Monday, 16 October 2023

कण कण मैं बसै

 त्याग तपस्या जनसेवा हरेक धर्म का सार बताया रै।।

कण कण मैं बसै रामजी किसनै पत्थर पूजवाया रै।।

कौनसे धर्म मैं लिख दिया दूजे धर्म तैं लोगो घृणा करो 

अपने नै महान बताओ दूजे धर्म के ऊपर नाम धरो 

उसको ढूंढ़ो अपने अंदर  मुक्ति का यो राह दिखाया रै।1।

कण कण मैं बसै ......

समाज सुधरै जीवन सुधरै है धर्मों का अंजाम यही 

फेर क्यों मारकाट धर्मों पै कबीर नै दी  पैगाम यही 

सूफी संतों नै अंधभक्तों को यो रास्ता सही समझाया रै।2।

कण कण मैं बसै ......

प्यार से सब रहते आये हैं गंगा जमुनी संस्कृति म्हारी

अंग्रेजों नै बांटो राज करो करी सोच समझ कै त्यारी

धार्मिक कट्टरता नै मानस दुनिया का आज कँपाया रै।3|

कण कण मैं बसै ......

धार्मिकता के सिद्धान्त सारे  धर्मों के कुछ लोग भूले

एक दूजे तैं नफरत करो की मारा मारी मैं क्यों झूले 

धर्म व्यक्तिगत मसला सै पां क्यों राजनीति मैं फंसाया रै।4।

कण कण मैं बसै ......

कोए सुणता होतै सुणियो

 एक गरीब परिवार की बहू खेत में घास लेने गई। वहां दो पड़ौस के लड़के उसे दबोच लेते हैं। क्या बनती है~~

कोए सुणता होतै सुणियो दियो मेरी सास नै जाकै बेरा।

ईंख के खेत मैं लूट लई छाग्या मेरी आंख्यां मैं अन्धेरा।

चाल्या कोण्या जाता मेरे पै मन मैं कसूती आग बलै सै

दिमाग तै कति घूम रहया यो मेरा पूरा गात जलै सै

पिंजरे मैं घिरी हिरणी देखो या देखै कितै कुंआ झेरॉ।

म्हारे दो पड़ौसी उड़ै खेत मैं घात लगायें बैठे थे

मुँह दाब खींच ली ईंख मैं ईथर भी ल्यायें बैठे थे

गरीब की बहू ठाड्डे की जोरू मनै आज पाटग्या बेरा।

यो काच्चा ढूंढ रहवण नै भरया गाळ मैं कीचड़ री

पति नै ना दिहाड़ी मिलती घरके कहवैं लीचड़ री

गुजारा मुश्किल होरया सै बेरोजगारी नै दिया घेरा।

नहां धोकै बाळ बाहकै घूमै खाज्या किलो खिचड़

उंकी इसी हालत घर मैं जण होसै भैंस का चीचड़

खिलौने बेच गालाँ मैं दो रोटी का काम चलै मेरा।

घरां आकै रिवाल्वर दिखा धमकाया सारा परिवार 

बोल चुपाके रहियो नातै चलज्यागा यो हथियार

भीतरला रोवै लागै सुना मनै यो बाबयां बरगा डेरा।

मेरे बरगी बहोत घनी बेबे जो घुट घुट कै नै जीवैं 

दाब चौगिरदें तैं आज्यावै हम घूँट जहर का पीवें

यो रणबीर कलम उठाकै कहै हो लिया सब्र भतेरा।

जमीन जल और जंगल पै

 जमीन जल और जंगल पै अमीर कब्जा बढ़ावै सै।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

1

जमीन पै कब्जा करकै हाईटैक सिटी बनाते आज

उजड़ कै जमीन तै कित जावै ना खोल बताते आज

बीस लाख मैं ले कै किल्ला बीस करोड़ कमाते आज

इनके बालक तै ऐश करैं म्हारे ज्यान खपाते आज

आदिवासी नै जंगल मां तै हांगा करकै हटावै सै।।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

2

जंगल काट-काट कै गेरे ये मुनाफा घणा कमागे रै

आदिवासी दिये भजा उड़ै तै बहुत से ज्यान खपागे रै

मान सम्मान खातर लड़े वे ज्यान की बाजी लागे रै

देशी लुटेरे बदेशी डाकुआं तै ये चौड़ै हाथ मिलागे रै

किसान की आज मर आगी यो संकट मैं फांसी लावै सै।।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

3

बिश्लेरी पानी की बोतल बाजार मैं दस की मिलती रै

दूध सस्ता और पानी महंगा बात सही ना जंचती रै

साफ पानी नहीं पीवण नै बढ़ती बीमारी दिखती रै

पानी म्हारा दोहन उनका पीस्से की भूख ना मिटती रै

जमीन जंगल जल गया संकट बढ़ता ए आव सै।।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

4

औरत दी एक चीज बना बाजार बीच या बिकती रै

म्हंगाई बढ़ती जा कीमत एक जगहां ना टिकती रै

घणा लालची माणस होग्या हवस कदे ना मिटती रै

अमीरी गरीबां नै खाकै बी आज मा ना छिकती रै

रणबीर बरोने आला घणी साची लिखता घबरावै सै।।

गरीब लाचार खड़या आसमान तरफ लखावै सै।।

ठारा ठारा घण्टे मंडे जिब

 ठारा ठारा घण्टे मंडे जिब थाम सपने पूरे कर पाये।।

कुछ का जिकर सुनो ना सारे जाते आज गिणाये ।।

1

जेट एयरवेज कै ताला पूरी तरियां लवा दिया रै

एयर इंडिया का घाटा असमान पै पहुंचा दिया रै

बीएसएनएल के कर्मचारी कै जाडा चढ़ा दिया रै

एचएएल तनखा ना दे पारी कर्मचारी रुआ दिया रै

आंडी पाकैं थे कर्मचारी बाहर के रसते दिखाये।।

कुछ का जिकर सुनो सारे ना जाते आज गिणाये।।

2

पन्दरा हजार के टोटे मैं डाक विभाग पहुंचा दिया

वीडियोकॉन का पूरा दिवालिया ल्याकै दिखा दिया

टाटा डेकोमो ताहिं सांस लेना कति भुला दिया

एयरसेल की गीण्ड बांधी आज बे काम करा दिया

सरकारी के खाते पूरे लगा बहाने पाड़ बगाये।।

कुछ का जिकर सुनो सारे ना जाते आज गिणाये।।

3

जेपी ग्रुप भी आज बन्द होने को मजबूर  किये

ओएनजीसी के कामकाज चकनाचूर किये

छत्तीस बड़े कर्जदार ये भगौड़े मशहूर किए

साढ़े तीन लाख करोड़ कर्ज माफ भरपूर किये 

बड़े कारपोरेट खातर लाल कारपेट गए बिछाये।।

कुछ का जिकर सुनो सारे ना जाते आज गिणाये।।

4

पंजॉब नेशनल बैंक देवै खस्ताहाल दिखाई सै

दूजे बैंकों की हालत भी हुई बेहाल सुनाई सै 

कर्ज एक लाख तीस हजार मिलियन डॉलर बताई सै 

रेलवे का निजीकरण करकै या जनता

फंसाई सै

कहै रणबीर बरोने आला देश वासी पढ़ण बिठाये।।

कुछ का जिकर सुनो सारे ना जाते आज गिणाये।।

Wednesday, 13 September 2023

10 रागनी

 वास्कोडिगामा 



वास्कोडिगामा बैठ जहाज मैं म्हारे देस मैं आया रै।


मस्साले गजब म्हारे देस के इनपै घणा जी ललचाया रै।।


उस बख्त म्हारे देस मैं कच्चे माल की भरमार बताई


गामां नै पहला कदम धरया म्हारे देस की श्यामत आई


कच्चा माल लाद कै लेज्यां तैयार माल की हाट लगाई


कारीगरां के गूंठ काटे मलमत म्हारी की करी तबाही


मेहनतकश कारीगर देस का यो घणा गया दबाया रै।।


ईस्ट इंडिया कंपनी आई या देस म्हारे पै छागी फेर


कब्जा देस पै करने मैं ना लाई अंग्रेजों नै कति देर


सहज सहज यो म्हारा देस अंग्रेजां नै लिया पूरा घेर


अपणे चमचे छांट लिये रै उनकी कटाई पूरी मेर


फूट डालो और राज करो का यो तीर गजब चलाया रै।।


म्हारे देस के वीरां नै अपणी ज्यान की बाजी लाई रै


भगत सिंह पफांसी चूम गया देस की श्यान बढ़ाई रै


महात्मा गांधी अहिंसा पुजारी छाती मैं गोली खाई रै


लक्ष्मी सहगल दुर्गा भाभी लड़ण तै नहीं घबराई रै


जनता नै मारया मंडासा अंग्रेज ना भाज्या थ्याया रै।।


हटकै म्हारे देस मैं बिल गेट्स नै कदम धरया सै


म्हारे देस नै लूटण खातर इबकै न्यारा भेष भरया सै


डब्ल्यू टी ओ विश्व बैंक गैल मुद्रा कोष करया सै


तीन गुहा नाग यो काला कदे बिना डंसें सरया सै


रणबीर सिंह बरोणे आला सोच कै छन्द बणाया रै।।


पूरी साजिश 


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया 


पत्थरों पर टिकवा माथे हमारे भक्तों ने बिठा जुगाड़ लिया


1


इसमें भोगा वो पिछले का अब किया वो अगले में मिलेगा


इसकी कोई जगांह नहीं है सार बात का लिकाड़ लिया 


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया 


2


कर्म करो फल की चिंता ना करो कभी से इसे मानते आये


अडानी अम्बानी जैसों ने गीता का पन्ना पन्ना फाड़ दिया


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया 


3


इन्होंने फल की चिंता की आज किसी से छिपा नहीं देखो 


गीता पढ़ाओ उन्हें जिन्होंने मानवता का बन्द किवाड़ किया


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया 


4


मेहनत त्याग तपस्या दान का हुआ बहुत अपमान यहां 


अन्धविश्वाशों का विज्ञान ने आज ये नकाब उघाड़ दिया 


आगले पाछले के चक्करों में आज का हिसाब बिगाड़ लिया


 प्रदूषण


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


दुनिया मैं दिल्ली शहर , ग्याहरवें नम्बर पै बताया रै।।


1


यमुना पढ़ण बिठादी या , ईब गंगा की बारी कहते रै


तालाब घनखरे सूख लिए, विकास की लाचारी कहते रै


संकट पाणी का कसूता , भारत प्यारे पै मंडराया रै।।


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


2


जंगल साफ करण लागरे ,विनाश के लगा गेर दिए


वायु प्रदूषण बढ़ता जावै, विकास के नारे टेर दिए


जंगल जमीन खान बेचे,  विकास का खेल रचाया रै।।


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


3


प्रदूषण कारण लाखों लोग बख्त तैं पहल्यां मरज्यावैं


ये प्रदूषण उम्र करोड़ों की कई साल कम कर ज्यावै


पूरे भारत देश म्हारे मैं, प्रदूषण नै कहर मचाया रै।।


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


4


विकास की जागां देखो विनास की राही चाल रहे


पाणी सपड़ाया पेड़ काटे घणे कसूते घर घाल रहे


संभलो जनता कहै रणबीर प्रदूषण नै देश रम्भाया रै।।


म्हारे देश के विकास नै, यो प्रदूषण घणा फैलाया रै।।


जहर


जहर पीवां पैप्सी कोलां मैं, मौत के मुंह मैं जावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।


