Monday, 7 June 2021

पीजीएएम के हालात

 कुछ समय पहले की हालत बयान की है। हो सकता है 

अब कुछ नर्स , डॉक्टर और मशीन आ गए हों। हालात 

खराब ही चल रहे हैं सरकार की नीतियों के चलते । 

क्या बताया भला---

पीजीआई एमएस की सुनियो कथा सुनाऊँ देखो।।

लाम्बी तै लाम्बी लाइन उड़ै ओपीडी मैं दिखाऊँ देखो।।

1

सर्जरी विभाग की हालत सुनकै झटके खाये रै

सीनियर रेजिडेंट बीस चाहियें पर पांच  बताये रै

ये तीन काम करते बीस का नहीं झूठ भकाऊँ देखो।।

लाम्बी तै लाम्बी लाइन उड़ै -------------

2

सात सौ स्टाफ नर्स आज मैडीकल मैं करती काम

नर्स काम नहीं करती मरीज रोज लगावैं इल्जाम

तीन हजार नर्स चाहियें राज की बात बताऊँ देखो।।

लाम्बी तै लाम्बी लाइन उड़ै----

3

बेहोशी विभाग मैं यो टोटा मशीनों का चलता आवै

कम होगी टेबल सर्जन की मरीज लाम्बी डेट पावै

ऑर्डर कर राखे सैं नयूं सालां तैं सुणता आऊं देखो।।

लाम्बी तै लाम्बी लाइन----

4

एक दिन मैं डॉक्टर आड़े डेढ़ सौ मरीज झेलता रै

दूजे देश का डॉक्टर उड़ै पन्दरा मरीज देखता रै

डॉक्टर मरीज भिड़ें आड़े कितनी भिड़ंत गिनाऊँ मैं।।

लाम्बी तै लाम्बी लाइन --------

5

मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना बेरा ना कित पड़ी सै

इसके लागू करने मैं चीज कुणसी या आण अड़ी सै

डिमांड सप्लाई का गैप यो किसकै जिम्मे लगाऊँ देखो।।

लाम्बी तैं लाम्बी लाइन---------

6

राष्ट्रीय बीमा योजना क्यों बन्द करदी पीजीआई मैं

पेशेंट वेलफेयर कमेटी क्यों ढीली होरी कार्यवाही मैं

गरीब का ना और ठिकाना दिल की बात सुनाऊँ देखो।।

लाम्बी तैं लाम्बी लाइन ---------

Sunday, 6 June 2021

घर के अंदर और बाहर

 घर के अंदर और बाहर


घर भीतर इज्जत दा पर बाहर बुरी नजर छाई।।
महिला भोग की वस्तु पूरे ज़माने नै आज बनाई।।
1
किसा बख्त आग्या आज हम कितै महफूज नहीं
हवस छागी या बड़े भाग पै मानवता की बूझ नहीं
हम हार नहीं मानांगी लडांगी धुर ताहिं लड़ाई।।
महिला भोग की वस्तु पूरे ज़माने नै आज बनाई।।
2
राम बी ना म्हारा हिम्माती हजारों चीर हरण होवैं
एक द्रोपदी महाभारत होगी आज शाषक ताण कै सोवैं
भतेरी बाट देखी राम तेरी खुद अपनी बांह संगवाई।।
महिला भोग की वस्तु पूरे ज़माने नै आज बनाई।।
3
गैंग रेप बढे हरयाणा मैं समाज खड़्या लखावै
भाई चारे के नाम पै दबंग रेप की कीमत लगावै
सामंती या बाजारी सोच दुश्मन समझ मैं आई।।
महिला भोग की वस्तु पूरे ज़माने नै आज बनाई।।
4
समझौते के नाम पै दुखिया नै दो लाख दिवादे
करवाकै समझौता रेपीस्ट नै सजा तैं यो बचादे
कहै रणबीर हार ना मानैं हम चढ़ी जीत की राही।।
महिला भोग की वस्तु पूरे ज़माने नै आज बनाई।।

किसान उठ लिए

 किसान उठ लिए 

राजस्थान और महाराष्ट्र का किसान उठ लिया बताया।।
पंजाब हरियाणे के किसान कै थोड़ा सा समझ मैं आया।।
1
पैदल भूखे प्यासे किसान महाराष्ट्र की सड़कों पै आये
महिलाओं नै कांधे तैं कांधा मिलाकै आज कदम बढाये
किसान एकता के नारे लाये सड़कों पै झंडा लहराया।।
पंजाब हरियाणे के किसान कै थोड़ा सा समझ मैं आया।।
2
खाद बिजली और बीज की कई गुणा कीमत बधाई रै
कई गुणा महंगी करदी देखो म्हारी आज या पढ़ाई रै
किसान की इलाज दवाई रै लूट नै घनघोर मचाया।।
पंजाब हरियाणे के किसान कै थोड़ा सा समझ मैं आया।।
3
किसानों के बालक फिरते बेरोजगार एम् ए पास ये
झूठे वायदे रोज भकावैं करते नौजवानों का नास ये
किसान बाँटे जात्याँ मैं खास ये हरियाणा मैं कहर ढाया।।
पंजाब हरियाणे के किसान कै थोड़ा सा समझ मैं आया।।
4
किसान पूरा हिंदुस्तान का यो समझ रहया इन बातां नै
किसनी मांगों पै लडें लड़ाई भूलकै आपस की जात्याँ नै
खोलैगा अमीरों के खात्याँ नै रणबीर नै कलम उठाया।।
पंजाब हरियाणे के किसान कै थोड़ा सा समझ मैं आया।।

