Wednesday, 1 November 2023

10 रागनी

1**

सोलां सोमवार के ब्रत राखे मिल्या नहीं सही भरतार 

दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घना सै करतार

1

बालकपन तैं चाहया करती मन चाहया भरतार मिलै

बराबर की इंसान समझै ठीक ठयाक सा घरबार मिलै

उठते बैठते सोच्या करती बढ़िया सा मनै परिवार मिलै

मेरे मन की बात समझले नहीं घणा वो थानेदार मिलै

इसकी खात्तर मन्नत मानी चढ़ावे चढ़ाए मनै बेसुमार

दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घणा सै करतार

मेरी सहेली नै ब्याह ताहिं एक खास भेद बताया था 

सोलां सोमवार के ब्रत करिये मेरे को समझाया था

बोली मनचाहया वर मिलै जिसनै यो प्रण पुगाया था

मनै पूरे नेग जोग करे एक बी सोमवार ना उकाया था

बाट देखै बढ़िया बटेऊ की यो म्हारा पूरा ए परिवार 

दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घणा सै करतार

3

कई जोड़ी जूती टूटगी फेर जाकै नै यो करतार पाया

पहलम तै बोले बहु चाहिए ना चाहिए सै धन माया

ब्याह पाछै घणे तान्ने मारे छोरा बिना कार के खंदाया

सपने सारे टूटगे मेरे बेबे सोमवार ब्रत काम ना आया

पशु बरगा बरतावा सै ना करै माणस बरगा व्यवहार

दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घणा सै करतार

4

ये तो पाखण्ड सारे पाये ना भरोसा रहया भगवान मैं

उसकी ठीक गलत सारी पुगायी ना दया उस इंसान मैं 

फेर न्यों बोले पाछले मैं कमी रही भक्ति तनै पुगाण मैं

आंधा बहरा राम जी भी नहीं आया पिटती छुड़ाण मैं

कहै रणबीर बरोने आला आज पाखंडाँ की भरमार 

दुख की छाया ढली कोण्या निकम्मा घणा सै करतार

2**

मानस का धर्म 

धर्म के सै माणस का मनै कोए बतादयो नै।।

माणस मारो लिख्या कड़ै मनै कोए दिखादयो नै।।

1

माणस तैं मत प्यार करो कौणसा धर्म सिखावै

सरे आम बलात्कार करो कौणसा धर्म सिखावै

रोजाना नर संहार करो कौणसा धर्म सिखावै

तम दारू का व्यापार करो कौणसा धर्म सिखावै

धर्म क्यों खून के प्यासे मनै कोए समझादयो नै।।

माणस मारो लिख्या कड़ै मनै कोए दिखादयो नै।।

2

ईसा राम और अलाह जिब एक बताये सारे रै

इनके चाह्वण आले बन्दे क्यूँ खार कसूती खारे रै

क्यों एक दूजे नै मारण नै एकेजी हाथां ठारे रै

अमीर देश हथियार बेच कै खूबै मौज उड़ारे रै

बैर करो मारो काटो लिखै वो ग्रन्थ भुलादयो नै।।

माणस मारो लिख्या कड़ै मनै कोए दिखादयो नै।।

3

मानवता का तत कहैं सब धर्मां की जड़ में सै

कुदरत का प्रेम सारा सब धर्मां की लड़ मैं सै

कदे कदीमी प्रेम का रिश्ता माणस की धड़ मैं सै

कट्टरवाद नै घेर लिए यो हर धरम जकड़ मैं सै

लोगां तैं अरदास मेरी क्युकरै इनै छटवादयो नै।।

माणस मारो लिख्या कड़ै मनै कोए दिखादयो नै ।।

4

यो जहर तत्ववाद का सब धर्मों मैं फैला दिया 

कट्टरवाद घोल प्याली मैं सब ताहिं पिला दिया

स्कीम बणा दंगे करे इंसान मासूम जला दिया

बड़ मानवता का आज सब धर्मों नै हिला दिया 

रणबीर सिंह रोवै खड़या इनै चुप करवादयो नै ।।

माणस मारो लिख्या कड़ै मनै कोए समझादयो नै ।।

2001 की रचना

3**

सांझी विरासत

तर्ज:चौकलिया

कोणार्क और अजंता एलोरा म्हारी खूबै श्यान बढ़ावैं

चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं

1

दोनूँ भारत की विरासत इसतैं कौण आज नाट सकै

साहमी पड़ी दिखै सबनै कौण इस बात नै काट सकै

जो पापी तोल घाट सकैं म्हारी संस्कृति कै बट्टा लावैं ||

 चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं

2

कालिदास बाणभट्ट या रविंद्र नाथ नै श्यान बढ़ायी सै

खुसरो ग़ालिब फ़िराक हुये जिनकी कला सवायी सै

जो  न्यारे न्यारे बांटै इणनै वे भारत के गद्दार कुहावैं||

चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं

3

जयदेव कुमार गंधर्व भीमसेन जोशी जयराज दिए

बड़े गुलाम अली मियां बिस्मिल्ला नै कमाल किये

एक दूजे नै  जो नीचा कहते वे घटियापन दिखावैं

चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं

4

सहगल हेमंत मन्ना और लता गायकी मैं छागे देखो

रफ़ी नूरजहां नौशाद साथ मैं ये जनता नै भागे देखो

रणबीर बरोने आले कांहिं ये सारे बहन भाई लखावैं

चार मीनार क़ुतुब ताज महल सब  च्यार चाँद लगावैं

4**

हिरोशिमा नागाशाकी

लिटिल बॉय और फैटमेंन परमाणु बम्ब गिराये रै।।

हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं

धकाये रै।। 

1

हिरोशिमा मैं छह अगस्त को अमरीका नै बम्ब गिराया

नौ अगस्त नै नागाशाकी पै दूजा फैटमैन बम्ब भड़काया

जापान देख हैरान रैहग्या अमरीका नै रोब जमाया

जमा उजाड़ दिए शहर दोनूं लाशां के ढेर लगाये रै।।

हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं

धकाये रै।। 

2

लाखों निर्दोष लोगों की इसमैं हुई मौत बताई देखो

दूसरे विश्व युद्ध मैं अमरीका नै फतूर मचाई देखो 

आत्म समर्पण जापान का फेर भी हेकड़ी दिखाई देखो

बिना बात बम्ब गिरा दिया अमरीका घना कसाई देखो

दो बम्ब गेर दादा गिरी का सारे कै सन्देश

पहोंचाये रै।।

हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं

धकाये रै।। 

3

औरत मर्द बच्चे इसके हजारों लाखों शिकार हुये

सालों साल बालकों कै जामनू कई विकार हुये

दौड़ रूकी ना हथियारों की सौला हजरत तैं पार हुये

एक हजार तैं फालतू अड्डे अमरीका के तैयार हुये

जीव मरैं निर्जीव बचैं इसे बम्ब आज बनाये रै।।

हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं

धकाये रै।। 

4

हिरोशिमा नागाशाकी तैं कोये सबक लिया कोण्या

हथियारों की होड़ बढ़ाई शांति सन्देश दिया कोण्या

हथियार मुक्त दुनिया का आधार तैयार किया कोण्या

ईनके डर पै अमरीका नै खून किसका

पीया कोण्या

रणबीर नागाशाकी दिवस पै ये चार छन्द बनाये रै।।

हजारों लाखों जापानी गए मौत के मुंह मैं

धकाये रै।।


5

म्हारा हरियाणा सबका हरियाणा 

मिलजुल कै नया हरियाणा हम घणा आलीशान बणावां रै।।

नाबराबारी नै खत्म करकै हरियाणा आसमान पहोंचावां रै।।

1

बासमती चावल हरियाणे का दुनिया के देशां मैं जावै आज

चार पहिये की मोटर गाड़ी यो सबतै फालतू बणावै आज

खेल कूद मैं हम आगै बढ़गे एशिया मैं सम्मान बढ़ावां रै।।

नाबराबारी नै खत्म करकै हरियाणा आसमान पहोंचावां रै।।

2

चोरी जारी ठग्गी नहीं राहवेंगी भ्रष्टाचार ना टोहया पावै

मैरिट तैं मिलैं दाखिले सबनै शिक्षा माफिया खड़या लखावै

मिलकै सारे हरियाणा वासी इन बातों नै परवान चढ़ावां रै।।

नाबराबारी नै खत्म करकै हरियाणा आसमान पहोंचावां रै।।

3

ठेकेदारों की ठेकेदारी खत्म होज्या खत्म थानेदारी होवै

बदमाशों की बदमाशी खत्म हो फिर खत्म ताबेदारी होवै

निर्माण और संघर्ष का नारा पूरे हरियाणा मैं गूंजावां रै।।

नाबराबारी नै खत्म करकै हरियाणा आसमान पहोंचावां रै।।

4

ना दहेज़ खातर दुखी होकै महिला फांसी खा हरियाणा मैं

कदम बढ़ाये एक बै जो आगै फेर ना पाछै जाँ हरियाणा मैं

बराबर के माहौल मैं हम महिलाओं के अरमान बढ़ावां रै।।

नाबराबारी नै खत्म करकै हरियाणा आसमान पहोंचावां रै।।

5

नहीं नाम रहै छूआ छूत का सब रेल मिल रहैं गामों मैं

त्याग तपस्या और मोहब्बत की ये फुहार बहैं गामों मैं

दिखा मानवता का राह जातधर्म का घमासान मिटावां रै।।

नाबराबारी नै खत्म करकै हरियाणा आसमान पहोंचावां रै।।

6

हरियाणा के लड़के और लड़की कंधे तैं कन्धा मिला चालैंगे 

देकै क़ुरबानी ये छोरी छोरे नए हरियाणा की नींव डालैंगे

गीत रणबीर सिंह नै बणाया मिलकै हम सारे ही गावां रै।।

नाबराबारी नै खत्म करकै हरियाणा आसमान पहोंचावां रै।।


6

 हरियाणा नंबर वन कोण्या 

मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना 

चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।

1

हरया भरया हरियाणा जित दूध दही का खाना

गर्भवती मैं कमी खून की दस प्रतिशत बढ़ जाना

हम सबके उपकार बिना, बसते हुए घरबार बिना

लिंग अनुपात सुधार बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या

मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना 

चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।

2

गुण गाते हरित क्रांति के नुक्सान ना कदे बतावैं

जहर घोल दिया पानी मैं कीटनाशक कहर ढावैं

बीमारियों के इलाज बिना, हम गरीबों की आवाज बिना

विकास के सही अंदाज बिना,हरियाणा नंबर वन ।कोण्या ।।

मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना 

चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।

3

कीट नाशक तैं हरियाणा बहोत घणा दुःख पाग्या

हुई खाज बीमारी गात मैं ,घणा कसूता संकट छाग्या

इसकी पूरी रोकथाम बिना , पानी के सही इंतजाम बिना 

अमीरों पर कसे लगाम बिना, हरियाणा नंबर वन कोण्या।।

मजदूर किसान बिना , इन सबके सम्मान बिना 

चेहरे पर मुस्कान बिना , हरियाणा नंबर वन कोण्या ।।


7

 कट्ठे होल्यां

बहोत दिन होगे पिटत्यां नै ईब कट्ठे होकै देख लियो।।

बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।

1

करड़ी मार नई नीतियां की या सबपै पड़ती आवै सै

देश नै खरीदण की खातर बदेशी कंपनी बोली लावै सै

या ठेकेदारी प्रथा सारे कै बाहर भीतर छान्ती जावै सै

बदेशी कंपनी पै कमीशन यो नेता अफसर खावै सै

मन्दिर का छोड़ कै पैण्डा भूख गरीबी पै रोकै देख लियो।।

बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।

2

जड़ै जनता की हुई एकता उड़ै की सत्ता घबराई सै

थोड़ा घणा जुगाड़ बिठाकै जनता बहकानी चाही सै

जड़ै अड़कै खड़ी होगी जनता लाठी गोली चलवाई सै

लैक्शनां पाछै कड़ तोड़ैंगे या सबकी समझ मैं आई सै

ये झूठे बरतन जितने पावैं ताम सबनै धोकै देख लियो।।

बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।

3

हालात जटिल हुये दुनिया मैं समझणी होगी बात सारी

ईब ना समझे तो होज्या नुकसान म्हारा बहोतैए भारी

पैनी नजर बिना दीखै दुश्मन हमनै घणा समाज सुधारी

हम सब की सोच पिछड़ी नजर ना नये रास्ते पै जारी

भीतरले मैं अपणे भी दिल दिमाग गोकै देख लियो।।

बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।

4

जात धरम इलाके पै हम न्यारे-न्यारे बांट दिये रै

कुछ की करी पिटाई कुछ लालच देकै छांट लिये रै

म्हारी एकता तोड़ बगादी ये पैर जड़ तै काट दिये रै

ये देशी बदेशी लुटेरे म्हारे हकां नै नाट लिये रै

रणबीर सिंह दुख अपणे के ये छन्द पिरोकै देख लियो।।

बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।


8

कारपोरेट गुड़गामा आज एनसीआर के फाइनेंसियल हब के रूप में विकसित हो गया है । यहाँ 500 कम्पनियाँ मौजूद हैं । यहाँ के जीवन के बारे क्या बताया भला :--

