर
गोरे लागे राजे रजवाड़यां नै अपणे साथ मिलाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
3
आवाज ठाई जिननै उनके फांसी के फंदे डार दिये
घणे नर और नारी देस के काले पाणी तार दिये
मेजर जयपाल नै लाखां बागी फौजी त्यार किये
फौज आवै बगावत पै म्हारे बड्डे नेता इन्कार किये
नेवी रिवोल्ट हुया बम्बी मैं अंग्रेज लगे दबाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
4
आजादी का सपना था सबकी पढ़ाई और लिखाई का
आजादी का सपना था सबका प्रबन्ध हो दवाई का
आजादी का सपना था खात्मा होज्या सारी बुराई का
आजादी का सपना था आज्या बख्त फेर सचाई का
हिसाब लगावां आजादी का रणबीर सिंह के गाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।

5******

पन्दरा अगस्त आजादी का दिन --एक लेखा जोखा उन कुर्बानियों का जिनके दम पर देश आजाद हुआ---

कितने गये काला पानी कितने शहीद फांसी टूटे रै।।
पाड़  बगा दिए  गोरयां के गढ़रे थे जो देश मैं खूंटे रै ।।
1
पहली आजादी की जंग थारा सो सतावन  मैं लड़ी थी
बंगाल आर्मी करी बगावत जनता भी साथ भिड़ी थी
ठारा  सौ सतावन के मैं जन क्रांति के बम्ब फूटे रै ।।
2
भगत सिंह सुख देव राजगुरु फांसी का फंदा चूमे
उधम सिंह भेष बदल कै लन्दन की गालाँ  मैं घूमे
चंदर शेखर आजाद साहमी गोरयां के छक्के छूटे रै।।
3
सुभाष चन्द्र बोश नै आजाद हिंद फ़ौज बनाई थी
महिला विंग खडी करी लक्ष्मी सहगल संग आई थी
धुर तैं आजादी खातिर ये किसान मजदूर भी जुटे रै ।।
4
गाँधी की गेल्याँ जनता जुड़गी हर तरियां साथ दिया 
चाल खेलगे गोरे फेर बी देश मैं बन्दर बाँट किया
बन्दे मातरम अलाह हूँ अकबर ये हून्कारे उठे रै ।।
5
सोच घूमै इब्बी जिसने देख्या खूनी खेल बंटवारे का
लाखां घर बर्बाद हुए यो क़त्ल महमूद मुख्त्यारे का
दो तिहाई नै आज बी रोटी टुकड़े पानी संग घूंटे रै ।।
6
छियासठ साल मैं करी तरक्की नीचे तक गई नहीं
ऊपरै ऊपर गुल्पी आजादी नीचै जावन दई नहीं
रणबीर सिंह टोह कै ल्यावै खुये मक्की के भूट्टे  रै ।।

6******

भगत सिंह हर के सपने आज उन पर जबरदस्त हमला बोला जा रहा है। कैसा भारत चाहते थे राज गुरु, सुखदेव और भगत सिंह--
जिन सपन्यां खातर फांसी टूटे हम मिलकै पूरा करांगे ।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
1
सबको मिलै शिक्षा पूरी यही तो थारा विचार बताया
समाज मैं इंसान बराबर तमनै यो प्रचार बढ़ाया
एक दूजे नै कोए ना लूटै थामनै समाज इसा चाहया
मेहनत की लूट नहीं होवै सारे देश मैं अलख जगाया
आजादी पाछै कसर रैहगी हम ये सारे गड्ढे भरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
2
फुट गेरो राज करो का गोरयां नै खेल रचाया था
छूआ छूत पुराणी समाज मैं लिख पर्चा समझाया था
समाजवाद का पूरा सार सारे नौजवानों को बताया था
शोषण रहित समाज होज्या इसा नक्शा चाहया था
थारे विचार आगै लेज्यावांगे हम नहीं किसे तैं डरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
3
नौजवानो को भगत सिंह याद आवै सै थारी क़ुरबानी
देश की खातर फांसी टूटे गोरयां की एक नहीं मानी
देश की आजादी खातर तकलीफ ठाई थी बेउन्मानी
गोरयां के हाथ पैर फूलगे जबर जुल्म करण की ठानी
क्रांतिकारी कसम खावैं देश की खातर डूबाँ तिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
4
बहरे गोरयां ताहिं हमनै बहुत ऊंची आवाज लगाई
जनता की ना होवै थी सुनायी ज्यां बम्ब की राह अपनाई
नकाब फाड़ना जरूरी था गोरे खेलें थे  घणी चतुराई
गोरयां की फ़ौज म्हारी माहरे उप्पर करै नकेल कसाई
रणबीर कसम खावां सां चाप्लूसां तैं नहीं घिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।