कट्ठे होल्यां

 कट्ठे होल्यां

बहोत दिन होगे पिटत्यां नै ईब कट्ठे होकै देख लियो।।
बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।
1
करड़ी मार नई नीतियां की या सबपै पड़ती आवै सै
देश नै खरीदण की खातर बदेशी कंपनी बोली लावै सै
या ठेकेदारी प्रथा सारे कै बाहर भीतर छान्ती जावै सै
बदेशी कंपनी पै कमीशन यो नेता अफसर खावै सै
मन्दिर का छोड़ कै पैण्डा भूख गरीबी पै रोकै देख लियो।।
बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।
2
जड़ै जनता की हुई एकता उड़ै की सत्ता घबराई सै
थोड़ा घणा जुगाड़ बिठाकै जनता बहकानी चाही सै
जड़ै अड़कै खड़ी होगी जनता लाठी गोली चलवाई सै
लैक्शनां पाछै कड़ तोड़ैंगे या सबकी समझ मैं आई सै
ये झूठे बरतन जितने पावैं ताम सबनै धोकै देख लियो।।
बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।
3
हालात जटिल हुये दुनिया मैं समझणी होगी बात सारी
ईब ना समझे तो होज्या नुकसान म्हारा बहोतैए भारी
पैनी नजर बिना दीखै दुश्मन हमनै घणा समाज सुधारी
हम सब की सोच पिछड़ी नजर ना नये रास्ते पै जारी
भीतरले मैं अपणे भी दिल दिमाग गोकै देख लियो।।
बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।
4
जात धरम इलाके पै हम न्यारे-न्यारे बांट दिये रै
कुछ की करी पिटाई कुछ लालच देकै छांट लिये रै
म्हारी एकता तोड़ बगादी ये पैर जड़ तै काट दिये रै
ये देशी बदेशी लुटेरे म्हारे हकां नै नाट लिये रै
रणबीर सिंह दुख अपणे के ये छन्द पिरोकै देख लियो।।
बैर भूल कै आपस का प्रेम के बीज बो कै देख लियो।।
Rajesh Nandal and 1 other
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तीन कानून बणाकै

तीन कानून बणाकै यो किसान धरती कै मारया हे॥
कारपोरेट सिर पै बिठाए उधम मचाया भारया हे॥
1.
बुलध और गाड्डी पड़े बेचने ट्रैक्टर की मार पड़ी हे
हम एकले कोण्या म्हारे जिसां की लार खड़ी हे
एमएसपी का जिकरा ना जी हुया घणा खारया हे॥
कारपोरेट सिर पै बिठाए उधम मचाया भारया हे॥
2.
लागत खेती की बढ़गी म्हारा ख़र्चा ख़ूब होवै हे
तीन बिल ये पास करे जिनका चर्चा ख़ूब होवै हे
म्हारी गेल्याँ कोये चर्चा ना देख्या ईसा नजारा हे॥
कारपोरेट सिर पै बिठाए उधम मचाया भारया हे॥
3.
भैंस बाँध ली दूध बेचां यो दिन रात एक करां
तीन हज़ार भैंस बीमारी के डॉक्टर जी कै गए घरां 
सिर पै कर्जा तीस हज़ार टूट्या पड़या यो ढारा हे॥
कारपोरेट सिर पै बिठाए उधम मचाया भारया हे॥
4.
बालक म्हारे धक्के खावैं इण ताहिं रोजगार नहीं 
छोरी भी बिन ब्याही रहगी बिन दहेज़ कोए तैयार नहीं 
छोरे हांडैं गालां मैं घरक्याँ का चढ़ज्या पारा हे॥
कारपोरेट सिर पै बिठाए उधम मचाया भारया हे॥
5.
पशू पालां करैं सिलाई दिन रात करैं हम काले 
खुभात फालतू बचत नहीं ये हुए कसूते चाले
किसान यूनियनां नै लाया इंकलाब का नारा हे॥
कारपोरेट सिर पै बिठाए उधम मचाया भारया हे॥
6.
किसान मज़दूर छोटे व्यापारी पै नज़र धरी बुरी हे
तीन बिलां के खिलाफ सांझा संघर्ष सही धुरी हे
रणबीर बरोनिया दिल तैं यो गीत बनाया थारा हे॥ 
कारपोरेट सिर पै बिठाए उधम मचाया भारया हे॥ 