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।

युवा और युवतियों की या मजबूरी दिखाणी चाही।

1

मियाँ बीबी ये दोनों मिलकै आज खूब कमावैं देखो

तीस लाख का पैकेज ये साल का दोनों पावैं देखो

तड़कै आठ बजे त्यार हो नौकरियां पर जावें देखो

रात के ग्यारह बजे ये वापिस घर नैं आवैं देखो

इन कमेरयां की आज या पूरी कथा सुणानी चाही।

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।

2

अपने पारिवारिक रिश्ते बताओ कैसे चलावैं रै

ऐकले रैह रैह कै शहरां मैं ये कैरियर बनावैं रै

भीड़ मैं रैह कै भी अपने नै कति अकेला पावैं रै

गांम गेल्याँ अपना रिश्ता बताओ कैसे निभावैं रै

आज के दौर की या विरोधाभाष दिखाणी चाही।

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।

3

मोटे वेतन की नौकरी छोड नहीं पावैं देखो भाई

अपने बालकां नै घरां छोड़ कै नै जावैं देखो भाई

फुल टाइम की मेड एजेंसी तैं ये ल्यावैं देखो भाई

उसके धोरै बालक ये अपने पलवावैं देखो भाई

मजबूरी या लाइफ आज इणनै अपनाणी चाही।

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।

4

मात पिता दूर रहवैं टाइम काढ़ नहीं पाते भाई

दादा दादी नाना नानी इनके बन्द हुए खाते भाई

घर मैं आवैं इस्तै पहले बालक तो सो जाते भाई

नॉएडा गुड़गामा का रणबीर यो हाल सुनाते भाई

बदल गया जमाना हरयाणा ली अंगड़ाई चाही।

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।।

9

 1966 से 2018 तक का सफर हरयाणा का -----

दुनिया रूक्के देरी हरयाणा घनी तरक्की करग्या रै ||

सब चीजां के ठाठ लग्गे कोठा नाज का भर ग्या   रै|| 

जीरी गिन्हूं कपास अर इंख की खेती बढती जावै सै

देश के सुब्याँ मैं नंबर वन यो  हरयाणा का आवै सै

सड़क पहोंचगी सारै गाम गाम बिजली लसकावै सै 

छैल गाभरू छोरा इसका लड़न  फ़ौज के म्हें जावै सै

खेतां के म्हें नया खाद बीज ट्रेक्टर घराटा ठावै सै  

फरीदाबाद सोनेपत हिसार पिंजौर मील सिटी लावै सै  

सारे भारत मैं भाइयो इंका सूरज शिखर मैं चढ़ग्या रै ||1

ये बात तो भाई हर रोज बता बता दिल डाटे जाँ रै 

इस चकाचौंध के पाछै सै घोर अँधेरा नाटें जाँ रै  

जो भी हुआ फायदा बेईमान आपस मैं बांटें जाँ रै 

भका भका जातां के चौधरी नाड़ म्हारी काँटें जाँ रै 

अपनी काली करतूतां नै जात के तल्ले ढान्पें  जाँ रै 

बोलै जो उनके खिलाफ वे झूठे केसां  मैं फांसे  जाँ रै  

कुछ परवाने भाइयो फिर भी  इनके करतब नापें  जाँ रै 

बिन धरती अर दो किल्ले आला ज्यान तैं मरग्या रै ||2

खम्बे मीटर गाम गाम मैं बिजली के इब तार गए 

ओवर सीयर एस सी सब कर बंगले अपने त्यार गए 

चार पहर भी ना बिजली आवै बाट देख देख हार गए 

बिना जलाएं  बिजली के बिल कर कसूती मार गए  

ट्यूबवेल कोन्या चालै ट्रानस्फोर्मार के जल तार गए 

पैसे आल्यां  के ट्यूबवेल थ्रेशर चल धुआं धार  गए 

गरीबां की गालाँ मै दूना कीचड देखो आज भरग्या  रै  ||3

गाम गाम मैं सड़क बनाई फायदा कौन उठावैं सैं

बस आवै जावै कदे कदे लोग बाट मैं मुंह बावैं  सैं 

पैसे आल्यां  के छोरट ले मोटर साईकिल धूल उड़ावैं सैं

प्राइवेट बस सवारी ढोवैं मुंह मांगे किराये ठहरावैं सें 

सड़क टूटरी जागां जागां साईकिल मैं पंकचर हो ज्यावैं सैं

रोड़ी फ़ोड़ते पां गरीबां के जो मजबूरी मैं पैदल जावैं सैं

रोडवेज़ की बस थोड़ी  प्राइवेट का भाड़ा गोज कसग्या रै ||4

बिन खेती आल्यां  का गाम मैं मुश्किल रहना  होग्या

मजदूरी उप्पर चुपचाप  दबंगा का जुल्म सहना होग्या 

चार छः  महीने खाली बैठ पेट की गेल्याँ फहना होग्या 

चीजां के रेट तो बढ़गे प़र पुराने   प़र बहना  होग्या 

फालतू मतना मांगो  नफे  दबंग का नयों  कहना होग्या 

गाम छोड़ शहर पडे आना घर एक तरियां ढहना होग्या 

भरे नाज के कोठे फेर भी पेट कमर कै मिलग्या   रै  ||5

खेती करणिया  मैं भी लोगो जात कारगर वार करै

एक जागां बिठावै  गरीब अमीर नै ना कोए विचार करै

किसान चार ठोड बँट लिया कैसे नैया इब पार तिरै  

ट्रैक्टर आले  बिना ट्रैक्टर आल्यां  की या  लार फिरै

इनकी हालत किसी होगी बिलखता यो  परिवार फिरै 

बिना धरती आल्यां का आज नहीं कोए भी एतबार करै  

जात मैं जमात पैदा होगी बेईमान नै खतरा बधग्या रै ||6

घन्याँ की धरती लाल स्याही मैं बैंक के महां चढ़गी थी

दो लाख मैं बेचै किल्ला चेहरे की लाली  सारी झड़गी  थी 

चूस चूस कै खून गरीब का अमीर के मुंह लाली बढ़गी थी 

कर्जे माफ़ होगे एकब़र तो फेर कीमत धरती की बधगी थी 

आगे कैसे काम चलैगा रै   एक ब़रतो इसतैं सधगी थी   

आगली पीढ़ी  के करैगी म्हारी तै क्यूकरै ए  धिकगी थी

हँसना गाना भूल गए जिन्दा रहवन का सांसा पड़ग्या रै|| 7

शहरों का के जिकरा  करूँ  मानस आप्पा भूल रहया यो 

आप्पा धापी माच रही आज पैसे के संग झूल रहया यो  

याद बस आज रिश्वत खोरी  जमा नशे मैं टूहल रहया यो 

इन्सान तै हैवान बनग्या  मिलावट में हो मशगूल रहया यो 

चोरी जारी ठगी बदमाशी सीखी भूल सब उसूल रहया यो

इसी तरक्की कै लागै गोली पसीना बह फिजूल रहया यो 

फेर भी रुके मारैं तरक्की के रणबीर का दिल भरग्या रै ||8


10

75 साल की आजादी  का एक आकलन ।


खतरे मैं आजादी म्हारी जिंदगी बणा मखौल दी।

इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।

1

आजादी पावण की खातर असली उठया तूफ़ान था

लाठी गोली बरस रही थी जेलां मैं नहीं उस्सान था 

एक तरफ बापू गांधी दूजी तरफ मजदूर किसान था 

कल्पना दत्त भगत सिंह नै किया खुल्ला ऐलान था 

इंक़लाब जिंदाबाद की उणनै घणी ऊंची बोल दी ।

इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।

2

सत्तावन की असल बगावत ग़दर का इसे नाम दिया

करया दमन फिरंगी नै उदमी राम रूख पै टांग दिया 

सैंतीस दिन रहया जूझता कोये ना मिलने जाण दिया

हंस हंस देग्या कुर्बानी हरियाणे का रख सम्मान दिया

हिन्दू मुस्लिम एकता नै गौरी फ़ौज कति खंगोल दी।

इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।

3

भारतवासी अपने दिलां मैं नए नए सपने लेरे थे

नहीं भूख बीमारी रहने की नेता हमें लारे देरे थे

इस उम्मीद पै हजारों भाई गए जेलों के घेरे थे

दवाई पढ़ाई का हक मिलै ये नेक इरादे भतेरे थे

गौरे गए अर आगे काले गरीबां की छाती छोल दी।

इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।

4

फुट गेरो राज करो की रणबीर नीति चाल रहे रै

कितै जात कितै धर्म नै ये बना अपनी ढाल रहे रै

आपस मैं लोग लड़ाए लूट की कर रूखाल रहे रै

वैज्ञानिक नजर जिसकी जी नै कर बबाल रहे रै

इक्कीसवीं की बात करैं राही छटी की खोल दी।

इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।

10 ragni हरियाणा

1

हरि के हरियाणेमैं

श्यामत म्हारीआई, कोन्या दीखै राही, चढ़ी सै करड़ाई

हरि के हरियाणेमें।।

1

बोहर और भालोठ बताये,

रूड़की किलोई संग दिखाये

कर्जा चढग्याभारी, आया बैंक

सरकारी, डूंडी पिटगी म्हारी

हरि के हरियाणे मैं।

2

धरती चढ़गी लाल स्याही मैं,

कसर नहीं रही तबाही मैं

आज घंटी खुड़की, 

किलोई चाहे रूड़की,

होवैगी म्हारी कुड़की

हरि के हरियाणेमैं।।

3

आमदन या घाट लिकड़ती 

लागत तो बाधू लानी पड़ती


सब्सिडी खत्म म्हारी, 

देई घरां मैं बुहारी, 

श्यामत आगी भारी

हरि के हरियाणे मैं।।

4

महंगी होन्ती जासै पढ़ाई रै,

रणबीर मरैं बिना दवाई रै

दुख होग्या भारया 

मन बी होग्या खारया  

नहीं रास्ता पारया

हरि के हरियाणेमैं।।

2

कारपोरेट गुड़गामा आज एनसीआर के फाइनेंसियल हब के रूप में विकसित हो गया है । यहाँ 500 कम्पनियाँ मौजूद हैं । यहाँ के जीवन के बारे क्या बताया भला :--

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।

युवा और युवतियों की या मजबूरी दिखाणी चाही।

1

मियाँ बीबी ये दोनों मिलकै आज खूब कमावैं देखो

तीस लाख का पैकेज ये साल का दोनों पावैं देखो

तड़कै आठ बजे त्यार हो नौकरियां पर जावें देखो

रात के ग्यारह बजे ये वापिस घर नैं आवैं देखो

इन कमेरयां की आज या पूरी कथा सुणानी चाही।

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।

2

अपने पारिवारिक रिश्ते बताओ कैसे चलावैं रै

ऐकले रैह रैह कै शहरां मैं ये कैरियर बनावैं रै

भीड़ मैं रैह कै भी अपने नै कति अकेला पावैं रै

गांम गेल्याँ अपना रिश्ता बताओ कैसे निभावैं रै

आज के दौर की या विरोधाभाष दिखाणी चाही।

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।

3

मोटे वेतन की नौकरी छोड नहीं पावैं देखो भाई

अपने बालकां नै घरां छोड़ कै नै जावैं देखो भाई

फुल टाइम की मेड एजेंसी तैं ये ल्यावैं देखो भाई

उसके धोरै बालक ये अपने पलवावैं देखो भाई

मजबूरी या लाइफ आज इणनै अपनाणी चाही।

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।

4

मात पिता दूर रहवैं टाइम काढ़ नहीं पाते भाई

दादा दादी नाना नानी इनके बन्द हुए खाते भाई

घर मैं आवैं इस्तै पहले बालक तो सो जाते भाई

नॉएडा गुड़गामा का रणबीर यो हाल सुनाते भाई

बदल गया जमाना हरयाणा ली अंगड़ाई चाही।

आज के कारपोरेट की असलियत बताणी चाही।


3

म्हारा हरियाणा -सबका हरियाणा


लालच लूट खसोट बचै ना ईसा हरियाणा बनावांगे ॥


या धर्मान्धता खेल रचै ना ईसा हरियाणा बसावांगे ॥

1

भरपूर इन्सान उभरै म्हारे इस 

प्यारे हरियाणा मैं


सही बात और बोल कहे जावैं 

म्हारे हरियाणा मैं


बीमारी की रोकथाम हो सही सबकाइलाज करावांगे॥

या धर्मान्धता खेल रचै ना ईसा हरियाणा बसावांगे ॥

2

दोगली शिक्षा का खात्मा हो सबनै शिक्षा मिलै पूरी


नाड़ काट मुकाबला ना रहै ना हो

पीसे की मजबूरी


नशा खोरी नहीं टोही पावै हम यो अभियान चलावांगे ॥

या धर्मान्धता खेल रचै ना ईसा हरियाणा बसावांगे ॥

3

मुनाफा मंजिल नहीं रहै ना चारों तरफ घमासान मचै


जिसकी लाठी भैंस उसकी यो जुमला फेर नहीं बचै


प्रदूषण बढ़ता जा हम धरती बाँझ होण तैं बचावांगे ॥

या धर्मान्धता खेल रचै ना ईसा हरियाणा बसावांगे ॥

4

महिला नै इंसान समझां रीत ख़त्म होदोयम दर्जे की


दलित उत्पीडन खत्म होवै ना 

मार बचै इस कर्जे की


नौजवान नै रोजगार मिलै सारे कै

बिगुल बजावांगे॥

या धर्मान्धता खेल रचै ना ईसा हरियाणा बसावांगे ॥


4

 किसा हरियाणा हो हरियाणा के जन्म दिन के बहाने

1966 में 7 जिले थे हरियाणा के आज 22 जिले हैं (एनसीआर में 14 जिले हैं।आज जनसंख्या 27388008 है जो 2011 में 25353081 थी।

