Saturday, 30 July 2016

किस्सा फौजी मेहर सिंह


फौजी मेहरसिंह गांव बरोने का रहने वाला था। उसकी लिखी हुई बातें तो सब सुनते हैं मगर उसकी जिन्दगी के बारे में लोगों को बहुत कम पता है। उसमें देशप्रेम बहुत गहरा था यह बात बहुत कम लोगों की जानकारी में है। मेहर सिंह ही उस दौर का ऐसा व्यक्तित्व है जो किसान है,कवि है और फौजी भी है। जो उस दौर में छुआछूत के खिलाफ भी संवेदनशील है और हरएक कौम से हुक्का पानी का सम्बन्ध रखता था। क्या बताया कवि ने:
.1.
खरखोदे धोरै सोनीपत मैं, बरोणा नाम सुण्या होगा।
इसे गाम का रहणे आला, मेहरसिंह नाम सुण्या होगा।।

1 पैदा कद सी हुया मेहरसिंह, तारीख कोण्या याद मेरै
फौज के मां भरती होग्या, बणाण गाण का शोक करै
बुराई तै रहया दूर परै, यो किस्सा आम सुण्या होगा।।
2 गरीब किसान का बेटा था ओ गरीबी मैं जवान हुया
पढ़ लिख थोडा ए पाया ओ भोला सा इन्सान हुया
दुनिया के मां नाम हुया सबनै पैगाम सुण्या होगा।।
3 घर कुण्बे नै रोक लगाई नहीं रागनी गावैगा
ऐसे कर्म करैगा तै तूं नर्क बीच मैं जावैगा
तूं म्हारी नाक कटावैगा उसपै इल्जाम सुण्या होगा।।
4 नहीं हौसला कदे गिराया तान्ने सुणे गया रणबीर।
दिल मैं जो भी बात खटकी वाह घड़दी सही तसबीर
सरहद उपर लिखै था वीर उसका सलाम सुण्या होगा।।

फौजी मेहरसिंह किसान परिवार में बरोना गांव में पैदा हुआ। इस इलाके के मशहूर गावों में से एक गांव है बरोना। जिन्दगी की सच्चाईयों से उसका रोजाना सामना होता था। वह मेहनती था। गरीब परिवार से था। गाता बहुत अच्छा था। एक दिन खेत मं पानी लगा रहा था। वहां उसकी काली नागण से सेटफेट हो जाती है। क्या बताया भला:
रागनी 2
टेक बन्धे उपर नागन काली डटगी फण नै ठाकै।
सिर तै उपर कस्सी ठाई मारी हांगा लाकै।।
1 नागन थी जहरीली वा फौजी का वार बचागी
दे फुफकारा खड़ी हुई आंख्यां मैं अन्धेर मचागी
दो मिनट मैं खेल रचागी चोट कसूती खाकै।।
2 हिम्मत कोण्या हारया फौजी हटकै उसनै वार किया
कुचल दिया फण लाठी गेल्यां नाका अपणा त्यार किया
चला अपणा वार लिया काली नागन दूर बगाकै।।
3 रात अँधेरी गादड़ बोलैे जाड्डा पड़ै कसाई
सुर सुर करता पानी चालै घणी खुमारी छाई
डोले उपर कड़ लाई वो सोग्या मुंह नै बाकै।।
4 बिल के मां पानी चूग्या सूकी रैहगी क्यारी
बाबू का सांटा दिख्या या तबीयत होगी खारी
मेहरसिंह जिसा लिखारी रोया मां धेरे जाकै।।

फौजी मेहरसिंह को गाणे बजाणे का बड़ा शौक था। रात को गाता तो बहुत से लोग सुनने आ बैठते। मेहरसिंह को हुक्का बिगाड़ कहा जाता था मतलब वह हर जात का हुक्का पी लेता था। मेहर सिंह का पिता आर्य समाजी था। उसे मेहरसिंह का गाना बजाना पसन्द नहीं था। कई बार मना किया और एक दिन तो पिता ने गुस्से में भरकर सांटा उठा लिया उसकी पिटाई करने के लिए। भले ही आर्य समाज इस इलाके में देर से आया मगर इसका प्रभाव यहां के सामाजिक सांस्कृतिक जीवन पर पड़ा। आर्य समाज ने षिक्षा के प्रसार का काम किया और महिला षिक्षा पर भी काफी जोर दिया। मगर कोएजुकेशन का विरोध किया। इसी प्रकार सांगों का भी विरोध हुआ। क्या बताया भला:
रागनी 3
टेक सांटा ठा लिया बाबू नै कांपी मेहर सिंह की काया।।
तूं सांगी बणणा चाहवै कोण्या असली मां का जाया।।
1 तेरे गाणे और बजाणे नै मानै मेरा शरीर नहीं
बैंजू घड़वा किस्सा रागनी किसानां की तासीर नहीं
सांटा मारकै बोल्या मनै बणाणा तूं फकीर नहीं
मन की मन मैं पीग्या ना बोलकै कति सुणाया।।
2 चुपचाप देख कै बाबू बोल्या राह बाँधूंगा  तेरा
कै तो बात मान ले ना तो देखूं कुआं झेरा
धरती थोड़ी नहीं गुजारा क्यूकर बसज्या डेरा
छोड़ कै हल नै गावै रागनी हमनै पटज्या बेरा
खाल तार ल्यूंगा तेरी जो मनै कितै गांवता पाया।।
3 तेरी रागनी म्हारी गरीबी या क्यूकर दूर करैगी
खेत कमा कै फौज मैं जा ना दुनिया नाम धरैगी
एक दिन बरोने के मां तेरी भूखी मात मरैगी
कड़वी लागै बात मेरी मुश्किल तै आज जरैगी
फेर न्यों कैहगा मैं पहलम तै ना तनै समझाया।।
4 खाकै मार बैठग्या छोरा धरती नै कुरेदन लाग्या
बाबू नै छाती कै लाया फेर उसका छोह भाग्या
बोल्या आंख खोल बावले सारा जमाना जाग्या
रणबीर सिंह भी मेहर सिंह के राग सुरीले गाग्या
चिन्ता के मां घिरग्या छोरा कुछ ना पीया खाया।

    इस प्रदेश में दादा लखमी को कौन नहीं जानता। काफी मशहूर सांगी रहे अपने दौर के और कई सांगों की रचना की और सांग खेले भी। लखमी दादा और मेहर सिंह के बारे में दो तीन अवसरों पर आमना सामना होने की बातें कई बार सुनने कां मिलती हैं। एक बार लखमी दादा सांपला में दादा लखमी अपना प्रोग्राम कर रहे थे । वहां पर दादा लखमी ने मेहर सिंह को काफी कड़े शब्दों में सबके सामने ध्मका दिया । बताते कि मेहर सिंह वहां से उठकर कुछ दूर जाकर खरड़ बिछा कर गाने लगा। कुछ ही देर में सारे लोग मेहर सिंह की तरफ चले गये और दादा की स्टेज खाली हो गइ्र । क्या बताया भला कवि ने .
.4.
मेहर सिंह लखमी दादा एक बै सांपले मैं भिड़े बताये।।
लखमी दादा नै मेहरु धमकाया घणे कड़े षब्द सुनाए।।
सुण दिल होग्या बेचैन गात मैं रही समाई कोन्या रै
बोल का दरद सहया ना जावै या लगै दवाई कोन्या रै
सबकै साहमी डांट मारदी गल्ती उसतैं बताई कोन्या रै
दादा की बात कड़वी उस दिन मेहरु नै भाई कोन्या रै
सुणकै दादा की आच्दी भुन्डी उठकै दूर सी खरड़ बिछाये।।
इस ढाल का माहौल देख लोग एक बै दंग होगे थे
सोच समझ लोग उठ लिए दादा के माड़े ढंग होगे थे
लखमी दादा के उस दिन के सारे प्लान भंग होगे थे
लोगां ने सुन्या मेहर सिंह सारे उसके संग होगे थे
दादा लखमी अपनी बात पै बहोत घणा फेर पछताए ।।
उभरते मेहर सिंह कै एक न्यारा सा अहसास हुया
दुखी करकै दादा नै उसका दिल भी था उदास हुया
दोनूं जन्यां ने उस दिन न्यारे ढाल का आभास हुया
आहमा साहमी की टक्कर तैं पैदा नया इतिहास हुया
उस दिन पाछै एक स्टेज पै वे कदे नजर नहीं आये।।
गाया मेहर सिंह नै दूर के ढोल सुहाने हुया करैं सैं
बिना बिचार काम करें तैं घणे दुख ठाने हुया करैं सैं
सारा जगत हथेली पीटै ये लाख उल्हाने हुया करैं सैं
तुक बन्दी लय सुर चाहवै लोग रिझाने हुया करैं सैं
रणबीर सिंह बरोने आले नै सूझ बूझ कै छंद बनाये।।

एक बार मेहर सिंह स्मारक समिति के लोग गांव की चौपाल में बैठ कर उसके जीवन पर चर्चा कर रहे थे। उसकी रचनाओं की किताब प्रकाशित करने की योजना बनी। उसके बारे में कुछ जानकारी लेने के लिए मेहर सिंह की भाभी को चौपाल में बुला लिया और मैने उससे प्रार्थना कि की वह मेहर सिंह के जीवन की कुछ खास बातें बताए। उसकी भाभी ने बताया कि मेहरु मैं तो दो अवगुण थे। सुनकर वहां बेठे सभी लोगों को थोड़ा झटका सा लगा। मैंने भी दो सैकिन्ड के लिए सोचा और फिर कहा कि बताओ तो सही वो दो अवगुण क्या थे। भाभी ने बताया कि एक तो वह हुक्का बिगाड़ था। जिसके यहां जाता उसी का हुक्का पी लिया करता। यउन दिनों छुआछूत इतली थी कि अलग अलग जातों के अपने हुक्के होते थेद्ध । सुनकर मुझे कुछ राहत मिली। मैंने फिर पूछा दूसरा अवगुण क्या थाघ् उसने बताया कि कई गांव व गुहांड के मुसलमानों के यहां उसकी बड़ी पक्की यारी दोस्ती थी। फौजी मेहर सिंह के ये दो ष्अवगुणष् सुनकर बहुत अच्छा लगा। और यह और भी अच्छा लगा कि यह अवगुण 50.60 लोगों के बीच चौपाल में सामने आये। मेहर सिंह का परिवार एक सामान्य गरीब किसान परिवार था। अपने परिवार के आर्थिक कारणें के चलते मेहर सिंह फौज में भरती हो जाता है। जाने से पहले उसकी पत्नी प्रेम कौर उसको दिल की बात बताती है। उसे फौज में जाने से मना करती है।आपस में बहस होती है। सवाल जवाब होते हैं.
5
तर्ज चौकलिया
रागनी उपरा तली की-----
करुं बिनती हाथ जोड़ कै मतना फौज मैं जावै।।
मुष्किल तैं मैं भरती होया तूं मतना रोक लगावै।।
एक साल मैं छुटी आवै होवै मेरै समाई कोन्या
चार साल तैं घूम रहया आड़ै नौकरी थ्याई कोन्या
बनवास काटना दीखै सै कदे कसूर मैं आई कोन्या
बेरोज गारी का तनै बेरा मैं करता अंघाई कोन्या
आड़ै ए खा कमा ल्यांगे नहीं तेरी समझ मैं आवै।।
मैं के जाकै राजी सूं पेट की मजबूरी धक्का लावै।।
थोड़ा खरचा करल्यांगे म्हारा आसान गुजारा होज्यागा
बेगार करनी पड़ैगी  हमनै म्हारा जी खारया होज्यागा
साझे बाधे पै ले ल्यांगे किमै और साहरा होज्यागा
सोच बिचार लिए सारी म्हारा जीना भारया होज्यागा
कोन्या चाहिये तेरी तिजूरी जी गैल रैहवणा चाहवै।।
मनै तान्ने दिया करैगी ना तूं बूजनी घड़ाकै ल्यावै।।
ठाडे पर ना बसावै हीणेे पर दाल गलै सै देखो
धनवानां की चान्दी होरी ना उनकी बात टलै देखो
बात इसी देख जी मेरा  बहोत घणा जलै सै देखो
जो म्हारे बसकी ना उसपै के जोर चलै से देखो
दिल मेरा देवै सै गवाही जाकै तूं नहीं उल्टा लखावै।।
इसी फेर कदे ना सोचिए न्यों फौजी आज बतावै।।
तनै जाना लाजमी फौजी मेरी कोन्या पार बसाई
अंग्रेजां नै देष लूट लिया भगतसिंह कै फांसी लाई
उनके राज ना सूरज छिपता क्यों लागी तेरै अंघाई
सारे मिलकै जिब देवां घेरा ना टोहया पावै अन्याई
सारी बात सही सैं तेरी पर मेरा कौण धीर बंधावै।।
देखी जागी जो बीतैगी रणबीर ना घणी घबरावै।।

कहतें हैं मुसीबतें तन्हाा नहीं आती। 1936,37 में इस सारे क्षेत्र में गन्ने की सारी फसल पायरिला की बीमारी ने बरबाद कर दी. गन्ने से गुड़ नहीं बना और राला एक से दो रुपये मन के हिसाब से बेचना पड़ा। इस प्रकार जमींदार बरबाद हो गये। इसी बीमारी के डर से अगले साल गन्ना बहुल कम बोया। इसी समय भयंकर अकाल भी पड़े थे इस इलाके में। प्रथम महायुद्ध में इस क्षेत्र से काफी लोग फौज में गये थे। इसके बाद सन् 35 के आस पास मेहर सिंह पर भी घर के हालात को देखते फौज में भरती होने का दबाव बना। सही सही साल तो नहीं बता पाये लोग मगर 35--37 के बीच ही मेहर सिंह फौज में भरती होता है। मेहरसिंह जब फौज में जाने लगता है तो प्रेम कौर रोने लगती है। मेहरसिंह का दिल भर आता है। वह अपने मन को काबू में करके प्रेम कौर को समझाता है। क्या बताया भला:
रागनी 6
टेक रौवे मतना प्रेम कौर मैं तावल करकै आ ल्यूंगा।।
थोड़े दिन की बात से प्यारी फौज मैं तनै बुला ल्यूंगा।।
1 भेज्या करिये खबर बरोणे कीए जरूरत नहीं तनै इब रोेणे की
सोचिये मतना जिन्दगी खोणे कीए ना मैं भी फांसी खा ल्यूंगा।।
2 जिले रोहतक मैं खरखोदा सैए बरोणा गाम एक पौधा सै
फौजी ना इतना बोदा सैए घर का बोझ उठा ल्यूंगा।।
3 बीर मरद की रखैल नहीं सैए बराबरी बिन मेल नहीं सै
हो आच्छी धक्का पेल नहीं सैए मैं बाबू नै समझा ल्यूंगा।।
4 मेहनत करकै खाणा चाहियेए फिरंगी मार भजाणा चाहिये
रणबीर सुर मैं गाणा चाहियेए ध्यान देश पै ला ल्यूंगा।।