1


पाणी मैं जहर घुलग्या इसका हमनै बेरा कोन्या


घणा कसूता घाल दिया टूटता दीखै घेरा कोन्या


हरित क्रांति हरियाणा में खुशी थोड़े लोगां मैं ल्याई


घणे लोगां मैं कीटनाशक नै या घणी रची तबाही


आज पाछै बोतल हम नहीं पैप्सी कोला की ठावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।


2


अनतोल्या इस्तेमाल हुया सै पाछले दस सालां मैं


शरीर निचोड़ बगा दिया लाली बची नहीं गालां मैं


बदेशी कंपनी लूटैं हमनै ये हजर पिलाकै देखो


मुनाफा कमावैं अरबां का कीटनाशक खिलाकै देखो


कसम खावां आज सारे हाथ नहीं ठण्डे कै लावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।


3


खाज गात मैं करदी सै आज घर कोए बच्या नहीं


दमा बीमारी बाधू होगी खुलासा म्हारै जंच्या नहीं


गैस पेट की बढ़ती जा महिला हुक्टी पीवण लाग्गी


नामर्दी का शिकार होकै पीढ़ी युवा जीवण लाग्गी


इलाज कितै होन्ता कोन्या बताओ हम कित जावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।


4


कई साल तै रुक्या नहीं जहर का खेल न्योंए चालै


के बरा किस-किस के जीवन पै हाथ रोजाना घालै


कैंसर बधता जावै आज कई विद्वान बतावैं देखो


जन्म जात बीमारी बधगी आंकड़े ये दिखावैं देखो


कहै रणबीर बरोने आला ईबतैं मोर्चा जमावां रै।।


सब्जी दूध भोजन मैं बहोत कीटनाशक खावां रै।।



म्हारी सेहत 


बिना रूजगार पैसा मिलै ना, बिना पीस्से या दाल गलै ना


बिना दाल सेहत बणै नौ, इन बिन पूरा इलाज नहीं।।


हमारे शरीर को चाहिये खाणा साफ पाणी और हवा


इनके बिना सेहत बणै ना कितनी ए खाल्यो चाहे दवा


प्रदूषण कौण फैलावै देखो, ये साधन कौण घटावै देखो


जिम्मै गरीबां के लावै देखो, क्यों उठै म्हारी आवाज नहीं।।


आदमी के रहने के लिए यो हवादार मकान चाहिये


दिमाग की सेहत की तांहि समाज मैं ना तनाव चाहिये


प्रबन्ध हो डॉक्टर दवाई का, पूरा माहौल साथ सफाई का


आदमी की सेहत सवाई का, दुनिया कहती है राज यही।।


बीमारी के कारण के के हों जो इनकी हमनै टोह कोण्या


म्हारी सेहत ना ठीक हो जो म्हारा इसमैं मोह कोण्या


लोगां की सही भागीदारी बिना, असली नीति सरकारी बिना


विकास मैं हिस्सेदारी बिना, स्वास्थ्य रहवै समाज नहीं।।


अपनी सेहत योजना जिब शहर और गाम बणावैं रै


ग्राम सभा मिल बैठ कै सही अपणे सुझाव बतावैं रै


फेर बदलैगी तस्वीर या, देस की बणैगी तहरीर या


लिखै सही बात रणबीर या, फेर चिड़िया नै खा बाज नहीं।।


वार्ता


फौजी देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं । एक रात एक बैंकर में दो फ़ौजी रात काटने के लिए अपने अपने घर गाँव की बातचीत करते हैं । दो महीने पहले एक फौजी छुट्टी पर गाँव आया तो उसके गाँव में एक जघन्य हत्याकांड हुआ मिला। उसके बारे में महेंद्र अपने साथी फ़ौजी सुरेंद्र को सुनाता है। सुरेंद्र का दिल वह सब सुनकर दहल उठता है और वह अपनी मां को एक चिठ्ठी में क्या लिखता है भला:-


औरत की जमा कदर रही ना यो किसा बुरा जमाना आग्या माँ।।


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


1


दो बदमाशां नै मिलकै नाबालिग बच्ची पै अत्याचार किया


बदफेली करी पहलम तै फेर मौत के घाट उतार दिया


इन पापियां नै के मिलग्या सारा हरियाणा पुकार दिया


कहैं पुलिस तैं पीसे जिमाये यो कर काबू थानेदार लिया


घणे दिन लाश ना टोही पाई न्यों गुहांड घणा चकराग्या माँ।।


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


2


नौ मई का मनहूस दिन था मासूम बच्ची नै वे लेगे ठाकै नै


पुलिस ताहिं नाम बता दिएपर झांकी ना वा गाम मैं आकै नै


कई जणे थाने में पहोंचे उड़ै रपट लिखानी चाही जाकै नै


थानेदार नै रपट तो लिखी बहोत घणे धक्के खवाकै नै


अपराधी सांड ज्यों रहे घूमते बेटी कै घर मैं मातम छाग्या माँ।।


3


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


क्यों म्हारी रपट लिखी ना जाती म्हारे ऊपर धौंस जमाई जावै


क्यों या पुलिस खावण नै आती उल्टा म्हारी करी पिटाई जावै


क्यों गरीब जनता न्या ना पाती या रपट कमजोर बनाई जावै


क्यों कमेरी जनता धक्के खाती म्हारी लाज ना बचाई जावै


सामना करना पड़ेगा हमनै मेरा दिल ये बात समझाग्या माँ।।


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


4


घणे जोश मैं हम पहरा देरे थे सुनकै जी उदास हुया माता


सिविल मैं जमा डूबा पड़गी क्यों आज सत्यानाश हुया माता


फेर बी तेरा बेटा लड़ेगा डटकै यो वायदा खास हुया माता


रणबीर सही छन्द बणावै उसनै फ़ौज़ियाँ का डेरा भाग्या माँ।।


सुनकै लोगां की काली करतूत, यो मेरा दिल घणा घबराग्या माँ।।


 एक बाप का दुःख 


कुनबा सारा मूँधा पड़या नहीं होती छोरी की सगाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों या इतनी घनी पढ़ाई।।


1


पढ़ लिख कै बेटी आई एफ एस अफसर बणगी


दहेज़ एक करोड़ पै पहोंच्या सिर की नस तणगी


मेहनत करी दिन रात मुड़कै पाछै नहीं लखाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


2


बिन ब्याही बेटी का घर मैं बोझ घणा कसूता होज्या रै


मेरे बरगा सिद्धान्ति माणस भी सबर अपना खोज्या रै


घर मैं दीखै सूनापन जब ना पावै कोये राही।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


3


जात के भीतर आई ऐ एस कोये भी मिलता कोण्या


एक मिल्या तो गोत उसका म्हारे गाम मैं चलता कोण्या 


इन गोतां के चक्कर नै म्हारी तो पींग सी बधाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


4


माथा पाकड़ कै बैठ गया तीन साल जूती तुड़वाली


या उम्र तीस साल की ओवर ऐज खाते मैं जाली


दोतीन और अफसर थे उनकी मांग बेढंगी पाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


5


बेटी नै तो कर लिया फैंसला ब्याह नहीं कावाने का 


मां बोली हमनै के ठेका बेटी जात बीच ब्याहने का


कौम के ठेकेदारां नै नरमी नहीं  बरती चाही।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


6


जात छोड़ ब्याह करने का मेरा तो जी करता कोण्या


बिन ब्याही रह्वैगी बेटी न्यों सोच दिल भरता कोण्या 


जात मनै लागै थी प्यारी इसनै मेरी करी पिटाई।।


7


न्योंये कित धक्का दे दयूं आज मेरी समझ नहीं आता


एक करोड़ कड़े तैं ल्याऊं आज मेरा तो यो खाली खाता


दो च्यार लाख मैं नहीं करते कौमी बेटे मेरी सुनाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


8


भितरै भितर सोचूँ कितै बेटी प्रेम विवाह करले


नीरस जिंदगी जो उसकी उसनै खुशियों तैं भरले


वा बागी होकै करले शादी होज्यगी मेरी मनचाही।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


9


तिरूं डूबूँ जी होरया इसनै रोज समझाऊँ क्यूकर


जात भितर की सीमा दिल खोल दिखाऊं 


क्यूकर


म्हारे बरगे माणसां की होरी सारे कै जग हंसाई।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