आज हरियाणा 51साल का हो गया है और 52 वें साल में आ गया है। बहुत कुछ पाया मगर उससे ज्यादा खोया भी है। पर्यावरण का मामला ज्यादा गम्भीर हुआ इन सालों में। स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यवसायीकरण ने इलाज आम आदमी से दूर कर दिया और डॉक्टर और मरीज के बीच अविश्वास बढ़ा दिया । पढ़ाई भी बहुत महंगी हो गई। खेती का संकट बहुत आगे बढ़ गया। बेरोजगारी बढ़ी है। लिंग अनुपात भी पूरे देश में सबसे नीचे है। महिलाओं पर हो रहे क्राइम्स की संख्या बढ़ रही है। दलितों पर भी अत्याचार बढे हैं। हम जैसे लोगों को नेगेटिव सोच के कार्यकर्ता के तगमें दिए जा रहे हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि एक हिस्से में सम्पनता आई है हरित क्रांति के बाद मगर ऊपर लिखी कीमत भी चुकाई है। इसी तबके के एक हिस्से ने रत्नावली भी मनाई कुरुक्षेत्र में। शायद गुणगान ही किया होगा । आत्म मन्थन नहीं।

मेरे आदर्शों का हरियाणा कुछ इस प्रकार का होगा।

किसा हरियाणा हो म्हारा इतना तो जाण लयाँ।

शराब टोही कोण्या पावै इतना तो ठाण लयाँ ।

समानता होगी हरियाणे मैं उंच नीच रहै नहीं

न्या मिलैगा सबनै भाई अन्या कोये सहै नहीं

ओछी कोये कहै नहीं बढ़ा इतना ज्ञाण लयाँ।

अच्छाई का साथ देवां चाहे देणी होज्या ज्यान

बुराई का विरोध करां चाहे तो लेले कोये प्राण

बचावां हम अपना सम्मान खोल या जुबाण लयाँ।

सादगी शांति का आड़ै हरियाणे मैं प्रचार होगा

माणस नहीं लूट मचावैं सुखी फेर घरबार होगा

सही माणस हकदार होगा यो कहना माण लयाँ ।

जनता नै हक मिलज्याँ चारोँ कान्ही भाईचारा हो

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई ना कितै अँधियारा हो

हरियाणा सबतैं न्यारा हो रणबीर नै पिछाण लयाँ।


5

कई साल पहले लिखी रागनी आज मिली 

पीसे का जुगाड़ बनाया धरती गैहणै धरकै नै।।

नौकरी लवावण चाल्या पीसा गौज मैं भरकै नै।।

1

दोनों आगै पाछै चाले ज्यूं घोड़ी कै पीछै बछेरा 

घणा दुःख पाग्या मेरी खातर यो बूढ़ा बाप मेरा

सोचै सिपाही बनकै नै मैं दुःख दूर करूंगा तेरा

दस हजार के बीस बनाऊं देकै मुल्जिम कै घेरा

घोड़ी पै चढ़ सपने मैं चाल्या वो सिपाही बनकै नै ।।

नौकरी लवावण चाल्या पीसा गौज मैं भरकै नै।।

2

बाबू के दिल मैं धड़का था कदे बिचौलिया पीसे खाज्या

धरती खोई पीसे बी जावैं कदे ज्याण मरण मैं आज्या

या भर्ती छोरट की कदे उसकै यो थूक कसूता लाज्या

बिचौलियां कहै विश्वास करो ना कैसे नौकरी थ्याज्या

बाबू घणा घबराया ना देख्या इसे रासे मैं पड़कै नै।।

नौकरी लवावण चाल्या पीसा गौज मैं भरकै नै।।

3

टूटी लोकल मैं बैठ दोनों शहर बीच आगे भाईयो

शहर मैं एसपी दफ्तर की देख भीड़ चकरागे भाईयो

मानस ऊपर मानस चढ़रया हम तै घबरागे भाईयो 

बोली चढ़गी पन्दरा पै लिकड़ते बड़ते बतागे भाईयो

सिफारिसी चिट्ठी लेरे थे वे चालैं घणे अकड़ कै नै ।।

नौकरी लवावण चाल्या पीसा गौज मैं भरकै नै।।

4

बीस सीट बतावैं भाईयो सिफारसियां का औड़ नहीं 

गाभरू छोरे छः फ़ीट के उनका उड़ै कोये जोड़ नहीं

उड़ै पढ़ाई लियाकत गात कै कोये बांधै था मोड़ नहीं 

चार सीएम के दो मंत्री के यो टेलिफोनां का तोड़ नहीं 

लाइन मैं खड़्या होकै तारे लत्ते एक एक करकै नै।।

नौकरी लवावण चाल्या पीसा गौज मैं भरकै नै।।

5

जिले जिले मैं पुलिस भर्ती रूक्का रोला माच गया

आशनाई रिश्तेदारी टोहवैं हरेक मानस नाच गया 

बेरोजगारी छागी गामां मैं यो हो तीन दो पांच गया 

बिचौलियां इन सारी बातां की कर पूरी जांच गया

भरतू पै बीस लाख लेग्या एक एक गड्डी गिनकै नै।।

नौकरी लवावण चाल्या पीसा गौज मैं भरकै नै।।

6

शाषकां कै कमावण खातर लाखां छोरे आरे थे 

सुथरा छैला गात रै उनका चेहरे कति मुरझारे थे

रिश्वत खोरी खुली होरी बालक बहोत घबरारे थे

बिना रिश्वत सिफारिस आले पां कै पां भिड़ारे थे 

बणी लिस्ट रणबीर उनकी जो देगा बढ़ चढ़ कै नै।।

नौकरी लवावण चाल्या पीसा गौज मैं भरकै नै।।


6

50 साल के मौके पर आजादी का एक आकलन ।

आजादी 

खतरे मैं आजादी म्हारी जिंदगी बणा मखौल दी।

इसकी खातर भगत सिंह नै जवानी लूटा निरोल दी।

आजादी पावण की खातर असली उठया तूफ़ान था

लाठी गोली बरस रही थी जेलां मैं नहीं उस्सान था 

एक तरफ बापू गांधी दूजी तरफ मजदूर किसान था 

कल्पना दत्त भगत सिंह नै किया खुल्ला ऐलान था 

इंक़लाब जिंदाबाद की उणनै या ऊंची बोल दी ।

सत्तावन की असल बगावत ग़दर का इसे नाम दिया

करया दमन फिरंगी नै उदमी राम रूख पै टांग दिया 

सैंतीस दिन रहया जूझता कोये ना मिलने जाण दिया

हंस हंस देग्या कुर्बानी हरियाणे का रख सम्मान दिया

हिन्दू मुस्लिम एकता नै गौरी फ़ौज या खंगोल दी।

भारतवासी अपने दिलां मैं नए नए सपने लेरे थे

नहीं भूख बीमारी रहने की नेता हमें लारे देरे थे

इस उम्मीद पै हजारों भाई गए जेलों के घेरे थे

दवाई पढ़ाई का हक मिलै ये नेक इरादे भतेरे थे

गौरे गए आगे काले रणबीर की छाती छोल दी।

फुट गेरो और राज करो ये नीति वाहे चाल रहे रै

कितै जात कितै धर्म नै ये बना अपनी ढाल रहे रै

आपस मैं लोग लड़ाए लूट की कर रूखाल रहे रै

वैज्ञानिक नजर जिसकी जी नै कर बबाल रहे रै

इक्कीसवीं की बात करैं राही छटी की खोल दी।

2003-2004


7

संघर्ष छिड़ लिया 

किसान मजदूर व्यापारी के आन्दोलन की जंग छिड़ी।।

सारे हिन्दुस्तान की जनता सरकार गेल्या आण भिड़ी। 

1

जलूस काढ़ते जगां जगा पै इंकलाब जिंदाबाद बोलैं

भारत के किसान मजदूर लाठी गोली  तै नहीं डोलैं

जंजीर तानाशाही की खोलैं या संघर्ष की आज घड़ी।।

सारे हिन्दुस्तान की जनता सरकार गेल्या आण भिड़ी।

2

नौजवान युवक युवती चाहवैं इनका साथ निभाया रै

आज आये सड़कों पै इंकलाब जिंदाबाद गुंजाया रै

तीन बिल किसान विरोधी बेरोजगारी भी बनी कड़ी।।

सारे हिन्दुस्तान की जनता सरकार गेल्या आण भिड़ी।

3

किसान नहीं तो देश किसा नर और नारी पुकार रहया

बिल पास करे जो उणनै आकै सड़कों पै नकार रहया

नवजागरण की चिंगारी देश मैं सुलगी कई जगां बड़ी।।

सारे हिन्दुस्तान की जनता सरकार गेल्या आण भिड़ी।

4

एक माहौल संघर्ष का चारों कान्हीं जन जन मैं छाया रै

भगतसिंह का विचार सबनै इंकलाब का आज भाया रै

रणबीर सिंह नै सोच समझ कै नये ढंग की कली घड़ी। 

सारे हिन्दुस्तान की जनता सरकार गेल्या आण भिड़ी।


8

मजदूर किसान मिलकर के लुटेरों से टकराएंगे।

जितने बिल हमारे खिलाफ सब को वापस करवाएंगे। 

1

जितना दबाओगे आप हमें इतना जोश बढ़ेगा हमारा 

एकता हमारी मजबूत होगी जुलम हारेगा तुम्हारा 

चैन खोस लिया हमारा अब हम सबक सिखाएंगे।

जितने बिल हमारे खिलाफ सब को वापस करवाएंगे। 

2

तुम्हारी लाठी गोली जो चले उनसे नहीं घबराने के  

हमारा संघर्ष जोर पकड़ेगा उल्टे कदम नहीं हटाने के 

लुटेरे फिर नहीं टोहे पाने के नारे मिलकर लगाएंगे ।

जितने बिल हमारे खिलाफ सब को वापस करवाएंगे। 

3

किसानी एकता तोड़ने  को हिंदू-मुस्लिम लाए हैं 

जाति धर्म गोत नात पर चाहते जनता को लड़ाए हैं 

कितनी झूठ भकाए हैं हम सब खोल के बताएंगे।

जितने बिल हमारे खिलाफ सब को वापस करवाएंगे। 

4

हिंदुस्तान के नर नारी हिंदू मुस्लिम सिख इसाई 

इनकी एकता के सामने ना होएगी तुम्हारी सुनाई 

रणबीर लिख कविताएं दुनिया में अलख जगायेंगे।

जितने बिल हमारे खिलाफ सब को वापस करवाएंगे।


9

सबका हरियाणा -हमारा हरियाणा 

बड़ा गुणगान होगा शाइनिंग 15 प्रतिशत  हरियाणा का 

मगर 85 प्रतिशत सफरिंग हरियाणा का जिक्र नहीं होगा 

एक नवम्बर के हरयाणा दिवस के मौके पर एक सपना 

 मेरा  भी ~~~~~

मिलजुल कै नया हरयाणा हम घणा आलीसान बनावांगे

नाबराबरी खत्म करकै नै हरयाणा आसमान पहोंचावांगे