उन्नीस सौ सात

उन्नीस सौ सात
*उन्नीस सौ सात आंदोलन बारे जब हम किताब ठावैं रै।।*
*यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।*
1
लाला जी और अजित सिंह इस आंदोलन के अगाड़ी थे
पगड़ी सम्भाल आंदोलन के वे घणे तगड़े खिलाड़ी थे
*पढ़कै पगड़ी सम्भाल जट्टा बांके दयाल कवि सुनावैं रै।।*
यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।
2
गीत नै अभिमान किसानों का उन बख्तों मैं ललकार दिया
इस कविता के भाव को किसानों नै कर अंगीकार लिया
*गोरे दबावण की खातर किसानों ऊपर घणे जुल्म ढावैं रै।।*
यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।
3
गोरी सरकार कृषि कानून उन्नीस सौ सात के मैं ल्याई थी
चुपके चुपके पास करया नहीं चर्चा किसे तैं चलाई थी
*नहर कालोनियां मैं रहवनियाँ के वे हक खोसे चाहवैं रै।।*
यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।
4
बे उल्लादे जमींदार के मरे पाछै जमीन खोसी चाही थी
जिला अफसर मालिक होगा या काली कानून बनाई थी
*लायलपुर मैं होकै कट्ठे ये हजारों किसान विरोध जतावैं रै।।*
यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।
5
अजित सिंह लाला जी नै किसानों साथ मिलकै विरोध जताए
अनदेखी करी गोरयां नै और घणे उनपै जुल्म थे ढाये
*दोनूं मांडले जेल भेज दिए गोरे आंदोलन दबाया चाहवैं रै।।*
यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।
6
पूरा पंजाब कट्ठा होकै नै विरोध जतावण के ऊपर भिड़ग्या
बढ़ता गया विरोध गोरयां का कानून खारिज करणा पड़ग्या
*ऐतिहासिक हुया वो आंदोलन जब हम हिसाब लगावैं रै ।।*
यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।
7
गदर लहर बब्बर अकाली इणनै ये विचार आगै बढ़ाये थे
भगत सिंह हर बरगे क्रांतिकारी आजादी जंग मैं छाये थे
*उन्नीस सौ सैंतालीस मैं गोरयां तैं आजादी भारतवासी पावैं रै।।*
यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।
8
रणबीर फेर दी गूंज सुनाई पगड़ी सम्भाल सरोकारों की
काले कानून ल्याई सरकार नहीं पूछ म्हारे विचारों की
*पगड़ी सम्भाल स्वाभिमान पै ये गायक गीत सुनावैं रै।।*
यो किसानों का इतिहासी बड्डा जंग कसूता बतावैं रै।।








पगड़ी संभाल ---280---

 पगड़ी सम्भाल 

*पगड़ी सम्भाल का दिन आज देश मैं मनाया जावै।।*
*अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।*
1
एंग्लो सिख युद्ध मैं भाग लिया परदादा फते सिंह नै
आधी जायदाद जब्त करी गोरयां नै म्हारे हिन्द मैं
*दादा अर्जुन सिंह उन बख्तों का समाज सुधारक कहावै।।*
अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।
2
किशन सिंह पिता चाचा अजीत लड़ी आजादी की लड़ाई
चाचा स्वर्ण सिंह साथ मैं इंकलाब जिंदाबाद गूंजाई
*अंग्रेज गोरा इनकै ऊपर सारे तरां के यो जुल्म ढ़ावै।।*
अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।
3
घर की महिलावां नै भी इनका धुर ताहिं साथ निभाया
दादी जयकौर मां विद्यावती कदम तैं था कदम मिलाया
*चाची हरनाम कौर हुक्म कौर भी सारै आगै खड़ी पावै।।*
अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।
4
अंग्रेजों के जुल्मों के खिलाफ लाया पगड़ी सम्भाल का नारा
बालक भगत सिंह नै आंख्या देख्या था यो सारा नजारा
*रणबीर यो किसान आंदोलन पगड़ी सम्भाल याद दिलावै।।*
अजीत सिंह किशन सिंह थारी याद बहोत घणी आवै।।

सम्पूर्ण क्रांति दिवस

 *5 जून सम्पूर्ण क्रांति दिवस* 

पांच जून नै काले कानून ऑर्डिनेंस पास करया रै।।
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
1
उन्नीस सौ चुहत्तर के मैं पांच जून नै बीड़ा ठाया
जयप्रकाश नारायण नै सम्पूर्ण क्रांति नारा लाया
जेपी नै इस तरियां शुरू नया इतिहास करया रै।।
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
2
सम्पूर्ण क्रांति दिवस देश के ये किसान मनावैंगे
तीन कानूनाँ की प्रति किसान मजदूर जलावैंगे
भाजपा नेता के दफ्तर पै यो प्रोग्राम खास धरया रै।।
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
3
जत्था दोआबा तैं चालकै सिंघु बार्डर पै पहोंच्या रै
बार्डरों पर डटे किसानां नै मिलकै यो दिन
सोच्या रै
खेती बचाओ कारपोरेट भगाओ फैंसला पास करया रै।।
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।
4
तीन कानून बिल बिजली रणबीर रद्द करवावैंगे
चारों लेबर कोड रद्द हों किसान मजदूर जोर लगावैंगे
इनकी गलत नीतियों नै फसल का घास करया रै।।
एक साल हो ज्यागा जब सरकार नै नाश करया रै।।

