Wednesday, 7 January 2026

130..150

[06/01, 8:01 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 130
मॉल खजाने 
मॉल खजाने धरे रहज्यांगे , तूँ रोटी खावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
1
टैक्स की चोरी खूब करी तनै छोड़ दिया साथ सच्चाई का
बैंक के लोन डकार गया ना रहया औड़ काली कमाई का
पीस्से कित धरूं की चिंता ना विश्वास रहया सगे भाई का
गुड़गामा मैं दो फ्लैट खरीदे नाम लिखाया भरतो ताई का
कई करोड़ का मालिक फेर और पीसा पावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
2
कंजूस माखी चूस होग्या तूँ घटिया तरीके अपनावै रै
आत्म सम्मान तोड़ै हिणे का गैल कद अपना घटावै रै
अपना बैरी खुद मैं होग्या बन्द गली मैं बड़ता जावै रै
खोखला पूरा जीवन होग्या साच तनै खावण आवै रै 
घर अपने मैं तूँ पराया होग्या दखे बतलावन नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
3
भारया होग्या गैंडे बरगा नहीं नींद चैन की सोवै रै
मन का अँधेरा दुखी करै फेर दारू मैं आपा खोवै रै
एबी होग्या धुत नशे में तूँ बेउन्माना पीस्सा खोवै रै
सब किमैं तेरे धोरै फेर भी क्यों डले सुरग मैं  ढोवै रै
बालू शाही धरी तेरे साहमी मूंह मैं आवण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
4
नहीं तनै कितै भी चैन पड़ै मन में घणी उचाटी छाज्या 
नहीं दो पैग तैं काम बणै पूरी बोतल भीतर तैं खाज्या
काला धन दिमाग चढ़ा दे फेर क्यूकर मन शान्ति पाज्या
भूल भलैया बनी जिंदगी सारी उम्र न्यों ए खपाज्या 
रणबीर बरोने आला तेरे पै गीत बणावण नै तरसै।।
शुगर ब्लड प्रेशर की बीमारी तूँ कितै जावण नै तरसै।।
[06/01, 8:02 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 131
लेगे उडारी देखो
मियां बीबी रहगे ऐकले तीनो बालक लेगे उडारी देखो|
के के सपने संजोये थे जिब हुई ये संतान म्हारी देखो |
बचपन उनका सही बीते करे दीन रात काले हमनै
क्याहें की परवाह करी ना बहा पसीना पाले हमनै
पढ़न खंदाये लाड लड़ाए तनखा खर्ची सारी देखो|
कदे रुसजया कदे कुबध करै यो छोरा सबते छोटा मेरा
बड़ी छोरी हुई सयानी शादी का दुःख था मोटा मेरा
बिचली छोरी का के जिकरा वा तिनुओं मैं न्यारी देखो|
एक अम्बाला दूजी सूरत मैं परिवार अपने चला रही
ये मोबाइल साँझ सबेरी हमते रोजाना ही मिला रही
बात करें दुनिया भर की उमर बीतती जारी देखो
कई बार बहोत ऐकले मियां बीबी हम हो ज्यावें सें
झगडा करल्याँ छोटी बात पै लड़भीड़ सो ज्यावें सें
रणबीर सिंह आप बीती सै कलम मेरी पुकारी देखो
[06/01, 8:05 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 132
मैडीकल के छात्र के कत्ल के वक्त लिखी एक रागनी 
क्यों खिलता फूल तोड़ दिया घणा बुरा जमाना आग्या।।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
1
तीनों यारां नै मैना में मौज मस्ती खूब मनाई थी नींद की गोली यतेन्द्र नै बीयर बीच मिलाई थी कई दिन पहलम कत्ल की उनै स्कीम बनाई थी गल घोंटकै मार दिया आवाज कती ना आई थी   
सारी डॉक्टर कौम कै यतेंद्र यो कसूती कालस लाग्या।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