बासमती चावल हरयाणे का दुनिया के देशां मैं जावै आज

चार पहिये की मोटर गाड़ी  यो सबतैं फालतू बणावै आज

खेल कूद मैं हम आगै बढ़गे एशिया मैं सम्मान बढ़ावांगे

चोरी जारी ठग्गी नहीं रहवैंगी भ्रष्टाचार नहीं टोहया पावै

मैरिट तैं मिलैं दाखिले सबनै शिक्षा माफिया खड़या लखावै

मिलकै सारे हरयाणा वासी इन बातों नै परवान चढ़ावांगे

ठेकेदारां की ठेकेदारी खत्म होज्या खत्म थानेदारी होवै

बदमाशों की बदमाशी खत्म हो फेर खत्म ताबेदारी होवै

निर्माण और संघर्ष का नारा यो पूरे हरयाणा मैं गूंजावांगे

दहेज़ खातिर दुखी होकै नहीं औरत फांसी खा हरयाणा मैं 

कदम बढ़ाये एकबै जो आगै फेर ना पाछै जाँ हरयाणा मैं 

बराबर के माहौल मैं महिलाओं के अरमान खिलावांगे 

छुआ छूत का नहीं नाम रहै सब रल मिल रहैं गामां मैं 

त्याग तपस्या और मोहबत की ये फुहार बहैं गामां मैं

दिखा मानवता का रास्ता जातधर्म का घमासान मिटावांगे 

हरयाणा के लड़के और लड़की कन्धे तैं कन्धा मिला चालैंगे

देकै कुर्बानी ये छोरी छोरे नए हरयाणा की नींव डालैंगे

गीत रणबीर सिंह नै बनाया मिलकै हम सारे ही गावांगे


10

कुछ साथियों को बुरा लग सकता है मगर जिंदगी में जात की खेलबाजी अंदर तक देखने के बाद ही इस जगह पर पहोंचा हूँ या पहुँचा दिया गया हूँ । 1978 की मैडीकल कालेज की 98 दिन लंबी हड़ताल जिसमें पूरा कालेज जाट नॉन जाट में बंट गया था और उसके बाद के झटके जिन्होंने आँखे खोल कर देखने को मजबूर कर दिया । 


जात नै माणस का माणस बैरी बणा जबर राख्या सै।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

1

दो किले आला जाट बी आज जाट सभा की कोली मैं

भूखा मरदा ब्राह्मण बी यो ब्राह्मण सभा की झोली मैं

फिरै भरमता रोड़ बिचारा आज रोड़ सभा की टोली मैं 

दलित भी बन्ट्या हुया देखो यो कई रंगों की रोली मैं 

जात पात का घणा कसूता दखे विष यो भर राख्या सै ।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

2

जात के रंग ढंग मैं सै या मानवता बाँटण की मक्कारी 

कथनी घणी सुहानी लागै सै पर पाई करणी मैं गद्दारी 

काली नाग और पीत नाग ये भाई बिठाये एक पिटारी

मुँह मैं राम बगल मैं छुरी भाई सै या बुझी जहर दुधारी 

जात्यां के बुगळे भगतां नै यो मिला सुर मैं सुर राख्या सै।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

3

ब्राह्मण खत्री वैश्य और शुद्र ये चार वरण बताये सुणो

मनु जी नै फेर वरणां कै जात्यां के पैबन्द लगाये सुणो

गोत नात कबिल्यां भितर बेरा नहीं कद सी आये सुणो

जन्म कारण जात माणस की ग्रन्थ लिख़कै ल्याये सुणो

इसकी आड़ मैं लुटेरे लूटैं माणस बणा सिफर राख्या सै।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

4

ढेरयां आला कुड़ता म्हारा या जात पात बताई आज 

गेहूं के खेत मैं ऊग्या हुया बथुआ जात सुझाई आज

ठेके कै म्हां लागी सुरसी गिहूँआं की मर आई आज

ये कमेरे दुखी जात्यां मैं नेतावां नै चादर घुमाई आज

काढ बगादे यो कुड़ता इसनै आज कर बेघर राख्या सै।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

5

जात छोड़ कट्ठे होंवैं काम करणिये भुखे मरणीये भाई 

गोत नात छोड़ कट्ठे हों ये जितने नौकरी चढ़निये भाई

टूचावाद छोडकै कट्ठे हों सब बेरोजगार फिरणीये भाई

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई ये मानवता पर चलनिये भाई 

म्हारै ना जात किसे काम की कर क्यों सबर राख्या सै।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

6

सारी दुनिया रुके देकै नै ईब दो जमात बतारी देख 

एक कमेरा जिसकी मेहनत दुनिया मैं रंग दिखारी देख

दूजा लुटेरा जिसनै लूटी म्हारी सजाई दुनिया सारी देख

या पाले बंदी छिपाने खातर चलै जात की आरी देख

म्हारे माल के हम भिखमंगे यो बना आडम्बर राख्या सै।

एक दूजे की छाती कै उप्पर जन चाकू धर राख्या सै।

Monday, 16 October 2023

कण कण मैं बसै

 त्याग तपस्या जनसेवा हरेक धर्म का सार बताया रै।।

कण कण मैं बसै रामजी किसनै पत्थर पूजवाया रै।।

कौनसे धर्म मैं लिख दिया दूजे धर्म तैं लोगो घृणा करो 

अपने नै महान बताओ दूजे धर्म के ऊपर नाम धरो 

उसको ढूंढ़ो अपने अंदर  मुक्ति का यो राह दिखाया रै।1।

कण कण मैं बसै ......

समाज सुधरै जीवन सुधरै है धर्मों का अंजाम यही 

फेर क्यों मारकाट धर्मों पै कबीर नै दी  पैगाम यही 

सूफी संतों नै अंधभक्तों को यो रास्ता सही समझाया रै।2।

कण कण मैं बसै ......

प्यार से सब रहते आये हैं गंगा जमुनी संस्कृति म्हारी

अंग्रेजों नै बांटो राज करो करी सोच समझ कै त्यारी

धार्मिक कट्टरता नै मानस दुनिया का आज कँपाया रै।3|

कण कण मैं बसै ......

धार्मिकता के सिद्धान्त सारे  धर्मों के कुछ लोग भूले

एक दूजे तैं नफरत करो की मारा मारी मैं क्यों झूले 

धर्म व्यक्तिगत मसला सै पां क्यों राजनीति मैं फंसाया रै।4।

कण कण मैं बसै ......

कोए सुणता होतै सुणियो

 एक गरीब परिवार की बहू खेत में घास लेने गई। वहां दो पड़ौस के लड़के उसे दबोच लेते हैं। क्या बनती है~~

कोए सुणता होतै सुणियो दियो मेरी सास नै जाकै बेरा।

ईंख के खेत मैं लूट लई छाग्या मेरी आंख्यां मैं अन्धेरा।

चाल्या कोण्या जाता मेरे पै मन मैं कसूती आग बलै सै

दिमाग तै कति घूम रहया यो मेरा पूरा गात जलै सै

पिंजरे मैं घिरी हिरणी देखो या देखै कितै कुंआ झेरॉ।

म्हारे दो पड़ौसी उड़ै खेत मैं घात लगायें बैठे थे

मुँह दाब खींच ली ईंख मैं ईथर भी ल्यायें बैठे थे

गरीब की बहू ठाड्डे की जोरू मनै आज पाटग्या बेरा।

यो काच्चा ढूंढ रहवण नै भरया गाळ मैं कीचड़ री

पति नै ना दिहाड़ी मिलती घरके कहवैं लीचड़ री

गुजारा मुश्किल होरया सै बेरोजगारी नै दिया घेरा।

नहां धोकै बाळ बाहकै घूमै खाज्या किलो खिचड़

उंकी इसी हालत घर मैं जण होसै भैंस का चीचड़

खिलौने बेच गालाँ मैं दो रोटी का काम चलै मेरा।

घरां आकै रिवाल्वर दिखा धमकाया सारा परिवार 

बोल चुपाके रहियो नातै चलज्यागा यो हथियार

भीतरला रोवै लागै सुना मनै यो बाबयां बरगा डेरा।

मेरे बरगी बहोत घनी बेबे जो घुट घुट कै नै जीवैं 

दाब चौगिरदें तैं आज्यावै हम घूँट जहर का पीवें

यो रणबीर कलम उठाकै कहै हो लिया सब्र भतेरा।

जमीन जल और जंगल पै

 जमीन जल और जंगल पै अमीर कब्जा बढ़ावै सै।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

1

जमीन पै कब्जा करकै हाईटैक सिटी बनाते आज

उजड़ कै जमीन तै कित जावै ना खोल बताते आज

बीस लाख मैं ले कै किल्ला बीस करोड़ कमाते आज

इनके बालक तै ऐश करैं म्हारे ज्यान खपाते आज

आदिवासी नै जंगल मां तै हांगा करकै हटावै सै।।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

2

जंगल काट-काट कै गेरे ये मुनाफा घणा कमागे रै

आदिवासी दिये भजा उड़ै तै बहुत से ज्यान खपागे रै

मान सम्मान खातर लड़े वे ज्यान की बाजी लागे रै

देशी लुटेरे बदेशी डाकुआं तै ये चौड़ै हाथ मिलागे रै

किसान की आज मर आगी यो संकट मैं फांसी लावै सै।।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

3

बिश्लेरी पानी की बोतल बाजार मैं दस की मिलती रै

दूध सस्ता और पानी महंगा बात सही ना जंचती रै

साफ पानी नहीं पीवण नै बढ़ती बीमारी दिखती रै

पानी म्हारा दोहन उनका पीस्से की भूख ना मिटती रै

जमीन जंगल जल गया संकट बढ़ता ए आव सै।।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

4

औरत दी एक चीज बना बाजार बीच या बिकती रै

म्हंगाई बढ़ती जा कीमत एक जगहां ना टिकती रै

घणा लालची माणस होग्या हवस कदे ना मिटती रै

अमीरी गरीबां नै खाकै बी आज मा ना छिकती रै

रणबीर बरोने आला घणी साची लिखता घबरावै सै।।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