लाजमी जाणा हो

 जो आया दुनियां के म्हां उनै पड़ै लाजमी जाणा हो।

सुरग नरक किसनै देख्या बस होसै फरज पुगाणा हो।।
1
बीर मरद तै हो उत्पत्ति या जाणै दुनिया सारी सै
पांच भूत के योग तै या कहते बणी सृष्टि म्हारी सै
या तासीर खास योग की जीव मैं होवै न्यारी सै
मिजाज जिब बिगड़ै योग का जीव नै हो लाचारी सै
इसकी गड़बड़ मैं मौत कहैं हो बन्द सांस जब आणा हो।।
सुरग नरक किसनै देख्या बस होसै फरज पुगाणा हो।।
2
पहले जनम मैं जिसे करे कहैं इस जनम मैं निबटै
इस जनम मैं जिसे करे कहैं अगले के म्हां लिपटै
दोनों बात गलत लागै क्यों ना इसका इसमें सिमटै
साहमी हुए की चिन्ता ना क्यों बिना हुए कै चिपटै
इसे जनम का रोला सारा बाकी लागै झूठा ताणा हो।।
सुरग नरक किसनै देख्या बस होसै फरज पुगाणा हो।।
3
मनुष्य सामाजिक जीव कहैं बिन समाज डांगर होज्या
लेकै समाज पै चाहिये देणा बिन इसके बांदर होज्या
माली बिना बाग और खेती बिन पाणी बांगर होज्या
मरकै कोए ना आया उलटा जलकै पूरा कांगर होज्या
साइंस नै बेरा पाड़ लिया ईब छोड्डो ढंग पुराणा हो।।
सुरग नरक किसनै देख्या बस होसै फरज पुगाणा हो।।
4
आच्छे भूण्डे करमां करकै या दुनिया हमनै याद करै
या गुणी के गुण गावै आड़ै पापी कंस की यादे तिरै
यो शरीर जल बणै कारबन प्याराकर कर याद मरै
मेहर सिंह फौजी बरोने का रणबीर करता याद फिरै
करमां आला ना मरै कदे ना पाले राम का गाणा हो।।
सुरग नरक किसनै देख्या बस होसै फरज पुगाणा हो।।

साथी वीरेंदर शर्मा

 साथी वीरेंदर शर्मा


सन 1992 में साक्षरता आंदोलन के दौर में साथी ने कार में आग लगने पर अपनी जान जोखिम में डाल कर कर की सवारियों को तो बचा लिया मगर सड़क पर फैले पैट्रोल की आग में बुरी तरह झुलस गया और दो तीन दिन तक मौत से संघर्ष किया।

