Thursday, 14 April 2011

BHIM RAO AMBEDKAR

NUMBER OF GOTRA INCREASING

हरनाथ की तुम्बा हेड़ी
ब्लोक -सालहावास 
जिला- झझर
कुल गौत्र -३७ saintis  


chal

दुश्मनों  की  चाल में हम आ गए
अपना ही घर लूट के  हम खा गए

khoon

धर्म  क्या  है जात क्या है रस्मों का इक जाल है
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सबका ही खून लाल है   

ankhon hi ankhon mein

गुस्सा दिखाते जनाब आँखों से 
हम भी देंगे जवाब आँखों से
तुम से ऑंखें मिला मिला के
हम भी लेंगें हिसाब आँखों से ||
आँखों से तुमने घृणा दिखाई
हमने गुंजाया इन्कलाब आँखों से ||
लूट के मेहनत हमारी तुम
फिर जाके पीते sharab  आँखों से ||
ranbir  ढूंढते रहे है हर दम
अपने दुखों की किताब आँखों से||

Tuesday, 12 April 2011

गौरी गौरी रेशम डोरी शरक फरांसी हो सै
सुथरी बहु गरीब के घर मैं मरद नै फांसी हो सै
मैं सूँ जोहड़ लेट का पानी तूं सै लता गंग नीर का
भोली भोली सूरत तेरी काम करै सै रफल तीर का
हँसना बुरा बीर का चोर की दुश्मन खांसी हो सै ||
मने भगत बहोत से देखे सें जो काढें भूत बजा कै डोरू
एक आधे की कहता कोन्या बोहत फिरें सें इज्जत चोरू
साच्ची सै हीने की जोरू सबकी दासी हो सै ||
ध्यान लगा कै सुनती जा एक लेख बताऊँ अदालक का
बुरी गरीबी सबकी beebee jisa nrm sag palak का
doodh dahi हो malak का manganeeya की lhasi हो सै
sachi kahde bat dayachand munh tai jhooth kade na bolai
aad aut मैं chhipya rahai सै pahad bataya til कै auhlai
nirbal pai hanga tolai thade की hansi हो सै ||
मुझे समझो ना समझो खुद को तो समझो

salam safdar ko

सलाम सफ़दर को
समाज की खातर मरने आले आज तलक तो मरे नहीं ||
कुर्बान देश पर होने वाले कदे कभी किसी से डरे नहीं ||
सफ़दर की हांसी हवा मैं आज भी न्योंये गूँज रही
चारों धाम था मच्या तहलका हो दुनिया मैं बूझ रही
बैरी को नहीं सूझ रही पिछले गढ़े इब्बऐ भरे नहीं ||
मीडिया मैं जगहां बनाई विडीयो बढ़िया त्यार करी थी
खिलती कलियाँ के महां बात सही हर बार करी थी
जवानी उसकी हुनकर भरी थी गलत काम कदे करे नहीं ||
जितने जीया सफ़दर साथी जीया जमा जी भर कै नै
था लेखक बढ़िया अदाकार नुकड़ रच्या कोशिश कर कै नै
निभाया वायदा मर कै नै जुल्मों से सफ़दर डरे नहीं ||
एक सफ़दर नै राह दिखाई हजारों सफ़दर आगे आवैंगे
माला हाश्मी बनी सै चिंगारी घर घर मैं अलख जगावैंगे
हम फिरकापरस्ती तैं टकरावैंगे रणबीर के कलम जरे नहीं ||



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tod ho liya

निचोड़ हो लिया
सफ़दर जी की हत्या से निचोड़ हो लिया
हुया हड्खाया राजवर्ग यो तोड़ हो लिया
एक जनवरी साल नवासी मोटा चाला होग्या
हुया हमला सफ़दर ऊपर घायल कुढाला होग्या
हमलावर खुद राज करनीये खुल्ला पाला होग्या
सफ़दर के नाटक का ढंग योतै निराला होग्या
यो राजनीती और हत्या का गठजोड़ हो लिया ||
चारों कूट मैं शोक फैलग्या कूकी दुनिया सारी
गाँव गाँव और शहर शहर मैं दुखी हुए नर नारी
पैरिस लन्दन रोम के अन्दर सदमा था बड़ा भरी
कलाकार था जग मैं नामी थी संस्कृति प्यारी
यो सरकारी चिलत्तर का भन्दा फोड़ हो लिया ||
सफ़दर हाश्मी डस लिया सर्प राज का काला है
अभिव्यक्ति की आजादी का इब तक यो टाला है
राजवर्ग की भाषा बोलो वर्ना मुंह पर ताला है
साच पर से जो पर्दा ठावै उसी ज्यान का गाला है
राजवर्ग सारी जगह का दीखे एक औड हो लिया ||
जल्दी संभलो रचना कारो कला पर यो हमला है
जन पक्ष की कला हमारी ना बिल्कुल ये अबला है
रोंदना चाहते हो तुम जैसे करता हाथी पगला है
हबीब भारती विचार करों क्या कदम हमारा अगला है
वर्ग लुटेरा हत्यारा यो एक ठयोड़ हो लिया ||