मेहर सिंह फौज में चला गया। माहौल पूरी दुनिया में संकट का दौर था। दूसरे महायुद्ध के बादल मुडरा रहे थे। इधर मेहर सिंह की लिखी रागनियां लोगों बीच जाने लगी थी। मेहरसिंह की बनाई रागनी प्रेम कौर सुनती है। नल दमयन्ती का किस्सा सुनकर वह म नही मन बहुत कुछ सोचती है। मेहरसिंह को चिट्ठी लिखवाने का मन करता है। मगर मन मारकर रह जाती है। पर सोचते सोचते एक दिन गली में रह रहे अपने रिष्ते में देवर हवा सिंह से एक चिठ्ठी मेहर सिंह को लिखवाती है। क्या बताया भला:
रागनी 7
टेक नल दमयन्ती की गावै तूं कद अपनी रानी की गावैगा।।
नल छोड़ गया दमयन्ती नै तूं कितना साथ निभावैगा।।
1 लखमीचन्द बाजे धनपत नल दमयन्ती नै गावैं क्यों
पूरणमल का किस्सा हमनै लाकै जोर सुणावैं क्यों
अपणी राणी बिसरावैं क्यों कद खोल कै भेद बतावैगा।।
2 द्रोपदी चीर हरण गाया जा पर तनै म्हारे चीर का फिकर नहीं
हजारां चीर हरण होरे आड़ै तेरे गीत मैं जिकर नहीं
आवै हमने सबर नहीं जो ना म्हारे गीत सुणावैगा।।
3 देश प्रेम के गीत बणाकै जनता नै जगाइये तूं
किसान की बिपता के बारे में बढ़िया छन्द बनाइये तूं
इतनी सुणता जाइये तूं कद फौज मैं मनै बुलावैगा।।
4 बाबू का ना बुरा मानिये करिये कला सवाई तूं
अच्छाई का पकड़ रास्ता ना गाइये जमा बुराई तूं
कर रणबीर की मन चाही तूं ना पाछै पछतावैगा।।

फौज में भी माहौल काफी तनाव का था। फौजियों को छुटियां नहीं मिल रही थी। मेहरसिंह को प्रेम कौर के द्वारा लिखवाई गई चिट्ठी मिलती है। पढ़ता है और घर की याद आती है। जवाब में चिट्ठी लिखने की सोचता है। क्या बताया भला:
रागनी 8
टेक हवा सिंह के लिखी हाथ की चिट्ठी तेरी आई रै।।
तम्बू के म्हां पढ़ी खोल कै खुशी गात मैं छाई रै।।
1 दुनिया गावै राजे रानी या तो मेरी मजबूरी सै
किसान और फौजी पै गाणा बहोतै घणा जरूरी सै
दुनिया कहती आई सै नहीं होती ठीक गरूरी सै
काम करने आल्यां की क्यों खाली पड़ी तिजूरी सै
भारत देश आजाद करावां मिलकै कसम उठाई रै।।
2 कां डंका खेलण खातर पेड़ गाम का भावै सै
याद आवै सै खेल कबड्डी बख्त शाम का खावै सै
शिखर दोफारी ईंख नुलाणा जलन घाम का सतावै से
लिखते लिखते ख्याल मनै तेरे नाम का आवै सै
फौज में रहना आसान नहीं साथी नै बात बताई रै।।
3 अंग्रेजां नै मार भगावां यो देश आजाद कराणा सै
सुभाष चन्द्र बोस बताग्या ना पाछै कदम हटाणा सै
तोड़ जंजीर गुलामी की यो भारत नया बणाणा सै
जिन्दा रहे तो फेर मिलांगे नहीं तनै घबराणा सै
भोलेपन के कारण हमनै चोट जगत मैं खाई रै।।
4 मित्र प्यारे सगे सम्बन्ध्ी मेरा सब तम प्रणाम लियो
कहियो फौजी याद करै सै थोड़ा दिल थाम लियो
आजादी नै कुर्बानी चाहिये सुन मेरा पैगाम लियो
भगतसिंह क्यों फांसी तोड्या बात समझ तमाम लियो
मेहरसिंह ने जवाब दियो रणबीर करै कविताई रै।।

बात उस समय की है जब भारतवासी आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे। मेहरसिंह मोर्चे पर था। उसके पिता नन्दराम ने उसको एक चिट्ठी लिखवाई। क्या लिखवाता है भला:
रागनी 9
टेक ध्यान लगाकै सुणिये बेटा कहै बाबू नन्दराम तेरा।।
लंदन आले राज करैं सैं हो लिया देश गुलाम तेरा।।
1 मास्टर धोरैे ईस्ट इन्डिया का तनै नाम सुण्या होगा।
इमदाद करैं व्यापार फैला कै उनका काम सुण्या होगा।
कारीगरां के हाथ कटा दिये किस्सा आम सुण्या होगा।
गद्दारां मैं मुरब्बे बांटे यो हाल तमाम सुण्या होगा
भगतसिंह फांसी तोड़या हे भारत माता जाम तेरा।।
2 जो बढ़िया थी चीज म्हारी ये लेगे लन्दन मैं ठाकै
राज के उपर कब्जा करगे हम देखैं मुंह नै बाकै
मलमल खादी खत्म करे म्हारे आपस मैं सिर फुड़वाकै
तुरत आंख फुड़ाई चले जो उनकी तरफ लखाकै
बन्दर बांट इसी मचाई कर दिया काम तमाम तेरा।।
3 फौज मैं बेटा डरिये मतना बनिये वीर सिपाही तूं
तोप चलाइये दुश्मन पै करिये गात समाई तूं
भारत मैं आजादी ल्याकै करिये सफल कमाई तूं
कदम बढ़ा मत उल्टा हटिये ना खाइये नरमाई तूं
घाल दिये घमशान सरहद पैए होज्या रोशन गाम तेरा।।
4 आजादी अनमोल चीज सै शहीदों को है मेरा सलाम
सुखदेव भगतसिंह राजगुरु ये देरे देख तनै पैगाम
तन मन धन दिये वार मेहरसिंह इतना करिये मेरा काम
रणबीर सिंह नै गीत बनाया दोनों का सै बरोना गाम
प्रेम कौर कै बस्या रहै सै हरदम दिल मैं नाम तेरा।।

एक आम महिला कार्य कर्ता सुभाशचन्द्र बोस से कुछ बातें करती है। मेहर सिंह भी सुनता है वे बातें और फिर सोच कर एक रागनी बनाता है और सुनाता है फौजी भाईयों को। क्या बताया भला:
10
कांग्रेस क्यों छोडडी तनै इतना तो मनै बताईये तूं।।
गर्म दल क्यों बनाया था इतना मनै समझाईये तूं।।
के हालात बणे बोस इसे जो कांग्रेस छोड़नी पड़गी
सबतैं बडडी पार्टी तैं क्यों तनै बात मोड़नी पड़गी
एक एक बात आछी ढालां खोल कै दिखाईये तूं।।
माणस लड़ाकू और ज्ञानी कहते जनता नै लाग्या
तेरे प्रति मोह बहोत यो कहते जनता का जाग्या
सतो फतो सरतो साथ सैं मतना कति घबराईये तूं।।
न्यूं दिल कहता बोस मेरा तूं साच्चा लीडर म्हारा
कहते सारे हिन्दुस्तान मैं सबके दिल का तूं प्यारा
मनै दिल की बात कैहदी दिल की बात सुनाईये तूं।।
जय हिन्द जय हिन्द होरी यो पूरा भारत याद करै
बढ़ते जाओ बोस आगै रणबीर बी फरियाद करै
म्हारी जरुरत हो कदे तो सिंघापुर मैं बुलाईये तूं।।

मेहर सिंह को दूसरे फौजियों से अकाल के बारे में पता लगता है। बताते हैं कि किसानों की हालत बहुत कमजोर हो चली थी। खाने के लाले पड़ने लगे थे। वह सोचता है और किसान पर एक रागनी बनाता है। क्या बताया भला:
11 .मोलड़
मोलड़ बता बता कै तेरा आत्मविष्वास खो राख्या सै।।
अन्नदाता कैह कैह कै घणा कसूता भको राख्या सै।।
उबड़ खाबड़ खेत संवारे खूब पसीना बहाया रै
माटी गेल्यां माटी होकै नै भारत मैं नाम कमाया रै
तेरी मेहनत की कीमत ना कर्ज मैं डबो राख्या सै।।
किसान तेरी जिन्दगी का कई लोग मखौल उडाते
ये तेरी मेहनत लूट रहे तनै ए पाजी बी बताते
तेरी जमात किसानी सै जात्यां का जहर बो राख्या सै।।
जिस दिन किसानी देष की कठी होकै नारा लावैगी
उस दिन तसवीर कमेरे या जमा बदल जावैगी
तेरी कमाई का यो हिसाब अमीरां नै ल्हको राख्या सै।।
मजदूर तेरा साथ देवै तूं कड़वा लखावै मतना
दूसरां की भकाई मैं इसतैं दूरी बढ़ावै मतना
कहै रणबीर क्यं जात पै झूठा झगड़ा झो राख्या सै।।

12
सुभाश बोस के बारे में जब फौजी बरेली के अस्पताल में दाखिल था तो सोचता था। बहुत दिल से सम्मान करता था सुभाश बोस का फौजी मेहर सिंह। दूसरे फौजी बोस के जीवन के बारे में बताते हैं फौजी को तो मेहर सिंह एक रागनी बनाता है। क्या बताया भला.

गुलाम देश  मैं जन्म लिया देई देश की खातर कुरबानी
दिमाग मैं घूमें जावै मेरै थारी खास टोपी की निशानी
बदेश गये पढ़ने खातर आई सी एस पास करी
उड़ै देख नजारे आजादी के आकै डिग्री पाड़ धरी
भारत की आजादी खातर लादी थामनै पूरी जिन्दगानी।।
काांग्रेस मैं रहकै नै चाही लड़नी तनै लड़ाई दखे
तेरे विचार का्रन्ति कारी थे उडै़ ना पार बसाई दखे
बोल्या थाम खून दयो मैं दयूं तमनै आजादी हिन्दुस्तानी।।
सिंघापुर मैं जाकै थामनै आजाद हिन्द फौल बनाई
हिटलर तैं पड़े हाथ मिलाने चाहे था घणा अन्याई
लक्ष्मी सहगल साथ थारै सैं गेल्यां महिला बेउनमानी।।
हवाई जहाज मैं चल्या था कहैं उड़ै हादसा होग्या दखे
यकीन नहीं आया आज ताहिं षक के बीज बोग्या दखे
के लिख सकै तेरे बारे मैं यो रणबीर सिंह अज्ञानी।।
मेहरसिंह को फौज में बहुत सी बातों का पता लगता है। देश को आजाद करवाने के लिए फौज में एक खुफिया संगठन था। मेजर जयपाल इसका नेता था। इसी संगठन का एक फौजी असलम मेेहरसिंह से मिलता है। गांव में भी मुस्लिम परिवारों से मेहरसिंह की दोस्ती थी। बहुत सी बातें होती हैं। मेहसिंह उसके कहने पर किसानों पर एक रागनी बनाता है। क्या कहता है भला:
रागनी 13
टेक एक बख्त इसा आवैगा ईब किसान तेरे पै।
राहू केतू बणकै चढ़ज्यां ये धनवान तेरे पै।।
1 म्हारी कमाई लूटण खातर झट धेखा देज्यां रै
भाग भरोसे बैठे रहां हम दुख मोटा खेज्यां रै
धरती घर कब्जा लेज्यां रै बेइमान तेरे पै।।
2 सारी कमाई दे कै भी ना सूद पटै तेरा यो
ठेठ गरीबी मैं सुणले ना बख्त कटै तेरा यो
करैगा राज लुटेरा यो फेर शैतान तेरे पै।।
3 ध्रती गहणै धर लेंगे तेरी सारी ब्याज ब्याज मैं
शेर तै गादड़ बण ज्यागा तू इसे भाजो भाज मैं
कौण देवै फेर इसे राज मैं पूरा ध्यान तेरे पै।।
4 इन्सानां तै बाधू ओड़े डांगर की कीमत होगी
सरकार फिरंगी म्हारे देश मैं बीज बिघन के बोगी
अन्नदाता नै खागी ना बच्या ईमान तेरे पै।।
5 सही नीति और रस्ता हमनै ईब पकड़ना होगा
मेहनत करने आले जितने मिलकै लड़ना होगा
हक पै अड़ना होगा यो भार श्रीमान तेरे पै।।
6 मेहनतकश नै बी हक मिलै इसी आजादी चाहिये
आबाद होज्या गाम बरोना ना कति बर्बादी चाहिये
रणबीर सा फरियादी चाहिये जो हो कुर्बान तेरे पै।।

तीजों का त्यौहार आ जाता है। छुट्टी मिली नहीं। जनमानस में यह हरियाली तीज के नाम से जानी जाती है। यह मुख्यतरू स्त्रियों का त्योहार है। इस समय जब प्रकृति चारों तरफ हरियाली की चादर सी बिछा देती है तो प्रकृति की इस छटा को देखकर मन पुलकित होकर नाच उठता है। जगहण्जगह झूले पड़ते हैं। स्त्रियों के समूह गीत गाण्गाकर झूला झूलते हैं। मेहरसिंह को रात को सपना आता है और देखता है कि प्रेम कौर तीज झूलने जा रही है। क्या देखता है भला:

रागनी 14
टेक लाल चूंदड़ी दामण कालाए झूला झूलण चाल पड़ी।
कूद मारकै चढ़ी पींग पै देखै सहेली साथ खड़ी।।
1 झोटा लेकै पींग बधाई, हवा मैं चुंदड़ी लाल लहराई
उपर जाकै तले नै आई, उठैं दामण की झाल बड़ी।।
2 पींग दूगणी बढ़ती आवै, घूंघट हवा मैं उड़ता जावै
झोटे की हिंग बधावै, बाजैं पायां की छैल कड़ी।।
3 मुश्किल तै आई तीज, फुहारां मैं गई चुंदड़ी भीज
नई उमंग के बोगी बीज, सुख की देखी आज घड़ी।।
4 रणबीर पिया की आई याद, झूलण मैं आया नहीं स्वाद
नहीं किसे नै सुनी फरियाद, आंसूआं की या लगी झड़ी।।