2
माता कै के बाकी रही जब खबर कत्ल की आई टेलीफोन पै बात हुई ईबीसी फेटण भी नहीं पाई कोर्स पूरा होग्या सोचै थी मैं कर दयूं इब सगाई
क्यों कत्ल हुया बेटे का ना करी कदे कोये बुराई
खुद तै चल्या गया सोनी फेर पूरे घर नै जमा ढाग्या।।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
3
क्यों यार का यार बैरी करते क्यों विचार नहीं 
दारू नशे हिंसा का रोक्या क्यों यो व्यापार नहीं 
कांफ्रेंस प्यावैं जमकै दारू न्यों होवै उद्धार नहीं 
या हिंसा ना रोकी तो बचै किसे का घरबार नहीं
दारू नशे हिंसा का पैकेज यो चारों तरफ आज छाग्या।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
4
एक औड़ नै कुआं दीखै दूजे औड़ खाई मैं धसगे
घणे जण्यां के अरमानों नै ये नाग काले डसगे
बैर ईर्ष्या लोभ मोह जनूँ तो रग रग के मैं बसगे 
हरियाणे के छोरे छोरी कसूते भंवर के मैं फ़सगे
मैडीकल ऊपर सोचो मिलकै रणबीर सवाल यो ठाग्या।।
यार नै यार का कत्ल करया मेरा दिमाग तिवाला खाग्या।।
[06/01, 8:07 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 133
हरयाणा के समाज मैं
गरीबां की मर आगी हरयाणा के समाज मैं।।
रैहवन नै मकान कडै , खावन नै नाज नहीं
पीवन नै पानी कडै , बीमार   नै इलाज नहीं
महंगाई जमा खागी हरयाणा के समाज मैं।।
कपास पीटी धान पीट दिया गेहूं की बारी सै 
गीहूं की गोली खा खा  मरगे हुई घनी लाचारी सै 
किसान की धरती जागी हरयाणा के समाज मैं।।
बदेशी  कंपनी कब्ज़ा करगी ये हिंदुस्तान मैं
लाल कालीन बिछाए किसने इनकी श्यान मैं
इतनी घनी क्यों भागी हरयाणा के समाज नै।।
महिलाओं  पै अत्याचार बढे आंख म्हारी मिचगी
दलितों के ऊपर क्यों तलवार म्हारी खिंचगी   
रणबीर की छंद छागी हरयाणा के समाज मैं।।
[06/01, 8:10 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 134
माहौल तो किमैं होना चाहिए पढ़ने और पढ़ाने का
मानस नै मानस समझै हो यो काम ईमान बचाने का
1
कमाई करकै गरीब मरले इंसानियत या मारी जा
इज्जत आबरू बचावै क्यूकर दिन धोली मैं तारी जा
इसे माहौल मैं जी कै कड़े बख्त सै किताब उठाने का।।
2
म्हारा मान सम्मान नहीं कोए हमनै मानस लांता ना
भीतरला चाहवै कुछ करना मौका कोए थ्यानता ना
समाज मैं दोयम दर्जा के फायदा आजादी ल्याने का।।
3
बाजार मैं सब किमैं बिक गया न्यों कहनियां पावैं सैं 
जिपै बस मेहनत बेचने नै ऊंपै यो तोहमद लावैं सैं 
पीसा दीन ईमान होगया ढंग बदल्या समाज चलाने का।।
4
अफसर बनकै भी मानस बनै देखो सही इंसान नहीं 
खुद की इंसानियत खो दी देखें मन का शैतान नहीं
रणबीर दिन धोली की लूट ना दीखै के फायदा इब बताने का ।।
[06/01, 8:12 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 135
क्या बताया भला---
*वन संरक्षण के कानून लगा कै जुल्म कररी सै सरकार।।*
*बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।*
1
देश भर मैं लाखां हेक्टेयर जंगल कारपोरेट ताहिं उजाड़े
सुप्रीम कोर्ट भी आंख मूंदग्या जब जंगलां के तंबू पाड़े
खोरी की झुग्गी झोंपड़ी तोड़ी हजारां लोग गए लिकाड़े