nahle pe dahla

धरती हमारी हुई है बाँझ
किसान तपस्वी हुआ कंगाल
बणी सणी ख़त्म हो गयी
तथाकथित नेता रहे दंगाल
गाँव गाँव में दारू बिकती
घर घर में औरत पिटती
बैठे ये लोग ताश खेलते
महिला पर मजाक ठेलते
ना किसी से कोई काम है
कहता किस्में जयादा दम है
बदमाशों ने लंगोट घुमाया
राजनेता से हाथ मिलाया
भ्रष्ट पुलिस अफसर मिला है
भ्रष्ट ब्यूरोक्रेट साथ खड़ा है
चारों क़ि दोस्ती अब तय हैं
एक दूजे क़ि बोलेन जय हैं
लगा रहे हैं जोर पर जोर
चारों तरफ देखो बढ़ा शोर
बेरोजगारी का उठा भूचाल
किसान होते जा रहे बदहाल
ऊपर से नेताजी भी पुकारे
उस पठे को मज्जा चखारे
आगे बढ़के गलघोट लगादे
कहाँ पे पड़ेगी चोट बतादे
आज उसे कल उसे पटकदे
सामने बोले जो उसे झटकदे
याद छटी का दूध दिलाना
मत इसे हमारा नाम बताना
बता रहे दाँव पर दाँव देखो
नेताओं में है कांव कांव देखो

कुरीतियों पर चुप रहे कमान

आनर किलिंग समाज में श्यान
मारना और फिर मरना होगा
नाम गाँव का तो करना होगा
जनता तक रही है सांसें थाम
बताओ यूं चलेगा ये कैसे काम
हम बिना शादी के घूम रहे हैं
वे गोतों के नशे में झूम रहे हैं
वाह निकले हैं नहले पर दहले
कौन बोलेगा वहां सबसे पहले
खूब हुई देखो वहां धक्का पेल
पंचायत ने वहां दिखाया था खेल
अहम् सबका माइक पे टकराया
फैसला खास वहां हो नहीं पाया
पाँच घंटे तक मार पर मार हुई
झड़प आपस में बारम्बार हुई
ना दहेज़ पर बोला कोई वहां
दारू पर बंद रही सबकी जुबाँ
महिला भ्रूण हत्या को भूल गए
बस गोत्र शादी में सब झूल गए

kissa mhara thara 2

Monday, 11 April 2011

समालखा जीवन शाला

प्रजातंत्र


प्रजातंत्र
लग्गी दिल पै चोट , लेगे जात पै वोट
बनते साथ मैं नोट , यो परजातंत्र क खोट
ले गरीबी की ओट ,अमीर खेले धन मैं ||
नाम जनता क लेवें ये , अंडे अमीरों के सेहवें ये
बतावें माणस क दोष , कहैं या व्यवस्था निर्दोष
ये बुधि लेगे खोस , इसे करे हम मदहोश
ना करता कोए रोष , सोचूँ अपने मन मैं ||
ये साधें सें हित अपना, ना करैं ये पूरा सपना
जितने बैठे मुनाफाखोर , सबसे बड्डे डाकू चोर
सदा सुहानी इनकी भोर , ना पावै इनका छोर
थमा जात धर्म की ड़ोर, फूट गेर दी जन मैं ||
कुर्सी खातर रचते बदमाशी , ना लिहाज शर्म जरा सी
पालतू इनकी हो सरकार, ना जावै कहे तै बाहर
गरीबों की कहै मददगार , लारे दिए बारम्बार
इब रहया नहीं एतबार ,इस गदरी बन मैं ||
स्कूली किताबों पै तकरार , गन्दा साहित्य बेसुम्मार
सबको शिक्षा सबको कम , आजादी पै दिया पैगाम
पचास अनपढ़ बैठे नाकाम , पचास के लगते दाम
ना पढ़ते करैं बदनाम , आग लागरी तन मैं ||