7******
सुख देव , राजगुरु, भगत सिंह हर के रास्ते को अपनाना  होगा। आज देश के संविधान को खतरा है, उसे बचाना होगा। क्या बताया भला---

एक दिन जनता जागैगी, भ्रष्ट राजनीति भागैगी, घोटाल्याँ पाबंदी लागैगी, इन सबकी सै आस मनै।।
1
असल मैं तो नौकरी आज बहोत घणी बची कोण्या
बिना सिफारिश पीसे मिलज्या या बात जँची कोण्या
यो हिसाब जनता माँगैगी,या कसूरवारां नै टाँगैगी,
ठेकेदारां नै पूरा छांगैगी, इसका सै अहसास मनै।।
2
जो भी परिवर्तन आया वा या जनता ल्याई देखो
शोषण का रूप बदल्या जब जनता ली अंगड़ाई देखो
लगाम अमीरों कै लागैगी,हथकड़ी उनकै फाबैगी,
जनता उस दिन नाचैगी,उलगी आवैगी सांस मनै।।
3
जनता की जनवादी क्रांति सुधार आवै पूरे समाज मैं
कोये भूखा नहीं सोवै अमन शांति छावै पूरे समाज मैं
छुआछूत ना टोही पावैगी ,भ्रष्टाचार ना भाजी थ्यावैगी, भूख ना फेर सतावैगी , बनता दीखै इतिहास मनै।।
4
यो हासिल करने खातर  भगत सिंह बनना होगा
जनतंत्र असली खातर संघर्ष मैं उतरना होगा
अर्थ नीति बदली जावैगी,फेर सांस मैं सांस आवैगी,दुनिया मैं शांति छावैगी, रणबीर देवै विश्वास मनै।।

8*****

लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही ।।
1
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा, करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं , लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे, संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी थारे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तमनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।

9*****
अंग्रेजों ने जुल्म ढाये। जात धर्म पत्र लोगों को बांट कर रखा। क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया। क्या बताया भला---
राज गुरु सुख देव भगत सिंह तेईस मार्च नै फांसी पै लटकाये।।
हुसैनी वाला में अधजले तीनूं  सतलुज नदी के मैं गये बहाए।।
1
धार्मिक कट्टरवाद और अंधविश्वास समाज के बैरी बताये
विकास के पक्के रोड़े सैं इनपै लिख कै संदेश घर घर पहूंचाये
लिख मैं नास्तिक क्यों सूं एक पुस्तिका मैं अपने विचार बताये।।
2
इंसान के छूने से सवाल करया हम अपवित्र कैसे हो ज्यावैं
पशु नै रसोई मैं ले जाकै क्यों हम अपनी गोदी के मैं बिठावैं
कति शर्म नहीं आती हमनै क्यों इसे रिवाज समाज मैं चलाये।।
3
जो चीज आजाद विचारों नै बर्दाश्त नही कर पावै देखो रै
हों इसी चीज खत्म समाज तैं तीनूं नौजवान चाहवैं देखो रै
समाजवाद के पढ़े विचार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लाये।।
4
लोग नहीं लड़ें आपस के मैं जरूरत वर्ग चेतना की बताई
किसान मजदूर की असली बैरी पूंजीपति की वर्ग समझाई
सुखदेव राजगुरु भगत सिंह नै रणबीर ना पाछै कदम हटाये ।।