10


नौकरी के कारण बेटी नै कई देशां मैं जाना पड़ता 


भांत भांत के लोगां तैं उसनै उड़ै हाथ मिलाना पड़ता 


रणबीर खुलापन आया यो आज साहमी दे दिखाई ।।


मनै सगे सम्बन्धी कहवैं क्यों इतनी घनी पढ़ाई।।


: औरत 


बीर  के जी नै भाण मेरी मोटा फांसा होग्या हे । 


मुँह मैं घालण नै होरे सैं इसा भुण्डा रासा होग्या हे । 


दिन की धौली दें मार लुगाई इसा बुरा जमाना आया 


माया त्यागी की दर्द कहानी नै आज भूचाल मचाया 


कुणसे कुणसे काण्ड गिनाऊँ दुर्योधन भी शरमाया 


नपूते स्टोवां नै भी म्हारे कान्ही अपना मुँह बाया 


म्हारे देश मैं आज बीर  का तोले तैं माशा होग्या हे । 


इस देश मैं छोरी के पैदा होण पै सारै छा मुरदाई जावै 


छोरे के  जाम्मन पै बहणा मेरी थाली खूब बजाई जावै 


जिसकै होज्यां लागती छोरी वा निरभाग बताई जावै 


छोरा ना होवण ऊपर आज बी दूजी शादी रचाई जावै 


दोनूवां नै बतावैं बरोबर छोरा क्यों कुल आशा होग्या हे । 


मनू नै भी भाण मेरी यो इसा घनघोर अत्याचार किया 


अनाचारी दुराचारी मूढ़ पति बीर का क्यों स्वीकार किया 


साहमी बोलण आली बीर गेल्याँ कुल्टा सा व्यवहार किया 


बीर का कोए हक़ ना होता लिख मनू स्मृति तैयार किया 


मनू नै भी डांडी मारी यो आज तोड़ खुलासा होग्या हे । 


छोरी ताहिं गुलाम रहन की आज बी सीख सिखाई जा 


छोरे ताहिं राज करण की खोल सारी तदबीर बताई जा 


छोरी नै गम ख़ाना चाहिए या धुर तैं सीख  सुनाई  जा 


छोरे नै निख्डू  दूध मिलता रोटी पै भी धरी मलाई जा 


रणबीर सिंह राम राज आया यूं अजब तमासा होग्या हे । 


जुलाई , 1989


गीत 


या दुनिया हुई कसाई हे सखी , समझी ना इंसान मैं 


बचपन के महां लाड  लड़ाया ,पढना लिखना खूब सिखाया 


मेरी माँ नै गोद खिलाई हे सखी , पर समझी ना संतान मैं 


हुई सिवासन ब्याह रचाया , खोल जेवडा पिंड छुटवाया 


कर दी मेरी बिदाई हे सखी पर समझ लाई अनजान मैं 


पति देव का साथ निभाया , घर का सारा बोझ उठाया 


बढ़िया पत्नी बताई हे सखी पर समझी नहीं समान मैं 


सब बच्चों को खूब पढाया , भविष्य उनका सही बनाया 


मनै पीढी  त्यार  बनाई  हे सखी पर नाम नहीं निर्माण मैं 


खेत क्यार म नै खूब कमाया ,नहीं पा छे नै कदम हटाया 


बहो तै घणा कमाई हे सखी पर समझी नहीं किसान मैं 


या दुनिया हुई कसाई हे सखी समझी ना इंसान मैं


जय भीम इंक़लाब का नारा यो अपना रंग दिखावै रै।।


नव जागरण आंदोलन यो मनुवाद कै साँस चढावै रै।।


1


जात पात और छूआछूत म्हारे समाज तैं मिटानी सै


अन्धविश्वास पाखंड की वैज्ञानिक काट बिछानी सै


सब धर्मां की कट्टरता आपस मैं हमनै लड़वावै रै।।


नव जागरण आंदोलन यो मनुवाद कै साँस चढावै रै।।


2


मारो काटो नफरत करो कौनसे धर्म मैं लिख राख्या


झूठ फैला कै जहर भरो कौनसे धर्म मैं लिख राख्या


धर्मों का जाल दुनिया मैं पूंजीपतियां का साथ निभावै रै।।


नव जागरण आंदोलन यो मनुवाद कै साँस चढावै रै।।


3


नब्बै नै बांटन की खातर जात धर्म हथियार बनाये


भारत मैं मनुवाद नै देखो सदियों से वंचित दबाये


टिकवा माथा मस्जिद मंदिर मैं धुरतैं भकांता आवै रै।।


नव जागरण आंदोलन यो मनुवाद कै साँस चढावै रै।।


4



Tuesday, 22 August 2023

किस्सा भगत सिंह 26 से 33

 26


आजादी के लिए कुर्बान हुये, भगत सिंह से इंसान हुए, ये गोरे बहोत परेशान हुये, बांटो राज करो नीति अपनाई।।
1
जात धर्म इलकवाद पै बांटे भारत के हर और नारी
म्हारी फूट का फायदा ठाकै नै दो सौ साल खाल उतारी
उनके सारे कै गुणगान हुए, चमचे भी थे बेउन्मान हुए, जारी बहोत से फरमान हुए ,कच्चे माल ताहिं रेल चलाई।।
2
राजे राजवाड़े सब जीत लिए भारत राष्ट्र गया बनाया रै
अंगरेज सबनै लूटन खातिर एक सीमा भीतर ल्याया रै
युद्ध कई घमासान हुए, फेर व्यापारी राजे महान हुए, भारत वासी थे दरबान हुए, फेर गुलामी गई खूब सिखाई।।
3
देश का माहौल गरमाया हिंदुस्तान नै ली फेर अंगड़ाई
कुर्बानी की खूब लहर चली असैम्बली मैं बम्ब गिराई
सब कट्ठे एक मचान हुये, नयों देश प्रेम के ध्यान हुए, आजादी खातिर घमासान हुए, मार भगाया गोरा आत्मताई।।
4
बहोत घणा दबाव बण्या जिब पड़या गोरयाँ नै जाणा
हर देशवासी गाया करता स्वदेसी भारत का गाणा
आजाद हुए अरमान म्हारे, तोड़े चाहे आसमान तारे, ले आजादी की पहचान सारे, रणबीर मिलकै खुशी मनाई।।

27
बुलेट की जागां बैलेट तैं हम बदल जरूर ल्यावांगे।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।
1
जनतंत्र का मुखौटा पहर कै या राज करै सै सरमायेदारी
जल जंगल जमीन की धरोहर बाजार मैं बेचै सै म्हारी
लोगां का लोगां की खातिर लोगां द्वारा राज चलावांगे।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।
2
हम जनता की ताकत इब सहज सहज पहचान रहे
आज घोटाले पै घोटाले कर आज अमीर बेईमान रहे
देख लियो एक दिन इन सबनै हम जेल मैं पहूंचावांगे।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।
3
जनता जाओ भाड़ मैं आज साम्राज्यवाद तैं हाथ मिलाया
उन ताहिं खोल दिये दरवाजे गरीबां का  सै भूत बनाया
हिम्मत नहीं हारां जमा बी मिलकै नै सबक सिखावांगे।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।
4
जात पात गोत नात मैं बांटे या चल समझनी होगी
इननै छोड़ कै एकता की रणबीर ढाल बरतनी होगी
इंकलाब जिंदाबाद का नारा पूरे देश के मैं गुंजावांगे ।।
भगतसिंह हर के सपन्यां का यो हिंदुस्तान बणावांगे।।





28


लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही ।।
1
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा, करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं , लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे, संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी थारे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तमनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।


29

शहीद भगतसिंह
भगत सिंह विचार थारे, देश के शासक भूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
1
थारी तीनों और हजारों की क़ुरबानी आजादी ल्याई रै
देश भक्तों कै देश द्रोही की या कालस जावै लगाई रै
हिन्दू राष्ट्र का यो देकै नारा राज नशे मैं टूहल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
2
बहुविविध्ता की थामनै रूखाल करनी बताई रै
नफरत फैला जात धर्म पै एकता पढण बिठाई रै
भूल समाजवाद का नारा हिन्दू के नारे पै झूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
3
नाबराबारी चाही तमनै हिंदुस्तान तैं खत्म होवै रै
किसान की हालत सुधरै मजदूर ना भूखा  सोवै रै
या सरमायेदारी छागी चढ़ फांसी सच्चे असूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
4
बड़ा हिस्सा जनता का थारे विचारों को आगे लेजारया
सेहत शिक्षा सामाजिक न्याय ये मुद्दे डटकै ठारया
रणबीर घणे जणे थारे विचार कर कबूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।

30

लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही।।
1
अंग्रेज तैं लड़ाई लड़ी थारी कुर्बानी आजादी ल्याई,
छाई लुटेरों की बेईमानी या फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा,करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं, लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे,संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी तेरे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।

31

भगत सिंह राजगुरु सुखदेव सबको है प्रणाम म्हारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
1
बेरोजगारी ने कहर मचाया आसमानां जाकै चढ़गी देख
गरीब की चटनी रोटी खुसली अमीराँ की खुराक बढ़गी देख
हर पांच मिनट में फांसी खाज्यां लूट की लकीर कढ़गी देख
पढ़ाई लिखाई और इलाज मैं  कारस्तानी जनता पढ़गी देख
अमीर थे वे घणे अमीर होगे रै झूठा लेवैं आज नाम थारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
2
महिला कितै महफूज रही ना असुरक्षा का माहौल छाया
गाम शहरों मैं बदमाशां नै इनकै उप्पर घणा कहर ढाया
यारे प्यारे भी कोण्या शर्मावैं औरत को एक चीज बनाया
ऑनर किलिंग होवै सै रोजाना ज़िकरा अखबारों मैं आया
थारे सपन्यां की अर्थी ठवा दी झूठा कोण्या इल्जाम म्हारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
3
नम्बर वन हरियाणा के मैं दलितों पै अत्याचार बढ़े रै
दुलिना और गोहाना ना भूले मिर्चपुर मैं फेर सांस चढ़े रै
दबंगों की चालै आज बी नजदीक तैं गए सब पढ़े रै
आईडेन्टिटी राजनीति के गए इल्जाम दलितों पै मढ़े रै
छुआ छूत बारे लिख्या थामनै अनदेखा हुया सब काम थारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
4
समाजवाद का पाठ पढ़या उसकी खातर फांसी खाई रै
माणस का ना माणस बैरी हो थामनै सही राह दिखाई रै
आज के काले गोरयाँ नै अमीराँ की खूब  मेर कटाई रै
आम आदमी नै लूटण नै फासीवाद की राह अपनाई रै
कहै रणबीर बरोने आला  सारे कै पहूंचावैंगे पैगाम थारा।।
शोषण रहित समाज का सपना चकनाचूर तमाम थारा।।
32
भगत सिंह ब्याह करवाले, अंग्रेज कोण्या जावैं देख।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।
1
ब्याह शादी इस दुनिया के बेटा भगत दस्तूर बताये सैं
ये रिश्ते सदियां तैं चालकै एकनिष्ठ परिवार पै आये सैं
घरबार संस्था घणी पुरानी सबनै ब्याह करवाये सैं
कबीले हुया करैं थे कदे आज हम आड़ै आ पाये सैं
क्रांति के नाम पै नाटै सै बात समझ नहीं पावैं देख।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।
2
करतार सिंह सराभा तैं प्रभावित नौजवान होरे देखो
देश आजाद करावांगे कहते ना पाछै छोरी छोरे देखो
बीर मर्द सब कट्ठे होकै जंग आजादी की झोरे देखो
दोनूं मिलकै करैं लड़ाई ज्यां छोरे छोरी टोहरे देखो
तेरी मां भी दिल तैं शादी चाहरी सारे घरके चाहवैं देख।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।
3
दुर्गा भाभी बरगी महिला ढूंढ लियो क्रांतिकारी बेटा
क्रांति मैं नहीं बनैं रोड़ा वे लड़ेंगी साथ मैं थारी बेटा
बराबर खड़ी होकै लड़ेंगी ये कई बनैंगी प्रचारी बेटा
कल्पना दत्त का नाम सुण्या हथियार कद की ठारी बेटा
सोच लियो बेटा आच्छी ढ़ालां कदे पाछै पछतावैं देख।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।
4
बिना महिला साथ लिये क्रांति सफल कैसे होज्यागी
आई एन ए की महिला पलटन आजादी के बीज बोज्यागी
थाम लड़ो गुरिल्ला युद्ध महिला कैसे पड़कै सोज्यागी
दोनों की ताकत मिलकै नै या गोरी सेना नै डबोज्यागी
रणबीर बरोनिया बरगे भी सोच कै छन्द बनावैं देख ।।
बिना शादी किसी दुनिया घरके तनै समझावैं देख ।।