मेहर सिंह को अपनी मां से बड़ा प्यार था। बचपन में बड़ी लोरी सुणाया करती थी। एक दिन फौजी सिंघापुर के बाजार में जा रहा था । कुछ महिलाएं अपने बच्चों के साथ बाजार में दिखाई देती हैं फौजी मेहर सिंह को अपनी मां की याद आ जाती है। तो मां के बारे में सोचने लगता है। क्या सोचता है भला:
रागनी 15
टेक तेरी छाती का पिया हुआ मनै दूध लजाया री।।
लोरी दे दे कही बात तनै केहरी शेर बणाया री।।

साधु भेष मैं लाखों रावण देश मैं कूद रहे सैं
पंडित मुल्ला सन्त महन्त पी सुलफा सूझ रहे सैं
पत्थर नै क्यों पूज रहे सैं ना कदे समझाया री।।

क्यूकर समाज बढ़ै आगै या बाड़ खेत नै खावै सै
मुट्ठी भर तो ऐश करैं क्यों किसान खड़या लखावै से।
खोल कै जो बात बतावै सै ना ऐसा पाठ पढ़ाया री।।

आच्छे और भूण्डे की लड़ाई धुर तै चाली आवै सै
बुराई नै दे मार अच्छाई वार ना खाली जावै सै
धनवान ठाली खावै सै यो कोण्या राज बताया री।।

यार दोस्त बैठ फुलसे पै हम न्यों बतलाया करते
गाम राम मैं के होरया सै जिकर चलाया करते
ल्हुक छिप कै बणाया करते रणबीर गीत जो गाया री।।

एक बार फौज में जाने के बाद मेहरसिंह बहोत दिन तक वापिस नहीं आया। प्रेम कौर खेत में जाते हुए सोचती है कि बड़ा बेदरद निकला आने का नाम ही नहीं लेता। क्या सोचती है भला:
रागनी 16
टेक सन पैंतीस मैं गया फौज मैं कोण्या आया मुड़कै।।
आज बी मेरै धेखा सा लागै जणों लिकड़या हो जड़कै।।

जाइयो नाश गरीबी तेरा हाली फौजी बणा दिया
फौज मैं भरती होकै उसनै नाम अपणा जणा दिया
पैगाम सबतैं सुणा दिया था गया बाबू तै लड़कै।।

मन का भोला तन का उजला सारा ए गाम कहै
बख्त उठकै सब भाइयां नै अपणी रामै राम कहै
करता नहीं आराम कहै कदै सांझ सबेरी तड़कै।।

पक्का इरादा जिद्द का पूरा बहोत घणा तूं पाया
छोड़ डिगरग्या घर अपणा नहीं फिरकै उल्टा आया
सिंघापुर मैं जावैफ गाया छन्द निराला घड़कै।।

एक दो बै छुट्टी आया वो आगै नाता तोड़ गया
देश प्रेम के गाणे गाकै लोगां का मन जोड़ गया
रणबीर सिंह दे मोड़ गया उड़ै मोर्चे उपर अड़कै।।

बहुत इन्तजार किया प्रेमकौर ने फौजी के छुट्टी आने का। तरह तरह की खबरें थी। भारत की फौज के बारे अफवाहें जारी थी। आजाद हिन्द फौज के लिए सुभाश चन्द्र बोस बहुत प्रयास कर रहे थे। मेहर सिंह का कोई अता पता नहीं लग रहा था। तब प्रेम कौर एक चिठ्ठी लिखवाती है। क्या भला.
17
लिख्या चिठ्ठी के दरम्यान,कुछ तो करो मेहर सिंह जी ध्यान, ल्यो मेरा कहया मान, जिसकै घरां बहू जवान, ना रुसानी चाहिये सै,ख्याल करिये।
समझ कै कार करो इन्साफी, गल्ती होतै दियो माफी
पापी ना हो कमा खुषहाल, जिसनै नहीं बहू का ख्याल,जो देवे कानां पर को टाल, उनै देती दुनिया गाल, ना खानी चाहिये सै, ख्याल करिये।
अपनी इज्जत खुद क्यूं खोवै, अगत के राह मैं कांटे बोवै
होवै या बीमार लाइलाज, जल्दी करदे किमै इलाज,होवै तनै बीर पै नाज
तूं तो गया फौज मैं भाज, बहू बुलानी चाहिये सै, ख्याल करिये।
बिना तेरे जवां उम्र ना कटती,इसमैं तेरी बी आबरु घटती,
डटती ना उठती जवानी,कर साजन मेहरबानी, मतना कर तूं मनमानी
कदे होज्या ना कोए नादानी, समझानी चाहिये सै, ख्याल करिये।
कहूं रणबीर सिंह तैं डरकै,ध्यान सब उंच नीच पै धरकै,
लिख कै बहू को दो बात, चिन्ता कम करो मेरे नाथ, मैं देउंगी थारा पूरा साथ
करकै घरां खूब खुभात,या दिखानी चाहिये से, ख्याल करिये।


सिंघापुर मैं भारत की फौज घिर जाती है। चारों तरफ के रास्ते बन्द हो जाते हैं। मेहरसिंह लोगों का हौंसला बंधाता है। मगर एक दिन उसे अपने घर की याद आती है तो क्या सोचता है भला वह कवि के शब्दों में:
रागनी 18
टेक सिंघापुर मैं फंस्या मेहरसिंह याद जाटणी आई।।
मन मैं घूमै गाम बरोना रात काटणी चाही।।

जर्मन और जापान फौज का बढ़ता आवै घेरा था
भारत के फौजी भाई अंग्रेज फौज का डेरा था
सिंघापुर काट्या दुनिया तै पुल काट कै गेरया था
अंग्रेजी सेना भाज लई थी पीला पड़ग्या चेहरा था
सुणा रागनी फौजी नै या फौज डाटणी चाही।।

साथ रहणिये संग के साथी उसनै यो पैगाम दिया
सिंघापुर मैं फौजी जितने सबका दिल फेर थाम दिया
म्हारे साथ क्यों ऐसी बनरी अन्दाजा लगा तमाम दिया
प्रेम कौर की याद सतावै ना फेर बी जिगर मुलाम किया
चिन्ता आई जो दिल मैं तत्काल बांटणी चाही।।

पड़े पड़े कै याद आया प्रेम कौर का वो फाग भाई
मक्की की रोटी गेल्यां बणाया सिरसम का उनै साग भाई
साहमी बैठ परोसी थाली बोल्या मुंडेरे पै काग भाई
कुछ दिन पाछै भरती होग्या खींच लेग्या यो भाग भाई
फिरया फिरंगी वायदा करकै झूठ चाटणी चाही।।

तीजां का त्यौहार सतावै ओ जामण उपर झूल्या
गाम को गोरा दिख्या उसनै नहीं खेतां नै भूल्या
प्रेम कौर की चिट्ठी आई ना गात समाया फूल्या
रणबीर सिंह नै मेहर सिंह का हाल लिख्या सै खुल्या
बणा रागनी फौजी की सब बात छांटणी चाही।।

प्रेम कौर गांव में ही रहती रही। मेहरसिंह का कोई अता पता नहीं चल रहा था। युद्ध के बादल मंडरा रहे थे। उसका जिकर चलता मगर सब कुछ सुनकर चुप रहा जाती। मेहरसिंह की याद में वह क्या सोचती है भलाः
रागनी 19
टेक तनै घणी सताई क्यों बाट दिखाई जमा निस्तरग्या निरभाग
बोल्या बैठ मुंडेरे काग।।

के बेरा तनै पिया जी मैं दिन काटूं मर पड़कै हो
परेशानी दिन रात रहै मैं रोउं भीतर बड़कै हो
तेरी फौज की नौकरी दखे कुणक की ढालां रड़कै हो
राम जी नै किसा खेल रचाया सोचूं खाट मैं पड़कै हो
कद छुट्टी आवै, मेरी आस बंधावै, जो चाहवै मेरा हो सुहाग।।
भूखी प्यासी रहकै घर मैं उमर गुजारुं फौजी मैं
सपने के म्हां कई बै देकै बोल पुकारुं फौजी मैं
निर्धनता बीमारी का क्या जतन बिचारुं फौजी मैं
तीर मिलै तो तुक कोन्या कित टक्कर मारुं फौजी मैं
रोज खेत कमाउं, बहोतै थक ज्याउं, रात की नींद मेरी जा भाग।।
ज्यान बिघन मैं घलगी कुँए जोहड़ मैं मनै मरना हो
तेरी प्यारी प्रेम कौर नै ज्यान का गाला करना हो
तेरी पलटन के कारण मैंने दुख बहोत घणा भरना हो
आजादी मेरी शैतान होगी नहीं किसे का सरना हो
यो अफसर तेरा, हुया बैरी मेरा, ईंकै लड़ियो जहरी काला नाग।।
हार चाहे हो जीत म्हारी मैं कोन्या त्यार मरण खातिर
सहम भरमते पशु फिरैं तेरा सुन्ना खेत चरण खातिर
कदे तो थोड़ा बख्त काढ़ लिये मनै याद करण खातिर
एक बर तो छुट्टी आज्या तूु मेरा पेटा भरण खातिर
लिखै रणबीर,ईब तेरी तहरीर , करै दुनिया के म्हां जाग।।
     

मेहरसिंह जिब अस्पताल में भरती होता हैै तो एक नर्स से बातचीत होती है। वह नर्स से उनके पेशे के बारे में बात करता है तो नर्स क्या बताती है भला:
रागनी 20
टेक माणस की ज्यान बचावैं अपणी ज्यान की बाजी लाकै।।
फेर बी सम्मान ना मिलता लिखदे अपणी कलम चलाकै।।

मरते माणस की सेवा मैं हम दिन और रात एक करैं
भुला दुख और दरद हंसती हंसती काम अनेक करैं
लोग क्यों चरित्रहीन का तगमा म्हारे सिर पै टेक धरैं
जिसी सम्भाल हम करती घर के नहीं देख रेख करें
घर आली नै छोड़ भाजज्यां देखै बाट वा ऐड्डी ठाकै।।

फ्रलोरैंस नाइटिंगेल नै नर्सों की इज्जत असमान चढ़ाई
लालटेन लेकै करी सेवा महायुद्ध मैं थी छिड़ी लड़ाई
कौण के कहवैगा उस ताहिं वा बिल्कुल भी नहीं घबराई
फेर दुनिया मैं नर्सों नै या मानवता की थी अलख जगाई
बाट देखते नाइटिंगेल की फौजी सारे ही मुंह बाकै।।

करैं पूरा ख्याल बीमारां का फेर घर का सारा काम होज्या
डाक्टर बिना बात डाट मारदे जल भुन काला चाम होज्या
कहवैं नर्स काम नहीं करती चाहवै उसकी गुलाम होज्या
मरीज बी खोटी नजर गेर दें खतम खुशी तमाम होज्या
दुख अपणा फेर बतादे रोवां हम किस धौरै जाकै।।

काम घणा तनखा थोड़ी म्हारा थारा शोषण होवै क्यों
सारे मिल देश आजाद करावां फेर जनता रोवै क्यों
बिना संगठन नहीं गुजारा जनता नींद मैं सोवै क्यों
बूझ अंग्रेज फिरंगी तै यो बीज बिघन के बोवै क्यों
रणबीर सिंह देवै साथ म्हारा ये न्यारे छन्द बणाकै।।
फागण का महीना था। मेहर सिंह का सभी घरवाले इन्तलार कर रहे थे कि अबकि बार तो फौजी जरुर छुट्टी आयेगा। होली का त्योहार मनाने का दिल था सबका। परन्तु मेहर सिंह को ऐन मौके पर छुट्टी से मना कर दिया जाता है। वह अच्छी तरह से सूचना भी झार पर नहीं दे पाता  िकवह नहीं आ पायेगा। प्रेम कौर क्या सोचती है भला:.
.21.
मनै पाट्या कोण्या तोल, क्यों करदी तनै बोल
नहीं गेरी चिट्ठी खोल, क्यों सै छुट्टी मैं रोल
मेरा फागण करै मखोल, बाट तेरी सांझ तड़कै।।
या आई फसल पकाई पै, या जावै दुनिया लाई पै
लागै दिल मेरे पै चोट, मैं ल्यूं क्यूकर इसनै ओट
सोचूं खाट के मैं लोट, तूं कित सोग्या पड़कै।।
खेतां मैं मेहनत करकै, रंज फिकर यो न्यारा धरकै
लुगाइयां नै रोनक लाई, कट्ठी हो बुलावण आई
मेरा कोण्या पार बसाई, तनै कसक कसूती लाई
पहली दुलहण्डी याद आई, मेरा दिल कसूता धड़कै।।
इसी किसी तेरी नौकरी, कुणसी अड़चन तनै रोकरी
अमीरां के त्योहार घणे सैं, म्हारे तो एकाध बणे सैं
खेलैं रलकै सभी जणे सैं, बाल्टी लेकै मरद ठणे सैं
मेरे रोंगटे खड़े तनै सैं, आज्या अफसर तै लड़कै।।
मारैं कोलड़े आंख मीचकै, खेलैं फागण जाड़ भींचकै
उड़ै आग्या था सारा गाम, पड़ै था थोड़ा घणा घाम
पाणी के भरे खूब ड्राम, दो तीन थे जमा बेलगाम
मनै लिया कोलड़ा थाम, मारया आया जो जड़कै।।
पहल्यां आली ना धाक रही, ना बीरां की खुराक रही
तनै मैं नई बात बताउं, डरती सी यो जिकर चलाउं
रणबीर पै बी लिखवाउं, होवे पिटाई हररोज दिखाउं
कुण कुण सै सारी गिणवाउं, नहीं खड़ी होती अड़कै।।





म्हारा होंसला करदे खूंडा उनका जो बढ़िया हथियार|
लक्षमी सहगल बीर मर्दानी ठाके खड़ी हुई तलवार|
मेहरसिंह नै दी किलकारी, देशप्रेम की ठा चिंगारी मेहरसिंह ने देश पर ज्यान कुर्बान कर दी। उसकी आवाज में कसक थी। उसने भारत के सपूतों को ललकार कर जाग्रत किया। कैसे भला:
रागनी 22
टेक मेहरसिंह नै ललकार दई थी, करकै सोच बिचार दई थी।
एक नहीं सौ बार दई थी, जंजीर गुलामी की तोड़ दियो।।

न्यूं बोलो सब कट्ठै होकै भारत माता जिन्दाबाद
गाम बरोना देश हमारा गोरयां नै कर दिया बरबाद
फिरंगी सैं धणे सत्यानासी, करके अपणी दूर उदासी
लाइयो मतना वार जरा सी, मुंह तोपां का मोड़ दियो।।