हरियाणा के शासन नै करे बहोत घणे उन गेल्याँ खाड़े
*कोरोना काल मैं बेघर करने पै ये हुक्म करे बारम्बार।।*
बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।
2
पाछले मिहने की सात तारीख नै फैंसला कोर्ट नै दोहराया
बेदाखली प्रक्रिया पूरी करो छह हफ्ते का टाइम सुनाया
खोरी गांव अरावली पर्वत के जंगलां का हिस्सा बताया
सरकारी जमीन पै अवैध कब्जा पंजाबी कानून दिखाया 
*उजाड़ कै खोरी तैं बसाने का नहीं हुक्म किया दरबार।।*
बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।
3
भूमाफिया नै ये जमीन गैर कानूनी ढंग तैं बेची कहते
सन उन्नीस सौ सत्तर तैं मजदुर बताये खोरी मैं 
रहते
उबड़ खाबड़ जमीन समतल करी दुख दर्द बहोत सहते
दुख हुआ बहोत घणा जिब देखे झोंपड़ी मकान ढहते
*कट्ठे होकै कररे मुकाबला पुलिस की होसै लाम्बी कतार।।*
बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।
4
पांच सितारा होटल बनारे  उनपै सवाल क्यों ना ठाया
फार्म हाउस भी बना राखे जिकरा तक कोण्या आया
दोभांत कानून लागू करने मैं कारण मजदूर समझ पाया
संघर्ष का रास्ता खोरी गांव नै आखिर मैं सै अपनाया
*रणबीर या लाम्बी लड़ाई सै जीतै कमेरा हारैगा साहूकार।।*
बसे फरीदाबाद मैं सालां तैं क्यों उजाड़ रही परिवार ।।
[06/01, 8:15 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 136
ठण्डी बाल
तन ढक्कन नै चादर ना घणी ठण्डी बाल चलै।
एक कून मैं पड़ रहना धरां सिर कै हाथ तलै।।
1. फुटपाथ सै रैन बसेरा घणे सुन्दर मकान थारे
दो बख्त की रोटी मुश्किल रोज बनैं पकवान थारे
दीखे इरादे बेइमान थारे सत्ते का जी बहोत जलै।।
2. होटल मैं बरतन मांजैं करैं छोटी मोटी मजूरी
थारे घरां की करैं सफाई घर अपने मैं गन्द पूरी
कद समझी या मजबूरी जाड़ी बाजैं ज्यों शाम ढलै।।
3. थारे ठाठ-बाट देख निराले हूक उठे दिल म्हारे मैं
पुल कै नीचै लेटे देखां लैट चसै उड़ै चौबारे मैं
गरम कमरे थारे मैं यो साहब मेम का प्यार पलै।।
4. म्हारी एक नहीं सुनै राम थारे महलां बास करै
इसे राम नै के हम चाटां पूरी ना कोए आस करै
रणबीर सब अहसास करै दिल मैं आग बलै।।
[06/01, 8:16 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 137
स्मार्ट गाँव 
दोहला गाम सोहने का स्मार्ट गाम बनावैंगे देखो ।।
मीडिया मैं प्रचार करा वाह वाही पावैंगे देखो ।।
पांच गाम छांटे कहते इणनै स्मार्ट बनावैंगे रै
बाक़ी साढ़े छह हजार बाट मैं जीवन बितावैंगे रै
पांच का बी ना बेरा कितने स्मार्ट हो ज्यावैंगे देखो ।।
दिल्ली मैं राष्ट्रपति नै उद्घाटन बटन दबाया 
गाम आलयाँ नै बजा ताली उनका सम्मान जताया 
दुनिया मैं खबर गई कई तरां दिखावैंगे देखो 
स्मार्ट सिटी स्मार्ट गाम बुलेट ट्रेन का नारा देखो
काला धन बैंकां खाते मैं 15 लाख आरया देखो 
साथ सबका विकास के शगूफे सुनावैंगे देखो।।
गरीब की पढ़ाई सेहत सब पढण बिठाई 
अम्बानी धोरै पहोंचा दी टैक्स लगा म्हारी कमाई
इब सबक पांच नै पिचानवै जरूर सिखावैंगे देखो ।।
[06/01, 8:18 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 138
तीज मनाया करते