10******
शहीद भगत सिंह पर रचित एक रागनी::
भगतसिंह नै अपनी निभाई ईब हम अपनी निभावांगे ।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
इंसानियत भूलकै समाज हैवानियत कान्ही चाल पड़या
शोषण रहित समाज का सपना चौराहे पै बेहाल खड़या
थारा संगठन जिस खातर लड़या उस विचार का परचम फैहरावांगे।।
तेईस साल की कुल उम्र चरों कान्ही तैं इतना ज्ञान लिया
बराबर हों इंसान दुनिया के मिलकै तमनै ब्यान दिया
मांग महिला का सम्मान लिया थारी क्रांति का झंडा लैहरावांगे।।
हंसते हंसते फांसी चूमगे इंकलाब जिंदाबाद का नारा लाया
बम्ब गैर कै एसैम्बली मैं नारा अंग्रेजां कै था याद दिलवाया
मिलकै सबनै प्रण उठाया गोरयां नै हम बाहर भजावांगे।।
जेल मैं पढी किताब के थोड़ी नोट किया सब डायरी मैं
आतंकवादी का मतलब समझां फर्क समझां क्रांतिकारी मैं
कहै रणबीर बरोने आला घर घर थारा सन्देश लेज्यावांगे।।
11.9.2016

11******
किस्सा शहीद भगत सिंह
भगत सिंह जेल से अपने पिताजी के नाम एक पत्र लिखकर सरकार को उनके द्वारा भेजी अपील का सख्त विरोध करते हैं । क्या बताया इस रागनी में :-
अर्जी पिता किशनसिंह नै ट्रिब्यूनल ताहीं दी बताई थी।।
दलील दे बचाव खातर  कोर्ट जाणे की प्लान बनाई थी ।।
भगत सिंह और उसके साथी इसतैं सहमत नहीं बताये
अंग्रेजां की बदले की नीति बोले पिता समझ नहीं पाये
जिंदगी की भीख नहीं मांगां सन्देश बाबू धोरै भिजाई थी।1।
दलील दे बचाव खातर-------
हम तो हैरान पिताजी क्यों आपनै आवेदन भेज दिया
बिना मेरे तैं सलाह करें इसा गल्त क्यों काम किया
राजनितिक विचारों की दूरी कई बारियां समझाई थी।
2।
दलील दे बचाव खातर-------
थारी हाँ ना के ख्याल बिना मैं अपना काम करता आया सूँ
मुकद्दमा नहीं लड़ूंगा इसपै मैं धुर तैं खड़या पाया सूँ
अपने सिद्धान्त कुर्बान करकै नहीं बचना कसम खाई थी3।
दलील दे बचाव खातर---------
आप पिता मेरे ज्यां करकै मनै सख्त बात नहीं लिखी सै
थारी या बड़ी कमजोरी बात साफ़ मनै कहनी सिखी सै
रणबीर इस्सी उम्मीद कदे मनै आपतैं नहीं लगाई थी।।4
दलील दे बचाव खातर---------
16.9.16

12*******
आज भी जनता को जागने की जरूरत है जी , पहले गोरों के अत्याचार अब कालों के अत्याचार ! क्या बताया भला---
जब जब जनता जागी  यो जुल्मी शोषक झुका दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
1
आजाद देश का सपना पहुंचा शहर और गांव मैं
भगत सिंह फांसी टूटा जोश था  देश तमाम मैं
दुर्गा भाभी गेल्याँ  जुटगी इस आजादी के काम मैं
लाखाँ नर और नारी देगे या कुर्बानी गुमनाम मैं
कुर्बानी बिना नहीं आजादी गांधी अलख जगा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
2
गोरे गये आगे काले गरीबी जमा मिटी नहीं सै
बुराई बढती आवै सै भिद्द इसकी पिटी नहीं सै
अच्छाई संघर्ष करण लागरी आस जमा घटी नहीं सै
जनता एक दिन जीतेगी या उम्मीद छुटी नहीं सै
म्हारी एकता तोडण़ खातिर जात पात घणा फैला दिया।।
भारत तैं जुल्मी गौरा मिलकै सबनै भगा दिया।।
3
जात पात हरियाणा की सै सबतैं बड्डी बैरी भाइयो
विकास पूरा होवण दे ना दुनिया याहे कैहरी भाइयो
वैज्ञानिक सोच काट सै इसकी जड़ घणी गहरी भाइयो
अमीराँ की जात अमीरी म्हारै गरीबी फैहरी भाइयो
समता वादी समाज होगा संघर्ष का डंका बजा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
4
दारू माफिया मुनाफा खोर इनकी पक्की यारी देखो
भ्रष्ट पलसिया औछा नेता करता चौड़े गद्दारी देखो
बिचोलिया घणे पैदा होगे म्हारी अक्ल मारी देखो
लंबे जन संघर्ष की हमनै कर ली तैयारी देखो
रणबीर भगत सिंह ने रास्ता सही दिखा दिया।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।