कलम पकड ल्यो


अपने हाथ कलम पकड़ो
चालाक आदमी फैयदा ठारे ,इब माणस की कमजोरी का
घर की खांड किरकरी लागे , कहैं गूद मीठा चोरी का
भगत और भगवान के बीच , दलाल बैठगे आकै
एक दूसरे की थाली पै , यें राखें नजर जमाकै
सीधी साच्ची बात करैं ना , यें करते बात घुमाकै
झोटे जैसे पले पड़े यें , सब माल मुफ्त क खा कै
म्हारी जेब पै बोझ डालते , अपनी जीभ चटोरी का||
हम बैठे भगवान भरोसे , ये कहरे हम दुःख दर्द हरैं
यें मंदिर की ईंट चुरा कै अपने घर की नीव धरैं
सारा बेच चढ़ावा खाज्याँ टीका लाकै ढोंग करैं
आप सयाने हम पागल बनाये , पाप करण तैं नहीं डरें
म्हारी राह मैं कांटे बोये , यें फैयदा ठारे धौरी का ||
राम के खातर खीलां फीकी ,यें काजू पिसता खावें
भगवान के ऊपर पंखा कोनी , यें ए सी मैं रास रचावें
मुर्गे काट चढ़ा पतीली , यें निश दिन छौंक लगावें
रिश्वत ले कै राम जी की , यें भगतों तैं भेंट करावें
बड़े बड़े गपौड़ रचें , यें करते काम टपोरी का ||
यें व्रत करारे धक्के तैं , धर्म का डर बिठा कै
खुद पड़े पड़े हुक्म चलावें म्हारी राखें रेल बना कै
टीके लाकै पोथी बांचें , कई राखें झूठे ढोंग रचा कै
'रामेश्वर ' सब अँधेरा मेटो , थाम तर्क के दीप जला कै
अपने हाथ कलम पकड़ो , लिखो इब अंत स्टोरी का ||

किस्सा म्हारा थारा

गुंडा गर्दी

गुंडा गर्दी
इस गुंडा गर्दी नै बेबे ज्यान काढ ली मेरी हे
सफ़ेद पोश बदमाशों नै इसी घाल दी घेरी हे
रोज तडकै होकै त्यार मनै हो कालेज के म्हं जाना
नापूता रोज कून पै पावै उन्नै पाछै साईकल लाना
राह मैं बूढ़े ठेरे बी बोली मारें हो मुश्किल गात बचाना
मुंह मैं घालन नै होज्याँ मने साब्ती नै चाहवें खाना
उस बदमाश जाले नै या चुन्नी तार ली मेरी हे ||
मने सहमी सी नै माँ आगे फेर बात बताई सारी
सीधी जाईये सीधी आईये मनै समझावै महतारी
तेरा ए दोष गिनाया जागा जै तनै या बात उभारी
फेर के रह्ज्यगा बेटी जिब इज्जत लुटजया म्हारी
बोली हाथ जोड़ कै कहरी मनै मान ली भतेरी हे ||
नयों गात बचा कै मनै पूरे तीन साल गुजार दीये
एच ए यूं मैं लिया दाखिला पढ़न के विचार कीये
वालीबाल मैं लिकड़ी आगे सबके हमले पार कीये
के बताऊँ किस किस नै मेरे पै जो जो वार कीये
मार मार कै तीर कसूते या छाती साल दी मेरी हे ||
कुछ दिन पहलम का जिकरा दूभर जीणा होग्या
इन हीरो होंडा आल्यां का रोज का गमीणा होग्या
कई बै रोक मेरी राही खड्या वोए कमीणा होग्या
उस दिन बी मैं रोक लाई घूँट खून का पीणा होग्या
कई हाँसें थे उडै जिब साईकल थाम ली मेरी हे ||
मेरी आँख्यां आगे अँधेरा था पर मने वो थपेड दीया
जोर का मारया धक्का मोटर साईकल धकेल दीया
नयों बोल्या मैं ना असली जै घाल नहीं नकेल दीया
तनै पडे भुगतना छोरी मोटा तित्तया यो छेड़ दीया
नयों कहै उस नीच जाले नै बांह मोस दी मेरी हे ||
भीड़ मैं तै फेर एक छोरा थोड़ा सा आगे नै आया था
के थारे बहन बेटी नहीं सै वो थोड़ा सा गुर्र्याया था
उतरया पेट मैं छः इंची बेचारे नै चक्कर खाया था
देख लिया अंजाम उसका जिन्नै बीच मैं पैर अड़ाया था
ठा फिट फटती भाज गये उन्नै लाज राख दी मेरी हे ||
एक बोल्या के बिगडया तेरा छोरा ज्यान तै खूज्यागा
दूजा बोल्या ताली दो हाथों बजै नया पवाडा बूज्यागा
मैं सोचूँ के होगा जिब यो बर्ताव म्हारी जड़ों मैं चूज्यागा
सराफत ना टोही पावै बदमाशी का लाग यो ढूँज्यागा
हांगा ला बचा लिया डाक्टरों नै बचा साख दी मेरी हे ||
हे मेरी बहना म्हारी गेल्याँ इसी बात रोज बनै सै हे
इसे ऊतों की या सड़कों ऊपर पूरी फ़ौज फिरै सै हे
एक एक करकै तेरी मेरी या कटती गुज फिरै सै हे
सब कठठी होल्यो नै सबनै कहती सरोज फिरै सै हे
पुलिश ना मदद करै रणबीर गांठ बांध दी मेरी हे ||