ज्यान की परवाह की ना कूदया पीड़ा देख परायी रै।।

जवानी खपादी वीरेंद्र नै समझ दूज्यां की भलाई रै।।

1

उसतै बढ़िया दीखै कोण्या भाई अकल इंसान की

म्हारे ताहिं राह दिखाई सै उसनै असल इंसान की

भुलाये तैं भी ना भूली जा भाई शक्ल इंसान की

म्हारे ताहिं तस्वीर बनाई उसनै अटल इंसान की

न्यों कहैया करै था साथी मिलकै लडांगे लड़ाई रै।।

2

लोगों के मोल उसनै रोज घटते बढ़ते देखे भाई

बदमाशों की चांदी आड़ै शरीफ लोग पिटते देखे

लोगों मैं बढ़ी बेरोजगारी सही राह तैं हटते देखे

शहीद भगत सिंह से वीर आजादी पै मिटते देखे

भगत सिंह की राही चल्या वीरेंद्र वीर सिपाही रै।।

3

ज्ञान विज्ञान समिति मैं थी साथी की कताई हुई

एक एक बात कै उप्पर थी समिति मैं सफाई हुई

समाज कैसे चलता म्हारा बैठकै पूरी धुनाई हुई

गया समझाया हमेशा गरीब की क्यूँ पिटाई हुई

शहीद वीरेंद्र समझ गया अनपढ़ता की खाई रै।।

4

साथी तेरे सपनों को हम मंजिल तक ले जायेंगे

सच कहना अगर बगावत हम गीत यही गायेंगे

आज नहीं तो कल साथी पूरी दुनिया पर छायेंगे

मानव का बैरी मानव हो ना ऐसा जमाना लायेंगे

रणबीर ईबे रंग अधूरा बनाई तसबीर जो भाई रै ।।

Tuesday, 2 March 2021

स्मार्ट सिटी

 स्मार्ट सिटी

सम्राट सिटी बण्या  तो कौन बसै कौन उजड़ज्यागा ॥

किसकी पांचों घी  मैं होंगी किसका खेल बिगड़ज्यागा  ॥

1

म्हारे गाम की धरती नै सरकार कब्जाना चाहवै सै 

बिकै तीस लाख मैं किल्ला किसान बाधु पाया चाहवै सै 

बिन किल्ले आले लोगों का यो पीतलिया लिकड़ज्यागा ॥

किसकी पांचों घी मैं होंगी किसका खेल बिगड़ज्यागा ॥

2

राजस्थान मैं जाकै खरीदैं चौधरी बीस किल्ले धरती के

बिना बिसवे आला भटकै  हाल बुरे होये सैं सरती के

किसा बुरा जमाना आया यो गरीब जमा पिछड़ज्यागा ॥

किसकी पांचों घी  मैं होंगी किसका खेल बिगड़ज्यागा॥

3

पुराने गाम मैं म्हारे पै थोड़ा ए घणा सै रोजगार देखो

हाल बढ़िया नहीं सैं मुश्किल मैं जीवै परिवार देखो

नए शहर मैं कून बड़न दे यो असल उड़ै उघड़ज्यागा ॥

किसकी पांचों घी  मैं होंगी किसका खेल बिगड़ज्यागा॥

4

खेत मजूरी बचै  नहीं नए शहर मैं काम मिलै ना भाई

घरबार रूल ज्यांगे म्हारे  यो चेहरा कदे खिलै ना भाई

रणबीर सिंह की कविताई यो घेरा घणा जकड़ ज्यागा ॥

किसकी पांचों घी  मैं होंगी किसका खेल बिगड़ज्यागा॥

Wednesday, 24 February 2021

रेल रोको

 *रेल रोको का अभियान पूरे हरियाणा मैं चलाया।।*

*कई टेशनां के ऊपर सबनै मिलकै  जाम लगाया।।*

1

रोहतक जिले मैं लोगों नै कई टेशनों पै नारे लगाए

रेल नहीं जावण दी रेल पटरी पै बैठकै साथ निभाये

*किसान एकता मोर्चा जिंदाबाद यो नारा खूब गूंजाया।।*

कई टेशनां के ऊपर सबनै मिलकै  जाम लगाया।।

2

कुरुक्षेत्र कैथल भिवानी मैं महिला पुरुष आगै आये

किसानों नै भी उनकी गेल्याँ कदम तैं कदम मिलाये

*तीन कानूनों के खोट एक एक खोलकै*

*समझाया।।*

कई टेशनां के ऊपर सबनै मिलकै  जाम लगाया।।

3

जींद जिले के बरसौला मैं रेल रोको पूरा सफल करया

बामला मैं महिलाओं नै सबतैं आगै अपना कदम धरया

*पुरुष महिला नौजवानों नै आंदोलन का*

*होंसला बढ़ाया।।*

कई टेशनां के ऊपर सबनै मिलकै  जाम लगाया।।

4

यमुना नगर मैं भी टेशन पै चार घण्टे रेल रोक दई

हरियाणा वासियों नै अपनी पूरी ताकत झोंक दई

*रणबीर नै कई प्रदेशों मैं रेल रोको घणा सफल पाया।।*

कई टेशनां के ऊपर सबनै मिलकै  जाम लगाया।।

Tuesday, 23 February 2021

आर्थिक मंदी

 अर्थव्यवस्था म्हारे देश की ढांचागत संकट बीच आगी।।

संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।
1
विकास दर बेरोजगारी के बहोत दिन आंकड़े छिपाए
इनमें फेरबदल करकै ना बढ़ता संकट ल्हको पाये
सेहत अर्थव्यवस्था की गिरी मामले सबकै साहमी आये
सरकारी अर्थशास्त्री भी आज बहोत घणे सैं घबराए
कबूल करने को मजबूर या कड़वी सच्चाई हिलागी।।
संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।
2
इस आर्थिक मंदी का आज मजदूर वर्ग शिकार होग्या रै
इनके हकां पै देखो चौड़े यो घणा कसूता प्रहार होग्या रै
जो थोड़ा घणा बचरया था तबाह पूरा परिवार होग्या रै
संकट बढ़ता जावै देश मैं मजदूर घणा लाचार होग्या रै
मजदूर वर्ग नै आर्थिक मंदी आज कसूती ढ़ालां खागी।।
संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।
3
आर्थिक मंदी खत्म करण नै या सरकार कानून बणावै
देशी बदेशी पूंजीपति के या सरकार तलवे चाटती पावै
लाखों करोड़ की करों मैं छूट कति देवंती नहीं शरमावै
तोहफे दे पूँजीपतियाँ नै हमनै देशभक्ति के पाठ पढ़ावै
बात पक्की इस मॉडल तैं या आर्थिक मंदी बढ़ती जागी।।
संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।
4
यूनियन बनाने के अधिकार पूंजीपति नै ढीले करवाये
वेतन भत्ते कम करकै नै इसनै हथियार कसूत चलवाये
फिक्की के इशारयां उप्पर पूरे अमल करकै दिखलाये
सौ कानून थे मजदूरों के चार संहिताओं मैं सिमटवाये
दीन हालात या मजदूरों की रणबीर की कलम बतागी।।
संकट के हाल बतावण आली सारी बात देश मैं छागी।।

24 फरवरी जनतन्त्र बचाओ दिवस

24 फरवरी गणतंत्र बचाओ दिवस
*देश के जनतंत्र पै खतरा देखो घणा कसूता आया।।*
*घणे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।*
1
आबादी बधी दोगणी पर नाज चौगुणा पैदा करया
पचास मैं थी जो हालत उसमैं बताओ के जोड़ धरया
बिना पढ़ाई दवाई खजाना सरकारी हमनै रोज भरया
ईमानदारी की करी कमाई फेर किसान नै कड़े सरया
*भ्रष्टाचार बेइमानी नै क्यों सतरंगा जाल बिछाया।।*
घणे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।
2
फासीवादी तौर तरीके राज के आज देखण मैं आये
विरोध करैं उनपै देशद्रोह के मुकद्दमे जाते रोज बनवाये
जात पात पै बांटण के इणनैं तीर तुक्के खूब चलाये
तीन मिहने होगे किसानों नै राज कै रोज सांस चढ़ाये
*डटे हुए सैं बोर्डरां ऊपर कोण्या पाछे नै कदम हटाया।।*
घणे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।
3
यो दिन देखण नै के भगत सिंह नै फांसी पाई थी
यो दिन देखण नै के सुभाष बोस नै फौज बनाई थी
यो दिन देखण नै के गांधी बापू नै गोली खाई थी
यो दिन देखण नै के अम्बेडकर ने संविधान बनाई थी
*नये-नये जुमले सुणकै यो सबका सिर चकराया।।*
घणे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।
4
जनतंत्र बचाओ दिवस पै कसम लेवां इसनै बचावैंगे
भगत सिंह हर के राह पै जोर लाकै हम कदम बढ़ावैंगे
किसान आंदोलन के बारे मैं घर-घर अलख जगावैंगे
काले कानून वापिस होज्यां मिलकै नै हांगा लावैंगे
*रणबीर सिंह मिलकै सोचां गया बख्त किसकै थ्याया।।*
घणे हुये कुर्बान देस पै जिब आजादी का राह पाया।।