पींघ घालकै  खूब झूलते हम नयों तीज मनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
1
पहरकै  सूट रंग बिरंगे सब झूलन जाया करती हे
मिलकै साम्मन  के गीत हम बहोतै गाया करती हे
देवर जयेठ  भी इधर  उधर डोलते नजर आया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
2
दो दो पटड़ी पै खडी होकै खूब ए पींघ बधान्ती बेबे   
उप्पर जा सिर घूम जांता जिब तले नै लखान्ती बेबे 
देवर जयेठ देख नज़ारे बहोतै मजाक उड़ाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
3
दो च्यार घंटे सुख की साँस थोड़ी देर लिया करती 
एक दूजी के साहमी दिल अपना खोल दिया करती  
मस्त साम्मन  का मौसम खीर हलवा बनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
4
बेरा ना कित गयी वे तीज कर याद दिल भर आवै
बाजार की भेंट चढ़े त्यौहार म्हारी ना पर बासावै
रणबीर सिंह मेहर सिंह बरगे  न्यारे छंद बनाया करते।।
छोरी बहू सब कठठी  होकै शिवाले उप्पर जाया करते।।
[06/01, 8:20 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 139
विवेक तैं सोचां
किसानो थारे बरगा विज्ञानी मनै कोए भी नहीं पाया।।
थारे अनुभव तैं थामनै खेती मैं खूब नाम कमाया।।
भैंस खरीदी जब थामनै धार काढ कै देखी बताई 
बुलध खरीदया थामनै सार काढ़ कै देखी बताई 
अगवा पिछवा हवा हिसाब हमेशा ही थामनै लगाया।।
पर मण्डी मैं जाकै बेबस विज्ञान काम नहीं आया रै
भा नै देकै मारे धरती कै जी थारा घणा दुःख पाया रै
कदे समझलयो लूट की जड़ जात्यां मैं किसान बंटाया ।।
पंजाब का किसान बोल्या आतंकवादी कैहकै पीटया 
हीर गुजर जाट मैं बाँट हरियाणे का किसान भींच्या
किसान की तोड़ एकता जात्यां पै आपस मैं भिड़ाया ।।
अम्बानी अडानी की लूट रणबीर जारी रहैगी देखो 
जात्यां मैं बंटी किसानी कितनी पिटाई सहैगी देखो 
जात पात का पहरा चश्मा विवेक चश्मा थारा बगाया ।।
[06/01, 8:21 pm] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 140
कहानी घर घर की
मरे गरीबी के बोझ तलै , तेरी बी ना कोए पार चलै  
अमीरी हमनै रोज छलै , शरीर  को कसूत सताऊँ मैं
दो घरों में जाकै मैं करूँ यो पूरा काम सफाई का
एक घर डाक्टर का सै दूजा घर वकील अन्यायी का
दोनों घरों का के जिकरा सै , मेरे पै ना कोए फिकरा सै
ख़राब सबका जिगरा सै , पेट पकड़ बैठे दिखाऊँ मैं
वकील साहब की वकालत बस इसी ए सी बतावें
ओला बोला पीसा उन धौरे धंधा कई ढाल का चालावें
घर मैं पीटता  घरआली नै , बाहर देखो शान निराली नै
बेटा ठाएँ हाँडै  दुनाली नै , के के सारी खोल सुनाऊँ मैं ||
डाक्टरनी दुखी कई बर बैठी रोंवती  वा पाई बेबे  
शौतन का दुःख झेल रही कई बै चुप कराई बेबे  
बड्डी कोठ्ठी पर दिल छोट्टे, बाहर शरीफ भित्तर खोट्टे
कुछ तो अकल के बी मोट्टे  , कई बै अंदाज लगाऊं मैं ||
घूर घूर कै देखै मने ना डाक्टर का एतबार बेबे
उसकी आँख्यां  मैं दीखे यो शैतान हरबार बेबे
डाक्टर का घर छोड़ दिया , तीजे घर मैं बिठा जोड़ लिया
काढ मने यो निचोड़ लिया रणबीर यो बख्त पुगाऊँ मैं ||
[07/01, 9:39 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 1
एक महिला के विचार