33
भगत सिंह तेईस साल का यो नौजवान हुया क्रांतिकारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
1
नौजवान सभा बनाकै सारे क्रन्तिकारी एक मंच पै आये
गोरयां की गुलामी खिलाफ पूरे देश मैं अलख जगाये
आजाद राजगुरु सुखदेव पड़े थे गोरयां ऊपर भारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
2
गोरयां नै आतंकवादी ये सारे क्रांतिकारी बताये दखे
म्हारी आजाद सरकारां नै नहीं ये इल्जाम हटाये दखे
देखी म्हारी सरकारां की आज पूरे हिंदुस्तान नै गद्दारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
3
फांसी का हुक्म सुनाया सारे देश नै विरोध करया था
यो विरोध देख कसूता अंग्रेज बहोत घणा डरया था
एक दिन पहलम ए फांसी तोड़े जनता नै भरी हूंकारी ।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
4
इंसानी समाज का सपना भगत सिंह हर नै लिया यो
गोरे गए ये देशी आगे सपन्यां पै ध्यान नहीं दिया यो
कहै रणबीर बरोने आला म्हारै थारी याद घणी आरी ।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।



















किस्सा भगत सिंह 17 से 25

 वार्ता

भगत सिंह और उनके साथियों का समाजवाद का सपना था। भगत सिंह ने विस्तार से इस बारे लिखा भी। क्या बताया भला-
रागनी 17
थारा समाजवाद का सपना भगत सिंह आगै बढ़ावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।
1
इस बाजार व्यवस्था नै सारे कै उधम घणा मचाया सै
मानवता पाछै छोड़ दई यो विज्ञान तकनीक बनाया सै
पर्यावरण का सत्यानाश करया लालच घणा छाया सै
कुदरती संसाधन का दोहन बेहिसाब आज करवाया सै
पूंजीवादी बाजार की जड़ दीखली या सबनै समझावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।
2
हिंदुस्तान मैं बाजारवाद के टाटा अम्बानी पुजारी देखो
इनके तलहैडू म्हारी सरकार जमा ए अक्कल मारी देखो
गोड्डे टिकवाये किसानां के मजदूर बनाये भिखारी देखो
अम्बानी की अमीरी बधाई गरीबां की हुई लाचारी देखो
भगत सिंह थारी राही चालां नहीं पाछै कदम हटावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।
3
शहीदों थारी या कुर्बानी एक दिन अपना रंग दिखावैगी
बेरोजगारी खत्म होज्यागी महिला पूरा सम्मान पावैगी
जंगी हथियार खत्म करे जावैं दुनिया मैं शांति छावैगी
जात गोत मजहब ताहिं या मानवता सबक सिखावैगी
दुनिया मैं समाजवाद का नारा मिलकै नै सारे लगावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।
4
सिर्फ बात नहीं सैं कहवण की ये होवण की बात सारी
लुटेरे कमेरे की लड़ाई असली बाकी लड़ाई खाई बधारी
वर्ग संघर्ष का रास्ता सही रणबीर की कलम भी पुकारी
आज इसपै चलने का मौका दुनिया मैं संकट आया भारी
भगत सिंह जन्म दिन थारा हम जोश खरोश तैं मनावैं रै।।
थोड़े सां पर बुलन्द होंसले सैं जमा नहीं झूठ भकावैं रै।।

वार्ता


भगत सिंह जेल से अपने पिताजी के नाम एक पत्र लिखकर सरकार को उनके द्वारा भेजी अपील का सख्त विरोध करते हैं । क्या बताया इस रागनी में :-
रागनी 18
अर्जी पिता किशनसिंह नै ट्रिब्यूनल ताहीं दी बताई थी।।
दलील दे बचाव खातर  कोर्ट जाणे की प्लान बनाई थी ।।
भगत सिंह और उसके साथी इसतैं सहमत नहीं बताये
अंग्रेजां की बदले की नीति बोले पिता समझ नहीं पाये
जिंदगी की भीख नहीं मांगां सन्देश बाबू धोरै भिजाई थी।1।
दलील दे बचाव खातर-------
हम तो हैरान पिताजी क्यों आपनै आवेदन भेज दिया
बिना मेरे तैं सलाह करें इसा गल्त क्यों काम किया
राजनितिक विचारों की दूरी कई बारियां समझाई थी।2।
दलील दे बचाव खातर-------
थारी हाँ ना के ख्याल बिना मैं अपना काम करता आया सूँ
मुकद्दमा नहीं लड़ूंगा इसपै मैं धुर तैं खड़या पाया सूँ
अपने सिद्धान्त कुर्बान करकै नहीं बचना कसम खाई थी।3।
दलील दे बचाव खातर---------
आप पिता मेरे ज्यां करकै मनै सख्त बात नहीं लिखी सै
थारी या बड़ी कमजोरी बात साफ़ मनै कहनी सिखी सै
रणबीर इस्सी उम्मीद कदे मनै आपतैं नहीं लगाई थी।।
दलील दे बचाव खातर---------
16.9.16
वार्ता
शहीद भगत सिंह को याद करते हुए लेखक क्या लिखता है भला--
रागनी 19
तेरी याद सतावै सै, दुख बढ़ता आवै सै
कानां पर कै जावै सै, म्हारी कोये ना सुणता।।
1
एक ओड़ नै तो सती का जश्न खूब मनाया जावै
औरत को दूजे कांहीं बाजार बीच नचाया जावै
जड़ै होज्या सै सुनवाई,इंसानियत जड़ै बताई, समाजवाद की राही, भगत कोये ना चुनता।।
2
मुनाफाखोरी की संस्कृति जिस समाज मैं आ ज्यावै
मानवता उड़ै बचै कोण्या या जड़ मूल तैं खा ज्यावै
पूंजी का खेल बताया, नहीं समझ मैं आया
आपस मैं भिड़वाया, भगत भेद नहीं खुलता।।
3
और मुनाफा चाहिए चाहे लाश गेरणीं हो ज्यावैं
साइनिंग दुनिया आले एयरकंडिसन्ड मैं सो ज्यावैं
गरीब क्यों भूखा मरै,मेहनत भी खूब करै
साइनिंग ऊंपै नाम धरै,भगत नहीं चैन मिलता।।
4
आपा धापी माच रही भाई का गल भाई काट रहया
नयेपन के नाम पै नँगापन चाला भुण्डा पाट रहया
जात पात की राही नै, ऊंच नीच की खाई नै, देख गरीब की तबाही नै, रणबीर देख दिल  हिलता।।
वार्ता
शहीद ए आजम भगत सिंह
रागनी 20
माता जी मनै आज्ञा देदे देश नै आजाद कराऊँ मैं
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।
1
माता तनै लाड प्यार तैं देश भक्ति का पाठ पढ़ाया
जिसकी खातर तैयार किया सुण माता बख्त वो आया
अपनी छाती का दूध पिलाया नहीं कोख लजाऊं मैं।।
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।
2
शेर बबर की तरियां सीना खोल चलैं क्रांतिकारी
गाजर मूली समझैँ गोरे क्यों उनकी अक्कल मारी
बढ़ती जागी ताकत म्हारी साची साच बताऊँ मैं।।
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।
3
देश मैं अलख जगावैं क्रांतिकारी देकै नै क़ुरबानी
कई बरस हो लिए माता गोरी ताकत नहीं मानी
नहीं डरते हम हिंदुस्तानी कोण्या झूठ भकाऊं मैं।।
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।
4
अंग्रेज गोरे फुट गेरै अपणा राज बचावण नै रै
देश की जनता मिलकै लड़ैगी देश छुडावण नै रै
रणबीर छंद बणावण नै रै या कलम घिसाऊं मैं ।।
री माता दूध तेरा यो करकै सफल दिखाऊं मैं ।।



21

भगत सिंह हर के सपने
जिन सपन्यां खातर फांसी टूटे हम मिलकै पूरा करांगे ।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
1
सबको मिलै शिक्षा पूरी यही तो थारा विचार बताया
समाज मैं इंसान बराबर तमनै यो प्रचार बढ़ाया
एक दूजे नै कोए ना लूटै थामनै समाज इसा चाहया
मेहनत की लूट नहीं होवै सारे देश मैं अलख जगाया
आजादी पाछै कसर रैहगी हम ये सारे गड्ढे भरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
2
फुट गेरो राज करो का गोरयां नै खेल रचाया था
छूआ छूत पुराणी समाज मैं लिख पर्चा समझाया था
समाजवाद का पूरा सार सारे नौजवानों को बताया था
शोषण रहित समाज होज्या इसा नक्शा चाहया था
थारे विचार आगै लेज्यावांगे हम नहीं किसे तैं डरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
3
नौजवानो को भगत सिंह याद आवै सै थारी क़ुरबानी
देश की खातर फांसी टूटे गोरयां की एक नहीं मानी
देश की आजादी खातर तकलीफ ठाई थी बेउन्मानी
गोरयां के हाथ पैर फूलगे जबर जुल्म करण की ठानी
क्रांतिकारी कसम खावैं देश की खातर डूबाँ तिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
4
बहरे गोरयां ताहिं हमनै बहुत ऊंची आवाज लगाई
जनता की ना होवै थी सुनायी ज्यां बम्ब की राह अपनाई
नकाब फाड़ना जरूरी था गोरे खेलें थे  घणी चतुराई
गोरयां की फ़ौज म्हारी माहरे उप्पर करै नकेल कसाई
रणबीर कसम खावां सां चाप्लूसां तैं नहीं घिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।

22

शहीद भगतसिंह
भगत सिंह विचार थारे, देश के शासक भूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
1
थारी तीनों और हजारों की क़ुरबानी आजादी ल्याई रै
देश भक्तों कै देश द्रोही की या कालस जावै लगाई रै
हिन्दू राष्ट्र का यो देकै नारा राज नशे मैं टूहल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
2
बहुविविध्ता की थामनै रूखाल करनी बताई रै
नफरत फैला जात धर्म पै एकता पढण बिठाई रै
भूल समाजवाद का नारा हिन्दू के नारे पै झूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
3
नाबराबारी चाही तमनै हिंदुस्तान तैं खत्म होवै रै
किसान की हालत सुधरै मजदूर ना भूखा  सोवै रै
या सरमायेदारी छागी चढ़ फांसी सच्चे असूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।
4
बड़ा हिस्सा जनता का थारे विचारों को आगे लेजारया
सेहत शिक्षा सामाजिक न्याय ये मुद्दे डटकै ठारया
रणबीर घणे जणे थारे विचार कर कबूल गये।
सबकी शिक्षा काम सबको ,पकड़ मामले  तूल गये।