13********
23 मार्च शहादत दिवस के मौके पर
देख हालत आज देश की थारी याद घणी आवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
1
सबको शिक्षा काम सबको का नारा थामने लाया था
इंकलाब जिंदाबाद देश में जोर लगा गुंजाया था
शोषण रहित समाज थारी डायरी लिखा पावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
2
अंग्रेजों के खिलाफ थाम नै जीवन दा पै लगा दिया

आजादी का संदेश यो घर घर के में पहुंचा दिया
तीनों साथी फांसी चढ़गे  देश शहादत मना वै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
3
सरफरोशी की तमन्ना बोले इब म्हारे दिल मैं सै
देखना सै जोर कितना बाजू ए कातिल थारे मैं सै
एक नौजवान तबका थाम नै उतना ए चाहवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
4
धर्म के नाम पर समाज बांटें आज देश भगत बनरे
हिंदू मुस्लिम के नाम पै बना कै पाले बन्दी तनरे
रणबीर थारी कुर्बानी हम सब मैं जोश लयावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।

14******
राजगुरु , सुखदेव भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने की बात । क्या बताया भला--
जनता की जनवादी क्रांति हम बदल जरूर ल्यावाँगे रै ॥ 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
1
जनतन्त्र का मुखौटा पहर कै राज करै सरमायेदारी या
जल जंगल जमीन धरोहर बाजार के मैं बेचै म्हारी या
हम लोगां का लोगां की खातर लोगां का राज चलावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
2
कौन लूटै जनता नै इब सहज सहज पहचान रहे
आज घोटाले पर घोटाले कर ये कारपोरेट बेईमान रहे
एक दिन मिलकै इन सबनै हम जेल मैं पहोंचावांगे रै  ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
3
जनता जाओ चाहे भाड़ मैं बिदेशी पूंजी तैं हाथ  मिलाया
दरवाजे खोल दिए उन ताहिं गरीबाँ का सै भूत बनाया
जमा बी हिम्मत नहीं हारां मिलकै नै सबक सिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
4
बढ़ा जनता मैं  बेरोजगारी ये नौजवान भटकाये देखो 
जात पात गोत नात मैं बांटे आपस मैं भिड़वाये देखो
किसान मजदूर के दम पै करकै संघर्ष दिखावांगे रै ॥
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मौका सै फिलहाल

 मौका सै फिलहाल

हांगा लादयां पूरा भाइयो यो मौका सै फ़िलहाल, हाथ दिखारे म्हारे नौजवान लाल।।
1
अग्निपथ ये वापिस कराणे सैं, नहीं कति पाछै कदम हटाणे सैं, दो दो हाथ करकै दिखाणे सैं, दिखावां युवां की ताकत का कमाल।।
2
सरकार का सामना करणा सै, लाठी गोली तै नहीं डरणा सै, छब्बीस नै मार्च पै उतर णा सै, यो ऐलान करया सै तत्काल ।।
3
मोदी अपणे हठ नै छोड़ दिये, काळे कानून उल्टे मोड़ लिये, म्हारी बात का लगा तोड़ लिये, किसानी ताकत करदेगी बेहाल।।
4
खाग्या अम्बानी चूट चूट कै,म्हारे नारयां नै देश मैं पहूँच कै, भाई चारा भर दिया कूट कूट कै, रणबीर कहै मोदी करिये ख्याल
।।