ठारा ठारा घण्टे मंडे जिब

 ठारा ठारा घण्टे मंडे जिब थाम सपने पूरे कर पाये।।

कुछ का जिकर सुनो ना सारे जाते आज गिणाये ।।

1

जेट एयरवेज कै ताला पूरी तरियां लवा दिया रै

एयर इंडिया का घाटा असमान पै पहुंचा दिया रै

बीएसएनएल के कर्मचारी कै जाडा चढ़ा दिया रै

एचएएल तनखा ना दे पारी कर्मचारी रुआ दिया रै

आंडी पाकैं थे कर्मचारी बाहर के रसते दिखाये।।

कुछ का जिकर सुनो सारे ना जाते आज गिणाये।।

2

पन्दरा हजार के टोटे मैं डाक विभाग पहुंचा दिया

वीडियोकॉन का पूरा दिवालिया ल्याकै दिखा दिया

टाटा डेकोमो ताहिं सांस लेना कति भुला दिया

एयरसेल की गीण्ड बांधी आज बे काम करा दिया

सरकारी के खाते पूरे लगा बहाने पाड़ बगाये।।

कुछ का जिकर सुनो सारे ना जाते आज गिणाये।।

3

जेपी ग्रुप भी आज बन्द होने को मजबूर  किये

ओएनजीसी के कामकाज चकनाचूर किये

छत्तीस बड़े कर्जदार ये भगौड़े मशहूर किए

साढ़े तीन लाख करोड़ कर्ज माफ भरपूर किये 

बड़े कारपोरेट खातर लाल कारपेट गए बिछाये।।

कुछ का जिकर सुनो सारे ना जाते आज गिणाये।।

4

पंजॉब नेशनल बैंक देवै खस्ताहाल दिखाई सै

दूजे बैंकों की हालत भी हुई बेहाल सुनाई सै 

कर्ज एक लाख तीस हजार मिलियन डॉलर बताई सै 

रेलवे का निजीकरण करकै या जनता

फंसाई सै

कहै रणबीर बरोने आला देश वासी पढ़ण बिठाये।।

कुछ का जिकर सुनो सारे ना जाते आज गिणाये।।

Wednesday, 13 September 2023

10 रागनी

 वास्कोडिगामा 



वास्कोडिगामा बैठ जहाज मैं म्हारे देस मैं आया रै।


मस्साले गजब म्हारे देस के इनपै घणा जी ललचाया रै।।


उस बख्त म्हारे देस मैं कच्चे माल की भरमार बताई


गामां नै पहला कदम धरया म्हारे देस की श्यामत आई


कच्चा माल लाद कै लेज्यां तैयार माल की हाट लगाई


कारीगरां के गूंठ काटे मलमत म्हारी की करी तबाही


मेहनतकश कारीगर देस का यो घणा गया दबाया रै।।


ईस्ट इंडिया कंपनी आई या देस म्हारे पै छागी फेर


कब्जा देस पै करने मैं ना लाई अंग्रेजों नै कति देर


सहज सहज यो म्हारा देस अंग्रेजां नै लिया पूरा घेर


अपणे चमचे छांट लिये रै उनकी कटाई पूरी मेर


फूट डालो और राज करो का यो तीर गजब चलाया रै।।


म्हारे देस के वीरां नै अपणी ज्यान की बाजी लाई रै


भगत सिंह पफांसी चूम गया देस की श्यान बढ़ाई रै


महात्मा गांधी अहिंसा पुजारी छाती मैं गोली खाई रै


लक्ष्मी सहगल दुर्गा भाभी लड़ण तै नहीं घबराई रै


जनता नै मारया मंडासा अंग्रेज ना भाज्या थ्याया रै।।


हटकै म्हारे देस मैं बिल गेट्स नै कदम धरया सै


म्हारे देस नै लूटण खातर इबकै न्यारा भेष भरया सै


डब्ल्यू टी ओ विश्व बैंक गैल मुद्रा कोष करया सै


तीन गुहा नाग यो काला कदे बिना डंसें सरया सै


रणबीर सिंह बरोणे आला सोच कै छन्द बणाया रै।।


पूरी साजिश 


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया 


पत्थरों पर टिकवा माथे हमारे भक्तों ने बिठा जुगाड़ लिया


1


इसमें भोगा वो पिछले का अब किया वो अगले में मिलेगा


इसकी कोई जगांह नहीं है सार बात का लिकाड़ लिया 


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया 


2


कर्म करो फल की चिंता ना करो कभी से इसे मानते आये


अडानी अम्बानी जैसों ने गीता का पन्ना पन्ना फाड़ दिया


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया 


3


इन्होंने फल की चिंता की आज किसी से छिपा नहीं देखो 


गीता पढ़ाओ उन्हें जिन्होंने मानवता का बन्द किवाड़ किया


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया 


4


मेहनत त्याग तपस्या दान का हुआ बहुत अपमान यहां 


अन्धविश्वाशों का विज्ञान ने आज ये नकाब उघाड़ दिया 


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया


 प्रदूषण


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


दुनिया मैं दिल्ली शहर , ग्याहरवें नम्बर पै बताया रै।।


1


यमुना पढ़ण बिठादी या , ईब गंगा की बारी कहते रै


तालाब घनखरे सूख लिए, विकास की लाचारी कहते रै


संकट पाणी का कसूता , भारत प्यारे पै मंडराया रै।।


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


2


जंगल साफ करण लागरे ,विनाश के लगा गेर दिए


वायु प्रदूषण बढ़ता जावै, विकास के नारे टेर दिए


जंगल जमीन खान बेचे,  विकास का खेल रचाया रै।।


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


3


प्रदूषण कारण लाखों लोग बख्त तैं पहल्यां मरज्यावैं


ये प्रदूषण उम्र करोड़ों की कई साल कम कर ज्यावै


पूरे भारत देश म्हारे मैं, प्रदूषण नै कहर मचाया रै।।


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


4


विकास की जागां देखो विनास की राही चाल रहे


पाणी सपड़ाया पेड़ काटे घणे कसूते घर घाल रहे


संभलो जनता कहै रणबीर प्रदूषण नै देश रम्भाया रै।।


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


जहर


जहर पीवां पैप्सी कोलां मैं, मौत के मुंह मैं जावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।


1


पाणी मैं जहर घुलग्या इसका हमनै बेरा कोन्या


घणा कसूता घाल दिया टूटता दीखै घेरा कोन्या


हरित क्रांति हरियाणा में खुशी थोड़े लोगां मैं ल्याई


घणे लोगां मैं कीटनाशक नै या घणी रची तबाही


आज पाछै बोतल हम नहीं पैप्सी कोला की ठावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।


2


अनतोल्या इस्तेमाल हुया सै पाछले दस सालां मैं


शरीर निचोड़ बगा दिया लाली बची नहीं गालां मैं


बदेशी कंपनी लूटैं हमनै ये हजर पिलाकै देखो


मुनाफा कमावैं अरबां का कीटनाशक खिलाकै देखो


कसम खावां आज सारे हाथ नहीं ठण्डे कै लावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।


3


खाज गात मैं करदी सै आज घर कोए बच्या नहीं


दमा बीमारी बाधू होगी खुलासा म्हारै जंच्या नहीं


गैस पेट की बढ़ती जा महिला हुक्टी पीवण लाग्गी


नामर्दी का शिकार होकै पीढ़ी युवा जीवण लाग्गी


इलाज कितै होन्ता कोन्या बताओ हम कित जावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।


4


कई साल तै रुक्या नहीं जहर का खेल न्योंए चालै


के बरा किस-किस के जीवन पै हाथ रोजाना घालै


कैंसर बधता जावै आज कई विद्वान बतावैं देखो


जन्म जात बीमारी बधगी आंकड़े ये दिखावैं देखो


कहै रणबीर बरोने आला ईबतैं मोर्चा जमावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।



म्हारी सेहत 


बिना रूजगार पैसा मिलै ना, बिना पीस्से या दाल गलै ना


बिना दाल सेहत बणै नौ, इन बिन पूरा इलाज नहीं।।


हमारे शरीर को चाहिये खाणा साफ पाणी और हवा


इनके बिना सेहत बणै ना कितनी ए खाल्यो चाहे दवा


प्रदूषण कौण फैलावै देखो, ये साधन कौण घटावै देखो


जिम्मै गरीबां के लावै देखो, क्यों उठै म्हारी आवाज नहीं।।


आदमी के रहने के लिए यो हवादार मकान चाहिये


दिमाग की सेहत की तांहि समाज मैं ना तनाव चाहिये


प्रबन्ध हो डॉक्टर दवाई का, पूरा माहौल साथ सफाई का


आदमी की सेहत सवाई का, दुनिया कहती है राज यही।।


बीमारी के कारण के के हों जो इनकी हमनै टोह कोण्या


म्हारी सेहत ना ठीक हो जो म्हारा इसमैं मोह कोण्या


लोगां की सही भागीदारी बिना, असली नीति सरकारी बिना


विकास मैं हिस्सेदारी बिना, स्वास्थ्य रहवै समाज नहीं।।


अपनी सेहत योजना जिब शहर और गाम बणावैं रै


ग्राम सभा मिल बैठ कै सही अपणे सुझाव बतावैं रै


फेर बदलैगी तस्वीर या, देस की बणैगी तहरीर या


लिखै सही बात रणबीर या, फेर चिड़िया नै खा बाज नहीं।।


वार्ता


फौजी देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं । एक रात एक बैंकर में दो फ़ौजी रात काटने के लिए अपने अपने घर गाँव की बातचीत करते हैं । दो महीने पहले एक फौजी छुट्टी पर गाँव आया तो उसके गाँव में एक जघन्य हत्याकांड हुआ मिला। उसके बारे में महेंद्र अपने साथी फ़ौजी सुरेंद्र को सुनाता है। सुरेंद्र का दिल वह सब सुनकर दहल उठता है और वह अपनी मां को एक चिठ्ठी में क्या लिखता है भला:-


औरत की जमा कदर रही ना यो किसा बुरा जमाना आग्या माँ।।


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


1


दो बदमाशां नै मिलकै नाबालिग बच्ची पै अत्याचार किया


बदफेली करी पहलम तै फेर मौत के घाट उतार दिया


इन पापियां नै के मिलग्या सारा हरियाणा पुकार दिया


कहैं पुलिस तैं पीसे जिमाये यो कर काबू थानेदार लिया


घणे दिन लाश ना टोही पाई न्यों गुहांड घणा चकराग्या माँ।।


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


2


नौ मई का मनहूस दिन था मासूम बच्ची नै वे लेगे ठाकै नै


पुलिस ताहिं नाम बता दिएपर झांकी ना वा गाम मैं आकै नै


कई जणे थाने में पहोंचे उड़ै रपट लिखानी चाही जाकै नै


थानेदार नै रपट तो लिखी बहोत घणे धक्के खवाकै नै


अपराधी सांड ज्यों रहे घूमते बेटी कै घर मैं मातम छाग्या माँ।।


3


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


क्यों म्हारी रपट लिखी ना जाती म्हारे ऊपर धौंस जमाई जावै


क्यों या पुलिस खावण नै आती उल्टा म्हारी करी पिटाई जावै


क्यों गरीब जनता न्या ना पाती या रपट कमजोर बनाई जावै


क्यों कमेरी जनता धक्के खाती म्हारी लाज ना बचाई जावै


सामना करना पड़ेगा हमनै मेरा दिल ये बात समझाग्या माँ।।


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


4


घणे जोश मैं हम पहरा देरे थे सुनकै जी उदास हुया माता


सिविल मैं जमा डूबा पड़गी क्यों आज सत्यानाश हुया माता


फेर बी तेरा बेटा लड़ेगा डटकै यो वायदा खास हुया माता


रणबीर सही छन्द बणावै उसनै फ़ौज़ियाँ का डेरा भाग्या माँ।।


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


 एक बाप का दुःख 


कुनबा सारा मूँधा पड़या नहीं होती छोरी की सगाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों या इतनी घनी पढ़ाई।।


1


पढ़ लिख कै बेटी आई एफ एस अफसर बणगी


दहेज़ एक करोड़ पै पहोंच्या सिर की नस तणगी


मेहनत करी दिन रात मुड़कै पाछै नहीं लखाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


2


बिन ब्याही बेटी का घर मैं बोझ घणा कसूता होज्या रै


मेरे बरगा सिद्धान्ति माणस भी सबर अपना खोज्या रै


घर मैं दीखै सूनापन जब ना पावै कोये राही।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


3


जात के भीतर आई ऐ एस कोये भी मिलता कोण्या


एक मिल्या तो गोत उसका म्हारे गाम मैं चलता कोण्या 


इन गोतां के चक्कर नै म्हारी तो पींग सी बधाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


4


माथा पाकड़ कै बैठ गया तीन साल जूती तुड़वाली


या उम्र तीस साल की ओवर ऐज खाते मैं जाली


दोतीन और अफसर थे उनकी मांग बेढंगी पाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


5


बेटी नै तो कर लिया फैंसला ब्याह नहीं कावाने का 


मां बोली हमनै के ठेका बेटी जात बीच ब्याहने का


कौम के ठेकेदारां नै नरमी नहीं  बरती चाही।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


6


जात छोड़ ब्याह करने का मेरा तो जी करता कोण्या


बिन ब्याही रह्वैगी बेटी न्यों सोच दिल भरता कोण्या 


जात मनै लागै थी प्यारी इसनै मेरी करी पिटाई।।


7


न्योंये कित धक्का दे दयूं आज मेरी समझ नहीं आता


एक करोड़ कड़े तैं ल्याऊं आज मेरा तो यो खाली खाता


दो च्यार लाख मैं नहीं करते कौमी बेटे मेरी सुनाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


8


भितरै भितर सोचूँ कितै बेटी प्रेम विवाह करले


नीरस जिंदगी जो उसकी उसनै खुशियों तैं भरले


वा बागी होकै करले शादी होज्यगी मेरी मनचाही।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


9


तिरूं डूबूँ जी होरया इसनै रोज समझाऊँ क्यूकर


जात भितर की सीमा दिल खोल दिखाऊं 


क्यूकर


म्हारे बरगे माणसां की होरी सारे कै जग हंसाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


10


नौकरी के कारण बेटी नै कई देशां मैं जाना पड़ता 


भांत भांत के लोगां तैं उसनै उड़ै हाथ मिलाना पड़ता 


रणबीर खुलापन आया यो आज साहमी दे दिखाई ।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