23

शहीद भगत सिंह
एक दिन भगत सिंह नै दोस्तों को बात बताई कहते।।
धर्म पै बात खोलकै उनै अपने दिल की सुनाई कहते।।
1
जो धर्म दोस्तो जुदा इंसान को इंसान से कर देता भाई
मोहब्बत की जागां म्हारे मैं नफरत जो भर देता भाई
जरूरत ना इसे धर्म की दोस्तों को बात सिखाई कहते।।
2
एक दूजे नै मारण नै जो धर्म हमनै तैयार करै सै
भगत सिंह मेरे साथियो आज उसतै इनकार
करै सै
इन धर्मों नै मारकाट की जगत मैं या रीत चलाई कहते।।
3
जो धर्म म्हारे दिल मैं अंधविश्वास को फैलाता भाई
ऐसे धर्म के नजदीक यो भगत सिंह ना जाता भाई
धर्मों की पोल भगत सिंह नै सारी खोल दिखाई कहते।।
4
जो धर्म लोगों के बौद्धिक विकास मैं बाधक बनता भाई
क्या क्यों और कैसे की सोच जो धर्म कुंद करता भाई
कहै रणबीर इसे धर्म तैं भगत सिंह नै दूरी बनाई कहते ।।

वार्ता

साइमन कमीशन भारत में आता है। उसका विरोध पूरे भारत में होता है। पंजाब में भी विरोध किया जाता है। अंग्रेजों की पुलिस अत्याचार करती है। लाला लाजपतराय पर लाठियां बरसाई जाती हैं। वे शहीद हो गये। बदला लेने को क्रान्तिकारियों ने साइमन को मारने का प्रण किया। साण्डरस मारा जाता है। चानन सिपाही क्रान्तिकारियों के पीछे भागता है भगतसिंह और राजगुरु के पीछे। आजाद गोली चलाता है चानन सिंह को गोली ठीक निशाने पर लगती है। आजाद को बहुत दुख होता है चानन सिंह की मौत का। क्या बताया भला:
रागनी 24
तर्ज: चैकलिया
                साइमन कमीशन गो बैक नारा गूंज्या आकाश मैं।।
                साण्डर्स कै गोली मारकै पहोंचा दिया इतिहास मैं।।

                राजगुरु की पहली गोली साण्डर्स मैं समा गई थी
                भगतसिंह की पिस्तौल निशाना उनै बना गई थी
                चानन सिंह सिपाही कै लाग इनकी हवा गई थी
                पाछै भाज लिया चानन बन्दूक उसनै तना दई थी
                दोनूआं के बीच कै लाया अचूक निशाना खास मैं।।
                थोड़ी सी चूक निशाने की घणा पवाड़ा धर जाती
                भगतसिंह कै राजगुरु का सीना छलनी कर जाती
                आजाद जीवन्ता मरता क्रान्तिकारी भावना मर जाती
                आजादी के परवान्यां के दुर्घटना पंख कतर जाती
                आजाद गरक हो ज्याता आत्मग्लानि के अहसास मैं।।
                चानन सिंह के मारे जाने का अफसोस हुया भारी था
                आजाद नै जीवन प्यारा था वो असल क्रान्तिकारी था
                खून के प्यासे आतंकवादी प्रचार यो सरकारी था
                सूट एट साइट का उड़ै फरमान हुया जारी था
                विचलित कदे हुया कोन्या भरया हुआ विश्वास मैं।।
                कठिन काम तै घबराया ना चन्द्रशेखर की तासीर थी
                आजाद भारत की उसकै साहमी रहवै तसबीर थी
                इसकी खातर दिमाग मैं कई ढाल की तदबीर थी
                आजाद नै चैबीस घन्टे दीखैं गुलामी की जंजीर थी
                रणबीर आजाद कैहरया फायदा म्हारे इकलास मैं।।
वार्ता
भगत सिंह ने जनता को क्या पैगाम दिया था
25
शहीद भगत सिंह नै दिया आजादी का पैगाम सुणो।।
भारत के सब नर और नारी उनकी बात तमाम सुणो।।
1
  व्यापार करने की खातिर ईस्ट इंडिया कम्पनी आई
सहज सहज भारत पै इसनै फेर थी पूरी धाक जमाई
व्यापारी वे हाकिम बनगे थामी देश की लगाम सुणो।।
2
ये न्यारी न्यारी रियासत एक एक करकै कब्जाई थी
ठा फायदा म्हारी कमजोरी का बांदर बांट मचाई थी
शाम दाम दंड भेद रचाकै यो बनाया देश गुलाम सुणो।।
3
भारत वासी घणे करहावैं थे भगत सिंह हर सब  देखैं रै
सोच विचार करे मिलकै क्युकर दुख देश का
मेटैं रै
नौजवान सभा बना शुरू करया आजादी का काम सुणो।।
4
क्रांतिकारी संगठन बना कै आजादी की लहर चलाई
आजाद देश हिंदुस्तान की बढ़िया सी तस्बीर बनाई
रणबीर करी भगत हर नै गोरयाँ की नींद हराम सुणो।।

किस्सा शहीद भगत सिंह 8 से 16

 वार्ता

लेखक भगत सिंह को आह्वान करके क्या कहता है ------
रागनी 8
देख ले आकै सारा हाल , क्यों देश की बिगड़ी चाल, सोने की चिडया सै कंगाल , भ्रष्टाचार नै करी तबाही ।।
1
अंग्रेज तैं लड़ी लडाई , थारी कुर्बानी आजादी ल्याई
देश के लुटेरों की बेईमानी फेर म्हारी बर्बादी ल्याई
क्यों भूखा मरता कमेरा , इसनै क्यूकर लूटै लुटेरा, करया चारों तरफ अँधेरा,माणस मरता बिना दवाई ।।
2
चारों कान्ही आज दिखाऊँ , घोटालयां की भरमार दखे
दीमक की तरियां खावै सै समाज नै यो भ्रष्टाचार दखे
ये चीर हरण रोजाना होवें , नाम देश का जमा ड़बोवैं , लुटेरे आज तान कै सोवें, शरीफों की श्यामत आई ।।
3
थारे विचारों के साथी तो डटरे सें जमकै मैदान के माँ
गरीबों की ये लड़ें लडाई म्हारे पूरे हिंदुस्तान के माँ
भगत सिंह ये साथी थारे , तेरी याद मैं कसम उठारे, संघर्ष करेँ यो बिगुल बजारे ,चाहते ये मानवता बचाई ।।
4
बदेशी कंपनी थारे देश नै फेर गुलाम बनाया चाहवैं
मेहनत लूट मजदूर किसानों की ये पेट फुलाया चाहवैं
भारी दिल तैं साथी रणबीर, लिखै देश की सही तहरीर, भगत तमनै जो बनाई तस्बीर, देख जमा ए पाड़ बगाई।।


वार्ता-- 23 मार्च को फांसी की सजा दी गई और तीनों को सतलुज के किनारे पर जलाया गया। क्या बताया भला-


रागनी 9
राज गुरु सुख देव भगत सिंह तेईस मार्च नै फांसी पै लटकाये।।
हुसैनी वाला में अधजले तीनूं  सतलुज नदी के मैं गये बहाए।।
1
धार्मिक कट्टरवाद और अंधविश्वास समाज के बैरी बताये
विकास के पक्के रोड़े सैं इनपै लिख कै संदेश घर घर पहूंचाये
लिख मैं नास्तिक क्यों सूं एक पुस्तिका मैं अपने विचार बताये।।
2
इंसान के छूने से सवाल करया हम अपवित्र कैसे हो ज्यावैं
पशु नै रसोई मैं ले जाकै क्यों हम अपनी गोदी के मैं बिठावैं
कति शर्म नहीं आती हमनै क्यों इसे रिवाज समाज मैं चलाये।।
3
जो चीज आजाद विचारों नै बर्दाश्त नही कर पावै देखो रै
हों इसी चीज खत्म समाज तैं तीनूं नौजवान चाहवैं देखो रै
समाजवाद के पढ़े विचार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लाये।।
4
लोग नहीं लड़ें आपस के मैं जरूरत वर्ग चेतना की बताई
किसान मजदूर की असली बैरी पूंजीपति की वर्ग समझाई
सुखदेव राजगुरु भगत सिंह नै रणबीर ना पाछै कदम हटाये ।।


वार्ता
शहीद भगत सिंह पर रचित एक रागनी
रागनी 11
भगतसिंह नै अपनी निभाई ईब हम अपनी निभावांगे ।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
1
इंसानियत भूलकै समाज हैवानियत कान्ही चाल पड़या
शोषण रहित समाज का सपना चौराहे पै बेहाल खड़या
थारा संगठन जिस खातर लड़या उस विचार का परचम फैहरावांगे।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
2
तेईस साल की कुल उम्र चरों कान्ही तैं इतना ज्ञान लिया
बराबर हों इंसान दुनिया के मिलकै तमनै ब्यान दिया
मांग महिला का सम्मान लिया थारी क्रांति का झंडा लैहरावांगे।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
3
हंसते हंसते फांसी चूमगे इंकलाब जिंदाबाद का नारा लाया
बम्ब गैर कै एसैम्बली मैं नारा अंग्रेजां कै था याद दिलवाया
मिलकै सबनै प्रण उठाया गोरयां नै हम बाहर भजावांगे।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
4
जेल मैं पढी किताब के थोड़ी नोट किया सब डायरी मैं
आतंकवादी का मतलब समझां फर्क समझां क्रांतिकारी मैं
कहै रणबीर बरोने आला घर घर थारा सन्देश लेज्यावांगे।।
इंसानियत का विचार उनका पूरी दुनिया मैं पहोंचावांगे।।
11.9.2016