देश की माट्टी फेर पुकारी, कुर्बानी की लगा होड़ दियो।।

नन्दराम पिता नै आर्यसमाज का झण्डा हाथ उठाया था
पत्थर मतना पूजो लोगो यो असमान गुंजाया था
लाया था सारे कै नारा, जुणसा  लागै हमनै प्यारा
यो सै भारत देश म्हारा, सबके दिलां नै जोड़ दियो।।

रोम रोम मैं छाज्या सबकै मेहर सिंह के बोलां का रंग
आजाद हिन्द फौज चली जब अंग्रेज देख होग्या दंग
रणबीर नै जंग तसबीर बनाई, हरीचन्द नै करी सफाई
नई.नई कर कविताई, छंद लय सुर मैं जोड़ दियो।।

देश पर कुर्बान होते हुए मेहरसिंह के दिल में शायद यही सन्देश था हमारे लिए:
रागनी 23
तर्ज तेरे द्वार खड़ा एक जोगी
टेक लियो मेहर सिंह का सलाम
छोड़ चले हम देश साथियो तुम लियो मिलकै थाम
देश छोड़ चाल पड़े रैए भरे अंग्रेजां के पाप घड़े रै
जनता जागगी सारी
किसान संगठन खूब बनावैं, किते वकील सड़क पै आवैं
देश मैं उठी चिंगारी
बढ़ती जा सै फौज म्हारी, लियो मान मेरा पैगाम।।
म्हारे पाछे तै ख्याल राखियो, देश हवालै थारे साथियो
मतना तुम सो जाइयो
देश की खातर लड़ो लड़ाई, कट्ठे होकै लागे लुगाई
गीत खुशी के गाइयो
अंग्रेज नै मार भगाइयो, तज अपणा आराम।।
पाबन्दी ना लगै जाट पै, गीत सुरीले गावै ठाठ तै
बीर मरद और जवान
गीतां तै उठैगी झाल, कुर्बानी के हों न्यूं ख्याल
बणो भगतसिंह से महान
भारत मां की बणो स्यान, लियो यू समझ हमारा काम।।
बाबू नै दिया धक्का फौज में, न्यों सोचै था रहैगा मौज में
गए बदल उड़ै फेर ख्याल
मनै खून द्यो तम भाई, आजादी द्यूं थारे ताहिं
सुभाष बतागे फिलहाल
समझगे तत्काल मेहरसिंह, दियो रणबीर सर अन्जाम।।
     बीमार हो जाता है मेहर सिंह और मोर्चे से बरेली के अस्पताल में आ जाता है। इलाज के दोरान भी इसका दिमाग इसी पर काम करता रहा कि आजाद होने के बाद भारत किस तरह का होगा। उसको दुख था कि देष को बांटे जाने की साजिषें जोर पकड़ती जा रहीं थी। कवि ने कल्पना की है उस वक्त मेहर सिंह के दिमाग में चल रही रील की। क्या बताया भला.
रागनी.24.
आस बंधी अक भोर होवैगी षोशण जारी रहै नहीं ।।
लोक राज तैं राज चलैगा रिष्वत बीमारी रहै नहीं ।।
रिष्वतखोर मुनाफाचोर की स्वर्ण तिजूरी नहीं रहै
चेहरा सूखा मरता भूखा इसी मजबूरी नहीं रहै
गरीब कमावै उतना पावै बेगार हजूरी नहीं रहै
षरीफ बसैंगे उत मरैंगे या झूठी गरुरी नहीं रहै
फूट गेर कै राज करो फेर इसी बीमारी रहै नहीं ।।
करजे माफ होज्यांगे साफ आवैगा दौर सच्चाई का
बेरोजगारी भता कपड़ा लता हो प्रबन्ध दवाई का
पैंषन होज्या सुख तैं सोज्या होवै काम भलाई का
जच्चा बच्चा होज्या अच्छा मौका मिलै पढ़ाई का
मीठा पाणी चालै नल में यो पाणी खारी रहै नहीं।।
भाई चारा सबतैं न्यारा नहीं कोए धिंगताना हो
बदली खातिर ठाकै चादर ना मंत्री पै जाना हो
हक मिलज्या घीसा घलज्या सबनै ठौर ठिकाना हो
सही वोट डलैं ना नोट चलैं इसा ताना बाना हो
हम सबनै संघर्श चलाया अंग्रेज अत्याचारी रहै नहीं।।
पड़कै सोज्यांगे चाले होज्यांगे नहीं कुछ बी होवैगा
माथा पकड़ कै भीतर बड़कै फेर बूक मारकै रोवैगा
नया मदारी करैगा हुष्यारी हमनै बेच के सोवेगा
चैकस रहियो मतना सोइयो काटैगा जिसे बौवैगा
रणबीर सिंह बरोने आला कितै दरबारी रहै नहीं।।


प्रेम कौर का आज हम सबको यही सन्देश है कि फौजी मेहरसिंह ने देश प्रेमए देश सेवा व इन्सानियत का जो रास्ता चुना थाए आज हमारे देश पर फिर से काले बाद मंडरा रहे हैंए हमें उसी रास्ते पर आगे बढ़ना होगा। कवि के शब्दों में:
रागनी .25.
टेक सन ब्यालीस मैं हे फौजी नै दई सिंघापुर मैं ललकार।।
न्यों बोल्या द्यो साथ बोस का ठाकै हाथों मैं हथियार।।

जुल्म ढाये गोरयां नै करे जारी काले फरमान आड़ै
भगतसिंह से फांसी तोड़े लूटे म्हारे अरमान आड़ै
गान्धी आगै औछे पड़गे ये ब्रिटेन के इन्सान आड़ै
म्हारे देश के बच्यां की खोसी क्यों मुसकान आड़ै
ठारा सौ सतावण मैं चाली हे उदमी राम की तलवार।।

देख जुल्म अंग्रेजां के लग्या फौजी कै झटका सुणियो
भरके नै यो फूट गया उनके पापां का मटका सुणियो
बंदरबांट देख गोरयां की होया उसके खटका सुणियो
एक बै बढ़े पाछै फर ना उसनै खाया लटका सुणियो
सन पैंतीस मैं भरती होग्या छोड़ गाम की मौज बहार।।

गुलाम देश का मतलब के न्यों पूरा गया पकड़ फौजी
देश आजाद कराना घणा जरूरी न्यों गया अकड़ फौजी
बुझी चिंगारी सुलगाके नै बाल गया यो भकड़ फौजी
देश प्रेम की बना रागनी न्यों तोड़ गया जकड़ फौजी
जाट का होके तूं गावै रागनी ना भूल्या बाबू की फटकार।।

लखमी दादा नै सांग करया गाम बरोने मैं एक रात सुणो
पदमावत के किस्से मैं दोनां की थी मुलाकात सुणो
कद का देखूं बाट घाट पै तेरे आवण की या बात सुणो
माणस आवण की बात बणाई कर तुरत खुभात सुणो
स्टेज पै बुला दादा लखमी नै रणबीर करया भूल सुधार।।

मेहर सिंह की मौत के बारे में कई तरह की बातें चरचा में हैं। उसके दोस्तों ने घर सन्देश भेज दिया। उसके परिवार वालों को बहुत सदमा पहुंचा। प्रेम कौन चुपचाप बैठी रहने लगी। एक दिन क्या सोचती है भला:
रागनी 26
टेक जाल तोड़कै नै लिकड़ गया होग्या तूं आजाद पिया।।
साथ रहनियां संग के साथी करै हरियाणा याद पिया।।

जालिम और गुण्डे जनता नै नोच नोच कै खावैं
रिश्वतखोरी बाधू होरी ये कति नहीं शरमावैं
धनवानां की करैं चाकरी कमेरयां नै धमकावैं
के न्यों काढ़े अंग्रेज हमनै अक देशी लूट मचावैं
बेइमानां की चान्दी होरी सुनते ना फरियाद पिया।।

सारे देश मैं रुक्का पड़ग्या चैगरदें नै होग्या शोर
मेहनत म्हारी खोस लई उल्टा हमनै ए बतावैं चोर
तख्त राज का डोलै सै रौल्ला माच रया चारों और
तनै गा गा के धनवान बणे करते कोण्या मेरी गोर
चूल हिलादी उसकी जो धरी तनै बुनियाद पिया।।

तेरी रागनी टोहवण आज्यां मेरा किसे नै ख्याल नहीं
तेरी दमयन्ती दुखी फिरै किसे कै भी मलाल नहीं
असली बात भूलगे तेरी इसतै बडडा कमाल नहीं
सारा गाम तनै याद करै टूटया मोह का जाल नहीं
हरया भरया था गाम बरोना होता जा बरबाद पिया।।

आम सरोली पेड़ काट दिये काली जाम्मण सूक गई
गाम छोड़गे घणे जणे तो वुफछ नै मार या भूख गई
तेरी बुआ तो अपफसार बणगी बढ़िया बणा रसूक गई
बालकपन मैं अनपढ़ रैहगी रणबीर मौका चूक गई
तेरी रागनी कररी सैं मेरा सूना मन आबाद पिया।।

किस्सा चन्द्रद्रशेखर आजाद

                 
अठारह सौ सतावण की आजादी की पहली जंग में लाखों लोगों ने कुर्बानियां दीं। उसके बाद अंग्रेजों का दमन का दौर और तेज हो जाता है। देश में पनपी हिन्दू.मुस्लिम एकता को तोड़ने के कुप्रयास किये जाते हैं। किसानों पर उत्पीड़न बेइन्तहा किया जाता है। ऐसे समय में भावरा गांव में चन्द्रशेखर आजाद का जन्म होता है। क्या बताया भलारू
रागनी 1
तर्ज: चैकलिया
टेक दूर दराज का गाम भावराए पैदा चन्द्रशेखर आजाद हुया।।
दुपले पतले बालक तै घरए तेईस जुलाई नै आबाद हुया।।

मुगलां के पिट्ठू यूरोप केए सारे कै व्यौपारी छाये फेर दखे
ईस्ट इन्डिया कम्पनी नै चारोंए कान्हीं पैर फैलाये फेर दखे
अंग्रेजां नै भारत उपर शामए दामए दण्ड भेद चलाये फेर दखे
देश के नवाबां नै फिरंगी साहमीए गोड्डे टिकाये फेर दखे
किसानां नै करया मुकाबला उनका तै न्यारा अन्दाज हुया।।
ठारा सौ सत्तावण मैं आजादी की पहली जंग आई फेर
आजादी के मतवाले वीरां नै कुर्बानी मैं नहीं लाई देर
फिरंगी शासक हुया चौकन्ना गद्दारां की थी कटाई मेर
हटकै म्हारे भारत देश पै घणी कसूती छाई अंधेर
भारत की जनता नहीं मानी चाहे सब कुछ बरबाद हुया।।
भुखमरी आवै थी तो भूख तै कदे लोग मरे नहीं थे
अंग्रेजां के राज मैं अकाल खेत बचे हरे भरे नहीं थे
टैक्स वसूल्या गाम उजाड़े लोग फेर बी डरे नहीं थे
कुछ हुये गुलाम कई नै जमीर गिरवी धरे नहीं थे
विद्रोह की राही पकड़ी कुछ नै क्रान्ति का आगाज हुया।।
युगान्तर अनुशीलन संगठन उभर कै आये बंगाल मैं
कांग्रेस मैं गान्धी का स्वदेशी सहज सहज आया उफान मैं
चोरा चोरी मैं गोली चाली चैकी जलाई इसे घमसान मैं
गान्धी नै वापिस लिया निराशा छाई थी नौजवान मैं
रणबीर चन्द्रशेखर इसे बख्त क्रान्ति की बुनियाद हुया।।

गांव के हालात काफी खराब थे। चन्द्रशेखर का परिवार भी आर्थिक स्तर पर कमजोर था। चन्द्रशेखर गांव से चलकर शहर में आ जाता है और छोटा.मोटा काम ढूंढ लेता है। एक कमरा रहने वाले कई। क्या बताया भला:
रागनी.2                       तर्ज: चोकलिया
गाम तै चाल चन्द्र शेखर शहर कै मैं आया फेर।।
छोटा मोटा काम मिल्या रैहण का जुगाड़ बनाया फेर।।
एक कमरे मैं कई रहवैं मुश्किल सोना होज्या था
आधी बारियां भूखे प्यासे भीतरला सबका रोज्या था
आजाद देखकै हालत नै वो अपणा आप्पा खोज्या था
बीड़ी पी पी कै धुमा भरज्या कौन नींद चैन की सोज्या था
देख हालत मित्रा प्यारयां की आजाद दुख पाया फेर।।
दिल मैं सोची शहर मैं खामखा आकै ज्यान फंसाई
उल्टा जांगा गाम मैं तो कसूती होवैगी जग हंसाई
आड़े क्यूकर रहूं घुट कै कोन्या बात समझ मैं आई
तिरूं डूबूं जी होग्या उसका हुई मन तै खूब लड़ाई
न्यों तो बात बणैगी क्यूकर उसनै दिल समझाया फेर।।
गरीबी के के काम करवादे इसका बेरा पाट गया
फिरंगी की लूट का अहसास उंका कालजा चाट गया
सोच सोच इन बातां नै वो दिल अपणे नै डाट गया
जी हजूरी उनकी करने तै आजाद जमा नाट गया
क्रान्ति का झन्डा आजाद नै पूरे मन तै ठाया फेर।।
भगतसिंह राजगुरु तै उसनै तार भिड़ाये फेर
सुखदेव शिव वर्मा हर बी उनकी गेल्यां आये फेर
कई महिला साथ आई इन्कलाब के नारे लाये फेर
जनून छाया सबमैं घणा मुड़कै नहीं लखाये फेर
रणबीर मरने तक उसनै था वचन निभाया फेर।।
वहां शहर में चन्द्रशेखर सहज सहज क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आ जाता है। सुखदेव, राजगुरु, शिव वर्मा, भगतसिंह के साथ उसका तालमेल बनता है। वह आजादी की लड़ाई का एक बहादुर सिपाही का सपना देखने लगता है। वह अपनी जिन्दगी दांव पर लगाने की ठान लेता है। क्या बताया फिर.
रागनी.3
तर्ज: चौकलिया
चन्द्रशेखर आजाद नै अपणी जिन्दगी दा पै लादी रै।।
फिरंगी गेल्या लड़ी लड़ाई उनकी जमा भ्यां बुलादी रै।।