Friday, 24 February 2023

रात ग्यारा बजे चालकै दिल्ली एयरपोर्ट आये रै।।

 रात ग्यारा बजे चालकै दिल्ली एयरपोर्ट आये रै।।

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

हवाई जहाज का सफर कई घण्टे का होग्या भाई

ब्रेकफास्ट किया फेर लंच फेर फ़िल्म एक चलाई

कुवैत पहोंच लंदन की मिलगी या जहाज हवाई 

लंदन की हवाई यात्रा घर आली नै खूब सराही 

लंदन पहोंचे सांझ ताहिं फेर सांस थोड़े ले पाये रै।।

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

2

विवेक भाई एयरपोर्ट पै देखै था वो बाट म्हारी 

सारा सामान लाद लिया फेर चली म्हारी सवारी

सत्तर मील की दूरी साउथ एन्ड रहवै

बेटी प्यारी 

दोहती अनन्या दोहता आदि सबकै खुशी छारी

कुलदीप शीतल नै आंख्यां पै सारे बिठाये रै।।  

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

3

रात का खाना खाकै या नींद गजब की आई 

सपने मैं घूमै रोहतक दे इंद्रप्रस्थ का पार्क दिखाई  

सबतें सम्पर्क टूट गया सिम कार्ड ना

मिल पाई 

जी मैं जी आग्या मेरै जिब चलगी वाई फाई

नमस्ते लंदन से के फूल सब धोरै पहोंचाये रै ।।

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

4

स्वीमिंग पूल अर पार्क अगले दिन घूम कै आये 

लंदन आई जाकै दूजे दिन पूरा लंदन देख पाये 

विंडसर कैस्टल तीजे दिन उड़ै मजे खूब उड़ाए 

चौथे दिन बीच पै घूमे बालक झूले खूब झुलाये

रणबीर दस तारीख नैं बेल्जियम के प्लान बनाये रै ।। 

दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये रै।।

चालै कोण्या जोर

 चालै कोण्या जोर

मेरा चालै कोण्या जोर मनै लूटैं मोटे चोर

नहीं पाया कोये ठौर कटी पतंग की डोर

मनै लावैं डांगर ढ़ोर यो किसा घोटाला रै।

मेरा बोलना जुल्म हुया,उनका बोलना हुक्म हुया

सारे ये मुनाफा खोर ये थमा धर्म की डोर

बनावैं ये म्हारा मोर सुहानी इनकी भोर

ऐश करैं डाकू चोर मन इनका काला रै।

ये भारत के पालन हार,क्यों चोरां के सैं ताबेदार

म्हारे पै टैक्स लगावैं बोलां तो खावण आवैं

मिल्ट्री सैड़ दे बुलावैं चोरां की मौज करावैं

काले का सफेद बणावै भजैं राम की माला रै।

महंगाई की मार कसूती,सिर म्हारा म्हारी जूती

यो रोजगार मन्दा सै यो सिस्टम गन्दा सै

यो मालिक का रन्दा सै घालै दोगला फंदा सै

क्यूकर जीवै बन्दा सै हुया ढंग कुढाला रै।

पत्थर पुजवा बहकाये,भक्षक रक्षक दिखाये

काले नाग डसगे क्यों ,ये शिकंजे कसगे क्यों

दो संसार बसगे क्यों गरीब जमा फ़ंसगे क्यों

रणबीर पै हंसगे क्यों कर दिया चाला रै।।

शिक्षा और स्वास्थ्य

 शिक्षा और स्वास्थ्य


प्रतिगामी ताकतां नै देखो किसा उधम मचाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।
1
शिक्षा स्वास्थ्य के सरकारी ढांचे पहले तो खराब करै
खराबी के दोष जान कै डॉक्टर टीचर पै ल्याण धरै
कितै ढांचे का टोटा होरया कितै कम स्टाफ दुख भरै
सच कहता हुया मानस यो सरकार तैं आज घणा डरै
बिठा दिया सरकारी ढांचा प्राइवेट का धर्राटा ठाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।
2
यो ढांचा पड़ेगा बचाना गरीब की जिब पार जावैगी
एक बात स्टाफ समझले जनता की मदद चाहवैगी
नहीं बचे स्कूल अस्पताल तो जनता खूबै धक्के खावैगी