: औरत 


बीर  के जी नै भाण मेरी मोटा फांसा होग्या हे । 


मुँह मैं घालण नै होरे सैं इसा भुण्डा रासा होग्या हे । 


दिन की धौली दें मार लुगाई इसा बुरा जमाना आया 


माया त्यागी की दर्द कहानी नै आज भूचाल मचाया 


कुणसे कुणसे काण्ड गिनाऊँ दुर्योधन भी शरमाया 


नपूते स्टोवां नै भी म्हारे कान्ही अपना मुँह बाया 


म्हारे देश मैं आज बीर  का तोले तैं माशा होग्या हे । 


इस देश मैं छोरी के पैदा होण पै सारै छा मुरदाई जावै 


छोरे के  जाम्मन पै बहणा मेरी थाली खूब बजाई जावै 


जिसकै होज्यां लागती छोरी वा निरभाग बताई जावै 


छोरा ना होवण ऊपर आज बी दूजी शादी रचाई जावै 


दोनूवां नै बतावैं बरोबर छोरा क्यों कुल आशा होग्या हे । 


मनू नै भी भाण मेरी यो इसा घनघोर अत्याचार किया 


अनाचारी दुराचारी मूढ़ पति बीर का क्यों स्वीकार किया 


साहमी बोलण आली बीर गेल्याँ कुल्टा सा व्यवहार किया 


बीर का कोए हक़ ना होता लिख मनू स्मृति तैयार किया 


मनू नै भी डांडी मारी यो आज तोड़ खुलासा होग्या हे । 


छोरी ताहिं गुलाम रहन की आज बी सीख सिखाई जा 


छोरे ताहिं राज करण की खोल सारी तदबीर बताई जा 


छोरी नै गम ख़ाना चाहिए या धुर तैं सीख  सुनाई  जा 


छोरे नै निख्डू  दूध मिलता रोटी पै भी धरी मलाई जा 


रणबीर सिंह राम राज आया यूं अजब तमासा होग्या हे । 


जुलाई , 1989


गीत 


या दुनिया हुई कसाई हे सखी , समझी ना इंसान मैं 


बचपन के महां लाड  लड़ाया ,पढना लिखना खूब सिखाया 


मेरी माँ नै गोद खिलाई हे सखी , पर समझी ना संतान मैं 


हुई सिवासन ब्याह रचाया , खोल जेवडा पिंड छुटवाया 


कर दी मेरी बिदाई हे सखी पर समझ लाई अनजान मैं 


पति देव का साथ निभाया , घर का सारा बोझ उठाया 


बढ़िया पत्नी बताई हे सखी पर समझी नहीं समान मैं 


सब बच्चों को खूब पढाया , भविष्य उनका सही बनाया 


मनै पीढी  त्यार  बनाई  हे सखी पर नाम नहीं निर्माण मैं 


खेत क्यार म नै खूब कमाया ,नहीं पा छे नै कदम हटाया 


बहो तै घणा कमाई हे सखी पर समझी नहीं किसान मैं 


या दुनिया हुई कसाई हे सखी समझी ना इंसान मैं


जय भीम इंक़लाब का नारा यो अपना रंग दिखावै रै।।


नव जागरण आंदोलन यो मनुवाद कै साँस चढावै रै।।


1


जात पात और छूआछूत म्हारे समाज तैं मिटानी सै


अन्धविश्वास पाखंड की वैज्ञानिक काट बिछानी सै


सब धर्मां की कट्टरता आपस मैं हमनै लड़वावै रै।।


नव जागरण आंदोलन यो मनुवाद कै साँस चढावै रै।।


2


मारो काटो नफरत करो कौनसे धर्म मैं लिख राख्या


झूठ फैला कै जहर भरो कौनसे धर्म मैं लिख राख्या


धर्मों का जाल दुनिया मैं पूंजीपतियां का साथ निभावै रै।।


नव जागरण आंदोलन यो मनुवाद कै साँस चढावै रै।।


3


नब्बै नै बांटन की खातर जात धर्म हथियार बनाये


भारत मैं मनुवाद नै देखो सदियों से वंचित दबाये


टिकवा माथा मस्जिद मंदिर मैं धुरतैं भकांता आवै रै।।


नव जागरण आंदोलन यो मनुवाद कै साँस चढावै रै।।


4



Tuesday, 22 August 2023

किस्सा भगत सिंह 26 से 33

 26


आजादी के लिए कुर्बान हुये, भगत सिंह से इंसान हुए, ये गोरे बहोत परेशान हुये, बांटो राज करो नीति अपनाई।।
1
जात धर्म इलकवाद पै बांटे भारत के हर और नारी
म्हारी फूट का फायदा ठाकै नै दो सौ साल खाल उतारी
उनके सारे कै गुणगान हुए, चमचे भी थे बेउन्मान हुए, जारी बहोत से फरमान हुए ,कच्चे माल ताहिं रेल चलाई।।
2
राजे राजवाड़े सब जीत लिए भारत राष्ट्र गया बनाया रै
अंगरेज सबनै लूटन खातिर एक सीमा भीतर ल्याया रै
युद्ध कई घमासान हुए, फेर व्यापारी राजे महान हुए, भारत वासी थे दरबान हुए, फेर गुलामी गई खूब सिखाई।।
3
देश का माहौल गरमाया हिंदुस्तान नै ली फेर अंगड़ाई
कुर्बानी की खूब लहर चली असैम्बली मैं बम्ब गिराई
सब कट्ठे एक मचान हुये, नयों देश प्रेम के ध्यान हुए, आजादी खातिर घमासान हुए, मार भगाया गोरा आत्मताई।।
4
बहोत घणा दबाव बण्या जिब पड़या गोरयाँ नै जाणा
हर देशवासी गाया करता स्वदेसी भारत का गाणा
आजाद हुए अरमान म्हारे, तोड़े चाहे आसमान तारे, ले आजादी की पहचान सारे, रणबीर मिलकै खुशी मनाई।।

27
बुलेट की जागां बैलेट तैं हम बदल जरूर ल्यावांगे।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।
1
जनतंत्र का मुखौटा पहर कै या राज करै सै सरमायेदारी
जल जंगल जमीन की धरोहर बाजार मैं बेचै सै म्हारी
लोगां का लोगां की खातिर लोगां द्वारा राज चलावांगे।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।
2
हम जनता की ताकत इब सहज सहज पहचान रहे
आज घोटाले पै घोटाले कर आज अमीर बेईमान रहे
देख लियो एक दिन इन सबनै हम जेल मैं पहूंचावांगे।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।
3
जनता जाओ भाड़ मैं आज साम्राज्यवाद तैं हाथ मिलाया
उन ताहिं खोल दिये दरवाजे गरीबां का  सै भूत बनाया
हिम्मत नहीं हारां जमा बी मिलकै नै सबक सिखावांगे।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।
4
जात पात गोत नात मैं बांटे या चल समझनी होगी
इननै छोड़ कै एकता की रणबीर ढाल बरतनी होगी
इंकलाब जिंदाबाद का नारा पूरे देश के मैं गुंजावांगे ।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।





28


लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही ।।
1
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा, करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं , लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे, संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी थारे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तमनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।


29

शहीद भगतसिंह
भगत सिंह विचार थारे, देश के शासक भूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
1
थारी तीनों और हजारों की क़ुरबानी आजादी ल्याई रै
देश भक्तों कै देश द्रोही की या कालस जावै लगाई रै
हिन्दू राष्ट्र का यो देकै नारा राज नशे मैं टूहल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
2
बहुविविध्ता की थामनै रूखाल करनी बताई रै
नफरत फैला जात धर्म पै एकता पढण बिठाई रै
भूल समाजवाद का नारा हिन्दू के नारे पै झूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
3
नाबराबारी चाही तमनै हिंदुस्तान तैं खत्म होवै रै
किसान की हालत सुधरै मजदूर ना भूखा  सोवै रै
या सरमायेदारी छागी चढ़ फांसी सच्चे असूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
4
बड़ा हिस्सा जनता का थारे विचारों को आगे लेजारया
सेहत शिक्षा सामाजिक न्याय ये मुद्दे डटकै ठारया
रणबीर घणे जणे थारे विचार कर कबूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।

30

लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही।।
1
अंग्रेज तैं लड़ाई लड़ी थारी कुर्बानी आजादी ल्याई,
छाई लुटेरों की बेईमानी या फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा,करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं, लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे,संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी तेरे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।

31

भगत सिंह राजगुरु सुखदेव सबको है प्रणाम म्हारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
1
बेरोजगारी ने कहर मचाया आसमानां जाकै चढ़गी देख
गरीब की चटनी रोटी खुसली अमीराँ की खुराक बढ़गी देख
हर पांच मिनट में फांसी खाज्यां लूट की लकीर कढ़गी देख
पढ़ाई लिखाई और इलाज मैं  कारस्तानी जनता पढ़गी देख
अमीर थे वे घणे अमीर होगे रै झूठा लेवैं आज नाम थारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
2
महिला कितै महफूज रही ना असुरक्षा का माहौल छाया
गाम शहरों मैं बदमाशां नै इनकै उप्पर घणा कहर ढाया
यारे प्यारे भी कोण्या शर्मावैं औरत को एक चीज बनाया
ऑनर किलिंग होवै सै रोजाना ज़िकरा अखबारों मैं आया
थारे सपन्यां की अर्थी ठवा दी झूठा कोण्या इल्जाम म्हारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
3
नम्बर वन हरियाणा के मैं दलितों पै अत्याचार बढ़े रै
दुलिना और गोहाना ना भूले मिर्चपुर मैं फेर सांस चढ़े रै
दबंगों की चालै आज बी नजदीक तैं गए सब पढ़े रै
आईडेन्टिटी राजनीति के गए इल्जाम दलितों पै मढ़े रै
छुआ छूत बारे लिख्या थामनै अनदेखा हुया सब काम थारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
4
समाजवाद का पाठ पढ़या उसकी खातर फांसी खाई रै
माणस का ना माणस बैरी हो थामनै सही राह दिखाई रै
आज के काले गोरयाँ नै अमीराँ की खूब  मेर कटाई रै
आम आदमी नै लूटण नै फासीवाद की राह अपनाई रै
कहै रणबीर बरोने आला  सारे कै पहूंचावैंगे पैगाम थारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
32
भगत सिंह ब्याह करवाले, अंग्रेज कोण्या जावैं देख।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।
1
ब्याह शादी इस दुनिया के बेटा भगत दस्तूर बताये सैं
ये रिश्ते सदियां तैं चालकै एकनिष्ठ परिवार पै आये सैं
घरबार संस्था घणी पुरानी सबनै ब्याह करवाये सैं
कबीले हुया करैं थे कदे आज हम आड़ै आ पाये सैं
क्रांति के नाम पै नाटै सै बात समझ नहीं पावैं देख।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।
2
करतार सिंह सराभा तैं प्रभावित नौजवान होरे देखो
देश आजाद करावांगे कहते ना पाछै छोरी छोरे देखो
बीर मर्द सब कट्ठे होकै जंग आजादी की झोरे देखो
दोनूं मिलकै करैं लड़ाई ज्यां छोरे छोरी टोहरे देखो
तेरी मां भी दिल तैं शादी चाहरी सारे घरके चाहवैं देख।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।
3
दुर्गा भाभी बरगी महिला ढूंढ लियो क्रांतिकारी बेटा
क्रांति मैं नहीं बनैं रोड़ा वे लड़ेंगी साथ मैं थारी बेटा
बराबर खड़ी होकै लड़ेंगी ये कई बनैंगी प्रचारी बेटा
कल्पना दत्त का नाम सुण्या हथियार कद की ठारी बेटा
सोच लियो बेटा आच्छी ढ़ालां कदे पाछै पछतावैं देख।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।
4
बिना महिला साथ लिये क्रांति सफल कैसे होज्यागी
आई एन ए की महिला पलटन आजादी के बीज बोज्यागी
थाम लड़ो गुरिल्ला युद्ध महिला कैसे पड़कै सोज्यागी
दोनों की ताकत मिलकै नै या गोरी सेना नै डबोज्यागी
रणबीर बरोनिया बरगे भी सोच कै छन्द बनावैं देख ।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।

33
भगत सिंह तेईस साल का यो नौजवान हुया क्रांतिकारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
1
नौजवान सभा बनाकै सारे क्रन्तिकारी एक मंच पै आये
गोरयां की गुलामी खिलाफ पूरे देश मैं अलख जगाये
आजाद राजगुरु सुखदेव पड़े थे गोरयां ऊपर भारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
2
गोरयां नै आतंकवादी ये सारे क्रांतिकारी बताये दखे
म्हारी आजाद सरकारां नै नहीं ये इल्जाम हटाये दखे
देखी म्हारी सरकारां की आज पूरे हिंदुस्तान नै गद्दारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
3
फांसी का हुक्म सुनाया सारे देश नै विरोध करया था
यो विरोध देख कसूता अंग्रेज बहोत घणा डरया था
एक दिन पहलम ए फांसी तोड़े जनता नै भरी हूंकारी ।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
4
इंसानी समाज का सपना भगत सिंह हर नै लिया यो
गोरे गए ये देशी आगे सपन्यां पै ध्यान नहीं दिया यो
कहै रणबीर बरोने आला म्हारै थारी याद घणी आरी ।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।



