फिरंगी राज करैं देश पै घणा जुलम कमावैं थे
म्हारे देश का माल कच्चा अपणे देश ले ज्यावैं थे
पक्का माल बना कै उड़ै उल्टा इस देश मैं ल्यावैं थे
कच्चा सस्ता पक्का म्हंगा हमनै लूट लूट कै खावैं थे
भारत की फिरंगी लूट नै आजाद की नींद उड़ादी रै।।
किसानां पै फिरंगी नै बहोत घणे जुलम ढाये थे
खेती उजाड़ दई सूखे नै फेर बी लगान बढ़ाये थे
जो लगान ना दे पाये उनके घर कुड़क कराये थे
किसानी जमा मार दई नये नये कानून बनाये थे
क्रान्तिकारियां नै मिलकै नौजवान सभा बना दी रै।।
जात पात का जहर देश मैं इसका फायदा ठाया था
आपस मैं लोग लड़ाये राज्यां का साथ निभाया था
व्हाइट कालर आली शिक्षा मैकाले लेकै आया था
साइमन कमीशन गो बैक नारा चारों कान्हीं छाया था
म्हारी पुलिस फिरंगी नै म्हारी जनता पै चढ़ा दी रै।।
जलियां आला बाग कान्ड पापी डायर नै करवाया था
गोली चलवा मासूमां उपर आतंक खूब फैलाया था
मनमानी करी फिरंगी नै अपना राज जमाया था
  जुल्म के खिलाफ आजाद नै अपना जीवन लाया था
रणबीर नै तहे दिल तै अपणी कलम चलादी रै।।
1921 में असहयोग आन्दोलन की लहर उठती है पूरे देश में। जगह.जगह पर प्रदर्शनए धरने किये जाते हैं। महात्मा गान्धी इस आन्दोलन के अग्रणी नेता थे। उधर ज्योतिबा फुले अपने ढंग से समाज सुधार आन्दोलन में सक्रिय थे। पुर्नुत्थान के साथ साथ नवजागरण का एक माहौल पूरे देश में बन रहा था। क्या बताया भला:
रागनी 4
उन्नीस सौ इक्कीस मैं असहयोग आन्दोलन की जंग छिड़ी।।
सारे हिन्दुस्तान की  जनता फिरंगी गेल्या आण भिड़ी।।

जलूस काढ़ते जगां जगा पै गांधी की सब जय बोलैं
भारत के नर नारी जेल गये जेल के भय तै ना डोलैं
कहैं जंजीर गुलामी की खोलैं आई संघर्ष की आज घड़ी।।
नौजवान युवक युवती चाहवैं देश आजाद कराया रै
कल्पना दत्त नै कलकत्ता मैं चला गोली सबको बतलाया रै
आजादी की उमंग उनमैं भरी नौजवान सभा बनी कड़ी।।
ज्योतिबा फुले का चिंतन दलितां नै बार बार पुकारै था
मनु नै जो बात लिख दी उन बातां नै जड़ तै नकारै था
नवजागरण की चिंगारी देश मैं सुलगी कई जगां बड़ी।।
एक माहौल आजादी का चारों कान्हीं जन जन मैं छाया रै
गांधी और भगतसिंह का विचार आपस मैं टकराया रै
रणबीर सिंह नै सोच समझ कै नये ढंग की कली घड़ी।।
चन्द्रशेखर आजाद अपना रहने का स्थान बदलता रहता था। पुलिस क्रान्तिकारियों के पीछे लगी रहती। सातार नदी के किनारे आजाद एक कुटिया में साधु के भेष में रहने लगता है। पास के गांव में कत्ल हो जाता है। पुलिस की आवाजाही बढ़ जाती है। चन्द्रशेखर कैसे बचाता है अपने आपको:
रागनी 5
सातार नदी के काठै आजाद एक कुटिया मैं आया।।
साधु भेष धार लिया नहीं पता किसे ताहिं बताया।।

जिब बी कोए साथी पुलिस की पकड़ मैं आज्या था
आजाद ठिकाना थोड़ी वार मैं कितै और बणाज्या था
इसे सूझबूझ के कारण पुलिस तै ओ बच पाया।।
पास के गाम मैं एक बै किसे माणस का कत्ल हुया
चरचा होगी सारे कै फेर पुलिस का पूरा दखल हुया
पुलिस दरोगा तफतीस करी कुटी मैं फेरा लाया।।
दरोगा नै देख कै आजाद बिल्कुल ही शान्त रहया
ध्यान तै सुण्या सब कुछ जो दरोगा नै उंतै कहया
बोल्या धन्यवाद दरोगा जी आगै फेर जिकर चलाया।।
साधुआं  का ठोर ठिकाना यू सारा संसार दरोगा जी
छोड़ दिया बरसां पहलम यू घर परिवार दरोगा जी
रणबीर आजाद नै न्यों दरोगा तै पीछा छटवाया।।
बाबा जी की मढ़ी में पुलिस अपना डेरा डाल देती है। क्रान्तिकारी मढ़ी का निरीक्षण करने पहुंचते हैं कि पुलिस वालों को क्या ठिकाने लगाया जा सकता है। क्या बताया भला:
रागनी 6
क्रान्तिकारी टोली आई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
दोनूआं नै शीश नवाई रे बाबा जी की मढ़ी मैं।।

भगतां की टोली मैं उननै पूरी सेंध लगाई फेर
चीलम की उनकी बी थोड़ी वार मैं बारी आई फेर
आजाद तै चीलम पकड़ाई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
कदे बीड़ी बी पी कोन्या चीलम हाथ मैं आई
घूंट मारकै चीलम फेर राजगुरु तै पकड़ाई
राजगुरु नै दम लगाई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
मढ़ी का पूरा पूरा उसनै हिसाब लगाया फेर
माणस घणे मारे जांगे उनकी समझ आया फेर
आंख तै आंख मिलाई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
प्रणाम करकै बाबा जी नै दोनूं उल्टे आये थे
बाकी टोली आल्यां तै मढ़ी के हालात बताये थे
रणबीर करै कविताई रै बाबा जी की मढ़ी मैं।।
दो पुलिस वालों से आजाद व राजगुरु का आमना सामना मढ़ी में हो जाता है। साधु को अपनी चिन्ता होती है। पुलिस वाले अपने अपने ढंग से इनाम पाने की सोचते हैं। वहां कैसे क्या होता है। क्या बताया भला:
रागनी 7
आहमी साहमी होगे चारों एक पल तक आंख मिली।।
न्यारे न्यारे दिमागां मैं न्यारे  ढाल की बात चली।।
साधु सोचै फंसे खामखा यो आजाद मनै मरवावैगा
आजाद सोचै दोनूं पुलिसिया क्यूकर इनतै टकरावैगा
एक सिपाही सोचै आजाद पै इनाम तै थ्यावैगा
दूजा सोचै नाम हो मेरा इनाम सारा मेरे बांटै आवैगा
के तूं आजाद सै सुण कै बी चेहरे पै उसके हंसी खिली।।
नहीं चौंकया आजाद जमा सादा भोला चेहरा बनाया
साधु तो हमेशा आजाद हो सै कोए भाव नहीं दिखाया
पुलिसिया कै शक होग्या पुलिस थाने का राह बताया
हनुमान की पूजा करनी हमनै वार हो बहाना बनाया
दरोगा तै हनुमान बडडा कैहकै उसकी थी दाल गली।।
आगरा शहर क्रान्तिकारियों के शहर की तरह जाना जाने लगा था। आजाद कभी आगरा कभी कानपुर अपने डेरे बदलता रहता था। दूसरों को भी चैकन्ना रहने को कहता था। एक बार एक जगह आजाद फंस जाता है तो कैसे निकलता है। क्या बताया भला:
रागनी 8
तर्ज: चौकलिया
आगरा शहर एक बख्त क्रान्तिकारियां का शहर बताया।।
फरारी जीवन बिता रहे चाहते अपणा आप छिपाया।।

  कदे झांसी और कदे आगरा मैं आकै रहवै आजाद
जितने दिन रहै आगरा रहो चैकन्ने कहवै आजाद
बारी बारी सब पहरा देते ढील नहीं सहवै आजाद
साथी रात पहरे पै सोग्ये उठकै सब लहवै आजाद
पहरा देने आला साथी फेर बहोत करड़ा धमकाया।।
साथी सुणकै चुप रैहग्या उसकी आंख्या पानी आग्या रै
देख कै रोवन्ता उस साथी नै आजाद घणा दुख पाग्या रै
ड्यूटी पहलम खत्म करादी खुद पै बेरा ना के छाग्या रै
कोली भरली प्यार जताया उसनै अपनी छाती लाग्या रै
अनुशासन और प्यार का आजाद नै जज्बा दिखाया।।
कानपुर मैं दोस्त धेारै आजाद नै कुछ दिन बिताये
कांग्रेसी माणस व्यापारी लेन देन करते बतलाये
सलूनो का दिन पत्नी नै बूंदी के लड्डू बनवाये
परांत मैं भरकै चाल पड़ी पुलिस दरोगा घर मैं आये
पुलिस आले कै बांध राखी उसनै भाई तत्काल बनाया।।
बोली माड़ा झुकज्या नै च्यार लाड्डू उसतै थमा दिये
परांत सिर पै आजाद कै दरोगा जी बेवकूफ बना दिये
इसा बर्ताव देख दरोगा नै सब भेद बता दिये
फिरंगी नजर राखता जिनपै नाम सबके गिना दिये
रणबीर बरोने आले नै यो आजाद घणा कसूता भाया।।
झांसी के पास राजा का पिछलग्गू एक सरदार था। उसके यहां रहकर आजाद ने कुछ वक्त बिताया। यहां कई लोगों को निशानेबाज बनाया। राजा के बैरी क्रान्तिकारियों को उकसाते थे कि राजा को मारकर धन लूट लो। मगर आजाद इसे ठीक नहीं मानता . क्या बताया भला:
रागनी 9
तर्जरू चैकलिया
झांसी धौरे एक राजा का चमचा सरदार बताया रै।।
आजाद नै थोड़े दिन उड़ै अपणा बख्त बिताया रै।।

झांसी के क्रान्तिकारी निशाना लाणा सिखा दिये
अचूक निशाना साधन मैं पारंगत सभी बना दिये
राजा मार कै धन जुटाओ रास्ते कुछ नै बता दिये
बैरी राजा के सलाह देवैं अन्दाजे आजाद लगा लिये
टाल मटौल कर आजाद नै मौका टाल्या चाहया रै।।
राजा के बैरी बोले के पाप जुल्मी नै मारण का
कंस मारण खातर के पाप कृष्ण रूप धारण का
के हरजा खोल बता मौत के घाट तारण का
आजाद बोल्या मसला सै गहराई तै विचारण का
हिंसा म्हारी मजबूरी सै आजाद नै समझाया रै।।
या मजबूरी म्हारे पै शासक आज के थोंप रहे
झूठ भकावैं और लूटैं चाकू कसूते घोंप रहे
सच्चाई का लाग्या बेरा माणस सारे चोंक रहे
हम चटनी गेल्यां खाते ये लगा घीके छोंक रहे
हत्यारे कोन्या हम दोस्तो चाहते देश आजाद कराया रै।।
नेक इरादा नेक काम का ध्येय सै म्हारा यो
नेक तौर तरीके अपणावां सार बात का सारा यो
आजादी म्हारी मंजिल सै फरज म्हारा थारा यो
रणबीर सिंह की कविताई सही लिखै नजारा यो
नरहत्या का आजाद विरोधी उसनै इसा जज्बा दिखाया रै।।
साधु बाबा के पास अमूल्य रतन था। उसे बाबा से हथिया कर क्रान्तिकारी हथियार खरीदना चाहते थे। सलाह की। बाबा की कुटी देखने गये। मगर कई आदमी मारे जाने के भय से उन्होंने यह योजना नहीं बनाई। आजाद और क्रान्तिकारी किसी के जीवन से खिलवाड़ नहीं करते थे। क्या बताया भला:
रागनी 10
तर्ज: चौकलिया
अमूल्य रतन उसके धौरे साधु का बेरा पाड़ लिया।।
गंगा जी के घाट कुटिया राह गोन्डा ताड़ लिया।।

बैठ कै बतलाये सारे बाबा जी पै रतन ल्यावां
बेच कै उसनै हथियारां का हम भण्डार खूब बढ़ावां
योजना बना घणी पुख्ता रात अँधेरी  मैं जावां
डरा धमका बाबा जी नै योजना सिरै चढ़ावां
सोच हथियारां का फेर थोड़ा घणा जुगाड़ लिया।।
गुलाबी ठण्ड का मौसम रात जमा अन्धेरी थी
अँधेरे बीच चसै दीवा छटा न्यारी बखेरी थी
रात नौ बजे भगतां की संख्या उड़ै भतेरी थी
चरस की चीलम चालैं दुनिया तै आंख फेरी थी
गांजा पीवैं जोर लगाकै कर घर कसूता बिगाड़ लिया।।
राजगुरु आजाद नै तुरत स्कीम एक बनाई थी
शामिल होगे साधुआं मैं चीलम की बारी आई थी
मारी घूंट अपणी बारी पै देर कति ना लाई थी
चीलम पीगे जिननै कदे बीड़ी ना सुलगाई थी
सारी बात निगाह लई देख कुटी का कबाड़ लिया।।
वापिस आकै न्यों बोले काम नहीं सै होवण का
माणस घणे मारे जावैंगे माहौल बणैगा रोवण का
रतन बदले इतने माणस तुक नहीं सै खोवण का
चालो उल्टे चालांगे समों नहीं जंग झोवण का
रणबीर नहीं आजाद नै जीवन से खिलवाड़ किया।।
साइमन कमीशन भारत में आता है। उसका विरोध पूरे भारत में होता है। पंजाब में भी विरोध किया जाता है। अंग्रेजों की पुलिस अत्याचार करती है। लाला लाजपतराय पर लाठियां बरसाई जाती हैं। वे शहीद हो गये। बदला लेने को क्रान्तिकारियों ने साइमन को मारने का प्रण किया। साण्डरस मारा जाता है। चानन सिपाही क्रान्तिकारियों के पीछे भागता है भगतसिंह और राजगुरु के पीछे। आजाद गोली चलाता है चानन सिंह को गोली ठीक निशाने पर लगती है। आजाद को बहुत दुख होता है चानन सिंह की मौत का। क्या बताया भला:
रागनी 11
तर्ज: चौकलिया
साइमन कमीशन गो बैक नारा गूंज्या आकाश मैं।।
साण्डर्स कै गोली मारकै पहोंचा दिया इतिहास मैं।।