महंगी शिक्षा और इलाज का बोझ किस तरियां ठावैगी
भक्षक बनकै रक्षक छागे अंधविश्वास खूब फैलाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।
3
पढ़ लिख कै बालक म्हारे कदे बेरा पाड़लें लुटेरयां का
उलझाल्यो जात धर्म पै जितना तबका सै कमेरयां का
कमेरे समझे कोण्या इब लग जाल घल्या बघेरयां का
कावड़ कदे कुम्भ का मेला ध्यान बांट दिया चितेरयां का
शिक्षा स्वास्थ्य के ढांचे का जानबूझ भट्ठा बिठाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।
4
रोडवेज का हाल देखल्यो जमा धरती कै मार रहे
प्राइवेट बस चलाकै नै ये जनता का पीसा डकार रहे
जनता सड़कों पै आ बैठी ये मुकदमे कर तयार रहे
जनता का कोये ख्याल नहीं कर्मचारी नै दुत्कार रहे
रणबीर सिंह सरकारी ढांचा सोचो कैसे जा बचाया रै।।
यो सारा सरकारी ढांचा प्राइवेट की भेंट चढ़ाया रै।।

मिलकै नै आवाज लगावां बुनियादी हक क्यों खोस लिए।।

 मिलकै नै आवाज लगावां बुनियादी हक क्यों खोस लिए।।

के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।
1
शिक्षा का अधिकार म्हारा आज पढन क्यों बिठाया
स्वास्थ्य का अधिकार म्हारा कर हवन क्यों भकाया
रोजगार खोस करोड़ों के उड़ा उनके होंस दिए।।
के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।
2
भ्रष्टाचार के पंख क्यों ये चारों कांहीं फैला दिए
बेरोजगारों के कॉन्ध्यां पै कावड़ क्यों टिका दिए
आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी वे शहीद बना ठोस दिए।।
के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।
3
जिणनै भी आवाज उठाई वे दमन का शिकार बनाये
मजदूर किसानों के ऊपर बहोत घणे कहर ढाये
दबे नहीं लाठी गोली तैं  जनता नै
बढ़ा रोष दिए।।
के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।
4
जात धर्म पै कलह कराकै एकता जनता की तोड़ी
बेरोजगारी भुखमरी तैं आज ध्यान
जनता की मोड़ी
रणबीर लांबे चौड़े वायदे जनता साहमी परोस दिए।।
के सोच कै नै तमनै संविधान के पन्ने मोस दिए।।

Thursday, 23 February 2023

म्हारी ये कौन नाक कटावैं ना उनकी चाल जाणी क्यों

 नया हरियाणा

म्हारी ये कौन नाक कटावैं ना उनकी चाल जाणी क्यों

व्यभिचारी भ्रष्टाचारी ये बोलें नैतिकता की बाणी क्यों

पुलिसिया बीस रपिये लेले उसकी चर्चा अखबार पुकारैं

ऊंचे महलां होज्यां सौदे करोड़ों कमीशन बदकार डकारैं

शरीफ खड़े लाचार निहारैं जनता जाणै ना कहाणी क्यों

भ्रष्टाचार बलात्कार रिश्वत खोरी ये फण सैं व्यवस्था के

नैतिकता की बात करैं वे जो चाकर इसी व्यवस्था के

अमीर मालिक व्यवस्था के गरीब की कुन्बा घाणी न्यों

गरीब हकां की लड़ै लड़ाई लड़कै व्यवस्था नै बदलांगे

गरीब अमीर की चौड़ी खाई राज व्यवस्था का समझांगे

पासा रलमिल पलटांगे पाळां इसी नागण काली क्यों

पीस्से आले इजारेदार नै म्हारी सरकार बढ़ावै लोगो

तब दिली करकै कानूनां मैं इनकी टहल बजावै लोगो

बहुराष्ट्रीय कम्पनी ल्यावै लोगो देखै ना म्हारी हाणी क्यों

छोटी पूंजी मेहनत मिलकै बड़ी पूंजी तैं हम टकरावांगे

किसान मजदूर दूकानदार सब मिल यो नारा लावांगे

यो नया हरियाणा बनावांगे रणबीर बीमारी पिछाणी न्यों

ranbir dahiya

 यो सी ए ए के बला सै?