थारी याद सतावै सै , दुख बढ़ता आवै सै

कानों पर कै जावै सै, मेरी कोए ना सुनता।।

1

एक औड़  तो सती का जश्न खूब मनाया जावै सै

औरत को दूजे कांही बाजार बीच नचाया जावै  सै

जड़ै होज्या सुनवाई, इंसानियत जड़ै बताई

समाजवाद की राही, मेरी कोए ना सुनता।।

2

मुनाफा खोरी की संस्कृति जिस समाज मैं आ ज्यावै

मानवता उड़ै बचै कोन्या या जड़ मूल तैं खा ज्यावै

पूंजी का खेल बताया, नहीं समझ मैं आया

क्यों आपस मैं भिड़वाया, मेरी कोए ना सुनता।।

3

और मुनाफा चाहिए सै चाहे लाश गेरनी हो ज्यावै 

शाइनिंग दुनिया आला एयरकंडीशंड मैं सो ज्यावै

गरीब क्यों आज मरै , मेहनत भी खूब करै

क्यों उसपै इलजाम धरै,मेरी कोए ना सुनता।।

आपा धापी मचा दई भाई का भाई गल काट रहया

नएपन के नाम पै नंगापन चाला कसूता पाट रहया

जात पात की राही या, ऊंच नीच की खाई या 

क्यों मचाई तबाही या, मेरी कोए ना सुनता।।
[07/01, 9:41 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 141
अपना हरियाणा ,सबका हरियाणा 
मशीन नै तरीके बदले खेत क्यार की कमाई के ।।
बैल गाड्डी जागां बाईक बदलाव दीखैं पढ़ाई के ।।
बाईक ऊपर चढ़ कै छोरा खेत मैं जावै देखो
ज्वार काट खेत म्हं तैं भरौटा बना धर ल्यावै देखो 
भरौटे गेल्याँ और बिठावै  काम ये घणी चतराई के।।
जिसकै ट्रेक्टर कोन्या उड़ै झोटा बुग्गी आगी रै
घर का काम अर या बुग्गी बीरबानी नै खागी रै
घणखरे काम करै औरत मर्द के काम ताश खिलाई के।।
प्रवासी मजदूर पै कई का टिक्या खेत क्यार का काम 
म्हणत तैं घिण होगी चाहवै चौबीस घण्टे आराम 
दारू घर घर मैं आगी बीमारी नै करे हालात तबाही के।।
नया अपना हरियाणा जात पात छोड़ बणावांगे
मानवता का झंडा हरेक गाम शहर पहोंचावांगे
कहै रणबीर बरौने आला छंद लिखे ना अंघाई के ।।
[07/01, 9:46 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 142
मंहगाई 
आज महंगाई का म्हारे देश मैं कोए औड़ नहीं ।।
मुफतखोरी तैं भुंडी देखो दूजी कोए होड़ नहीं ।।
बेरोजगारी और गरीबी इस विकास नै बधाई
अरब पति बने ख़रब पति चले लूट की राही
किसान फांसी खावै सै नहीं होती कितै सुनाई
आज जंगल खान सबकी बीच बाजार बोली लाई
कहैं सैं विकास करांगे चलै कोए कौड़ नहीं ।।
विकास का मॉडल यो विनास मॉडल पाया देखो
सरकारी सैक्टर पै यो पीपीपी ल्या बिठाया देखो
 शिक्षा महंगी करदी गरीब खड्या लखाया देखो 
गरीब कै इलाज बिना मौत काबुलावा आया देखो 
गरीब धक्के खान्ते हांडै बची कोए ठोड़ नहीं ।।
गीता कहै कर्म करें जा मत कर फल की आस 
करया हुया नहीं मिल्या पूरा था हर पर विश्वास 
हाड़ तोड़ काम करां सां फेर बी चित क्यों उदास 
नफे भोग लिए पिछले के अगले की करले ख्यास 