Saturday, 9 January 2021

SAHI RAM ALHA

 संघर्ष कथा

सही राम

आँखिन देखी मैं कहता हूँसुनी सुनायी झूठ कहाय |

गाम राम की कथा सुनाऊँ , पंचो सुनियो ध्यान लगाय |

हल और बल कुदाली कस्सी , धान बाजरा फसल गिनाय|

भैंस डोलती पूंछ मारतीगैय्या खड़ी खड़ी रम्भाय |

सुबह सवेरे हाली निकलैगर्मी सर्दी को बिसराय|

सारा दिन वो खटे  खेत में , मिटटी संग मिटटी होई जाय |         

चाहे धूप जेठ के चलके,चाहे कोहरा दे ठिठुराय |

उसकी धर्म मशक्कत करनाउसको इनकी क्या परवाय|

लेकिन उलटी रीति ये देखो , देऊँ आपका ध्यान दिलाय |

ये दुनिया जो गौरख धंधा , मिहनत कौड़ी हाट लगाय |

हल बैलों वाला भी भूखा , जो खेतों में अन्न उगाय|

मोटे सेठ हड़प कर जाएँ , सारा माल हाथ फैलाय |

रुखा टुकड़ा वे ना पावेंडाकू चिकनी चुपड़ी खाय |

डंगर भूखे मरते मर जाय , भुस्सा उनको मिलता नाय |

जमा फसल देकर बनिए को , कर्जदार फिर भी कहलाय |

ज्यों ज्यों ढलै  उमरिया उसकी , त्यों त्यों कर्जा बढ़ता जाय |

यह चक्कर देखो होनी कावाह फिर भी मरजाद कहाय

घर में  बेटी बीस बरस कीकुर्दी की ज्यों बढती जाय |

सेठ साहब का कर्ज  उतरै , लड़की क्योंकर ब्याही जाय |

जो भी देखे लानत भेजै ,वो क्या पडै कुंए में जाय |

बेटी भारी बोझ बाप परमाँ को औरत रही गरियाय |

पाँच हजार मांगता समधी , उसकी चिठ्ठी पहुंची आय |

लाला उसका अपना बनकरउंच नीच सब रहा बताय |

दुनिया में मरजाद पालनीयह मर्दों का धर्म कहाय |

खानदान को दाग लगै  नाबिटिया घर से देओं धकाय |

सारी दुनिया काल चबैना , क्यों फिर पगले तूं पछताय |

जाय कचैड़ी लाला जी संग , उसने दिया अंगूठा लाय |

अब वो नहीं भोमियां कोई , कर मजदूरी पेट चलाय |

  बच्चे कुच्चे सारे , भूखे बिलख बिलख सो जाय |

अगन पेट में धधक रही हैघर का चूल्हा जलता नाय |

खेलन -खावन के दिन आये , सो बच्चे कमगर कहलाय |

हड्डी तोड़ें खून सुखावै , सँझा तक बेगार कराय |

आधी पारदी उजरत देकर , धक्का दें और छुट्टी  पाय |

यह अन्याय   राम  का देखो ,किस किसका दूं नाम गिनाय |

बोटो बोटी नोचें उसकी , लोहू बूँद बूँद पी जाय |

पंचो यह तो एक कहानी , गाम राम की कही सुनाय |

और  जाने कितने दुखड़े , कितने लोग रहे दुःख पाय |

ढांचा यो सारा गड़बड़ है , बुन्गत इसकी समझ  आय |

सब इन्सान बराबर जन्मे , एक पेट दो हाथ कमाय |

एक तो करता ऐश महल में , दर दर दूजा ठोकर खाय |

एक उड़ावै  हलवा पूरीदूजा भूखा मर मर जाय |

यह इंसाफ कहाँ दुनिया में , सोचो पंचो ध्यान लगाय |

एक बना फिरता पंडत हैदूजा रहा चमार कहाय |

एक ही कुदरत एक ही माया ,एक तरह से जन्मे  माय |

फिर कोई क्यों ठाकुर बनता , दूजा हरिजन रहा कहाय |

सबरनता का गरब नशीला , त्यौरी उप्पर को चढ़ जाय |

बुलध समझ कै चमड़ी तारैऔर फिर उप्पर से गिरयाय |

जिन्दा उसको आग में झोंके , तब तक नशा नहीं थम जाय |

फिर भी उसको गाड्डी मिलतीवो मिटटी में मिलता जाय |

यह कैसा कानून राम का , यह तो नहीं इंसाफ कहाय |

बेटी , बहू,माय  हरिजन की,   सरेआम इज्जत लुट जाय |

छुट्टा  सांड गाँव में डोलैकोई नहीं सामने आय |

रात दिनों जो खेत जोतता , वो उसका मजदूर कहाय |

मलिक कोई और भूमि का , आनी ये  जागीर बताय|

उसको नहीं पता क्या मिटटी , क्या मिटटी की गंध कहलाय |

 वो बैठा है महलों अन्दर , उस तक गंध पहुँचती नॉय |

सौ रूपए के कर्ज बदले , बंधुआ सात पुश्त हों जाय |

ऐसा यह कानून राम का , ज्ञानी गुनियों ज्ञान लगाय |

सर्दी गर्मी पीठ पै झेले ,मलिक उसको रहा जुतियाय |

न्याय धर्म के नाम पै पंचोमाणस दिन दिन पिसता जाय|

मिल मजदूरों के बूते हीचिमनी धुआं उगलती जाय |