 कमलू -- रमलू

कमलू-- रै रमलू ! यो सी ए ए के बला सै?

रमलू- यो सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट ( नागरिकता संशोधन अधिनियम ) का छोटा नाम सै कमलू

कमलू-- यो नागरिकता अधिनियम कद बनाया था रमलू?

रमलू-- न्यों कहैं सैं अक यो 1955 मैं बनाया था।

कमलू-- इस संशोधन तैं पहलम भी कोये संशोधन होए थे इसमैं?

रमलू--हाँ ! यो पांचवां संशोधन बतावैं सैं ।

कमलू-- पहले चार संशोधन कुणसे थे रमलू?

रमलू-- भाई उनका तो मनै बेरा कोण्या। किसे भाई नै बेरा होगा तो बतावैगा।

कमलू-- तो यो पांचवां संशोधन के सै?

रमलू-- इस संशोधन के द्वारा अफगानिस्तान,  पाकिस्तान और बंगलादेश इन तीन देशां तैं 31 दिसंबर 2014 तैं पहले भारत मैं प्रवेश करे औड़ हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाईयों नै अवैध आप्रवासी नहीं मान्या जागा बल्कि उन ताहिं भारतीय नागरिकता दी जावैगी।

कमलू-- इसमैं तो कई पड़ौसी देश छोड़ दिये। ये बस तीन देश क्यूँ? अर जै इन देशां मैं कोये दुखी पीड़ित मुसलमान हो तै उसका के बनैगा?

रमलू--ये बात बूझिये उन नेतावां धोरै जिणनै यो संशोधन करया सै।

नौंजवानों का हाल सुनाऊं, साच्ची बात ना झूठ भकाऊं,

 हरियाणा के युवाओं -लड़के

और लड़कियों की मेहनत ने
हरयाणा नम्बर वन बनाया ,
मगर हमने युवाओं को कहां पहुंचाया?
क्या बताया भला--
नौंजवानों का हाल सुनाऊं,
साच्ची बात ना झूठ भकाऊं,
बिना नौकरी दुखी दिखाऊं ,
के होगा इस हरियाणे का।।
बेरोजगारी बढ़ती जावै सै,
शिक्षा महंगी होंती आवै सै,
युवक युवती हाँडै खाली,
खत्म हुई चेहरे की लाली,
नशे नै कसूती घेरी घाली,
के होगा इस हरियाणे का।।
छोटा मोटा ठेके का काम यो,
ठेकेदार खींचै म्हारा चाम यो,
तनखा मिलती घणी थोड़ी,
मालिक बणे हाँडै करोड़ी,
काम नै म्हारी कड़ तोड़ी,
के होगा इस हरियाणे का ।
बेरोजी नै युवा रूआया रै,
संकट सिर ऊपर छाया रै
नशे का पैकेज ल्याये देखो ,
युवा इसमें फँसाये देखो,
अंधविश्वासी बनाये देखो,
के होगा इस हरियाणे का।
मजबूत संगठन बनाना हो
संघर्ष मिलकै चलाना हो
सोचां युवा युवती सारे रै,
कैसे क्लेश मिटेंगे महारे रै,
छोड़ जात पात के नारे रै ,
फेर कुछ होगा हरियाणे का ।