मेहनतकश क्यूँ भूखा खोज्या कोए तोड़ नहीं ।।
किस्मत कै बंधा गांडली म्हारी कमाई खोसी रै
ना पूरी दी मजदूरी म्हारी नाड़ हमेशा मोसी रै
किसान लूट लिया मण्डी मैं बना नीति दोषी रै
मजदूर किसान की लूट पै उनकी ताज पोसी रै
रोला पांच पिचानवै का दूजा असली जोड़ नहीं ।।
[07/01, 9:48 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 143
चमेली पड़ौस की महिलाओं के बीच दोपहर को बात करती है । 
सभी महिलाएं महंगाई के बारे में बताती हैं । लैक्सन आगे पर महंगाई फेर 
बी कम नहीं हुई । चमेली क्या कहती है ----
वोट देवां  जिब राखते हम सही गलत का ध्यान नहीं ॥ 
नाश करैंगे वे नेता जिनकै धोरै आज ईमान नहीं ॥ 
नजर घुमा कै देख लियो नित पेड़ झूठ का फलै सै 
सच का तेल घलै दीवे मैं तो यो ज्ञान उजाला जलै सै 
सच के दायरे मैं रहकै मन नहीं हिलाया हिलै सै 
सच पै खड्या रहवै उसनै दिलां मैं जगां मिलै सै 
विचार करै बुद्धि चेतन बिन चेतन मिलै ज्ञान नहीं ॥ 
भगत सिंह का नाम सुण्या धूम मचाई हिन्द म्हारे मैं 
तेईस बरस का फांसी चढग्या सोचो कदे इस बारे मैं 
सुणो आसान बात नहीं होती या ज्यान देनी आरे मैं 
घर बार कति छोड़ दिया उसनै देश के प्रेम इशारे मैं  
म्हणत करकै दौलत पैदा करां समझे जां इंसान नहीं ॥ 
साच्ची बात कहूँ थारे तैं हम सच्चाई मंजूर करावैं 
हाथ जोड़ कहूँ थारे तैं सच का साथ जरूर निभावें 
सच्चाई पै चलना चाहिए सच्चाई का घर दूर बतावैं 
बनावटी मिलावटी की जागां इंसानियत का नूर खिलावें 
सच्चा सौदा ए बिकवावेंगे झूठ की चलै दुकान नहीं ॥ 
वो मानस ना किसे काम का जो सच पै सिर धुनै नहीं 
अपनी कमाई का हिसाब वो बैठ कै कदे बी गिनै नहीं 
वोहे मानस सदा सुख पावै सै जो बात झूठी सुनै नहीं 
आज जो ठीक नहीं वो उस परम्परा का जाल बुनै नहीं 
छुआछात की जो बात करै वो इंसान की संतान नहीं ॥
[07/01, 9:49 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 144
हरयाणा  चुनाव के मुदे जिक्र कोए ना करता रै ॥ 
सबकी सेहत ठीक रहवै हाँ भरतें क्यूँ डरता रै ॥ 
आच्छी शिक्षा मिलै सबने  इस पर कोए विचार नहीं 
पढ़ाई पढन बिठा राखी इसतैं बड़ा अत्याचार नहीं 
क्वालिटी शिक्षा का नहीं कोए सही रास्ता उभरता रै॥ 
स्वास्थ्य सेवाएं प्राइवेट मैं गरीब जा नहीं पावै यो 
सरकारी ढांचा बैठ लिया आज गरीब किट जावै यो 
मुफ्त इलाज का दावा मरीज बिना इलाज मरता रै॥ 
बिना नौकरी लम्पट बनगे अपराधों का औड़ नहीं 
पीसा चलै कै सिफारिस हाँडो जिसका जोड़ तोड़ नहीं 
जनतंत्र पढण बिठाया भ्रष्ट का ना पेटा भरता रै ॥ 
नाज सड़ै गोदामां मैं जनता भूख तैं बिलख रही 
अमीरी गरीबी पै हँसै लुआ विकास के तिलक रही 