पर एक बात सोचियो पंचो ,वो क्यों अधभूखे रह जाय |

सेठ तिजौरी भर भर गाडै , काले धान को रहा छिपाय |

मजदूरों का खून चूसता , लोहू बूँद बूँद पी जाय |

वो महलों में बैठा लेकिन उसकी पूँजी बढती जाय |

शोषण वो कर रहा मजदूर का , उसकी चर्बी बढती जाय |

वो इन्सान नहीं कोई सीधा , दीखत का वो नरम सुभाय |

आदमखोर जानना उसकोउसका दीं धर्म कोई नॉय |

झूठा उसका पोथी पत्राझूठे मंदिर रहा बनाय |

मिल सारी मजदूरों की है ,वो झूठा मलिक कहलाय |

मजदूरों को गली देताहड़तालों को झूठ बताय |

छंटनी कर कर  के वो इनकी , और गुंडों से रहा पिटाय|

उसके हाथ बनैले पंजे , उसको खुनी समझो भाय |

उसकी सारी पुलिस फ़ौज है ,गौरमिंट भी वही बनाय |

वो नहीं देगा बोनुस तुमको , वो नहीं रहा स्कूल खुलाय |

छंटनी कर कर लोगों की , घाटा  ही घाटा  दिखलाय |

उसकी खातिर मारो भूख से , उसको बात लागती नॉय |

वो चमड़ी का मौत भैंसा ,उसके सींग रहे चिकनाय |

उससे लड़ना चाहो गर तो , एक्का पक्का कर लो भाय |

 उसके साथ है सारी ताकत , उसकी एक जानियो नॉय

अपनी ताकत एक जूता लो , एक साथ लेओ हाथ मिलाय |

वो खूंखार बनैला भैसा , उसे खून की गंध सुहाय |

वो रोंदेगा बस्ती को भी ,बच्चों को वो चींथत  जाय |

यह संघर्ष कथा उनकी है , सुनियो पंचो ध्यान लगाय

जिनके हाथ हथोडा केवल ,दोनाली से अड़ गया जाय

 सदियाँ से जो लुटते आये , और लूटना जिनका धर्म कहाय  |

जिनके पसीने को गंगा का ,वे गोली में मोल लगाय |

जिनके बूते दुनिया चलतीदुनिया पै हक़ उनका नाय |

सारे दिन जो खटते  पिटतेरोती उन्हें रही तरसाय |

कपडा उनको नहीं मयस्सर , दवा दारू की कौन बताय |

उस मेहनत का मौल है ,छाती में बन्दूक अड़ा   |

राय तुम्हारी क्या है ,पंचो,क्या यह नहीं अन्याय कहलाय |

धर्म की बात तुम्हीं कह देना ,लेकिन कहना ध्यान लगाय |

अन्यायी का पक्ष  लेना , पंचो से यकीन उठ जाय |

खूनखोर नरभक्षी देखा,भेद मुखौटा रहा लगाय |

पूरी कौम के ये दुश्मन हैं , इंका तो बस नफा खुदाय |

मेहनतकश का परोपकार है ,नाफखोर की क्या परवाय |

ऊपर से ये चिकने चुपड़े ,अन्दर कोढ़ रहा गन्धाय  |

पूरी कौम को कोढ़ी कर दें ,इनसे पिंड छुडाओ भाय |

ये कलंक पूरी दुनिया पर , इंका नामोंनिशा मिटाय |

अब ये दुनिया है नहीं इनकी ,अब ये और बसालें जाय |

पर इन्सान जहाँ होगा ,इनकी पेश पडेगी नॉय |

पंचो मैंने गलत कहा क्या ,झूठ साँच देना बताय |

जिसने इनको जन्म दिया हैवो पग की जूती कहलाय |

बहन खिलौने की वस्तु है , उनको कोठे दिया बिठाय |

हक़ जीने का नारी मांगे ,उसके सिर को रहे जुतियाय |

इनकी यह मर्दूमी देखो , यह इंका दमखम कहलाय |

मांग करेँ जो हक़ अपने की , उसकी खिल्ली दे उडाय |

उसको झांसे दे दे कर ही अब तक उसको भोगे जाय |

नीलामी की यह वस्तु है , इनके मनकी समझें नॉय |

लेकिन पंचो सुनना तुम भी , एक बात देऊँ बतलाय |

 नारी  जागी है तो देखो ,अब ये हक़ छोड़ेंगी नॉय |

अब ये इनके पग की जूती , और शो पीस बनेंगी नॉय|

मर्जादों की धमकी देकर , उसको रोक सकोगे नॉय |

यह प्रतिबंध हटाना होगा , इनकी शक्ति लेओ परचाय |

शोर शराब नहीं है केवल , पक्की बात लीजियो लाय |

अब ये नहीं कोई पूजा वस्तु ,धर्म कर्म की नहीं परवाय |

एक बराबर मानव शक्ति ,एक को छोटा दिया बताय |

अब यह चालाकी नहीं होगी , सुनियो सजनो ध्यान लगाय |

शोषित पीड़ित जनता कीजो मैं कथा रहा बतलाय |

इतनी लाम्बी कथा है पंचो ,एक एक चीज सुनोगे नॉय |

ना ये किस्सा तोता मैना , ना राजा -रानी की बात |

शोषित पीड़ित जनता की ही ,मैंने आज बताई बात |

नाले के कीड़े सी दुर्गत ,मानुष छोले की हों जाय |