राजगुरु की पहली गोली साण्डर्स मैं समा गई थी
भगतसिंह की पिस्तौल निशाना उनै बना गई थी
चानन सिंह सिपाही कै लाग इनकी हवा गई थी
पाछै भाज लिया चानन बन्दूक उसनै तना दई थी
दोनूआं के बीच कै लाया अचूक निशाना खास मैं।।
थोड़ी सी चूक निशाने की घणा पवाड़ा धर जाती
भगतसिंह कै राजगुरु का सीना छलनी कर जाती
आजाद जीवन्ता मरता क्रान्तिकारी भावना मर जाती
आजादी के परवान्यां के दुर्घटना पंख कतर जाती
आजाद गरक हो ज्याता आत्मग्लानि के अहसास मैं।।
चानन सिंह के मारे जाने का अफसोस हुया भारी था
आजाद नै जीवन प्यारा था वो असल क्रान्तिकारी था
खून के प्यासे आतंकवादी प्रचार यो सरकारी था
सूट एट साइट का उड़ै फरमान हुया जारी था
विचलित कदे हुया कोन्या भरया हुआ विश्वास मैं।।
कठिन काम तै घबराया ना चन्द्रशेखर की तासीर थी
आजाद भारत की उसकै साहमी रहवै तसबीर थी
इसकी खातर दिमाग मैं कई ढाल की तदबीर थी
आजाद नै चैबीस घन्टे दीखैं गुलामी की जंजीर थी
रणबीर आजाद कैहरया फायदा म्हारे इकलास मैं।।
एक दिन राजगुरु एक महिला की तसवीर वाला एक कैलेंडर लाकर कमरे में टांग देता है। आजाद कैलेंडर देखकर नाराज होता है और उतार कर फैंक देता है। दोनों में कहासुनी होती है। क्या बताया भला:
रागनी 12
आगरा मैं थे क्रान्तिकारी उस बख्त की बात सुणाउं मैं।।
आजाद और राजगुरु बीच छिड़या यो जंग दिखलाउं मैं।।

राजगुरु नै फोटो आला कलैण्डर ल्याकै टांग दिया
आजाद नै टंग्या देख्या अखाड़ बाढ़ै वो छांग दिया
बोल्या उलझ तसबीरां मैं फिसलैंगे न्यों समझाउं मैं।।
राजगुरु आया तो बूझया कलैंडर क्यों पाड़ बगाया
आजाद बोल्या क्रान्ति का क्यों तनै बुखार चढ़ाया
क्यों सुन्दर तसबीर पाड़ी यो सवाल बूझणा चाहूं मैं।।
सुन्दर महिला की थी ज्यांतै पाड़ी सै तसबीर मनै
दोनूं काम साथ ना चालैं पाई अलग तासीर मनै
राजगुरु भाई गुस्सा थूक दे कोन्या झूठ भकाउं मैं।।
एक गाडडी के दो पहिये बीर मरद बतलाये सैं
सुन्दरता बिना संसार किसा सवाल सही ठाये सैं
आजाद मुलायम हो बोल्या आ बैठ तनै समझाउं मैं।।
सन् 1921 में असहयोग आन्दोलन बड़े पैमाने पर शुरू हो जाता है। नवजागरण की लौ शहर गाम हर जगह पहोंचने लगती है। गांधी और भगतसिंह के विचार लोगों के सामने आते हैं। उनके बीच टकराव भी सामने आता है। क्या बताया भला:
रागनी 13
उन्नीस सौ इक्कीस मैं असहयोग आन्दोलन की जंग छिड़ी।।
पूरे भारत की जनता फिरंगियां गेल्यां फेर आण भिड़ी।।

जलूस काढ़ते जगां जगां पै गांधी की सब जय बोलैं
भारत के नर नारी जेल गये जेल के भय तैं ना डोलैं
कहैं जंजीर गुलामी की खोलैं आई संघर्ष की आज घड़ी।।
नौजवान युवक युवती चाहवैं देश आजाद कराया
कल्पना दत्त नै कलकत्ता मैं चला गोली सबको बताया
आजादी की उमंग सबमैं भरी नौजवान सभा बनी कड़ी।।
ज्योतिबा फुले का चिंतन दलितां नै बार बार पुकौर था
मनु नै जो बात लिख दी उन बातां नै जड़तै नकारै था
नवजागरण की चिंगारी देश मैं सुलगै जगां जगां पड़ी।।
एक माहौल आजादी का चारों कान्ही जन जन मैं छाया फेर
गांधी भगतसिंह का विचार आपस मैं टकराया फेर
कहै रणबीर बरोने आला ढीली होई फिरंगी की तड़ी।।
एक हिस्सा क्रान्तिकारियों को आतंकवादी के रूप में देखता है। फिरंगी भी क्रांतिकारियों के बारे में आतंकवाइी कर इस्तेमाल करके तरह तरह की भ्रान्तियां फैलाने का पुरजोर प्रयास करते हैं। खूनी संघर्ष और अहिंसा के बीच बहस तेज होती है। क्या बताया भला:
रागनी 14
क्रान्किारी हत्यारे कोन्या सन्देश दुनिया मैं पहोंचाया रै।।
जीवन तै प्यार घणा सै परचे मैं लिख कै बतलाया रै।।

जीवन तै प्यार ना होतै बढ़िया जीवन ताहिं क्यों लड़ैं
अत्याचार और जुलम के साहमी हम क्रान्तिकारी क्यों अड़ैं
फिरंगी साथ जरूर भिड़ैं आजादी का सपना भाया रै।।
शोषणकारी चालाक घणा पुलिस फौज के बेड़े लेरया
म्हारे साथी कर कर भरती भारत देश नै गेड़े देरया
खूनी संघर्ष कमेड़े लेरया फिरंगी समझ पाया रै।।
तख्ता पलट करने नै हथियार उठाने पड़ ज्यावैं
घणा नरक हुया जीवन सब घुट घुट कैनै मर ज्यावैं
नींव जरूरी धरज्यावैं समाज बराबरी का चाहया रै।।
समतावादी समाज होगा ये शोषण भारी रहै नहीं
बिना ताले के घर होंगे कितै चोरी जारी रहै नहीं
लूट खसोट म्हारी रहै नहीं रणबीर छन्द बनाया रै।।

रागनी 15
फिरंगी सरकार मूंगी तै अपणी बात सुणाणी चाही।।
असैम्बली मैं बम फैंकण की फेर पुख्ता स्कीम बनाई।।

आठ अप्रैल का दिन छांट्या थोड़ा खुड़का करने का
अहिंसा के  ढंग तै फिरंगी सोच्या नहीं सै डरने का
जनता मैं जोश भरने का सही रास्ता टोहया भाई।।
दमनकारी कानून देश पै वे लगाया चाहवैं थे
क्रान्तिकारी बात अपणी उड़ै पहोंचाया चाहतैं थे
फिरंगी नै बताया चाहवैं थे तूं सै जुलमी अन्याई।।
बम फैंक्या उसकी गेल्यां बांट्या एक परचा था
पूरी दुनिया मैं उस दिन हुया गजब चरचा था
कुर्बानी का भारया दरजा था भगतसिंह नै फांसी खाई।।
परचे मैं लिख राख्या था किसा भारत हम बणावांगे
सबनै शिक्षा काम सबनै हिन्द की श्यान बढ़ावांगे
जात पात नै मिटावांगे रणबीर की या कविताई।।
रागनी 16
शचीन्द्र नाथ की संगिनी प्रतिभा नै शोक जताया था।।
राख जलूस था बड़ा भारी जो पार्क मैं आया था।।
बोली खुदीराम बोस की राख का ताबीज बनाया था
अपणे बालकां के गले मैं जनता नै वो पहनाया था
प्रतिभा नै समझाया था जनून जनता मैं छाया था।।
वा बोली राख आजाद की एक चुटकी लेवण आई
इसा क्रान्तिकारी कित पावै अंग्रेजां की भ्यां बुलाई
राख नहीं टोही पाई कुछ हिस्सा ए बच पाया था।।
आजाद इस तरियां फेर आजाद हुया संसार तै
पुलिस घबराया करै थी आजाद की एक हुंकार तै
वा बोली सरकार तै आजाद ना कदे घबराया था।।
फिरंगी का राज रणबीर ईंका खात्मा करां मिलकै
जात पात नै भुला कै आजादी खातर मरां मिलकै
शीश अपणे धरां मिलकै आजाद नै न्यों फरमाया था।।
रागनी 17
जीवन्ते जी हाथ ना आउं आजाद नै किया ऐलान था।।
कदे पुलिस हाथ ना आया घणा सजग इनसान था।।

सताईस फरवरी का दिन इसका हाल सुणाउं
सन उनीस सौ इकतीस का मैं सही साल बताउं
आजाद घिरया दिखाउं अल्प्रैफड पार्क का मैदान था।।
बैठ पार्क मैं लिया सपना आजाद भारत देश का
चित्रा दिल मैं उभरया सब रंगा के समावेश का
इन्तजार था सन्देश का ना पुलिस का अनुमान था।।
दोनूं कान्हीं तै दनादन गोली चाली पार्क मैं डटकै
कैसे बेरा लाया पुलिस नै बात आजाद कै खटकै
पुलिस पास ना फटकै डर छाया बे उनमान था।।
अचूक निशाने का माहिर चन्द्रशेखर आजाद था
भारत देश आजाद कराणा पूरा उसनै आगाज था
रणबीर नया अन्दाज था देना चाहया फरमान था।
रागनी 18
अपणी पिस्तौल सिर अपणा जीन्ते जी काबू कोन्या आया।।
मरे मरे पै गोली दागी इतना डर था पुलिस पै छाया।।

अल्फ्रेंड पार्क मैं आहमी साहमी दनादन गोली चाली
पुलिसिये कई जणे थे ऐकले नै कमान सम्भाली
निशाना गया नहीं खाली अंग्रेज अफसर घबराया।।
यूनिवर्सिटी के छात्रा उड़ै इकट्ठे हुये इतनी वार मैं
खबर मौत की एक दम फैली सारे ही बाजार मैं
पार्क के भीतर बाहर मैं कप्तान पुलिस का लखाया।।
देख भीड़ पार्क के म्हां पुलिस नै गोली चलानी चाही
कलैक्टर हालात समझग्या गोली की करी मनाही
पुलिस बदलगी अपणी राही बिना गोली काम चलाया।।
इलाहाबाद पूरा बन्द होग्या हड़ताल हुई थी भारी
पान खोमचे आले शामिल थे अर तांगे की सवारी
रणबीर कठ्ठी जनता सारी नारा इन्कलाब का लाया।।