चुनाव अजेंडा जनता क्यूँ नहीं आज उभरता  रै ॥
[07/01, 9:50 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 145
विकास कहूँ या कहूँ तबाही 
विकास कहूँ या कहूँ तबाही , बात मेरी समझ नहीं आई,
हुई क्यों गामां की इसी छिताई , दिल्ली के गाम चर्चा मैं आये ॥ 
दिल्ली का विस्तार हुआ तो अनेक गाम इसमें आये थे 
धरती अक्वायर करी इनकी घने सब्ज बाग़ दिखाए थे 
बहोत घर बर्बाद हुए , जमा थोड़े घर आबाद हुए 
पीकै दारू कई आजाद हुए , चपेट मैं युवा लड़के आये॥ 
दिल्ली तैं कोए सबक लिया ना ईब हरयाणा की बारी 
एन  सी आर  के नाम तैं इसकी बर्बादी की तैयारी 
विकास पर कोए चर्चा ना , आज पूरा पटता खर्चा ना 
इसपै लिख्या कोए पर्चा ना , बीस लाख एक किल्ले के लाये॥ 
नशे का डूंडा पाड़  दिया ये नौजवान चपेट मैं आये 
फ्री सैक्श के खोल दरवाजे युवक युवती भरमाये 
हाल करे कसूते लूटेरे नै , मचाई लूट इनै चौफेरे  नै 
बाँट जात पात पै कमेरे नै , नंबर वन के नारे लगाये ॥ 
ईको अर जेंडर फ्रेण्डली विकास समता साथ ल्यावै 
ना तो दिल्ली जैसे खाग्या न्यूए एनसीआर इसनै खावै 
बहस विकास ऊप्पर चलावां , नया  हरयाणा किसा  बणावां 
रणबीर नक्शा मिलकै खिंचावाँ ,कैसे यो हरयाणा बच पाये ॥
[07/01, 9:52 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 146
जित बी जाऊं उड़ै घणी लाम्बी लाईन लगी क्यों पावै हे ||
सरकारी मैं भीड़ या जेब प्राइवेट खाली क्यों करावै हे ||
कुपोषण प्रदूषण मिलावट कारण बड्डे बीमारी के 
इनके बढ़ते जाने से बढे हमले ज्यान हमारी के 
इसपै किसे का ध्यान नहीं कसूर बतावैं करतारी के 
पौष्टिक खाना साफ पाणी हवा राज सेहत म्हारी के 
इन पै गौर करने नै म्हारी सरकार क्यों नजर चुरावै हे ||
बीमारी हुये पाछै इलाज का ढांचा जरूरी बतावैं 
कितै स्टाफ कम कितै दवाई मरीज घणे दुःख पावैं 
नीति खागी सरकारी ढांचे नै ये प्राइवेट फूलते जावैं 
सरकार का हैल्थ बजट ये जान कई नहीं बढ़ावैं 
कसूर किसे का होवै बेबे फेर सजा और कौए पावै हे ||
मरीज और डॉक्टर आज आहमी साहमी भिड़ा राखे हे 
तीन हजार नर्स जित उड़ै आठ सौ तैं काम चला राखे हे 
उपरल्यां नै अपने चेहते चोखी जागां बिठा राखे हे 
बढ़िया डॉक्टर नर्स भी जनता की न्यों गाली खावै हे ||
डीजीज डॉक्टर और ड्रग का फार्मूला फेल हो लिया हे 
म्हारी सरकारां खातर तो यो जमा खेल हो लिया हे 
बेईमान तो राज करते ईमानदार नै जेल हो लिया हे 
रणबीर कम्प्पणी और कुछ डाक्टरों का मेल हो लिया हे 
थ्री डी का नारा दुनिया मैं शार्ट कट का राह बतावै हे||
[07/01, 9:54 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 147
दो सखियाँ हैं । चांदकौर का दो साल पहले ब्याह हो जाता है । वह जब अपने पीहर आती है तो उसे पता चलता है कि कमला और युद्धबीर जो दूसरी जात से है और उसके कालेज में पढता है ,शादी करना चाहते हैं । एक रोज दोनों सखियाँ मिलती हैं ।चाँदकौर कमला से पूछती है कि क्या सुन रही हूँ । दोनों के सवाल जवाब होते हैं :-
चाँ- कमला सुणले बात मेरी मतना रोपै चाला हे।।
क:एक बै जो मन धार लिया  कोन्या होवै टाला हे।
चाँ: म्हारे बरगी छोरी नै ना वर आपै टोहना चाहिए
क:गलत रीत बात पुराणी ना इनका मोह होना चाहिए 
चाँ: अपनी जात कुटम्ब कबिला ना कदे नाम डबोना चाहिए 
क:जातपात का झूठा रोला दिल का बढ़िया होना चाहिए 
चाँ:के टोहया तनै छैल गाभरू रंगका दीखैकाला हे
क:रूप रंग मैं के धरया सै इंसान गजब निराला हे 
चाँ:नकशक रूप रंग पै तो या दुनिया मरतीआई सै
क:बिना विचार मिलें तो फेर कोन्या भरती खाई सै
चाँ: मात पिता वर टोहवैं या दुनिया करती आई सै
क: डांगर ज्यूँ खूंटै बांधैं जणो गऊ चरती पाई सै
चाँ:बात मानले कमला बेबे टोहले बीच बिचाला हे 
क: उंच नीच देख लई सै बदलूँ कोन्या पाला हे 
चाँ: यो तेरा भूत प्रेम का थोड़े दिन मैं उतर ज्यागा 
क: एक सै मंजिल म्हारी क्योकर प्यार बिखर ज्यागा 
चाँ: बख्त की मार पड़ैगी हे वो तनै छोड़ डिगर ज्यागा 
क:बख्त गैल लडां मिलकै संघर्ष मैं प्रेम निखर ज्यागा
चाँ: जानबूझ कै मतना करै जिंदगानी का गाला हे 
क: वो मनै चाहवै सै मैं फेरूं उसकी माला हे 
चाँ: गाम गुहांड घर थारे नै जात बाहर करैगा हे 
क: बढ़िया बात नै रोकै वो गल्त विचार मरैगा हे 
चाँ: घर बार बिना ना तमनै दिन चार सरैगा हे 
क: गादड़ की मौत मरै जो एक बार डरैगा हे 
चाँ:कमला तूँ फेर पछतावैगी थारा पिटै दिवाला हे 
क: चाँदकौर क्यों घबरावै सै रणबीर म्हारा रूखाला हे 
जुलाई 1989
[07/01, 9:55 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 148
रेगुलर नौकरी 