वार्ता
भगत सिंह जेल से अपने पिताजी के नाम एक पत्र लिखकर सरकार को उनके द्वारा भेजी अपील का सख्त विरोध करते हैं । क्या बताया इस रागनी में :-
रागनी 11
अर्जी पिता किशनसिंह नै ट्रिब्यूनल ताहीं दी बताई थी।।
दलील दे बचाव खातर  कोर्ट जाणे की प्लान बनाई थी ।।
1
भगत सिंह और उसके साथी इसतैं सहमत नहीं बताये
अंग्रेजां की बदले की नीति बोले पिता समझ नहीं पाये
जिंदगी की भीख नहीं मांगां सन्देश बाबू धोरै भिजाई थी।।
दलील दे बचाव खातर-------
2
हम तो हैरान पिताजी क्यों आपनै आवेदन भेज दिया
बिना मेरे तैं सलाह करें इसा गल्त क्यों काम किया
राजनितिक विचारों की दूरी कई बारियां समझाई थी।।
दलील दे बचाव खातर-------
3
थारी हाँ ना के ख्याल बिना मैं अपना काम करता आया सूँ
मुकद्दमा नहीं लड़ूंगा इसपै मैं धुर तैं खड़या पाया सूँ
अपने सिद्धान्त कुर्बान करकै नहीं बचना कसम खाई थी।।
दलील दे बचाव खातर---------
4
आप पिता मेरे ज्यां करकै मनै सख्त बात नहीं लिखी सै
थारी या बड़ी कमजोरी बात साफ़ मनै कहनी सिखी सै
रणबीर इस्सी उम्मीद कदे मनै आपतैं नहीं लगाई थी।।
दलील दे बचाव खातर---------
16.9.16

वार्ता
इतिहास गवाह है कि जब जब जनता में जागरूकता आई उसने उस दौर के अपने शासकों को झुकाया है।क्या बताया भला-
रागनी 12
जब जब जनता जागी  यो जुल्मी शोषक झुका दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
1
आजाद देश का सपना पहुंचा शहर और गांव मैं
भगत सिंह फांसी टूटा जोश था  देश तमाम मैं
दुर्गा भाभी गेल्याँ  जुटगी इस आजादी के काम मैं
लाखाँ नर और नारी देगे या कुर्बानी गुमनाम मैं
कुर्बानी बिना नहीं आजादी गांधी अलख जगा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
2
गोरे गये आगे काले गरीबी जमा मिटी नहीं सै
बुराई बढती आवै सै भिद्द इसकी पिटी नहीं सै
अच्छाई संघर्ष करण लागरी आस जमा घटी नहीं सै
जनता एक दिन जीतेगी या उम्मीद छुटी नहीं सै
म्हारी एकता तोडण़ खातिर जात पात घणा फैला दिया।।
भारत तैं जुल्मी गौरा मिलकै सबनै भगा दिया।।
3
जात पात हरियाणा की सै सबतैं बड्डी बैरी भाइयो
विकास पूरा होवण दे ना दुनिया याहे कैहरी भाइयो
वैज्ञानिक सोच काट सै इसकी जड़ घणी गहरी भाइयो
अमीराँ की जात अमीरी म्हारै गरीबी फैहरी भाइयो
समता वादी समाज होगा संघर्ष का डंका बजा दिया ।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।
4
दारू माफिया मुनाफा खोर इनकी पक्की यारी देखो
भ्रष्ट पलसिया औछा नेता करता चौड़े गद्दारी देखो
बिचोलिया घणे पैदा होगे म्हारी अक्ल मारी देखो
लंबे जन संघर्ष की हमनै कर ली तैयारी देखो
रणबीर भगत सिंह ने रास्ता सही दिखा दिया।।
भारत तैं जुल्मी गोरा मिलकै सबनै भगा दिया ।।


वार्ता
23 मार्च को जब शहादत का दिन आता है तो लेखक के मन में बहुत से विचार इन शहीदों के बारे में आते हैं। क्या बताया भला-
रागनी 13
देख हालत आज देश की थारी याद घणी आवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
1
सबको शिक्षा काम सबको का नारा थामने लाया था
इंकलाब जिंदाबाद देश में जोर लगा गुंजाया था
शोषण रहित समाज थारी डायरी लिखा पावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
2
अंग्रेजों के खिलाफ थाम नै जीवन दा पै लगा दिया

आजादी का संदेश यो घर घर के में पहुंचा दिया
तीनों साथी फांसी चढ़गे  देश शहादत मना वै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
3
सरफरोशी की तमन्ना बोले इब म्हारे दिल मैं सै
देखना सै जोर कितना बाजू ए कातिल थारे मैं सै
एक नौजवान तबका थाम नै उतना ए चाहवै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।
4
धर्म के नाम पर समाज बांटें आज देश भगत बनरे
हिंदू मुस्लिम के नाम पै बना कै पाले बन्दी तनरे
रणबीर थारी कुर्बानी हम सब मैं जोश लयावै सै।।
आज तो देशद्रोह करनिया देश भगत कुहावै सै।।

वार्ता
शहादत का दिन मनाया जाता है। कई गायक आते हैं । भगत सिंह सुखदेव राजगुरु की शहादत को याद करते हुए एक गायक यह रागनी गाता है--
रागनी 14
जनता की जनवादी क्रांति हम बदल जरूर ल्यावाँगे रै ॥ 
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
1
जनतन्त्र का मुखौटा पहर कै राज करै सरमायेदारी या
जल जंगल जमीन धरोहर बाजार के मैं बेचै म्हारी या
हम लोगां का लोगां की खातर लोगां का राज चलावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
2
कौन लूटै जनता नै इब सहज सहज पहचान रहे
आज घोटाले पर घोटाले कर ये कारपोरेट बेईमान रहे
एक दिन मिलकै इन सबनै हम जेल मैं पहोंचावांगे रै  ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
3
जनता जाओ चाहे भाड़ मैं बिदेशी पूंजी तैं हाथ  मिलाया
दरवाजे खोल दिए उन ताहिं गरीबाँ का सै भूत बनाया
जमा बी हिम्मत नहीं हारां मिलकै नै सबक सिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
4
बढ़ा जनता मैं  बेरोजगारी ये नौजवान भटकाये देखो 
जात पात गोत नात मैं बांटे आपस मैं भिड़वाये देखो
किसान मजदूर के दम पै करकै संघर्ष दिखावांगे रै ॥
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव का यो देश बणावांगे रै ॥
वार्ता
23 साल की उम्र का जिक्र करते हुए लेखक इस प्रकार से अपने विचार व्यक्त करता है-
रागनी 15
भगत सिंह तेईस साल का यो नौजवान हुया क्रांतिकारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
1
नौजवान सभा बनाकै सारे क्रन्तिकारी एक मंच पै आये
गोरयां की गुलामी खिलाफ पूरे देश मैं अलख जगाये
आजाद राजगुरु सुखदेव पड़े थे गोरयां पै भारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
2
गोरयां नै आतंकवादी ये सारे क्रांतिकारी बताये दखे
म्हारी आजाद सरकारां नै नहीं ये इल्जाम हटाये दखे
देखी म्हारी सरकारां की आज पूरे देश नै गद्दारी।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
3
फांसी का हुक्म सुनाया सारे देश नै विरोध करया था
यो विरोध देख कसूता अंग्रेज बहोत घणा डरया था
एक दिन पहलम फांसी तोड़े जनता नै भरी हूंकारी ।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
4
इंसानी समाज का सपना भगत सिंह हर नै लिया यो
गोरे गए ये देशी आगे सपन्यां पै ध्यान नहीं दिया यो
कहै रणबीर बरोने आला म्हारै थारी याद घणी आरी ।।
इंकलाब जिंदाबाद नारा लाया कांपी गोरी सरकार सारी।।
वार्ता
शहीदों के सपनों को आजादी के बाद धीरे धीरे भुला दिया गया। दो भारत बना दिये जाते हैं। क्या बताया भला--

रागनी 16
साइनिंग और सफरिंग देखो दो भारत बणा राखे रै।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।
1
सफरिंग का कितै जिकरा ना साइनिंग खूब चढ़ाया रै
सफरिंग नै लूट लूट कै देखो यो साइनिंग गया बनाया रै
भगत सिंह थारे सारे सपने मिट्टी मैं मिला राखे रै।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।
2
समाजवाद का सपना थारा ना देता कितै दिखाई रै
सबको शिक्षा काम सबको होती ना कितै सुनाई रै
महिला कितै सुरक्षित ना कसूते साँस चढ़ा राखे रै।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।
3
दलितों नै हक मांगे तो इन पर अत्याचार बढ़गे रै
तत्ववादी हिन्दू मुस्लिम म्हारी छाती पै चढ़गे रै
धामिर्कता की जगां धर्मान्धता के पाठ पढ़ा राखे रै।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।
4
महंगाई बेकारी असुरक्षा नै कड़ तोड़ कै धरदी रै
किसान फांसी खा खा मरते बुरी हालत करदी रै
कहै रणबीर घोटाळ्यां नै आज ऊधम मचा राखे रै ।।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थारे सपने भुला राखे रै।।