किस्सा भगत सिंह 17 से 25

 वार्ता

भगत सिंह और उनके साथियों का समाजवाद का सपना था। भगत सिंह ने विस्तार से इस बारे लिखा भी। क्या बताया भला-
रागनी 17
थारा समाजवाद का सपना भगत सिंह आगै बढ़ावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।
1
इस बाजार व्यवस्था नै सारे कै उधम घणा मचाया सै
मानवता पाछै छोड़ दई यो विज्ञान तकनीक बनाया सै
पर्यावरण का सत्यानाश करया लालच घणा छाया सै
कुदरती संसाधन का दोहन बेहिसाब आज करवाया सै
पूंजीवादी बाजार की जड़ दीखली या सबनै समझावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।
2
हिंदुस्तान मैं बाजारवाद के टाटा अम्बानी पुजारी देखो
इनके तलहैडू म्हारी सरकार जमा ए अक्कल मारी देखो
गोड्डे टिकवाये किसानां के मजदूर बनाये भिखारी देखो
अम्बानी की अमीरी बधाई गरीबां की हुई लाचारी देखो
भगत सिंह थारी राही चालां नहीं पाछै कदम हटावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।
3
शहीदों थारी या कुर्बानी एक दिन अपना रंग दिखावैगी
बेरोजगारी खत्म होज्यागी महिला पूरा सम्मान पावैगी
जंगी हथियार खत्म करे जावैं दुनिया मैं शांति छावैगी
जात गोत मजहब ताहिं या मानवता सबक सिखावैगी
दुनिया मैं समाजवाद का नारा मिलकै नै सारे लगावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।
4
सिर्फ बात नहीं सैं कहवण की ये होवण की बात सारी
लुटेरे कमेरे की लड़ाई असली बाकी लड़ाई खाई बधारी
वर्ग संघर्ष का रास्ता सही रणबीर की कलम भी पुकारी
आज इसपै चलने का मौका दुनिया मैं संकट आया भारी
भगत सिंह जन्म दिन थारा हम जोश खरोश तैं मनावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।

वार्ता


भगत सिंह जेल से अपने पिताजी के नाम एक पत्र लिखकर सरकार को उनके द्वारा भेजी अपील का सख्त विरोध करते हैं । क्या बताया इस रागनी में :-
रागनी 18
अर्जी पिता किशनसिंह नै ट्रिब्यूनल ताहीं दी बताई थी।।
दलील दे बचाव खातर  कोर्ट जाणे की प्लान बनाई थी ।।
भगत सिंह और उसके साथी इसतैं सहमत नहीं बताये
अंग्रेजां की बदले की नीति बोले पिता समझ नहीं पाये
जिंदगी की भीख नहीं मांगां सन्देश बाबू धोरै भिजाई थी।1।
दलील दे बचाव खातर-------
हम तो हैरान पिताजी क्यों आपनै आवेदन भेज दिया
बिना मेरे तैं सलाह करें इसा गल्त क्यों काम किया
राजनितिक विचारों की दूरी कई बारियां समझाई थी।2।
दलील दे बचाव खातर-------
थारी हाँ ना के ख्याल बिना मैं अपना काम करता आया सूँ
मुकद्दमा नहीं लड़ूंगा इसपै मैं धुर तैं खड़या पाया सूँ
अपने सिद्धान्त कुर्बान करकै नहीं बचना कसम खाई थी।3।
दलील दे बचाव खातर---------
आप पिता मेरे ज्यां करकै मनै सख्त बात नहीं लिखी सै
थारी या बड़ी कमजोरी बात साफ़ मनै कहनी सिखी सै
रणबीर इस्सी उम्मीद कदे मनै आपतैं नहीं लगाई थी।।
दलील दे बचाव खातर---------
16.9.16
वार्ता
शहीद भगत सिंह को याद करते हुए लेखक क्या लिखता है भला--
रागनी 19
तेरी याद सतावै सै, दुख बढ़ता आवै सै
कानां पर कै जावै सै, म्हारी कोये ना सुणता।।
1
एक ओड़ नै तो सती का जश्न खूब मनाया जावै
औरत को दूजे कांहीं बाजार बीच नचाया जावै
जड़ै होज्या सै सुनवाई,इंसानियत जड़ै बताई, समाजवाद की राही, भगत कोये ना चुनता।।
2
मुनाफाखोरी की संस्कृति जिस समाज मैं आ ज्यावै
मानवता उड़ै बचै कोण्या या जड़ मूल तैं खा ज्यावै
पूंजी का खेल बताया, नहीं समझ मैं आया
आपस मैं भिड़वाया, भगत भेद नहीं खुलता।।
3
और मुनाफा चाहिए चाहे लाश गेरणीं हो ज्यावैं
साइनिंग दुनिया आले एयरकंडिसन्ड मैं सो ज्यावैं
गरीब क्यों भूखा मरै,मेहनत भी खूब करै
साइनिंग ऊंपै नाम धरै,भगत नहीं चैन मिलता।।
4
आपा धापी माच रही भाई का गल भाई काट रहया
नयेपन के नाम पै नँगापन चाला भुण्डा पाट रहया
जात पात की राही नै, ऊंच नीच की खाई नै, देख गरीब की तबाही नै, रणबीर देख दिल  हिलता।।
वार्ता
शहीद ए आजम भगत सिंह
रागनी 20
माता जी मनै आज्ञा देदे देश नै आजाद कराऊँ मैं
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।
1
माता तनै लाड प्यार तैं देश भक्ति का पाठ पढ़ाया
जिसकी खातर तैयार किया सुण माता बख्त वो आया
अपनी छाती का दूध पिलाया नहीं कोख लजाऊं मैं।।
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।
2
शेर बबर की तरियां सीना खोल चलैं क्रांतिकारी
गाजर मूली समझैँ गोरे क्यों उनकी अक्कल मारी
बढ़ती जागी ताकत म्हारी साची साच बताऊँ मैं।।
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।
3
देश मैं अलख जगावैं क्रांतिकारी देकै नै क़ुरबानी
कई बरस हो लिए माता गोरी ताकत नहीं मानी
नहीं डरते हम हिंदुस्तानी कोण्या झूठ भकाऊं मैं।।
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।
4
अंग्रेज गोरे फुट गेरै अपणा राज बचावण नै रै
देश की जनता मिलकै लड़ैगी देश छुडावण नै रै
रणबीर छंद बणावण नै रै या कलम घिसाऊं मैं ।।
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।



21

भगत सिंह हर के सपने
जिन सपन्यां खातर फांसी टूटे हम मिलकै पूरा करांगे ।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
1
सबको मिलै शिक्षा पूरी यही तो थारा विचार बताया
समाज मैं इंसान बराबर तमनै यो प्रचार बढ़ाया
एक दूजे नै कोए ना लूटै थामनै समाज इसा चाहया
मेहनत की लूट नहीं होवै सारे देश मैं अलख जगाया
आजादी पाछै कसर रैहगी हम ये सारे गड्ढे भरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
2
फुट गेरो राज करो का गोरयां नै खेल रचाया था
छूआ छूत पुराणी समाज मैं लिख पर्चा समझाया था
समाजवाद का पूरा सार सारे नौजवानों को बताया था
शोषण रहित समाज होज्या इसा नक्शा चाहया था
थारे विचार आगै लेज्यावांगे हम नहीं किसे तैं डरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
3
नौजवानो को भगत सिंह याद आवै सै थारी क़ुरबानी
देश की खातर फांसी टूटे गोरयां की एक नहीं मानी
देश की आजादी खातर तकलीफ ठाई थी बेउन्मानी
गोरयां के हाथ पैर फूलगे जबर जुल्म करण की ठानी
क्रांतिकारी कसम खावैं देश की खातर डूबाँ तिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
4
बहरे गोरयां ताहिं हमनै बहुत ऊंची आवाज लगाई
जनता की ना होवै थी सुनायी ज्यां बम्ब की राह अपनाई
नकाब फाड़ना जरूरी था गोरे खेलें थे  घणी चतुराई
गोरयां की फ़ौज म्हारी माहरे उप्पर करै नकेल कसाई
रणबीर कसम खावां सां चाप्लूसां तैं नहीं घिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।

22

शहीद भगतसिंह
भगत सिंह विचार थारे, देश के शासक भूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
1
थारी तीनों और हजारों की क़ुरबानी आजादी ल्याई रै
देश भक्तों कै देश द्रोही की या कालस जावै लगाई रै
हिन्दू राष्ट्र का यो देकै नारा राज नशे मैं टूहल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
2
बहुविविध्ता की थामनै रूखाल करनी बताई रै
नफरत फैला जात धर्म पै एकता पढण बिठाई रै
भूल समाजवाद का नारा हिन्दू के नारे पै झूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
3
नाबराबारी चाही तमनै हिंदुस्तान तैं खत्म होवै रै
किसान की हालत सुधरै मजदूर ना भूखा  सोवै रै
या सरमायेदारी छागी चढ़ फांसी सच्चे असूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
4
बड़ा हिस्सा जनता का थारे विचारों को आगे लेजारया
सेहत शिक्षा सामाजिक न्याय ये मुद्दे डटकै ठारया
रणबीर घणे जणे थारे विचार कर कबूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।

23

शहीद भगत सिंह
एक दिन भगत सिंह नै दोस्तों को बात बताई कहते।।
धर्म पै बात खोलकै उनै अपने दिल की सुनाई कहते।।
1
जो धर्म दोस्तो जुदा इंसान को इंसान से कर देता भाई
मोहब्बत की जागां म्हारे मैं नफरत जो भर देता भाई
जरूरत ना इसे धर्म की दोस्तों को बात सिखाई कहते।।
2
एक दूजे नै मारण नै जो धर्म हमनै तैयार करै सै
भगत सिंह मेरे साथियो आज उसतै इनकार
करै सै
इन धर्मों नै मारकाट की जगत मैं या रीत चलाई कहते।।
3
जो धर्म म्हारे दिल मैं अंधविश्वास को फैलाता भाई
ऐसे धर्म के नजदीक यो भगत सिंह ना जाता भाई
धर्मों की पोल भगत सिंह नै सारी खोल दिखाई कहते।।
4
जो धर्म लोगों के बौद्धिक विकास मैं बाधक बनता भाई
क्या क्यों और कैसे की सोच जो धर्म कुंद करता भाई
कहै रणबीर इसे धर्म तैं भगत सिंह नै दूरी बनाई कहते ।।

वार्ता

साइमन कमीशन भारत में आता है। उसका विरोध पूरे भारत में होता है। पंजाब में भी विरोध किया जाता है। अंग्रेजों की पुलिस अत्याचार करती है। लाला लाजपतराय पर लाठियां बरसाई जाती हैं। वे शहीद हो गये। बदला लेने को क्रान्तिकारियों ने साइमन को मारने का प्रण किया। साण्डरस मारा जाता है। चानन सिपाही क्रान्तिकारियों के पीछे भागता है भगतसिंह और राजगुरु के पीछे। आजाद गोली चलाता है चानन सिंह को गोली ठीक निशाने पर लगती है। आजाद को बहुत दुख होता है चानन सिंह की मौत का। क्या बताया भला:
रागनी 24
तर्ज: चैकलिया
                साइमन कमीशन गो बैक नारा गूंज्या आकाश मैं।।
                साण्डर्स कै गोली मारकै पहोंचा दिया इतिहास मैं।।

                राजगुरु की पहली गोली साण्डर्स मैं समा गई थी
                भगतसिंह की पिस्तौल निशाना उनै बना गई थी
                चानन सिंह सिपाही कै लाग इनकी हवा गई थी
                पाछै भाज लिया चानन बन्दूक उसनै तना दई थी
                दोनूआं के बीच कै लाया अचूक निशाना खास मैं।।
                थोड़ी सी चूक निशाने की घणा पवाड़ा धर जाती
                भगतसिंह कै राजगुरु का सीना छलनी कर जाती
                आजाद जीवन्ता मरता क्रान्तिकारी भावना मर जाती
                आजादी के परवान्यां के दुर्घटना पंख कतर जाती
                आजाद गरक हो ज्याता आत्मग्लानि के अहसास मैं।।
                चानन सिंह के मारे जाने का अफसोस हुया भारी था
                आजाद नै जीवन प्यारा था वो असल क्रान्तिकारी था
                खून के प्यासे आतंकवादी प्रचार यो सरकारी था
                सूट एट साइट का उड़ै फरमान हुया जारी था
                विचलित कदे हुया कोन्या भरया हुआ विश्वास मैं।।
                कठिन काम तै घबराया ना चन्द्रशेखर की तासीर थी
                आजाद भारत की उसकै साहमी रहवै तसबीर थी
                इसकी खातर दिमाग मैं कई ढाल की तदबीर थी
                आजाद नै चैबीस घन्टे दीखैं गुलामी की जंजीर थी
                रणबीर आजाद कैहरया फायदा म्हारे इकलास मैं।।
वार्ता
भगत सिंह ने जनता को क्या पैगाम दिया था
25
शहीद भगत सिंह नै दिया आजादी का पैगाम सुणो।।
भारत के सब नर और नारी उनकी बात तमाम सुणो।।
1
  व्यापार करने की खातिर ईस्ट इंडिया कम्पनी आई
सहज सहज भारत पै इसनै फेर थी पूरी धाक जमाई
व्यापारी वे हाकिम बनगे थामी देश की लगाम सुणो।।
2
ये न्यारी न्यारी रियासत एक एक करकै कब्जाई थी
ठा फायदा म्हारी कमजोरी का बांदर बांट मचाई थी
शाम दाम दंड भेद रचाकै यो बनाया देश गुलाम सुणो।।
3
भारत वासी घणे करहावैं थे भगत सिंह हर सब  देखैं रै
सोच विचार करे मिलकै क्युकर दुख देश का
मेटैं रै
नौजवान सभा बना शुरू करया आजादी का काम सुणो।।
4
क्रांतिकारी संगठन बना कै आजादी की लहर चलाई
आजाद देश हिंदुस्तान की बढ़िया सी तस्बीर बनाई
रणबीर करी भगत हर नै गोरयाँ की नींद हराम सुणो।।