Wednesday, 22 February 2023

किसान के बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

 रागनी आज के हालात पर 

किसान के बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

अडानी अम्बानी नै बढा कै कै दिन राज चलै थारा रै।।

1

जनता दे मारी धरती कै बेरोजगारी खूब बढ़ाई 

या शिक्षा करदी घणी म्हंगी जनता कैसे करै पढ़ाई

पुलिस फौज सारै बुलाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

किसान कै बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

2

अपने यौवन पै भ्रष्टाचार तरीके न्यारे काढ़ लिए 

मेहनत कश आज देखो ये पूरे देश मैं बाढ़ दिए

मीडिया नै गोदी मैं बिठाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

किसान कै बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

3

बीमारी आज बढ़ती जां अस्पतालों मैं मिलै ना दवाई

बेमौत मारी जावै जनता कितै बी होती नहीं सुनाई

देशद्रोही का ठप्पा लगाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

किसान कै बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

गैंग रेप छेड़छाड़ आज दिन पै दिन बढ़ते जावैं 

घर मैं ना बाहर महफूज रणबीर बीर नै धमकावैं 

चारों कूट भरम फैलाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

किसान कै बता फांसी लाकै कै दिन राज चलै थारा रै।।

जात नै माणस का माणस बैरी बणा जबर राख्या सै।

 कुछ साथियों को बुरा लग सकता है मगर जिंदगी में जात की खेलबाजी अंदर तक देखने के बाद ही इस जगह पर पहोंचा हूँ या पहुँचा दिया गया हूँ । 1978 की मैडीकल कालेज की 98 दिन लंबी हड़ताल जिसमें पूरा कालेज जाट नॉन जाट में बंट गया था और उसके बाद के झटके जिन्होंने आँखे खोल कर देखने को मजबूर कर दिया । 


जात नै माणस का माणस बैरी बणा जबर राख्या सै।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

1

दो किले आला जाट बी आज जाट सभा की कोली मैं

भूखा मरदा ब्राह्मण बी यो ब्राह्मण सभा की झोली मैं

फिरै भरमता रोड़ बिचारा आज रोड़ सभा की टोली मैं 

दलित भी बन्ट्या हुया देखो यो कई रंगों की रोली मैं 

जात पात का घणा कसूता दखे विष यो भर राख्या सै ।

2

जात के रंग ढंग मैं सै या मानवता बाँटण की मक्कारी 

कथनी घणी सुहानी लागै सै पर पाई करणी मैं गद्दारी 

काली नाग और पीत नाग ये भाई बिठाये एक पिटारी

मुँह मैं राम बगल मैं छुरी भाई सै या बुझी जहर दुधारी 

जात्यां के बुगळे भगतां नै यो मिला सुर मैं सुर राख्या सै।

3

ब्राह्मण खत्री वैश्य और शुद्र ये चार वरण बताये सुणो

मनु जी नै फेर वरणां कै जात्यां के पैबन्द लगाये सुणो

गोत नात कबिल्यां भितर बेरा नहीं कद सी आये सुणो

जन्म कारण जात माणस की ग्रन्थ लिख़कै ल्याये सुणो

इसकी आड़ मैं लुटेरे लूटैं माणस बणा सिफर राख्या सै।

4

ढेरयां आला कुड़ता म्हारा या जात पात बताई आज 

गेहूं के खेत मैं ऊग्या हुया बथुआ जात सुझाई आज

ठेके कै म्हां लागी सुरसी गिहूँआं की मर आई आज

ये कमेरे दुखी जात्यां मैं नेतावां नै चादर घुमाई आज

काढ बगादे यो कुड़ता इसनै आज कर बेघर राख्या सै।

5

जात छोड़ कट्ठे होंवैं काम करणिये भुखे मरणीये भाई 

गोत नात छोड़ कट्ठे हों ये जितने नौकरी चढ़निये भाई

टूचावाद छोडकै कट्ठे हों सब बेरोजगार फिरणीये भाई

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई ये मानवता पर चलनिये भाई 

म्हारै ना जात किसे काम की कर क्यों सबर राख्या सै।

6

सारी दुनिया रुके देकै नै ईब दो जमात बतारी देख 

एक कमेरा जिसकी मेहनत दुनिया मैं रंग दिखारी देख

दूजा लुटेरा जिसनै लूटी म्हारी सजाई दुनिया सारी देख

या पाले बंदी छिपाने खातर चलै जात की आरी देख

म्हारे माल के हम भिखमंगे यो बना आडम्बर राख्या सै।