किस्सा शहीद भगत सिंह 1से 7 रागनी

 किस्सा शहीद भगत सिंह

शहीद भगत सिंह
शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को जिला लायलपुर (अब फैसलाबाद ) पाकिस्तान के बंगा नामक गांव में हुआ। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम श्रीमती विद्यावती था। उनके पुश्तैनी गांव का नाम खटकड़ कलां (जिला नवांशहर/ शहीद भगत सिंह नगर )है। भगत सिंह के पुर्वजों में शुरू से ही देश भक्ति और जनपक्षीय भावनाएं  बहुत मजबूत थी । उनके पड़दादाओं  में एक सरदार फतेह सिंह को ब्रिटिश सरकार ने उनकी एंगलो सिख युद्ध (1748-49) में सक्रिय भागीदारी के कारण उनकी जायदाद का आधा हिस्सा जब्त कर लिया  था । ब्रिटिश सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण वे उनके पक्के दुश्मन बन गए । स्वतंत्रता संग्राम के पहले संग्राम 1857 में अंग्रेजों ने पंजाब के सिख सामन्तों  को अधिक जमीन देने का लालच देकर क्रांतिकारियों का विरोध करने के लिए प्रेरित किया। सरदार फतेह सिंह को एक नजदीकी सामन्त ने ब्रिटिश हुक्मरान  का इस प्रकार का एक संदेश देकर अपने पुत्र को उनके पास भेजा । सरदार फतेह सिंह ने उससे कहा कि "उनके पूर्वज हमेशा गुरु गोविंद सिंह के दिखाए रास्ते पर चले हैं । क्रांतिकारियों का विरोध आंतों का क्या का क्या करने के बराबर है , जो मैं कभी नहीं करूंगा ।"यही सिद्धांत उनके पौत्रों को बताया गया जिन्होंने इसका पालन किया ।
             भगत सिंह के दादा सरदार अर्जुनसिंह एक समाज सुधारक थे और सामंती दमन  के विरुद्ध गरीबों के सच्चे रक्षक थे ।उनके तीनों बेटे किशन सिंह, अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह प्रतिबद्ध स्वतंत्रता सेनानी बने । लाला लाजपत राय के साथ सरदार अजीत सिंह को किसान विरोधी कानून के खिलाफ 1907 में एक शक्तिशाली जनमोर्चे की अगुआई करने के जुर्म में देश निकाला दिया गया था। अंग्रेजों को इस कानून को वापस लेना पड़ा । सरदार अजीत सिंह की देश की आजादी के लिए संघर्ष में सेवाओं की प्रशंसा करते हुए बाल गंगाधर तिलक ने सूरत में अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन के दौरान उन्हें ताज पहनाकर सम्मानित किया था। अजीत सिंह ने 40 वर्ष तक विदेश में रहते हुए स्वतंत्रता संघर्ष जारी रखा। भगत सिंह के दूसरे चाचा सरदार स्वर्ण सिंह को देश भक्ति पूर्ण पुस्तिकाएं  प्रकाशित करने के लिए 1910 में जेल में यंत्रणाएं दी गई जिसके कारण उनका मात्र 23 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।    भगत सिंह अपने दादा की देखरेख में पले बढ़े और उन्होंने उनसे सामाजिक बराबरी , तर्कसंगत होना और दमन का विरोध करना सीखा । परिवार में सभी धर्मों के लिए समान देने और हर मनुष्य को प्यार देने की परंपरा थी ।
भगत सिंह ने अपने जन्मस्थल 105 जीबी (बंगा) नामक गांव से प्राथमिक शिक्षा हासिल की और लाहौर के डीएवी हाई स्कूल  में दाखिला लिया । अंग्रेजों ने अब तक का सबसे दमनकारी कानून रोलेट एक्ट पास किया जिसका पूरे देश में व्यापक विरोध हुआ । 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा पर गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों जख्मी हो गए । इस घटना की विश्व भर में निंदा हुई । नन्हा भगत सिंह अमृतसर पहुंचा और खून से सनी मिट्टी ईकट्ठी करके ले आया , वह बहुत गंभीर हो गया।
   1921 जन जागरण का वर्ष था जब महात्मा गांधी ने पूरे राष्ट्र को अंग्रेज  सरकार का बायकाट करने का आह्वान किया था । भगत सिंह इस आंदोलन में शामिल हो गए और उन्होंने इसमें सक्रिय भागीदारी की । गांधी जी के आह्वान पर उन्होंने स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी । फिर उन्होंने नेशनल कॉलेज लाहौर में दाखिला लिया जो ऐसे छात्र सत्याग्रहियों के लिए बनाया गया था । यहां उन्हें एक क्रांतिकारी भाई परमानंद जी ने शिक्षा दी। भाई परमानंद जी ने 1915 में गदर पार्टी द्वारा चलाए गए आंदोलन में हिस्सेदारी की थी जिसके कारण उन्हें अंडमान भेजा गया था । 19 वर्षीय नौजवान करतार सिंह सराभा ने गदर पार्टी का नेतृत्व किया था , वे स्वदेश लौटे, उनका लक्ष्य था -अंग्रेज सरकार को उखाड़कर समानता,भ्रातृत्व  और स्वतंत्रता का शासन कायम  करना। सराभा को  अंग्रेजों ने फांसी दे दी । सराभा ने भगत सिंह पर बहुत अधिक प्रभाव छोड़ा। नेशनल कालेज ने स्वतंत्रता संग्राम के बारे में भगत सिंह के दृष्टिकोण को और अधिक व्यापक बनाया । यहां उनकी मुलाकात संग्राम  के दीवाने नौजवानों जैसे भगवती चरण वोहरा, सुखदेव, यशपाल इत्यादि से हुई । दादी मां द्वारा दिए शादी के प्रस्ताव से बचने के लिए 1923 में भगत सिंह घर से कानपुर निकल लिए थे । कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी की देखरेख में उन्होंने पत्रकारिता और स्वतंत्रता सेनानी बनने की ट्रेनिंग ली । इसमें उन्हें जमीनी वास्तविकता से रूबरू होने और विश्व भर के स्वतंत्रता आंदोलनों का अध्ययन  करने का शुभ अवसर मिला । यहां वह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक क्रांतिकारी ग्रुप के संपर्क में आए । इस ग्रुप के नेता थे राम प्रसाद बिस्मिल , अशफाक उल्ला खाँ, जोगेश चंद्र चटर्जी । यहां उन्हें बटुकेश्वर दत्त , विजय कुमार सिन्हा,  शिव वर्मा , जयदेव कपूर व अन्य कई नौजवान क्रांतिकारी मित्र मिले।    
         लाहौर वापस आने पर भगत सिंह ने सिंह ने नौजवान भारत सभा की स्थापना के लिए पहल की ताकि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नौजवानों की ताकत को संगठित किया जा सके। नौजवान भारत सभा ने घोषित किया कि नौजवानों को स्वतंत्रता संग्राम में नेतृत्व कारी भूमिका निभानी चाहिए और उन्हें अपने जीवन में धर्म निरपेक्षता , समाजवाद और स्वतंत्र ढंग से सोच विचार करने की प्रक्रिया को उतारना चाहिए । उन्हें 'सेवा करने, तकलीफ सहने और बलिदान देने ' के आदर्श को मानना चाहिए । इस अवधि में काकोरी ट्रेन केस (0 9 अगस्त 1925) में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के वरिष्ठ नेताओं जैसे राम प्रसाद बिस्मिल ,अशफाक उल्ला खाँ, राजेंद्र लाहिड़ी एवं ठाकुर रोशन सिंह को गिरफ्तार कर दिसंबर 1927 में फांसी दी गई । इसके बाद भगत सिंह व चंद्रशेखर आजाद के कंधों पर क्रांतिकारी पार्टी के पुनर्निर्माण का दायित्व आ गया ।
        भगत सिंह के अपने शब्दों में ,"मेरे मन मस्तिक के कोने -कोने  में अध्ययन करने की तीव्र इच्छा अंगड़ाइयां ले रही थी । विपक्ष द्वारा पूछे गए सवालों का सामना करने के लिए अपने आप को अध्ययन के जरिए सक्षम करो । अपने दर्शन के पक्ष में तर्क देने के लिए अपने आप को अध्ययन से तैयार करो । मैंने अध्ययन करना शुरू किया । मेरे पहले विश्वासों और निष्ठाओं में जबरदस्त बदलाव आए । हमारे पूर्वजों में केवल हिंसात्मक तरीकों के बारे में जो एक रोमांटिक धारा थी , उसकी जगह गंभीर विचारों ने ले ली । अब कोई रहस्यवाद नहीं और नहीं कोई अंधविश्वास। यथार्थवाद हमारा दर्शन बन गया ।" उन्होंने आगे नोट किया कि , " हमें उस आदर्श का बहुत आदर्श का बहुत स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए जिसके लिए हमें संघर्ष करना है ।"
       1927 में भगत सिंह को पहली बार केवल शक के आधार पर पुलिस द्वारा लाहौर में गिरफ्तार किया गया और बाद में ₹60000 की भारी-भरकम जमानत पर छोड़ा गया ।  इससे उन्हें घर पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा । घर में उन्हें व्यस्त रखने के लिए एक डेयरी फार्म खोला गया । उनके पिता ने खेत मजदूरों के वेतन  से संबंधित हिसाब किताब रखने के लिए एक रजिस्टर भी दे दिया ।उन दिनों  भगत सिंह ने टालस्टाय की पुनरूत्थान नामक  पुस्तक पढ़ी । भगत सिंह ने पाया कि सभी खेतिहर मजदूर कर्ज में हैं । उसने पूछताछ की और पाया कि उनके दुखों का कारण उन्हें मिल रहा कम वेतन है । भगत सिंह ने अपने खेत मजदूरों का सारा कर्ज माफ कर दिया। उन्होंने अपने पिता से कहा -क्योंकि हम इन मजदूरों के श्रम से लाभ कमाते हैं, इन्हें हो रही हानि भी हमारी चिंता का विषय होना चाहिए , इसलिए इन का कर्ज माफ कर दिया है ।
भगत सिंह ने विश्व क्रांतिकारी आंदोलन और विजय स्वतंत्रता संघर्षों के बारे में बड़ी गहराई से अध्ययन किया। उनके अध्ययन में अप्टॉन सिंक्लेयर , जैक लंडन , एम्मा गोल्डमैन , बर्नार्ड शॉ , चालर्स डिकनज, एंगेल्स, प्रिन्स क्रांपटन, बाकुनिन, मार्क्स और ऐसे कई और लेखक शामिल थे ।

वार्ता
शहीद भगत सिंह की याद में
रागनी 1
हट कै क्यूकर बुलाऊँ मैं , पुनर्जन्म नहीं गया बताया ।।
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
1
तेईस साल का था जिब तूं फांसी का फंदा चूम गया
इन्कलाब जिंदाबाद का नारा फिरंगी का सिर घूम गया
पगड़ी सम्भाल जट्टा का गाना इनपै भारतवासी झूम गया
बम्ब गेरया असम्बली के मैं तूं मचा देश मैं धूम गया
समतावादी समाज बानावां इसका विचार यो बढाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
2
मार्क्सवाद तैं ले कै प्रेरणा शोषण ख़त्म करना चाहया था
सबके हक़ बराबर होंगे इंकलाबी नारा यो लाया था
यानी सी उमर भगत सिंह तेरी गाँधी को समझाया था
गोरे जा कै काले आज्यांगे  सवाल तनै यो ठाया था
क्रांतिकारी नौजवानों का संगठन तमनै मजबूत बनाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
3
ढाल ढाल के भारत वासी सबकी भलाई चाही तनै
यो सपना पूरा होज्या म्हारा नौजवान सभा बनाई तनै
अंध विश्वासी भारत मैं लड़ी विचारों की लडाई तनै
वर्ग संघर्ष सही रास्ता जिसपै थी  शीश चढ़ाई तनै 
तेरा रास्ता भूल गये ना सबकै आजादी का फल थ्याया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।
4
तेरे सपनों का भारत देश भगत सिंह हम बना वांगे
मशाल जो तनै जलाई वा घर घर मैं हम ले ज्यावांगे
थाम नै फांसी खाई थी हम ना पाछै कदम हटा वांगे
जात पात गोत नात पै ना झूठा झगडा हम ठा वांगे
रणबीर सिंह बरोने आले नै दिल तैं यो छंद बनाया ||
तेरे विचारों पै चले हजारों ज्यां आजादी का दिन आया ।।