सद्दाम

सर्वाधिकार
शीतल प्रकाशन
वार्ता : नफे सिंह गांव बिलासपुर का रहने वाला है। भारत में नौकरी
नहीं मिली तो दे ले के इराक सन् 1988 में चला जाता है। पहले इराक पर
हमले में भी वह वहां था। उसकी घरवाली सरतो गांव में ही है। नफे सिंह
अब फिर देखता है अमरीका की दादागिरी का खेल। अपने दोस्त अमन से
चरचा करता है। अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने इराक के खिलाफ एक तरफ
युद्ध का ऐलान कर रखा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के नियमों और
अनुरोधों को भी ताक पर रखकर अमरीका इराक पर धवा बोलने की घोषणएं
कर रहा है। पूरी दुनिया में केवल ब्रिटेन ही अमरीका का पैरोकार बना हुआ
है। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षक दल को इराक में
जन.संहारक हथियारों की मौजूदगी का कोई सबूत नहीं मिला है। इराक की
जनता में साम्प्रदायिक समुदायों के मतभेदों को अमरीका हवा देता रहता है।
क्या बताया कवि ने भला:
यू एन ओ कती पढ़ण बिठादी कर दिया गुड़ का राला रै।।
कहै जिसकी लाठी भैंस उसी की रोप्या मोट्टा चाला रै।।
निरीक्षण कमेटी नै इराक जमा दोषी नहीं पाया रै
एक तरफा हमले का अमरीका नै बिगुल बजाया रै
झूठा प्रचार फैलाया रै कहै इराक का मैं रुखाला रै।।
सारी दुनिया खड़ी कर दी मौत के आज किनारे पै
महाघोर प्रलय हो ज्यागी बुश के एक इशारे पै
फांसी लाई इराक बेचारे पै ना हो जंग का टाला रै।।
अमरीकी सेना नै जुलमी प्लान क्यों बनाया बता
सारा संसार सेना के दम पै इनै क्यों डराया बता
छल प्रपंच क्यों रचाया बता बुन मकड़ी का जाला रै।।
तेल भण्डारां पै कब्जा यो अमरीका जमाना चाहवै
सद्दाम या मानता कोण्या ज्यां इसनै भजाना चाहवै
रणबीर सिंह कराना चाहवै अमरीका का मुंह काला रै।।
वार्ता: सरतो सुबह का काम करके चारपाई पर बैठ कर अखबार पढ़ने
लगती है। अमरीका को बुश का ऐलान इराक के खिलाफ पढ़ती है तो
नफेसिंह की बहोत याद आती है। वह पढ़ती है कि अमरीका का यह दावा कि
इराक के खिलाफ जंग आतंकवाद के खिलाफ अन्तर्राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा
हैए सफेद झूठ है। यह प्रचार भी गलत है कि इराक पश्चिमी दुनिया के लिए
बड़ा भारी फौजी खतरा है। सच्चाई तो यह है कि अमरीका सभी अमन पसन्द
गरीब देशों के लिए खतरा बना हुआ है। वह पूरी दुनिया को धमका रहा हैए
शेखी खोरी दिखा रहा है और घमण्ड में चूर है। सच तो यह है कि अमरीका
के पास दुनिया के सबसे घातक हथियारों का जखीरा है। वह क्या सोचती है
भला .
इराक के खिलाफ जंग के क्यों पागल घोड़े छोड़ दिये।।
सद्दाम पै तोहमद लगाकै मुंह तोपां के क्यों मोड़ दिये।।
कब्जा करना इराक के उपर या युद्ध की जड़ मैं दीखै
तेल के बदले खून बहाना मामला गड़बड़ मैं दीखै
बम्बां की अकड़ मैं दीखै गरीब देशां के मुंह फोड़ दिये।।
आज तलक ना देखे सुने इसे हथियार पिना राखै
कहै दो दिनां मैं सीधा कर द्यूं इराक नै पंख फैला राखै
बुश नै ये देश भका राखै कइयां के बांह मरोड़ दिये।।
कहै बुश जो अमरीका चाहवै वो करकै नै दिखावै गा
सद्दाम घणा आण्डी पाकै इसनै सही सबक सिखावैगा
इराक नै धूल चटावैगा ये घाटे नफे सब जोड़ लिये।।
बगदाद तबाह करकै नै लंगोट घुमाया चाहवै सै
दानव आला रूप यौ अपणा छल तै छिपाया चाहवै सै
रणबीर नै दबाया चाहवै सै काढ़ सही निचोड़ लिये।।
वार्ता: नफेसिंह की चिट्ठी नहीं आई। सरतो को चिन्ता होने लगती
है। जंग आजकल में होने वाला है। टीण्वीण् पर परमाणु बम के खतरे की भी
बात चलती है कि सब कुछ तबाह हो जाएगा। वह नफेसिंह को बहुत याद
करती है और मन में क्या सोचती है भलारू
परमाणु बम्ब कहैं पिया दुनियां मैं तबाही मचा देगा।।
परमाणु की अग्नि मारै क्यूकर यो भगवान बचा देगा।।
धमाका होवै गरमी छाज्या शहर राख हो ज्यां जल कै
तबाह मानवता हो ज्यागी खतम जंगल होज्या बल कै
संसार बचाना होज्या रल कै अमरीका आग लगा देगा।।
धुंए की परत का काम्बल आसमान मैं आ ज्यागा
सूरज की रोशनी नै चूसै घनघोर अन्धेरा छाज्यागा
घणा बैरी ठारा खाज्यागा जीव जन्तू नै गला देगा।।
बरफ तै सीली होवै धरती उतर तै दक्षिण लहर चलै
उतर का जिब नाश होवै नहीं दक्षिण का कहर टलै
पूरा गांव और शहर गलै फेर खेती कौण उगा देगा।।
खाणे की चेन समुन्द्र मैं तहस नहस भाई हो ज्यागी
मानव पेड़ और पौध्यां की भूख में तबाही हो ज्यागी
बचे नै बीमारी माई खोज्यागी रणबीर कौण जिवादेगा।।
वार्ता: नफेसिंह को सरतो की लिखी चिट्ठी मिलती है। सरतो ने
नफेसिंह के लिए चिन्ता जताई है। वह लिखता है कि पहले हमले के बाद से
इराक पर प्रतिबन्ध लगा है। 5 लाख बच्चे भूख के कारण व बीमारी में दवाई
की कमी के कारण मर चुके हैं। पिछले हमले से ही इराक उबर नहीं पाया है।
इराक के तेल को दूसरे देशों में भेजने पर रोक है। परन्तु फिर भी लोग
सद्दाम को बहुत चाहते हैं। हां कुर्द लोग तथा एकाध सम्प्रदाय के लोग
जरूर सद्दाम को दूसरी नजर से देखते हैं। इराक के लोग व सद्दाम वे बारे
में क्या सोचते हैं वह लिख कर भेजता है।
धन.धन सै सद्दाम तनै, बुश की थामी लगाम तनै
विश्व याद करै तमाम तनै, यो तेरा नाम अमर होग्या।।
दोगली नीति अमरीका की, धौंस पट्टी अमरीका की
बुश नै डंडे का जोर दिखाया, इराक बिना बात चोर बताया
तनै संघर्ष का दौर सिखाया, यो तेरा नाम अमर होग्या।।
अमरीका की सेना भारी सै, बेशरमी चैड़े मैं दिखारी सै
इराक झुकाना आसान कड़ै, बुश तनै यो उनमान कड़ै
फांसी तै मरया सद्दाम कड़ै, उसका नाम अमर होग्या।।
सद्दाम नै हंस कै फांसी खाई, नकाब ओढण की करी मनाही
दुनिया तै दिया सही पैगाम, बुश तो चाहता तेल तमाम
अमरीका कै कसो लगाम, यो तेरा नाम अमर होग्या।।
इराकी बहादुरी दिखावैंगे, कोन्या अपना शीश झुकावैंगे
रणबीर सिंह का गाम बरोना, सिख्या मुश्किल छन्द पिरोना
अमरीका का काम घिनोना, यो तेरा नाम अमर होग्या।।
वार्ता: सद्दाम को फांसी की सजा सुनाई गई तो सरतो को बहुत बुरा
लगता है। फिर अगले दिन खबर आती है कि कोई दलीलए अपील नहीं मानी
गई और फांसी का वक्त तय कर दिया गया। 30 दिसम्बर को टीवी  पर
फांसी का सीन देखती है तो रो पड़ती है सरतो और क्या कहती है:
सद्दाम नै पूरा इराक चाहवै, नफेसिंह नहीं झूठ भकावै,
एकाध बै कुर्दां पै जुलम ढावै, याहे सै असली तसवीर गोरी।।
जनता खातर पूरी हमदर्दी, अमरीका दीखै उसनै खुदगर्जी
ब्रिटेन फ्रांस जर्मनी सारे कै, कहैं युद्ध मत थोपो म्हारे पै
कट्ठे हों सद्दाम के इशारे पै, याहे सै असली तसवीर गोरी।।
देश भीतर बंदर बांट मचाकै, कुर्दां गेल्या सद्दाम लड़वाकै
अमरीका चाहता मैं बैठूं आकै, याहे तो सै तसवीर गोरी।।
पर इराकी बहादुरी दिखावैं, कोन्या अपना शीश झुकावैं
दुनिया रोकैगी युद्ध घमसान, राम रहीम और रहमान
शान्ति का करते गुणगान, याहे सै असली तसवीर गोरी।।
अमरीका की सेना छारी सै, जुलमों सितम या ढारी सै
इराक दबाना आसान कोन्या, बुश नै यो उनमान कोन्या
रणबीर शैतान सै इन्सान कोन्या, याहे सै असली तसवीर गोरी।।
वार्ता: एक दिन बिलासपुर गांव में ज्ञान विज्ञान समिति के चर्चा मण्डल
की बैठक होती है। उसमें चर्चा अमरीका की दादागीरी पर होती है। वहां
बताते हैं कि अमरीका बनाम शेष विश्व का मामला है यह! अमरीका किसी भी
कीमत पर इराक में सरकार परिवर्तन चाहता है। सन् 1991 से अन्तहीन युद्ध
इराक के खिलाफ चलाया जा रहा है। उस युद्ध में अमरीका के लड़ाकू
विमानों और मिसाइलों ने 1,10,000 हवाई उड़ानें भरी थी और 88,500 टन
बम गिराये थे। उस युद्ध में 1,50,000 इराकी मारे गये थे। घरए अस्पताल,
स्कूल कुछ भी नहीं बख्शा था। मामला अमरीका और इराक का नहीं है।
मसला ये है कि पूरी दुनिया में अमन बराबरी और मानवता वादी मूल्यों को
स्थापित करना है या अमरीका का गलबा कायम होना है। वापिस आते हुए
सरतो अपने मन.मन में नफेसिंह को याद करती है और क्या सोचती है भला:

अमरीका मनै बतादे नै क्यों हुया इसा अन्याई तूं।।
इराक देश नै मिटाकै नै किसकी चाहवै भलाई तूं।।
खुद हथियार जखीरे लेरया ओरां पै रोक लगावै
दस साल तै पाबन्दी लाकै इराक नै भूखा मारना चाहवै
मतना इतने जुलम कमावै बणकै बकर कसाई तूं।।
जमीनी लड़ाई बिना तेरै इराक हाथ नहीं आणे का
इराक खतम करे बिना ना जमीनी कब्जा थ्याणे का
गाणा सही गाणे का क्यों दुश्मन बण्या जमाई तूं।।
खून मुंह कै लाग्या तेरै फिर अफगानिस्तान के मां
मानवता कती पढ़ण बिठादी तनै सारे जहान के मां
बची सै इन्सान के मां या खत्म करै अच्छाई तूं।।
सब देशां मैं नारे उठे जंग हमनै चाहिये ना
तेल की खातर ओ पापी लहू मानवता का बहाइये ना
आगै फौज बढ़ाइये ना बस करणी छोड़ बुराई तूं।।
वार्ता: सरतो को ज्ञान विज्ञान वालों का निमन्त्राण मिलता है रोहतक
आने काए अमरीका के खिलाफ युद्ध के विरोध में जुलूस में शामिल होने का।
सरतो अपनी सहेली सरोज के साथ मानसरोवर पार्क में पहुंच जाती है। वहां
ज्ञान विज्ञान की नेता शुभा बताती है कि हम समझते हैं कि ज्ञान और विज्ञान
का प्रयोग दुनिया को बेहतर बनाने के लिएए जरूरतों को पूरा करने में होना
चाहिये न कि उनके भविष्य को छीनने के लिए। हैरानी की बात यह है कि
युद्ध,आतंक, हिंसा और नशे का पूरी दुनिया में जाल बिछाने वाला अमरीका
दूसरे देशों को दण्डित कर रहा है, उन पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा रहा है,
तलाशियां ले रहा है और फतवे जारी कर रहा है।
एक सर्वेक्षण के अनुसार 65 प्रतिशत अमेरिका जनता सुरक्षा परिषद की
अनुमति के बिना हमले का विरोध करती है। बुश प्रशासन इराक पर व्यापक
विनाश के हथियारों को रखने और इन हथियारों के उत्पादन की सहूलियतों
को छिपाने का आरोप लगा रहा है। दूसरा झूठ है कि बिना किसी थोड़े से
सबूत के इराकी सरकार को अलकायदा से जोड़ने की कोशिश में है ताकि
उसे हमला करने का बहाना मिल सके। तीसरा झूठ यह है कि बुश ने घोषणा
की है कि इराक को उसके राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की निरंकुशता से मुक्त
कराने के लिए युद्ध की जरूरत है। इस सरकार को बदल कर इराक में
जनतंत्र  लागू करने का वायदा किया गया है।
इराक पर हमले के बहाने खोज रहा है अमरीका। मगर दुनिया की
जनता ने सड़कों पर आकर बता दिया कि हमें युद्ध नहीं चाहिये। सरतो
वापिस आ जाती है। रात को उसे सपना आता है। सुबह वह अपनी जिठानी
से सुपने का जिकर करती है। क्या बताती है भला:
के बताउं जिठानी तनै तेरा देवर सपने म्हां आया री।।
देख कै हालत उसकी आई ना पहचान के म्हां काया री।।
बिखरे बिखरे बाल थे उसके मूंछ और दाढ़ी बढ़ी हुई
ना न्हाया ना खाया दीखै चेहरे की हड्डी कढ़ी हुई
नींद एक गाड्डी चढ़ी हुई घणी चिन्ता के म्हां पाया री।।
बैठी होले न्यों बोल्या जंग के पूरे आसार होगे
सारी दुनिया युद्ध ना चाहवै अमरीकी मक्कार होगे
माणस लाखां हजार होंगे मिलकै सबने नारा लाया री।।
चीं करकै जहाज हवाई आसमान मैं आन्ता दिख्या
बटन दाब कै बम्ब गेरया पति मनै कराहन्ता दिख्या
दरद मैं चिल्लान्ता दिख्या उनै हाथ हवा मैं ठाया री।।
इतना देख कै मनै अपनी छाती पै हाथ फिरा देख्या
आंख उघड़गी मेरी घबराकै घोर अँधेरा निरा देख्या
रणबीर सिंह नै घिरा देख्या तुरत मदद कै म्हां आया री।।
वार्ता: नफेसिंह उसका दोस्त अमर और तीन.चार इराक निवासी
आपस में चरचा कर रहे हैं। नफे सिंह कहता है कि अमरीका इराक पर हमला
करके उसके तेल के श्रोतों पर कब्जा करना चाहता है और पूरे एशिया में
अमरीका हितों को आगे बढ़ाना चाहता है। सद्दाम हुसैन को हटाकर अपनी
पिट्ठू सरकार थोंपने का मंसूबा अमरीका ने बना लिया लगता है। इराक के
बाद उत्तरी कोरिया को भी सबक सिखाने का ऐलान किया है। असल में
अमरीका पूरी दुनिया में अपना गलबा कायम करना चाहता है। क्या बताया
कवि ने:
फौज के दम पै बुश नै अमरीका नम्बर एक बनाया।।
चैदहा लाख सतरा हजार का मिलट्री बेड़ा कसूत सजाया।।
चालीस तै लेकै आज ताहिं का पैंटागन का खरचा गिणाउं
उन्नीस ट्रिलियन डालर खर्चे सुनियो सब खोल सुणाउं
आगले चार साल मैं एक ट्रिलियम डालर खर्च बताउं
सारी दुनिया मुट्ठी मैं करले झुकते सबके सिर दिखाउं
बोल्या खबरदार जो किसै नै म्हारे कामां मैं रोड़ा अटकाया।।
अमरीका की सरमाये दारां की जंगी फौज रूखाल करैगी
इनके मुनाफे  बचावण नै या दुनिया नै कंगाल करैगी
इन बरगे हथियार जिनपै उनकी पूरी पड़ताल करैगी
कर दुनिया की मण्डी काबू अमरीका नै मालोमाल करैगी
पैंटागन की धौंस पै संसार के म्हां लंगोट घुमाया।।
जंग की मशीनां उपर खरचा इसनै खूब बढ़ाया आज
चार सौ बिलियन डालर का खरचा बजट बनाया आज
जिन देशां नै बी आंख उठाई उनको सबक सिखाया आज
अमरीका नै दुनिया ताहिं मानवता का पाठ पढ़ाया आज
बुश बोल्या जाहिल जगत तै विकास का सबका सिखाया।।
एक की उसे बात पर देखी खूब लड़ाई करती रै
दूजे की उसे बात पर देखी घणी बुराई करती रै
कई बै जालम फौज उसकी घणी अंघाई करती रै
दूजे के हथियार देखैं ना अपनी सफाई करती रै
रणबीर सिंह साची लिखै ना झूठा का साथ निभाया।।
वार्ता: सरतो अखबार में पढ़ती है कि 1998 से इराक को बुनियादी
तौर पर शस्त्र विहीन  कर दिया गया। इराक की व्यापक विनाश के हथियारों
की 90.95 प्रतिशत क्षमता को खत्म कर दिया गया है जिसकी पुष्टि की जा
सकती है। इसमें रासायनिकए जैविक और नाभिकीय हथियार बनाने तथा लम्बी
दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण करने वाली सभी फैक्ट्रियों से
सम्बन्ध्ति उपकरण और इन फैक्ट्रियों से बाहर आने वाले उत्पादों की भारी
संख्या शामिल है। सरतो सोचती है कि इस सबके बावजूद अमरीका क्यों अड़ा
हुआ है हमले करने पर। उसकी अपने देवर से चर्चा होती है। देवर अपने ढंग
से देखता है इस जंग को। क्या बताया भला:
जमा ज्यान तै मारे देवर अमरीका अन्याई नै।।
भाभी तेरा के खोस्या सै के दुख सरतो भरपाई नै।।
इस साल का सुणले मिलट्री का खर्च गिणाउं
बे उनमाना खर्च हुआ इन हथियारों पै दिखाउं
कमाई खून पसीने की लूटै सै अमरीका बताउ
नाश हुया सुणाउं बुश के जानै पीर पराई नै।।
इराक के म्हां के होरया सै मनै सारी खोल बतादे
क्यों बुश और सद्दाम भिड़े किसकी रोल बतादे
भाभी क्यों दुखी होरी सै बात सही तोल बतादे
किसके गलत बोल बतादे दिखा खोल बुराई नै।।
टीवी अखबार रुक्के मारैं मेरे पै क्यों कुहावै सै
आहमी साहमी कड़ै सेना एक तरफा धौंस  जमावै सै
उल्टा सुल्टा सुल्टा उल्टा इराक नै यो फंसावै सै
सब नै सबक सिखावै सै सद्दाम की कर पिटाई नै।।
हाली पानी और लंफगे हमनै लड़ते देखे थे
डाकू फीमची रणबीर धक्का करते देखे थे
सुधां खोसड़यां दूजै पै देश ना चढ़ते देखे थे
ये गुण्डे ना पुजते देखे थे चमेली धापां मां जाई नै।।
वार्ता: सरतो को चिट्ठी लिखने की तैयारी करता है नफेसिंह। वह
लिखता है कि इराक पर हमला करके अमेरिका विश्व को यह बताना चाहता है
कि कोई भी देश यदि महाशक्ति की इच्छा का उल्लंघन करने की कोशिश
करेगा तो दंड से नहीं बच सकता। बाकी यहां हम अपने बचाव की पूरी
तैयारी में हैं। तुम चिन्ता मत करनाए मगर चिट्ठी लिखती रहना। क्या लिखता
है भला:
नहीं कोए चिट्ठी आई तेरी आन्ता मेरै सबर नहीं सै।।
के होरया सै मेरी गेल्यां इसकी तनै खबर नहीं सै।।
ठीक ठाक सही सलामत सूं फिकर मेरा करिये मतना
पढ़ अखबारां नै सुबो सबेरी खामखा मैं डरिये मतना
चिन्ता गात मैं भरिये मतना आच्छा घणा फिकर नहीं सै।।
पीस्सा भेजूं तावल करकै बालकां का ध्यान करिये
दोष अमरीका का सै सारा ना ओरां की कान धरिये
तूं सद्दाम का बखान करिये आन्डी मैं कसर नहीं सै।।
ब्रिटेन और अमरीका नै सिर अपना जोड़ लिया
इटली अरब और जापान सबनै मिल तोड़ किया
भारत ने मुंह मोड़ लिया समझ आवै हसर नहीं सै।।
खाड़ी मैं किसका हुकम चलै इस बात पै जंग जारी
रणबीर ताकत देख दुनिया की बुश कै अधरंग मारी
इराक मैं उमंग भारी छोड्डी अपनी डगर नहीं सै।।
वार्तारू सरतो नफेसिंह की चिट्ठी पढ़कर क्या सोचती है भला:
कई स्वारथ साधना चाहवै अमरीका जंग की आड़ मैं।।
दुनिया नै डराना चाहवै लगा टीका सब की जाड़ मैं।।
इराक को बुश नै धुरी  बुराई की बताया आज
काल ताहिं सद्दाम बढ़िया भूण्डा क्यों दिखाया आज
इराक इरान उत्तर कोरिया एक साथ बिठाया आज
आतंकवाद के बाबू नै देखो इराक सताया आज
क्यूकर होवै तेल बंटाई फंसगे आपस की राड़ मैं।।
उसके पिट्ठू इराकी जितने सबमैं लाखां डालर बांटे
कटपुतली सरकार ताहिं उसनै अपने गुर्गे छांटे
गुप्त योजना घड़ी बताई सब ताहि बतावण तै नाटे
जिननै सवाल करया कोई वे घणी कसूती ढाला डांटे
अपणी मण्डी बधवण ताहि आग लाई देशां की बाड़ मैं।।
नब्बे मैं बम्ब बरसाकै इराक मैं लाखां लोग मार दिये
महिला बच्चे और बूढ़े बिन मौत के घाट उतार दिये
दो हजार पाउंड का बम्ब इराक पै कसूते वार किये
पाबन्दी चाली आवै जिबतै भूख नै लोग बीमार किये
अमरीका देखै स्वारथ अपना बाकी जाओ सब भाड़ मैं।।
इजराइल फिलीस्तीन नै घणी कसूती ढाल सतावै
अमरीका इजराइल का क्यों जमकै नै साथ निभावै
प्रधानमंत्राी मारया जिसनै उनै शांति पुरुष बतावै
बिन लादेन का यारी बता सद्दाम नै सबक सिखावै
कहै रणबीर भरैगी बुड़का जनता बुश की नाड़ मैं।।
वार्ता: अमरीका की पीस आन्दोलन की महिला भारी युद्ध विरोधी जलूस
में शामिल होती है। कई लाख लोगों का जलूस था। ब्रिटेन में भी उसी दिन
20 लाख से ज्यादा लोग युद्ध विरोधी आन्दोलन की पुकार पर सड़कों पर
उतर आते हैं। वह महिला बुश को एक पत्रा लिखती है। उसमें क्या लिखा
भला:
तीन झूठ बुश तेरे सबकै साहमी ल्याउंगी।।
चेहरे पीछे की कालस सबनै आज दिखाउंगी।।
पहला झूठ तनै बताया इराक के हथियारां का
ये तेरे भरे जखीरे निरीक्षण दूजे गलियारां का
तेरे तिरछे इशारयां का भेद आज बताउंगी।।
दूसरा झूठ अलकायदा की इराक गेल्यां यारी का
कोए सबूत पाया कोण्या तेरी झूठी होशियारी का
तेल की बीमारी का राज सबनै समझाउंगी।।
तीजा झूठ तेरा जालिम बताया आज सद्दाम तनै
तख्ता पलट के तरीके सोचे घटिया तमाम तनै
खुलवाई सै लगाम तनै चाबुक तेरै लगाउंगी।।
मानवता का बैरी सै तूं इसका मनै बेरा बताउं
ना अपणी बुराई देखै सद्दाम कै दिया घेरा बताउं
सारा कसूर तेरा दिखाउं रणबीर पै लिखवाउंगी।।