किस्सा शहीद भगत सिंह 8 से 16

 वार्ता

लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
रागनी 8
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही ।।
1
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा, करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं , लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे, संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी थारे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तमनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।


वार्ता-- 23 मार्च को फांसी की सजा दी गई और तीनों को सतलुज के किनारे पर जलाया गया। क्या बताया भला-


रागनी 9
राज गुरु सुख देव भगत सिंह तेईस मार्च नै फांसी पै लटकाये।।
हुसैनी वाला में अधजले तीनूं  सतलुज नदी के मैं गये बहाए।।
1
धार्मिक कट्टरवाद और अंधविश्वास समाज के बैरी बताये
विकास के पक्के रोड़े सैं इनपै लिख कै संदेश घर घर पहूंचाये
लिख मैं नास्तिक क्यों सूं एक पुस्तिका मैं अपने विचार बताये।।
2
इंसान के छूने से सवाल करया हम अपवित्र कैसे हो ज्यावैं
पशु नै रसोई मैं ले जाकै क्यों हम अपनी गोदी के मैं बिठावैं
कति शर्म नहीं आती हमनै क्यों इसे रिवाज समाज मैं चलाये।।
3
जो चीज आजाद विचारों नै बर्दाश्त नही कर पावै देखो रै
हों इसी चीज खत्म समाज तैं तीनूं नौजवान चाहवैं देखो रै
समाजवाद के पढ़े विचार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लाये।।
4
लोग नहीं लड़ें आपस के मैं जरूरत वर्ग चेतना की बताई
किसान मजदूर की असली बैरी पूंजीपति की वर्ग समझाई
सुखदेव राजगुरु भगत सिंह नै रणबीर ना पाछै कदम हटाये ।।


वार्ता
शहीद भगत सिंह पर रचित एक रागनी
रागनी 11
भगतसिंह नै अपनी निभाई ईब हम अपनी निभावांगे ।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
1
इंसानियत भूलकै समाज हैवानियत कान्ही चाल पड़या
शोषण रहित समाज का सपना चौराहे पै बेहाल खड़या
थारा संगठन जिस खातर लड़या उस विचार का परचम फैहरावांगे।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
2
तेईस साल की कुल उम्र चरों कान्ही तैं इतना ज्ञान लिया
बराबर हों इंसान दुनिया के मिलकै तमनै ब्यान दिया
मांग महिला का सम्मान लिया थारी क्रांति का झंडा लैहरावांगे।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
3
हंसते हंसते फांसी चूमगे इंकलाब जिंदाबाद का नारा लाया
बम्ब गैर कै एसैम्बली मैं नारा अंग्रेजां कै था याद दिलवाया
मिलकै सबनै प्रण उठाया गोरयां नै हम बाहर भजावांगे।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
4
जेल मैं पढी किताब के थोड़ी नोट किया सब डायरी मैं
आतंकवादी का मतलब समझां फर्क समझां क्रांतिकारी मैं
कहै रणबीर बरोने आला घर घर थारा सन्देश लेज्यावांगे।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
11.9.2016

वार्ता
भगत सिंह जेल से अपने पिताजी के नाम एक पत्र लिखकर सरकार को उनके द्वारा भेजी अपील का सख्त विरोध करते हैं । क्या बताया इस रागनी में :-
रागनी 11
अर्जी पिता किशनसिंह नै ट्रिब्यूनल ताहीं दी बताई थी।।
दलील दे बचाव खातर  कोर्ट जाणे की प्लान बनाई थी ।।
1
भगत सिंह और उसके साथी इसतैं सहमत नहीं बताये
अंग्रेजां की बदले की नीति बोले पिता समझ नहीं पाये
जिंदगी की भीख नहीं मांगां सन्देश बाबू धोरै भिजाई थी।।
दलील दे बचाव खातर-------
2
हम तो हैरान पिताजी क्यों आपनै आवेदन भेज दिया
बिना मेरे तैं सलाह करें इसा गल्त क्यों काम किया
राजनितिक विचारों की दूरी कई बारियां समझाई थी।।
दलील दे बचाव खातर-------
3
थारी हाँ ना के ख्याल बिना मैं अपना काम करता आया सूँ
मुकद्दमा नहीं लड़ूंगा इसपै मैं धुर तैं खड़या पाया सूँ
अपने सिद्धान्त कुर्बान करकै नहीं बचना कसम खाई थी।।
दलील दे बचाव खातर---------
4
आप पिता मेरे ज्यां करकै मनै सख्त बात नहीं लिखी सै
थारी या बड़ी कमजोरी बात साफ़ मनै कहनी सिखी सै
रणबीर इस्सी उम्मीद कदे मनै आपतैं नहीं लगाई थी।।
दलील दे बचाव खातर---------
16.9.16

वार्ता
इतिहास गवाह है कि जब जब जनता में जागरूकता आई उसने उस दौर के अपने शासकों को झुकाया है।क्या बताया भला-
रागनी 12
जब जब जनता जागी  यो जुल्मी शोषक झुका दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
1
आजाद देश का सपना पहुंचा शहर और गांव मैं
भगत सिंह फांसी टूटा जोश था  देश तमाम मैं
दुर्गा भाभी गेल्याँ  जुटगी इस आजादी के काम मैं
लाखाँ नर और नारी देगे या कुर्बानी गुमनाम मैं
कुर्बानी बिना नहीं आजादी गांधी अलख जगा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
2
गोरे गये आगे काले गरीबी जमा मिटी नहीं सै
बुराई बढती आवै सै भिद्द इसकी पिटी नहीं सै
अच्छाई संघर्ष करण लागरी आस जमा घटी नहीं सै
जनता एक दिन जीतेगी या उम्मीद छुटी नहीं सै
म्हारी एकता तोडण़ खातिर जात पात घणा फैला दिया।।
भारत तैं जुल्मी गौरा मिलकै सबनै भगा दिया।।
3
जात पात हरियाणा की सै सबतैं बड्डी बैरी भाइयो
विकास पूरा होवण दे ना दुनिया याहे कैहरी भाइयो
वैज्ञानिक सोच काट सै इसकी जड़ घणी गहरी भाइयो
अमीराँ की जात अमीरी म्हारै गरीबी फैहरी भाइयो
समता वादी समाज होगा संघर्ष का डंका बजा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
4
दारू माफिया मुनाफा खोर इनकी पक्की यारी देखो
भ्रष्ट पलसिया औछा नेता करता चौड़े गद्दारी देखो
बिचोलिया घणे पैदा होगे म्हारी अक्ल मारी देखो
लंबे जन संघर्ष की हमनै कर ली तैयारी देखो
रणबीर भगत सिंह ने रास्ता सही दिखा दिया।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।


वार्ता
23 मार्च को जब शहादत का दिन आता है तो लेखक के मन में बहुत से विचार इन शहीदों के बारे में आते हैं। क्या बताया भला-
रागनी 13
देख हालत आज देश की थारी याद घणी आवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
1
सबको शिक्षा काम सबको का नारा थामने लाया था
इंकलाब जिंदाबाद देश में जोर लगा गुंजाया था
शोषण रहित समाज थारी डायरी लिखा पावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
2
अंग्रेजों के खिलाफ थाम नै जीवन दा पै लगा दिया

आजादी का संदेश यो घर घर के में पहुंचा दिया
तीनों साथी फांसी चढ़गे  देश शहादत मना वै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
3
सरफरोशी की तमन्ना बोले इब म्हारे दिल मैं सै
देखना सै जोर कितना बाजू ए कातिल थारे मैं सै
एक नौजवान तबका थाम नै उतना ए चाहवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
4
धर्म के नाम पर समाज बांटें आज देश भगत बनरे
हिंदू मुस्लिम के नाम पै बना कै पाले बन्दी तनरे
रणबीर थारी कुर्बानी हम सब मैं जोश लयावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।

वार्ता
शहादत का दिन मनाया जाता है। कई गायक आते हैं । भगत सिंह सुखदेव राजगुरु की शहादत को याद करते हुए एक गायक यह रागनी गाता है--
रागनी 14
जनता की जनवादी क्रांति हम बदल जरूर ल्यावाँगे रै ॥ 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
1
जनतन्त्र का मुखौटा पहर कै राज करै सरमायेदारी या
जल जंगल जमीन धरोहर बाजार के मैं बेचै म्हारी या
हम लोगां का लोगां की खातर लोगां का राज चलावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
2
कौन लूटै जनता नै इब सहज सहज पहचान रहे
आज घोटाले पर घोटाले कर ये कारपोरेट बेईमान रहे
एक दिन मिलकै इन सबनै हम जेल मैं पहोंचावांगे रै  ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
3
जनता जाओ चाहे भाड़ मैं बिदेशी पूंजी तैं हाथ  मिलाया
दरवाजे खोल दिए उन ताहिं गरीबाँ का सै भूत बनाया
जमा बी हिम्मत नहीं हारां मिलकै नै सबक सिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
4
बढ़ा जनता मैं  बेरोजगारी ये नौजवान भटकाये देखो 
जात पात गोत नात मैं बांटे आपस मैं भिड़वाये देखो
किसान मजदूर के दम पै करकै संघर्ष दिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
वार्ता
23 साल की उम्र का जिक्र करते हुए लेखक इस प्रकार से अपने विचार व्यक्त करता है-
रागनी 15
भगत सिंह तेईस साल का यो नौजवान हुया क्रांतिकारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
1
नौजवान सभा बनाकै सारे क्रन्तिकारी एक मंच पै आये
गोरयां की गुलामी खिलाफ पूरे देश मैं अलख जगाये
आजाद राजगुरु सुखदेव पड़े थे गोरयां पै भारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
2
गोरयां नै आतंकवादी ये सारे क्रांतिकारी बताये दखे
म्हारी आजाद सरकारां नै नहीं ये इल्जाम हटाये दखे
देखी म्हारी सरकारां की आज पूरे देश नै गद्दारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
3
फांसी का हुक्म सुनाया सारे देश नै विरोध करया था
यो विरोध देख कसूता अंग्रेज बहोत घणा डरया था
एक दिन पहलम फांसी तोड़े जनता नै भरी हूंकारी ।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
4
इंसानी समाज का सपना भगत सिंह हर नै लिया यो
गोरे गए ये देशी आगे सपन्यां पै ध्यान नहीं दिया यो
कहै रणबीर बरोने आला म्हारै थारी याद घणी आरी ।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
वार्ता
शहीदों के सपनों को आजादी के बाद धीरे धीरे भुला दिया गया। दो भारत बना दिये जाते हैं। क्या बताया भला--

रागनी 16
साइनिंग और सफरिंग देखो दो भारत बणा राखे रै।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।
1
सफरिंग का कितै जिकरा ना साइनिंग खूब चढ़ाया रै
सफरिंग नै लूट लूट कै देखो यो साइनिंग गया बनाया रै
भगत सिंह थारे सारे सपने मिट्टी मैं मिला राखे रै।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।
2
समाजवाद का सपना थारा ना देता कितै दिखाई रै
सबको शिक्षा काम सबको होती ना कितै सुनाई रै
महिला कितै सुरक्षित ना कसूते साँस चढ़ा राखे रै।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।
3
दलितों नै हक मांगे तो इन पर अत्याचार बढ़गे रै
तत्ववादी हिन्दू मुस्लिम म्हारी छाती पै चढ़गे रै
धामिर्कता की जगां धर्मान्धता के पाठ पढ़ा राखे रै।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।
4
महंगाई बेकारी असुरक्षा नै कड़ तोड़ कै धरदी रै
किसान फांसी खा खा मरते बुरी हालत करदी रै
कहै रणबीर घोटाळ्यां नै आज ऊधम मचा राखे रै ।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।