वार्ता

भगत सिंह (जन्म: 28  सितम्बर 1907 , मृत्यु: 23 मार्च 1931) भारत के एक प्रमुख क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे। भगतसिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है। इन्होंने केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप इन्हें 23 मार्च 1931 को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी पर लटका दिया गया। सारे देश ने उनके बलिदान को बड़ी गम्भीरता से याद किया। पहले लाहौर में साण्डर्स-वध और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय असेम्बली में चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान की। भगत सिंह ने मार्क्सवादी विचारधारा का गहन मंथन किया और इसी को संघर्ष का आधार बनाया |
रागनी 2
सोने की चिड़िया भारत इसका भगत सिंह हाल देखले आकै  ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
1
मेहनत कश देशवासियों नै यो खून पसीना एक करया
खेत कारखाने खूब कमाए यो देश खजाना खूब भरया
टाटा अम्बानी लूट कै लेगे आज अपने प्लान बनवाकै ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
2
तीनों फांसी का फन्दा चुम्मे दुनिया मैं इतिहास बनाया
थारी क़ुरबानी नै भारत मैं  आजादी का अलख जगाया
दिखावा करैं थारे नाम का असल मैं धरे टांड पै बिठाकै ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
3
भ्रष्टाचार ठाठे मारै देखो दिल्ली के राज दरबारों मैं
कुछ भृष्ट नेता भ्रष्ट अफसर मौज करैं सरकारों मैं
बाट आजादी के फ़लां की आज  हम देखां सां मुंह बाकै ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥
4
प्रेरणा लेकै थारे तैं हम आज कसम उठावां सारे रै
ज्यान की बाजी लाकै नै सपने पूरे करां थारे रै
लिखै रणबीर साची सारी आज एक एक बात जमाके ॥
जिसा चाहया थामनै कोन्या हमनै देख्या हिसाब लगाकै ॥



वार्ता

भगत सिंह राज गुरु सुखदेव के सपने अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इसके कारणों में जाना और विचार करना जरूरी है। क्या बताया भला--
रागनी 3
सपने चकनाचूर करे थारे देश की सरकारां नै।
जल जंगल जमीन कब्जाए देश के सहूकारां नै ।
1
शिक्षा हमें मिलै गुणकारी , भगत सिंह सपना थारा
मरै ना बिन इलाज बीमारी, भगत सिंह सपना थारा
भ्रष्टाचार कै मारांगे बुहारी, भगत सिंह सपना थारा
महिला आवै बरोबर म्हारी, भगत सिंह सपना थारा
बम्ब गेर आवाज सुनाई, बहरे गोरे दरबारां नै।
2
समाजवाद ल्यावां भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
कोए दुःख ना ठावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
दलित जागां पावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
अच्छाई सारै छावै भारत मैं, भगत सिंह थारा सपना
जनता चैन का सांस लेवै बिन ताले राखै घरबारां नै।
3
थारी क़ुरबानी के कारण ये आजादी के दिन आये
उबड़ खाबड़ खेत संवारे देश पूरे मैं खेत लहलाये
रात दिन अन्न उपजाया देश अपने पैरों पै ल्याये
चुनकै भेजे जो दिल्ली मैं उणनै हम खूब बहकाये
आये ना गोरयां कै काबू कर लिए अपने रिश्तेदारां नै।
4
समाजवाद की जगां अम्बानीवाद छाता आवै देखो
थारे सपने भुला कै धर्म पै हमनै लड़वावै देखो
मुजफ्फरनगर हटकै भगत सिंह थामनै बुलावै देखो
दोनों देशों मैं कट्टरवाद आज यो बढ़ता जावै देखो
रणबीर खोल कै दिखावै साच आज के नम्बरदारां नै।



वार्ता
भारत देश बहुत सालों तक गुलाम रहा। देश भक्तों ने संघर्ष किया तो 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। सबसे बड़ा गणतन्त्र है। क्या बताया भला--
रागनी 4
यो गणतंत्र सबतै बड्डा भारत आवै कुहाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
दो सौ साल गोरया नै भारत गुलाम राख्या म्हारा था
गूंठे कटाये कारीगरां के मलमत दाब्या म्हारा था
सब रंगा का समोवश था फल मीठा चाख्या म्हारा था
भांत-भांत की खेती म्हारी नहीं ढंग फाब्या म्हारा था
फूट गेर कै राज जमाया कही जाती बात समाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
2
वीर सिपाही म्हारे देस के ज्यान की बाजी लाई फेर
लक्ष्मी सहगल आगै आई महिला विंग बनाई फेर
दुर्गा भाभी अंगरेजां तै जमकै आड़ै टकराई फेर
याणी छोरियां नै गोरयां पै थी पिस्तौल चलाई फेर
गोरे लागे राजे रजवाड़यां नै अपणे साथ मिलाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
3
आवाज ठाई जिननै उनके फांसी के फंदे डार दिये
घणे नर और नारी देस के काले पाणी तार दिये
मेजर जयपाल नै लाखां बागी फौजी त्यार किये
फौज आवै बगावत पै म्हारे बड्डे नेता इन्कार किये
नेवी रिवोल्ट हुया बम्बी मैं अंग्रेज लगे दबाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।
4
आजादी का सपना था सबकी पढ़ाई और लिखाई का
आजादी का सपना था सबका प्रबन्ध हो दवाई का
आजादी का सपना था खात्मा होज्या सारी बुराई का
आजादी का सपना था आज्या बख्त फेर सचाई का
हिसाब लगावां आजादी का रणबीर सिंह के गाणे मैं।।
भगत सिंह शहीद हुये इसके आजाद कराणे मैं।।

वार्ता
पन्दरा अगस्त आजादी का दिन --एक लेखा जोखा उन कुर्बानियों का जिनके दम पर देश आजाद हुआ---
रागनी 5
कितने गये काला पानी कितने शहीद फांसी टूटे रै।।
पाड़  बगा दिए  गोरयां के गढ़रे थे जो देश मैं खूंटे रै ।।
1
पहली आजादी की जंग थारा सो सतावन  मैं लड़ी थी
बंगाल आर्मी करी बगावत जनता भी साथ भिड़ी थी
ठारा  सौ सतावन के मैं जन क्रांति के बम्ब फूटे रै ।।
2
भगत सिंह सुख देव राजगुरु फांसी का फंदा चूमे
उधम सिंह भेष बदल कै लन्दन की गालाँ  मैं घूमे
चंदर शेखर आजाद साहमी गोरयां के छक्के छूटे रै।।
3
सुभाष चन्द्र बोश नै आजाद हिंद फ़ौज बनाई थी
महिला विंग खडी करी लक्ष्मी सहगल संग आई थी
धुर तैं आजादी खातिर ये किसान मजदूर भी जुटे रै ।।
4
गाँधी की गेल्याँ जनता जुड़गी हर तरियां साथ दिया 
चाल खेलगे गोरे फेर बी देश मैं बन्दर बाँट किया
बन्दे मातरम अलाह हूँ अकबर ये हून्कारे उठे रै ।।
5
सोच घूमै इब्बी जिसने देख्या खूनी खेल बंटवारे का
लाखां घर बर्बाद हुए यो क़त्ल महमूद मुख्त्यारे का
दो तिहाई नै आज बी रोटी टुकड़े पानी संग घूंटे रै ।।
6
छियासठ साल मैं करी तरक्की नीचे तक गई नहीं
ऊपरै ऊपर गुल्पी आजादी नीचै जावन दई नहीं
रणबीर सिंह टोह कै ल्यावै खुये मक्की के भूट्टे  रै ।।


वार्ता

भगत सिंह हर के सपनों के बारे में क्या बताया भला-
रागनी 6
जिन सपन्यां खातर फांसी टूटे हम मिलकै पूरा करांगे ।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
1
सबको मिलै शिक्षा पूरी यही तो थारा विचार बताया
समाज मैं इंसान बराबर तमनै यो प्रचार बढ़ाया
एक दूजे नै कोए ना लूटै थामनै समाज इसा चाहया
मेहनत की लूट नहीं होवै सारे देश मैं अलख जगाया
आजादी पाछै कसर रैहगी हम ये सारे गड्ढे भरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
2
फुट गेरो राज करो का गोरयां नै खेल रचाया था
छूआ छूत पुराणी समाज मैं लिख पर्चा समझाया था
समाजवाद का पूरा सार सारे नौजवानों को बताया था
शोषण रहित समाज होज्या इसा नक्शा चाहया था
थारे विचार आगै लेज्यावांगे हम नहीं किसे तैं डरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
3
नौजवानो को भगत सिंह याद आवै सै थारी क़ुरबानी
देश की खातर फांसी टूटे गोरयां की एक नहीं मानी
देश की आजादी खातर तकलीफ ठाई थी बेउन्मानी
गोरयां के हाथ पैर फूलगे जबर जुल्म करण की ठानी
क्रांतिकारी कसम खावैं देश की खातर डूबाँ तिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।
4
बहरे गोरयां ताहिं हमनै बहुत ऊंची आवाज लगाई
जनता की ना होवै थी सुनायी ज्यां बम्ब की राह अपनाई
नकाब फाड़ना जरूरी था गोरे खेलें थे  घणी चतुराई
गोरयां की फ़ौज म्हारी माहरे उप्पर करै नकेल कसाई
रणबीर कसम खावां सां चाप्लूसां तैं नहीं घिरांगे।।
उंच नीच नहीं टोही पावै इसे समाज की नींव धरांगे।।

वार्ता
भगत सिंह के रास्ते को अपनाना  होगा। क्या बताया भला-
रागनी 7
एक दिन जनता जागैगी, भ्रष्ट राजनीति भागैगी, घोटाल्याँ पाबंदी लागैगी, इन सबकी सै आस मनै।।
1
असल मैं तो नौकरी आज बहोत घणी बची कोण्या
बिना सिफारिश पीसे मिलज्या या बात जँची कोण्या
यो हिसाब जनता माँगैगी,या कसूरवारां नै टाँगैगी,
ठेकेदारां नै पूरा छांगैगी, इसका सै अहसास मनै।।
2
जो भी परिवर्तन आया वा या जनता ल्याई देखो
शोषण का रूप बदल्या जब जनता ली अंगड़ाई देखो
लगाम अमीरों कै लागैगी,हथकड़ी उनकै फाबैगी,
जनता उस दिन नाचैगी,उलगी आवैगी सांस मनै।।
3
जनता की जनवादी क्रांति सुधार आवै पूरे समाज मैं
कोये भूखा नहीं सोवै अमन शांति छावै पूरे समाज मैं
छुआछूत ना टोही पावैगी ,भ्रष्टाचार ना भाजी थ्यावैगी, भूख ना फेर सतावैगी , बनता दीखै इतिहास मनै।।
4
यो हासिल करने खातर  भगत सिंह बनना होगा
जनतंत्र असली खातर संघर्ष मैं उतरना होगा
अर्थ नीति बदली जावैगी,फेर सांस मैं सांस आवैगी,दुनिया मैं शांति छावैगी, रणबीर देवै विश्वास मनै।।