Sunday, 17 July 2016

gahra sankat

टांड़ पै बिठा जनता नै अम्बानी अडानी लूट रहे ॥ 
लड़ा राखी जात धर्म पै कुछ नेता खुल्ले छूट रहे ॥ 
मुठ्ठी भर तो पावैं नौकरी  कई लाख के  पैकेज थ्यावैं 
बीच बीच मैं एक दो चक्कर यु के फ़्रांस के ये लगावैं 
बाकि घने एम टेक आल्यां पै ये चपड़ासी गिरी करावैं 
बेरोजगारी बढ़ती रोजाना युवक युवती खड़े लखावैं 
अडानी जी की कंपनियों मैं कुछ तो चांदी कूट रहे ॥ 
एक तरफ विकास का नारा लगता राज दरबारों मैं 
कोण फालतू मुनाफा कमावै होड़ लगी साहूकारों मैं 
इनके तलवे चाटती सारी नहीं घणा फर्क सरकारों मैं 
संकट इसे विकास करकै आग्या किसानी परिवारों मैं 
कसूते संकट के चलते ये भरोसे जनता के टूट रहे ॥ 
अम्बानी अडानी की लूट इस संकट की जड़ मैं देखो 
छिपाने नै लड़वा जात धर्म पै मरवाते लठ कड़ मैं देखो 
हम जात धर्म पै भिड़कै नै हुए फिरते अकड़ मैं देखो 
असली नकली म्हारै बी नहीं आये सैं पकड़ मैं देखो 
कितै गोमाता कितै कुरान पै म्हारे सिर ये फुट रहे ॥ 
अमरीका बरगे देश बी लूट मैं बड्डे हिसेदार बणे रै 
उनकी पूंजी लेण नै अडानी उनके ताबेदार बणे रै 
इमरजेंसी जिसे हालत ये देश द्रोही थानेदार बणे रै 
काले धन का जिकरा कोण इन्के पहरेदार बणे रै 
भाईयो हम क्यों रोजाना पी अपमान का घूँट रहे ॥ 



Monday, 11 July 2016



कोई फैंसला नहीं हाथ म्हैं म्हारे 
आ गयी आजादी झूठ भका राखे 


हम राम नाम पै  पागल बणा  राखे 
बरसात करी ना बदल दिखा राखे



Wednesday, 29 June 2016

MODI MODI

मोदी मोदी होरी मीडिआ मैं चलाया देश नाश की राही 
सौ प्रतिशत की दे इजाजत बुला लई या अफ डी आई 
पढ़ण खातर इंतजाम थोड़े महंगी या पढ़ाई देखो 
किल्लत स्कूल जावण की हाई स्कूल दूर बनाई देखो 
पीसा कमावण की खातर या प्राइवेट शिक्षा बढ़ाई ॥ 
दिखावा विकास का करते धर्म पै देश बांटना चाहते 
अडानी अम्बानी की गोज भरैं म्हारी जमा खालीकराते
बड़ा हिस्सा चुनाव ना लड़ पावै शिक्षा की पाबंदी लगाई ॥ 
भ्र्ष्टाचार सब सीमा लांघग्या झूठा काले धन का नारा 
कितै गऊ पै कितै जात पै यो तुड़वा दिया भाईचारा 
खेती पीट दी कसूती तरियां घणे किसानां नै फांसी खाई ॥ 
कोहराम करा आरक्षण पै जाट गैर जाट मैं बांटै  रै  
एस्मा लगा कर्मचारियों पै जनतंत्र की जड़ नै काटै रै 
आच्छी ढालां बाँट कै जनता हिन्तुत्व की घंटी बजाई ॥ 

Saturday, 25 June 2016

राष्ट्रवाद का गीत---सही राम

राष्ट्रवाद का  गीत  --सही राम
यह है लाठी, यह तलवार,
बर्छी, भाला और कटार
फिर अपनी ही तो है सरकार
अब बात करो समरसता की
जय बोलो भारत माता की
000
कौन  कवि और कलावंत है
सब कांग्रेस  और वामपंथ है
मुगलों का  इतिहास पढ़ाते
राणाजी को  हैं बिसराते
न ही शिवाजी, ना सावरकर
हिंदू गौरव धूल बराबर
राष्ट्रवाद कहां चलता है
फिर साइंस में भी घपला है
ज्ञान और विज्ञान तो सारा
वेदों से ही निकला है
बाकी  जग सब कंगला  है
पर श्रेय कहां सब मिलता है
वेद, उपनिषद तीनों लोक
रोज लगानी चाहिए धोक
कालेज और युनिवर्सिटियां
सभी ज्ञान के गड्ढे हैं
बस व्यभिचार के  अड्डे हैं
सरस्वती की  धारा खोजो
बात करो अब गीता की
जय बोलो भारत माता की
0 0 0
ना रोजी-रोटी की  बात करेंगे
तुम क्या खाते हो यह देखेंगे
कहीं दाल न हो यह अरहर की
हम जांच करेंगे घर भर की
थाली और पतीली सारी
उलट-पुलट कर देखेंगे
कहीं खाया तुमने बीफ न हो
यह जांच-परख कर देखेंगे
जान की  चाहते गर तुम खैर
मत लेना तुम हमसे बैर
खान-पान, आचार-विचार
संस्कार  की  हो भरमार
लडक़ा-लडक़ी चले ना साथ
घुल-मिलकर वे करें न बात
पार्क  में, बाजारों में यही लगाए हैं हम घात
संस्कृति  के  कद्रदान हैं
अब बात करो गौमाता की
जय बोलो भारत माता की
000
बुद्धि के  जरा मंद हैं
बहुत मगर हम हुनरमंद है
अफवाहों के  हम उस्ताद
नानी सबको  दिला दें याद
जब चाहे दंगे करवा दें
भाई से भाई लड़वा दें
धर्म नहीं तो जात पर
बात नहीं बेबात पर
नफरत की  आंधी फैला दें
सोए हुए मसान जगाा दें
लव जिहाद का  रचें वितंडा
न मुर्गी, न हो चाहे अंडा
धर्मांतरण का  लेकर फंडा
जब चाहे हम चला दें डंडा
खौफ का  ऐसा हो माहौल
जात धर्म का  घातक  घोल
हम सब बोलें ऐसे बोल
हम धर्मध्वजा के  वाहक  हैं
अब बात करो इस सत्ता की
जय बोलो भारत माता की
000
राजपथ पर योग हो
जोग में सारा भोग हो
हर पार्क  में शाखा हो
हिंदू राष्ट्र  का  खाका  हो
कदम-कदम पर धोखा हो
हर प्रयोग अनोखा हो
राष्ट्र  प्रेम  तू हमसे सीख
कपट छिपाकर भोला दीख
मुंह से राम अगर तुम बोलो
छुरी जहर की  बगल में ले लो
जनता गर मांगेगी रोटी
तैयार रहे तेरी यह सोटी
सेठों पर तो रकम है मोटी
फिट कर ले तू अपनी गोटी
लूट राज की  रक्षा में सन्नद्घ रहो
अब झोली भर दो दाता की
जय बोलो भारत माता की
000
यह भारत का  झंडा है
यह राष्ट्रवाद  का  डंडा है
देशद्रोही यहां अनेक
देशभक्त हैं हम बस एक
यह केसरिया  झंडा देख
इसके  आगे कुछ  न देख
अपना है बस फंडा एक
रचें वितंडा रोज अनेक
भरमाना है एक  कला
हम हैं ऐसी बुरी बला
विरोधी तेरे मुंह में खाक
तुझे भेजते हैं हम पाक
ऐसा तेरा क र दें हाल
जीना तेरा करें मुहाल
सदियों बाद मिला है मौका
मर्जी यही विधाता की
जय बोलो भारत माता की
000
कर्ज में डूबे रहें किसान
आत्महत्या का  ले वरदान
धरती दे दो सेठों
मजदूर बना दो बेटों को
अंबानी हैं और अडानी
बाकी  दुनिया सब बेमानी
काले  धन का  वादा था
फिर सोचा तो ज्यादा था
माल्या सेठ रहें आबाद
जनता चाहे हो बर्बाद
श्री श्री है, रामदेव हैं
और न जाने कितने  देव हैं
इनकी  कृपा  बनी रहे
गांठ प्रेम की  बंधी रहे
बाकी  तो सब पोल है
मत बात करो मतदाता की
जय बोलो भारत माता की
000
अभी मसखरा आया है
अब देखो रोज तमाशे तुम
तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफिर
खाओ खील-बताशे तुुम
स्वदेशी की  है हुंकार
अमरीका की  जय-जयकार
संस्कृति  और संस्कार की 
रोज सजे है धूनी अब
काम  धंधे सब चौपट हो गए
खेती हो गयी सूनी अब
पीछे से बस लात पड़ेगी
आगे से होगी पुचकार
आखिर में बस यही दुहाई
इतना मत मारो सरकार
अब विकास का  जाप रहेगा
छुरी बगल में दाता की
जय बोलो भारत माता की
000