रेगुलर नौकरी पाना कोन्या कति आसान बताऊँ मैं ||
सी ऍम ऍम  पी सब धोरै पाँच साल तैं धक्के खाऊँ मैं ||  
पहलम कहवैं थे टेस्ट पास करे पाछै तूं बताईये 
पास करे पाछै बोले पहले चालीस गये बुलाईये 
एक विजिट चार सिफरिसी दो  हजार तले आऊँ मैं ||
सरकारी नौकरी रोज तड़कै ढूंढूं सूँ अख़बार मैं 
दुखी इतना हो लिया सूँ यकिन रहया ना सरकार मैं 
एजेंट हाँडें बोली लानते कहैं चाल  नौकरी दिवाऊं मैं  ||
एम् सी ए कर राखी कहैं डेटा आपरेटर लवा देवां 
कदे कहैं नायब तसीलदार ल्या तनै बना देवां 
तिरूँ डूबूं मेरा जी होरया सै पी दारू रात बिताऊँ मैं ||
घर आली पी एच डी करै उसकी फिकर न्यारी मने 
दोनूं बेरोजगार रहे तो के बनेगी या चिंता खारी मने  
रणबीर बरोने आले तनै सुनले दुखड़ा सुनाऊँ मैं ||
[07/01, 9:57 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 149
खुद बिना छात के हांडे छात मुहैया कराने आला।।
कल्याण कानून थोड़ी सी हमें राहत दिलाने आला।।
1
हरियाणे मैं बाइस लाख निर्माण मजदूर बताये 
इनमां तैं बीस प्रतिशत बस रजिस्टर सैं हो पाये
प्रवासी मजदूरों को नहीं दफ्तर राह बताने आला।।
2
ऑन लाइन ऑफ लाइन मजदूर आज उलझाये
निर्माण मजदूर दुखी हो आज सड़कां उपर आये
संघर्ष करकै नै हुया मजदूर मांग मनाने आला।।
3
एकाध मांग मानी म्हारी बाकियों पै कर इंकार रहे 
इलाज और दूसरी मांग नाटे जो चला सरकार रहे
उन्तीस सौ करोड़ जमा ना देता सरकार चलाने आला।।
4
एक आदमी एक सुविधा इसके बाहनै हक खोसैं
बयानबाजी ये करैं झूठी रणबीर मजदूरों को कोसैं
लाल झंडे तैं न्यारा यो नहीं पाया मेर कटाने आला ।।
[07/01, 9:58 am] Dr. Ranbir Singh Dahiya: 150
भूख 
भूख बीमारी घणी कलिहारी कहैं इसका कोये इलाज नहीं।।
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।
1
भूख रूआदे भूख सुआदे भूख बिघन का काम करै
भूख सतादे भूख मरादे भूख ये जुल्म तमाम करै
कितना सबर इंसान करै उनकै माचै खाज नहीं ।।
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।
2
शरीर बिकादे खाड़े करादे भूख कति बर्बाद करै
आछे भुन्डे काम करादे मानस हुया बर्बाद फिरै
आज कौन किसे नै याद करै दीखै कोये हमराज नहीं 
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।
3
भूख पैदा करै भिखारी पैदा बड़े बड़े धनवान करै
एक नै भूख दे करकै दूजा पेट अपना बेउन्मान भरै
एक इत्तर मैं स्नान करै दूजे धोरै दो मुट्ठी नाज नहीं ।।
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।
4
लूट नै दुनिया भाइयो दो पाल्यां बिचाळै बांट दई 
मेहनत करने आला भूखा मक्कारी न्यारी छाँट दई
लूट नै सच्चाई आँट दी रणबीर सुनै धीमी आवाज नहीं ।।
बाकी सारी टहल बजारी या करै मानस का लिहाज नहीं।।