Tuesday, 15 September 2026

के बुझेगी भान

के बुझेगी बाण मेरी मैं के के बात बताऊं।
मेरी उड़ जो होव दुर्गति जाकै कड़ सुनाऊं..2
 1.बैठ कार मैं गई सासरै मन मैं उमंग सी जागी&...
 घणी लुगाई कटी हुई जणु झड़ सामण की लागी... 
घूंघट ऊपर ठाकै न कह बहु तै सूत्री आगी।
 नक्शक आछा कोन्या सै या बात बीच में आगी।
 नंनद के नखरे देख -देख कै बहुत घणी घबराऊ।
 मेरी उड़े जो होव दुर्गति जाकर कड़ सुनाऊं।
 के बुझे बाण मेरी मैं.......2

सारयां नै फिर बैठ कै न दूसर की बात चलाई हे।
 अगलिया पाछलियां की तिल्यां की चर्चा दही सुनाएं हे। 
कंबल माड़े हलके सै सासु न नाक चढ़ाई हे ।
मांगी टूम चढ़ा राखी पड़ोसन न बात बणाई हे।
 इसी -इसी सुणकै मेरी बहना बैठी एक ओड़ जाऊं।
मेरी उड़ जो हो अ दुर्गति जाकै कड़ सुनाऊं।
के बुझेगी बाण मेरी..2

घर वासे का धंधा सारा मेरे जिम्मे लाया हे।
 घर कुणबे की चाकर बणगी यो
 गज घूंघट करवाया हे।
 धंधे के मै हुई बावली ना टुक टैम पै थैय्या हे।
 के मेरे नाम के लाड प्यार का हो ग्या कती सफाया हे।
 इतना धंधा करकै भी सासु के ताने खाऊं मेरी उड़ जो होव दुर्गति जाकै कड़ सुनाऊं।
के बुझेगी बाण मेरी..….2
गलतक कड़वे घूंट पी लिए कती भरण न होरी ।
होई दुखी इस जीवासे  का अंतकरण नै होरी। 
रणवीर सिंह नियू बता मन्नै में कैसे जान बचा हूं ।
 मेरी उड़ जो होव दुर्गति जाकै कड़  सुनाऊं।