श्रम शक्ति के दुरूपयोग से ,बेडा कैसे पार लगाय |

मानव श्रम को बिन पहचाने , देश रसातल को हों जाय |

गाँधी उनको कम  आया ,अर्थ शाश्त्र को घुन खाय |

मैं पूछूं नेता लोगों से , पहन जो खद्दर रहे इतराय |

कुर्सी जिंका धर्म हों गयी , जनता पडों कुंए में जाय |

कब तक वो देंगे भाषण हीकब तक वादों   की भरमार |

बहुत दिनों की बात नहीं अब , मेहनतकश हों रहे त्यार |

उनके हाथ दरांती अपनी ,और हथोडा रहे उठाय |

लस्सी और कुदाली उनकी ,हाथ बसूला पहुंचा आय |

तैयारी  पूरी है उनकी ,अब वो एक लेंय बनाय |

तब मैं आऊंगा और पूछूं ,अब क्यों छुपे किले में जाय |

कहाँ गयी बन्दूक दुनाली ,क्या तलवार गयी बल खाय |

फ़ौज ,पुलिस सब अपने भाई , वो भी शामिल हों जा आय |

वो दिन होगा सज्जनों अपना , वे जल्दी ही पहुंचे आय |

तब तुम सुनना लोकगीत भी , ढोल मजीरा तभी सुहाय |

सही राम


सेठों की यह भरै तिजोरी, लूट को उनकी रहा छुपाय।

बैंक लुटाए, खनिज लुटाए, दौलत सारी रहा लुटाय।

रेल भी बेची, तेल भी बेचा, सेल की तख्ती रहा लगाय।

सब संपत्ति सेठ की झोली, लालच फिर भी मिटता नाय।

फिर खेती पर नजर लगी तो बोला यह भी क्यूं बच जाए।

माल बहुत है इसमें प्यारे, यह भी हमको देओ दिलाय।

खेत किसानी खत्म करो तुम, भूख को दो व्यापार बनाय।

कोई भी प्रपंच रचो तुम, बस मांग हमारी देओ पुगाय।

ढ़ोंगी और प्रपंची राजा, फिर दिया उसने ढ़ोंग रचाय।

मेरा चमत्कार तुम देखो,देऊं ऐसा मैं स्वांग रचाय।

करैं भरोसा सब मुझपर, मैं ऐसा देऊं जाल फैलाय। 

अनदाता की आमद दुगनी, बस चुटकी में यूं हो जाय।

इसी ढ़ोंग की आड़ में उसने अपना जाल दिया फैलाय।

संसद उसकी, सत्ता उसकी, बैठ गया वो घात लगाय।

खेत भी उनके, फसलें उनकी, सेठों को मैं लेऊं रिझाय।

मंडी उनकी ,भाव भी उनके, गल्ला सब उनका हो जाय।

तभी कहर टूटा कुदरत का, दुनिया गयी सनाका खाय।

महामारी की आफत आयी, उसने दिया फरमान सुनाय।

घर में रहना ही अच्छा है, आपस में तुम मिलियो नाय।

कभी बजावै ताली-थाली और दीया-बाती रहा कराय।

मजदूरों की गयी मजूरी, धंधा सब चौपट हो जाए।

दुख मारी जनता रोयी, लोगों ने दी जान गवाए।

उसको फिकर रही सेठों, जनता की कुछ सुनता नाय।

विपदा को अवसर में बदलो, हांक यही बस रहा लगाय।

जनता को विपदा ने मारा, पर उसने अवसर लिया बनाय।

पहले हक मारा मजूर का, सेठों का दिया दास बनाय।

खेत-किसानी पर फिर झपटा, मौका उसने छोड़ा नाय।

ढोंग रचाया, स्वांग रचाया, मीठी बातें रहा बनाय।

शीश नवा कर, बात बना कर, मैं दूंगा सबको भरमाय।

लेकिन शैतानी चेहरा वो अनदाता से छुपता नाय।

भरम का पर्दा फाड़ के उसने दिनी यह हुंकार लगाय।

भोला-भाल हूं मैं बेशकं, पर हक अपना छोड़ूंगा नाय।

हक अपने की खातिर फिर वह दिल्ली बॉडर पंहुचा आय।

उस बॉडर पर बेटे बैठे, इस पर बैठ गया खुद आय।

जय जवान और जय किसान का नारा सच्चा दिया बनाय।

जालिम भी तो जालिम ही था, उसमें दया-धर्म कुछ नाय। 

छेड़ दिया प्रचार पुराना, झूठा राग रहा सुनवाय।

देशद्रोही और बिचौलिए, सब खालिस्तानी रहा बताय।

खाए और अघाय कहता, कहता दुश्मन रहा भरमाय।

बाहरी मदद पंहुचती उनको, वे किसान बिल्कुल भी नाय।

चैनल-चैनल बात चलायी, झूठी बातें दी फैलाय।

फिर भी पेश गयी उसकी, किसान का निश्चय टूटे नाय।

काले है कानून तुम्हारें, जब तक रद्द करोगे नाय।

एम एस पी पर फसल हमारी, जब तक खरीद करोगे नाय।

हम बैठे हैं इस बॉडर पर, हमको हटा सकोगे नाय।

पाला मांड दिया बैरी ने, पीछे हमको हटना नाय।

राजाजी संग सेठ-ब्यौपारी, प्रजा इधर जुटी है आय।

जीत हमारी होगी निश्चित, अब दीनी ललकार लगाय।

ऐसी यह हुंकार लगायी, थर-थर बैरी है थर्रराय।